पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 में क्रॉपलाइफ इंडिया ने किसानों को फसल संरक्षण उत्पादों के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग का संदेश दिया. नकली दवाओं के खतरे, सही खुराक और लेबल पालन पर जोर रहा. लोक गीत के जरिए तकनीकी बातें आसान भाषा में समझाई गईं.
पूसा कृषि विज्ञान मेले में केंद्रीय कृषि मंत्री ने साफ कहा कि अब किसान का पैसा रोकने की आदत नहीं चलेगी. एमएसपी, केसीसी, केवीके और खाद सब्सिडी तक हर व्यवस्था में समयबद्धता और जवाबदेही तय होगी. किसान केंद्र में होगा और सिस्टम को उसी हिसाब से बदला जाएगा.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संकेत दिए हैं कि खाद सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने की दिशा में सरकार जल्द बड़ा कदम उठा सकती है. IARI किसान मेले में उन्होंने बताया कि वर्तमान में 1.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी कंपनियों को दी जाती है, जिसे किसानों को डायरेक्ट बेनिफिट के रूप में देने की संभावना पर काम चल रहा है. मंत्री ने अधिकारियों को इस बदलाव के लिए सिस्टम तैयार करने के निर्देश भी दिए.
कर्नाटक सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए गन्ना किसानों को 300 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की है. इस योजना के तहत किसानों के बैंक खातों में 50 रुपये प्रति टन सीधे जमा किए जाएंगे. यह राशि FRP के अलावा मिलने वाले 100 रुपये प्रति टन अतिरिक्त भुगतान का हिस्सा है, जिसमें 50 रुपये सरकार और 50 रुपये चीनी मिलें देंगी. राज्य में अब तक 521 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और सीजन के अंत तक 600 लाख मीट्रिक टन पेराई होने का अनुमान है.
हरदोई के संडीला ब्लॉक के सरवा गांव में ‘किसान कारवां’ के 30वें पड़ाव पर किसानों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली. कार्यक्रम में खेती, पशुपालन, प्राकृतिक कृषि, नैनो उर्वरक और सरकारी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई. अधिकारियों और वैज्ञानिकों से संवाद के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं रखीं, जिनके समाधान भी बताए गए. लकी ड्रॉ और सम्मान समारोह ने आयोजन को खास बना दिया.
CM Yogi In Japan: मिंडा कारपोरेशन, जो स्पार्क मिंडा समूह का हिस्सा है, ऑटोमोटिव कंपोनेंट निर्माण में अग्रणी भारतीय कंपनी है. यह मैक्ट्रॉनिक्स, वायरिंग हार्नेस, प्लास्टिक इंटीरियर, सेंसर और ईवी समाधान उपलब्ध कराती है. जापान एविएशन इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री जिसे (JAE) के नाम से जाना जाता है.
गर्मी की शुरुआत के साथ लीची के पेड़ों पर मंजर आने लगे हैं, लेकिन इस समय स्टिंक बग का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. मौसम में अचानक बदलाव के कारण ये कीट फूलों पर हमला कर देते हैं, जिससे मंजर झड़ने और फल उत्पादन में भारी कमी आ सकती है. इसलिए विशेषज्ञों ने किसानों को लीची के बागानों की विशेष देखभाल और नियमित निगरानी की सलाह दी है.
मौसम में अचानक बदलाव, तापमान में उतार-चढ़ाव और बढ़ी हुई नमी के बीच कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को गेहूं और सरसों की फसलों पर कड़ी निगरानी रखने की सलाह दी है. विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में फंगल और वायरल बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. गेहूं में पीला रतुआ, लीफ ब्लाइट और पाउडरी मिल्ड्यू के लक्षणों को पहचानकर समय पर उपचार करना बेहद जरूरी है.
महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में बेमौसम बारिश और तेज तूफान से सैकड़ों हेक्टेयर में खड़ी गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई. कई किसानों की 80 से 90 प्रतिशत फसल नष्ट हो गई है. पहले ही सोयाबीन की फसल खराब हो चुकी थी, ऐसे में अब गेहूं की बर्बादी ने किसानों के सामने परिवार के गुजर–बसर का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है.
नई दिल्ली के पूसा परिसर में 25 से 27 फरवरी 2026 तक पूसा कृषि मेला आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्घाटन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया. इस मेले में किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और एग्री-उद्यमियों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया. कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में देश में खाद्यान्न उत्पादन में 34% की बढ़ोतरी हुई है.
Buffalo Care in Summer एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो कई बार ऐसा होता है कि पशुओं के शरीर से गर्मी नहीं निकलती है और पशु को प्रसव में परेशानी होने लगती है. जब भैंस के शरीर में गर्मी अधिक बढ़ जाती है, तो इसकी वजह से एस्ट्रोजन हार्मोन में कमी आ जाती है. जिसके कारण पशुओं के हीट में आने के लक्षणों का पता नहीं चल पाता और पशु के शरीर में गर्मी अधिक बढ़ने की वजह से गर्भ भी नहीं ठहरता.
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