महाराष्ट्र में प्याज की कीमतें गिरकर 50-67 पैसे प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जिससे सोलापुर के एक किसान को अपनी खड़ी फसल जलानी पड़ी. इस किसान ने माता-पिता का मन रखने के लिए इंजीनियरिंग छोड़कर खेती शुरू की थी.
महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में प्याज का बेहद कम दाम मिलने से परेशान किसान भगवान साबळे ने अपनी 600 बोरी प्याज में आग लगा दी. किसान को बाजार में प्याज का भाव सिर्फ 1 रुपये किलो मिला. लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी सही कीमत न मिलने से किसानों में भारी नाराज़गी और चिंता का माहौल है.
महाराष्ट्र के नासिक जिले में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट के विरोध में किसानों ने नंदगांव APMC के बाहर ट्रैक्टर‑भर प्याज फेंक दिया. किसानों ने APMC को भंग करने, 2,000 रुपये प्रति क्विंटल MSP तय करने और नुकसान के मुआवजे की मांग की है.
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में एक किसान को प्याज के 25 बोरे बेचने पर सिर्फ 1,262 रुपये मिले, यानी 1 रुपये प्रति किलो. ट्रांसपोर्ट और अन्य कटौतियों के बाद किसान को उल्टा पैसा देने को कहा गया. यह घटना राज्य में गहराते प्याज संकट और किसानों की बदहाली को उजागर करती है.
रायसेन जिले में गेहूं खरीदी केंद्रों पर बारदाने की कमी और अव्यवस्थाओं से नाराज किसानों ने भोपाल-विदिशा मार्ग पर चक्काजाम किया. किसानों ने पानी, छाया और सही तौल जैसी सुविधाओं की कमी का आरोप लगाया. कई गांवों के किसान प्रदर्शन में शामिल हुए और प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की.
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में नई गेहूं खरीद नीति मुश्किलों में घिर गई है. निजी कंपनियां गेहूं खरीदने में असफल रही हैं, जबकि किसान सरकारी रेट कम होने से नाराज हैं. बैंकिंग दिक्कतों, बाजार में बढ़ती कीमतों और सरकारी सख्ती के कारण खरीद व्यवस्था लगभग ठप हो गई है, जिससे किसानों और सरकार दोनों की चिंता बढ़ गई है.
महाराष्ट्र में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट के चलते किसानों की हालत गंभीर बनी हुई है. किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहे हैं. किसान संगठन ने ₹1500 प्रति क्विंटल सब्सिडी की मांग करते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि राहत नहीं मिली तो आंदोलन होगा.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ निर्देश दिए हैं कि किसानों को MSP से नीचे फसल बेचने की नौबत न आए. राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) को तेजी से खरीद बढ़ाने और 72 घंटे के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया है.
देश में गेहूं और चावल का भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, लेकिन इसके बावजूद किसानों को उनकी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार FCI के गोदामों में अनाज जरूरत से लगभग तीन गुना ज्यादा है, वहीं गेहूं, धान, मक्का, दालें और तिलहन MSP से नीचे बिक रहे हैं. रबी फसलों की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है, मगर खरीद की धीमी रफ्तार ने किसानों को खुले बाजार में औने‑पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर कर दिया है. बढ़ती लागत और गिरती कीमतों के बीच किसान भारी आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं, जबकि MSP का वादा जमीनी स्तर पर खोखला साबित हो रहा है.
मध्य प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद तेजी से जारी है. अब तक 39 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है और किसानों को 6490 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है. सरकार ने समय सीमा बढ़ाने, तौल कांटे बढ़ाने और क्वालिटी मानकों में राहत देकर किसानों को बड़ी सुविधा दी है.
देश में चावल की सरकारी खरीद लक्ष्य से अधिक हो गई है, जिससे भंडार काफी बढ़ गया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ज्यादा स्टॉक के कारण बाजार में चावल की कीमतों में गिरावट आ सकती है. सरकार की बिक्री नीति और मांग की स्थिति आने वाले समय में कीमतों को प्रभावित कर सकती है.
तेलंगाना के महबूबाबाद और रंगारेड्डी जिलों में धान खरीद केंद्रों पर इंतजार कर रहे दो किसानों की मौत हो गई. एक किसान की जान बिजली गिरने से गई, जबकि दूसरे की मौत लू लगने से होने की आशंका है. वहीं नलगोंडा समेत कई जिलों में ओलावृष्टि और बारिश से हजारों क्विंटल धान भीग गया, जिससे खरीद में देरी को लेकर किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है.
अचानक बारिश ने लुधियाना की गिल रोड अनाज मंडी की तैयारियों की पोल खोल दी. मंडी में पर्याप्त शेड (छत) न होने के कारण किसानों को अपनी कटी हुई गेहूं की फसल को बचाने के लिए काफी परेशानी झेलनी पड़ी.
ओडिशा में आम सीजन की शुरुआत किसानों के लिए खुशखबरी लेकर आई है. इस बार आम की कीमत में करीब 80% बढ़ोतरी हुई है, जिससे किसानों की आय में अच्छा इजाफा हुआ है. पहली खेप सफल रहने के बाद अब 500 टन व्यापार का लक्ष्य रखा गया है, जिससे किसानों का आत्मविश्वास और मजबूत हुआ है.
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि शुरुआत में स्लॉट बुकिंग को लेकर किसानों को परेशानी हो रही थी, लेकिन अब इस समस्या का समाधान कर लिया गया है. सिस्टम को तेज किया गया है और अधिकांश किसानों के स्लॉट बुक हो चुके हैं.
राजस्थान में चना किसानों को MSP पर पूरी उपज खरीद का वादा पूरा नहीं होने से भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. किसान महापंचायत ने दालों की खरीद में तय SOP के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से हस्तक्षेप की मांग की है. किसानों का कहना है कि 40 क्विंटल की सीमा के कारण उन्हें अपनी उपज कम दाम पर बेचनी पड़ रही है, जिससे प्रति किसान 2.5 से 3 लाख रुपये तक का नुकसान हो रहा है.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खरगोन जिले के गेहूं खरीद केंद्र का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और किसानों से बातचीत की. सरकार ने खरीद प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई सुविधाएं बढ़ाई हैं, वहीं विपक्ष ने मुख्यमंत्री के दावों और कामकाज पर सवाल उठाए हैं.
दिल्ली सरकार ने रबी सीजन में गेहूं खरीद के नियमों में ढील देकर किसानों को बड़ी राहत दी है. अब खराब क्वालिटी वाला गेहूं भी MSP पर खरीदा जाएगा, जिससे बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को नुकसान से बचने में मदद मिलेगी. केंद्र की मंजूरी के बाद यह फैसला लागू किया गया है और इससे हजारों किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है.
इंडोनेशिया के नए आयात नियमों ने भारत की मूंगफली निर्यात को प्रभावित किया है. सख्त गुणवत्ता मानकों और GAP सर्टिफिकेट की अनिवार्यता के कारण निर्यात में रुकावट आ सकती है. अगले 3–6 महीनों तक सप्लाई प्रभावित रहने की संभावना है, जिससे कीमतों में 60–80% तक बढ़ोतरी हो सकती है और व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत के ड्राई फ्रूट बाजार पर दिख रहा है. ईरान से सप्लाई कम होने के कारण पिस्ता और खजूर के दाम 10–20% तक बढ़ गए हैं. शिपिंग दिक्कतों और महंगे ट्रांसपोर्ट से बाजार दबाव में है. आने वाले महीनों में कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है.
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