छत्तीसगढ़ के सुकमा की सोढ़ी तिरपो ने बिहान योजना और कस्टम हायरिंग सेंटर के प्रशिक्षण से हल-बैल छोड़ आधुनिक पावर टिलर अपनाया.जानिए कैसे आधुनिक खेती ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बना दिया.
बस्तर के किसान खगपति ने वर्षा आधारित पारंपरिक धान की खेती छोड़ आधुनिक कृषि तकनीक, सोलर पंप और कृषि विभाग के प्रशिक्षण की मदद से अपनी सालाना आय 80 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये से अधिक कर ली.जानिए उनकी सफलता की पूरी कहानी.
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के जावर गांव के किसान अश्विन बादल सिंह सावले ने 2 एकड़ से सब्जी की खेती शुरू कर आज 160 किसानों के एफपीओ के साथ 400 एकड़ में उत्पादन का मॉडल तैयार किया है. यहां उगने वाला टमाटर और खीरा दुबई तक निर्यात हो रहा है, जबकि किसानों को प्रति एकड़ 4 से 5 लाख रुपये तक की आय मिल रही है.
विदिशा के किसान शिशुपाल सिंह ने एनएमईओ-ऑयलसीड्स योजना के तहत RH-761 उन्नत सरसों बीज से एक हेक्टेयर में 22.5 क्विंटल उत्पादन लेकर 1 लाख रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ कमाया. जानिए उनकी सफलता की पूरी कहानी.
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के किसान वीरेंद्र कुमार साहू ने धान की जगह गेंदा फूल की खेती शुरू कर फसल विविधीकरण की नई मिसाल पेश की है.कम पानी, कम लागत, बेहतर बाजार और सरकार की 15 हजार रुपये की आदान सहायता के सहारे वे खेती को अधिक लाभकारी और जलवायु अनुकूल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
सहारनपुर के किसान बसंत कुमार को लखनऊ आम महोत्सव में दुर्लभ आम की किस्मों के संरक्षण और प्राकृतिक बागवानी के लिए प्रथम पुरस्कार मिला. 100 साल पुराने पुश्तैनी बाग, 20 से अधिक आम की किस्मों और उनकी सफलता की प्रेरक कहानी जानिए इस फोटो गैलरी में.
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर की अनिता वड्डे ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' के सहयोग से वैज्ञानिक मुर्गीपालन अपनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की. मजदूरी से शुरुआत करने वाली अनिता आज 'लखपति दीदी' बनकर ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण हैं.
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में प्रगतिशील किसान हिमांशु बंजारे ने ढैंचा की हरी खाद अपनाकर प्राकृतिक खेती का सफल उदाहरण पेश किया है.ढैंचा मिट्टी में प्राकृतिक नाइट्रोजन बढ़ाकर उर्वरता सुधारता है, रासायनिक खाद की जरूरत कम करता है और खेती की लागत घटाने में मदद करता है.
पैसों की कमी के कारण पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी, लेकिन हार नहीं मानी. गयाजी के चितरंजन ने मधुमक्खी पालन को आजीविका बनाया और मेहनत के दम पर सफल उद्यमी बनकर दूसरों के लिए भी प्रेरणा बने.
धमतरी के केरेमुड़ा में किसानों को ग्राफ्टेड टमाटर और बैंगन की वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया.1 लाख से अधिक ग्राफ्टेड पौधों के वितरण के साथ शुरू हुई इस पहल से कम लागत में अधिक उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है.
मेघालय की जिरांग ऑर्गेनिक एग्रो फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी का सालाना रेवेन्यू 1.5 लाख रुपये से बढ़कर 2025 तक 1.17 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. FPC के करीब 75 प्रतिशत सदस्य महिलाएं हैं, जो GI टैग वाले अनानास समेत कई कृषि उत्पादों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा रही हैं.
छत्तीसगढ़ के मल्हार के प्रगतिशील किसान जदुनंदन वर्मा ने जैविक सब्जियों और एप्पल की खेती से नई पहचान बनाई है. एक एकड़ में जैविक सब्जियों से सालाना करीब 2 लाख रुपये की आय अर्जित करने वाले जदुनंदन पिछले 10 वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं.
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के किसान इशरार खान ने पारंपरिक खेती छोड़ मिर्च सहित उद्यानिकी फसलों की खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है. महज 2 बीघा में वीएनआर-285 किस्म की मिर्च उगाकर उन्होंने 2 से 2.5 लाख रुपये तक की आय अर्जित की.
उत्तर प्रदेश के जौनपुर और चंदौली के तीन प्रगतिशील किसानों इन्द्रसेन सिंह, चंद्र प्रकाश सिंह और मदनजीत सिंह—को फार्म एन फूड कृषि सम्मान अवार्ड्स 2026 में राज्य स्तरीय सम्मान से नवाजा गया.
गुजरात के दाहोद जिले के किसान नरेंद्रभाई हटिला ने रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती को अपनाया है. गाय के गोबर और मूत्र से तैयार जीवामृत और घन जीवामृत के इस्तेमाल से उन्होंने खेती की लागत कम की और मिट्टी की सेहत में सुधार किया है. आईए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी.
पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले की किसान छबिता प्रमाणिक की यह प्रेरणादायक कहानी बताती है कि कैसे उन्होंने सिर्फ दो एकड़ जमीन से शुरुआत कर वैज्ञानिक खेती, संस्थागत सहयोग और महिला नेतृत्व के बल पर एक सफल कृषि उद्यम खड़ा किया. आज वह 3500 से अधिक महिलाओं को जोड़ते हुए टिकाऊ खेती, वैल्यू एडिशन और सामूहिक उद्यमिता के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रही हैं.
कहते हैं कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए बड़ी पूंजी नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और मेहनत की जरूरत होती है. राजस्थान के कोटा के युवा उद्यमी चिनात्मन जैन ने महज 30 हजार रुपये से पीनट बटर का स्टार्टअप शुरू किया और आज उनका कारोबार 2 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है.
बिलासपुर के सलखा ग्राम के आदिवासी किसान अमृत सिंह ने धान की पारंपरिक खेती छोड़ केले की उन्नत खेती अपनाकर अपनी आय पांच गुना बढ़ा ली.राष्ट्रीय बागवानी मिशन के सहयोग, ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उन्होंने खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया.
बिहार के मुजफ्फरपुर के विकास कुमार यादव ने 8.5 लाख की नौकरी छोड़कर आम की बागवानी और नर्सरी से नई पहचान बनाई. आज उनके बगीचे में 92 दुर्लभ किस्मों के आम हैं, जिनमें विदेशी वैरायटी भी शामिल हैं. ग्राफ्टिंग तकनीक के जरिए एक ही पेड़ पर कई तरह के आम उगाकर वे ‘मैंगो मैन’ के नाम से मशहूर हो चुके हैं.
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक अपनाकर विदिशा के किसान भगवानसिंह ने 1.20 हेक्टेयर क्षेत्र में मिर्च और टमाटर की खेती से 3.40 लाख रुपये की आय अर्जित की.उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और आधुनिक सिंचाई तकनीकों की मदद से उन्होंने कम पानी में अधिक उत्पादन हासिल कर अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है
PMFME योजना के तहत 27 लाख रुपए के ऋण और 10 लाख रुपए के अनुदान की मदद से बैतूल के जयप्रकाश चिकाने ने ‘दूध गंगा डेयरी’ की स्थापना की. नौकरी की तलाश से स्वरोजगार तक का यह सफर उन्हें हर महीने 40 हजार रुपए की शुद्ध आय दिला रहा है, साथ ही डेयरी के माध्यम से करीब 20 युवाओं को रोजगार भी मिला है.
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