त्योहारी सीजन से पहले भारत में चीनी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है. पिछले एक महीने में चीनी 10% से अधिक महंगी होकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. कम स्टॉक, सीमित सप्लाई और बढ़ती मांग के कारण अगले कुछ महीनों तक कीमतों में नरमी की संभावना कम है. उद्योग ने सरकार से महंगाई पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की मांग की है.
केंद्र सरकार ने 30 जुलाई से URS श्रेणी के प्याज की खरीद बंद कर केवल A-ग्रेड प्याज की खरीद जारी रखने का फैसला किया है. इसके बाद महाराष्ट्र के किसानों और व्यापारियों ने खरीद प्रक्रिया में धांधली के आरोप लगाते हुए NAFED और NCCF की खरीद की स्वतंत्र जांच की मांग की है.
केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत दी है. अब MSP पर गर्मी की मूंग और उड़द की खरीद के दौरान आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन फेल होने पर किसान अपने नॉमिनी प्रतिनिधि के जरिए उपज बेच सकेंगे. भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में ही जाएगा.
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की प्रमुख मंडियों में टमाटर के थोक भाव में गिरावट का सिलसिला जारी है. कई मंडियों में कीमतें पिछले साल के मुकाबले काफी नीचे बनी हुई हैं. अलग-अलग मंडियों में टमाटर के ताजा भाव 540 रुपये से 3,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किए गए हैं.
एक ओर भारत 2025-26 में दलहन आयात पर करीब 47-48 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मूंग किसानों को अपनी फसल MSP पर बेचने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है. जुलाई में अधिकांश राज्यों में मूंग के दाम MSP से 1,000 से 2,500 रुपये प्रति क्विंटल तक नीचे रहे. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब तूर, उड़द और मसूर की 100 प्रतिशत खरीद संभव है तो मूंग को इससे बाहर क्यों रखा गया है?
केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक के लिए प्याज की खरीद कीमत बढ़ाकर 2,335 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है. यह इस सीजन में छठी बढ़ोतरी है. सरकार अब केवल ग्रेड-A प्याज खरीदेगी, जबकि 3 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले अब तक करीब 1.05 लाख टन खरीद ही हो सकी है.
मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी के दौरान फर्जी किसानों के जरिए करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है. आरोप है कि असली किसानों के खसरा नंबरों का इस्तेमाल कर फर्जी पंजीयन किए गए और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से गेहूं की बिक्री दिखाकर भुगतान हासिल कर लिया गया. भिंड और राजगढ़ समेत कई जिलों में जांच शुरू हो गई है, जबकि पटवारियों, समिति प्रबंधकों और अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है.
जून 2026 में टमाटर के थोक दाम मजबूत रहने के बाद जुलाई में बाजार का रुख बदल गया. नई आवक बढ़ने से देशभर की मंडियों में कीमतों पर दबाव आया और जुलाई के चौथे हफ्ते तक औसत थोक भाव करीब 16.6% गिर गया.
भारत में प्याज के थोक दाम लगातार मजबूत बने हुए हैं. 26 जुलाई 2026 को औसत मंडी भाव 2,012.69 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले 51.5% अधिक है. हालांकि कीमतें जुलाई 2024 के रिकॉर्ड स्तर से अभी भी नीचे हैं.
केंद्र सरकार ने ग्रीष्मकालीन मौसम 2025-26 के लिए मध्य प्रदेश को 4.54 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीद की मंजूरी दी है, जो देशभर में स्वीकृत कुल खरीद का 87 प्रतिशत है. राज्य सरकार ने बंपर उत्पादन को देखते हुए खरीद लक्ष्य 8.06 लाख मीट्रिक टन करने की मांग की है.
हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 के लिए मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) लागू करते हुए प्रोसेसिंग ग्रेड आम, खट्टे फल और सी-ग्रेड सेब की सरकारी खरीद को मंजूरी दे दी है. योजना के तहत आम, किन्नू, माल्टा, संतरा और सी-ग्रेड सेब, गलगल खरीद की जाएगी.
देशभर की मंडियों में कई प्रमुख फसलों के भाव MSP से नीचे दर्ज किए गए हैं. गेहूं, मक्का, मूंग, रागी, बाजरा, अरहर और अन्य फसलों के कम दाम से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. ताजा मंडी आंकड़ों में MSP और बाजार भाव के बीच बड़ा अंतर सामने आया है, जिससे किसानों की आय पर असर पड़ रहा है.
कर्नाटक के कोलार जिले में टमाटर किसानों के बाद अब आम उत्पादक भी भारी संकट में हैं. बाजार में आम के दाम गिरने और लागत बढ़ने से किसान वर्षों पुराने बाग काटने को मजबूर हो गए हैं. किसानों का कहना है कि उन्हें लागत तक नहीं मिल रही, जबकि किसान संगठनों ने सरकार से उचित मूल्य और राहत पैकेज की मांग की है.
त्योहारी सीजन से पहले भारत में चीनी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है. पिछले एक महीने में चीनी 10% से अधिक महंगी होकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. कम स्टॉक, सीमित सप्लाई और बढ़ती मांग के कारण अगले कुछ महीनों तक कीमतों में नरमी की संभावना कम है. उद्योग ने सरकार से महंगाई पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की मांग की है.
केंद्र सरकार ने 30 जुलाई से URS श्रेणी के प्याज की खरीद बंद कर केवल A-ग्रेड प्याज की खरीद जारी रखने का फैसला किया है. इसके बाद महाराष्ट्र के किसानों और व्यापारियों ने खरीद प्रक्रिया में धांधली के आरोप लगाते हुए NAFED और NCCF की खरीद की स्वतंत्र जांच की मांग की है.
केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत दी है. अब MSP पर गर्मी की मूंग और उड़द की खरीद के दौरान आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन फेल होने पर किसान अपने नॉमिनी प्रतिनिधि के जरिए उपज बेच सकेंगे. भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में ही जाएगा.
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की प्रमुख मंडियों में टमाटर के थोक भाव में गिरावट का सिलसिला जारी है. कई मंडियों में कीमतें पिछले साल के मुकाबले काफी नीचे बनी हुई हैं. अलग-अलग मंडियों में टमाटर के ताजा भाव 540 रुपये से 3,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किए गए हैं.
एक ओर भारत 2025-26 में दलहन आयात पर करीब 47-48 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मूंग किसानों को अपनी फसल MSP पर बेचने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है. जुलाई में अधिकांश राज्यों में मूंग के दाम MSP से 1,000 से 2,500 रुपये प्रति क्विंटल तक नीचे रहे. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब तूर, उड़द और मसूर की 100 प्रतिशत खरीद संभव है तो मूंग को इससे बाहर क्यों रखा गया है?
केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक के लिए प्याज की खरीद कीमत बढ़ाकर 2,335 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है. यह इस सीजन में छठी बढ़ोतरी है. सरकार अब केवल ग्रेड-A प्याज खरीदेगी, जबकि 3 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले अब तक करीब 1.05 लाख टन खरीद ही हो सकी है.
मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी के दौरान फर्जी किसानों के जरिए करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है. आरोप है कि असली किसानों के खसरा नंबरों का इस्तेमाल कर फर्जी पंजीयन किए गए और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से गेहूं की बिक्री दिखाकर भुगतान हासिल कर लिया गया. भिंड और राजगढ़ समेत कई जिलों में जांच शुरू हो गई है, जबकि पटवारियों, समिति प्रबंधकों और अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है.
जून 2026 में टमाटर के थोक दाम मजबूत रहने के बाद जुलाई में बाजार का रुख बदल गया. नई आवक बढ़ने से देशभर की मंडियों में कीमतों पर दबाव आया और जुलाई के चौथे हफ्ते तक औसत थोक भाव करीब 16.6% गिर गया.
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