दिसंबर का महीना लिली की खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस समय तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है से तेज अंकुरण और फूल आने के लिए आदर्श है. ठंडे मौसम में पौधे स्वस्थ रहते हैं और फूलों का आकार बड़ा आता है. जनवरी के अंत या फरवरी में फूल तैयार हो जाते हैं, जब बाजार में फूलों की कीमतें अधिक होती हैं.
बिहार सरकार ने बंद चीनी मिलों को चालू करने का फैसला किया है, जिससे गन्ना किसानों के लिए नए अवसर मिलेंगे. सोनपुर मेले में विभाग ने गन्ना के साथ लहसुन, प्याज, आलू, मटर, सरसों व सब्जियों की सहफसली मॉडल दिखाए, जो किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेंगे.
पंजाब के किसान मंजीत सिंह ने खेती का एक ऐसा 'स्मार्ट मॉडल' तैयार किया है जो पारंपरिक खेती से कहीं ज्यादा फायदेमंद है. इस तकनीक में नवंबर महीने में 'लो टनल' विधि का इस्तेमाल कर एक ही खेत में एक साथ कई फसलों बुवाई की जाती है. इससे आमदनी का ऐसा चक्र चलता है कि जनवरी से जून तक बंपर पैदावार मिलती है और लगातार कमाई होती रहती है.
दिल्ली–एनसीआर और उत्तरी भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच एक्सपर्ट्स ने चेताया है कि खराब AQI केवल इंसानों ही नहीं, बल्कि मवेशियों के लिए भी बेहद हानिकारक है. प्रदूषण से पशुओं में सांस की समस्या, आंखों में जलन, त्वचा रोग और प्रजनन क्षमता पर असर देखा जा रहा है. विशेषज्ञों ने पशुपालकों को आहार, देखभाल और बचाव के जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दी है.
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जीरा–4 किस्म जल्दी पकने वाली वैरायटी है, जो औसतन 100 से 120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है. इसकी खासियत यह है कि यह रोगों के प्रति काफी हद तक प्रतिरोधी है जिससे फसल का जोखिम कम हो जाता है. जहां सामान्य किस्में 6–7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक देती हैं, वहीं जीरा–4 किस्म करीब 8–10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन देने की क्षमता रखती है.
देश के अलग-अलग कृषि जलवायु क्षेत्रों के लिए रबी मौसम की नई कृषि सलाह जारी हुई है, जिसमें चना और गेहूं की बुवाई की तैयारी, सरसों में पहली सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, बीज उपचार, सब्जियों की रोपाई और पशुपालन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्देश शामिल हैं.
कृषि वैज्ञानिकों ने उत्तर भारत के किसानों को बसंत–ग्रीष्म सीजन के लिए टमाटर की नर्सरी तैयार करने की सलाह दी है. पूसा आधारित उच्च उत्पादक किस्में, संतुलित खाद प्रबंधन, सही दूरी पर रोपाई और रोग नियंत्रण उपाय अपनाकर किसान अधिक उपज और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.
घर पर आने वाला दूध शुद्ध है या मिलावटी, यह जानना अब आसान है. FSSAI के बताए सरल घरेलू तरीकों से आप सिर्फ 30 सेकेंड में दूध में पानी, डिटर्जेंट, स्टार्च और यूरिया जैसी मिलावट की पहचान कर सकते हैं. ये आसान टेस्ट आपकी सेहत को सुरक्षित रखने में मदद करेंगे.
इस मौसम में आलू की खेती कर रहे किसानों के लिए एक्सपर्ट्स ने ‘माउंडिंग अप’ यानी अर्थिंग तकनीक अपनाने की सलाह दी है. पौधों के बेस पर मिट्टी या कंपोस्ट चढ़ाने से ग्रोथ बढ़ती है, देर से पड़ने वाले पाले से बचाव होता है और जहरीले हरे कंद बनने का खतरा भी कम हो जाता है.
आयुर्वेद में सोया बड़ी को पौष्टिक आहार की श्रेणी में रखा गया है. आयुर्वेद में सोया बड़ी को भारी, कम तेलीय और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाला कहा गया है. ये शरीर में वात को बैलेंस करता है, लेकिन अगर ज्यादा मात्रा में इसका सेवन किया जाए तो ये शरीर में पित्त की प्रवृत्ति को बढ़ा देता है.
भाकरवड़ी एक स्पाइसी, क्रिस्पी और रोल्ड स्नैक है, जिसे खास मसालों से भरा जाता है. सामान्य तौर पर इसे मैदा से बनाया जाता है, लेकिन यहां ज्वार, चने के आटे और दालों के मिश्रण से तैयार किया जाता है, जिससे यह पौष्टिक और हेल्दी बन जाती है.
पुदीने की पत्तियों में मौजूद मेंथॉल गैस, कब्ज, इनडाइजेशन और भारीपन को कम करता है. साथ ही, यह मौसमी फ्लू, खांसी और जुकाम में भी राहत देता है, क्योंकि यह गले को साफ करता है और शरीर को अंदर से डिटॉक्स करता है. पुदीने की चाय सर्दियों में शरीर को गर्माहट देती है और साइनस या ठंडे मौसम में होने वाली बंद नाक की समस्या में बेहद उपयोगी है.
इस फोटो गैलरी में पांच बेहतरीन सुपरफूड दिखाए गए हैं जो सर्दियों में आपके शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करते हैं. गुड़, अदरक, शहद, सूखे मेवे और घी के फायदों को आसान भाषा में बताया गया है, जो ठंड से बचाने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं.
पूसा, नई दिल्ली ने खरीफ के अवशेष प्रबंधन, गेहूं और सरसों की बुवाई, सब्जियों की किस्मों के चयन और खेत प्रबंधन को लेकर किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है. सलाह में पराली न जलाने, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, रोग-कीट नियंत्रण और समय पर बुवाई पर विशेष जोर दिया गया है.
ज्वार जिसे अंग्रेजी में Sorghum कहते हैं, एक प्राचीन अनाज है. आज की बदलती लाइफस्टाइल और डाइट के लिए बढ़ती अवेयरनेस ने इसे एक सुपरफूड का दर्जा दे दिया है. ग्लूटेन-फ्री होने के साथ-साथ यह फाइबर, प्रोटीन, आयरन और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होता है. डायबिटीज और वेटलॉस करने वालों के लिए यह बेहद फायदेमंद माना जाता है.
Horticulture Crop Tips: हिमाचल में ठंड और कोहरे का असर बढ़ने से फलदार पौधों पर खतरा बढ़ गया है. उद्यान विभाग ने आम, लीची, पपीता, अमरूद जैसे पौधों को बचाने के लिए कई उपाय सुझाए हैं. जानिए एक्सपर्ट ने फसलों के बचाव के लिए क्या-क्या जानकारी दी...
ज्वार से बने ये स्वीट बिस्किट हेल्दी बेकिंग का शानदार विकल्प हैं. मुलायम आटा, हल्की मिठास और कम फैट के साथ यह रेसिपी बच्चों और बड़ों सभी के लिए ideal है. रोज़ाना स्नैकिंग के लिए एक पौष्टिक और स्वादिष्ट चुनाव!
मौसम के मौजूदा हालात को देखते हुए पूसा कृषि वैज्ञानिकों ने रबी फसलों की बुवाई, उर्वरक प्रबंधन, बीज उपचार, सब्जी खेती, पराली प्रबंधन और रोग नियंत्रण को लेकर विस्तृत दिशा–निर्देश जारी किए हैं, ताकि किसान समय पर खेती करके अधिक पैदावार ले सकें.
गुलाब के पौधे को ऐसी जगह रखें जहां उसे दिन के कम से कम चार से छह घंटे की धूप मिल सके. सर्दियों में धूप कमजोर हो जाती है, इसलिए पौधे को धूप वाले स्थान पर शिफ्ट करना जरूरी है. अगर आप गमले में पौधा लगा रहे हैं, तो इसे घर की छत, बालकनी या ऐसी जगह रखें जहां दोपहर तक धूप पड़ती हो. कम धूप मिलने पर पौधे में फंगल इन्फेक्शन की संभावना बढ़ जाती है और फूल भी कम आते हैं.
सोरघम पेड़ा एक हेल्दी, झटपट बनने वाली और बेहद स्वादिष्ट मिठाई है. ज्वार फ्लेक्स, घी और शक्कर से तैयार यह पेड़ा त्योहारों और खास मौकों के लिए परफेक्ट है. आसान स्टेप्स के साथ यह रेसिपी हर किसी के लिए बनाना सरल और स्वाद में लाजवाब है.
सर्दियों में मनी प्लांट की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और ग्रोथ धीमी हो जाती है. सही जगह पर रखने, हफ्ते में 1-2 बार पानी देने, पत्तियों पर हल्का स्प्रे करने और प्राकृतिक खाद इस्तेमाल करने से आपका मनी प्लांट सर्दियों में भी हरा-भरा और स्वस्थ रहेगा. आसान और असरदार देखभाल टिप्स अपनाएं.
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