फरवरी के महीने में आमतौर पर सुबह और शाम को ठंडी हवाएं और सर्द मौसम रहता है, लेकिन इस साल मौसम के पैटर्न में तेज़ी से बदलाव देखा जा रहा है, जिससे गेहूं किसानों में काफी चिंता है. आइए जानते हैं गेहूं किसान फरवरी के महीने में क्या करें.
जायद सीजन में किसानों को मूंग के बजाय मूंगफली और उड़द की खेती करने की सलाह. कृषि विभाग ने उन्नत किस्मों, बुवाई समय और उत्पादन की पूरी जानकारी दी.
फरवरी का महीना किचन गार्डनिंग के लिए बेहद खास माना जाता है. इस समय मौसम न ज्यादा ठंडा होता है और न ही ज्यादा गर्म, जिससे सब्जियों की ग्रोथ अच्छी होती है. अगर आप घर की छत, बालकनी या गार्डन में ताजगी और हेल्दी सब्जियां उगाना चाहते हैं, तो फरवरी सही समय है.
गुलाब की खूबसूरती और इसकी लाजवाब खुशबू के कारण इसे फूलों का राजा भी कहते हैं. कई किसान गुलाब की खेती करके लाखों की आमदनी कमा रहे हैं. बता दें कि शहरों में भी कई लोग अपने घर के गार्डन में भी फूल लगाना काफी पसंद करते हैं, इससे उनके बागवानी के शौक भी पूरे हो जाते हैं और घर भी फूलों की खुशबू से महक उठता है.
जनवरी की ठंड के बाद फरवरी का सुहावना मौसम किसानों के लिए खेती का सुनहरा मौका लेकर आया है. गन्ना, सूरजमुखी, भिंडी, टमाटर समेत जायद और नकदी फसलों की बुवाई-रोपाई के साथ राज्यवार कृषि कार्यों की पूरी सलाह.
अगर आप भी चाहते हैं कि आपकी बालकनी या छत पर रखा हर गमला फूलों से लदा रहे और आपको माली की तरह घंटों मेहनत भी न करनी पड़े, तो आज इन 5 पौधे को अपनी नर्सरी में लगा सकते हैं.
गन्ने की खेती में सबसे बड़ी समस्या इसकी 12 महीने की लंबी अवधि है, जिसके कारण किसानों को अपनी कमाई के लिए साल भर इंतजार करना पड़ता है. ऊपर से चीनी मिलों द्वारा भुगतान में देरी किसानों की आर्थिक कमर तोड़ देती है. इसी समस्या का हल है फरवरी-मार्च में गन्ने के साथ इंटरक्रॉपिंग करना. अगर किसान गन्ने की दो लाइनों के बीच खाली जगह में कुछ खास फसलों को लगाते हैं, तो उन्हें मात्र 100 दिनों के अंदर नकद आमदनी मिलनी शुरू हो जाती है.
आज का अर्बन गार्डन सिर्फ मिट्टी और पौधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लाइफस्टाइल, स्ट्रेस-रिलीफ, शुद्ध हवा और घर की खूबसूरती का भी हिस्सा बन चुका है. ऐसे में आइए जानते हैं कौन से हैं वो बेस्ट आइडिया.
फरवरी का महीना लीची के बागवानों के लिए एक ऐसी नाजुक घड़ी है जहां एक छोटी सी चूक भी पूरी साल की कमाई को तबाह कर सकती है. इस समय मंजर आने की प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन अगर किसान ने अनजाने में सिंचाई कर दी, तो पेड़ 'धोखा' दे सकते हैं और फूलों की जगह केवल बेकार पत्तियां निकल आएंगी.
इस सर्दी आम के बाग की अनदेखी करना फसल के लिए घातक हो सकता है, क्योंकि इसी समय पेड़ यह तय करता है कि वह फल देगा या सिर्फ पत्तियां. अगर किसान इस दौरान वैज्ञानिक स्प्रे और सही पोषण का ध्यान नहीं रखते, तो कोहरे और नमी के कारण 'पाउडरी मिल्ड्यू' जैसी फफूंद और 'भुनगा कीट' पूरे मंजर को काला कर सुखा देते हैं.
जनवरी के आखिरी सप्ताह में हुई बेमौसम बारिश ने उत्तर भारत के किसानों के लिए मिली-जुली स्थिति पैदा कर दी है. जहां यह बारिश गेहूं की फसल के लिए 'अमृत' बनकर आई है और दानों की चमक और पैदावार बढ़ाने में मदद करेगी. वहीं आलू और सरसों के किसानों के लिए इसने बड़ी चिंता खड़ी कर दी है. सरसों के खेतों में पानी भरने से फूल झड़ने और पैदावार घटने का खतरा है, तो आलू की फसल पर 'पछेती झुलसा' जैसे रोगों का साया मंडरा रहा है.
वर्तमान में आम के बागों में बौर आने का बेहद नाजुक समय चल रहा है, लेकिन यही वह घड़ी है जब घातक बौर नुकसान पहुंचाने वाले कीट और रोग ताक में रहते हैं. सीआइएसएच, रहमानखेड़ा के वैज्ञानिकों के अनुसार, अगर इस समय सही प्रबंधन नहीं किया गया तो ये कीट और रोग बौर का रस चूसकर उसे काला कर देते हैं और देखते ही देखते मंजर सूखकर गिर जाते हैं, जिससे साल भर की मेहनत के बाद भी पैदावार कम हो सकती है.
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