आंध्र प्रदेश सरकार का दावा है कि एनडीए शासन में राज्य ने 74 लाख टन धान खरीदकर नया रिकॉर्ड बनाया है. 31,000 करोड़ रुपये की खरीद में 11 लाख से ज्यादा किसानों को 95 फीसदी भुगतान 24 घंटे के भीतर किया गया.
छत्तीसगढ़ सरकार ने रायगढ़ जिले के 33,017 किसानों को 113.47 करोड़ रुपये की अग्रिम सहायता, खाद और बीज उपलब्ध कराए हैं.समय पर मिली इस मदद से खरीफ फसलों की बुवाई तेज हुई है और किसानों में बेहतर उत्पादन की उम्मीद बढ़ी है.
महाराष्ट्र में किसानों के विरोध के बीच केंद्र सरकार ने प्याज की खरीद कीमत बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है. हालांकि 50 दिनों में 7 बार रेट बढ़ाने के बावजूद किसान NAFED और NCCF को प्याज बेचने को तैयार नहीं हैं. किसानों का कहना है कि खुले बाजार और APMC मंडियों में बेहतर भाव मिल रहा है, जबकि सरकारी रेट उत्पादन लागत के मुकाबले कम है. इससे सरकार का प्याज बफर स्टॉक लक्ष्य खतरे में पड़ गया है और बरसात के दौरान कीमतों में संभावित उछाल की चिंता बढ़ गई है.
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भेरूंदा में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का बड़ा प्रदर्शन हुआ.2 हजार से अधिक ट्रैक्टरों और 10 हजार किसानों ने 100% मूंग खरीदी की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. किसानों ने ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने की मांग की और 9 जुलाई को भोपाल-नागपुर हाईवे जाम व विधानसभा घेराव की चेतावनी दी.
एमपी में मूंग खरीदी का विवाद गहराया. सरकार की 40% खरीद की नीति को नकारते हुए किसान अब 100% MSP पर खरीद की मांग कर रहे हैं. 6 जुलाई को प्रदेश भर में बड़े प्रदर्शन और रेल रोको आंदोलन की तैयारी, किसान अपने साथ राशन-तंबू लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को तैयार.
मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। 25% खरीदी के फैसले के खिलाफ 6 जुलाई को हरदा में रेल रोको और भैरुंदा में ट्रैक्टरों के साथ बड़े आंदोलन की तैयारी है। किसान 100% समर्थन मूल्य पर खरीदी, ई-टोकन व्यवस्था खत्म करने और अन्य मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
केंद्र सरकार ने मूल्य स्थिरीकरण बफर के लिए प्याज का खरीद मूल्य 13 प्रतिशत बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. नई कीमत 4 जुलाई 2026 से लागू हो गई है. एनएएफईडी और एनसीसीएफ के जरिए खरीद जारी है. देश में 2025-26 के दौरान प्याज उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है.
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मक्का उत्पादक किसानों की समस्या उठाई है. उन्होंने कहा कि MSP ₹2,410 प्रति क्विंटल होने के बावजूद किसानों को करीब ₹1,800 या उससे कम कीमत मिल रही है. सांसद ने NAFED और NCCF के जरिए MSP पर खरीद शुरू कराने की मांग की है.
Bajra Price: अल नीनो संकट के बीच कृषि मंत्री द्वारा धान के स्थान पर कम पानी वाली बाजरे जैसी फसलें उगाने की सलाह दी जा रही है. जबकि 81 महीनों में बाजरे का बाजार भाव एमएसपी से नीचे है. ऐसे में कोई किसान शौक से बाजरे की बुवाई नहीं करेगा. किसानों के लिए बाजरे की खेती मजबूरी वाली ही रहेगी.
देश में मक्का का औसत थोक भाव जून 2026 में 1,942.54 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि मक्का का MSP 2,410 रुपये प्रति क्विंटल है. अधिकांश राज्यों में किसानों को MSP से काफी कम दाम मिल रहे हैं. लगातार कमजोर बाजार भाव के कारण किसानों का मक्का की खेती से भरोसा घट रहा है.
तमिलनाडु के मदुरै में तोतापुरी (किली मूकू) आम का खेत स्तर पर भाव घटकर सिर्फ 3 रुपये प्रति किलो रह गया है. लागत भी नहीं निकलने से किसान फसल पेड़ों पर ही छोड़ने और बाग काटने को मजबूर हैं.
नारियल तेल और खोपरा की कीमतों में पिछले साल के रिकॉर्ड स्तर से अब बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. बाजार में बदले हालात का असर किसानों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं तीनों पर पड़ रहा है. आखिर किन वजहों से कीमतों में यह बदलाव आया और आगे क्या रुख रह सकता है, जानिए...
जून 2026 के चौथे हफ्ते में देश की थोक मंडियों में प्याज के दाम मजबूत हुए. राष्ट्रीय औसत भाव बढ़कर 2,074.98 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया. महाराष्ट्र में साप्ताहिक आधार पर सबसे बड़ी 24.1% तेजी दर्ज हुई, जबकि मध्य प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात और कर्नाटक में भी तेज उछाल दिखा. किसानों को कुछ राहत मिली है, लेकिन मुनाफे वाले स्तर के भाव अभी नहीं बने हैं.
हरियाणा के करनाल जिले की मंडियों में जायद (समर) मक्का की आवक बढ़कर 3.58 लाख क्विंटल से ज्यादा पहुंच गई है, लेकिन MSP पर खरीद नहीं होने से किसान नाराज हैं. किसानों का आरोप है कि 2,410 रुपये प्रति क्विंटल MSP घोषित होने के बावजूद उन्हें निजी व्यापारियों को 1,100 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर फसल बेचनी पड़ रही है.
सरकार द्वारा प्याज की खरीद कीमत (MAPP) तीन बार बढ़ाने के बावजूद 2026 के बफर स्टॉक के लिए खरीद की रफ्तार धीमी बनी हुई है. 1 जून से अब तक केवल 2,000 टन प्याज की खरीद हो पाई है, जो 2 लाख टन के लक्ष्य का सिर्फ 1 प्रतिशत है. नेफेड और NCCF जैसी एजेंसियां तय लक्ष्य से काफी पीछे हैं. व्यापारी और किसान दोनों ही मौजूदा कीमतों से असंतुष्ट हैं—जहां उच्च क्वालिटी का ‘ग्रेड A’ प्याज बेहतर दाम पर निर्यात हो रहा है, वहीं किसान ज्यादा कीमत की उम्मीद में स्टॉक रोक रहे हैं. खराब मौसम से क्वालिटी प्रभावित होने के साथ-साथ सरकार भी कीमत और बढ़ाने से हिचक रही है, जिससे आने वाले महीनों में सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ सकता है.
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