नया बीज बिल बीज कंपनियों को भारत में बड़ी छूट देता है. बिना गुणवत्ता जांच विदेशी बीजों की एंट्री से देसी बीज, छोटे किसान और पारंपरिक खेती खतरे में पड़ सकती है. इससे खेती की लागत बढ़ने, कॉरपोरेट कंट्रोल देश की खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
Lumpy Disease गायों की लंपी बीमारी कभी भी और कहीं भी फैल सकती है. अभी लंपी के नए मामले फ्रांस में सामने आए हैं. जिसके चलते वहां सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं. भारत में भी लंपी बीमारी को कंट्रोल करने के लिए गायों का वैक्सीनेशन किया जा रहा है. जहां भी लंपी फैलती है वहां क्वराइंटाइन कर कंट्रोल करने की कोशिश की जाती है.
IMD के अनुसार जनवरी में उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है, जिससे गेहूं किसानों की चिंता बढ़ी है. हालांकि ICAR ने गर्मी सहनशील किस्मों के चलते फसल सुरक्षित रहने का भरोसा दिलाया है.
भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (IIMR), लुधियाना ने मक्का की 10 नई बायोफोर्टिफाइड किस्में विकसित की हैं, जो खेती और सेहत दोनों के लिए गेम-चेंजर साबित होंगी. इन किस्मों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें आयरन और जिंक जैसे जरूरी पोषक तत्व प्राकृतिक रूप से मौजूद हैं. 'लैब टू लैंड' मिशन के तहत बनाई गई ये किस्में अलग-अलग राज्यों की जलवायु के अनुकूल हैं, जिससे फसल खराब होने का डर कम होगा और पैदावार अधिक मिलेगी.
ग्लाइफोसेट दरअसल एक रासायनिक खरपतवारनाशी (Herbicide) है. इसका प्रयोग इस्तेमाल खेतों में उगने वाले अनचाहे खरपतवार (जंगली घास) को खत्म करने के लिए किया जाता है. इसका सबसे ज्यादा प्रयोग धान, गेहूं, मक्का, सोयाबीन, कपास जैसी फसलों में होता है. यह पौधों में मौजूद एक खास एंजाइम को रोक देता है, जिससे खरपतवार सूखकर मर जाते हैं.
Stray Animals न तो देश में इतनी गौशालाएं हैं और जो हैं भी तो उनके अंदर इतनी जगह और संसाधन नहीं है कि वहां 50 लाख छुट्टा गाय-बैल को रखा जा सके. हालांकि कोर्ट के आदेश के बाद सड़क पर होने वाले एक्सीडेंट में कमी आएगी. सड़क पर राहगीरों को भी छुट्टा पशु निशाना नहीं बनाएंगे.
जानें मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ खाने के फायदे. यह सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि सर्दियों में शरीर को गर्म रखने, हड्डियां मजबूत करने और पाचन सुधारने में भी मदद करता है.
उत्तर भारत में सर्दियों की दस्तक के साथ मौसम पूरी तरह बदल चुका है और ठंड का असर साफ नजर आने लगा है. पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बढ़ती शीतलहर के बीच जनजीवन और खेती-किसानी की गतिविधियों पर असर पड़ रहा है. वहीं दक्षिण भारत में लगातार बारिश का दौर बना हुआ है. इस लाइव और लगातार अपडेट होते सेक्शन में आपको खाद-बीज से जुड़ी जानकारी, खेती और गार्डनिंग के उपयोगी टिप्स, किसानों के लिए जरूरी सरकारी योजनाएं और कृषि जगत से जुड़े बड़े राष्ट्रीय घटनाक्रम एक ही जगह मिलते रहेंगे. साथ ही बात करेंगे उन्नत क़िस्मों की बीजों के बारे में जिसका लाभ उठाकर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. आज किसान कारवां का सातंवा पड़ाव एटा पहुंचेगा.
देश के कई राज्यों में कोल्ड वेव और घने कोहरे का असर जारी है. पंजाब, हरियाणा, दिल्ली समेत उत्तर भारत में अगले कुछ दिन ठंड से राहत नहीं मिलेगी. मौसम विभाग ने किसानों और आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है.
कई महीनों की गिरावट के बाद लहसुन के थोक दामों में हल्की रिकवरी जरूर दिख रही है, लेकिन किसानों को अब भी राहत नहीं मिली है. प्रमुख उत्पादक राज्यों में भाव पिछले साल से काफी नीचे हैं. आगे कीमतें टिकेंगी या नहीं, पढ़ें रिपोर्ट...
बिहार में मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन में ऐतिहासिक उछाल आया है. बीते 10 साल में 177% वृद्धि के बाद राज्य सरकार नई नीति लाकर प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग को मजबूत करेगी.
हरियाणा के किसानों के लिए करनाल में आलू की प्रदर्शनी लगाई गई है. दरअसल, ये प्रदर्शनी शामगढ़ में स्थित आलू प्रोधोगिकी केंद्र में किसान एक्सपो में लगाई गई है, जहां आलू की कई नई-नई वैरायटी किसानों को दिखाए गए. आलू की खेती करने वाले किसानों ने इस एक्सपो में शिरकत की. वहीं, कई अन्य राज्यों से भी किसान यहां पहुंचे थे.
उत्तर प्रदेश में इस समय मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है, जहां जनवरी के शुरुआती दिनों में तापमान में वृद्धि के बाद अब गिरावट आने की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो हफ्तों तक मौसम शुष्क रहेगा और कई इलाकों में न्यूनतम तापमान 4 से 8 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है. ऐसी परिस्थितियों में, जो किसान किसी कारणवश समय पर बुवाई नहीं कर पाए हैं या जिनकी फसलें देरी से कटने वाले खेतों (जैसे गन्ना या देर से तैयार होने वाली सब्जियां) में लगनी हैं, उनके लिए गेहूं की 'अति-विलंब' श्रेणी वाली बुवाई ही एकमात्र विकल्प बचती है.
उत्तर-पश्चिम भारत में शीतलहर का असर जारी है. राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में तापमान में गिरावट, दिल्ली-NCR में ठंड और कोहरे का डबल अटैक. 15 जनवरी से वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय होने के कारण हिमालयी राज्यों में बारिश और बर्फ़बारी की संभावना.
उत्तर प्रदेश में गाय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलने वाली है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने गाय आधारित विकास योजना लागू कर दी है. इस योजना का मकसद है ग्रामों में रोजगार बढ़ाना, किसानों की आमदनी बढ़ाना और ऊर्जा-संरक्षण करना. तो अगले एक मिनट में जानिए, योगी सरकार की पूरी योजना क्या है...
धान के कटोरे छत्तीसगढ़ में हजारों क्विंटल धान खुले मैदान में पड़ा बर्बाद हो रहा है. गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में 2024-25 का खरीदा गया धान अब तक नहीं उठा, जिससे गुणवत्ता खराब होने की आशंका बढ़ गई है.
Pure Goat Breed सीआईआरजी 756 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है. 44 साल पुराना यह संस्थान मखूदम गांव, फरह में स्थित है. यहां बरबरी, जमनापारी, जखराना नस्ल के बकरे-बकरी और मुजफ्फरनगरी नस्ल की भेड़ पालन की ट्रेनिंग दी जाती है. यहां से प्योर नस्ल के बकरे-बकरी और भेड़ भी ली जा सकती है.
इलायची की खेती किसानों के लिए अच्छी कमाई का मौका है. जानें इलायची उगाने के लिए सही मौसम, मिट्टी, खेती का तरीका और देखभाल की आसान जानकारी. जानें कैसे मसालों की रानी इलायची से किसान कम जमीन में भी लाखों रुपये तक कमा सकते हैं.
मकर संक्रांति को लेकर 54 साल तक 15 जनवरी की तारीख का दावा चर्चा में है. कुछ ज्योतिषाचार्य इसे सूर्य गणना से जोड़ रहे हैं, तो वहीं BHU से जुड़े विद्वान इस दावे को भ्रामक बता रहे हैं. आखिर संक्रांति की तारीख तय कैसे होती है, सच क्या है.
रेतीली, खारी और कमजोर जमीन में भी पनपने वाला बेर, कम लागत, जल्दी फल और बेहतर दाम के कारण पंजाब में फसल विविधीकरण की दिशा में एक मजबूत विकल्प बनता जा रहा है. कई युवा किसान अब उस जमीन से भी कमाई कर रहे हैं, जहां पहले गेहूं–धान असफल हो चुके थे. पहले खेतों की मेड़ों पर जंगली रूप में उगने वाला बेर अब पानी की अधिक खपत वाली फसलों का मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है. यह कम सिंचाई में अच्छा उत्पादन देता है और इनपुट लागत भी बेहद कम है.
Meat Export भारत से मीट की सप्लाई के साथ ही खरीदार को मीट के हलाल होने का सर्टिफिकेट भी देना होगा. ये सर्टिफिकेट देश की कुछ तय की गईं संस्थाएं देंगी. इन संस्थाओं को सरकार ने मान्यता दी है. संस्थाओं को भारत अनुरूपता मूल्यांकन योजना (I-CAS) के हलाल से जुड़े मानकों का पालन करना होगा. और इसकी निगरानी भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) करेगी.
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