IMD ने झारखंड के कुछ हिस्सों में अगले पांच दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई है. इसमें कहा गया है कि रांची, गुमला, बोकारो, रामगढ़ और धनबाद में हल्की से मध्यम वर्षा के साथ अलग-अलग स्थानों पर गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है.
जिस तरह से मौसम ने करवट बदली है और तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है. उससे अन्य इलाकों में भी सतर्कता बरतने की जरूरत है क्योंकि अगले तीन दिनों तक बारिश की संभावना जताई जा रही है. मौसम विभाग की मानें तो इस बारिश के साथ ओलावृष्टि की भी चेतावनी दी जा रही है.
मौसम विभाग ने फल और सब्जियों पर इसके पड़ने वाले प्रभाव को लेकर जारी किए गए एडवाइजरी में कहा है कि अधिक बारिश होने के कारण खेतों में जलभराव की समस्या हो सकती है. इसके चलते सब्जियों में सड़न की शिकायत हो सकती है
रांची में सुबह से हो रही है मूसलाधार और भारी वर्षा के कारण शहर के निचले इलाकों में जल प्रलय जैसी स्थिति हो गई है. निचले इलाके में खेलने के लिए बने पार्क तालाबों में तब्दील हो गए हैं. वहीं छोटी नदियां उफान पर हैं.
रांची स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के अनुसार झारखंड में 1 जून से लेकर 26 जुलाई तक कुल 240.3 मिलीमीटर बारिश हुई है. जबकि इस अवधि के दौरान सामान्य बारिश 455.9 मिलीमीटर होती है. इस तरह से राज्य में अब तक 48 फीसदी कम बारिश दर्ज की है.
कृषि निदेशालय की तरफ से जारी किए गए हालिया अपडेट के अनुसार, राज्य में अभी तक निर्धारित लक्ष्य की तुलना में मात्र 9.82 प्रतिशत क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई और रोपाई हो पाई है. राज्य में फसलों की बुवाई को लेकर सबसे खराब स्थिति लोहरदगा जिले की है.
झारखंड के किसान इसलिए भी चिंतित हैं क्योंकि इस बार भी राज्य में 55 फीसदी से अधिक कम बारिश हुई है. रांची स्थित मौसम विज्ञान केंद्र की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार इस साल एक जून से 10 जुलाई तक राज्य में 135.6 मिली मीटर बारिश हुई है.
झारखंड की राजधानी रांची और आस-पास के जिलों में जुलाई की शुरुआत में चार दिनों में 39 एमएम बारिश दर्ज की गई है. इस तरह से जुलाई के महीने में छह दिनों में हुई बारिश ने 19 फीसदी बारिश की कमी को पूरा किया है. जुलाई महीने में इस बारिश ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है और वे धान की रोपाई कर रहे हैं. साथ ही नर्सरी भी तैयार कर रहे हैं.
मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि झारखंड में जलवायु परिवर्तन का असर हुआ है. इसके कारण वर्षा के पैटर्न में बदलाव हुआ है. पिछले 10 सालों के मॉनसून को पैटर्न को देखे तो सिर्फ दो साल की मॉनसून 15 जून के आसपास झारखंड में प्रवेश किया है
रांची स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ अभिषेक आनंद ने बताया कि इस बार झारखंड में निर्धारित समय में मॉनसून के पहुंचने की संभावना है. सामान्य तौर पर केरल में मॉनसून की दस्तक होने के बाद इसके झारखंड पहुंचने में 12 से 15 दिनों का समय लगता है. इस बार भी अनुमान लगाया जा रहा है 15 जून तक मॉनसून झारखंड में प्रवेश कर जाएगा.
राज्य में 15 मई तक बारिश के आसार हैं. इसके बाद 16 और 17 मई को मौसम साफ रहने का अनुमान लगाया गया है. 13 मई को लेकर जारी किए गए पूर्वानुमान में कहा गया है कि इस दिन राज्य के उत्तर-पूर्वी तथा दक्षिणी भागों में कहीं-कहीं पर गर्जन के साथ हल्के दर्जे की बारिश होने की संभावना है.
रांची स्थित मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार राज्य के 16 जिलों का पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया जा रहा है. धनबाद, बोकारो, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला, खरसावां, देवघर, गोड्डा, साहिबगंज और जामताड़ा में भीषण गर्मी पड़ रही है.
झारखंड में इस वक्त भयंकर गर्मी पड़ रही है. रांची और खूंटी जिले को छोड़कर राज्य के सभी जिलों में तापमान 40 डिग्री के पार दर्ज किया जा रहा है. जबकि सबसे अधिक तापमान गोड्डा समेत पाकुड़ और पूर्वी सिंहभूम में दर्ज किया जा रहा है. राज्य में हीट वेव की स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग ने सलाह जारी किया है.
रांची मौसम विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि झारखंड में फिलहाल बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव का असर देखा जा रहा है. इसका असर राज्य में यह आठ अप्रैल तक देखने के लिए मिलेगा. इसे लेकर मौसम विभाग ने सात और आठ अप्रैल के लिए राज्य के सभी जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है.
मांडर प्रखंड के एक किसान सुखदेव उरांव ने बताया कि ओलावृष्टि के कारण उनके खेत में लगी गेंहू की फसल को नुकसान हुआ है, गेहूं की बालियां झ़ड़ गई हैं. इसके अलावा मटर और तरबूज की खेती करने वाले किसानों को नुकसान हुआ है. किसान ने बताया कि ओला का आकार बड़ा था इसके कारण सब्जियों की खेती खास कर धनिया पत्ता और फूल गोभी पत्ता गोभी को नुकसान हुआ है.
झारखंड में बने मौसम से सिस्टम का असर कम हो गया है. पर इसके बाद भी 22 मार्च को भी कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बने साइक्लोनिक सर्कूलेशन का असर अब काफी कम हो गया है पर इसके बाद भी कई जिलों में हल्की बारिश और वज्रपात की आशंका बनी हुई है.
अभिषेक आनंद ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम झारखंड और इससे सटे मध्य भागों में कहीं कीं पर भारी बारिश देखने के लिए मिल सकती है. 20 मार्च पश्चिमी और दक्षिणी भागों में कहीं कही हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है. इस दौरान 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी. गर्जन वज्रपात की चेतावनी को देखने हुए इस दौरान लोगों को सुरक्षित जगहों पर रहने की अपील की गई है.
राजधानी रांची में 17 मार्च की शाम से ही बादल छाए हुए हैं. साथ ही कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी भी हुई है. वहीं 19 मार्च को राज्य के कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग की बुलेटिन के अनुसार 19 मार्च को राज्य के रांची, बोकारो, गुमला, खूंटी, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है.
रांची स्थित मौसम विज्ञान केंद्र की तरफ से जारी किए गए बुलेटिन के अनुसार झारखंड में अगले चार दिनों तक कई जिलों के लिए बारिश और वज्रपात को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है. बुलेटिन के अनुसार 16, 17, 18 और 19 मार्च को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश और वज्रपात का अलर्ट जारी किया गया है. 16 मार्च को राज्य के दक्षिणी तथा निकटवर्ती मध्य भागों में कहीं कहीं पर गर्जन के साथ वज्रपात होने की संभावना है.
झारखंड में हुई बारिश का जिक्र करते हुए अभिषेक आनंद ने कहा कि सबसे बारिश धनबाद के मैथन में दर्ज की गई. यहां पर 40 एमएम बारिश हुई. जबकि सिमडेगा में सबसे तेज रफ्तार 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं.जबकि धनबाक दे पुटकी में 38 एमएम बारिश दर्ज की गई.
मौसम विज्ञान केंद्र रांची की तरफ से राज्य के सभी 24 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. इशक साथ ही मौसम विभाग की तरफ से जारी किए मौसम बुलेटिन में बताया गया है कि चार मार्च को राज्य के सभी जिलों में हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है. चार मार्च के लिए जारी किए गए मौसम पूर्वानुमान में कहा गया है कि राज्य के गढ़वा पलामू चतरा और लातेहार जिले में आज कहीं कहीं पर ओलावृष्टि हो सकती है.
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