कई महीनों की गिरावट के बाद लहसुन के थोक दामों में हल्की रिकवरी जरूर दिख रही है, लेकिन किसानों को अब भी राहत नहीं मिली है. प्रमुख उत्पादक राज्यों में भाव पिछले साल से काफी नीचे हैं. आगे कीमतें टिकेंगी या नहीं, पढ़ें रिपोर्ट...
ईरान में जारी उथल-पुथल और व्यापार बाधाओं के चलते भारत में बासमती चावल की कीमतों में गिरावट आई है. निर्यात जोखिम बढ़ने से आने वाले हफ्तों में दाम और टूट सकते हैं.
खोपरा की कीमतों में मजबूती के कारण नारियल तेल के दाम ऊंचे बने हुए हैं. MSP में बढ़ोतरी, वैश्विक उत्पादन में कमी और निर्यात मांग ने छोटे व्यापारियों और मिल मालिकों की चिंता बढ़ा दी है.
सरकार ने किसानों और चावल निर्यातकों के लिए एक अच्छा फैसला लिया है. चावल निर्यातकों के लिए मंडी फीस में छूट को एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है, जिसका मकसद राज्य में चावल निर्यात को बढ़ावा देना है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर किसानों को "धोखा देने" का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि राज्य के किसानों को सरकारी मंडियों में अपना धान बेचने के लिए सर्दियों में खुले आसमान के नीचे रातें बिताने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
Soyabean Mandi Bhav: देशभर में किसानों को एक बार फिर एमएसपी से नीचे सोयाबीन बेचनी पड़ रही है. ज्यादातर राज्यों में कीमतें एमएसपी से काफी नीचे हैं. जानिए नवंबर और दिसंबर 2025 में किसानों को सोयाबीन का क्या भाव और अब जनवरी में क्या हाल है...
इस वर्ष भी पिछले साल की तरह आलू की अच्छी उपज होने की संभावना है. उत्पादन में बढ़ोतरी के कारण इस राज्य से देश के अन्य राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी आलू की आपूर्ति की जाती है. वहीं, इसको लेकर सूचना और जनसंपर्क विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी गई है.
Maize Price: पिछले साल सुस्ती के बाद मक्का निर्यात में वापसी के संकेत मिले हैं. उत्पादन बढ़ने और कीमतें अनुकूल होने से विदेशी मांग सुधरी है. अप्रैल-अक्टूबर में शिपमेंट 20 प्रतिशत बढ़ा है.
मक्का के बढ़ते उत्पादन और सरकारी दावों के बावजूद किसानों को सही दाम नहीं मिल पा रहा है. MSP 2400 रुपये होने के बाद भी बाजार भाव 2100 रुपये के आसपास अटके हैं. सालाना आधार पर 10 से 35 प्रतिशत तक गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है.
Gehu Mandi Bhav: गेहूं के दाम अब ऊंचाई से उतरने लगे हैं. अक्टूबर से दिसंबर 2025 के आंकड़े बताते हैं कि थोक बाजारों में लगातार नरमी बनी हुई है. बड़े उत्पादक राज्यों में कीमतें सालाना और मासिक दोनों आधार पर नीचे आई हैं.
महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट आई है. 15 दिनों में दाम ₹1000 तक टूटे, जिससे नासिक जिले के किसानों को 200 करोड़ रुपये तक नुकसान का अनुमान है.
दिसंबर में भारत के पाम ऑयल आयात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की खरीद में तेज उछाल देखने को मिला. सर्दियों की मांग, घरेलू तेलों की उपलब्धता और कीमतों ने बाजार की दिशा बदल दी है. आगे जनवरी में तस्वीर बदल सकती है.
कपास पर ड्यूटी फ्री आयात की मियाद खत्म होते ही किसानों को राहत की उम्मीद जगी है. MSP से नीचे चल रहे दामों को सहारा मिलने की संभावना बन रही है. महीनों के विरोध के बाद आखिरकार सरकार की इच्छा के मुताबिक तय मियाद खत्म होने के बाद अब बाजार का रुख बदल सकता है. लेकिन, टेक्सटाइल इंडस्ट्री फिर से शुल्क मुक्त कपास आयात की मियाद बढ़ाने की मांग कर रही है. पढ़ें पूरा मामला...
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