देश के अधिकांश हिस्सों में गेहूं की बुवाई अब संपन्न हो गई है. वहीं, अभी पड़ रही ठंड और कोहरा गेहूं की फसल के लिए संजीवनी साबित हो रहा है. ऐसे में जिन किसानों ने अभी तक बुआई के बाद खाद नहीं डाला है उन्हें भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल ने सलाह दी है.
Benifits of Camel Milk नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन कैमिल (NRCC), बीकानेर का कहना है कि कि ऊंटनी का दूध कई गंभीर बीमारियों में दवाई की तरह काम करता है. पाली, राजस्थान से ऊंटनी का दूध लेकर स्पेशल ट्रेन देश के दर्जनों इलाकों में सप्लाई करती है. जिसमे बच्चों के लिए ऑटिज्म जैसी बीमारी के लिए खासतौर पर विपरीत हालात में भी दूध की सप्लाई की जाती है.
हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में प्रस्तावित इथेनॉल फैक्ट्री को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गरमा गया है. किसानों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अब एक बड़े आंदोलन का ऐलान किया है.
जौ की फसल तेज बढ़वार वाली जरूर है, लेकिन सही जल प्रबंधन और खरपतवार नियंत्रण न हो तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है. सीमित सिंचाई में बेहतर उपज कैसे लें और किन दवाओं से खरपतवार पर काबू पाया जाए, इससे जुड़ी अहम जानकारी किसानों के लिए बेहद काम की है.
उत्तर भारत में सर्दियों की दस्तक के साथ मौसम पूरी तरह बदल चुका है और ठंड का असर साफ नजर आने लगा है. पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बढ़ती शीतलहर के बीच जनजीवन और खेती-किसानी की गतिविधियों पर असर पड़ रहा है. वहीं दक्षिण भारत में लगातार बारिश का दौर बना हुआ है. इस लाइव और लगातार अपडेट होते सेक्शन में आपको खाद-बीज से जुड़ी जानकारी, खेती और गार्डनिंग के उपयोगी टिप्स, किसानों के लिए जरूरी सरकारी योजनाएं और कृषि जगत से जुड़े बड़े राष्ट्रीय घटनाक्रम एक ही जगह मिलते रहेंगे.
बायो-फर्टिलाइजर किसानों के लिए रासायनिक उर्वरकों का एक सुरक्षित और किफायती विकल्प है. अगर किसान इसे कम कीमत पर खरीदना चाहते हैं तो वे पीएयू के इनफॉर्मेशन एंड बायो-टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट में स्थित बीज की दुकान से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा पंजाब के कृषि विज्ञान केंद्रों और पीएयू द्वारा आयोजित किसान मेलों में भी बायो-फर्टिलाइजर कम दामों पर उपलब्ध कराया जाता है.
उत्तर भारत में घना कोहरा और कड़ाके की ठंड लोगों की मुश्किलें बढ़ाने वाली है. IMD ने कई राज्यों में शीतलहर और कोल्ड डे का अलर्ट जारी किया है. दिल्ली-एनसीआर से लेकर यूपी, बिहार तक मौसम का असर दिखेगा, जबकि किसानों के लिए भी खास सलाह दी गई है.
Donkey in NLM एक रिपोर्ट के मुताबिक अब बस उंगलियों पर गिनने लायक ही गधे बचे हैं. इसी को देखते हुए केन्द्र सरकार गधों की संख्या बढ़ाने, नस्ल सुधार और पालन के लिए योजना चला रही है. योजना के तहत गधे पालने के लिए 50 लाख रुपये तक की वित्तीय मदद दी जा रही है. इसी लिए गधों को नेशनल लाइव स्टॉक मिशन (एनएलएम) योजना में शामिल किया गया है.
कपास पर ड्यूटी फ्री आयात की मियाद खत्म होते ही किसानों को राहत की उम्मीद जगी है. MSP से नीचे चल रहे दामों को सहारा मिलने की संभावना बन रही है. महीनों के विरोध के बाद आखिरकार सरकार की इच्छा के मुताबिक तय मियाद खत्म होने के बाद अब बाजार का रुख बदल सकता है. लेकिन, टेक्सटाइल इंडस्ट्री फिर से शुल्क मुक्त कपास आयात की मियाद बढ़ाने की मांग कर रही है. पढ़ें पूरा मामला...
बिहार के गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार ने शुक्रवार को विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की, जिसमें उन्होंने राज्य के छोटे गुड़ उत्पादकों और गन्ना किसानों को इस योजना का लाभ देने के निर्देश दिए.
Lado Laxmi Yojana: हरियाणा सरकार ने दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना का दायरा बढ़ाकर महिलाओं को बड़ी राहत दी है. अब तीन नई कैटेगरी जुड़ने से एक लाख से ज्यादा महिलाएं 2100 रुपये महीने की सहायता पाएंगी. किस योग्यता पर मिलेगा लाभ और क्या हैं नई शर्तें, जानिए पूरी डिटेल...
बिहार सरकार ने जमीन विवाद खत्म करने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है. राज्य सरकार ने 27 दिसंबर से बिहार भूमि पोर्टल पर जमीन के रिकॉर्ड के बंटवारे और म्यूटेशन के लिए एक नया सिस्टम लागू किया है..अगले एक मिनट में जानें इस नए सिस्टम का मुख्य मकसद क्या है..
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सर्फुद्दीन गांव के किसान राजू कुमार चौधरी ने आधुनिक खेती की मिसाल पेश कर दी है. दरअसल, जिस आलू की खेती को इलाके में लंबे समय से घाटे का सौदा माना जाता रहा, उसी खेती को उन्होंने मुनाफे का जरिया बना दिया है. राजू चौधरी ने इजरायली तकनीक से आलू की खेती कर न सिर्फ बेहतर उत्पादन हासिल किया है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी उम्मीद की नई किरण जगा दी है.
जनवरी के महीने में पड़ने वाली ठंड में ही स्ट्रॉबेरी का पौधा अच्छी तरह बढ़ता है. यह फल स्वाद में बेहतरीन होने के साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. लोग इसे महंगा फल समझकर घर में लगाने से कतराते हैं, जबकि सही तरीका अपनाने पर कम मेहनत में घर बैठे अच्छी पैदावार मिल सकती है. आइए जानते हैं कैसे.
बेर भारत में बड़े पैमाने पर पाया जाने वाला लोकप्रिय फल है, जो विटामिन C, कैल्शियम, फॉस्फोरस, आयरन और पोटैशियम जैसे जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है. बेर फ्रूट प्रोसेसिंग से किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर दाम मिलता है और नुकसान भी कम होता है. यह इंडस्ट्री ग्रामीण इलाकों में महिला स्वयं सहायता समूहों, छोटे उद्यमियों और युवाओं के लिए रोज़गार के नए अवसर पैदा कर सकती है.
UP News: प्रदेश में चयनित लाभार्थियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 में अभी तक कुल 8.03 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न और मोटे अनाजों का आवंटन किया गया है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में अंत्योदय लाभार्थियों हेतु 36850.35 मीट्रिक टन चीनी का आवंटन किया जा चुका है.
पूरे दिन चले किसान कारवां के दौरान अलग-अल- चरणों में किसानों को खेती, पशुपालन और सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी दी गई. वहीं, प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और आधुनिक कृषि पद्धतियों पर चर्चा की.
Tamatar Ki Kheti: टमाटर की खेती का सही समय शुरू हो चुका है. अगर बुआई से लेकर रोपाई और पोषक तत्व प्रबंधन में जरा सी चूक हुई तो मुनाफा प्रभावित हो सकता है. एक्सपर्ट्स ने टमाटर की बेहतर पैदावार के लिए कुछ अहम सलाह दी है, जिसे जानना हर किसान के लिए जरूरी है.
Sex-sorted semen सेक्स आधारित वीर्य क्या है, ये कहां मिलता है, क्या यह सभी कृत्रिम गर्भाधान (एआई) कराने वालों के पास मिल जाता है, इसकी कीमत क्या है, क्या यह सभी गायों की नस्लों और भैंसों में भी उपलब्ध है. ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो ज्यादातर पशुपालकों के होते हैं. यहां ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब देने की कोशिश की गई है.
गढ़चिरौली जिले के मलांडा गांव के प्रोग्रेसिव किसान कृष्ण भागरथी भुरकुरिया ने अपनी मेहनत और दूरदर्शिता से वह कर दिखाया है जिसके बारे में लोग सिर्फ सोचते ही रह जाते हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि पारंपरिक खेती के साथ अगर वैल्यू एडिशन और इंडस्ट्री को जोड़ा जाए तो आर्थिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है. उन्होंने केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री माइक्रो फूड एंटरप्राइजेज अपग्रेडेशन (पीएमएफएमई) योजना का फायदा उठाया.
Working Bull सेंट्रल बफैलो रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआईआरबी), हिसार, हरियाणा ने ब्रीडर के अलावा दूसरे काम में लगे भैंस बुल के लिए दो तरह की खुराक का चार्ट तैयार किया है. ऐसे काम करने वाले बुल को दो भागों में बांटा गया है. हल्का काम और भारी काम की दो कैटेगिरी बनाई गई हैं.
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