भारत में आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और किसानों की कमाई का बड़ा जरिया है. देश में करीब 22 लाख हेक्टेयर में आम की खेती होती है. लेकिन कई बार जानकारी की कमी के कारण किसान मंजर और फल बनने के समय कुछ गलतियां कर देते हैं, जिससे उत्पादन कम हो जाता है.
किसान कारवां यह कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक लंबी और सार्थक यात्रा है, जो 29 दिसंबर 2025 से शुरू होकर मई 2026 के अंत तक प्रदेश भर के सभी 75 जिलों तक पहुंचेगी. किसान तक का किसान कारवां यूपी के हर जिले में पहुंचकर किसानों, ग्राम प्रधानों, प्रगतिशील किसानों और महिला किसानों को एक साझा मंच देगा.
इस विशेष अभियान के तहत 75 जिलों की कवरेज में सुल्तानपुर 34वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से खेती से जुड़ी नई तकनीकों और योजनाओं की जानकारी प्राप्त की.
महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है. जिन किसानों का फसल ऋण 30 सितंबर 2025 तक बकाया था, उनका 2 लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया जाएगा. वहीं, समय पर लोन चुकाने वाले किसानों को 50 हजार रुपये का प्रोत्साहन बोनस देने की घोषणा भी की गई है.
Pusa Krishi Mela 2026 में किसानों के लिए एक नई मशीन पावर हैरो पेश की गई है, जो डिस्क, कल्टीवेटर और रोटावेटर तीनों का काम एक साथ कर सकती है. इस मशीन की खासियत यह है कि इसकी ब्लेड वर्टिकल है और क्लॉकवाइज और एंटी-क्लॉकवाइज दोनों तरफ घूमती है, जिससे एक फीट तक की गहराई में जुताई हो सकती है.
Feed-Water in Poultry रोजाना पानी और फीड मुर्गियों को खाने-पीने के लिए दिया जाता है, लेकिन मुर्गियों के खाने-पीने के बाद भी बच जाता है. नियमानुसार ऐसे पानी और फीड का निपटान जरूरी है. अगर ये बचा हुआ फीड और पानी फार्म में ही रह जाता है तो इसके चलते फार्म में बीमारी फैलने लगती है.
तापमान बढ़ने से आग लगने की खबरें भी आने लगी हैं, ये तस्वीरें मध्य प्रदेश के खरगोन की हैं जहां ये गेहूं के खेत धू-धूकर जल रहे हैं. किसान की लाखों की खड़ी फसल जलकर खाक हो गई. मामला खरगोन जिला मुख्यालय से 7 किमी दूर जैतापुर थाना क्षेत्र के गोपालपुरा गांव का है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और युद्ध की खबरों का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखाई देने लगा है.. दरअसल अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की चर्चाएं तेज हो गई हैं.
बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. Nitish Kumar ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है. उनके इस फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आने लगी हैं.
मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध की वजह से दुबई के जेबेल अली पोर्ट पर भारी रुकावटें पैदा हो गई हैं, जिसके कारण महाराष्ट्र से भेजे गए 800–1,000 कंटेनर फंस गए हैं. इन कंटेनरों में केले, अंगूर, अनार, प्याज, तरबूज और पत्तेदार सब्जियों जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलें शामिल हैं. रमजान सीजन में खाड़ी देशों में इन फलों की मांग सबसे ज्यादा होती है, लेकिन पोर्ट ठप होने से पूरा निर्यात चेन रुक गया है.
IHBT इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयो रिसोर्स टेक्नोलॉजी (आईएचबीटी), पालमपुर, हिमाचल प्रदेश ने एक ऐसी चॉकलेट तैयार की है जो प्रोटीन और खून की कमी को देर करती है. इस चॉकलेट को खाने से दांत भी खराब नहीं होते हैं. कई तरह के अनाज से पांच तरह की चॉकलेट बनाई जा रही है.
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने बजट वेबिनार को संबोधित करते हुए 'एग्रीकल्चर और रूरल ट्रांसफॉर्मेशन' थीम पर बड़ा बयान दिया. पीएम मोदी ने कहा कि पीएम किसान योजना के तहत किसानों को 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि दी जा चुकी है. उन्होंने यह भी कहा कि एमएसपी में किए गए सुधारों से किसानों को फायदा हुआ है और सरकार की नीतियों की वजह से किसानों को कम जोखिम के साथ बेसिक आर्थिक सुरक्षा मिल रही है.
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में धान खरीदी केंद्र पर तड़के हुए हाथी के हमले ने दहशत फैला दी. केंद्र प्रभारी राजेश कुमार सिंह की हाथी ने कुचलकर हत्या कर दी, जबकि उनकी पत्नी और अन्य कर्मचारी किसी तरह मौके से भागकर बच निकले. इलाके में हाथियों की आवाजाही को लेकर वन विभाग ने अलर्ट जारी किया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोस्ट‑बजट वेबिनार में कृषि क्षेत्र से जुड़े प्रमुख सुधारों और सरकारी योजनाओं पर विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सरकार ने PM‑Kisan योजना के तहत करोड़ों किसानों को लाभ पहुंचाया है, MSP सुधारों से किसानों का रिटर्न बढ़ा है और फसल बीमा योजना के तहत बड़े दावे निपटाए गए हैं. पीएम ने किसान ID जैसी डिजिटल पहलों, एग्री‑स्टैक, ई‑NAM, नैचुरल फार्मिंग, एक्सपोर्ट‑ओरिएंटेड कृषि और नॉर्थ‑ईस्ट और दक्षिण भारत के लिए विशेष फसल रणनीतियों पर जोर दिया. साथ ही दुग्ध उत्पादन, पशु स्वास्थ्य और टीकाकरण कार्यक्रमों को भी बड़ी प्राथमिकता देने की बात कही.
Kashmir Weather News: कश्मीर में मार्च की शुरुआत में ही मौसम ने चौंकाने वाला रुख ले लिया है. तापमान सामान्य से 10 से 13 डिग्री तक ऊपर पहुंच गया है और झेलम नदी का जलस्तर ऐतिहासिक न्यूनतम पर दर्ज हुआ है.
MP के बासमती चावल का गढ़ माने जाने वाले रायसेन और नर्मदापुरम जिले इस वक्त दोहरी मार झेल रहे हैं. एक तरफ निर्यात ठप है, तो दूसरी तरफ 'वॉर टैरिफ' ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है. हालात यह हैं कि व्यापारी फिलहाल नया माल उठाने से भी बच रहे हैं, जिससे स्टॉक लगातार बढ़ता जा रहा है.
उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत में मार्च की शुरुआत से ही पारा 35 डिग्री के पार पहुच गया है, जिसने गेहूं किसानों की चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय बढ़ती गर्मी 'हीट स्ट्रेस' पैदा कर सकती है, जिससे गेहूं के दाने समय से पहले सूखकर पिचक सकते हैं और पैदावार में भारी कमी आ सकती है. इस परेशानी से बचने के लिए पूसा के कृषि वैज्ञानिकों ने घबराने के बजाय कुछ जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दी है.
Dry Fodder in Summer सर्दियों के मुकाबले गर्मियों में पशु बहुत ज्यादा बीमार होते हैं. अगर ठीक से इनकी देखरेख कर ली जाए तो हम पशुओं को बीमार होने से बचा सकते हैं. जैसे कुछ दिनों बाद बाजार में नया भूसा (तूड़ी) आने वाली है. नया भूसा पशुओं को बीमार करता है. इसलिए इसे खिलाने में ऐहतियात बरतनी चाहिए.
तेलंगाना में कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) द्वारा 27 फरवरी को कपास खरीदी रोक देने के बाद किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. आदिलाबाद, मंचेरियल, कुमराम भीम आसिफाबाद और निर्मल जिलों में कपास की बड़े पैमाने पर खेती होने के बावजूद खराब मौसम और मार्केट की चुनौतियों ने उत्पादन और आय दोनों पर असर डाला. CCI ने 8–12% नमी वाली फसल के लिए 8,110 रुपये प्रति क्विंटल का MSP तय किया था, लेकिन नमी और बीज के आकार का हवाला देते हुए 100 रुपये की कटौती कर दी, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ा.
मौजूदा समय में किसान धान-गेहूं के अलावा सब्जी की खेती बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है. इसलिए किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती कर रहे हैं. किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन खरबूजे की बीज बेच रहा है.
Fever in Pregnancy गाय-भैंस के बच्चा देने के बाद अलर्ट रहने की जरूरत होती है. क्योंकि बच्चा होने के बाद प्रसुति ज्वार की आशंका रहती है. जबकि बहुत सारे पशुपालक बच्चा होते ही गाय-भैंस की तरफ से बेफ्रिक हो जाते हैं. इस खबर में प्रसुति ज्वार के लक्षण, उपचार और बचाव पर काम करते हुए पशुपालकों के लिए कुछ खास उपाय साझा किए हैं.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today