महाराष्ट्र सरकार ने प्याज की गिरती कीमतों से निपटने और किसानों को राहत देने के लिए विशेषज्ञ उपसमिति बनाई है. समिति कीमत गिरने के कारणों, निर्यात नीति के असर और प्याज वैल्यू चेन की समीक्षा करेगी. रिपोर्ट 15 दिन में सरकार को सौंपी जाएगी.
भारत ने असम के तेजपुर से GI टैग प्राप्त एक टन लीची का निर्यात दुबई को किया है. यह लीची अपनी मिठास, लाल रंग और खुशबू के लिए प्रसिद्ध है. इस कदम से पूर्वोत्तर भारत के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिली है और किसानों के लिए बेहतर आय और नए निर्यात अवसर खुले हैं.
केंद्र सरकार ने NAFED और NCCF के जरिए होने वाली प्याज खरीद में क्वालिटी शर्तों को आसान बना दिया है. नए नियमों के तहत ग्रेड A प्याज के आकार की सीमा बढ़ाई गई है और ‘URS’ श्रेणी शुरू की गई है. इस फैसले से खासकर नासिक के किसानों को राहत मिलेगी और अधिक मात्रा में प्याज की खरीद संभव हो सकेगी.
रबी खरीद सीजन 2026-27 में गेहूं की सरकारी खरीद 17% बढ़कर 3.5 करोड़ टन से अधिक पहुंच गई है. सरकार ने 3.45 करोड़ टन के लक्ष्य को भी पार कर लिया है. पंजाब, मध्य प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में खरीद में जबर्दस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई. रिकॉर्ड खरीद से किसानों को MSP का लाभ मिला है और देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी.
महाराष्ट्र में प्याज किसानों का विरोध तेज हो गया है. किसानों ने न्यूनतम 3000 रुपये प्रति क्विंटल की गारंटीशुदा कीमत की मांग को लेकर पुणे-नासिक हाईवे जाम किया. महंगाई, कम दाम और कमजोर मॉनसून की आशंका से किसान संकट में हैं.
मध्य प्रदेश में सरकारी गेहूं खरीद बंद होने के बाद मंडियों में किसानों को एमएसपी मिलना मुश्किल हो गया है. कई मंडियों में गेहूं 500 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका, जबकि तय समर्थन मूल्य 2585 रुपये है. ज्यादातर मंडियों में मॉडल कीमतें एमएसपी से नीचे दर्ज की जा रही हैं.
भारत में गेहूं की सरकारी खरीद ने इस साल नया रिकॉर्ड बनाया है. 31 मई तक 3.49 करोड़ टन गेहूं की खरीद हो चुकी है, जो सरकार के संशोधित लक्ष्य से अधिक है. पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश ने इसमें अहम योगदान दिया. रिकॉर्ड खरीद के बाद एफसीआई के भंडार में गेहूं का स्टॉक बफर मानक से काफी ऊपर पहुंच गया है.
महाराष्ट्र में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट से किसान संकट में हैं. कई जगह किसानों को 50 पैसे से 2 रुपये प्रति किलो के भाव मिल रहे हैं, जो लागत से काफी कम है. मौसम और एक्सपोर्ट पॉलिसी को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है.
महाराष्ट्र में प्याज किसानों की हालत बेहद खराब हो गई है, जहां बीड के एक किसान को अपनी उपज मात्र 50 पैसे प्रति किलो के भाव पर बेचनी पड़ी. राज्य भर की मंडियों में प्याज के दाम 1-2 रुपये किलो तक गिर गए हैं. आर्थिक संकट से जूझ रहे किसान सड़कों पर उतर आए हैं और उचित दाम की मांग कर रहे हैं.
देशभर की मंडियों में मक्का के भाव अब भी MSP से काफी नीचे चल रहे हैं. मई में कुछ राज्यों में हल्की तेजी जरूर आई, लेकिन किसानों का कहना है कि मौजूदा दामों पर लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है. ऐसे में खरीफ सीजन में मक्का का रकबा प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.
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