हिमाचल प्रदेश के सेब बागानों में अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट, मार्सोनिना लीफ ब्लॉच और अन्य रोगों के बढ़ते खतरे को देखते हुए नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है. विशेषज्ञों ने रोग पहचान, संतुलित पोषण प्रबंधन, मिट्टी-पत्ती जांच, जल निकासी व्यवस्था और फफूंदनाशकों के सही उपयोग पर जोर देते हुए सेब उत्पादकों को समय रहते बचाव उपाय अपनाने की सलाह दी है.
उत्तर प्रदेश में मॉनसून की गतिविधियां तेज होने के बीच उपकार ने किसानों के लिए नई फसल सलाह जारी की है. कम बारिश की स्थिति में धान, अरहर, उड़द, मूंग, तिल, गन्ना और मक्का की खेती के लिए जरूरी सुझाव दिए गए हैं. जानें जल संरक्षण, पोषण प्रबंधन, रोग-कीट नियंत्रण और अधिक उत्पादन के लिए विशेषज्ञों की अहम सलाह.
पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) और फिरोजपुर कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) ने किसानों को धान में फैल रही ‘राइस ड्वार्फ’ बीमारी को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है. विशेषज्ञों के अनुसार यह वायरस जनित रोग व्हाइट-बैक्ड प्लांट हॉपर कीट से फैलता है, जिससे पौधे बौने रह जाते हैं और पैदावार पर गंभीर असर पड़ता है. किसानों को नियमित रूप से खेतों की निगरानी करने, संक्रमित पौधों को हटाने और केवल विशेषज्ञों की सलाह पर ही कीटनाशकों का उपयोग करने की अपील की गई है.
मॉनसून के दौरान गन्ने की फसल में रेड स्ट्रिप और बैक्टेरियल टॉप रॉट जैसी जीवाणुजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर के वैज्ञानिकों ने किसानों को पत्तियों पर लाल-भूरी धारियों, गोफ के सड़ने, दुर्गंध आने और पौधों के बौनेपन जैसे शुरुआती लक्षणों की पहचान करने की सलाह दी है. वैज्ञानिकों के अनुसार, समय रहते कॉपर ऑक्सीक्लोराइड और उपयुक्त एंटीबायोटिक के छिड़काव, जलभराव रोकने और संक्रमित पौधों को नष्ट करने से फसल को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है.
धान की फसल के शुरुआती 30 दिन सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं. इसी दौरान कई कीट और रोग फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं. अगर किसान समय रहते इनकी पहचान कर सही उपाय अपनाएं, तो फसल को सुरक्षित रखकर बेहतर पैदावार और अधिक मुनाफा हासिल कर सकते हैं.
धान की रोपाई के 20 से 30 दिन बाद धान की फसल में इस खतरनाक रोग का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. अगर समय रहते इसके लक्षण पहचानकर सही बचाव नहीं किया गया, तो यह बीमारी पौधों की जड़ों को सड़ा देती है और पैदावार पर बुरा असर डाल सकती है. आइए जानते हैं इस रोग के शुरुआती लक्षण और बचाव के उपाय.
कपास में कलियां और फूल आने के दौरान यदि 10% फूल खराब या रोजेट (गुलाब के आकार के) दिखाई दें, तो यह गुलाबी सुंडी के प्रकोप का शुरुआती संकेत हो सकता है. ऐसे में किसान तुरंत वैज्ञानिक सलाह के अनुसार निगरानी बढ़ाएं और समेकित कीट प्रबंधन उपाय अपनाकर फसल को नुकसान से बचाएं.
खेती-किसानी में इस महीने किसानों को क्या करना चाहिए इस बात का भी ध्यान रखना काफी जरूरी होता है. ऐसे में बिहार कृषि विभाग की ओर से इस महीने किन फसलों में क्या करना है उसकी जानकारी दी गई है. आइए जानते हैं कि किसान जुलाई में क्या करें.
अल नीनो और जलवायु परिवर्तन के कारण मॉनसून में हो रही देरी को देखते हुए ICAR पटना के वैज्ञानिकों ने किसानों को पारंपरिक रोपाई के बजाय मशीनों से धान की सीधी बुवाई करने की सलाह दी है. किसान 15 जुलाई तक इस विधि से खेती कर सकते हैं.
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन में पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपाई किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है. इससे रोपाई की लागत लगभग आधी हो रही है, मजदूरों पर निर्भरता कम हो रही है और उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है. कृषि विभाग ने किसानों से आधुनिक कृषि यंत्र अपनाने की अपील की है.
जुलाई का महीना खरीफ फसलों जैसे , मक्का, बाजरा और उर्द -मूंग के लिए बहुत अहम होता है. बेहतर मुनाफे के लिए किसानों को उन्नत बीजों, सही खाद प्रबंधन और समय पर खरपतवार नियंत्रण पर ध्यान देना चाहिए. मक्का और बाजरे की बुआई सही दूरी और वैज्ञानिक तरीके से करें.अगर बाजरे की बुआई में देरी हो,तो सीधी बोनी के बजाय पौधों की रोपाई करना ज्यादा फायदेमंद रहता है.दलहनी फसलों के लिए अच्छे जल निकास वाले खेत चुनें.
मध्य प्रदेश के मंडला जिले में आरकेवीवाई-रफ्तार योजना की मदद से एक युवा उद्यमी ने मछली पालन को सफल स्टार्टअप में बदल दिया है.यहां फिश चिप्स, फिश टेंगल, लेमन मसाला फिश और फिश अचार जैसे हेल्दी वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी मांग मध्य प्रदेश के साथ-साथ बिहार सहित अन्य राज्यों में भी बढ़ रही है.
बरसात का मौसम पौधरोपण के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस समय मिट्टी में पर्याप्त नमी होने से पौधों की जड़ें तेजी से विकसित होती हैं. लेकिन यदि पौधे सही तरीके से नहीं लगाए जाएं या उनकी देखभाल में लापरवाही बरती जाए, तो वे सूख भी सकते हैं. ऐसे में अगर आप इस मॉनसून फलदार या अन्य पौधे लगाने की योजना बना रहे हैं, तो इन 6 जरूरी बातों का ध्यान रखें.
छत्तीसगढ़ की कृषक उन्नति योजना के तहत किसान अब पारंपरिक धान की खेती छोड़कर अदरक जैसी लाभकारी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं.सरगुजा के किसान अमित कुमार सिंह ने आधुनिक तकनीक से एक एकड़ में अदरक की खेती कर करीब 5 लाख रुपये की आय अर्जित की. सरकार प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता देकर फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रही है.
यूके से बिजनेस की पढ़ाई करने वाले भोपाल के युवा किसान हर्षित गोधा ने इजरायल की तकनीक अपनाकर 8.5 एकड़ में सफलतापूर्वक एवोकाडो की खेती शुरू की है. उन्होंने 5,000 पौधों की हाईटेक नर्सरी भी तैयार की है और अब देशभर के किसानों को पौधे व डिजिटल प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहे हैं.
खरीफ के मौसम में अरहर,मूंग और उर्द जैसी दलहनी फसलों की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं। इन फसलों पर उकठा, तना विगलन और पीला मोज़ेक जैसी खतरनाक बीमारियों का हमला हो जाता है.इन रोगों की वजह से पौधों का विकास रुक जाता है, पत्तिया पीली होकर सूख जाती हैं और फलियाँ या तो बनती नहीं हैं या उनमें दाने सिकुड़ जाते हैं.सही समय पर इलाज न होने से फसल पूरी तरह तबाह हो जाती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है
मॉनसून में लगातार बारिश से गन्ने की फसल को जलभराव, पोषक तत्वों की कमी और रेड रॉट जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. जानिए कृषि विशेषज्ञों द्वारा बताए गए गन्ने की देखभाल के 5 आसान और असरदार उपाय, सही खाद प्रबंधन, जल निकासी और रोग नियंत्रण की पूरी जानकारी, जिससे फसल सुरक्षित रहे और उत्पादन बढ़े.
सोयाबीन की फसल पर घोंघों का हमला किसानों के लिए नई चिंता बन गया है. रात के समय घोंघे कोमल पौधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे कई किसानों की फसल प्रभावित हो रही है. स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है.
बिहार में कमजोर मॉनसून और कम बारिश के कारण धान की नर्सरी तैयार करने और रोपाई में देरी हो रही है. मौसम विभाग ने जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश और अधिक तापमान की संभावना जताई है. ऐसे में किसानों को सूखा-सहनशील धान की किस्में अपनाने, वैकल्पिक फसलों की खेती करने, पानी बचाने वाली तकनीकों का उपयोग करने और पशुधन को गर्मी से बचाने की सलाह दी गई है.
महाराष्ट्र में जारी भारी मॉनसूनी बारिश को देखते हुए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने किसानों के लिए फसल एडवाइजरी जारी की है. कोंकण, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ के किसानों को धान, रागी, सोयाबीन, कपास, अरहर, मूंगफली और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई, रोपाई, जल निकासी और फसल सुरक्षा को लेकर जरूरी सलाह दी गई है. IMD ने भारी बारिश वाले क्षेत्रों में नई बुवाई टालने, खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने और सब्जियों और फलों की जल्द कटाई कर सुरक्षित भंडारण करने की सलाह दी है.
छत्तीसगढ़ के सुकमा की सोढ़ी तिरपो ने बिहान योजना और कस्टम हायरिंग सेंटर के प्रशिक्षण से हल-बैल छोड़ आधुनिक पावर टिलर अपनाया.जानिए कैसे आधुनिक खेती ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बना दिया.
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