Poultry Farm Care पोल्ट्री एक्सपर्ट की मानें तो मुर्गी अंडा देने वाली हो या चिकन के लिए पाला जाने वाला ब्रॉयलर मुर्गा, ये सभी 25 से 31 डिग्री तापमान में सामान्य रहते हैं. अगर तापमान 25 डिग्री से नीचे या फिर 31 से ऊपर जाता है तो पोल्ट्री फार्म के लिए ये अलर्ट हो जाने वाले हालात होते हैं. ऐसे में अगर जल्द ही कोई ठोस उपाय नहीं किए गए तो मुर्गे-मुर्गियों की मौत तय है.
Fish Pond Care जब तालाब का पानी हरे रंग का हो जाए तो उसमे चूने और गोबर का इस्तेमाल फौरन बंद कर दें. और इस बात का भी खास ख्याल रखें कि मछलियों को दिया जा रहा फीड क्वालिटी का है के नहीं. समय-समय पर तालाब की सफाई की जा रही है या नहीं. साथ ही तालाब में रहने के लिए मछलियों को जरूरत की जगह मिल रही हो.
UP News: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा करते हुए मंत्री शाही ने कहा कि जिन किसानों का प्रीमियम काटा गया है, उनका बीमा सुनिश्चित रूप से किया जाए और इसका पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाए. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बीमा कवरेज, दावों और लाभार्थियों का स्पष्ट डेटा तैयार किया जाए, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे.
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं के लिए आसान और राहत देने वाला फैसला लिया है. अब प्रीपेड स्मार्ट मीटर पहले की तरह तुरंत पैसे काटने की जगह पोस्टपेड की तरह काम करेंगे. इसका मतलब है कि लोगों को हर महीने बिल मिलेगा और उसे भरने के लिए 15 दिन का समय मिलेगा.
Goat Feed शहर में पशुओं को चराने के लिए जगह ही नहीं है. शहर में हरा चारा भी आसानी से नहीं मिल पाता है. और जब बकरों को हरा चारा ही खाने को नहीं मिलेगा तो वो मोटे-ताजे कैसे होंगे. लेकिन केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG), मथुरा के गोट एक्सपर्ट की एक सलाह सभी परेशानियों को दूर कर देती है. बकरों को गांव-देहात की जगह शहर में पालना आसान बनाती है.
उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईटेंशन बिजली लाइनों से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजा बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है. अब टावर के नीचे की जमीन पर 200% और लाइन कॉरिडोर पर 30% मुआवजा मिलेगा. इस फैसले से किसानों को पहले से अधिक आर्थिक लाभ होगा और उनकी आय बढ़ने की उम्मीद है.
देशभर में मौसम तेजी से बदल रहा है. कई राज्यों में जहां तेज गर्मी पड़ रही है, वहीं कई जगहों पर आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है. उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल में बारिश और तेज हवाओं की संभावना है, जबकि मध्य प्रदेश में गर्मी का असर ज्यादा रहेगा. दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश के आसार हैं, जिससे कुछ राहत मिल सकती है.
देशभर में मौसम ने अचानक करवट ली है. कई राज्यों में बारिश, आंधी और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है. कुछ जगहों पर ओलावृष्टि की भी संभावना है. तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा. मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है. आने वाले दिनों में मौसम और बदल सकता है.
कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 1 मई 2026 तक देश में ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई 81.60 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है. दालों, श्री अन्न (मोटे अनाज) और तिलहनों के रकबे में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि धान की बुवाई में गिरावट देखने को मिली है. रिपोर्ट में मक्का, मूंगफली और उड़द की खेती में खास इजाफा दर्ज हुआ है.
बंगाल चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब पीएम मत्स्य संपदा योजना, आयुष्मान भारत, पीएम आवास योजना, पीएम फसल बीमा योजना और चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना जैसी योजनाएं हर घर तक पहुंचेंगी?
अप्रैल के अंत से बिहार में बदले मौसम का असर मई की शुरुआत में भी जारी है. पटना समेत उत्तर बिहार के कई जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि देखने को मिली है. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक खराब मौसम की चेतावनी दी है, जिससे आम और लीची की फसल को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है.
कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी. साथ ही उन्होंने किसानों को यह भी बताया कि आधुनिक तरीकों को अपनाकर किस तरह खेती से आमदनी बढ़ाई जा सकती है.
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों के साथ ही पार्टियों के घोषणापत्र चर्चा में हैं. पश्चिम बंगाल और असम में BJP, तमिलनाडु में TVK और केरल में UDF की जीत के पीछे किसानों से जुड़े बड़े वादों की अहम भूमिका रही. MSP बढ़ाने, कर्ज माफी, सीधी आर्थिक मदद और कृषि ढांचे को मजबूत करने जैसे वादों का अब किसानों पर क्या असर होगा, जानिए इस रिपोर्ट में.
इस कार्यक्रम में किसानों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली. किसानों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याएं साझा कीं और उनके समाधान भी प्राप्त किए. कुल मिलाकर किसान कारवां का यह अंतिम पड़ाव किसानों के लिए ज्ञानवर्धक और लाभकारी साबित हुआ, जिससे उन्हें खेती में नए प्रयोग करने और अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में प्रेरणा मिली.
किसान धान उगाए तो वो पानी का दुश्मन है, लेकिन वही चावल इथेनॉल फैक्ट्री में जाए तो ग्रीन फ्यूल, यह नीतियों का दोहरापन नहीं तो और क्या है? पराली जलाने और पानी खर्च करने पर किसानों को कोसने वालों को जवाब देना चाहिए कि क्यों सरकारों के लिए पर्यावरण और भू-जल की चिंता केवल किसानों पर पाबंदियां लगाने और उन्हें कटघरे में खड़ा करने तक ही सीमित है. जैसे ही बात उद्योगों की आती है, जल संरक्षण के सारे नियम और नीतियां फाइलों में क्यों दफन हो जाती हैं?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्ट्री कझगम (TVK) ने मजबूत शुरुआत की है. महिलाओं की आर्थिक मदद, मुफ्त गैस सिलेंडर, किसानों की कर्ज माफी और धान‑गन्ने के लिए बढ़ा हुआ MSP जैसे वादों वाला घोषणापत्र मतदाताओं को आकर्षित करता दिख रहा है.
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की प्रचंड जीत हुई है. बंगाल में बीजेपी की लगभग दो तिहाई सीट से जीत के बाद किसान इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि क्या वाकई उनकी आय में यह बढ़ोतरी जल्द देखने को मिलेगी.
Feed and Shed भैंस का गर्भकाल 310 से 315 दिन तक का होता है. गर्भकाल का हर एक दिन बहुत खास होता है. खासतौर पर भैंस की हैल्थ को लेकर. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि अगर गर्भकाल के दौरान भैंस की अच्छी तरह से देखभाल की तो बच्चा तो हेल्दी मिलेगा. इतना ही नहीं भैंस भी तंदुरुस्त रहेगी और खूब दूध भी देगी.
सोनालीका ट्रैक्टर्स ने अप्रैल 2026 में 16,223 ट्रैक्टर बेचकर रिकॉर्ड बनाया और 35.6% की शानदार वृद्धि दर्ज की. कंपनी ने उद्योग की ग्रोथ को पीछे छोड़ते हुए किसानों के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. नई तकनीक और बेहतर उत्पादों के जरिए सोनालीका खेती को आसान और लाभदायक बनाने पर लगातार काम कर रही है.
तेलंगाना के महबूबाबाद और रंगारेड्डी जिलों में धान खरीद केंद्रों पर इंतजार कर रहे दो किसानों की मौत हो गई. एक किसान की जान बिजली गिरने से गई, जबकि दूसरे की मौत लू लगने से होने की आशंका है. वहीं नलगोंडा समेत कई जिलों में ओलावृष्टि और बारिश से हजारों क्विंटल धान भीग गया, जिससे खरीद में देरी को लेकर किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है.
गुजरात में किसान प्राकृतिक और गाय आधारित खेती अपनाकर आम की फसल से बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. तापी और डांग जिले के किसान बिना किसी केमिकल या कीटनाशक के पूरी तरह से प्राकृतिक तरीकों से आम की खेती कर रहे हैं. इन बागों में सिंचाई के लिए केवल बारिश के पानी का उपयोग होता है और खाद के रूप में जीवामृत और पंचगव्य का इस्तेमाल किया जाता है. इस प्राकृतिक तरीके के कारण आम की मिठास और क्वालिटी काफी बेहतर होती है. वाइब्रेंट गुजरात कार्यक्रम के तहत आयोजित मैंगो फेस्टिवल में इन प्राकृतिक आमों को बाजार से काफी अच्छे दाम पर बेचा जा रहा है.
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