धान की कटाई के बाद किसान गेहूं की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं. ऐसे में अच्छी पैदावार के लिए उन्नत किस्मों का चुनाव करना जरूरी है. आइए जानते हैं गेहूं की कुछ अगेती किस्मों की खासियत, बुवाई का सही समय.
गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए बुवाई से पहले खेत की सही तैयारी करना बेहद जरूरी है. कृषि विभाग ने किसानों को खेत तैयार करने के 4 जरूरी तरीके बताए हैं. इन तरीकों को अपनाकर किसान बंपर पैदावार ले सकते हैं.
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के किसान गुरु पवार ने स्वीट कॉर्न की खेती से अपनी किस्मत बदल दी. परासिया के बिचकवाड़ा गांव के गुरु पवार करीब 70 एकड़ में स्वीट कॉर्न उगाकर लगभग 40 लाख रुपये की शुद्ध आय हासिल कर चुके हैं.
ओडिशा में 15 से 22 अक्टूबर तक बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है, जबकि बंगाल की खाड़ी और निकोबार क्षेत्र में चक्रवात बनने की आशंका जताई गई है. मौसम विभाग ने धान, दलहन, भिंडी, बैंगन और गन्ना उत्पादक किसानों के लिए सिंचाई, जल निकासी और कीट-रोग प्रबंधन को लेकर विशेष कृषि सलाह जारी की है.
प्याज की खेती से अच्छी कमाई करना चाहते हैं तो किसान अक्टूबर में उन्नत किस्मों की नर्सरी तैयार कर सकते हैं. ये किस्में अच्छी पैदावार और बेहतर भंडारण क्षमता के लिए जानी जाती हैं.
धार जिले के किसान सुमित भाटिया ने ‘परियोजना जल धारा’ के तहत ड्रिप सिंचाई, प्लास्टिक मल्चिंग और ट्रेलिसिंग तकनीक अपनाकर अपनी खेती की तस्वीर बदल दी. पारंपरिक मक्का-कपास की खेती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने 1.5 एकड़ जमीन से होने वाली सालाना कृषि आय ₹72 हजार से बढ़ाकर ₹2 लाख से ₹2.5 लाख तक पहुंचाई.
बीना तहसील के ग्राम पुरेना के किसान अनमोल दुबे ने पारंपरिक खेती से हटकर रोजल हिबिस्कस की औषधीय खेती शुरू की.बिना रासायनिक खाद और दवाओं के जैविक एवं प्राकृतिक तरीके से तैयार फसल अब फ्लावरिंग स्टेज पर पहुंच चुकी है.कृषि विभाग ने खेत का निरीक्षण कर इसे किसानों के लिए प्रेरणादायक मॉडल बताया.
सिंचाई पानी की संभावित कमी को देखते हुए श्रीगंगानगर और आस-पास के क्षेत्र में कृषि विभाग ने किसानों को रबी सीजन में फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह दी है. विभाग ने कम पानी में तैयार होने वाली सरसों, चना और जौ की जलवायु अनुकूल किस्मों की बुवाई पर जोर दिया है.
बालाघाट के सुरेंद्र जैतवार ने RAD योजना का लाभ लेकर खेती को विविधीकृत कृषि मॉडल में बदला. एक ही खेत में मछलीपालन, मुर्गीपालन, पशुपालन, फलोद्यान, हल्दी, सिंघाड़ा और जिमीकंद जैसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं. खेत में 100 से अधिक फलदार और उपयोगी पौधे भी लगाए गए हैं.
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में आत्मनिर्भरता दलहन मिशन के तहत 55 हेक्टेयर में छत्तीसगढ़ अरहर-1 और अरहर-2 किस्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है. फसल फूल आने की अवस्था में पहुंच गई है. कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों को फसल प्रबंधन, पोषण, कीट नियंत्रण और गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन की तकनीकी जानकारी दे रहे हैं.
कपास की फसल में गुलाबी सुंडी, सफेद मक्खी, जैसिड, माहू और थ्रिप्स जैसे कीटों को लेकर किसानों को नियमित निगरानी की सलाह दी गई है. जानिए गुलाबी सुंडी का ETL क्या है और इसके नियंत्रण के लिए किसानों को कौन से IPM उपाय अपनाने चाहिए.
लहसुन की खेती किसानों के लिए कम समय में तैयार होने वाली और अच्छी आमदनी देने वाली फसल बन सकती है. बिहार कृषि विभाग ने किसानों को उन्नत किस्म की खेती की सलाह दी है. इसकी फसल करीब 120 से 135 दिन में तैयार हो जाती है.
महासमुन्द के गुलझर गांव के किसान गौरव कुठारे ने धान के साथ ग्राफ्टेड बैंगन की खेती अपनाकर आमदनी बढ़ाई.राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से मिले 30 हजार रुपये के अनुदान और ड्रिप-मल्चिंग तकनीक की मदद से एक एकड़ में करीब 23 टन बैंगन का उत्पादन कर लगभग 2.65 लाख रुपये की सकल आमदनी हासिल की.
बालाघाट के कारंजा में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत किसानों को धान में तना छेदक, माहू और शीथ ब्लाइट की पहचान व नियंत्रण की जानकारी दी गई. किसानों को जीवामृत, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र के उपयोग के साथ जैविक एवं अनुशंसित रासायनिक उपाय बताए गए.
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