मुजफ्फरपुर में विश्व प्रसिद्ध शाही लीची पर इस बार गंधी कीट यानी स्टिंक बग का बड़ा हमला देखने को मिल रहा है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र की वैज्ञानिक टीम ने प्रभावित बागों का निरीक्षण किया.
इस समय आम के बागवानों के सामने तीन सबसे बड़ी चुनौतियां हैं, पहली, मौसम विभाग की आंधी और बारिश की चेतावनी जिससे 'बढ़वार' की स्थिति में पहुंचे कच्चे फलों के गिरने का भारी खतरा बना हुआ है. दूसरी मुख्य समस्या मिट्टी में बोरॉन की कमी है, जिसकी वजह से फल नीचे से काले पड़ने लगते हैं या फटने लगते हैं.
उर्वरकों के संतुलित उपयोग को लेकर भारतीय सब्जियां अनुसंधान संस्थान,वाराणसी के द्वारा 45 दिवसीय जागरूकता अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में चलाया जा रहा है. इस अभियान का उद्देश्य है कि उर्वरक के संतुलित उपयोग से किसान को समृद्ध बनाना.
बागवानी में फलों का फटना और गिरना आज किसानों के लिए एक खौफनाक चुनौती बन गया है, जिससे उनकी साल भर की मेहनत और निवेश का 85 प्रतिशत तक हिस्सा पल भर में तबाह हो सकता है. आम, लीची, अनार और नींबू जैसे बेशकीमती फलों में यह समस्या तब विकराल रूप लेती है जब कुदरत का मिजाज अचानक बदलता है. तापमान में भारी उछाल या झुलसा देने वाली लू और पोषक तत्वों की कमी भी इस बर्बादी की असली वजह है, जो न केवल फल की गुणवत्ता खत्म करती है बल्कि उसे बाजार में कौड़ियों के भाव ला खड़ा करती है. हालांकि यह संकट गहरा है, लेकिन सही बागान प्रबंधन और ठोस सुझावों से इस समस्या को पूरी तरह दूर किया जा सकता है.
बढ़ता तापमान अब फसलों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है. हीट स्ट्रेस का असर तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन यह पौधों के अंदर पोषक तत्वों का प्रवाह, परागण और वृद्धि को प्रभावित करता है. 35°C के बाद फसलें धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं. विशेषज्ञ किसानों को काओलिन स्प्रे, शेड नेट और सही बुवाई समय अपनाने की सलाह दे रहे हैं.
मध्य प्रदेश सरकार ने 2026-27 रबी सीजन में गेहूं MSP खरीद के लिए स्लॉट बुकिंग की तारीख 23 मई तक बढ़ाई. जानिए ई-उपार्जन पोर्टल पर स्लॉट बुक करने का आसान तरीका.
गर्मियों का मौसम है और बाजार में इस वक्त तरबूज, खरबूज, खीरा और ककड़ी आ गए हैं. लोग गर्मियों में इस फल का सबसे अधिक सेवन करना पसंद करते हैं. ऐसे में बाजार से सही फल खरीदना एक बड़ी चुनौती होती है क्योंकि अगर आप सही फलों का चयन नहीं कर पाते हैं तो खाने का मजा खराब हो सकता है.
इस साल मॉनसून के कमजोर रहने और सामान्य से कम बारिश के अनुमान के बीच किसानों के लिए अलर्ट जारी किया गया है. कम बारिश से फसलों, खासकर बागवानी और सब्जी फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में किसानों को सही फसल चयन, उन्नत पौध उत्पादन, खेती की पद्धतियों में बदलाव, जैविक खाद के उपयोग और पोषक तत्वों के छिड़काव जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी गई है, ताकि फसलों को सूखे से बचाया जा सके.
अचानक मौसम में हो रहे बदलाव के कारण लीची के बाग में इस कीट का हमला बढ़ गया है, जिससे फल के उत्पादन पर असर पड़ता है. ये कीट लीची के लिए बहुत खतरनाक होता है, जिससे फलों को भारी नुकसान होता है. आइए जानते हैं बचाव के उपाय.
मई-जून का महीना मिट्टी की जांच के लिए सबसे बेहतरीन है क्योंकि रबी और खरीफ की फसलों के बाद जमीन को दोबारा पोषण की जरूरत होती है. जिस तरह खून की जांच से इंसान की सेहत का पता चलता है, ठीक उसी तरह सॉइल टेस्ट से मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी या अधिकता की असलियत सामने आती है. बिना जानकारी के अंधाधुंध केमिकल उर्वरकों का इस्तेमाल न केवल आपकी लागत बढ़ाता है, बल्कि खेत को भी बंजर बनाता है.
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