हरियाणा के करनाल की अनाज मंडी में गेहूं खरीद शुरू हो गई है. इस बार MSP 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है. बायोमेट्रिक सत्यापन, इलेक्ट्रॉनिक कांटे और ऐप आधारित ऑक्शन जैसी नई व्यवस्थाएं लागू की गई हैं, जबकि किसानों को फसल सुखाकर लाने की सलाह दी गई है.
देश में आम की फसल पर “रेड बैंडेड बोरर” नाम का खतरनाक कीट तेजी से फैल रहा है, जिससे बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 80-90% तक फसल नुकसान की आशंका है. किसानों के लिए यह बड़ा खतरा बन चुका है, ऐसे में समय रहते बचाव और सही प्रबंधन बेहद जरूरी है.
देश के कई हिस्सों में बेमौसम बारिश और तेज आंधी से किसानों को भारी नुकसान हुआ है. महाराष्ट्र के नांदेड़ में गेहूं और बाजरे की फसल बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों को आर्थिक झटका लगा है. किसान सरकार से जल्द मुआवजे और सहायता की मांग कर रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ में चाय बागानों का दौरा किया और महिला श्रमिकों से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने कहा कि चाय बागान में काम करने वाली महिलाओं का आशीर्वाद खास होता है और अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बोले—“मैं भी चाय वाला हूं.”
मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है. सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीद की तारीख आगे बढ़ा दी है, जिसके बाद अब कई जिलों में 10 अप्रैल से तो कुछ जगह 15 अप्रैल से खरीदी शुरू होगी. इधर, प्रदेश में करीब 60 से 70 फीसदी गेहूं की फसल तैयार हो चुकी है और किसान मंडियों में बेचने के लिए तैयार बैठे हैं. लेकिन खरीदी में देरी के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
खाद संकट के बीच आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के किसानों ने धान की खेती में बिना यूरिया के देसी तकनीक अपनाई है. दलहन फसलों के जरिए मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन बढ़ाकर खेती की लागत शून्य कर दी गई है. यह तरीका न केवल किसानों का खर्च बचा रहा है बल्कि मिट्टी की सेहत और पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है.
तीर्थराज प्रयाग के बिंदव गांव में ‘किसान तक’ कारवां ने किसानों को आधुनिक खेती, नई तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी. कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने फसल उत्पादन, उर्वरक, कुक्कुट पालन और पोषण जैसे विषयों पर मार्गदर्शन किया. किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और आय बढ़ाने व मिट्टी सुधारने के नए उपाय सीखे.
केंद्र सरकार अप्रैल-मई 2026 में देशभर में जोनल कृषि कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगी, जिसकी शुरुआत 7 अप्रैल को जयपुर से होगी. इन बैठकों में विभिन्न राज्यों के मंत्री, वैज्ञानिक और किसान योजनाओं की समीक्षा कर कृषि विकास की नई रणनीति तैयार करेंगे.
गुजरात के वलसाड जिले के एक किसान ने ग्राफ्टिंग तकनीक से सिर्फ 12 फीट ऊंचे एक पेड़ पर 80 किस्मों के आम उगाकर अनोखी मिसाल पेश की है. करीब 5 साल की मेहनत से हासिल इस उपलब्धि में फिलहाल 60 से ज्यादा किस्में सुरक्षित हैं, जिनमें कई पर फल भी आ चुके हैं. किसान का लक्ष्य एक ही पेड़ पर 100 किस्मों के आम उगाना है, जिससे यह प्रयोग देशभर में चर्चा का विषय बन गया है.
FMD Disease एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो गाय-भैंस और भेड़-बकरी की खुरपका-मुंहपका (FMD) बीमारी मीट, डेयरी प्रोडक्ट और मिल्क एक्सपोर्ट की बड़ी रुकावट है. जब तक भारत को एफएमडी फ्री जोन का सर्टिफिकेट नहीं मिलता तो तीनों चीजों का एक्सपोर्ट भी नहीं बढ़ेगा. इसके लिए वैक्सीनेशन ड्राइव चलाने के साथ ही और भी कोशिशें की जा रही हैं.
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत तक पहुंच गया है. होर्मुज स्ट्रेट में बाधा से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे खाद और कीटनाशकों की कीमतें बढ़ रही हैं और किसानों को खरीफ सीजन से पहले मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. बढ़ती लागत और कमी से फसल उत्पादन और किसानों की आय पर संकट गहराने की आशंका है.
Kishangarh Marble Site: राजस्थान के किशनगढ़ में मार्बल वेस्ट से बना सफेद डंपिंग साइट पर्यटन का आकर्षण बन गया है, लेकिन आसपास के गांवों के किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. खेतों पर जमा मार्बल धूल से मिट्टी की उर्वरता घट रही है और फसलों की पैदावार आधी तक गिरने की बात सामने आ रही है.
कोटा के किसान श्रीयुत किशन सुमन द्वारा विकसित ‘सदाबहार आम’ एक अनोखी किस्म है, जो साल में तीन बार फल देती है. इसका स्वाद अल्फांसो जैसा है और यह किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है. इस नवाचार से प्रभावित होकर आनंद महिंद्रा ने भी किसान को समर्थन देने की इच्छा जताई है.
सरकार ने अरहर, उड़द और पीली मटर की आयात नीति को 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया है, जिसमें अरहर और उड़द ड्यूटी फ्री रहेंगे जबकि पीली मटर पर 30% शुल्क जारी रहेगा. इस फैसले का मकसद महंगाई नियंत्रित करना है, लेकिन बढ़ते आयात से किसानों की आय और MSP पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है.
Rule for Poultry Egg एक अप्रैल से अंडों पर एक्सपायरी के साथ ही कई अन्य जानकारियां प्रिंट करने का मौखिक आदेश चर्चा में आया था. मौखिक इसलिए कि लिखित आदेश 2022 में ही आ चुका था, लेकिन उसका पालन नहीं हो पा रहा था. आज एक अप्रैल है, लेकिन एक बार फिर आदेश का पालन नहीं हो रहा है. इसके पीछे 10 पैसे को बड़ी वजह बताया जा रहा है.
असम के चाय बागानों में काम करने वाले मजदूर सुबह से शाम तक कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन उन्हें रोजाना मात्र 250 रुपये की दिहाड़ी मिलती है. सीमित आय, बढ़ती महंगाई और कर्ज के बीच उनका जीवन संघर्ष से भरा है, जबकि वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं. पढ़ें आज तक की ग्राउंड रिपोर्ट...
देश के कई राज्यों में बेमौसम बारिश, आंधी और ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. गेहूं, सरसों, दलहन और सब्जी फसलों को भारी नुकसान हुआ है. हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई इलाकों में फसलें बर्बाद होने से किसान चिंतित हैं और सरकार से जल्द सर्वे कर मुआवजे की मांग कर रहे हैं.
एक हालिया संसदीय समिति की रिपोर्ट में सामने आया कि पिछले एक साल में गन्ना किसानों का बकाया 32 गुना बढ़ गया है. 2023–24 में बकाया ₹34 करोड़ था, जो अब ₹16,087 करोड़ से ज़्यादा हो गया है. कर्नाटक के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहाँ बकाया ₹4,956 करोड़ पहुँच गया है. उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र पर भी भारी बकाया है. मिल मालिक नकदी की कमी, चीनी की गिरती कीमतें और बिना बिका स्टॉक इसे बढ़ने का कारण बताते हैं. किसान संगठनों का कहना है कि सरकार के प्रयास तब तक नाकाफी रहेंगे, जब तक भुगतान सीधे बैंक खातों में नहीं पहुंचे.
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में ऑल इंडिया किसान मजदूर मोर्चा (KMM) की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक हुई. बैठक में किसानों और मजदूरों के हक की रक्षा, MSP की कानूनी गारंटी, मनरेगा सुरक्षा और सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन चलाने का ऐलान किया गया. राज्यों में सम्मेलन कर जनता को जागरूक करने की योजना भी बनाई गई.
Increase Camel साथ ही राजस्थान में बचे ऊंटों की संख्या भी बताई थी. राज्य सरकार के मुताबिक साल 1983 में राजस्थान में ही ऊंटों की संख्या 7.56 लाख थी. लेकिन 2019 में हुई पशुगणना के आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में अब सिर्फ 2.13 लाख ही ऊंट रह गए हैं. वहीं देशभर की बात करें तो ऊंटों की संख्या में 37 फीसद की कमी आई है.
होरमुज जलडमरूमध्य संकट के कारण वैश्विक खाद सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे एशिया में बुवाई पर खतरा मंडरा रहा है. इस बीच रूस ने ग्लोबल साउथ देशों को खाद और कृषि उत्पाद उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है. बढ़ती कीमतों और सप्लाई संकट के बीच यह कदम कई देशों के लिए राहत बन सकता है.
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