बिहार के मधुबनी जिले की लोहट और रैयाम चीनी मिलें करीब 30 साल से बंद हैं. गन्ना खेती खत्म हो चुकी है, मजदूरों को वेतन-पेंशन नहीं मिली और किसान-युवा पलायन को मजबूर हैं. अब भी लोग मिल के दोबारा चालू होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
'किसान तक' द्वारा संचालित किसान कारवां आज जालौन जिले के मंडोरी गांव पहुंचा. कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों ने किसानों को उन्नत खेती, आधुनिक तकनीक, बीज चयन, फसल प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी.
Economic Survey 2025-26 के मुताबिक तेलंगाना ने खेती का रकबा बढ़ाने में बड़ी सफलता हासिल की है. राज्य में 9 साल में 90 लाख एकड़ कृषि रकबा बढ़ा है. सिंचाई परियोजनाओं और धान खरीद के नए रिकॉर्ड ने तेलंगाना को राष्ट्रीय नक्शे पर मजबूत किया है. पढ़ें पूरी खबर...
21वीं पशुगणना चल रही है. पहली बार खानाबदोश चरवहों की गिनती भी हो रही है. पशुगणना के दौरान चारागाहों, खानाबदोश चरवाहों के आवास, उनके रूट आदि पर भी बात की जा रही है. साथ ही उनके साथ कौन-कौनसे और कितने पशु हैं ये जानकारी भी ली जा रही है. जिसका फायदा टीकाकरण और योजनाएं बनाने में मिलेगा.
उत्तर भारत के कई हिस्सों में घना कोहरा और शीतलहर को लेकर अलर्ट जारी किया गया है, जिससे सुबह और रात के समय दृश्यता काफी कम रहने की संभावना ह. ठंडी हवाओं के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है.
राजस्थान में किसानों से गेहूं की MSP पर खरीद 10 मार्च से 30 जून 2026 तक होगी. गेहूं बिक्री के लिए रजिस्ट्रेशन 1 फरवरी से 25 जून तक food.rajasthan.gov.in पर किया जा सकता है. MSP 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय.
मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से फसल पूरी तरह नष्ट होने के बाद एक युवा किसान की मौत का मामला सामने आया है. दरअसल बेमौसम बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है.ओलावृष्टि से खड़ी फसल बर्बाद हो गई है.फसल बर्बादी से परेशान किसान ने मौत को गले लगा लिया.
आर्थिक सर्वेक्षण ने कृषि निर्यात को भारत की बड़ी ताकत बताया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि बार-बार नियम बदलने से विदेशी बाजार छिन सकते हैं. भारत उत्पादन में आगे है, लेकिन निर्यात में पीछे. सही नीतियों से खेती देश को 100 अरब डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचा सकती है.
शिमला जिले में आज किसानों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया. किसानों का आरोप है कि बीते एक हफ्ते से उनका करीब एक लाख लीटर दूध प्लांट द्वारा नहीं लिया गया है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है.
Economic Survey ने खेती की दिशा बदलने का सुझाव दिया है. इसमें MSP से छेड़छाड़ या सरकारी खरीद घटाने के बजाय किसानों को धान-गेहूं से हटकर दाल, तिलहन और मक्का जैसी फसलों की ओर स्वेच्छा से लाने की बात कही गई है. इससे आयात निर्भरता और खर्च दोनों घट सकते हैं.
CR धान 807 एक नॉन-GM हर्बिसाइड टॉलरेंट धान किस्म है, जो सीधी बुवाई (DSR) और जीरो टिलेज खेती के लिए उपयुक्त है. यह 110-115 दिनों में पकती है और सामान्य और कम बारिश दोनों स्थितियों में बेहतर उपज देती है.
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