तोरिया एक कम अवधि वाली तिलहनी फसल है जो लगभग 90 दिनों में तैयार हो जाती है. कम लागत, कम सिंचाई और बेहतर मुनाफे के कारण यह किसानों के लिए लाभकारी विकल्प मानी जाती है. खरीफ और रबी सीजन के बीच इसकी खेती कर किसान अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं. तोरिया के दानों में 41 से 43 प्रतिशत तक तेल पाया जाता है और फसल चक्र में शामिल करने से मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है. उत्तर प्रदेश कृषि विभाग किसानों को तोरिया की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है.
नेपाल में आई बाढ़ के बाद जंगली हाथियों का झुंड पीलीभीत के गांवों तक पहुंच गया है. हाथी रात में खेतों में घुसकर धान और गन्ने की फसलें रौंद रहे हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है. वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है और नुकसान के सर्वे के बाद किसानों को मुआवजा दिलाने की बात कही है.
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