सोयाबीन की फलन और पॉड निर्माण अवस्था में चारकोल रॉट, गर्दन सड़न, पॉड ब्लाइट और राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट का खतरा बढ़ सकता है. कृषि वैज्ञानिकों ने रोगों की पहचान और फफूंदनाशक के उपयोग की अनुशंसा बताई है.
किसान अंकित ने खेती को आधुनिक व्यवसाय के रूप में अपनाने की दिशा में पहल की है.जमीन-पानी का बेहतर नियोजन, सरकारी योजनाओं का लाभ और कृषि गतिविधियों में नवाचार के जरिए उनका खेत ग्रामीण उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रहा है.
ओडिशा में 10 सितंबर 2026 के दौरान सामान्य से अधिक बारिश की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग ने किसानों को धान समेत अलग-अलग फसलों में जलभराव से बचाव, उर्वरक और कीटनाशकों के उपयोग में सावधानी और फसल प्रबंधन के लिए विशेष कृषि सलाह जारी की है.
सितंबर का महीना धान की फसल के लिए बेहद अहम है. इस समय धान में बालियां निकलने और दाने बनने शुरू हो जाते हैं, ऐसे में रोग और कीट फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. बिहार कृषि विभाग ने किसानों को इस दौरान खेत की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है.
दिल्ली-एनसीआर में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के बढ़ते मामलों के बीच, गाजियाबाद के उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. हरिवंश सिंह ने सूअर पालकों और आम जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है. लोगों में यह एक आम गलतफहमी है कि यह बीमारी सिर्फ सूअरों से ही फैलती है, जबकि कई असल वजह और भी है.
मूंग-उड़द की फसल में पीतशिरा रोग और फली छेदक कीट के प्रकोप से किसान परेशान हैं.पाटन के रोंझा गांव में कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने मौके पर पहुंचकर बीमारी की पहचान और फसल बचाने के उपाय बताए.धान और मक्का में कीट नियंत्रण की सलाह भी दी गई.
शाजापुर में सोयाबीन की फसल पर पीला मोजेक और कीट व्याधि को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने कई गांवों का दौरा किया. खेतों का निरीक्षण कर किसानों को रोगग्रस्त पौधों को हटाने, सफेद मक्खी-एफिड की रोकथाम और कीट नियंत्रण के लिए जरूरी सलाह दी गई.
लंदन की नौकरी छोड़कर भारत लौटे केमिकल इंजीनियर शुभम सिंह ने खेतों की पराली को अपना बिजनेस मॉडल बना लिया. मुरैना के क्रास्ट स्टार्टअप में पराली से पेपर, पैकेजिंग और ग्रीन बोर्ड तैयार किए जा रहे हैं. इससे किसानों को पराली से कमाई का मौका मिल रहा है.
धान की फसल को 1 से 2 महीने पूरे होने के बाद कीट का खतरा बढ़ गया है. ऐसे में किसानों को खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए. अगर पत्तियां मुड़ने लगें, तना कमजोर हो या बालियां सफेद और सूखी दिखाई दें, तो तुरंत सतर्क होने की जरूरत है.
धान की फसल में कीटों के संभावित प्रकोप को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है. डॉ. पी. के. राय ने नियमित निगरानी, प्रभावित पौधों को हटाने, कीटों के संरक्षण और जरूरत पड़ने पर ही अनुशंसित मात्रा में कीटनाशी इस्तेमाल करने की सलाह दी है.
छत्तीसगढ़ में सतावर की खेती किसानों के लिए कम लागत में अतिरिक्त आमदनी का नया जरिया बन रही है. धमतरी, कांकेर और कोंडागांव के 65 किसान करीब 140 एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं.
बस्तर की महिलाओं ने ऑर्गेनिक काजू और गुड़ से बिना शक्कर वाली खास काजू-कतली तैयार की है. वन धन विकास केंद्र, बकावंड की स्व-सहायता समूह की महिलाओं के इस नवाचार को वन मंत्री केदार कश्यप ने सराहा.बस्तर दशहरा और दीपावली पर ‘संजीवनी’ आउटलेट के जरिए इसकी बिक्री की तैयारी है.
मध्यप्रदेश में बारिश, सूखा, ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से फसल नुकसान का जोखिम बढ़ रहा है. ऐसे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का अहम सहारा है.लेकिन सरकारी आंकड़े और किसानों की शिकायतें नुकसान के आकलन, क्लेम प्रक्रिया और भुगतान में देरी को लेकर कई सवाल खड़े करती हैं.
बीजापुर में गाजर घास के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए सात दिवसीय जागरूकता एवं उन्मूलन अभियान चलाया गया. किसानों और विद्यार्थियों को गाजर घास से फसल, पशु और स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान के साथ इसके सुरक्षित उन्मूलन के तरीके बताए गए.
सागर के बीना विकासखंड के ग्राम बेलई में किसान विवेक दुबे ने डेढ़ एकड़ में वर्मी कम्पोस्ट और जैविक खाद निर्माण इकाई शुरू की है. 40-50 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना में 100 से अधिक बेड तैयार किए गए हैं और रोजाना 1 टन जैविक खाद उत्पादन का लक्ष्य है.
जबलपुर के युवा हृदेश राय ने कोरोना काल में करीब 12 लाख रुपये सालाना कमाई वाली आईटी नौकरी छोड़कर वर्मी कंपोस्ट का कारोबार शुरू किया। छोटे स्तर से शुरू हुआ यह काम आज करीब 1.5 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर तक पहुंच चुका है। हृदेश ने अकेले कारोबार बढ़ाने के बजाय 26-27 किसानों को अपने साथ जोड़ा और उनकी तैयार वर्मी कंपोस्ट को बाजार उपलब्ध कराया। आज किसानों के नेटवर्क से सालाना 6 हजार टन से ज्यादा वर्मी कंपोस्ट का कारोबार होता है, जिसकी सप्लाई देश के कई राज्यों तक की जा रही है।
ग्राफ्टेड बैंगन की आधुनिक खेती ने किसान सुरेंद्र की कमाई बढ़ाने का नया रास्ता खोला.144 क्विंटल बैंगन उत्पादन से उन्हें ₹2.39 लाख का शुद्ध लाभ हुआ। कम लागत में बेहतर उत्पादन और अच्छी आमदनी के लिए ग्राफ्टेड तकनीक किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है.
विदिशा जिले के करीब 70 किसानों ने भोपाल स्थित भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान में उन्नत कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण लिया. किसानों ने मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग, नरवाई प्रबंधन और सोयाबीन की उन्नत तकनीकों को समझा.साथ ही कार्बन क्रेडिट के जरिए भविष्य में अतिरिक्त आय की संभावनाओं की जानकारी भी दी गई.
आईसीएआर-सीआरआरआई, कटक ने धान किसानों के लिए विस्तृत कृषि सलाह जारी की है. संस्थान ने अगस्त के दूसरे पखवाड़े तक धान की रोपाई पूरी करने, किस्मवार उर्वरक प्रबंधन अपनाने और कीट-रोग नियंत्रण के लिए समय पर उपाय करने की सलाह दी है. किसानों को जिंक और बोरॉन की कमी दूर करने के साथ ही स्टेम बोरर, लीफ फोल्डर, ब्राउन प्लांटहॉपर और शीथ ब्लाइट जैसे प्रमुख कीट-रोगों की निगरानी करने को कहा गया है.
वाराणसी के किसानों को आधुनिक खेती की ओर बढ़ाने के लिए भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान ने ग्राफ्टेड बैंगन के पौधे वितरित किए.जानिए ग्राफ्टेड बैंगन की खासियत, इससे मिलने वाले फायदे और किसानों के लिए यह तकनीक क्यों महत्वपूर्ण है.
आजीविका डबरियों और नवा तरिया में करीब 1 लाख मछली के बीज डाले जा रहे हैं. इससे 45 गांवों के 50 परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा. इस पहल से मछली उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण परिवारों के लिए कमाई और रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे.
जीपीएम जिले के ग्राम मडना में राष्ट्रीय मिशन-ऑयल पाम के तहत 8 हेक्टेयर भूमि में 1,144 ऑयल पाम पौधों का रोपण शुरू किया गया.किसानों को शासकीय अनुदान के साथ तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है, जिससे फसल विविधीकरण और दीर्घकालीन आय के नए अवसर बढ़ेंगे.
अगस्त में मूंगफली की फसल को थोड़ी अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है. इस समय खेत में खरपतवार तेजी से बढ़ते हैं, जो फसल के पोषक तत्व और नमी कम कर सकते हैं. ऐसे में बिहार कृषि विभाग ने भी किसानों को इस समय इन जरूरी कृषि कार्यों पर ध्यान देने की सलाह दी है.
गन्ने के खेतों में प्लास्सी बोरर कीट का खतरा बढ़ रहा है, जिससे किसानों की फसल बर्बाद हो सकती है, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही या जोखिम उठाने से बचना चाहिए, क्योंकि प्लास्सी बोरर कीट बहुत तेजी से फसल को अंदर से खोखला कर देता है. इसलिए पूरी तरह सतर्क रहकर कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों द्वारा बताए गए मैकेनिकल, जैविक और रासायनिक उपायों को ही सही समय पर अपनाना चाहिए.
जशपुर के किसान अनारथ साय ने एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय एकीकृत कृषि प्रणाली, फसल विविधीकरण, उद्यानिकी और संरक्षित खेती को अपनाने पर जोर दिया है.उनका मानना है कि उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और आधुनिक तकनीक से खेती का जोखिम कम कर सालभर आय के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं.
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