Goat Milk-Meat राजस्थान जिले का एक नाम सिरोही है. इसी जिले के नाम पर बकरे-बकरियों की एक खास नस्ल सिरोही नाम से जानी जाती है. छोटे किसानों के बकरी पालन के लिए इस नस्ल को बहुत अच्छी माना जाता है. क्योंकि देशभर में इसे कहीं भी पाल सकते हैं. इसकी पहचान दूध और मीट दोनों के लिए है.
Milk Consumption इसे डेयरी कंपनियों की स्ट्रेटेजी कहें या ग्राहकों की बढ़ती डिमांड की बाजारों में डेयरी प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ रही है. गांवों के मुकाबले शहरों में दूध-दही और घी-मक्खन ज्यादा बिक रहे हैं. कुछ ही राज्य ऐसे हैं जहां अभी भी गांवों में दूध-दही की खपत शहरों के मुकाबले ज्यादा है. लेकिन दोनों के बीच का अंतर बहुत कम है.
बद्रीनाथ और औली में मार्च के मध्य अचानक बर्फबारी से पहाड़ों पर सफेद चादर बिछ गई. बढ़ती गर्मी के बीच लौट आई ठंडक, बद्रीनाथ धाम और हिमक्रीड़ा स्थल औली की वादियां एक बार फिर मनमोहक दिखने लगीं. पर्यटक और स्थानीय लोग बर्फबारी से बेहद खुश हैं.
महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में केले उगाने वाले किसान इस समय बहुत ही कठिन स्थिति में हैं. किसान दिग्गविजय मोरे बताते हैं कि पहले उन्हें एक किलो केले का 20 से 25 रुपये में मिलता था. लेकिन अब, युद्ध और अंतरराष्ट्रीय संकटों के कारण, उन्हें प्रति किलोग्राम केवल 5 से 9 रुपये मिल रहे हैं. यह सीधे किसानों की मेहनत पर चोट है. उन्होंने 6 एकड़ में खेती की थी और 10 लाख रुपये खर्च किए थे.
बैंगलोर मिल्क यूनियन लिमिटेड के अध्यक्ष ने कहा कि यह भी जांच की जा रही है कि कंपनी दूध कहां से खरीद रही है और कहीं दूध में पाउडर मिलाकर तो नहीं बेचा जा रहा. उन्होंने दूध के सैंपल लैब में जांच के लिए भेजने की बात भी कही.
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने पूर्वानुमान में कहा है कि देश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक मौसम तेजी से बदलने वाला है. पूर्वोत्तर भारत में बारिश का अलर्ट है, वहीं कई राज्यों में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है. जानिए 16 मार्च को कहां-कैसा रहेगा मौसम...
किसान-पशुपालकों के घर चूल्हें जलने के साथ ही गोबर से डेयरी प्लांट में ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा रहा है. इतना ही नहीं किसानों के खेत में मिट्टी की सेहत भी सुधर रही है. इसके नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड (NDDB) समेत राज्यों के गोबर गैस प्लांट खासे मददगार साबित हो रहे हैं.
खाड़ी देशों में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण जालना के तरबूज किसानों पर संकट गहरा गया है. निर्यात रुकने से बाजार में तरबूज का भाव 20–30 हजार रुपये प्रति टन से गिरकर करीब 7 हजार रुपये प्रति टन रह गया है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का खतरा है.
पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त जारी हो चुकी है, लेकिन कई किसानों के खाते में अभी तक 2000 रुपये नहीं पहुंचे हैं. ऐसे में किसान पीएम किसान पोर्टल पर जाकर आसानी से अपना स्टेटस चेक कर सकते हैं. साथ ही e-KYC, आधार लिंकिंग और हेल्पलाइन नंबर के जरिए शिकायत दर्ज कर अपनी रुकी हुई किस्त की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं.
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च का महीना आम के पेड़ों के लिए बेहद अहम माना जाता है. इसी समय पेड़ों पर बौर यानी फूल फल में बदलते हैं. अगर इस दौरान सिंचाई, खाद या देखभाल में थोड़ी भी लापरवाही हो जाए तो फूल झड़ सकते हैं और फलों की कमी हो सकती है.
केंद्र सरकार के नए अनुमान के अनुसार देश में बागवानी फसलों का क्षेत्रफल और उत्पादन दोनों बढ़े हैं. 2024-25 में फल-सब्जियों का उत्पादन तेजी से बढ़ा, प्याज उत्पादन में 26% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि 2025-26 में भी बागवानी क्षेत्र में स्थिर बढ़त का अनुमान है.
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