देशभर में धान की थोक कीमतों में तेजी देखी जा रही है. 9 से 15 अक्टूबर 2026 के दौरान कर्नाटक में धान का औसत भाव ₹5,418.14 प्रति क्विंटल पहुंच गया, जबकि राजस्थान में ₹3,554.81 और मध्य प्रदेश में ₹3,450.16 रहा. अखिल भारतीय औसत भाव ₹2,791.72 प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जो पिछले साल की समान अवधि से करीब 19.2% अधिक है.
मंडियों में बासमती धान की आवक शुरू होते ही किसानों को पिछले साल के मुकाबले बेहतर कीमत मिल रही है. आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में बासमती धान का औसत थोक भाव पिछले साल की तुलना में करीब 34.5% बढ़कर 3,810 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा हो गया है.
हरियाणा की पुनहाना अनाज मंडी में हल्की बारिश के बाद जलभराव से किसान और आढ़ती परेशान हैं. जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से दुकानों के सामने पानी जमा हो रहा है, वहीं खुले में रखा अनाज भी भीग गया है.
राजस्थान की अलवर मंडी में कपास के भाव 8,700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं, लेकिन इसके बावजूद किसान इसकी खेती से दूरी बना रहे हैं. आखिर अच्छे भाव मिलने के बाद भी किसान कपास की खेती में दिलचस्पी क्यों नहीं दिखा रहे हैं? जानिए इसकी वजह.
हरियाणा के करनाल में बेमौसम बारिश से धान किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. खेतों में तैयार फसल भीगने से धान में नमी बढ़ गई है. मंडियों में खरीद में देरी, सुखाने की जगह की कमी और राइस मिलर्स की कम मौजूदगी से किसान परेशान हैं. किसान सरकार से धान खरीद में राहत और उचित व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं.
पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब में तेज हवा, बारिश और ओलावृष्टि से हजारों एकड़ में धान की फसल प्रभावित हुई है. मुक्तसर अनाज मंडी में कई दिनों से किसान धान बेचने का इंतजार कर रहे हैं. खुले आसमान के नीचे रखी फसल पर बारिश का खतरा बना हुआ है. किसान फसल नुकसान के मुआवजे और सरकारी मदद का इंतजार कर रहे हैं.
देश के कई हिस्सों में अचानक हुई बारिश से किसानों को नुकसान हुआ है. पंजाब के अमृतसर और दिल्ली के नरेला की अनाज मंडियों में खुले में रखा अनाज भीग गया. किसानों ने मंडियों में पर्याप्त शेड की व्यवस्था करने और बारिश से खराब हुई फसल के लिए मुआवजे की मांग की है.
मध्य प्रदेश की प्रमुख कपास मंडियों में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 8,267 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक भाव मिल रहे हैं. बुरहानपुर और खरगोन की मंडियों में कपास का मॉडल भाव 8,700 से 9,150 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किया गया, जबकि अधिकतम भाव 9,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया.
महाराष्ट्र के नासिक जिले की प्रमुख प्याज मंडियों में कीमतें मजबूत बनी हुई हैं. लासलगांव एपीएमसी में दो दिनों के भीतर प्याज का औसत थोक भाव 18 फीसदी बढ़कर 4,400 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है. वहीं पिंपलगांव बसवंत मंडी में मॉडल भाव 4,400 रुपये और अधिकतम भाव 5,690 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया.
पश्चिम बंगाल सरकार मालदा को भारत की आम राजधानी बनाने की तैयारी कर रही है. इसके लिए पांच महीने की कार्ययोजना बनाई गई है, जिसके तहत आम का निर्यात बढ़ाने, किसानों की मदद, कोल्ड स्टोरेज और पैकेजिंग सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा. साथ ही, लंगड़ा, मल्लिका और आम्रपाली आम को जीआई टैग दिलाने की कोशिश भी की जा रही है.
राजस्थान के अलवर मंडी में खरीफ सीजन की प्रमुख फसल बाजरे की बंपर आवक शुरू हो गई है. मंडी में बाजरे के भाव 2600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच रहे हैं. सीमावर्ती क्षेत्रों के कई किसान बेहतर दाम मिलने के कारण अपनी उपज हरियाणा की मंडियों में बेच रहे हैं. मुर्गी पालन उद्योग में बढ़ती मांग के चलते अलवर से बाजरे की सप्लाई देश के विभिन्न राज्यों तक की जा रही है.
कपास के दामों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है. नई फसल की कम आवक और कम बारिश के कारण उत्पादन घटने की आशंका के बीच कपास की कीमतें एक सप्ताह में 3,000 से 4,000 रुपये प्रति कैंडी बढ़कर करीब 68,000 रुपये तक पहुंच गई हैं. बेहतर दामों की उम्मीद में किसान फिलहाल अपनी उपज बेचने की जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं. वहीं, कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने भी 2025-26 सीजन के लिए अपनी नीलामी कीमतों में 500 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की है.
देशभर में प्याज की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है. खरीफ प्याज की नई फसल की आवक बढ़ने और सरकार की ओर से बफर स्टॉक से आपूर्ति जारी रहने से बाजार में उपलब्धता बेहतर हुई है. महाराष्ट्र की मंडियों में कीमतें करीब 13 फीसदी घटी हैं, जबकि 126 शहरों में खुदरा कीमतों में 1 से 21 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट आई है.
हरियाणा के अंबाला, करनाल और रोहतक समेत कई इलाकों में बेमौसम बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है. मंडियों में धान की बोरियां भीग गई हैं, जबकि खेतों में खड़ी फसल को भी नुकसान का डर है. किसानों ने जलभराव पर सवाल उठाए हैं. वहीं, कृषि मंत्री और मंडी अधिकारियों ने किसानों को मदद का भरोसा दिया है और जल्द समाधान का आश्वासन भी दिया है.
हरियाणा और पंजाब में हुई बारिश ने धान किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. गोहाना, अंबाला, करनाल और फाजिल्का की मंडियों में खुले में रखा धान भीग गया, जिससे किसानों और आढ़तियों को भारी नुकसान का खतरा पैदा हो गया है. किसानों ने जल निकासी, खरीद व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठाते हुए मुआवजे की मांग की है.
हरियाणा में धान की रिकॉर्ड पैदावार के बीच किसानों को मंडियों में खरीद में देरी, उपज उठान की समस्या और प्रति एकड़ खरीद सीमा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. कांग्रेस ने इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देते हुए सरकार पर निशाना साधा है, जबकि पंजाब में भी धान खरीद को लेकर किसानों की चिंताएं बढ़ने लगी हैं.
पंजाब में बेमौसम बारिश ने धान किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. खन्ना मंडी में खुले आसमान के नीचे रखा धान बारिश में भीग गया, वहीं किसान खरीद में देरी और धान में कटौती के आरोप भी लगा रहे हैं.
पंजाब में धान की खरीद को लेकर कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने AAP सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने दावा किया कि किसानों को MSP से कम दाम पर धान बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
महाराष्ट्र स्टेट अनियन प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन 12 अक्टूबर से राज्यभर में प्याज किसानों की समस्याओं का जायजा लेने के लिए दौरा शुरू कर रहा है. नासिक के कासमडे से होगी शुरुआत.
उत्तर प्रदेश में किसानों से मक्का, बाजरा और ज्वार की सरकारी खरीद 31 दिसंबर 2026 तक की जाएगी. सरकार ने बाजरा की 2.20 लाख मीट्रिक टन, ज्वार की 50 हजार मीट्रिक टन और मक्का की 15 हजार मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा है. इसके लिए राज्य में 455 खरीद केंद्र बनाए गए हैं.
उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर की किच्छा अनाज मंडी में अचानक हुई बारिश से खुले में रखा किसानों का हजारों क्विंटल धान भीग गया. किसान पहले ही खेती की बढ़ती लागत और कर्ज के दबाव से परेशान हैं. अब बारिश से फसल खराब होने के खतरे ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है.
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