पौधों की अच्छी ग्रोथ इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आपने कितना महंगा पौधा खरीदा है, बल्कि इस पर निर्भर करती है कि आपने उसे किस तरह की मिट्टी में लगाया है. ऐसे में आइए जानते हैं गमलों में पौधे लगाने से पहले मिट्टी को कैसे तैयार करें?
अर्का सावी गुलाब की खेती से किसान प्रति एकड़ 60 से 85 लाख रुपये तक कमा सकते हैं. जानें गुलाब की खेती का कुल खर्च, पौधों की संख्या, उत्पादन, कमाई का पूरा हिसाब और मुनाफा बढ़ाने के तरीके. शादी‑ब्याह के सीजन में गुलाब की खेती किसानों के लिए बेहतरीन आय का मौका बन जाती है.
पूसा, नई दिल्ली ने किसानों के लिए मौसम आधारित एडवाइजरी जारी की है. बढ़ते तापमान के मद्देनजर हल्की सिंचाई, मूंग‑उड़द की बुवाई के लिए उपयुक्त किस्में, सब्जियों में कीट नियंत्रण, गेहूं में रतुआ रोग प्रबंधन और भिंडी और अन्य सब्जियों की बुवाई को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं.
Climate change की वजह से इस बार आम के किसान परेशान हैं. उनके पेड़ों पर जनवरी माह में ही बौर आ चुके हैं, लेकिन फल अभी तक नहीं लग पाए हैं. अगर इस बार पेड़ों पर पर्याप्त फल नहीं लगे तो आम की मिठास लोगों को महंगी पड़ सकती है.
अचानक मौसम में हो रहे बदलाव के कारण लीची के बाग में कीटों का हमला बढ़ गया है, जिससे मंजर और फल के उत्पादन पर असर पड़ता है. ये कीट लीची के लिए बहुत खतरनाक होता है, जिससे फलों को भारी नुकसान होता है.
एक हेल्दी गार्डन बनाने के लिए सिर्फ पौधे रोपना या फिर बीज बोना ही काफी नहीं होता है, बल्कि प्लांट की सही तरह से देखभाल करनी होती है. कुछ पौधे सदाबहार होते हैं तो कुछ मौसम के मुताबिक रोपे जाते हैं, लेकिन गार्डनिंग के कुछ कॉमन नियम हर प्लांट की ग्रोथ के लिए फॉलो करने होते हैं तो चलिए जान लेते हैं ऐसे ही 5 रूल.
बाढ़ और जलभराव से गन्ने की फसल अक्सर गल जाती है, लेकिन सही तकनीक अपनाकर इस नुकसान से बचा जा सकता है. ट्रेंच विधि, जलभराव सहनशील किस्में और संतुलित पोषण से पैदावार और चीनी रिकवरी दोनों बेहतर हो सकती हैं. जानिए वो उपाय जो किसानों की आमदनी बढ़ा सकते हैं...
फरवरी में बढ़ते तापमान के बीच अरहर की फसल पर कुछ खतरनाक कीटों का खतरा बढ़ जाता है. अगर समय रहते इन कीटों से बचाव नहीं किया जाए, तो फलियां कमजोर हो जाती हैं और दानों की क्वालिटी खराब हो जाती है. आइए जानते हैं बचाव के उपाय.
PM Kisan Yojana के लाभार्थी 22वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन भुगतान से पहले यह पक्का कर लें कि आपका नाम बेनिफिशियरी लिस्ट में है. जिनका नाम सूची में नहीं है, उन्हें 2,000 रुपये की किस्त नहीं मिलेगी. किसान पोर्टल पर जाकर अपना स्टेटस आसानी से चेक कर सकते हैं. साथ ही e-KYC, आधार लिंकिंग, और जमीन के रिकॉर्ड अपडेट रखना जरूरी है, वरना पेमेंट अटक सकता है.
आम के मंजर के समय चींटियों, मिज कीट और गुजिया कीट का खतरा बढ़ जाता है. किसानों के लिए कपूर की टिकिया एक सस्ता और असरदार उपाय है, जिसकी गंध से चींटियां और कई कीट दूर रहते हैं. साथ ही मिज कीट और गुजिया कीट से बचाव के लिए डायमेथोएट और संशोधित ट्री-बैंडिंग तकनीक बेहद प्रभावी साबित होती है. सही समय पर नियंत्रण से बंपर पैदावार सुनिश्चित की जा सकती है.
मौसम में उतार-चढ़ाव और नमी बढ़ने से गेहूं और सरसों की फसलों पर फंगल और वायरल बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को पीला रतुआ, लीफ ब्लाइट, पाउडरी मिल्ड्यू, व्हाइट रस्ट और डाउनी मिल्ड्यू की पहचान और नियंत्रण के लिए विशेष सलाह जारी की है. सही समय पर फफूंदनाशकों का प्रयोग, संतुलित खाद और नियमित निगरानी से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है.
रबी सीजन में बोई गई प्याज में फरवरी महीने में मौसम में बदलाव के कारण उखड़ा रोग लगने का खतरा बना रहता है. ये रोग प्याज की फसल के लिए बहुत खतरनाक होता है. जिससे फसलों को भारी नुकसान होता है. ऐसे में बिहार के प्यजा किसानों के लिए बिहार कृषि विभाग ने एक एडवाइजरी जारी की है.
इस समय आम के बाग में बौर आ रहे हैं. आने वाले दिनों में पेड़ों पर फल बनेंगे, लेकिन अक्सर कीटों, बीमारियों और तेज धूप की वजह से फलों पर दाग-धब्बे पड़ जाते हैं और वे बेरंग दिखने लगते हैं, जिसके कारण बाजार में किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम नहीं मिल पाता. इस समस्या का सबसे आसान समाधान है 'फ्रूट बैगिंग', जो आम को जहरीले कीटनाशकों से बचाकर उसे पूरी तरह सुरक्षित और जहर-मुक्त बनाती है.
गेहूं की बुवाई से लेकर कटाई तक के सभी चरणों में ‘आखिरी सिंचाई’ सबसे महत्वपूर्ण होती है. ये वो समय होता है जब आप अपनी मेहनत का पूरा फल प्राप्त कर सकते हैं. यदि सही समय पर अंतिम पानी दिया जाए, तो दाने मोटे, चमकदार और वजनदार बनते हैं.
फरवरी आते ही जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, आम के बागों में बौर (मंजर) तेजी से निकलने लगे हैं. लेकिन ध्यान रहे, आम के घातक कीट आपके बाग पर घात लगाकर बैठे हैं. अगर इस नाजुक समय पर सावधानी नहीं बरती गई, तो ये रस चूसने वाले कीट पूरे साल की मेहनत को चंद दिनों में बर्बाद कर सकते हैं. समय रहते अगेती बौर को कीट और रोगों से बचाने का इंतजाम जरूर करें.
आम के मंजरों पर बुरा साया मंडरा रहा है. कभी फरवरी की अचानक बढ़ती गर्मी और कभी रातों की कड़ाके की ठंड ने किसानों की टेंशन बढ़ा दी है. इस बदलते मिजाज की वजह से मंजर समय से पहले पक रहे हैं या बीमारियों की भेंट चढ़ रहे हैं. डॉ. एस. के. सिंह की खास सलाह है कि ऐसे में घबराने के बजाय 'क्लाइमेट-स्मार्ट' तरीका अपनाएं. बागों में हल्की सिंचाई, मल्चिंग और बोरॉन-जिंक का सही छिड़काव करके आप इस नुकसान की छुट्टी कर सकते हैं.
खेती-किसानी में इस महीने किसानों को क्या करना चाहिए इस बात का भी ध्यान रखना काफी जरूरी होता है. ऐसे में बिहार कृषि विभाग की ओर से इस महीने किन फसलों में क्या करना है उसकी जानकारी दी गई है. आइए जानते हैं कि किसान फरवरी में क्या करें.
देश के लगभग हर हिस्से में किसान बैंगन की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं, लेकिन इसकी फसल में रोग और कीटों का खतरा हमेशा बना रहता है. कई बार कीड़े और बीमारियां इतनी तेजी से फैलती हैं कि पूरी फसल को नुकसान पहुंचा देती हैं. आइए जानते हैं बचाव का उपाय.
अगर आप चाहते हैं कि आपकी बालकनी हर मौसम में रंगीन, खूबसूरत और फ्रेश दिखे, तो आप इन 5 रंगीन पत्तियों वाले खास पौधों को अपनी बालकनी में लगा सकते हैं. आइए जानते हैं कौन से हैं वो पौधे.
अगर आप भी नीलगाय और आवारा पशुओं के आतंक से परेशान हैं तो उनको भगाने का एक बेहतरीन उपाय है, जो बहुत ही आसान और सस्ता है. इसे कोई भी किसान अपनाकर अपनी फसलों को बर्बाद होने से बचा सकता है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today