उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए ढैंचा बीज का समय पर न मिलना एक बड़ी समस्या बन गया है. रायबरेली से सहारनपुर से लेकर बलिया तक के किसानों का कहना है कि धान की रोपाई जून-जुलाई में शुरू होती है, लेकिन ढैंचा का बीज मई के अंत या जून में मिलता है. ढैंचा को हरी खाद के रूप में तैयार होने के लिए 50-60 दिन चाहिए, इसलिए देरी से बीज मिलने पर किसान इसका लाभ नहीं ले पाते.
सहारनपुर में तेज हवा और लगातार बारिश ने गेहूं की खड़ी फसल को गिरा दिया है. कई जगहों पर तैयार फसल जमीन पर बिछ गई है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका है. किसानों का कहना है कि गिरने से पैदावार आधी रह सकती है और आर्थिक नुकसान बढ़ेगा.
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