कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 1 मई 2026 तक देश में ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई 81.60 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है. दालों, श्री अन्न (मोटे अनाज) और तिलहनों के रकबे में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि धान की बुवाई में गिरावट देखने को मिली है. रिपोर्ट में मक्का, मूंगफली और उड़द की खेती में खास इजाफा दर्ज हुआ है.
बंगाल चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब पीएम मत्स्य संपदा योजना, आयुष्मान भारत, पीएम आवास योजना, पीएम फसल बीमा योजना और चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना जैसी योजनाएं हर घर तक पहुंचेंगी?
अप्रैल के अंत से बिहार में बदले मौसम का असर मई की शुरुआत में भी जारी है. पटना समेत उत्तर बिहार के कई जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि देखने को मिली है. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक खराब मौसम की चेतावनी दी है, जिससे आम और लीची की फसल को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है.
कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी. साथ ही उन्होंने किसानों को यह भी बताया कि आधुनिक तरीकों को अपनाकर किस तरह खेती से आमदनी बढ़ाई जा सकती है.
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों के साथ ही पार्टियों के घोषणापत्र चर्चा में हैं. पश्चिम बंगाल और असम में BJP, तमिलनाडु में TVK और केरल में UDF की जीत के पीछे किसानों से जुड़े बड़े वादों की अहम भूमिका रही. MSP बढ़ाने, कर्ज माफी, सीधी आर्थिक मदद और कृषि ढांचे को मजबूत करने जैसे वादों का अब किसानों पर क्या असर होगा, जानिए इस रिपोर्ट में.
इस कार्यक्रम में किसानों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली. किसानों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याएं साझा कीं और उनके समाधान भी प्राप्त किए. कुल मिलाकर किसान कारवां का यह अंतिम पड़ाव किसानों के लिए ज्ञानवर्धक और लाभकारी साबित हुआ, जिससे उन्हें खेती में नए प्रयोग करने और अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में प्रेरणा मिली.
किसान धान उगाए तो वो पानी का दुश्मन है, लेकिन वही चावल इथेनॉल फैक्ट्री में जाए तो ग्रीन फ्यूल, यह नीतियों का दोहरापन नहीं तो और क्या है? पराली जलाने और पानी खर्च करने पर किसानों को कोसने वालों को जवाब देना चाहिए कि क्यों सरकारों के लिए पर्यावरण और भू-जल की चिंता केवल किसानों पर पाबंदियां लगाने और उन्हें कटघरे में खड़ा करने तक ही सीमित है. जैसे ही बात उद्योगों की आती है, जल संरक्षण के सारे नियम और नीतियां फाइलों में क्यों दफन हो जाती हैं?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्ट्री कझगम (TVK) ने मजबूत शुरुआत की है. महिलाओं की आर्थिक मदद, मुफ्त गैस सिलेंडर, किसानों की कर्ज माफी और धान‑गन्ने के लिए बढ़ा हुआ MSP जैसे वादों वाला घोषणापत्र मतदाताओं को आकर्षित करता दिख रहा है.
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की प्रचंड जीत हुई है. बंगाल में बीजेपी की लगभग दो तिहाई सीट से जीत के बाद किसान इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि क्या वाकई उनकी आय में यह बढ़ोतरी जल्द देखने को मिलेगी.
Feed and Shed भैंस का गर्भकाल 310 से 315 दिन तक का होता है. गर्भकाल का हर एक दिन बहुत खास होता है. खासतौर पर भैंस की हैल्थ को लेकर. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि अगर गर्भकाल के दौरान भैंस की अच्छी तरह से देखभाल की तो बच्चा तो हेल्दी मिलेगा. इतना ही नहीं भैंस भी तंदुरुस्त रहेगी और खूब दूध भी देगी.
सोनालीका ट्रैक्टर्स ने अप्रैल 2026 में 16,223 ट्रैक्टर बेचकर रिकॉर्ड बनाया और 35.6% की शानदार वृद्धि दर्ज की. कंपनी ने उद्योग की ग्रोथ को पीछे छोड़ते हुए किसानों के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. नई तकनीक और बेहतर उत्पादों के जरिए सोनालीका खेती को आसान और लाभदायक बनाने पर लगातार काम कर रही है.
तेलंगाना के महबूबाबाद और रंगारेड्डी जिलों में धान खरीद केंद्रों पर इंतजार कर रहे दो किसानों की मौत हो गई. एक किसान की जान बिजली गिरने से गई, जबकि दूसरे की मौत लू लगने से होने की आशंका है. वहीं नलगोंडा समेत कई जिलों में ओलावृष्टि और बारिश से हजारों क्विंटल धान भीग गया, जिससे खरीद में देरी को लेकर किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है.
गुजरात में किसान प्राकृतिक और गाय आधारित खेती अपनाकर आम की फसल से बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. तापी और डांग जिले के किसान बिना किसी केमिकल या कीटनाशक के पूरी तरह से प्राकृतिक तरीकों से आम की खेती कर रहे हैं. इन बागों में सिंचाई के लिए केवल बारिश के पानी का उपयोग होता है और खाद के रूप में जीवामृत और पंचगव्य का इस्तेमाल किया जाता है. इस प्राकृतिक तरीके के कारण आम की मिठास और क्वालिटी काफी बेहतर होती है. वाइब्रेंट गुजरात कार्यक्रम के तहत आयोजित मैंगो फेस्टिवल में इन प्राकृतिक आमों को बाजार से काफी अच्छे दाम पर बेचा जा रहा है.
पंजाब में खेती को ज्यादा टिकाऊ और पानी बचाने वाली बनाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. धान जैसी ज्यादा पानी लेने वाली फसल से किसानों को हटाकर मक्का की खेती की ओर बढ़ाने के लिए अब खरीफ सीजन 2026-27 में मक्का योजना का दायरा बढ़ा दिया गया है.
महाराष्ट्र के नासिक जिले में किसान प्याज की खेती के लिए मल्चिंग पेपर तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. यह अनोखा प्रयोग उन इलाकों में काफी कारगर साबित हो रहा है जहां बारिश कम होती है और पानी की समस्या रहती है. मल्चिंग पेपर पर प्याज लगाने से सिंचाई में 70 से 80 प्रतिशत तक पानी की बचत हो रही है. इसके साथ ही फसल में लगने वाली बीमारियों में भी कमी आई है जिससे खेती की लागत घटी है. सह्याद्री बायोटेक के विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और सिंचाई का सटीक प्रबंधन संभव हो पाता है.
FCI Godown देश में अनाज स्टोर करने के लिए गोदामों की संख्या 2500 से ज्यादा है. इसमे सरकारी और प्राइवेट दोनों ही तरह के गोदाम शामिल हैं. गोदामों में जगह भी बहुत है. अनाज रखने के बाद भी गोदामों में जगह बच जाती है. बावजूद इसके लिए बहुत सारे राज्यों में अनाज यानि गेहूं-चावल खुले में खराब होता रहता है. कई बार इस तरह की तस्वीरें सामने आती रहती हैं.
कल यानी मंगलवार को चना खरीद की मांग को लेकर किसान जयपुर पहुंचेंगे. इस दौरान किसान दाना-दाना चना खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे. किसानों का आरोप है कि राजस्थान में इस नियमावली का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है.
भारत से चार साल बाद गेहूं का निर्यात फिर शुरू हो गया है. ट्रेड सूत्रों के मुताबिक ITC ने कांडला पोर्ट से 22,000 मीट्रिक टन गेहूं UAE भेजना शुरू किया है. रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद के बीच सरकार ने 2022 में लगे निर्यात प्रतिबंध के बाद इस साल गेहूं एक्सपोर्ट की अनुमति दी है.
मराठवाड़ा के किसानों पर इस बार दोहरी मार पड़ी है. एक ओर जहां प्याज के दाम लगातार गिरते जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बेमौसम बारिश ने फसल की क्वालिटी और उत्पादन को गंभीर नुकसान पहुंचाया है.
Foot-Mouth Disease खुरपका-मुंहपका (FMD) बीमारी वायरस से होने वाली बीमारी है तो इसके सक्रिय होने और फैलने का भी कोई तय वक्त नहीं है. इसी को देखते हुए केन्द्र सरकार पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर नौ राज्यों में एफएमडी फ्री जोन बनाने की तैयारी में लगी हुई है. इसका सबसे बड़ा फायदा ये मिलेगा कि एफएमडी बीमारी के चलते मीट, डेयरी प्रोडक्ट और मिल्क एक्सपोर्ट की बड़ी रुकावट दूर हो जाएगी.
एग्री वेस्ट अब समस्या नहीं, बल्कि भारत के लिए एक बड़ा अवसर बन रहा है. पराली और फसल अवशेषों से बायोगैस, बायोफ्यूल और बिजली बनाई जा सकती है. इससे प्रदूषण कम होगा, किसानों की आय बढ़ेगी और देश को स्वच्छ ऊर्जा मिलेगी. यह कदम सतत विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम साबित हो रहा है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today