मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खरगोन जिले के गेहूं खरीद केंद्र का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और किसानों से बातचीत की. सरकार ने खरीद प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई सुविधाएं बढ़ाई हैं, वहीं विपक्ष ने मुख्यमंत्री के दावों और कामकाज पर सवाल उठाए हैं.
दिल्ली सरकार ने रबी सीजन में गेहूं खरीद के नियमों में ढील देकर किसानों को बड़ी राहत दी है. अब खराब क्वालिटी वाला गेहूं भी MSP पर खरीदा जाएगा, जिससे बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को नुकसान से बचने में मदद मिलेगी. केंद्र की मंजूरी के बाद यह फैसला लागू किया गया है और इससे हजारों किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है.
इंडोनेशिया के नए आयात नियमों ने भारत की मूंगफली निर्यात को प्रभावित किया है. सख्त गुणवत्ता मानकों और GAP सर्टिफिकेट की अनिवार्यता के कारण निर्यात में रुकावट आ सकती है. अगले 3–6 महीनों तक सप्लाई प्रभावित रहने की संभावना है, जिससे कीमतों में 60–80% तक बढ़ोतरी हो सकती है और व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत के ड्राई फ्रूट बाजार पर दिख रहा है. ईरान से सप्लाई कम होने के कारण पिस्ता और खजूर के दाम 10–20% तक बढ़ गए हैं. शिपिंग दिक्कतों और महंगे ट्रांसपोर्ट से बाजार दबाव में है. आने वाले महीनों में कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है.
आंध्र प्रदेश के कुरनूल में प्याज की कीमतें लागत से नीचे गिर गई हैं, जिससे किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं. निर्यात रुकने और मांग घटने से हालात ऐसे हैं कि किसान फसल फेंकने को मजबूर हैं.
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मक्का किसानों की खराब स्थिति पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने पत्र में किसानों को उचित कीमत और खरीद सुनिश्चित करने के लिए बड़े कदम उठाने की अपील की है.
केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने रायसेन में गेहूं खरीदी व्यवस्था की समीक्षा कर अधिकारियों को किसानों की सुविधा सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए. उन्होंने खरीदी केंद्र बढ़ाने, स्लॉट बुकिंग आसान बनाने और समय पर भुगतान पर जोर दिया, ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो.
पंजाब की मंडियों में इस साल गेहूं की खरीद में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. MSP ज्यादा होने के कारण निजी व्यापारी दूसरे राज्यों से सस्ता गेहूं खरीद रहे हैं. इससे सरकारी खरीद 99% तक पहुंच गई है. निजी भागीदारी घटने से बाजार में असंतुलन बन रहा है और किसान पूरी तरह सरकारी खरीद पर निर्भर होते जा रहे हैं.
कपास बाजार में तेज मांग के बीच CCI ने इस सीजन में खरीदे गए स्टॉक का आधे से ज्यादा हिस्सा बेच दिया है. कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद मिलों और व्यापारियों की खरीद बनी हुई है, जिससे बाजार की स्थिति मजबूत बनी हुई है.
जब किसान घाटे में था तब उद्योग जगत खामोश रहा, लेकिन जैसे ही किसान की मेहनत की वाजिब कीमत मिलने का समय आया, ड्यूटी फ्री आयात की लॉबिंग शुरू हो गई. असल में, आज जो विदेशी कपास हमें सस्ता लग रहा, वो दरअसल हमारे भविष्य की गुलामी का निवेश है. जब हमारे खेत सूने पड़ जाएंगे और मिलों के पहिए विदेशी सप्लायर्स के रहमोकरम पर घूमेंगे, तब हमें अहसास होगा कि हमने चंद रुपयों के मुनाफे के लिए अपनी 'रीढ़ की हड्डी' ही तोड़ दी है.
हरियाणा के करनाल में यूपी से गेहूं लेकर पहुंचे किसानों को ‘मेरी फसल, मेरा ब्योरा’ (MFMB) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन न होने के कारण बॉर्डर पर रोक दिया गया. प्रशासन ने साफ किया है कि केवल रजिस्टर्ड किसानों को ही मंडियों में प्रवेश मिलेगा, जबकि किसानों ने नियमों के लागू करने में भेदभाव और तकनीकी दिक्कतों का आरोप लगाया है.
पंजाब में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है. औसतन प्रति एकड़ 2 क्विंटल तक कम पैदावार हुई है, जिससे किसानों को करीब 5,000 रुपये प्रति एकड़ का नुकसान हो रहा है. कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल कुल उत्पादन में कमी का अनुमान है, जबकि सरकार ने खरीद नियमों में ढील देकर किसानों को राहत देने की कोशिश की है.
पंजाब के बासमती निर्यातकों ने BEDF में सुधार और पुनर्गठन की मांग उठाई है. बढ़ी हुई फीस और घटते मुनाफे से व्यापार प्रभावित हो रहा है. निर्यातकों का कहना है कि संस्था में बदलाव और बेहतर योजना से बासमती कारोबार को मजबूती मिल सकती है. सरकार से जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई गई है.
नासिक में इस साल गर्मियों के प्याज उत्पादन में करीब 29% गिरावट का अनुमान है, जिसकी वजह खेती का घटा रकबा और मौसम की मार है. हालांकि केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार देशभर में कुल उत्पादन में गिरावट के बावजूद प्याज की उपलब्धता बनी रहेगी और शॉर्टेज की स्थिति नहीं बनेगी. निर्यात में कमी और बढ़ते लॉजिस्टिक खर्च के चलते विदेशों में आपूर्ति प्रभावित हुई है, लेकिन घरेलू बाजार में स्टोरेज क्षमता के कारण कीमतों पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ने की उम्मीद है.
Potato Mandi Rate: यूपी, पश्चिम बंगाल और गुजरात की मंडियों में आलू के भाव दबाव में बने हुए हैं. ज्यादा आवक और बढ़ी सप्लाई के कारण किसानों को उम्मीद के मुताबिक रेट नहीं मिल पा रहे हैं.
पंजाब में गेहूं की आवक और सरकारी खरीद ने रफ्तार पकड़ ली है, जहां लगातार दूसरे दिन आवक 10 लाख टन से अधिक रही और 88% से ज्यादा खरीद दर्ज की गई. हालांकि, बड़ी मात्रा में अनाज अब भी बिना बिके और मंडियों में पड़ा है, जबकि उठान की धीमी रफ्तार किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा रही है. इस बीच, फसल में आग की घटनाओं और मुआवजे की मांग ने हालात को और गंभीर बना दिया है.
उत्तर प्रदेश सरकार ने गेहूं बेचने वाले किसानों को बड़ी राहत देते हुए नया आदेश जारी किया है. अब किसान बिना फार्मर रजिस्ट्री के भी सरकारी क्रय केंद्रों पर अपना गेहूं बेच सकेंगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लिया गया यह फैसला किसानों को हो रही परेशानियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है.
पंजाब के मोगा जिले की मंडियों में गेहूं की आमद बढ़ने के बावजूद खरीद प्रक्रिया धीमी होने से किसान परेशान हैं. कई किसान 7-8 दिनों से मंडियों में फसल लेकर बैठे हैं, जबकि लिफ्टिंग भी बेहद धीमी है. बारिश से प्रभावित क्वालिटी के चलते एजेंसियां सैंपल जांच के बाद खरीद का इंतजार कर रही हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.
महाराष्ट्र में अल्फांसो आम के किसानों पर इस बार दोहरी मार पड़ी है. बेमौसम बारिश से फसल प्रभावित हुई, वहीं ईरान युद्ध और हॉर्मुज स्ट्रेट में बाधा के कारण निर्यात ठप हो गया है. दुबई जैसे बड़े बाजारों में सप्लाई रुकने से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है, जबकि घरेलू बाजार में आम के दाम बढ़ने से उपभोक्ताओं की खरीद भी घट गई है.
2026-27 के मार्केटिंग सीजन में गेहूं की सरकारी खरीद सुस्त बनी हुई है, जिसकी वजह बेमौसम बारिश, देरी से कटाई और सख्त क्वालिटी मानक हैं. पंजाब और हरियाणा जैसे प्रमुख राज्यों में खरीद कम होने से MSP अभियान प्रभावित हुआ है. हालांकि सरकार नियमों में ढील देने पर विचार कर रही है, लेकिन फिलहाल लक्ष्य के मुकाबले खरीद काफी पीछे है.
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