हरियाणा के करनाल में यूपी से गेहूं लेकर पहुंचे किसानों को ‘मेरी फसल, मेरा ब्योरा’ (MFMB) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन न होने के कारण बॉर्डर पर रोक दिया गया. प्रशासन ने साफ किया है कि केवल रजिस्टर्ड किसानों को ही मंडियों में प्रवेश मिलेगा, जबकि किसानों ने नियमों के लागू करने में भेदभाव और तकनीकी दिक्कतों का आरोप लगाया है.
पंजाब में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है. औसतन प्रति एकड़ 2 क्विंटल तक कम पैदावार हुई है, जिससे किसानों को करीब 5,000 रुपये प्रति एकड़ का नुकसान हो रहा है. कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल कुल उत्पादन में कमी का अनुमान है, जबकि सरकार ने खरीद नियमों में ढील देकर किसानों को राहत देने की कोशिश की है.
पंजाब के बासमती निर्यातकों ने BEDF में सुधार और पुनर्गठन की मांग उठाई है. बढ़ी हुई फीस और घटते मुनाफे से व्यापार प्रभावित हो रहा है. निर्यातकों का कहना है कि संस्था में बदलाव और बेहतर योजना से बासमती कारोबार को मजबूती मिल सकती है. सरकार से जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई गई है.
नासिक में इस साल गर्मियों के प्याज उत्पादन में करीब 29% गिरावट का अनुमान है, जिसकी वजह खेती का घटा रकबा और मौसम की मार है. हालांकि केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार देशभर में कुल उत्पादन में गिरावट के बावजूद प्याज की उपलब्धता बनी रहेगी और शॉर्टेज की स्थिति नहीं बनेगी. निर्यात में कमी और बढ़ते लॉजिस्टिक खर्च के चलते विदेशों में आपूर्ति प्रभावित हुई है, लेकिन घरेलू बाजार में स्टोरेज क्षमता के कारण कीमतों पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ने की उम्मीद है.
Potato Mandi Rate: यूपी, पश्चिम बंगाल और गुजरात की मंडियों में आलू के भाव दबाव में बने हुए हैं. ज्यादा आवक और बढ़ी सप्लाई के कारण किसानों को उम्मीद के मुताबिक रेट नहीं मिल पा रहे हैं.
पंजाब में गेहूं की आवक और सरकारी खरीद ने रफ्तार पकड़ ली है, जहां लगातार दूसरे दिन आवक 10 लाख टन से अधिक रही और 88% से ज्यादा खरीद दर्ज की गई. हालांकि, बड़ी मात्रा में अनाज अब भी बिना बिके और मंडियों में पड़ा है, जबकि उठान की धीमी रफ्तार किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा रही है. इस बीच, फसल में आग की घटनाओं और मुआवजे की मांग ने हालात को और गंभीर बना दिया है.
उत्तर प्रदेश सरकार ने गेहूं बेचने वाले किसानों को बड़ी राहत देते हुए नया आदेश जारी किया है. अब किसान बिना फार्मर रजिस्ट्री के भी सरकारी क्रय केंद्रों पर अपना गेहूं बेच सकेंगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लिया गया यह फैसला किसानों को हो रही परेशानियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है.
पंजाब के मोगा जिले की मंडियों में गेहूं की आमद बढ़ने के बावजूद खरीद प्रक्रिया धीमी होने से किसान परेशान हैं. कई किसान 7-8 दिनों से मंडियों में फसल लेकर बैठे हैं, जबकि लिफ्टिंग भी बेहद धीमी है. बारिश से प्रभावित क्वालिटी के चलते एजेंसियां सैंपल जांच के बाद खरीद का इंतजार कर रही हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.
महाराष्ट्र में अल्फांसो आम के किसानों पर इस बार दोहरी मार पड़ी है. बेमौसम बारिश से फसल प्रभावित हुई, वहीं ईरान युद्ध और हॉर्मुज स्ट्रेट में बाधा के कारण निर्यात ठप हो गया है. दुबई जैसे बड़े बाजारों में सप्लाई रुकने से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है, जबकि घरेलू बाजार में आम के दाम बढ़ने से उपभोक्ताओं की खरीद भी घट गई है.
2026-27 के मार्केटिंग सीजन में गेहूं की सरकारी खरीद सुस्त बनी हुई है, जिसकी वजह बेमौसम बारिश, देरी से कटाई और सख्त क्वालिटी मानक हैं. पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख राज्यों में खरीद कम होने से MSP अभियान प्रभावित हुआ है. हालांकि सरकार नियमों में ढील देने पर विचार कर रही है, लेकिन फिलहाल लक्ष्य के मुकाबले खरीद काफी पीछे है.
प्याज की कीमतों में गिरावट से किसान गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए हैं. लागत से कम दाम मिलने पर संगठन ने महायुति और MVA दोनों को जिम्मेदार ठहराते हुए सरकार से तुरंत हस्तक्षेप और राहत उपायों की मांग की है.
महाराष्ट्र के नासिक जिले में प्याज की थोक कीमतों में भारी गिरावट से लाखों किसान संकट में हैं. लागत से कम दाम मिलने, निर्यात ठप होने और मांग घटने के कारण किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि कई किसान बेहतर कीमत की उम्मीद में अपनी फसल रोककर बैठे हैं.
Madhya Pradesh में न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) पर गेहूं खरीदी का अभियान तेजी से जारी है. अब तक 17 हजार से अधिक किसानों से 7.75 लाख क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है और करोड़ों रुपये सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं. राज्य सरकार ने 3000 से अधिक उपार्जन केंद्रों के जरिए खरीदी प्रक्रिया को सुचारू बनाया है, जबकि लाखों किसानों ने पहले ही स्लॉट बुक कर लिया है.
Punjab के मोहाली जिले की मंडियों में गेहूं खरीद सुचारू रूप से जारी है, जहां किसानों को 17 करोड़ रुपये सीधे खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं. वहीं Jalandhar में गेहूं की क्वालिटी और कम पैदावार को लेकर किसानों ने चिंता जताई है. सरकारी एजेंसियां—PUNGRAIN, MARKFED और PUNSUP—खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने में जुटी हैं.
सिरसा के चौटाला गांव की मंडी में ई-खरीद पोर्टल की तकनीकी खराबी के कारण किसानों को गेहूं बेचने में भारी परेशानी हो रही है. सर्वर डाउन, बायोमेट्रिक फेल और नमी की समस्या से खरीद प्रक्रिया बाधित है. सैकड़ों ट्रॉलियां फंसी हुई हैं, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है और नुकसान की आशंका भी बढ़ गई है.
हरियाणा में रबी खरीद सीजन 2026-27 के तहत अब तक मंडियों में करीब 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है, जबकि लगभग 11 लाख मीट्रिक टन की ही खरीद हो पाई है. सरकार ने किसानों को 188 करोड़ रुपये सीधे उनके खातों में ट्रांसफर किए हैं. खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, जियो-फेंसिंग और कैमरों जैसी नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं.
नासिक की लासलगांव मंडी में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जहां थोक भाव करीब 30% गिरकर 775 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं. उत्पादन लागत लगभग 1800 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद किसानों को 500 से 800 रुपये में प्याज बेचनी पड़ रही है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. किसानों ने सरकार से राहत पैकेज और 1500 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान की मांग की है, जबकि कीमतों में गिरावट की वजह बढ़ती आवक और कमजोर मांग को बताया जा रहा है.
कपास किसानों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने PM AASHA योजना के तहत गैप सपोर्ट मैकेनिज्म लागू किया है. इस व्यवस्था के तहत MSP से कम दाम पर फसल बेचने पर किसानों को अंतर की राशि सीधे DBT के जरिए उनके बैंक खाते में दी जाएगी. फिलहाल इसे आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया गया है, जिससे किसानों की आय सुरक्षित रखने और बाजार में स्वतंत्र बिक्री को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
पंजाब में गेहूं खरीद को लेकर संकट गहराता जा रहा है. गुणवत्ता नियमों में ढील की मांग को लेकर खरीद एजेंसियों के कर्मचारी काम रोकने की चेतावनी दे रहे हैं. बारिश से खराब हुई फसल के कारण विवाद बढ़ा है. सरकार ने किसानों को आश्वासन दिया है, जबकि केंद्र की टीमें नुकसान का आकलन कर रही हैं.
झज्जर, मातनहेल और बादली मंडियों में गेहूं की भारी आवक के बावजूद उठान धीमा है, जिससे किसानों को परेशानी हो रही है. मंडियों में गेहूं के ढेर लग गए हैं और जगह की कमी हो रही है. खराब मौसम के कारण फसल खराब होने का डर बढ़ रहा है, वहीं किसान बिक्री में देरी से परेशान हैं.
वैश्विक रिपोर्ट्स के मुताबिक, उर्वरक सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद और बढ़ते स्टॉक के चलते मक्का के दाम में नरमी का रुख दिख रहा है. आगे कीमतों की दिशा उर्वरक आपूर्ति, कच्चे तेल और वैश्विक मांग-आपूर्ति संतुलन पर निर्भर करेगी.
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