देश की धान खरीद व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. जहां पंजाब में सरकारी धान खरीद 9.7 फीसदी घट गई है, वहीं तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने खरीद में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है. विशेषज्ञों का मानना है कि धान खरीद का पारंपरिक भूगोल बदल रहा है और दक्षिणी राज्यों की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है.
उत्तर प्रदेश के कन्नौज, कानपुर, मैनपुरी समेत आलू बेल्ट के लाखों किसान गिरते दामों से परेशान हैं. कोल्ड स्टोरेज में लाखों मीट्रिक टन आलू रखे होने के बावजूद किसानों को लागत तक नहीं मिल रही है. किसानों ने सरकार से समर्थन मूल्य, राहत पैकेज और मुआवजे की मांग की है. इस मुद्दे पर विपक्ष ने भी सरकार को घेरा है, जबकि राज्य मंत्री असीम अरुण ने कृषि मंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है.
ऑस्ट्रेलिया में समय पर हुई बारिश और उर्वरक-ईंधन की आपूर्ति को लेकर चिंता कम होने से 2026 की गेहूं फसल का अनुमान बढ़ा है. राबोबैंक ने उत्पादन का अनुमान 2.13 करोड़ टन से बढ़ाकर 3 करोड़ टन तक कर दिया है. वैश्विक गेहूं सप्लाई पर दबाव के बीच ऑस्ट्रेलिया इंडोनेशिया, फिलीपींस और अन्य आयातक देशों के लिए अहम सप्लायर बन सकता है.
क्रिसिल की ताजा ‘रोटी राइस रेट’ रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई में टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों में बढ़ोतरी से शाकाहारी थाली की लागत 4% बढ़कर 28.1 रुपये हो गई. हालांकि सालाना आधार पर सब्जियों और दालों की कीमतों में गिरावट के कारण शाकाहारी और मांसाहारी दोनों थालियां पिछले साल की तुलना में सस्ती बनी हुई हैं.
एमपी और यूपी की मंडियों में 9 अगस्त को गेहूं की कीमतें गुणवत्ता और वैरायटी के अनुसार अलग-अलग रहीं. कई मंडियों में मॉडल भाव 2,600 रुपये के पार पहुंचा, जबकि कुछ स्थानों पर भाव 2,250 से 2,400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किए गए.
देश में जुलाई 2026 के दौरान प्याज की थोक कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला. तेलंगाना, कर्नाटक, बिहार, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में भाव 40 फीसदी तक बढ़े, जबकि औसत थोक कीमत 2,532 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई. जानिए किन राज्यों में प्याज सबसे महंगा और सबसे सस्ता रहा.
त्योहारी सीजन से पहले भारत में चीनी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है. पिछले एक महीने में चीनी 10% से अधिक महंगी होकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. कम स्टॉक, सीमित सप्लाई और बढ़ती मांग के कारण अगले कुछ महीनों तक कीमतों में नरमी की संभावना कम है. उद्योग ने सरकार से महंगाई पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने की मांग की है.
केंद्र सरकार ने 30 जुलाई से URS श्रेणी के प्याज की खरीद बंद कर केवल A-ग्रेड प्याज की खरीद जारी रखने का फैसला किया है. इसके बाद महाराष्ट्र के किसानों और व्यापारियों ने खरीद प्रक्रिया में धांधली के आरोप लगाते हुए NAFED और NCCF की खरीद की स्वतंत्र जांच की मांग की है.
केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत दी है. अब MSP पर गर्मी की मूंग और उड़द की खरीद के दौरान आधार आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन फेल होने पर किसान अपने नॉमिनी प्रतिनिधि के जरिए उपज बेच सकेंगे. भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में ही जाएगा.
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की प्रमुख मंडियों में टमाटर के थोक भाव में गिरावट का सिलसिला जारी है. कई मंडियों में कीमतें पिछले साल के मुकाबले काफी नीचे बनी हुई हैं. अलग-अलग मंडियों में टमाटर के ताजा भाव 540 रुपये से 3,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किए गए हैं.
एक ओर भारत 2025-26 में दलहन आयात पर करीब 47-48 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मूंग किसानों को अपनी फसल MSP पर बेचने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है. जुलाई में अधिकांश राज्यों में मूंग के दाम MSP से 1,000 से 2,500 रुपये प्रति क्विंटल तक नीचे रहे. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब तूर, उड़द और मसूर की 100 प्रतिशत खरीद संभव है तो मूंग को इससे बाहर क्यों रखा गया है?
केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक के लिए प्याज की खरीद कीमत बढ़ाकर 2,335 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है. यह इस सीजन में छठी बढ़ोतरी है. सरकार अब केवल ग्रेड-A प्याज खरीदेगी, जबकि 3 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले अब तक करीब 1.05 लाख टन खरीद ही हो सकी है.
मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी के दौरान फर्जी किसानों के जरिए करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है. आरोप है कि असली किसानों के खसरा नंबरों का इस्तेमाल कर फर्जी पंजीयन किए गए और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से गेहूं की बिक्री दिखाकर भुगतान हासिल कर लिया गया. भिंड और राजगढ़ समेत कई जिलों में जांच शुरू हो गई है, जबकि पटवारियों, समिति प्रबंधकों और अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई की जा रही है.
जून 2026 में टमाटर के थोक दाम मजबूत रहने के बाद जुलाई में बाजार का रुख बदल गया. नई आवक बढ़ने से देशभर की मंडियों में कीमतों पर दबाव आया और जुलाई के चौथे हफ्ते तक औसत थोक भाव करीब 16.6% गिर गया.
भारत में प्याज के थोक दाम लगातार मजबूत बने हुए हैं. 26 जुलाई 2026 को औसत मंडी भाव 2,012.69 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले 51.5% अधिक है. हालांकि कीमतें जुलाई 2024 के रिकॉर्ड स्तर से अभी भी नीचे हैं.
केंद्र सरकार ने ग्रीष्मकालीन मौसम 2025-26 के लिए मध्य प्रदेश को 4.54 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीद की मंजूरी दी है, जो देशभर में स्वीकृत कुल खरीद का 87 प्रतिशत है. राज्य सरकार ने बंपर उत्पादन को देखते हुए खरीद लक्ष्य 8.06 लाख मीट्रिक टन करने की मांग की है.
हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 के लिए मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) लागू करते हुए प्रोसेसिंग ग्रेड आम, खट्टे फल और सी-ग्रेड सेब की सरकारी खरीद को मंजूरी दे दी है. योजना के तहत आम, किन्नू, माल्टा, संतरा और सी-ग्रेड सेब, गलगल खरीद की जाएगी.
देशभर की मंडियों में कई प्रमुख फसलों के भाव MSP से नीचे दर्ज किए गए हैं. गेहूं, मक्का, मूंग, रागी, बाजरा, अरहर और अन्य फसलों के कम दाम से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. ताजा मंडी आंकड़ों में MSP और बाजार भाव के बीच बड़ा अंतर सामने आया है, जिससे किसानों की आय पर असर पड़ रहा है.
कर्नाटक के कोलार जिले में टमाटर किसानों के बाद अब आम उत्पादक भी भारी संकट में हैं. बाजार में आम के दाम गिरने और लागत बढ़ने से किसान वर्षों पुराने बाग काटने को मजबूर हो गए हैं. किसानों का कहना है कि उन्हें लागत तक नहीं मिल रही, जबकि किसान संगठनों ने सरकार से उचित मूल्य और राहत पैकेज की मांग की है.
इथेनॉल उत्पादन में मक्के की बढ़ती मांग का फायदा किसानों को मिलने लगा है. हरियाणा के करनाल में इस सीजन मक्के की रिकॉर्ड 3.36 लाख क्विंटल आवक दर्ज की गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 60 प्रतिशत से अधिक है. बेहतर दाम और बढ़ती मांग के चलते किसान अब मक्के की खेती को आय के नए विकल्प के रूप में देख रहे हैं.
देशभर की थोक मंडियों में 22 जुलाई को आलू के दाम राज्यों के अनुसार अलग-अलग रहे. एगमार्कनेट के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की मंडियों में मॉडल भाव 400 रुपये से 3,300 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज किया गया. सबसे अधिक कीमत महाराष्ट्र की कामठी मंडी में और सबसे कम मध्य प्रदेश की मुरैना मंडी में रही. जानिए ताजा मंडी भाव...
त्योहारों और शादी के मौसम में प्याज की संभावित कमी और बढ़ती कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार सितंबर 2026 से अपने बफर स्टॉक से बारी-बारी से प्याज बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है. इसका उद्देश्य जमाखोरी पर रोक लगाना, मांग वाले क्षेत्रों में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना और खाद्य महंगाई को नियंत्रित करना है. देशभर में प्याज की खुदरा और थोक कीमतों में पिछले साल और पिछले महीने की तुलना में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सरकार ने 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा है और खरीद मूल्य भी बढ़ाया है. NAFED, NCCF और अन्य एजेंसियों के माध्यम से आपूर्ति बढ़ाने के साथ-साथ भंडारण और खरीफ फसल की स्थिति की भी निगरानी की जा रही है.
MSP तय होने के बावजूद देश की कई प्रमुख फसलों के दाम मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे पहुंच गए हैं. रागी समेत 8 फसलों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. किसानों को लागत के मुकाबले कम भाव मिलने से चिंता बढ़ रही है. जानिए मंडी भाव, फसल कीमतों और किसानों की मौजूदा स्थिति की पूरी जानकारी.
जून में तेज उछाल के बाद जुलाई में टमाटर के दाम लगातार नरम पड़ रहे हैं. एगमार्कनेट के जुलाई और तीसरे सप्ताह के आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि, उत्तर प्रदेश की कुछ मंडियों में भाव अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं.
मेघालय में पत्तागोभी की थोक कीमत 2 रुपये प्रति किलो तक गिरने से किसान भारी संकट में हैं. उत्पादन लागत करीब 10 रुपये प्रति किलो होने के बावजूद उचित दाम नहीं मिलने पर हिल्स फार्मर्स यूनियन ने शिलॉन्ग में विरोध प्रदर्शन करते हुए लगभग 6 टन पत्तागोभी लोगों को मुफ्त बांट दी. किसानों ने सरकार से मूल्य निर्धारण व्यवस्था और खेती की लागत के अनुरूप न्यूनतम कीमत सुनिश्चित करने की मांग की है.
जुलाई में देशभर के थोक बाजारों में प्याज की कीमतों में मजबूती बनी हुई है. एगमार्कनेट के मासिक और साप्ताहिक विश्लेषण के अनुसार, औसत थोक भाव जून और पिछले साल की तुलना में ऊंचे स्तर पर हैं. मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में भी कीमतें मजबूत बनी हुई हैं.
देश में सोयाबीन की घरेलू सप्लाई कम होने से आयात में बड़ा उछाल आया है. SOPA की रिपोर्ट के अनुसार जून 2025 तक 7.77 लाख टन सोयाबीन आयात हो चुका है और पूरे तेल वर्ष में यह आंकड़ा 9 लाख टन तक पहुंच सकता है. जानिए सोयाबीन उत्पादन, सोयामील निर्यात और बाजार पर इसके असर की पूरी जानकारी.
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