आंध्र प्रदेश विशाखापत्तनम के किसान वी. गणेश ने धान की खेती को आसान और सस्ता बनाने के लिए एक शानदार 'जुगाड़' किया है. इससे धान में नर्सरी तैयार करने और रोपाई का झंझट पूरी तरह खत्म हो गया है. नतीजा यह है कि किसान को प्रति एकड़ कई हजार रुपये की बचत हो रही है और मजदूरों के पीछे भागने की भी जरूरत नहीं.
पंजाब के जालंधर में आने वाले चरके गांव के किसान 54 साल के अमरजीत सिंह भंगू ने अपने पूरे खेत में ऑर्गेनिक खेती शुरू कर दी है. उन्होंने एक ऐसा कस्टमर बेस बनाया है जो अब पूरे पंजाब में फैला हुआ है. यह कस्टमर बेस इतना मजबूत है कि उनके प्रोडक्ट्स, खासकर गुड़, शक्कर (गुड़ का पाउडर) और हल्दी, मार्च 2027 तक बुक हो चुके हैं. स्थिति ऐसी है कि वह बढ़ती डिमांड को पूरा नहीं कर पा रहे हैं.
कर्नाटक के गदग जिले के अनुभवी किसान सुरेश मल्लप्पा ने कबाड़ और स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके एक अद्भुत 'सुपर मशीन' बनाई है, जो छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है. यह तीन पहियों वाली डीजल चालित मशीन खेती के तीन सबसे मुख्य काम, जुताई, निराई और कीटनाशक छिड़काव, बेहद आसानी से कर देती है.
जम्मू-कश्मीर एक किसान, ने अपनी सूझबूझ और 'देसी जुगाड़' से खेती को आसान बना दिया है. उन्होंने देखा कि पहाड़ी और ऊबड़-खाबड़ खेतों में बड़े ट्रैक्टर चलाना मुश्किल और महंगा है. इसलिए, उन्होंने अपने 18 साल के अनुभव का इस्तेमाल करते हुए डीजल के इंजन और बनावट में कुछ खास बदलाव किए. उनका यह मॉडिफाइड हल न केवल संकरे और छोटे खेतों में आसानी से घूमता है, बल्कि डीजल भी बचाता है.
स्थानीय अनुभव और पारंपरिक ब्रीडिंग से बनी दोनों किस्मों को अधिक यील्ड, मजबूत शेल्फ लाइफ, बेहतर स्टोरेज और रोग-प्रतिरोधक क्षमता के लिए पहचान मिली. 13 राज्यों के किसानों से भी मिला पॉजिटिव फीडबैक.
दंतेवाड़ा के किसान तुलसीराम मौर्य ने प्राकृतिक खेती अपनाकर खेतों की उर्वरता बढ़ाई है. अब उनकी खेती की लागत घटने और उत्पादन से बढ़िया फायदा हो रहा है. वे श्री विधि से कुटकी, कोसरा, रागी और सब्ज़ियों की सफल खेती कर रहे हैं. पढ़ें उनकी सफलता की कहानी...
जैसलमेर के किसान दिलीप सिंह गहलोत ने खेती में एक ऐसा चमत्कार किया है जिसे देखकर कृषि वैज्ञानिक भी हैरान हैं. उन्होंने गेहूं की एक नई 'जादुई' किस्म DG II तैयार की है, जिसकी बाली की लंबाई 11 इंच तक है, जबकि आम गेहूं की बाली सिर्फ 3-4 इंच की होती है. सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि इस नई किस्म से किसानों को दोगुनी पैदावार मिलेगी.
किसान ने नेचुरल खेती अपनाकर कम लागत में ज़्यादा मुनाफ़ा कमाया. देसी चावल, SRI तरीका और ऑर्गेनिक चीज़ों से मिट्टी उपजाऊ हुई और परिवार की सेहत बेहतर हुई. गांव का चैंपियन किसान बनकर, उसने दूसरों को केमिकल-फ़्री खेती का रास्ता दिखाया, जो हर किसान के लिए एक प्रेरणा है.
कर्नाटक के 10वीं पास गिरीश बद्रागोंड ने अपनी सूझबूझ से कमाल कर दिया है. उन्होंने चने की खेती के लिए एक अनोखा 'सोलर ट्रिमर' बनाया है, जो बिना पेट्रोल या बिजली के सिर्फ धूप से चलता है. जहां मजदूर दिन भर में मुश्किल से 1 एकड़ कटाई कर पाते थे, यह मशीन 4 एकड़ तक का काम चुटकियों में निपटा देती है.
पंजाब के किसान मंजीत सिंह ने खेती का एक ऐसा 'स्मार्ट मॉडल' तैयार किया है जो पारंपरिक खेती से कहीं ज्यादा फायदेमंद है. इस तकनीक में नवंबर महीने में 'लो टनल' विधि का इस्तेमाल कर एक ही खेत में एक साथ कई फसलों बुवाई की जाती है. इससे आमदनी का ऐसा चक्र चलता है कि जनवरी से जून तक बंपर पैदावार मिलती है और लगातार कमाई होती रहती है.
बोकारो के एक छोटे से गांव के प्रोग्रेसिव किसान गुप्तेश्वर महतो को मंडप मेथड और मल्चिंग टेक्निक के लिए जाना जाता है. इसी टेक्निक की मदद से आज वह 1.5 एकड़ जमीन पर खीरे की खेती कर रहे हैं. इस मॉडर्न तरीकों से अब वह घर बैठे दोगुना प्रॉफिट कमा रहे हैं. एक किसान परिवार से आने वाले गुप्तेश्वर कई सालों तक महाराष्ट्र में कंस्ट्रक्शन सेक्टर में मजदूर के तौर पर काम करते थे.
मुजफ्फरपुर के शशि भूषण तिवारी, जिन्हें ‘मशरूम मैन’ कहा जाता है, ने संघर्षों के बीच मशरूम खेती शुरू कर आज करोड़ों की कमाई वाला बिज़नेस खड़ा किया. कभी ₹1200 नौकरी करने वाले तिवारी आज हर महीने 50–60 लाख रुपये कमाते हैं. उनकी कहानी सच्ची प्रेरणा है.
जम्मू-कश्मीर के सुंदरबनी और नौशेरा में कृषि विभाग 100% ऑर्गेनिक सब्जी खेती को बढ़ावा दे रहा है. किसानों को वर्मी कम्पोस्ट यूनिट, हाई-टेक पॉलीहाउस और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिल रहा है. इससे स्थानीय किसानों की आय बढ़ रही है और सालभर प्राकृतिक तरीके से सब्जियां उगाई जा रही हैं.
राजस्थान के धौलपुर में किसान राम लखन गुर्जर ने उद्यान विभाग की मदद से बंजर 18.5 बीघा जमीन को उपजाऊ बना दिया. उन्हें सोलर प्लांट, फार्म पोंड, ड्रिप और वेंचुरी जैसी सुविधाओं पर सब्सिडी मिली. उन्होंने तीन बीघा में नींबू और एक बीघा में मौसमी का बगीचा लगाया है, जिससे सालाना करीब चार लाख रुपये की कमाई हो रही है. अब उन्होंने सरसों, गेहूं, चारा और कपूर के पौधे भी उगा रहे हैं.
हरियाणा के किसान हरबीर सिंह ने अपनी सूझबूझ से खेती को मुनाफे का सौदा बना दिया है. उन्होंने 1 एकड़ से भी कम जमीन से शुरुआत कर, देसी तरीकों से सब्जी पौधो के लिए हाईटेक नर्सरी तैयार की है जो आज 16 एकड़ में फैली है. आज उनके तैयार किए पौधे भारत के कई राज्यों के साथ-साथ विदेश तक जाते हैं.
नासिक में मौजूद सह्याद्री फार्म्स, भारत की सबसे बड़ी किसान कोऑपरेटिव है, जिसने 14 सालों में सरकार को मिले पैसे से चार गुना ज़्यादा दिया है. यह मॉडल दिखाता है कि अगर किसान खेती को एक बिज़नेस के तौर पर अपनाएं तो खुशहाली मुमकिन है. जानें कि कैसे सह्याद्री ने 30,000 किसानों को जोड़कर फल और सब्ज़ी के बिज़नेस में नई ऊंचाईयां हासिल की हैं, और इसके प्रोडक्ट 42 देशों तक पहुंच रहे हैं.
हरियाणा के एक प्रगतिशील किसान ने पारंपरिक खेती में बीज पर होने वाले भारी खर्च और उसकी कमी की समस्या को सुलझाने के लिए एक नायाब तरीका खोजा है. उनका यह तरीका एक तकनीक है जो न केवल सस्ती है, बल्कि इससे गन्ने की पैदावार और मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है. यह विधि विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए वरदान के समान है.
एक अनुभवी किसान भूपिंदर सिंह बाजवा ने खेती में एक क्रांतिकारी 'देसी जुगाड़' खोजा है. उन्होंने यूरिया की भारी लागत और बर्बादी को रोकने के लिए एक 'सीक्रेट घोल' तैयार किया. इससे यूरिया हवा में नहीं उड़ता और न ही पानी में बहता है. नतीजा यह हुआ कि अब खेत में आधी यूरिया डालने पर भी फसल को पूरा पोषण मिलता है, पैदावार बंपर होती है साथ ही मिट्टी की सेहत भी सुधरती है.
बिहार के एक किसान ने अपनी खास सोच और मेहनत से बिहार में उगने वाले पुराने धान की एक किस्म को मशहूर कर दिया है. इस बड़ी पहचान का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिला है. क्योंकि अब यह धान इतना मशहूर हो गया है कि इसकी कीमत पहले से चार गुना ज़्यादा हो गई है. पहले यह धान शायद इतना प्रसिद्ध नहीं था, लेकिन अब GI टैग मिल गया है.
मछली पालकों के लिए तालाब में चारा डालना और दवा छिड़कना एक बड़ी चुनौती थी. इसमें चारा बर्बाद होता था और पानी गंदा होने से मछलियाँ बीमार पड़ती थीं. इस समस्या को हल करने के लिए, एक किसान ने 'देसी जुगाड़' से एक सस्ती 'पैडल नाव' बनाई है. यह नाव कबाड़ में पड़ी प्लास्टिक की कैन, लोहे के फ्रेम और साइकिल के हिस्सों से बनी है.
UP News: यूपी सरकार की वाइनरी पॉलिसी बनवाने में अहम रोल अदा करने वाले बरेली के किसान अनिल साहनी ने बताया कि सरकार को छोटे किसानों को मदद करना चाहिए. क्योंकि महाराष्ट्र का किसान कभी नहीं चाहेगा कि यूपी में अंगूर की खेती हो. इससे उनके बिजनेस पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा.
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