देश के कई राज्यों में शीतलहर और पाले का खतरा बढ़ गया है. कृषि विभाग ने रबी और सब्जी फसलों को नुकसान से बचाने के लिए सिंचाई, धुआं, मल्चिंग और छिड़काव से जुड़ी अहम सलाह जारी की है.
राजस्थान के डूंगरपुर जिले के किसान अब्बासी चिखली ने मुर्गी पालन के क्षेत्र में एक कमाल का देसी और सस्ता इलाज खोजा है. उन्होंने रसोई में मिलने वाली चीजों जैसे — हल्दी, अदरक, लहसुन, अजवाइन, काली मिर्च और गुड़ का इस्तेमाल करके एक खास हर्बल काढ़ा तैयार किया है. यह काढ़ा मुर्गियों के लिए 'सुरक्षा कवच' का काम करता है और उन्हें रानीखेत व ई-कोलाई जैसी कई खतरनाक बीमारियों से बचाता है. सबसे बड़ी बात यह है कि 100 मुर्गियों की एक हफ्ते की खुराक का खर्च मात्र 45 रुपये आता है.
जनवरी का समय आम के पेड़ों के लिए 'प्री-फ्लावरिंग' यानी बौर आने से ठीक पहले का सबसे अहम चरण होता है. क्योंकि यही वह समय है जब पेड़ अपनी पूरी ऊर्जा फल देने के लिए जुटाता है. इस नाजुक अवधि में की गई थोड़ी सी मेहनत और सही वैज्ञानिक प्रबंधन यह तय करता है कि आपके बाग में बौर कितना आएगा और आने वाले फलों की क्वालिटी कैसी होगी. अगर किसान इस दौरान एक्सपर्ट द्वारा बताए गए कीट नियंत्रण मिट्टी की जुताई और पोषक तत्वों के छिड़काव जैसे उपायों को गंभीरता से अपनाते हैं, तो न केवल बौर स्वस्थ निकलता है, बल्कि फूलों के झड़ने की समस्या भी खत्म हो जाती है.
स्ट्रॉबेरी ठंडे मौसम की फसल है और जनवरी का तापमान इसके लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस समय लगाए गए पौधों में रोग कम लगते हैं और फल की क्वालिटी भी बेहतर होती है. सही देखभाल के साथ मार्च से मई के बीच तुड़ाई शुरू हो जाती है. स्ट्रॉबेरी के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी रहती है. खेत की अच्छी तरह जुताई करके उसे भुरभुरा बना लें.
बगीचे में अगर सब्जियों की खेती कर रहे हैं तो आपको ऐसा उर्वरक चुनना होगा जिसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम का उच्च स्तर हो. नाइट्रोजन हरी पत्तियों और तनों को बनाने में मदद करता है, फॉस्फोरस जड़ों के विकास में मदद करता है. वहीं पोटेशियम पौधे को गर्मी या ठंड से होने वाले तनाव का सामना करने में मदद करता है.
फूलगोभी ठंडी जलवायु की फसल है. इसकी अच्छी बढ़वार के लिए 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त माना जाता है. बहुत ज्यादा ठंड या पाला पड़ने से फूल की गुणवत्ता खराब हो सकती है. इसलिए उत्तर भारत में अक्टूबर से नवंबर के बीच इसकी रोपाई सबसे बेहतर रहती है. फूलगोभी की खेती के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है.
अगर आप होम गार्डनिंग का शौक रखते हैं तो प अपने पौधों में कुछ खास खादों को डाल सकते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाकर पौधों को जड़ से मजबूत बनाती हैं. साथ ही ये खाद ठंडी और गर्म दोनों मौसम के लिए बेस्ट है, ताकि मौसम और पौधे की जरूरत के हिसाब से आप इन 5 खादों को चुनें.
कई राज्यों में शीतलहर का असर देखा जा रहा है. इस बीच आलू की फसल पर पाला का खतरा मंडराने लगा है. पाला से अपनी फसल को बचाने के लिए किसान कई अलग-अलग प्रयोग करते हैं. लेकिन उन किसानों को बता दें कि राख भी आलू की फसल को पाला से बचाने में काफी कारगर है.
प्राकृतिक खेती में मल्चिंग सबसे बड़ा फर्टिलाइजर है. मिट्टी को घास, पुआल या दूसरे तरीकों से ढकने से पानी की कमी कम होती है, खरपतवार नहीं उगते, मिट्टी बहुत ज्यादा गर्म या ठंडी नहीं होती और केंचुए जैसे जीव एक्टिव रहते हैं. मल्च धीरे-धीरे गलकर ह्यूमस बनाता है जिससे मिट्टी की फर्टिलिटी बढ़ती है. कवर की वजह से रोशनी की कमी से खरपतवार नहीं उग पाते.
बिहार और झारखंड में किसानों को अपनी मक्के की फसल में फॉल आर्मीवर्म कीट के हमले से परेशानी हो रही है. यह कीट फसल की पत्तियों और दानों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे पैदावार 80-85% तक कम हो सकती है. कीट की पहचान करके और समय पर रोकथाम के उपाय करके किसान अपनी फसल को बचा सकते हैं. कीट की पहचान कैसे करें और उसे रोकने के आसान तरीके जानें.
नीलगाय किसानों के लिए रबी सीजन में बड़ी समस्या बन गई है. कुछ किसानों ने अपने गेहूं के खेत की मेढ़ पर सूर्यमुखी लगाकर नीलगाय से फसल बचाने का आसान और देसी तरीका खोजा. यह पर्यावरण के अनुकूल तरीका बिना खर्चे के फसल सुरक्षित रखता है और अतिरिक्त आमदनी का भी मौका देता है.
गेहूं की बुवाई के साथ एक बड़ा खतरा भी होता है कीट और रोगों का, जो लग जाए तो पूरी फसल को बर्बाद कर सकता है. किसान अक्सर तब तक खतरे को समझ नहीं पाते जब तक नुकसान बड़ा न हो जाए, इसलिए जरूरी है कि गेहूं में लगने वाले प्रमुख रोग और कीटों की समय पर पहचान और सही उपाय किया जाए.
देश के अधिकांश हिस्सों में गेहूं की बुवाई अब संपन्न हो गई है. वहीं, अभी पड़ रही ठंड और कोहरा गेहूं की फसल के लिए संजीवनी साबित हो रहा है. ऐसे में जिन किसानों ने अभी तक बुआई के बाद खाद नहीं डाला है उन्हें भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल ने सलाह दी है.
जौ की फसल तेज बढ़वार वाली जरूर है, लेकिन सही जल प्रबंधन और खरपतवार नियंत्रण न हो तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है. सीमित सिंचाई में बेहतर उपज कैसे लें और किन दवाओं से खरपतवार पर काबू पाया जाए, इससे जुड़ी अहम जानकारी किसानों के लिए बेहद काम की है.
जनवरी के महीने में पड़ने वाली ठंड में ही स्ट्रॉबेरी का पौधा अच्छी तरह बढ़ता है. यह फल स्वाद में बेहतरीन होने के साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. लोग इसे महंगा फल समझकर घर में लगाने से कतराते हैं, जबकि सही तरीका अपनाने पर कम मेहनत में घर बैठे अच्छी पैदावार मिल सकती है. आइए जानते हैं कैसे.
Tamatar Ki Kheti: टमाटर की खेती का सही समय शुरू हो चुका है. अगर बुआई से लेकर रोपाई और पोषक तत्व प्रबंधन में जरा सी चूक हुई तो मुनाफा प्रभावित हो सकता है. एक्सपर्ट्स ने टमाटर की बेहतर पैदावार के लिए कुछ अहम सलाह दी है, जिसे जानना हर किसान के लिए जरूरी है.
Gehu Ki Kheti: गेहूं की पहली सिंचाई के तुरंत बाद खेत में बढ़ी नमी और मध्यम तापमान फसल के लिए सबसे बड़ा जोखिम बन जाता है. यही वह समय है जब पीला रस्ट, पत्ती झुलसा और जड़ सड़न जैसे खतरनाक रोग तेजी से फैलते हैं, जिससे फसल की पैदावार में 20 से 40 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ सकती है. पढ़ें पूरी जानकारी...
सर्दी का मौसम आते ही शरीर की जरूरतें भी बदल जाती हैं. ठंड, कोहरा और गिरता तापमान इम्युनिटी पर सीधा असर डालता है.ऐसे में खान-पान में थोड़ी-सी समझदारी कई बड़ी बीमारियों से बचा सकती है. आयुर्वेद और पोषण विशेषज्ञ भी सर्दियों में इन पांच चीजों के सेवन की सलाह दी गई है. इन खास प्राकृतिक चीजों को रोजमर्रा की डाइट में शामिल करके आप ठंड के असर को कम कर शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रख सकते हैं.
कोहरे के मौसम में वातावरण में नमी बहुत अधिक हो जाती है. यह नमी मिट्टी में लंबे समय तक बनी रहती है जिससे जड़ों में सड़न का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा धूप कम मिलने से पौधे का फोटोसिंथेसिस प्रभावित होता है. फंगल इंफेक्शन, पत्तियों पर सफेद या काले धब्बे और तने का कमजोर होना, ये सभी समस्याएं सर्दियों में आम हैं. हल्दी को प्राकृतिक एंटीसेप्टिक और एंटीफंगल माना जाता है.
टमाटर की जड़ें गहरी जाती हैं, इसलिए कंटेनर कम से कम 12 से 15 इंच गहरा होना चाहिए. कंटेनर के नीचे पानी निकासी के लिए 3–4 छेद जरूर बनाएं, ताकि पानी जमा न हो. जमा पानी जड़ों को सड़ा सकता है. प्लास्टिक, मिट्टी या लोहे का कोई भी कंटेनर चल सकता है, बस वह साफ होना चाहिए. टमाटर के लिए हल्की, भुरभुरी और पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी जरूरी होती है.
Chickpea Farming Tips: चने की फसल में उकठा रोग किसानों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. यह रोग धीरे-धीरे पूरे खेत में फैलकर पौधों को सुखा देता है. जानिए इस पर एक्सपर्ट ने क्या सुझाव दिए.
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