बिहार विधान परिषद में 2026‑27 के लिए कृषि विभाग का 3446.45 करोड़ रु. का बजट ध्वनिमत से पारित हुआ. सरकार ‘चतुर्थ कृषि रोड मैप (2023‑28)’ के तहत एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन, बाजार आधुनिकीकरण, ई‑नाम विस्तार, कोल्ड‑चेन/गोदाम, प्रोसेसिंग यूनिट, GI उत्पादों की ब्रांडिंग और कृषि स्टार्टअप को बढ़ावा देगी. 2024‑25 में 326.62 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन दर्ज हुआ. जैविक‑प्राकृतिक खेती को गति देने के लिए 400 क्लस्टरों में 50,000 एकड़ पर दो साल का कार्यक्रम चलेगा, जबकि बीज वितरण, मखाना भंडारण और किसान प्रशिक्षण (कृषि जन कल्याण चौपाल) जैसी पहलों से किसानों की आय और बाजार पहुंच बढ़ेगी.
कन्नौज में आयोजित ‘किसान तक’ किसान कारवां ने किसानों को फूल, आलू, मक्का और पशुपालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी. कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने मिट्टी, उर्वरक, मेड़ तकनीक और रोग प्रबंधन पर जागरूक किया. नैनो यूरिया, डीएपी और आधुनिक टायर जैसे उपाय किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने में मदद कर रहे हैं.
Godhan Samagam 2026: कार्यक्रम में गोकुल पुरस्कार के तहत लखनऊ दुग्ध संघ के लखीमपुर-खीरी जनपद निवासी एवं वेलवा मोती समिति के वरूण सिंह को 1,81,272.00 ली0 दुग्ध आपूर्ति के लिए राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार और फिरोजाबाद दुग्ध संघ के जनपद आगरा की दुग्ध समिति ठेरई के वीरेंद्र सिंह को 1,10,693.50 ली0 दुग्ध आपूर्ति हेतु द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया.
लखनऊ के गोधन समागम में पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने सपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि योगी सरकार के कार्यकाल में पशु संरक्षण और किसानों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है. 2017 के बाद स्लाटर हाउस बंद किए गए और डीबीटी के माध्यम से किसानों को सीधा लाभ पहुंचाया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आया है.
इत्र की राजधानी कन्नौज में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा, जहां किसानों ने फूल, आलू, मक्का और पशुपालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं. कृषि विभाग ने मिट्टी में घटती ऑर्गेनिक कार्बन पर चिंता जताई, वहीं इफको, चंबल फर्टिलाइजर और जेके टायर ने अपने उत्पादों और तकनीकों की जानकारी दी. कृषि वैज्ञानिकों ने मेड़ तकनीक, रोग प्रबंधन और दवाओं के अंधाधुंध उपयोग के नुकसान के बारे में जागरूक किया. कार्यक्रम में लकी ड्रॉ व सम्मान समारोह भी आयोजित हुआ.
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित गोधन समागम–2026 में पशुपालकों और किसानों को नई योजनाओं, नंद बाबा मिशन और डेयरी विकास कार्यक्रमों की जानकारी दी गई. कार्यक्रम में बेहतर गोशालाओं को सम्मानित किया गया और विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक पशुपालन पर मार्गदर्शन दिया. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया.
लखनऊ में आयोजित गोधन समागम में आईटी सेक्टर के विशेषज्ञों ने गोपालन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की पहल प्रस्तुत की. कर्नाटक से आए राम सुब्रमण्यन और राजेश पुरी ने बताया कि गोबर आधारित उत्पादों और स्वदेशी प्रणालियों के जरिए किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा सकता है. गो चेतना जैसे प्रोजेक्ट के माध्यम से उत्तर प्रदेश में इस मॉडल का विस्तार करने की योजना तैयार की गई है.
पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026, नई दिल्ली में 25–27 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है. इस मेले का उद्देश्य किसानों को उन्नत फसल किस्में, जलवायु‑स्मार्ट तकनीक, डिजिटल कृषि नवाचार और पूसा बीजों की जानकारी सीधे प्रदान करना है. मेले में महिला‑युवा सशक्तिकरण, किसान नवाचार और वैज्ञानिक कृषि से जुड़े समाधान प्रदर्शित किए जाएंगे.
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में गोधन समागम के दौरान पशुओं की बीमारी की जांच के लिए आधुनिक मशीन का प्रदर्शन किया गया. लॉर्ड्स मार्क इंडस्ट्रीज लिमिटेड के इंजीनियर प्रतीक पाटिल ने बताया कि यह मशीन तेरह तरह के जानवरों का इलाज आसानी से कर सकती है.
भारत‑अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में हरियाणा के किसान करनाल से कुरुक्षेत्र तक मार्च कर मुख्यमंत्री आवास के बाहर तीन दिन का महापड़ाव करेंगे. किसान नेताओं का कहना है कि यह ट्रेड डील किसानों को नुकसान पहुंचाएगी और खेती पर बुरा असर डालेगी. वहीं, किसान मंडियों में धान घोटाले की सीबीआई जांच की भी मांग कर रहे हैं.
संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में किसान नेताओं ने केंद्र और पंजाब सरकार दोनों पर किसान-मजदूर विरोधी नीतियां लाने का आरोप लगाया. बिजली संशोधन विधेयक 2025, बीज संशोधन विधेयक 2025, मनरेगा मजदूरों से जुड़े कानून, अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौता और बठिंडा थर्मल प्लांट की सैकड़ों एकड़ सार्वजनिक जमीन की बिक्री को लेकर तीखी आलोचना की गई.
अचानक मौसम में हो रहे बदलाव के कारण लीची के बाग में कीटों का हमला बढ़ गया है, जिससे मंजर और फल के उत्पादन पर असर पड़ता है. ये कीट लीची के लिए बहुत खतरनाक होता है, जिससे फलों को भारी नुकसान होता है.
गेहूं में करनाल बंट रोग को गेहूं का कैंसर कहा जाता है, जिसके लक्षण फूलों की अवस्था में दिखाई देते हैं और दानों के चारों ओर काला पाउडर बन जाता है. यह रोग बीज, मिट्टी और हवा से तेजी से फैलता है. जानें इसके लक्षण, रोकथाम, प्रतिरोधी किस्में, बीज उपचार और रासायनिक नियंत्रण के प्रभावी तरीके. साथ ही गेहूं में खरपतवार और लूज स्मट रोग से बचाव की जानकारी भी पढ़ें.
प्रोफेसर केसी बंसल ने किसान तक के इंटरव्यू में कहा, 1965 में अमेरिका द्वारा भारत को गेहूं के लिए ब्लैकमेल किए जाने का खुलासा किया. उन्होंने जीन एडिटिंग और जीएम फसलों की तकनीक को सरल भाषा में समझाया और बताया कि कैसे ये तकनीक भारत में फसलों की पैदावार बढ़ाकर किसानों और खाद्य सुरक्षा के लिए लाभकारी साबित हो सकती है.
Buffalo Meat export देश में कुल मीट उत्पादन एक करोड़ टन से ज्यादा का है. सबसे ज्यादा बफैलो मीट का उत्पादन होता है. एक्सपोर्ट भी इसी का ज्यादा होता है. लेकिन अब धीरे-धीरे भेड़-बकरे के मीट का एक्सपोर्ट भी बढ़ रहा है. बीते 5 साल में भेड़-बकरे के मीट का एक्सपोर्ट डबल से भी ज्यादा हो गया है. लाइव भेड़-बकरे भी एक्सपोर्ट हो गए हैं.
New Delhi में ऑर्गेनिक फूड प्रेमियों के लिए खास बाजार सजता है. Sunder Nursery में हर रविवार ‘द बाजार’ का आयोजन किया जाता है, जहां केवल जैविक तरीके से उगाए गए उत्पाद ही बेचे जाते हैं. यहां अनाज, ताज़ी सब्जियां, मौसमी फल और कई तरह के फूड आइटम्स उपलब्ध होते हैं.
लॉर्ड्स मार्क इंडस्ट्रीज लिमिटेड के इंजीनियर प्रतीक पाटिल ने बताया कि ये मशीनें जानवरों के खून की जांच करने के साथ‑साथ किडनी, लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों के फंक्शन टेस्ट भी करती हैं. उन्होंने कहा कि ये मशीनें 23 पैरामीटर पर कार्य करती हैं, जिससे जानवरों में किसी भी तरह के संक्रमण या समस्या का तुरंत पता लगाया जा सकता है.
Animal Care पशु की भूख कम हो गई है, आफरा आता है, पेट में पानी भर जाता है, निर्जलीकरण अर्थात पानी की कमी हो जाती है और शरीर का तापमान कम हो जाता है, कब्ज-दस्त हो सकते हैं, पशु दांत भी किटकिटाने लगता है. तो ये तय मान लिजिए कि पशु का पेट खराब हो चुका है, उसे घर का बचा हुआ और बासी खाना खाने को दिया जा रहा है.
देश के कई हिस्सों में इस साल मौसम समय से पहले बदलता दिख रहा है. कश्मीर में भी आमतौर पर मार्च में खिलने वाले बादाम के फूल इस बार फरवरी में ही नजर आने लगे हैं. जिससे किसान और बागवान काफी चिंतित हैं.
कानपुर के अटारी कैंपस में सरसों को लेकर हुए शोध से यह साबित होता है कि प्राकृतिक तरीके से फसलों का उत्पादन किया जाए तो देश की मृदा सेहत सुधरेगी और लोगों को अधिक पोषणयुक्त अनाज मिलेगा.
आज के दौर में किसान सिर्फ दूध बेचकर ही नहीं, बल्कि गोबर के सही बिजनेस से भी लखपति बन सकते हैं. इसका जीता-जागता उदाहरण उत्तर प्रदेश के एक प्रगतिशील किसान हैं, जिन्होंने गोबर के सही मैनेजमेंट से लाखों का बिजनेस खड़ा कर दिया है. हमारे देश में पशुधन की कोई कमी नहीं है, बस जरूरत है इसे कमाई में बदलने की.
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