अयोध्या की ग्रामीण महिलाएं सोलर ऊर्जा की मदद से आत्मनिर्भर बन रही हैं. स्वयं सहायता समूह से 30 हजार रुपये का ऋण लेकर आरती, देवकी दुबे और क्रांति देवी ने आटा चक्की और तेल निकालने का कारोबार शुरू किया है.
सिवनी की महिला उद्यमी ज्योति ठाकुर ने PMFME योजना की मदद से ‘जेके फूड’ नाम से खाद्य प्रसंस्करण इकाई शुरू की.9.55 लाख रुपये के ऋण और 3.34 लाख रुपये की अनुदान राशि से शुरू हुए कारोबार में केले और आलू के चिप्स के बाद अब नमकीन भी तैयार किए जा रहे हैं.
धार जिले के किसान सुमित भाटिया ने ‘परियोजना जल धारा’ के तहत ड्रिप सिंचाई, प्लास्टिक मल्चिंग और ट्रेलिसिंग तकनीक अपनाकर अपनी खेती की तस्वीर बदल दी. पारंपरिक मक्का-कपास की खेती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने 1.5 एकड़ जमीन से होने वाली सालाना कृषि आय ₹72 हजार से बढ़ाकर ₹2 लाख से ₹2.5 लाख तक पहुंचाई.
Grapes Cultivation Story: दुहाई इंडस्ट्रियल एरिया की रहने वाली मंजू कश्यप ने बताया कि लाल मोती अंगूर (Red Pearl Grapes) लाल रंग के, बिना बीज वाले (Seedless) अंगूरों की एक खास और आकर्षक किस्म है. जब इसकी बेल पर फल लगते हैं, तो चमकीले लाल रंग के अंगूर बड़े-बड़े गुच्छों में इस तरह लटकते हैं कि वे बिल्कुल लाल मोतियों जैसे दिखाई देते हैं.
बीना तहसील के ग्राम पुरेना के किसान अनमोल दुबे ने पारंपरिक खेती से हटकर रोजल हिबिस्कस की औषधीय खेती शुरू की.बिना रासायनिक खाद और दवाओं के जैविक एवं प्राकृतिक तरीके से तैयार फसल अब फ्लावरिंग स्टेज पर पहुंच चुकी है.कृषि विभाग ने खेत का निरीक्षण कर इसे किसानों के लिए प्रेरणादायक मॉडल बताया.
बिहार के सीमांचल इलाके में बकरी पालन ने हजारों महिलाओं की जिंदगी बदलने का काम किया है. पिछले 5 साल में 20 हजार से ज्यादा महिलाएं बकरी पालन से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं.
सहारनपुर की पूजा ने वर्ष 2018 में कृषि विज्ञान केंद्र से मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग लेकर महज दो बैग से काम शुरू किया था. आज वह 4 से 5 हजार बैग में कई किस्म के मशरूम उगाती हैं और सालाना 15 से 20 लाख रुपये तक का टर्नओवर कर रही हैं.
राजस्थान के अलवर में एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी ने पारंपरिक खेती से हटकर चंदन की खेती शुरू की. उन्होंने YouTube और सोशल मीडिया से खेती की जानकारी जुटाई और अपने खेत में 300 पौधे लगाए. उनके प्रयास से अब अलवर और आसपास के इलाकों में 10 हजार से ज्यादा चंदन के पौधे लगाए जा चुके हैं.
बालाघाट के सुरेंद्र जैतवार ने RAD योजना का लाभ लेकर खेती को विविधीकृत कृषि मॉडल में बदला. एक ही खेत में मछलीपालन, मुर्गीपालन, पशुपालन, फलोद्यान, हल्दी, सिंघाड़ा और जिमीकंद जैसी गतिविधियां संचालित हो रही हैं. खेत में 100 से अधिक फलदार और उपयोगी पौधे भी लगाए गए हैं.
बुंदेलखंड की ग्रामीण महिलाओं के लिए पशुपालन अब आत्मनिर्भरता का जरिया बन रहा है. वर्ष 2019 में 6-7 महिलाओं से शुरू हुई बलिनी पहल से आज करीब 1.05 लाख महिला दुग्ध उत्पादक जुड़ी हैं. संगठन का कारोबार 651 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. दूध बेचकर महिलाएं बच्चों की पढ़ाई, खेती और परिवार की जरूरतों में आर्थिक योगदान दे रही हैं.
UP News: उद्यान विभाग के आउटलेट पर मेरठ के रेनट्रॉव नैचुरल के शहद उत्पाद भी लोगों की रुचि का केंद्र बने हुए हैं. युवा उद्यमी राखी अघेरा और उनके भाई भारत अघेरा ने बताया कि पिछले वर्ष उनकी कंपनी को इंडोनेशिया, मलेशिया और वियतनाम से 46 टन शहद का आर्डर मिला था. ट्रेड शो में इस बार भी उन्हें नए कारोबार और बेहतर आर्डर मिलने की उम्मीद है.
रेवापुर की कविता चौहान ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ₹10 हजार के ऋण से ऑनलाइन और बैंक बीसी दुकान शुरू की. इसके बाद ‘नमो ड्रोन’ प्रशिक्षण लेकर 2 हजार एकड़ से अधिक खेतों में ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव किया और ₹5.81 लाख से ज्यादा की आय अर्जित कर ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में पहचान बनाई.
महासमुन्द के गुलझर गांव के किसान गौरव कुठारे ने धान के साथ ग्राफ्टेड बैंगन की खेती अपनाकर आमदनी बढ़ाई.राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से मिले 30 हजार रुपये के अनुदान और ड्रिप-मल्चिंग तकनीक की मदद से एक एकड़ में करीब 23 टन बैंगन का उत्पादन कर लगभग 2.65 लाख रुपये की सकल आमदनी हासिल की.
जशपुर के किसान महेंद्र कुमार यादव ने PM कृषि सिंचाई योजना से मिले 38 हजार रुपये के अनुदान का लाभ लेकर मिर्च की खेती 50 डिसमिल से बढ़ाकर एक एकड़ में की.उन्नत खेती और बेहतर सिंचाई प्रबंधन से इस वर्ष करीब 1 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित की.
मिजोरम के लॉन्गतलाई जिले की 35 वर्षीय किसान जेड टी लालरिथांगी ने स्ट्रॉबेरी की खेती से अपनी अलग पहचान बनाई है. 1,000 पौधों से शुरू हुई खेती अब 10 हजार से ज्यादा पौधों तक पहुंच गई है. साल 2025 में उन्होंने स्ट्रॉबेरी से 10 लाख रुपये से अधिक कमाए. अब FAO उन्हें रोम में अंतरराष्ट्रीय सम्मान देगा.
कोटा के फिरोज खान ने शौक के तौर पर शुरू की गई कैक्टस की खेती को कारोबार में बदल दिया है. वे कम पानी में कैक्टस की अलग-अलग प्रजातियां तैयार कर बेचते हैं. फिरोज के मुताबिक, इससे उन्हें सालाना करीब 4 से 5 लाख रुपये की आमदनी होती है.
राजस्थान के बूंदी जिले की सावित्री गौर कभी घूंघट में रहकर खेतों में काम करती थीं. आज वह 2310 महिला किसानों वाली समृद्धि महिला क्रॉप प्रोड्यूसर्स कंपनी की चेयरपर्सन हैं. सोयाबीन की खेती से शुरू हुआ उनका सफर आधुनिक खेती, फसल की गुणवत्ता, बाजार की जानकारी और महिला किसानों की आत्मनिर्भरता से जुड़ गया. उन्होंने कई महिलाओं को खेती में आगे बढ़ने की राह दिखाई.
बेतिया के जयनगर गांव के किसान मंजय प्रसाद ने पारंपरिक खेती से हटकर एक बीघा जमीन में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है. कुशीनगर और बंगाल से बीज लाकर शुरू की गई इस खेती में करीब 18 महीने में पौधे फल देने लगते हैं. बाजार में ड्रैगन फ्रूट 200 से 250 रुपये किलो तक बिक रहा है.
अंबिकापुर की नीधि वर्मा का बिजली बिल 5000 से हुआ जीरो. पीएम सूर्य घर योजना से मिली 1.08 लाख की सब्सिडी, अब छत से बन रही बिजली. स्मार्ट मीटर से खपत पर नजर.छत्तीसगढ़ में हर घर बन रहा ऊर्जा आत्मनिर्भर.
बिहार के जमुई के किसान चंद्रिका मंडल ने सिर्फ 2 एकड़ जमीन में पारंपरिक खेती के साथ बटन मशरूम की खेती शुरू की है. प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक की मदद से उन्होंने मशरूम उत्पादन को आमदनी बढ़ाने के नए विकल्प के तौर पर अपनाया है.
भोपाल के रतुआ रतनपुर गांव के किसान भाई हेमंत और ओम कुशवाह ने महज 10 हजार पौधों से नर्सरी की शुरुआत की थी. आज उनकी आधुनिक नर्सरी में हर महीने करीब 15 लाख फूल और सब्जियों के पौधे तैयार हो रहे हैं. महाराष्ट्र, यूपी, दिल्ली व राजस्थान तक पौधों की सप्लाई कर रहे हैं.
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