ओडिशा में धान खरीद व्यवस्था को लेकर बुलाए गए बंद का असर मिला-जुला रहा. कई इलाकों में परिवहन और बाजार प्रभावित हुए, जबकि सरकार ने इसे नाकाम बताया. किसान संगठनों ने MSP, बिचौलियों और स्मार्ट मीटर जैसे मुद्दों पर नाराजगी जताई.
नासिक से मुंबई की ओर बढ़ रहा किसान मजदूर लॉन्ग मार्च तीसरे दिन भी जारी रहा. मंत्रालय में सरकार से बातचीत हुई, लेकिन जमीन और वन अधिकारों पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ. वहीं, आंदोलनकारी मांगों पर अमल से पहले लौटने को तैयार नहीं हैं.
उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लोग और किसान संगठन यूजीसी गाइडलाइन के खिलाफ सड़क पर उतरकर विरोध कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने सरकार को ज्ञापन देकर कहा कि यह गाइडलाइन समाज और छात्रों के लिए हानिकारक है. युवा और किसान इसे खत्म करने या इसमें संशोधन करने की मांग कर रहे हैं.
महाराष्ट्र के छह बार उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव, विवादों और सत्ता संतुलन से भरा रहा. जानिए बारामती के जमीनी नेता के तौर पर उनका करियर, बयानबाजी, गठबंधन राजनीति और एनसीपी के भविष्य पर असर.
पुणे जिले में विमान हादसे की खबरों के बीच अजित पवार से जुड़ी चर्चाएं तेज हो गईं. जानिए किसानों के लिए उनकी भूमिका, बेमौसम बारिश से हुए नुकसान, मुआवजे पर सरकार का रुख और इस पूरे मुद्दे पर विपक्ष की प्रतिक्रिया.
नवंबर 2025 में अजित पवार जिनके पास वित्त मंत्रालय भी था, उन्होंने किसानों की कर्ज माफी पर सवाल उठाया और कहा कि सरकार कितनी बार किसानों के कर्ज माफ करेगी. साथ ही उन्होंने ये सवाल भी उठाया कि क्या इस तरह की वित्तीय रियायतें देना सही है? पवार ने किसानों से वित्तीय अनुशासन अपनाने और अपने संसाधनों का अधिक समझदारी से इस्तेमाल करने की अपील की थी.
महाराष्ट्र की राजनीति में प्याज एक बार फिर गेम चेंजर साबित हुई. एनसीपी नेता और उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने स्वीकार किया कि प्याज निर्यात पर प्रतिबंध से किसानों में नाराजगी बढ़ी और 2019 व 2024 के लोकसभा चुनावों में महायुति को भारी नुकसान हुआ. जानिए कैसे प्याज नीति ने चुनावी नतीजों की दिशा बदली.
महाराष्ट्र में एक बार फिर किसानों का नासिक से मुंबई तक लॉन्ग मार्च शुरू हुआ है. CPM के नेतृत्व में 30 हजार किसान महीने भर का राशन लेकर मुंबई की ओर बढ़ रहे हैं. कर्जमाफी, जमीन के अधिकार, शक्तिपीठ हाईवे और स्मार्ट मीटर योजना रद्द करने समेत कई मांगों को लेकर यह आंदोलन 2–3 फरवरी को मुंबई पहुंचेगा.
बीजू जनता दल ने ओडिशा में किसानों को लेकर सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया है. BJD ने BJP सरकार पर किसानों की कथित खराब हालत को लेकर हमला बोला है, और आंदोलन करने की योजना बनाई है.
नासिक से मुंबई तक किसान और मजदूरों का लॉन्ग मार्च निकला. करीब 30 हजार लोग महिनेभर का राशन लेकर अपनी मांगें पूरी करने के लिए आंदोलन में शामिल हुए. वे जमीन, रोजगार, पोर्ट और हाईवे जैसी मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं. इस मार्च ने शहर का ट्रैफिक भी प्रभावित किया और लोगों की आवाज़ को मजबूती दी.
CPI(M) और ऑल इंडिया किसान सभा की लीडरशिप में, 55,000 किसानों ने नासिक में एक बड़ा मार्च निकाला. किसान अपने अधिकारों की मांग के लिए एक साथ आए. मुख्य मुद्दों में फॉरेस्ट राइट्स एक्ट (FRA), PESA (पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरियाज़ एक्ट), सिंचाई योजनाएं, स्कूलों में खाली पदों को भरना और केंद्र और राज्य सरकारों की कॉर्पोरेट नीतियों का विरोध करना शामिल था. यह मार्च पालघर में शुरू हुए किसानों के संघर्षों की कड़ी को आगे बढ़ाता है.
चार लेबर कोड, बिजली संशोधन विधेयक और किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा और सेंट्रल ट्रेड यूनियनों का राष्ट्रव्यापी आंदोलन.
महाराष्ट्र में किसानों और मजदूरों की लंबित मांगों को लेकर सियासत गरमा गई है. सीपीआईएम ने ठाणे-पालघर और नासिक के आंदोलनों के बाद अब नासिक से मुंबई तक बड़े लॉन्ग मार्च का ऐलान किया है.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार MGNREGA को उसी सोच के तहत खत्म करना चाहती है, जैसे उसने तीन कृषि कानून लागू किए थे. राष्ट्रीय MGNREGA मजदूर सम्मेलन में उन्होंने मजदूरों से किसानों की तरह एकजुट होकर सरकार पर दबाव बनाने की अपील की और दावा किया कि एकता के दम पर मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल कराया जा सकता है.
महाराष्ट्र के पालघर में वाधवन बंदरगाह के विरोध में माकपा के नेतृत्व में किसानों और आदिवासियों का लॉन्ग मार्च कलेक्टर कार्यालय पहुंचा, ठिय्या आंदोलन से प्रशासनिक संकट और यातायात बाधित हुआ.
ऐसी भी जानकारी है कि कुछ दूसरी जगहों पर भी महिलाओं ने योजना के पैसे न मिलने पर विरोध प्रदर्शन किया है. दिलचस्प बात है कि बुलढाणा जिले में जल्द ही पंचायत के चुनाव होने हैं. कुल साढ़े छह लाख से ज्यादा महिलाएं इस स्कीम का फायदा उठा रही हैं. लेकिन प्रशासनिक वेरिफिकेशन के दौरान e-KYC प्रोसेस में मिली गलतियों की वजह से करीब 30 हजार महिलाओं की किश्तें रोक दी गई हैं.
न्यूजीलैंड से सेब आयात पर ड्यूटी 50% से घटाकर 25% किए जाने के विरोध में हिमाचल किसान मंच और सेब बागवानों ने शिमला में राज्य सचिवालय का घेराव किया. किसानों ने FRA लागू करने समेत 14 सूत्रीय मांगों के साथ चक्का जाम कर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया.
पालघर जिले में वाधवन और मुरबे बंदरगाह परियोजनाओं के खिलाफ 15 हजार से अधिक मछुआरों और आदिवासियों ने जिला कलेक्टर कार्यालय पर भव्य मोर्चा निकाला. आंदोलनकारियों ने परियोजनाओं को आजीविका और पर्यावरण के लिए विनाशकारी बताते हुए रद्द करने की मांग की.
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने धान खरीदी को लेकर किसानों को भरोसा दिलाया है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि पात्रता के अनुसार किसानों का एक-एक दाना धान खरीदा जाएगा. उन्होंने किसानों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि सभी किसानों का धान खरीदा जाएगा.
किसानों की मांगों को लेकर जयपुर कूच की तैयारी कर रहे RLP संयोजक हनुमान बेनीवाल ने अचानक आंदोलन स्थगित कर दिया. देर रात प्रशासन से हुई बातचीत में अवैध बजरी खनन और मुआवजे को लेकर क्या भरोसा मिला, यही इस फैसले की बड़ी वजह बनी.
नया बीज बिल बीज कंपनियों को भारत में बड़ी छूट देता है. बिना गुणवत्ता जांच विदेशी बीजों की एंट्री से देसी बीज, छोटे किसान और पारंपरिक खेती खतरे में पड़ सकती है. इससे खेती की लागत बढ़ने, कॉरपोरेट कंट्रोल देश की खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
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