प्याज निर्यात और कीमतों को लेकर DoCA की बैठक में ठोस फैसला नहीं हो सका. निर्यातकों ने स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की मांग की, जबकि सरकार ने जिम्मेदारी उद्योग पर डाल दी, जिससे प्याज बर्बादी का मुद्दा बरकरार है.
मध्य प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद में देरी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. समर्थन मूल्य का इंतजार करते-करते किसान कम दाम पर फसल बेचने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
राजस्थान के किशनगढ़ मंडी में गेहूं की MSP पर खरीद न होने और चने के कम दाम मिलने से नाराज किसानों ने चक्का जाम कर दिया. जयपुर रोड भी ठप हो गया, किसानों ने मंडी में अव्यवस्थाओं और धांधली का आरोप लगाया.
किसानों के लिए रबी फसल कटाई के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है. दरअसल, किसानों की सुविधा और अनाज मंडियों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सभी अनाज मंडियों और खरीद केंद्रों पर गेट पास की सुविधा अब 24 घंटे उपलब्ध रहेगी.
New Delhi में 7 अप्रैल को प्याज की कीमतों और निर्यात को लेकर अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें सरकार और निर्यातक मिलकर गिरती कीमतों और भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेंगे.
Haryana State Agricultural Marketing Board ने मंडियों में “कच्ची पर्ची” (अनधिकृत स्लिप) के उपयोग पर सख्त रोक लगा दी है. सभी आढ़तियों को निर्देश दिया गया है कि हर कृषि लेन-देन के लिए J-फॉर्म जारी करना अनिवार्य होगा, ताकि किसानों और खरीदारों को कानूनी रिकॉर्ड मिल सके.
किसानों के मुद्दे को लेकर कोटा में एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें कोटा के सांसद और लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने गेहूं खरीद की स्थिति की समीक्षा की और सख्त नाराजगी जताई कि मामूली क्वालिटी खामियों के आधार पर बड़ी मात्रा में गेहूं रिजेक्ट किया जा रहा है.
राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने मंडियों में बढ़ती आवक को देखते हुए 24 घंटे संचालन का निर्णय लिया है. अतिरिक्त मैनपावर की जरूरत के लिए मंडी समितियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं, ताकि खरीद प्रक्रिया बिना रुकावट जारी रह सके.
Maize Mandi Rate: मक्का के दामों में गिरावट जारी है और अप्रैल के ताजा रुझानों में मंडियों में भाव और कमजोर दिखे हैं. MSP 2400 रुपये होने के बावजूद किसानों को बाजार में कम कीमत मिल रही है, जिससे उनकी आय पर दबाव बना हुआ है.
हरियाणा के करनाल की अनाज मंडी में गेहूं खरीद शुरू हो गई है. इस बार MSP 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है. बायोमेट्रिक सत्यापन, इलेक्ट्रॉनिक कांटे और ऐप आधारित ऑक्शन जैसी नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं, जबकि किसानों को फसल सुखाकर लाने की सलाह दी गई है.
सरकार ने अरहर, उड़द और पीली मटर की आयात नीति को 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया है, जिसमें अरहर और उड़द ड्यूटी फ्री रहेंगे जबकि पीली मटर पर 30% शुल्क जारी रहेगा. इस फैसले का मकसद महंगाई नियंत्रित करना है, लेकिन बढ़ते आयात से किसानों की आय और MSP पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है.
पंजाब में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होने से ठीक पहले आढ़तियों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया है, जिससे मंडियों में खरीद और अन्य काम प्रभावित हो सकते हैं. कमीशन बढ़ाने और नियमों में बदलाव की मांग को लेकर शुरू हुई इस हड़ताल से किसानों को परेशानी होने की आशंका है.
ईरान युद्ध के चलते बारदाने (पीपी बैग) की कमी होने से मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी बार-बार टल रही है. इससे किसान अपनी फसल बेच नहीं पा रहे हैं और खुले में रखे गेहूं को लेकर चिंता बढ़ गई है, जबकि सरकार को भंडारण और सप्लाई की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.
Potato Mandi Price: आलू बाजार में इस बार उल्टा ट्रेंड देखने को मिला, जहां कम आवक के बावजूद दाम टूट गए. पिछले साल इसी अवधि में करीब तीन गुना ज्यादा आवक के बावजूद कीमतें मजबूत थीं, जबकि इस साल कई राज्यों में सालाना आधार पर 40-50% तक गिरावट दर्ज की गई है.
पंजाब में 1 अप्रैल 2026 से गेहूं की खरीद 2,585 रुपये प्रति क्विंटल MSP पर शुरू होगी. राज्य ने 132 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य तय किया है और मंडियों, भंडारण और परिवहन के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं, ताकि किसानों को समय पर भुगतान और सुचारू खरीद सुनिश्चित हो सके.
महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मेलघाट में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और मक्का की फसल को भारी नुकसान हुआ है. किसान मुआवजे और मंडी में जल्द खरीदी की मांग कर रहे हैं.
Tomato Mandi Rate: मार्च 2026 में टमाटर की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की गई, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. चौथे हफ्ते में हालात और बिगड़े और कई मंडियों में भाव लागत से नीचे पहुंच गए. 27 मार्च को भी कीमतों पर दबाव बना रहा और आवक बढ़ने से बाजार कमजोर रहा.
महाराष्ट्र में प्याज की कीमतें ₹300 से ₹800 प्रति क्विंटल तक गिर गई हैं, जबकि लागत ₹1500 से ऊपर बताई जा रही है. इस अंतर ने किसानों को भारी नुकसान में धकेल दिया है. अब संगठन ने सरकार से तुरंत बाजार हस्तक्षेप योजना लागू करने की मांग उठाई है.
पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ने से भारत में खाद्य तेल आयात प्रभावित हुआ है. रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च में आयात घटा है और खरीदार नई खरीद टाल रहे हैं. इससे घरेलू बाजार में सोयाबीन की मांग बढ़ी है और किसानों को MSP से ऊपर दाम मिलने लगे हैं.
मासिक आधार पर गेहूं के दामों में गिरावट का दबाव साफ दिखाई दे रहा है. औसत भाव 2503 रुपये पर आ गया है. मंडियों में 1200 से रुपये तक गिर गया है. 25 मार्च को कई राज्यों में कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि कुछ जगहों पर हल्की बढ़त भी देखने को मिली.
हरियाणा में 28 मार्च से सरसों और 1 अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू होगी, लेकिन इस बार मंडी व्यवस्था बदली रहेगी. फसल बिक्री के लिए बायोमेट्रिक पहचान अनिवार्य होगी और गेट पास से लेकर नीलामी तक की प्रक्रिया डिजिटल सिस्टम से जुड़ी रहेगी.
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