देश में प्याज का उत्पादन जरूरत से कहीं ज्यादा है, फिर भी बाजार में दाम 50-60 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं. इसकी बड़ी वजह हर साल 80-90 लाख टन प्याज का खराब होना, कमजोर स्टोरेज व्यवस्था और बेमौसम बारिश से बढ़ी सड़न है. जानिए प्याज की कीमतों के पीछे का पूरा गणित.
प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. मूल्य स्थिरीकरण योजना के तहत नाफेड और एनसीसीएफ द्वारा खरीदे गए 840 टन बफर स्टॉक प्याज को महाराष्ट्र के लासलगांव से दिल्ली भेजा जा रहा है. सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए 35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज बेचने का फैसला किया है. हालांकि लोडिंग में देरी के कारण प्याज से भरी ट्रेन की रवानगी में थोड़ा समय लग सकता है. दिल्ली पहुंचने के बाद इसका असर बाजार भाव पर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है.
जब प्याज 2 रुपये किलो बिका तब किसानों का कोई माई-बाप नहीं था, लेकिन अब जब चार पैसे कमाने की उम्मीद जागी है तो सरकार दाम गिराने के लिए बाजार में कूद पड़ी है. जब खुले मार्केट में प्याज का दाम 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुका है, तब सरकार बफर स्टॉक का प्याज सिर्फ 35 रुपये में बेचने की फुर्ती दिखा रही है. लेकिन सवाल यह उठता है कि ऐसी ही फुर्ती चीनी के लिए क्यों नहीं दिखा रही? क्या इसलिए क्योंकि देश की बहुत सारी चीनी मिलें रसूखदार नेताओं की हैं?
प्याज के दाम में सुधार के बीच महाराष्ट्र प्याज उत्पादक किसान संगठन ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है. भारत दिघोले ने कहा कि सरकारी हस्तक्षेप से किसानों के भाव गिराए गए तो महाराष्ट्र, दिल्ली समेत देशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा.
देशभर की कृषि उपज मंडियों में प्याज के थोक भाव में तेजी जारी है. अगस्त के चौथे सप्ताह में औसत भाव 3,820.58 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया, जो पिछले सप्ताह से 14 फीसदी और एक महीने पहले से करीब 44 फीसदी ज्यादा है.
चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने कच्ची चीनी के आयात नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब TRQ के तहत आयातित कच्ची चीनी को दो महीने के भीतर रिफाइन कर घरेलू बाजार में बेचना होगा. सरकार के इस कदम का उद्देश्य चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाना और त्योहारों से पहले बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना है.
चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी ने बाजार में कई सवाल खड़े कर दिए हैं. दावा है कि नवंबर 2025 में करीब 3,500-3,600 रुपये प्रति क्विंटल रहे चीनी के दाम जून 2026 तक 3,800 रुपये और अगस्त में 6,500 रुपये तक पहुंच गए. इस बढ़ोतरी के पीछे कमी का माहौल बनाने और करीब 22 हजार करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का दावा किया जा रहा है.
देश में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं और महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में खुली चीनी 75-80 रुपये किलो तक पहुंच गई है. विशेषज्ञों के मुताबिक गन्ने के रकबे और उत्पादन में कमी, महाराष्ट्र में घटती पेराई अवधि और कारोबारियों की जमाखोरी कीमत बढ़ने की प्रमुख वजह हैं.
अगस्त 2026 में देश की प्रमुख मंडियों में मक्के के थोक भाव में मिलाजुला रुख देखने को मिला. दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि उत्तराखंड, तमिलनाडु और हरियाणा में सालाना आधार पर दबाव बना रहा. देश का औसत थोक भाव 2,151.07 रुपये प्रति क्विंटल रहा.
प्याज की बढ़ती कीमतों से आम लोगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार अपना पूरा बफर स्टॉक खुदरा बाजार में उतारने पर विचार कर रही है. इस बार बफर स्टॉक के लिए लक्ष्य से काफी कम खरीद हुई है, जबकि खुदरा बाजार में प्याज 50 रुपये किलो तक पहुंच गया है. कमजोर खरीद, मॉनसून की अनिश्चितता और खरीफ फसल की देरी ने बाजार में महंगाई की चिंता बढ़ा दी है.
मध्यप्रदेश में चीनी के दामों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. पिछले 20 दिनों में शक्कर करीब ₹20 महंगी होकर ₹65 प्रति किलो तक पहुंच गई है. व्यापारियों को आशंका है कि त्योहारों से पहले भाव ₹70 के पार जा सकते हैं, जिससे मिठाई के दाम भी 10 से 15% तक बढ़ने की संभावना है.
बेंगलुरु के KR पुरम में व्यापारियों से कथित अवैध वसूली के खिलाफ अखिल कर्नाटक किसान एवं व्यापारी महासंघ ने अनोखा प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी बोरे पहनकर रात में पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे. व्यापारियों ने 700-800 दुकानों से 200 से 500 रुपये और केले विक्रेताओं से 10 हजार रुपये तक ‘रोल कॉल’ के नाम पर वसूली का आरोप लगाया और कार्रवाई की मांग की.
देशभर की मंडियों में अगस्त 2026 के दौरान प्याज के थोक दामों में तेजी देखने को मिली है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मणिपुर में प्याज का औसत थोक भाव 6,260 रुपये प्रति क्विंटल के साथ सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया, जबकि मेघालय, केरल और तमिलनाडु में भी कीमतें 3,800 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर रहीं. मासिक आधार पर मणिपुर में 37.6%, आंध्र प्रदेश में 31.3%, ओडिशा में 27.7% और तेलंगाना में 27% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. मांग बढ़ने और आपूर्ति दबाव के चलते अधिकांश राज्यों में प्याज की कीमतों में तेजी बनी हुई है.
RBI की स्टडी के मुताबिक 100 रुपये की खुदरा कीमत में टमाटर किसान को 33.5 रुपये, प्याज किसान को 36.2 रुपये और आलू किसान को 36.7 रुपये मिलते हैं. जानें TOP सब्जियों की पूरी सप्लाई चेन में पैसा कहां जाता है...
रूस-यूक्रेन लड़ाई के कारण काला सागर क्षेत्र से सूरजमुखी तेल की आपूर्ति प्रभावित हो गई है. इसके चलते भारत ने विकल्प के तौर पर सोया तेल का आयात बढ़ा दिया है. अगस्त में सोया तेल का आयात 6 लाख टन से अधिक पहुंचने की संभावना है, जो सामान्य स्तर से काफी ज्यादा है. विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति संकट, महंगा क्रूड ऑयल और जैव ईंधन की बढ़ती मांग के कारण त्योहारी सीजन में खाद्य तेलों के दाम बढ़ सकते हैं.
अगस्त 2026 में सोयाबीन के थोक भाव मजबूत रहे. छत्तीसगढ़ में मासिक आधार पर 21.8% की सबसे बड़ी तेजी दर्ज हुई, जबकि देश का औसत भाव 6,867 रुपये प्रति क्विंटल रहा. जानिए राज्यवार सोयाबीन के ताजा होलसेल रेट.
महाराष्ट्र के लासलगांव और पिंपलगांव APMC में लगातार बारिश के कारण प्याज की आवक में भारी कमी आई है. सप्लाई घटने से लासलगांव में पिछले पांच कारोबारी दिनों में थोक कीमतें 25% बढ़कर 2,760 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई हैं, जबकि पिंपलगांव में भी छह दिनों में करीब 28% की तेजी दर्ज की गई है.
Potato Farmers News: उत्तर प्रदेश सरकार ने आलू किसानों को राहत देने के लिए भंडारण शुल्क में ₹1 प्रति किलोग्राम की छूट का प्रावधान किया है. यह राशि डीबीटी के जरिए किसानों के खातों में भेजी जाएगी. इसके लिए ₹1,000 करोड़ का बजट रखा गया है. वहीं, भावांतर भुगतान के तहत भी किसानों को आर्थिक मदद मिलेगी.
जुलाई 2026 में देशभर की मंडियों में सरसों के दाम अलग-अलग राज्यों में अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं. राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में सरसों 7,300 से 7,500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रही है, जबकि छत्तीसगढ़ में येलो ब्लैक सरसों का भाव 11,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया. जानिए कहां कितनी तेजी और कहां कमजोरी देखने को मिली.
मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों की परेशानी एक बार फिर बढ़ गई है. सरकार और किसानों के बीच 60% कोटा यानी प्रति एकड़ 3 क्विंटल मूंग खरीदी पर सहमति बनी थी, लेकिन किसानों का आरोप है कि खरीदी केंद्रों पर 3 क्विंटल की जगह सिर्फ 2.88 क्विंटल की तुलाई हो रही है.
देश की धान खरीद व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. जहां पंजाब में सरकारी धान खरीद 9.7 फीसदी घट गई है, वहीं तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने खरीद में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है. विशेषज्ञों का मानना है कि धान खरीद का पारंपरिक भूगोल बदल रहा है और दक्षिणी राज्यों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है.
उत्तर प्रदेश के कन्नौज, कानपुर, मैनपुरी समेत आलू बेल्ट के लाखों किसान गिरते दामों से परेशान हैं. कोल्ड स्टोरेज में लाखों मीट्रिक टन आलू रखे होने के बावजूद किसानों को लागत तक नहीं मिल रही है. किसानों ने सरकार से समर्थन मूल्य, राहत पैकेज और मुआवजे की मांग की है. इस मुद्दे पर विपक्ष ने भी सरकार को घेरा है, जबकि राज्य मंत्री असीम अरुण ने कृषि मंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है.
ऑस्ट्रेलिया में समय पर हुई बारिश और उर्वरक-ईंधन की आपूर्ति को लेकर चिंता कम होने से 2026 की गेहूं फसल का अनुमान बढ़ा है. राबोबैंक ने उत्पादन का अनुमान 2.13 करोड़ टन से बढ़ाकर 3 करोड़ टन तक कर दिया है. वैश्विक गेहूं सप्लाई पर दबाव के बीच ऑस्ट्रेलिया इंडोनेशिया, फिलीपींस और अन्य आयातक देशों के लिए अहम सप्लायर बन सकता है.
क्रिसिल की ताजा ‘रोटी राइस रेट’ रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों में बढ़ोतरी से शाकाहारी थाली की लागत 4% बढ़कर 28.1 रुपये हो गई. हालांकि सालाना आधार पर सब्जियों और दालों की कीमतों में गिरावट के कारण शाकाहारी और मांसाहारी दोनों थालियां पिछले साल की तुलना में सस्ती बनी हुई हैं.
एमपी और यूपी की मंडियों में 9 अगस्त को गेहूं की कीमतें गुणवत्ता और वैरायटी के अनुसार अलग-अलग रहीं. कई मंडियों में मॉडल भाव 2,600 रुपये के पार पहुंचा, जबकि कुछ स्थानों पर भाव 2,250 से 2,400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किए गए.
देश में जुलाई 2026 के दौरान प्याज की थोक कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला. तेलंगाना, कर्नाटक, बिहार, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में भाव 40 फीसदी तक बढ़े, जबकि औसत थोक कीमत 2,532 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई. जानिए किन राज्यों में प्याज सबसे महंगा और सबसे सस्ता रहा.
त्योहारी सीजन से पहले भारत में चीनी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है. पिछले एक महीने में चीनी 10% से अधिक महंगी होकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. कम स्टॉक, सीमित सप्लाई और बढ़ती मांग के कारण अगले कुछ महीनों तक कीमतों में नरमी की संभावना कम है. उद्योग ने सरकार से महंगाई पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की मांग की है.
केंद्र सरकार ने 30 जुलाई से URS श्रेणी के प्याज की खरीद बंद कर केवल A-ग्रेड प्याज की खरीद जारी रखने का फैसला किया है. इसके बाद महाराष्ट्र के किसानों और व्यापारियों ने खरीद प्रक्रिया में धांधली के आरोप लगाते हुए NAFED और NCCF की खरीद की स्वतंत्र जांच की मांग की है.
केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत दी है. अब MSP पर गर्मी की मूंग और उड़द की खरीद के दौरान आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन फेल होने पर किसान अपने नॉमिनी प्रतिनिधि के जरिए उपज बेच सकेंगे. भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में ही जाएगा.
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की प्रमुख मंडियों में टमाटर के थोक भाव में गिरावट का सिलसिला जारी है. कई मंडियों में कीमतें पिछले साल के मुकाबले काफी नीचे बनी हुई हैं. अलग-अलग मंडियों में टमाटर के ताजा भाव 540 रुपये से 3,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किए गए हैं.
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