उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत में मार्च की शुरुआत से ही पारा 35 डिग्री के पार पहुच गया है, जिसने गेहूं किसानों की चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय बढ़ती गर्मी 'हीट स्ट्रेस' पैदा कर सकती है, जिससे गेहूं के दाने समय से पहले सूखकर पिचक सकते हैं और पैदावार में भारी कमी आ सकती है. इस परेशानी से बचने के लिए पूसा के कृषि वैज्ञानिकों ने घबराने के बजाय कुछ जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दी है.
आम में बौर आने से लेकर टिकोले बनने तक की अवस्था सबसे नाजुक होती है, क्योंकि इस दौरान थोड़ी सी भी लापरवाही 85 से 95 प्रतिशत तक फूलों और शुरुआती फलों को नष्ट कर सकती है. अगर इस समय बढ़ते तापमान, खुश्क हवाओं और नमी की कमी पर ध्यान न दिया जाए, तो परागकण सूख जाते हैं जिससे निषेचन रुक जाता है और फल सेट नहीं हो पाते.
बढ़ते तापमान के बीच कृषि वैज्ञानिकों ने फसलों में हल्की सिंचाई, गेहूं में रतुआ निगरानी और सब्जियों में कीट प्रबंधन को लेकर अहम सलाह दी है. मूंग-उड़द की बुवाई और बीज उपचार को लेकर जानें सलाह...
इस बेस्ट गार्डनिंग टिप्स से जमीन के ऊपर क्यारियां बनाकर बागवानी की जा सकती है. यह खराब मिट्टी और शारीरिक समस्याओं वाले लोगों के लिए बेस्ट है. सही धूप, 10-12 इंच गहराई और जैविक मिश्रण के साथ इस तकनीक से शानदार उपज ली जा सकती है.
होली खुशियों और रंगों का त्योहार है, लेकिन बाजार के केमिकल वाले रंग स्किल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि घर पर नेचुरल तरीके से होली के रंग कैसे बनाएं.
खरीफ प्याज के भंडारण के लिए सबसे ज्यादा किसानों को परेशान होना पड़ता है. ऐसे में बांदा कृषि विश्वविद्यालय ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जिससे किसान घर बैठे ही बहुत कम लागत में अपनी प्याज को सड़ने से बचा सकेंगे.
पौधों की अच्छी ग्रोथ इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आपने कितना महंगा पौधा खरीदा है, बल्कि इस पर निर्भर करती है कि आपने उसे किस तरह की मिट्टी में लगाया है. ऐसे में आइए जानते हैं गमलों में पौधे लगाने से पहले मिट्टी को कैसे तैयार करें?
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