केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें देश के किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई बड़े फैसले लिए गए. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक संकट के बीच भी भारतीय कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना और किसानों को किसी भी तरह की परेशानी से बचाना था. मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों तक खाद (Fertilizer), बीज और अन्य जरूरी संसाधन समय पर और बिना किसी रुकावट के पहुंचने चाहिए.
केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कल मध्य प्रदेश के बुधनी में आयोजित किसान मेला और राष्ट्रीय कृषि मशीनरी प्रदर्शनी में हिस्सा लिया. इस दौरान शिवराज ने संस्थान द्वारा कृषि के लिए आधुनिक मशीनों और तकनीकों को करीब से देखा. इस दौरान उन्होंने एक ऑटो-स्टीयरिंग वाले Tractor का भी डेमो लिया. इस पर शिवराज ने कहा कि खेती अब बदल रही है, तकनीक के साथ आगे बढ़ रही है.
Israel-Iran War के बाद देशभर में LPG गैस की किल्लत है, मगर राजस्थान में Bhilwara जिले के आसींद में एक ऐसा भी गांव है जो इस कमी से बेअसर है. इस गांव में 120 परिवार रहते हैं, मगर पिछले कई वर्षों से यहां एक भी गैस सिलेंडर नहीं मंगवाया गया है. यह गांव है भीलवाड़ा जिले में आसींद तहसील में स्थित मोतीपुर, जहां करीब 120 परिवार रहते हैं. ग्रामीणों ने 4 साल पहले इस गांव में बायोगैस प्लांट की शुरुआत की थी.
उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने फसल नुकसान के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए बीमा कंपनियों को 31 मार्च तक सर्वे पूरा करने का निर्देश दिया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि किसी भी तरह की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि किसानों को समय पर मुआवजा मिल सके.
बिहार में पहली बार NAFED द्वारा मसूर दाल की MSP पर सीधी खरीद की शुरुआत किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है. 7,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर होने वाली इस खरीद से किसानों को बाजार से बेहतर दाम मिलेगा, साथ ही दाल उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा. पारदर्शी और आधार-आधारित प्रक्रिया के तहत 3 दिनों में भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे छोटे और सीमांत किसानों की आय मजबूत होगी.
भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने की रणनीति से तिलहन फसलों पर दबाव बढ़ने की आशंका है. चावल और मक्का से बढ़ते इथेनॉल उत्पादन के कारण DDGS जैसे सस्ते विकल्प पशु आहार में इस्तेमाल हो रहे हैं, जिससे ऑयलमील की मांग घट रही है और सोयाबीन जैसी तिलहन फसलों का रकबा कम हो रहा है. इससे खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
Black Tiger Shrimp किसानों ने वेनामी झींगा को छोड़ अब भारतीय ब्लैक टाइगर का पालन शुरू कर दिया है. मायूस हो चुके किसान अब बड़े-बड़े तालाबों में ब्लैक टाइगर ही पाल रहे हैं. ऐसे ही आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के किसान हैं. सुब्बा नायडू टैरिफ को लेकर बहुत परेशान हो गए थे. उम्मीद तक छोड़ बैठे थे. लेकिन अब सुब्बा 45 एकड़ के तालाब में ब्लैक टाइगर झींगा पाल रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने जमीन अधिग्रहण मुआवजे से जुड़े मामले में बड़ा फैसला देते हुए NHAI की याचिका को सीमित कर दिया है. कोर्ट ने साफ किया कि वित्तीय बोझ का हवाला देकर किसानों के मुआवजे में कटौती नहीं की जा सकती. हालांकि, केवल 28 मार्च 2015 तक लंबित मामलों में ही सोलेशियम और ब्याज का लाभ मिलेगा, जबकि पहले से निपटाए गए मामलों को दोबारा नहीं खोला जाएगा.
Seafood Export केन्द्र सरकार की री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) योजना मछली पालन को और बढ़ावा दे रही है. केन्द्र सरकार की ही पीएम मत्स्य संपदा योजना से जुड़ी आठ स्कीम भी मछुआरों और मछली पालन करने वालों को हर तरह से मदद दे रही हैं. इसी के चलते मछुआरों और मछली पालकों को दाम भी अच्छे मिल रहे हैं.
आज जिस तरह इजराइल, ईरान और अमेरिका के दरमियान तनाव और जंग के हालात बने हुए हैं, उसने पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की कमर तोड़ दी है. इस अस्थिरता की वजह से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसका सीधा असर हिंदुस्तान की अर्थव्यवस्था और देश की लोगों की जेब पर पड़ रहा है. अगर यह विवाद लंबा खिंचा, तो आने वाले वक्त में ईंधन का बड़ा संकट पैदा हो सकता है. ऐसे नाजुक दौर में यह बेहद जरूरी है कि हम गैरों की मेहरबानी पर निर्भर रहने के बजाय अपनी सरजमीं की संसाधनों पर भरोसा करें. खुशकिस्मती से, भारत एक खेतिहर देश है और यहां का गन्ना अब सिर्फ चीनी तक सीमीत नहीं है, बल्कि 'एनर्जी केन' के तौर पर मुल्क को आत्मनिर्भर बनाने की कुव्वत रखता है. गन्ने को केवल मीठे रस का जरिया न मानकर उसे देश की वास्तविक 'ऊर्जा शक्ति' के रूप में स्थापित किया जा सके.
महाराष्ट्र के जालना जिले में टमाटर किसानों को बाजार में बेहद कम दाम मिलने से आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है. किसानों ने विरोध स्वरूप अपनी फसल सड़क पर फेंक दी. प्रति किलो सिर्फ 4-5 रुपये मिलने से मेहनत और लागत भी नहीं निकल पा रही है. किसान सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य और सीधे बाजार की सुविधा की मांग कर रहे हैं.
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