ईरान संकट से जहां खाद्य तेल महंगे हुए, वहीं भारत में सरसों और अन्य तिलहन किसानों को इसका बड़ा फायदा मिला है. विदेशी तेल की सप्लाई घटने से घरेलू मांग बढ़ी और कीमतें MSP से ऊपर पहुंच गईं.
भारत में सोयामील के निर्यात में भारी गिरावट की आशंका जताई गई है, जिससे सोयाबीन किसानों की आय पर गंभीर असर पड़ सकता है. बढ़ती कीमतों और वैश्विक मुकाबले के कारण निर्यात घटकर आधा रहने का अनुमान है.
मंडी में कटौती को लेकर किसानों के लिए जरूरी अपडेट. MSP खरीद में कई संचालन खर्च खरीद एजेंसी और आढ़तियों के जिम्मे तय किए गए हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में किसान अक्सर पैसे दे देते हैं. गेहूं, धान और दूसरी फसलों पर कौन से चार्ज लागू हैं और किनकी वसूली नियमों के खिलाफ है? यहां जानें...
महाराष्ट्र में प्याज के दाम गिरने से किसान सड़कों पर उतर आए हैं. 1500 रुपये प्रति क्विंटल मुआवजे की मांग के साथ विरोध तेज हो गया है, जबकि सरकार के खरीद मूल्य को किसानों ने खारिज कर दिया है.
महाराष्ट्र में प्याज की कीमतें गिरकर 50-67 पैसे प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जिससे सोलापुर के एक किसान को अपनी खड़ी फसल जलानी पड़ी. इस किसान ने माता-पिता का मन रखने के लिए इंजीनियरिंग छोड़कर खेती शुरू की थी.
महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में प्याज का बेहद कम दाम मिलने से परेशान किसान भगवान साबळे ने अपनी 600 बोरी प्याज में आग लगा दी. किसान को बाजार में प्याज का भाव सिर्फ 1 रुपये किलो मिला. लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी सही कीमत न मिलने से किसानों में भारी नाराज़गी और चिंता का माहौल है.
महाराष्ट्र के नासिक जिले में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट के विरोध में किसानों ने नंदगांव APMC के बाहर ट्रैक्टर‑भर प्याज फेंक दिया. किसानों ने APMC को भंग करने, 2,000 रुपये प्रति क्विंटल MSP तय करने और नुकसान के मुआवजे की मांग की है.
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में एक किसान को प्याज के 25 बोरे बेचने पर सिर्फ 1,262 रुपये मिले, यानी 1 रुपये प्रति किलो. ट्रांसपोर्ट और अन्य कटौतियों के बाद किसान को उल्टा पैसा देने को कहा गया. यह घटना राज्य में गहराते प्याज संकट और किसानों की बदहाली को उजागर करती है.
रायसेन जिले में गेहूं खरीदी केंद्रों पर बारदाने की कमी और अव्यवस्थाओं से नाराज किसानों ने भोपाल-विदिशा मार्ग पर चक्काजाम किया. किसानों ने पानी, छाया और सही तौल जैसी सुविधाओं की कमी का आरोप लगाया. कई गांवों के किसान प्रदर्शन में शामिल हुए और प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की.
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में नई गेहूं खरीद नीति मुश्किलों में घिर गई है. निजी कंपनियां गेहूं खरीदने में असफल रही हैं, जबकि किसान सरकारी रेट कम होने से नाराज हैं. बैंकिंग दिक्कतों, बाजार में बढ़ती कीमतों और सरकारी सख्ती के कारण खरीद व्यवस्था लगभग ठप हो गई है, जिससे किसानों और सरकार दोनों की चिंता बढ़ गई है.
महाराष्ट्र में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट के चलते किसानों की हालत गंभीर बनी हुई है. किसान अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रहे हैं. किसान संगठन ने ₹1500 प्रति क्विंटल सब्सिडी की मांग करते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि राहत नहीं मिली तो आंदोलन होगा.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ निर्देश दिए हैं कि किसानों को MSP से नीचे फसल बेचने की नौबत न आए. राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) को तेजी से खरीद बढ़ाने और 72 घंटे के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया है.
देश में गेहूं और चावल का भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, लेकिन इसके बावजूद किसानों को उनकी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार FCI के गोदामों में अनाज जरूरत से लगभग तीन गुना ज्यादा है, वहीं गेहूं, धान, मक्का, दालें और तिलहन MSP से नीचे बिक रहे हैं. रबी फसलों की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है, मगर खरीद की धीमी रफ्तार ने किसानों को खुले बाजार में औने‑पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर कर दिया है. बढ़ती लागत और गिरती कीमतों के बीच किसान भारी आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं, जबकि MSP का वादा जमीनी स्तर पर खोखला साबित हो रहा है.
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