Madhya Pradesh में न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) पर गेहूं खरीदी का अभियान तेजी से जारी है. अब तक 17 हजार से अधिक किसानों से 7.75 लाख क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है और करोड़ों रुपये सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं. राज्य सरकार ने 3000 से अधिक उपार्जन केंद्रों के जरिए खरीदी प्रक्रिया को सुचारू बनाया है, जबकि लाखों किसानों ने पहले ही स्लॉट बुक कर लिया है.
Punjab के मोहाली जिले की मंडियों में गेहूं खरीद सुचारू रूप से जारी है, जहां किसानों को 17 करोड़ रुपये सीधे खातों में ट्रांसफर किए जा चुके हैं. वहीं Jalandhar में गेहूं की क्वालिटी और कम पैदावार को लेकर किसानों ने चिंता जताई है. सरकारी एजेंसियां—PUNGRAIN, MARKFED और PUNSUP—खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने में जुटी हैं.
सिरसा के चौटाला गांव की मंडी में ई-खरीद पोर्टल की तकनीकी खराबी के कारण किसानों को गेहूं बेचने में भारी परेशानी हो रही है. सर्वर डाउन, बायोमेट्रिक फेल और नमी की समस्या से खरीद प्रक्रिया बाधित है. सैकड़ों ट्रॉलियां फंसी हुई हैं, जिससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है और नुकसान की आशंका भी बढ़ गई है.
हरियाणा में रबी खरीद सीजन 2026-27 के तहत अब तक मंडियों में करीब 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है, जबकि लगभग 11 लाख मीट्रिक टन की ही खरीद हो पाई है. सरकार ने किसानों को 188 करोड़ रुपये सीधे उनके खातों में ट्रांसफर किए हैं. खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, जियो-फेंसिंग और कैमरों जैसी नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं.
नासिक की लासलगांव मंडी में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जहां थोक भाव करीब 30% गिरकर 775 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं. उत्पादन लागत लगभग 1800 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद किसानों को 500 से 800 रुपये में प्याज बेचनी पड़ रही है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. किसानों ने सरकार से राहत पैकेज और 1500 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान की मांग की है, जबकि कीमतों में गिरावट की वजह बढ़ती आवक और कमजोर मांग को बताया जा रहा है.
कपास किसानों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने PM AASHA योजना के तहत गैप सपोर्ट मैकेनिज्म लागू किया है. इस व्यवस्था के तहत MSP से कम दाम पर फसल बेचने पर किसानों को अंतर की राशि सीधे DBT के जरिए उनके बैंक खाते में दी जाएगी. फिलहाल इसे आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया गया है, जिससे किसानों की आय सुरक्षित रखने और बाजार में स्वतंत्र बिक्री को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
पंजाब में गेहूं खरीद को लेकर संकट गहराता जा रहा है. गुणवत्ता नियमों में ढील की मांग को लेकर खरीद एजेंसियों के कर्मचारी काम रोकने की चेतावनी दे रहे हैं. बारिश से खराब हुई फसल के कारण विवाद बढ़ा है. सरकार ने किसानों को आश्वासन दिया है, जबकि केंद्र की टीमें नुकसान का आकलन कर रही हैं.
झज्जर, मातनहेल और बादली मंडियों में गेहूं की भारी आवक के बावजूद उठान धीमा है, जिससे किसानों को परेशानी हो रही है. मंडियों में गेहूं के ढेर लग गए हैं और जगह की कमी हो रही है. खराब मौसम के कारण फसल खराब होने का डर बढ़ रहा है, वहीं किसान बिक्री में देरी से परेशान हैं.
वैश्विक रिपोर्ट्स के मुताबिक, उर्वरक सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद और बढ़ते स्टॉक के चलते मक्का के दाम में नरमी का रुख दिख रहा है. आगे कीमतों की दिशा उर्वरक आपूर्ति, कच्चे तेल और वैश्विक मांग-आपूर्ति संतुलन पर निर्भर करेगी.
भोपाल में MSP पर गेहूं खरीदी शुरू होते ही किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का दाम मिल रहा है, जो मंडी से बेहतर है. केंद्रों पर तौल, भंडारण और सुविधाओं से किसान संतुष्ट नजर आए.
छत्तीसगढ़ में धान बेचने का टोकन न मिलने पर किसान ने हाई कोर्ट का रुख किया और जीत हासिल की. कोर्ट के आदेश के बाद किसान ने बैंड-बाजे के साथ खरीदी केंद्र पहुंचकर समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेची.
अमेरिका-चीन व्यापार और कच्चे तेल की कीमतों से फिलहाल सोयाबीन को सहारा मिला है, लेकिन आगे चलकर बढ़ती वैश्विक आपूर्ति और ब्राजील की रिकॉर्ड फसल कीमतों को सीमित कर सकती है.
पंजाब में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो गई है, जहां किसानों को MSP 2,585 रुपये प्रति क्विंटल और 24 घंटे में भुगतान का भरोसा दिया गया है. सरकार ने खरीद के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं, लेकिन बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से किसान चिंतित हैं. राज्य में 1.30 लाख एकड़ से अधिक गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है, जिसके चलते मुआवजे की मांग तेज हो गई है.
मंदसौर कृषि उपज मंडी में कई किसानों का कहना है कि 9 दिन की छुट्टी के बाद आज मंडी खुली है, लेकिन मंडी फिर बंद रहेगी. उन्होंने सोसायटी से कर्ज लेकर और ब्याज पर पैसा लगाकर फसल तैयार की है.
प्याज निर्यात और कीमतों को लेकर DoCA की बैठक में ठोस फैसला नहीं हो सका. निर्यातकों ने स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की मांग की, जबकि सरकार ने जिम्मेदारी उद्योग पर डाल दी, जिससे प्याज बर्बादी का मुद्दा बरकरार है.
मध्य प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद में देरी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. समर्थन मूल्य का इंतजार करते-करते किसान कम दाम पर फसल बेचने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
राजस्थान के किशनगढ़ मंडी में गेहूं की MSP पर खरीद न होने और चने के कम दाम मिलने से नाराज किसानों ने चक्का जाम कर दिया. जयपुर रोड भी ठप हो गया, किसानों ने मंडी में अव्यवस्थाओं और धांधली का आरोप लगाया.
किसानों के लिए रबी फसल कटाई के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है. दरअसल, किसानों की सुविधा और अनाज मंडियों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सभी अनाज मंडियों और खरीद केंद्रों पर गेट पास की सुविधा अब 24 घंटे उपलब्ध रहेगी.
New Delhi में 7 अप्रैल को प्याज की कीमतों और निर्यात को लेकर अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें सरकार और निर्यातक मिलकर गिरती कीमतों और भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेंगे.
Haryana State Agricultural Marketing Board ने मंडियों में “कच्ची पर्ची” (अनधिकृत स्लिप) के उपयोग पर सख्त रोक लगा दी है. सभी आढ़तियों को निर्देश दिया गया है कि हर कृषि लेन-देन के लिए J-फॉर्म जारी करना अनिवार्य होगा, ताकि किसानों और खरीदारों को कानूनी रिकॉर्ड मिल सके.
किसानों के मुद्दे को लेकर कोटा में एक बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें कोटा के सांसद और लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने गेहूं खरीद की स्थिति की समीक्षा की और सख्त नाराजगी जताई कि मामूली क्वालिटी खामियों के आधार पर बड़ी मात्रा में गेहूं रिजेक्ट किया जा रहा है.
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