केंद्र सरकार ने बिहार में रबी सीजन 2026 के लिए चना, मसूर और सरसों की MSP पर खरीद को मंजूरी दे दी है. PSS योजना के तहत किसानों से निर्धारित मात्रा में फसल खरीदी जाएगी, जिससे उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव से राहत मिलेगी. खास बात यह है कि राज्य में पहली बार MSP पर मसूर की खरीद की जाएगी, जिसे NAFED द्वारा 7000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा.
कृषि निदेशक ने बताया कि बिहार में 2.84 लाख टन यूरिया उपलब्ध है. खादों की सही बिक्री, वैकल्पिक उर्वरक के उपयोग और कालाबाजारी रोकने के निर्देश दिए गए.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार 2026 में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से थोड़ा कमजोर रह सकता है और बारिश 90% से 95% के बीच रहने का अनुमान है. अल नीनो के सक्रिय होने की संभावना के चलते बारिश पर असर पड़ सकता है, हालांकि संभावित पॉजिटिव IOD कुछ राहत दे सकता है. IMD के मुताबिक इस बार औसत बारिश करीब 92% (±5% त्रुटि) रहने की संभावना है.
राज्य में चल रही राजस्व कर्मियों की हड़ताल को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं.
धान की रोपाई के समय किसानों को अक्सर मजदूरों की भारी कमी का सामना करना पड़ता है. विशेषकर पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में यह एक बड़ी समस्या है. इस समस्या के समाधान के लिए जॉर्ज माइजो कंपनी ने आधुनिक राइस ट्रांसप्लांटर मशीन बाजार में उतारे हैं. कंपनी के पास चार लाइन और छह लाइन वाले दो अलग-अलग मॉडल उपलब्ध हैं. इन मशीनों में यामाहा का 4.5 एचपी पेट्रोल इंजन लगा है.
Solar Didi Story: सोलर दीदियां न केवल तकनीकी कार्य कर रहीं हैं, बल्कि वे जागरूकता अभियान का भी अहम हिस्सा हैं. वे ग्रामीणों को सौर ऊर्जा के फायदे समझाकर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित कर रही हैं. इससे ऊर्जा की बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है.
मंत्रियों ने मंडी में फसल की आवक और उठान से जुड़े आंकड़ों की विस्तृत जानकारी ली. अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि फसल का उठान तेजी से किया जाए, ताकि किसानों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
अप्रैल का महीना खेती-बाड़ी में काफी अहम माना जाता है. इस महीने में किसानों को अपनी खेतों में कई सारे काम होते हैं. गेहूं की कटाई से लेकर जायद फसलों की खेती तक. इसके अलावा कई राज्यों में इस महीने में अंत तक किसान अपने खेतों में गरमा धान की बुवाई की भी तैयारी करने लगते हैं.
अपने संबोधन में नितिन गडकरी ने कहा कि वे इस कार्यक्रम में मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि किसान के रूप में आए हैं. उन्होंने कहा कि खेती का भविष्य अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वेदर स्टेशन, सैटेलाइट आधारित सूचना, ड्रोन, नैनो यूरिया और आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़ चुका है.
कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार 10 अप्रैल 2026 तक देश में गर्मी की फसलों (जायद) की बुवाई 64.10 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जो पिछले साल से थोड़ा अधिक है. जहां धान के रकबे में गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दालों, मोटे अनाज और तिलहनों के क्षेत्र में बढ़ोतरी देखी गई है. मक्का, मूंग और मूंगफली जैसी फसलों का रकबा बढ़ने से कृषि क्षेत्र में अच्छे संकेत मिल रहे हैं.
कार्यक्रम के दौरान किसानों के मनोरंजन के लिए सलमान जादूगर ने अपने जादू के माध्यम से खेती और पशुपालन से जुड़ी जानकारियां रोचक ढंग से प्रस्तुत कीं. इसके अलावा 12 किसानों को लकी ड्रॉ के माध्यम से नकद राशि भी वितरित की गई.
अप्रैल शुरू होते ही गर्मी तेज होने लगती है. जैसे-जैसे दिन चढ़ता है, धूप और भी तीखी हो जाती है. घर के अंदर भी गर्मी महसूस होने लगती है, जिससे लोग राहत पाने के लिए एसी, कूलर और पंखों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन इनसे बिजली का बिल भी तेजी से बढ़ जाता है.
हरियाणा में रबी खरीद सीजन 2026-27 के तहत अब तक मंडियों में करीब 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है, जबकि लगभग 11 लाख मीट्रिक टन की ही खरीद हो पाई है. सरकार ने किसानों को 188 करोड़ रुपये सीधे उनके खातों में ट्रांसफर किए हैं. खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, जियो-फेंसिंग और कैमरों जैसी नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं.
फार्मा सेक्टर की दिग्गज कंपनी Mankind Pharma अब एग्रीकल्चर सेक्टर में भी पूरी ताकत के साथ उतर चुकी है. मध्य प्रदेश के रायसेन में आयोजित उन्नत कृषि महोत्सव में कंपनी ने किसानों के लिए अपने दो खास प्रोडक्ट लॉन्च किए, जो खेती में बड़ा बदलाव ला सकते हैं.
समय के साथ बहराइच जिले में खेती के क्षेत्र में काफी बदलाव भी हुए हैं, जहां परंपरागत फसलों के साथ अब यहां के कई किसान विदेशी फसलों और प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. वहीं, जनपद के गजपतिपुर गांव में आयोजित किसान कारवां कार्यक्रम में केवल कृषि वैज्ञानिक और अधिकारी ही शामिल नहीं रहे.
इथेनॉल और एलपीजी के बीच तुलना को लेकर AIDA के पत्र में इथेनॉल को एक स्वच्छ, सस्ता और घरेलू विकल्प बताया गया है. इसमें इथेनॉल आधारित कुकिंग को बढ़ावा देने, नीति बनाने, सुरक्षा मानक तय करने और चरणबद्ध तरीके से लागू करने की मांग की गई है. यह पहल देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने और बायोफ्यूल सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है.
किसान मौजूदा समय में पारंपरिक फसलों को छोड़ नकदी फसलों की खेती बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. वहीं, मौजूदा समय में पूरे साल करेले की मांग बाजारों में बनी रहती है. इसलिए किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती कर सकते हैं. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन करेले का बीज बेच रहा है.
नासिक की लासलगांव मंडी में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जहां थोक भाव करीब 30% गिरकर 775 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं. उत्पादन लागत लगभग 1800 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद किसानों को 500 से 800 रुपये में प्याज बेचनी पड़ रही है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. किसानों ने सरकार से राहत पैकेज और 1500 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान की मांग की है, जबकि कीमतों में गिरावट की वजह बढ़ती आवक और कमजोर मांग को बताया जा रहा है.
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि नुकसान की इतनी बड़ी मात्रा के बावजूद, राज्य सरकार ने अब तक किसानों को कोई मुआवजा या मदद नहीं दी है. अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मंत्रियों ने सिर्फ़ खोखले ऐलान किए हैं.
Poultry Conclave in UP यूपी सरकार का पशुपालन विभाग और देश की बड़ी पोल्ट्री एसोसिएशन पोल्ट्री इंडिया, हैदराबाद दोनों मिलकर पोल्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित कर रहे हैं. जानकारों का कहना है कि यूपी में सरकार पहली बार अंडे-चिकन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पोल्ट्री कॉन्क्लेव का लखनऊ में आयोजन कर रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने MSP को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. याचिका में किसानों को फसल की पूरी लागत के आधार पर उचित मूल्य देने की मांग की गई है. साथ ही सभी फसलों की खरीद और पर्याप्त केंद्र बनाने की बात कही गई है, ताकि किसानों को सही दाम और राहत मिल सके.
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