पॉलीहाउस में सब्जियों की नर्सरी तैयार करके किसान अच्छी कमाई कर सकता है. फर्रुखाबाद के करमपुर के किसान प्रवीण सैनी ने इस मॉडल को अपना कर आज सब्जियों की नर्सरी से अच्छी कमाई कर रहे हैं.
गन्ने की मिठास सबको पसंद है. वहीं बाजार में बिकने वाले ऑर्गेनिक गुड़ की मांग दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. ऐसे में अब गन्ने की जैविक खेती भी तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों को अच्छा फायदा हो रहा है. पढ़िए एक ऐसे ही एक किसान की कहानी जिसकी कमाई चार गुना बढ़ गई है...
चंदन की खेती से किसान मालामाल हो रहे हैं. चंदन के पौधे 10 से 12 सालों में तैयार होकर 300000 रुपये तक आसानी से बिक जाते हैं जो कि किसानों के लिए बेहतर आमदनी का एक जरिया बन रहा है.
कर्नाटक की अरुणा देवी ने साबित कर दिया कि अगर हुनर को सही तकनीक मिले, तो मिट्टी भी सोना उगलती है. पेशे से वकील रहीं अरुणा ने अपने माता-पिता की सेवा और खेती की विरासत को संभालने के लिए कोर्ट-कचहरी छोड़ दी. उन्होंने 'सिंगल सेल रैम फार्मिंग' (पिंजरा पद्धति) जैसी आधुनिक तकनीक अपनाकर भेड़ पालन को एक मुनाफे वाले बिजनेस में बदल दिया.
Success Story: प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक संसाधन, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने का जो व्यापक ढांचा तैयार हुआ, उसने हजारों परिवारों की तकदीर बदल दी. लखपति दीदी योजना के अंतर्गत ही आजमगढ़ की शशिकला राजभर ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ऋण प्राप्त किया.
जमशेदपुर में जिला कृषि विभाग ने पहली बार ग्रामीण महिलाओं को पुआल (पराली) से ओएस्टर मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग दी. 30 दिनों में तैयार होने वाले इस मशरूम की बाजार कीमत 400 रुपये प्रति किलो है. महिलाओं का दावा है कि बिना बड़ी पूंजी लगाए उन्होंने पहली ही खेप में लाखों रुपये की कमाई की है.
Rose Farmer Success Story: सहारनपुर के एक किसान ने वैलेंटाइन वीक को अपनी कमाई का सबसे बड़ा मौका बना लिया है. गुलाब की खेती से उनकी आमदनी सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ जाती है. कैसे बदली खेती की दिशा और क्या है उनकी खास रणनीति, जानने के लिए पढ़ें पूरी सक्सेस स्टोरी...
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के नानौता क्षेत्र के प्रोफेसर-किसान शहंशाह आलम ने पारंपरिक खेती छोड़ ‘भारत सुंदरी’ लाल बेर की वैरायटी अपनाकर अपनी आय लगभग दोगुनी कर ली है. कोलकाता से मंगाए गए पौधों से तैयार यह गहरे लाल रंग का मीठा बेर शिवरात्रि और होली के दौरान 80–100 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है. बेहतर रंग, स्वाद और बढ़ती बाजार मांग के कारण यह वैरायटी क्षेत्र के किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनती जा रही है.
भोपाल के किसान मदन मोहन पाटीदार ने ICAR-CIAE द्वारा विकसित फ्रूट-कम-वेजिटेबल ग्रेडर से 250 टन प्याज की ग्रेडिंग कर 63% तक लागत बचाई और 7.5 लाख रुपये का अतिरिक्त मुनाफा कमाया. यह मशीन समय, श्रम और खर्च बचाने के साथ बेहतर गुणवत्ता वाली ग्रेडेड उपज से बाजार में ऊंची कीमत दिलाने में मददगार साबित हुई.
Success Story: राजित राम कहते हैं कि मैंने लघु किसान के रूप में औद्यानिक फसलों से शुरुआत की थी. पहले आर्थिक स्थिति सामान्य थी, लेकिन नवीन तकनीकों और सरकारी सहायता से आय कई गुना बढ़ गई. अब हमारी परिवार की स्थिति पहले के मुकाबले बेहतर हो गई है. उनकी सफलता से सिहोरिया गांव और तारुन ब्लॉक के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं.
Farmer Story: किसान देविंदर सिंह ने खेती को केवल विरासत के रूप में नहीं अपनाया, बल्कि इसे एक प्रोफेशनल एग्री-एंटरप्राइज के रूप में विकसित किया. उन्होंने समय के साथ यह समझा कि बदलते मौसम, बढ़ती लागत और बाज़ार की मांग को देखते हुए परंपरागत तरीकों में बदलाव ज़रूरी है.
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में जहां किसान कपास और बाजरा की खेती में घाटा सह रहे थे, वहीं एक किसान ने रेशम कीट पालन को अपनाकर अपनी कमाई को 12 गुना बढ़ा लिया जो किसान साल भर में मुश्किल से 93 हजार रुपये कमा पाता था, वह आज सालाना 13 लाख रुपये से ज्यादा का टर्नओवर ले रहा है। उन्होंने ' वैज्ञानिक तरीके से रेशम के बीज तैयार किए, जिससे बाजार और मोटा मुनाफा दोनों पक्का हो गया,सदाशिव की इस सफलता ने पूरे इलाके में जोश भर दिया है,आज उनके गांव के 90 फीसदी किसान उन्हीं का 'रेशम मंत्र' अपनाकर लखपति बन चुके हैं.अब यह गांव तंगी के लिए नहीं, बल्कि अपनी खुशहाली और बंपर कमाई के लिए जाना जाता है
Success Story: मध्य प्रदेश एक महिला ने बाजार की जरूरत को पहचान कर आइस प्लांट लगाया है. उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत सब्सिडी पाकर संभाग का सबसे बड़ा आइस प्लांट लगाया है. अब वे हर महीने 1 लाख की कमाई कर रही हैं.
बिहार के मधेपुरा के किसान सतेंद्र यादव ने यूट्यूब से सीखकर मखाना कारोबार शुरू किया और घर से ही सफल ब्रांड बनाया. आज उनका बिजनेस 20–25 लाख रुपये मासिक टर्नओवर कर रहा है, गांव के लोगों को रोजगार दे रहा है और देश के बड़े शहरों तक मखाने की सप्लाई कर रहा है.
झारखंड के हजारीबाग की 10 महिला किसानों ने मिलकर मिश्रित खेती अपनाकर एक नई मिसाल कायम की है. खास बात यह है कि महिलाएं उस जमीन पर खेती कर रही हैं, जो पहले पूरी तरह बंजर हुआ करती थी.
राजस्थान के तपते थार रेगिस्तान से सफलता की एक अनोखी कहानी सामने आई है, जहां एक किसान ने अपनी मेहनत और नवाचार से नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया. उन्होंने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर न केवल खारे पानी को मीठा बनाया, बल्कि उस पानी से बंजर जमीन पर औषधीय पौधों का एक हरा-भरा बाग भी तैयार कर दिया.
मुजफ्फरपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी को खेती में नवाचार, लीची और मखाना उत्पादन, जलीय कृषि और किसानों की आय बढ़ाने में अहम योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया. जानिए उनके संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी.
महाराष्ट्र के बीड जिले के किसान दीपक मोरे ने पारंपरिक खेती छोड़कर फिश फार्मिंग अपनाई और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की मदद से लाखों की कमाई कर रहे हैं. उनकी कहानी बताती है कि आधुनिक तकनीक और सही मार्केटिंग से खेती को मुनाफे का सौदा बनाया जा सकता है.
मुरादाबाद के बिलारी निवासी रघुपत सिंह एक ऐसे किसान थे जिन्होंने मिट्टी की सेवा को ही अपना धर्म माना. उन्हें मरणोपरांत पद्म श्री से सम्मानित किया गया है, जो उनके 40 वर्षों के कड़े परिश्रम का फल है. रघुपत सिंह का सबसे बड़ा योगदान 55 से अधिक विलुप्त हो चुकी सब्जियों को फिर से जीवित करना था. उन्होंने 7 फीट लंबी लौकी और आम के स्वाद वाला अदरक जैसी 100 से अधिक नई किस्में विकसित कीं. अपनी अद्भुत खोजों के कारण वे 'कृषि पंडित' के नाम से मशहूर हुए.
परभणी जिले के जिंतूर तालुका के प्रगतिशील किसान श्रीरंग उर्फ दादा लाड को खेती में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2026 का पद्मश्री पुरस्कार दिया गया है. आइए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी.
अक्सर बाजार में सही दाम न मिलने पर टमाटर, अदरक, मिर्च और हल्दी जैसी फसलें खराब हो जाती हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है. नागालैंड के 26 वर्षीय युवा स्वयीवेज़ो डज़ुडो ने अपनी शिक्षा और समझदारी से एक ऐसा सोलर ड्रायर तैयार किया है, जो देश के फल, सब्जी और मसाला उत्पादक किसानों के लिए फायदेमंद सकता है. बहुत खर्च में बना यह यंत्र बांस, पुरानी कैन और बेकार पंखों जैसे स्थानीय सामानों से तैयार होता है. यह सोलर ड्रायर बिना बिजली के धूप की मदद से इन फसलों को 30 फीसदी तेजी से सुखाता है.
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