पंजाब में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होने से ठीक पहले आढ़तियों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया है, जिससे मंडियों में खरीद और अन्य काम प्रभावित हो सकते हैं. कमीशन बढ़ाने और नियमों में बदलाव की मांग को लेकर शुरू हुई इस हड़ताल से किसानों को परेशानी होने की आशंका है.
ईरान युद्ध के चलते बारदाने (पीपी बैग) की कमी होने से मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी बार-बार टल रही है. इससे किसान अपनी फसल बेच नहीं पा रहे हैं और खुले में रखे गेहूं को लेकर चिंता बढ़ गई है, जबकि सरकार को भंडारण और सप्लाई की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.
Potato Mandi Price: आलू बाजार में इस बार उल्टा ट्रेंड देखने को मिला, जहां कम आवक के बावजूद दाम टूट गए. पिछले साल इसी अवधि में करीब तीन गुना ज्यादा आवक के बावजूद कीमतें मजबूत थीं, जबकि इस साल कई राज्यों में सालाना आधार पर 40-50% तक गिरावट दर्ज की गई है.
पंजाब में 1 अप्रैल 2026 से गेहूं की खरीद 2,585 रुपये प्रति क्विंटल MSP पर शुरू होगी. राज्य ने 132 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य तय किया है और मंडियों, भंडारण और परिवहन के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं, ताकि किसानों को समय पर भुगतान और सुचारू खरीद सुनिश्चित हो सके.
महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मेलघाट में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और मक्का की फसल को भारी नुकसान हुआ है. किसान मुआवजे और मंडी में जल्द खरीदी की मांग कर रहे हैं.
Tomato Mandi Rate: मार्च 2026 में टमाटर की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. चौथे हफ्ते में हालात और बिगड़े और कई मंडियों में भाव लागत से नीचे पहुंच गए. 27 मार्च को भी कीमतों पर दबाव बना रहा और आवक बढ़ने से बाजार कमजोर रहा.
महाराष्ट्र में प्याज की कीमतें ₹300 से ₹800 प्रति क्विंटल तक गिर गई हैं, जबकि लागत ₹1500 से ऊपर बताई जा रही है. इस अंतर ने किसानों को भारी नुकसान में धकेल दिया है. अब संगठन ने सरकार से तुरंत बाजार हस्तक्षेप योजना लागू करने की मांग उठाई है.
पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ने से भारत में खाद्य तेल आयात प्रभावित हुआ है. रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च में आयात घटा है और खरीदार नई खरीद टाल रहे हैं. इससे घरेलू बाजार में सोयाबीन की मांग बढ़ी है और किसानों को MSP से ऊपर दाम मिलने लगे हैं.
मासिक आधार पर गेहूं के दामों में गिरावट का दबाव साफ दिखाई दे रहा है. औसत भाव 2503 रुपये पर आ गया है. मंडियों में 1200 से रुपये तक गिर गया है. 25 मार्च को कई राज्यों में कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि कुछ जगहों पर हल्की बढ़त भी देखने को मिली.
हरियाणा में 28 मार्च से सरसों और 1 अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू होगी, लेकिन इस बार मंडी व्यवस्था बदली रहेगी. फसल बिक्री के लिए बायोमेट्रिक पहचान अनिवार्य होगी और गेट पास से लेकर नीलामी तक की प्रक्रिया डिजिटल सिस्टम से जुड़ी रहेगी.
धौलपुर जिले की कृषि मंडी में हालात काफी खराब हो गए हैं. यहां किसानों को अपनी फसल बेचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इससे नाराज होकर किसानों ने मंडी प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया.
Pulses Price: देशभर में 1 से 19 मार्च के बीच बड़ी संख्या में मंडियों में चना, तुअर, मूंग और अन्य दालों के दाम MSP से नीचे दर्ज किए गए. कुछ चुनिंदा बाजारों को छोड़ दें तो किसानों को घोषित समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पाया, जिससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है.
महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी में रबी प्याज के दाम 1300 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर बने हुए हैं, जबकि खरीफ प्याज के भाव गिरकर 900 रुपये तक पहुंच गए हैं. उत्पादन लागत 1800 रुपये होने से किसान नुकसान में हैं और सरकार से सहायता की मांग कर रहे हैं.
ईरान–इजराइल संघर्ष का असर भारत के प्याज बाजार पर साफ दिख रहा है. LPG सप्लाई बाधित होने से होटल और रेस्टोरेंट बंद हो रहे हैं, जिसके कारण प्याज की खपत तेजी से घटी है. इस वजह से कर्नाटक में प्याज के दाम गिरकर 6–12 रुपये प्रति किलो रह गए हैं और किसान लागत मूल्य भी नहीं निकाल पा रहे. बढ़ी सप्लाई, महंगी बोरियां और नासिक की तुलना में कम कीमत मिलने से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है. किसान सरकार से MSP और तत्काल खरीद जैसे राहत उपायों की मांग कर रहे हैं.
ईरान संकट के चलते भारत में सेब आयात रुक गया है, जिससे बाजार में सप्लाई घट गई है और कश्मीर के सेबों को बेहतर दाम मिलने लगे हैं. मौजूदा समय में घाटी के सेब ऊंचे भाव पर बिक रहे हैं और किसानों को राहत मिल रही है.
हैदराबाद में BRS ने मक्का किसानों के समर्थन में प्रदर्शन कर सरकार पर लापरवाही के आरोप लगाए. नेताओं ने कहा कि MSP न मिलने और खरीद व्यवस्था न होने से किसान मजबूरी में सस्ते दाम पर फसल बेच रहे हैं, इसलिए सब्सिडी, मुआवजा और सरकारी खरीद तुरंत शुरू की जाए.
महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में केले उगाने वाले किसान इस समय बहुत ही कठिन स्थिति में हैं. किसान दिग्गविजय मोरे बताते हैं कि पहले उन्हें एक किलो केले का 20 से 25 रुपये में मिलता था. लेकिन अब, युद्ध और अंतरराष्ट्रीय संकटों के कारण, उन्हें प्रति किलोग्राम केवल 5 से 9 रुपये मिल रहे हैं. यह सीधे किसानों की मेहनत पर चोट है. उन्होंने 6 एकड़ में खेती की थी और 10 लाख रुपये खर्च किए थे.
खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव का असर अब महाराष्ट्र के जालना जिले के तरबूज उत्पादक किसानों पर साफ दिखाई दे रहा है. ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच युद्ध जैसी स्थिति के कारण खाड़ी देशों में निर्यात पूरी तरह प्रभावित हुआ है. रमज़ान में बढ़ी उम्मीदों के बावजूद किसानों को केवल 7 रुपये प्रति किलो के आसपास भाव मिल रहे हैं. उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है. स्थानीय मंडियों में तरबूज की आवक बढ़ने से कीमतें और गिरी हैं. किसान सरकार से राहत और बाजार समर्थन की मांग कर रहे हैं.
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