कपास पर ड्यूटी फ्री आयात की मियाद खत्म होते ही किसानों को राहत की उम्मीद जगी है. MSP से नीचे चल रहे दामों को सहारा मिलने की संभावना बन रही है. महीनों के विरोध के बाद आखिरकार सरकार की इच्छा के मुताबिक तय मियाद खत्म होने के बाद अब बाजार का रुख बदल सकता है. लेकिन, टेक्सटाइल इंडस्ट्री फिर से शुल्क मुक्त कपास आयात की मियाद बढ़ाने की मांग कर रही है. पढ़ें पूरा मामला...
Sarson MSP RMS 2026-27: सरसों के MSP को नाकाफी बताते हुए किसान महापंचायत ने बड़ा फैसला लिया है. अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि किसान अब 6200 रुपये प्रति क्विंटल से MSP पर सरसों नहीं बेचेंगे. उनका कहना है कि लागत और बाजार भाव के हिसाब से MSP काफी कम है.
Pyaz Mandi Bhav: महाराष्ट्र के किसान नेता भरत दिघोल ने कहा कि प्याज किसानों के लिए 2025 भारी घाटे का साल रहा. किसान संगठन का आरोप है कि उत्पादन लागत 22-25 रुपये प्रति किलो रही, जबकि बाजार भाव 8-18 रुपये के बीच रहे. अब किसान नेता ने सरकार को 2026 को लेकर पहले ही चेतावनी दी है. जानिए उन्होंने क्या कहा...
Aloo Mandi Bhav: मंडियों में नए आलू की बढ़ती आवक के साथ कीमतों में तेज नरमी देखने को मिल रही है. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि बीते हफ्तों और महीनों में औसत भाव में बड़ी गिरावट आई है. कई इलाकों में मौजूदा दाम किसानों के लिए चिंता का कारण बनते नजर आ रहे हैं.
चित्तौड़गढ़-भुसावल हाईवे पर सैकड़ों किसानों ने ट्रैक्टर और बैलगाड़ी रोककर चक्काजाम किया. किसानों का गुस्सा कपास खरीदी कम होने पर फूटा. मंडी गेट बंद करने और हाईवे जाम करने के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे. किसान मांग कर रहे हैं कि एक एकड़ में 12 क्विंटल कपास खरीदी जाए.
साल 2025 भारतीय इलायची के लिए वापसी का साल बना. बेहतर बारिश, साफ सप्लाई चेन और मजबूत निर्यात मांग से कीमतें पूरे सीजन अच्छी रहीं. किसानों को लंबे समय बाद अच्छा रिटर्न मिला. जानिए अब 2026 में कैसी स्थिति रहने की उम्मीद है...
किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने आलू के भाव को लेकर हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी को पत्र लिखा है. उन्होंने लिखा है कि राज्य की मंडियों में आलू के भाव में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सफेद आलू उत्पादक किसान गंभीर आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं.
Wheat Price: मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की मंडियों में गेहूं के दाम MSP से ऊपर बने हुए हैं. कई बाजारों में भाव ₹2600 से ₹2900 प्रति क्विंटल तक पहुंचे हैं. जानिए दोनों राज्यों की प्रमुख मंडियों में गेहूं के ताजा भाव...
पश्चिम बंगाल की जूट मिलें कच्चे जूट की रिकॉर्ड महंगाई से जूझ रही हैं. 1,10,000 रुपये प्रति टन के पार कीमत जाने से उत्पादन घट गया है. बांग्लादेश के कच्चा जूट निर्यात प्रतिबंध ने संकट और गहरा दिया है.
एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि जम्मू क्षेत्र में चल रहे खरीफ मार्केटिंग सीजन के दौरान धान की खरीद इतने क्विंटल तक पहुंच गई है, जो इस क्षेत्र में अब तक की सबसे ज्यादा खरीद है. उन्होंने बताया कि ये आंकड़ा किसानों की भागीदारी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद एक महत्वपूर्ण भागेदारी को दर्शाता है.
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