केंद्र सरकार की इस योजना के तहत किसान उत्पादक संगठन यानी FPO, व्यक्तिगत किसान, स्वयं सहायता समूह (SHG) और सहकारी संस्थाओं को गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, छंटाई-ग्रेडिंग यूनिट, प्रोसेसिंग यूनिट्स और खेती में ऑटोमेशन जैसी आधुनिक सुविधाओं के लिए आसान और लंबे समय तक फंड उपलब्ध कराया जा रहा है.फिलहाल 25 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स को इसका फायदा मिल रहा है.
बर्फबारी को सिर्फ आपदा के तौर पर देखना सही नहीं है. बर्फबारी गेहूं, सेब, केसर, आलू, जौ और सर्दियों की बाकी फसलों के लिए यह कई तरह से फायदेमंद साबित होती है. सही समय और संतुलित मात्रा में हुई बर्फबारी मिट्टी की सेहत सुधारती है, कीट-रोग कम करती है और किसानों की पैदावार व आमदनी बढ़ाने में मदद करती है.
उत्तर भारत में सर्दियों की दस्तक के साथ मौसम पूरी तरह बदल चुका है और ठंड का असर साफ नजर आने लगा है. पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बढ़ती शीतलहर के बीच जनजीवन और खेती-किसानी की गतिविधियों पर असर पड़ रहा है. वहीं दक्षिण भारत में लगातार बारिश का दौर बना हुआ है. इस लाइव और लगातार अपडेट होते सेक्शन में आपको खाद-बीज से जुड़ी जानकारी, खेती और गार्डनिंग के उपयोगी टिप्स, किसानों के लिए जरूरी सरकारी योजनाएं और कृषि जगत से जुड़े बड़े राष्ट्रीय घटनाक्रम एक ही जगह मिलते रहेंगे. साथ ही बात करेंगे उन्नत क़िस्मों की बीजों के बारे में जिसका लाभ उठाकर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
स्ट्रॉबेरी ठंडे मौसम की फसल है और जनवरी का तापमान इसके लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस समय लगाए गए पौधों में रोग कम लगते हैं और फल की क्वालिटी भी बेहतर होती है. सही देखभाल के साथ मार्च से मई के बीच तुड़ाई शुरू हो जाती है. स्ट्रॉबेरी के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी रहती है. खेत की अच्छी तरह जुताई करके उसे भुरभुरा बना लें.
IMD Weather Update: दिल्ली-एनसीआर में ठंड और कोहरे की पकड़ और मजबूत होने वाली है. IMD के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक शीत लहर और कोल्ड डे जैसी स्थिति बनी रह सकती है. वहीं बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम से दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है.
क्या आप सोच सकते हैं कि एक बीज इंसानों से भी ज्यादा लंबी उम्र जी सकता है. वैज्ञानिकों ने 2000 साल पुराने खजूर के बीज से पौधा उगाकर यह साबित कर दिया. लेकिन हर बीज इतना ताकतवर नहीं होता. फलों, सब्जियों और अनाज के बीज कितने साल जिंदा रहते हैं और कहां नियम टूटता है, जानिए Fact of the Day स्टोरी में...
पीएम आवास योजना 2026 में ग्रामीण परिवारों के लिए नया मौका. जानें कैसे कर सकते हैं आवेदन, कौन-कौन पात्र हैं और कितना मिलेगा आर्थिक मदद. सुरक्षित और मजबूत पक्का घर पाने के लिए जल्द शामिल हों.
हींग की खुशबू और गुलाल के सात रंगों से सजकर हाथरस के खेरिया गांव में पहुंचा किसान तक का किसान कारवां. किसानों ने आलू, सरसों, गेहूं, बाजरा और बागवानी से जुड़ी समस्याओं का समाधान, नई तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी हासिल की. कृषि वैज्ञानिक, पशुपालन विशेषज्ञ और प्रगतिशील किसानों ने अनुभव साझा कर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के उपाय बताए.
हींग की खुशबू और रंगों से सजे हाथरस जिले में किसान तक का किसान कारवां पहुंचा, जहां किसानों को खेती, पशुपालन, नई तकनीक और सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी विशेषज्ञों द्वारा दी गई. हर बार की तरह इस बार भी जादू के जरिए किसानों को नई तकनीक, खेती और नई-नई क़िस्मों के बारे में भी जानकारी दी गई.
खारे पानी और ड्रिप सिंचाई के साथ सौंफ की खेती यह साबित कर रही है कि कम संसाधनों में भी टिकाऊ खेती संभव है. राजस्थान का यह मॉडल दूसरे सूखा प्रभावित राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है. सही तकनीक, सरकारी सहयोग और किसानों की मेहनत से सौंफ की खेती अब राजस्थान में विकास की नई कहानी लिख रही है.
बगीचे में अगर सब्जियों की खेती कर रहे हैं तो आपको ऐसा उर्वरक चुनना होगा जिसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम का उच्च स्तर हो. नाइट्रोजन हरी पत्तियों और तनों को बनाने में मदद करता है, फॉस्फोरस जड़ों के विकास में मदद करता है. वहीं पोटेशियम पौधे को गर्मी या ठंड से होने वाले तनाव का सामना करने में मदद करता है.
Dairy and Animal Husbandry डेयरी टेक्नोलॉजी के मामले में हम पीछे नहीं हैं. लेकिन तमाम तरह की टेक्नोलॉजी के बावजूद हम प्रति पशु दूध उत्पादन के मामले में बहुत पीछे हैं. विश्व में कई छोटे-छोटे देश प्रति पशु दूध उत्पादन के मामले में हमसे बहुत आगे हैं. हालांकि डेयरी एक्सपर्ट छह बिन्दुओं पर काम करने की सलाह देते हैं. ये सभी बिन्दु मिल्क रेव्युलेशन-2 में भी शामिल हैं.
PAU ने जई की स्वदेशी किस्म OL16 विकसित की है, जो चारे और अनाज दोनों में बेहतर उत्पादन देती है. इसमें उच्च बीटा-ग्लूकान होने से यह किसानों के साथ उपभोक्ताओं के लिए भी खास मानी जा रही है.
हिमाचल प्रदेश सरकार ने सभी किसानों और बागवानों के लिए किसान आईडी लेना ज़रूरी कर दिया है. इस आईडी से किसान सीधे PM किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, सिंचाई सहायता और प्राकृतिक खेती जैसी सरकारी योजनाओं का फायदा उठा सकेंगे.
पुलवामा और शोपियां में केसर और सेब उगाने वाले किसानों ने कहा कि बारिश की कमी से दोनों फसलों की पैदावार पर असर पड़ेगा. एक किसान तारिक अहमद ने कहा कि इन महीनों में केसर को काफी नमी की जरूरत होती है. इसके बिना कंद ठीक से नहीं बढ़ पाते. सेब के लिए बर्फ भी उतनी ही जरूरी है क्योंकि ज्यादा ठंडे घंटे सीधे बेहतर पैदावार देते हैं.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गढ़ीकांट में उत्तराखंड माल्टा फेस्टिवल का शुभारंभ किया और किसानों के लिए ‘माल्टा मिशन’ की घोषणा की. इस पहल से राज्य में माल्टा और अन्य फलों की खेती बढ़ेगी, किसानों की आय बढ़ेगी और उत्तराखंड के फलों को बड़े बाजार में पहचान मिलेगी.
Rabi Crops Sowing: रबी सीजन 2025-26 में बुवाई का रकबा 634 लाख हेक्टेयर के पार पहुंच गया है. गेहूं, चना और सरसों जैसी प्रमुख फसलों में बढ़त दर्ज की गई है, जबकि कुछ फसलों में हल्की गिरावट भी सामने आई है. पढ़ें रिपोर्ट...
Egg Export to Bangladesh भारत अंडा उत्पादन के मामले में विश्व में दूसरी पोजिशन पर है. बीते साल देश में 15 हजार करोड़ अंडों का उत्पादन हुआ था. कतर, ओमान, यूएई, श्रीलंका भारत से अंडा खरीदने वालों की लिस्ट में टॉप पर हैं. बीते कुछ वक्त से बांग्लादेश ने भी अंडों की खरीदारी शुरू कर दी है.
अमरेली के मोटा अंकड़िया गांव में पुलिस और कृषि विभाग ने नकली खाद बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया. इस फैक्ट्री में घटिया क्वालिटी की खाद और खाली बैग पाए गए. किसानों को धोखा देने वाले इस गिरोह से सतर्क रहने की अपील की गई है.
दिसंबर में भारत के पाम ऑयल आयात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की खरीद में तेज उछाल देखने को मिला. सर्दियों की मांग, घरेलू तेलों की उपलब्धता और कीमतों ने बाजार की दिशा बदल दी है. आगे जनवरी में तस्वीर बदल सकती है.
बिहार का मखाना अब तेजी से वैश्विक स्तर पर सुपर फूड के रूप में पहचान बना रहा है. इसे देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार मखाना विकास को लेकर लगातार प्रयास कर रही हैं. इसी कड़ी में कृषि विभाग की ओर से मखाना की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को सरकारी सब्सिडी का अवसर दिया जा रहा है.मखाना क्षेत्र विस्तार (खेत प्रणाली) योजना के तहत वही किसान सब्सिडी के लिए अप्लाई कर सकते हैं, जो विभागीय पोर्टल डीबीटी पर रजिस्टर्ड हैं.
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