त्योहारों और शादी के मौसम में प्याज की संभावित कमी और बढ़ती कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार सितंबर 2026 से अपने बफर स्टॉक से बारी-बारी से प्याज बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है. इसका उद्देश्य जमाखोरी पर रोक लगाना, मांग वाले क्षेत्रों में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना और खाद्य महंगाई को नियंत्रित करना है. देशभर में प्याज की खुदरा और थोक कीमतों में पिछले साल और पिछले महीने की तुलना में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सरकार ने 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा है और खरीद मूल्य भी बढ़ाया है. NAFED, NCCF और अन्य एजेंसियों के माध्यम से आपूर्ति बढ़ाने के साथ-साथ भंडारण और खरीफ फसल की स्थिति की भी निगरानी की जा रही है.
MSP तय होने के बावजूद देश की कई प्रमुख फसलों के दाम मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे पहुंच गए हैं. रागी समेत 8 फसलों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. किसानों को लागत के मुकाबले कम भाव मिलने से चिंता बढ़ रही है. जानिए मंडी भाव, फसल कीमतों और किसानों की मौजूदा स्थिति की पूरी जानकारी.
जून में तेज उछाल के बाद जुलाई में टमाटर के दाम लगातार नरम पड़ रहे हैं. एगमार्कनेट के जुलाई और तीसरे सप्ताह के आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि, उत्तर प्रदेश की कुछ मंडियों में भाव अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं.
मेघालय में पत्तागोभी की थोक कीमत 2 रुपये प्रति किलो तक गिरने से किसान भारी संकट में हैं. उत्पादन लागत करीब 10 रुपये प्रति किलो होने के बावजूद उचित दाम नहीं मिलने पर हिल्स फार्मर्स यूनियन ने शिलॉन्ग में विरोध प्रदर्शन करते हुए लगभग 6 टन पत्तागोभी लोगों को मुफ्त बांट दी. किसानों ने सरकार से मूल्य निर्धारण व्यवस्था और खेती की लागत के अनुरूप न्यूनतम कीमत सुनिश्चित करने की मांग की है.
जुलाई में देशभर के थोक बाजारों में प्याज की कीमतों में मजबूती बनी हुई है. एगमार्कनेट के मासिक और साप्ताहिक विश्लेषण के अनुसार, औसत थोक भाव जून और पिछले साल की तुलना में ऊंचे स्तर पर हैं. मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में भी कीमतें मजबूत बनी हुई हैं.
देश में सोयाबीन की घरेलू सप्लाई कम होने से आयात में बड़ा उछाल आया है. SOPA की रिपोर्ट के अनुसार जून 2025 तक 7.77 लाख टन सोयाबीन आयात हो चुका है और पूरे तेल वर्ष में यह आंकड़ा 9 लाख टन तक पहुंच सकता है. जानिए सोयाबीन उत्पादन, सोयामील निर्यात और बाजार पर इसके असर की पूरी जानकारी.
देश की कई प्रमुख फसलों के किसानों को अपनी उपज का MSP के बराबर दाम नहीं मिल रहा है. ताजा मंडी आंकड़ों के अनुसार, कई फसलों के बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे चल रहे हैं. ऐसे में किसानों की आमदनी पर असर पड़ रहा है.
आंध्र प्रदेश सरकार का दावा है कि एनडीए शासन में राज्य ने 74 लाख टन धान खरीदकर नया रिकॉर्ड बनाया है. 31,000 करोड़ रुपये की खरीद में 11 लाख से ज्यादा किसानों को 95 फीसदी भुगतान 24 घंटे के भीतर किया गया.
छत्तीसगढ़ सरकार ने रायगढ़ जिले के 33,017 किसानों को 113.47 करोड़ रुपये की अग्रिम सहायता, खाद और बीज उपलब्ध कराए हैं.समय पर मिली इस मदद से खरीफ फसलों की बुवाई तेज हुई है और किसानों में बेहतर उत्पादन की उम्मीद बढ़ी है.
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