जनवरी के दूसरे पखवाड़े में मौसम में बड़े बदलाव की संभावना है. उत्तर भारत में तापमान में गिरावट होगी और ठंडी हवाओं के साथ ठिठुरन बढ़ेगी. पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में शीतलहर और घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है. वहीं, पहाड़ों पर बर्फबारी के आसार बने हुए हैं, खासकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ऊंचे इलाकों में.
देश के किसानों ने एक बार फिर एकता और संघर्ष की मिसाल पेश की है. इस वीडियो में अभिमन्यु कोहाड आपको कन्याकुमारी से कश्मीर तक किसानों की ऐतिहासिक यात्रा के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे. यह यात्रा सिर्फ एक पदयात्रा नहीं, बल्कि किसानों के हक, उनकी समस्याओं और खेती के भविष्य से जुड़ा बड़ा संदेश है.
शीतलहर के चलते मिट्टी की नमी भी धीरे-धीरे खत्म हो रही है, जिससे पौधों की बढ़वार रुक गई है और फल और पत्तियां गिरने लगी हैं. खासतौर पर टमाटर, बैंगन और मिर्च जैसे पौधे पाले के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं और जल्दी नुकसान झेलते हैं.
हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से बारिश और बर्फबारी न होने के कारण किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. किसानों का कहना है कि खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर है और बारिश के बिना फसलों का बच पाना मुश्किल हो जाता है. पिछले 4–5 वर्षों से राज्य में मनमुताबिक बारिश नहीं हो रही है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है.
उत्तराखंड में लंबे समय से शुष्क बने मौसम को लेकर अब लोगों की निगाहें आसमान की ओर टिकी हैं. खासतौर पर किसान, बागवान और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर बारिश और बर्फबारी का इंतजार कब खत्म होगा.
किसान कारवां कार्यक्रम के दौरान किसानों को खेती से जुड़ी नवीन तकनीकों, उन्नत बीज, मिट्टी स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग और फसल संरक्षण के आधुनिक तरीकों की विस्तृत जानकारी दी गई. साथ ही किसानों को बदलते मौसम के अनुसार फसल चक्र और जल संरक्षण के महत्व से भी अवगत कराया गया.
अलवर में पड़ रही कड़ाके की सर्दी ने सरसों और सब्जियों की फसल को नुकसान पहुंचाया है. किसान पहले ही प्याज की फसल से परेशान हैं और अब मौसम की मार ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कृषि विभाग ने फसल बचाने के उपाय सुझाए हैं, लेकिन किसानों की चिंता अभी भी बनी हुई है.
मैनपुरी के डालूपुर गांव में किसान कारवां कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां किसानों को आधुनिक खेती, मृदा परीक्षण, नैनो उर्वरक, पशुपालन योजनाओं और सरकारी लाभों की आसान भाषा में जानकारी दी गई. यह कार्यक्रम किसानों के लिए बेहद लाभकारी रहा.
जनपद महोबा में किसानों को बागवानी की ओर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से हाईटेक नर्सरी की शुरुआत की गई है. इस आधुनिक नर्सरी को तैयार करने में करीब 1.28 करोड़ रुपये की लागत आई है. नर्सरी का मुख्य उद्देश्य बागवानी किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले और प्रमाणित पौधे उपलब्ध कराना है, ताकि उत्पादन बढ़े और किसानों की आय में सुधार हो सके.
पंजाब के किसानों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद CM मान ने कहा कि इस कदम से हजारों एकड़ खेती की जमीन को पर बिना किसी रुकावट के खेती का रास्ता साफ हो जाएगा.
Chhatisgarh में Medicinal Plant Bord की मदद से औषधीय पौधों की खेती को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे खासतौर पर महिलाओं को रोजगार और आय का नया साधन मिल रहा है. महिलाओं ने बताया कि बोर्ड की ओर से क्लस्टर के माध्यम से खेती की पूरी ट्रेनिंग दी जाती है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today