एमएसपी की लीगल गारंटी पर बनी कमेटी अब सीधे कानून की बजाय बीच का रास्ता तलाशती दिख रही है. मंडी के अंदर और बाहर दोनों जगह एमएसपी देने की व्यवस्था पर चर्चा तेज हुई. जानिए पूरी बातचीत का सार...
बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने स्पष्ट किया कि फार्मर आईडी बनने तक भी किसानों को किसी योजना का लाभ मिलने में रुकावट नहीं होगी. राज्य में मिशन मोड में फार्मर रजिस्ट्री का काम तेजी से चल रहा है, जहां 85.53 लाख पीएम किसान लाभार्थियों में से 45.18 लाख किसानों की आईडी बन चुकी है. सरकार का लक्ष्य डिजिटल कृषि को बढ़ावा देना और बिचौलियों को खत्म कर योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाना है.
Madhya Pradesh सरकार ने आज विधानसभा में Budget 2026-27 पेश करते हुए खेती-किसानी को केंद्र में रखते हुए कुछ बड़े ऐलान किए है. वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बजट भाषण में किसानों की आय, सिंचाई, ऊर्जा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े ऐलान किए. बजट में किसानों के लिए सबसे बड़ा ऐलान सोलर पंप को लेकर किया गया.
खेती के लिए AI आधारित प्लेटफॉर्म BHARAT VISTAAR की लॉन्चिंग के सिलसिले में केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan जयपुर पहुंचे. इस दौरान वे Jaipur स्थित कृषि अनुसंधान संस्थान में खेतों में उतरे और गेहूं और जौ की फसलों का निरीक्षण किया. कृषि मंत्री ने गेहूं और जौ की फसल में लगने वाले रोगों के बारे में जानकारी ली और वैज्ञानिकों से रोग पहचानने और बचाव के तरीकों पर चर्चा की. वैज्ञानिकों ने उन्हें रोग-प्रतिरोधी किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया.
मध्य प्रदेश में वित्तवर्ष 2026–27 के लिए बजट पेश किया गया. राज्य के वित्त मंत्री Jagdish Devda ने विधानसभा में बजट प्रस्तुत करते हुए कुल बजट आकार ₹4,38,317 करोड़ घोषित किया. इस बजट में खेती, पशुपालन और ग्रामीण रोजगार पर विशेष जोर दिया गया है. कृषि क्षेत्र के लिए करीब ₹88,910 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है. सरकार का दावा है कि यह बजट विकास और कृषि सशक्तिकरण पर केंद्रित है.
Potato Mandi Price: फरवरी में आलू के दामों में तेज गिरावट से किसानों की चिंता बढ़ गई है. उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की मंडियों में बंपर फसल के अनुमान के चलते आवक लगातार बढ़ रही है. कई जगहों पर भाव लागत से नीचे चले गए हैं. जानिए किन मंडियों में कितना भाव और कहां सबसे ज्यादा आवक रही...
कपास के इंपोर्ट को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. आंकड़ों के अनुसार अप्रैल–जनवरी 2026 की अवधि में कॉटन इंपोर्ट में डॉलर के हिसाब से करीब 72% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इंपोर्ट ड्यूटी में मिली छूट को इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह माना जा रहा है. अनुमान के मुताबिक, अप्रैल–जनवरी 2026 के दौरान कपास का कुल इंपोर्ट लगभग ₹15,857 करोड़ तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू उत्पादन, वैश्विक कीमतों और टेक्सटाइल उद्योग की मांग जैसे कारक भी इस बढ़ोतरी को प्रभावित कर रहे हैं.
भारत सरकार द्वारा गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध हटाने के बावजूद ट्रेडर्स का कहना है कि घरेलू कीमतें ग्लोबल मार्केट से काफी ज्यादा होने के कारण भारतीय गेहूं की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग बनना मुश्किल है. MSP बढ़ने से एक्सपोर्ट कॉस्ट और बढ़ गई है, जबकि ग्लोबल कीमतें 260 डॉलर प्रति टन तक हैं. विशेषज्ञों के अनुसार भारत के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प केवल बांग्लादेश को सीमित मात्रा में निर्यात रह जाएगा. वहीं FCI के पास गेहूं का रिकॉर्ड स्टॉक होने से सरकार पर निर्यात का दबाव भी बढ़ा है.
Oilmeal Export: जनवरी में भारत के ऑयलमील यानी खली निर्यात को बड़ा झटका लगा है. सोयाबीन और सरसों मील की कमजोर शिपमेंट के चलते कुल निर्यात में 42 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
FMD Disease एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) बीमारी अब किसी भी मौसम में पशुओं को अपनी चपेट में ले रही है. हालांकि इसका सबसे ज्यादा असर बरसात में ज्यादा देखने को मिलता है. बड़ी बात ये है कि एफएमडी बीमारी मीट, डेयरी प्रोडक्ट और मिल्क एक्सपोर्ट की बड़ी रुकावट है. जब तक भारत को एफएमडी फ्री जोन का सर्टिफिकेट नहीं मिलता तो तीनों चीजों का एक्सपोर्ट भी नहीं बढ़ेगा.
Sheep Care भेड़ पालन खासतौर पर ऊन और मीट के लिए किया जाता था. हालांकि अब मीट के मुकाबले ऊन की डिमांड बहुत कम हो गई है. अब ऊन के लिए भेड़ें कम पाली जाती हैं. ऊन का आयात होने से घरेलू बाजार में डिमांड घट गई है. जबकि मीट की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. यही वजह है कि अगर भेड़ों से मोटा मुनाफा कमाना है तो उन्हें बीमारियों से दूर रखना होगा.
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