Fish Pond Care बदलते मौसम के साथ ये जरूरी है कि पानी के तापमान में बदलाव होते ही ट्रीटमेंट करना शुरू कर दें. जरूरत पड़ने पर तालाब में पानी की मात्रा को भी बढ़ा दें. ठंड के मौसम में सुबह-शाम पानी का तापमान चेक करते रहना चाहिए. आक्सीजन की मात्रा को भी कम न होने दें.
महाराष्ट्र के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने खेती को लेकर एक अहम संकेत दिया है. पिछले साल सबसे तेज बढ़ने वाला कृषि क्षेत्र इस बार अचानक सुर्खियों में है. मौसम की मार और फसल नुकसान के बीच रिपोर्ट में ऐसा क्या सामने आया, जिसने कृषि की रफ्तार को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी. पढ़ें पूरी खबर...
ईरान और इजराइल के बीच चल रहे तनाव का असर अब पंजाब के फरीदकोट में देखने को मिल रहा है, जहां लोगों में तेल को लेकर अफरा-तफरी का माहौल बन गया है. किसानों ने गेहूं कटाई के सीजन से पहले ही डीजल जमा करना शुरू कर दिया है. कोटकपूरा शहर के पेट्रोल पंपों पर किसानों की भारी भीड़ जुटी हुई है, जहां वे ड्रम और कैन लेकर बड़ी मात्रा में डीजल भरवा रहे हैं.
ओडिशा दौरे पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह कई बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत करने जा रहे हैं. पारादीप में इफको का सल्फ्यूरिक एसिड प्लांट राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा, जबकि भुवनेश्वर में सहकारिता, डेयरी और डिजिटल पहल से जुड़े कई अहम कार्यक्रम होंगे.
विदर्भ में मार्च की शुरुआत के साथ ही गर्मी का असर तेज़ होता जा रहा है. मौसम विभाग के अनुसार, इस हफ्ते तापमान 39.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है. विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में मौसम में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, यानी फिलहाल गर्मी से राहत मिलने के आसार कम हैं. इस बीच स्थानीय लोगों ने बढ़ती गर्मी पर अपनी-अपनी चिंताएं और अनुभव साझा किए, जिनमें स्वास्थ्य, दैनिक कामकाज और बाहर निकलने में हो रही दिक्कतें शामिल हैं.
Pusa Krishi Mela 2026 में किसानों के आकर्षण का केंद्र रही कंपोस्ट स्प्रेडर मशीन, जो ट्रैक्टर के PTO से चलकर खेतों में खाद फैलाने का काम बेहद तेज़ी और सटीकता से करती है. मशीन में लगा कन्वेयर बेल्ट और ब्लेड खाद को समान रूप से पूरे खेत में बिखेरते हैं. इसकी क्षमता इतनी अधिक है कि पांच एकड़ भूमि में 20 ट्रॉली खाद सिर्फ डेढ़ घंटे में फैलाई जा सकती है, जबकि मजदूरों से यही काम करने में लगभग चार दिन लग जाते हैं. मशीन की कीमत ₹7.5 से 8 लाख के बीच है और इस पर सरकारी सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे किसानों की लागत और कम हो जाती है.
जल संकट के बीच कोरिया जिले में किसानों और ग्रामीणों की भागीदारी से एक नई पहल सामने आई है. खेतों की 5% जमीन पर बनाए जा रहे रिचार्ज तालाब और सोक पिट से बारिश का पानी जमीन में समाहित हो रहा है. इस मॉडल से भूजल स्तर बढ़ने के संकेत मिले हैं.
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार प्रशांत महासागर में बना कमजोर ला नीना तेजी से फेड हो रहा है और आने वाले महीनों में ENSO-neutral स्थिति बनने की संभावना बढ़ रही है. मॉडल अनुमानों के अनुसार अल नीनो बनने की संभावना मई–जुलाई 2026 के दौरान लगभग 40% तक पहुंच सकती है, जबकि न्यूट्रल कंडीशन्स सबसे ज्यादा संभावित बनी रहेंगी.
फरवरी के अंत से ही देश के कई राज्यों में गर्मी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं. बढ़ते तापमान को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) से जुड़े कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए अहम सलाह जारी की है. खड़ी फसलों और सब्जियों में जरूरत के अनुसार हल्की सिंचाई करें. सिंचाई करते समय ध्यान रखें कि हवा शांत हो, क्योंकि तेज हवा में पानी देने से पौधे गिर सकते हैं. आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना है, इसलिए फसल प्रबंधन में विशेष सतर्कता जरूरी है.
ईरान‑अमेरिका युद्ध का गहरा असर महाराष्ट्र के कृषि निर्यात पर दिख रहा है. जलगांव के केले और नासिक‑सांगली सहित कई जिलों से खाड़ी देशों को भेजे जाने वाले सैकड़ों कंटेनर मुंबई के JNPT पोर्ट पर फंसे हुए हैं, जिससे किसानों और व्यापारियों को भारी नुकसान का डर है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 2,000 से अधिक कृषि कंटेनर, जिनमें केले, अंगूर और प्याज शामिल हैं, शिपिंग रूट रुकने से अटके पड़े हैं. रमजान के समय खाड़ी देशों में मांग बढ़ती है, लेकिन निर्यात रुकने से घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ने और दाम गिरने की आशंका गहरा गई है.
अमेरिका‑ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण महाराष्ट्र से खाड़ी देशों को अंगूर का निर्यात पूरी तरह रुक गया है. मुंबई के JNPA पोर्ट पर करीब 300 कंटेनर (3,900 टन) दुबई रूट बंद होने से फंसे हैं, जबकि 700 से अधिक कंटेनर पोर्ट और कोल्ड स्टोरेज में पड़े हैं. उद्योग अनुमानों के अनुसार, 5,000–6,000 टन तैयार स्टॉक तत्काल खतरे में है और 10,000 टन अंगूर अभी भी बागों में एक्सपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जिससे कुल 16,000 टन तक प्रभावित हो सकते हैं. इस रुकावट से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ने से कीमतें गिरने का डर है.
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