जशपुर के किसान अनारथ साय ने एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय एकीकृत कृषि प्रणाली, फसल विविधीकरण, उद्यानिकी और संरक्षित खेती को अपनाने पर जोर दिया है.उनका मानना है कि उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और आधुनिक तकनीक से खेती का जोखिम कम कर सालभर आय के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं.
जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा की आसिया अकबर ने सीमित जगह में खेती को कमाई का जरिया बनाया है. घर के अंदर मशरूम उत्पादन से शुरुआत करने के बाद उन्होंने छत पर सब्जियां, मसाले और पौध तैयार करना शुरू किया. कृषि विभाग के मार्गदर्शन से उनका काम आगे बढ़ा और अब वह इससे हर महीने करीब 35 से 40 हजार रुपये तक कमा रही हैं.
जबलपुर की महिला किसान शीला कुशवाहा ने पारंपरिक खेती से हटकर प्राकृतिक खेती को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में सफलता हासिल की है. डेढ़ एकड़ में गेहूं, चना और विभिन्न सब्जियों की खेती के साथ वे बीजामृत और जीवामृत का उपयोग कर रही हैं. जैविक हाट में बेहतर कीमत मिलने से उनकी आमदनी बढ़ी है.
सहारनपुर के 71 वर्षीय किसान आदित्य त्यागी ने देसी गाय के गोबर से सम्भरानी कप बनाकर अनोखा कारोबार खड़ा किया है. रिटायर्ड फॉरेस्ट रेंजर आज हर महीने लाखों रुपये कमा रहे हैं. उनके पर्यावरण अनुकूल धूनी कप देशभर में ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक रहे हैं, जिससे कई लोगों को रोजगार भी मिला है.
UP News: उन्होंने बताया कि पति, दो बच्चों और सास-ससुर के साथ रहकर पहले घर और खेत से जुड़े कामों को संभालती थीं, बता दें कि श्वेता के पति तहसील में नौकरी कर रहे हैं, लेकिन परिवार के बढ़ते खर्च के बीच श्वेता भी आर्थिक जिम्मेदारियों में हाथ बंटाना चाहती थीं. इसी दौरान ग्राम पंचायत की समूह सखी से उन्हें पशु सखी कार्यक्रम की जानकारी मिली.
धार के बदनावर का रूपाखेड़ा गांव आधुनिक संरक्षित खेती की मिसाल बनकर उभरा है. यहां 44 पॉलीहाउस में गुलाब, जरबेरा, लिलियम समेत विदेशी फूलों और 13 शेडनेट हाउस में उन्नत सब्जियों की खेती हो रही है.MIDH योजना और आधुनिक तकनीक ने किसानों की खेती और आमदनी की तस्वीर बदल दी है.
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के किसान संतोष कुमार सिंह ने धान के साथ अदरक की खेती कर महज पौन एकड़ जमीन से करीब 4.5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया.उनकी सफलता से प्रेरित होकर अब उन्होंने अदरक की खेती का रकबा बढ़ाकर एक एकड़ कर दिया है.
मुंगेली के रोहराकला गांव की आदर्श महिला स्व-सहायता समूह ने प्राकृतिक बीजों से पर्यावरण-अनुकूल राखियां बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है. बिहान योजना के सहयोग से महिलाओं को इस सीजन में 30 से 40 हजार रुपये अतिरिक्त आय की उम्मीद है.
रायगढ़ के किसान सुखदेव सिदार ने धान का रकबा घटाकर 4 एकड़ में सन बीज की खेती शुरू की है. इस खेती से करीब 4 लाख रुपये आय की उम्मीद है. कृषक उन्नति योजना, जैविक खेती और डेयरी मॉडल के जरिए वे फसल विविधीकरण की प्रेरक मिसाल बने हैं.
महाराष्ट्र के जालना जिले के पिठोरी सिरसगांव के 27 से 30 किसानों ने सामूहिक खेती अपनाकर ऑर्गेनिक भिंडी की खेती शुरू की है. उनकी भिंडी जर्मनी, जापान और इंग्लैंड समेत कई देशों में निर्यात हो रही है. कंपनी खेत से ही फसल खरीदती है, जिससे किसानों को बेहतर दाम और बाजार की चिंता से राहत मिली है.
Organic Farming Story: विनोद आगे बताते हैं कि मिलावटी और महंगाई के इस जमाने में शुद्ध फलों को खाएंगे और मोहल्ले के लोगों को भी खिलाएंगे. उन्होंने बताया कि उनके पास इतनी बड़ी तादाद में आम, अनार, जामुन, चीकू, करौंदा, टमाटर, बैंगन, लौकी, हरी मिर्च, नींबू, भिंडी, करेला और तमाम दूसरी सब्जियों हो जाती हैं.
छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की महिला किसान विमला दीदी ने आईएफसी के प्रशिक्षण के बाद मचान विधि से बरबटी की खेती अपनाकर उत्पादन और आय दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है.उनकी सफलता अब अन्य महिला किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है.
जबलपुर के किसान कृष्ण कुमार सिंह लोधी ने पारंपरिक खेती छोड़ ईरानी अकरकरा जैसी औषधीय फसल अपनाकर नई मिसाल पेश की है.कम पानी, कम लागत और 6-8 महीने में तैयार होने वाली इस फसल से उन्हें बेहतर मुनाफे की उम्मीद है और अब दूसरे किसान भी इससे प्रेरित हो रहे हैं.
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के किसान महादेव मौर्य ने राइस ट्रांसप्लांटर मशीन से 16 एकड़ में धान की रोपाई कर खेती में नई मिसाल पेश की है.सरकार से 4 लाख रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद उन्होंने 9 लाख की मशीन खरीदी, जिससे रोपाई की लागत प्रति एकड़ 7-8 हजार रुपये से घटकर 2-2.5 हजार रुपये रह गई.
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के किसान हेमचंद साहू ने धान की पारंपरिक खेती छोड़ गेंदा फूल की खेती अपनाई.ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक की मदद से सिर्फ 0.48 हेक्टेयर में उन्होंने करीब 2 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाकर नई मिसाल पेश की.
बिहार के किशनगंज जिले के किसान हंसराज नखत ने ड्रैगन फ्रूट की खेती में ड्रिप सिंचाई और प्राकृतिक मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर सफलता की नई मिसाल पेश की है. इन तकनीकों की मदद से उन्होंने न केवल उत्पादन 12 टन से बढ़ाकर 16 टन प्रति हेक्टेयर किया, बल्कि शुद्ध आय भी हासिल की.
छत्तीसगढ़ की कृषक उन्नति योजना ने सरगुजा के किसान रामसाय की जिंदगी बदल दी. धान बोनस की 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि से ट्रैक्टर खरीदकर उन्होंने खेती को आधुनिक बनाया.अब खेती समय पर हो रही है, लागत घटी है और आय बढ़ने की उम्मीद भी मजबूत हुई है.
अरुणाचल प्रदेश के एक किसान ने बंजर जमीन को कमाई का जरिया बनाकर मिसाल पेश की है. आईसीएआर (ICAR) के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में अपनी बंजर जमीन पर जैविक असम नींबू का बाग तैयार किया. आज यही बाग उन्हें अच्छी पैदावार और मुनाफा दे रहा है.
नीमच के किसान हरीश पाटीदार ने पारंपरिक खेती छोड़कर गुलाब, गेंदा और ड्रैगन फ्रूट की खेती अपनाई और आधुनिक तकनीकों की मदद से अपनी आय कई गुना बढ़ाई है. 7 एकड़ में बागवानी फसलों से उन्हें हर साल लाखों रुपये का मुनाफा हो रहा है. पढ़ें सफलता की कहानी...
सरगुजा की महिला किसान एरिन भगत ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में जीवामृत और वर्मी कम्पोस्ट अपनाकर रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम की है. जैविक खेती से उनकी लागत घटी है, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ी है और वे अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गई हैं.
मध्य प्रदेश जैविक खेती में देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है. खरगौन के किसान अनिल वर्मा ने सफेद मूसली की खेती से बेटे को अमेरिका में AI की पढ़ाई के लिए भेजा, जबकि किसान अविनाश दांगी 54 एकड़ में जैविक खेती कर 13 राज्यों में अपने उत्पाद बेच रहे हैं.
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