झारखंड में भारी बारिश के अलर्ट के बीच इस तरह फसलों की सुरक्षा करें किसान, पढ़ें आईएमडी की सलाह

झारखंड में भारी बारिश के अलर्ट के बीच इस तरह फसलों की सुरक्षा करें किसान, पढ़ें आईएमडी की सलाह

मौसम विभाग ने  फल और सब्जियों पर इसके पड़ने वाले प्रभाव को लेकर जारी किए गए एडवाइजरी में कहा है कि अधिक बारिश होने के कारण खेतों में जलभराव की समस्या हो सकती है. इसके चलते सब्जियों में सड़न की शिकायत हो सकती है

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झारखंड में भारी बारिश के अलर्ट के बीच इस तरह फसलों की सुरक्षा करें किसान, पढ़ें आईएमडी की सलाहकृषि सलाह झारखंड (सांकेतिक तस्वीर)

झारखंड में इस समय जबरदस्त बारिश हो रही है. कई जिलों में भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विज्ञान केंद्र रांची की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र आगे बढ़ रहा है इसके प्रभाव से राज्य के कई जिलों में अच्छी बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. तेज बारिश और हवाओं के कारण किसानों को नुकसान नहीं हो इसे लेकर मौसम विभाग की तरफ से किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है. इनका पालन करके किसान मौसम संबंधी होने वाले नुकसान से बच सकते हैं. 

मौसम विभाग ने  फल और सब्जियों पर इसके पड़ने वाले प्रभाव को लेकर जारी किए गए एडवाइजरी में कहा है कि अधिक बारिश होने के कारण खेतों में जलभराव की समस्या हो सकती है. इसके चलते सब्जियों में सड़न की शिकायत हो सकती है इसके साथ ही रोग और कीट का भी प्रकोप हो सकता है. फल झड़ सकते हैं और फलों में दाग भी लग सकता है. भारी बारिश के कारण टमाटर में फल और फूल झड़ सकते हैं और फल चटकने की शिकायत हो सकती है. इससे सब्जियों की खेती में नुकसान हो सकता है. 

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खेतों में जल निकासी की करें व्यवस्था

इस नुकसान से बचाव के लिए जारी सलाह में कहा गया है कि खेत से जल निकासी की उचित व्यवस्था करें. परिपक्व फल और सब्जियों की तुड़ाई कर लें और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखें. खड़ी फसलों में रोग के प्रसार को कम करने के लिए गिरे हुए फलों को हटा दें. खेत में किसी भी तरह का छिड़काव करने के लिए मौसम के साफ होने का इंतजार करें. धान की फसल इस वक्त फूल आने की अवस्था में हैं. ऐसे में बारिश होने पर फूल गिरने से दाने सही तरीके से नहीं भर पाते हैं. इससे बचाव के लिए खेतों में अधिक पानी नहीं भरने दें. खासकर निचले खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करें.  

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मक्के की करें कटाई

दलहनी और तिलहनी फसलों में जल जमाव के कारण फसल में सड़न की शिकायत हो सकती है साथ ही पौधों में रोग और बीमारी का भी प्रकोप हो सकता है. इससे बचाव के लिए खेत में जलजमाव नहीं होने दें और रोगों से बचाव के लिए फसल की निगरानी करते रहें. जो मक्के परिपक्व हो चुके हैं उनकी कटाई करके उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखें. जलभराव के कारण बालियां छोटी रह सकती हैं और उपज में कमी आ सकती है. इससे बचाव के लिए खेत से जल निकासी की उचित व्यवस्था करें. 

 

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