इस समय किसानों के लिए जरूरी हो गया है कि वे ऐसी फसलों का चयन करें, जो कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सके. कई ऐसी फसलें हैं जो सूखे और कम सिंचाई वाले क्षेत्रों में आसानी से उगाई जा सकती हैं और बेहतर मुनाफा भी देती हैं.
कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न योजनाओं से अवगत कराया, वहीं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने उन्नत खेती, बेहतर बीज और फसल प्रबंधन के आधुनिक तरीकों पर मार्गदर्शन दिया. किसानों ने भी सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने सवालों के समाधान पाए.
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े युद्ध का असर अब पूरी दुनिया पर पड़ने लगा है. युद्ध की वजह से दुनिया भर में तेल की किल्लत बढ़ती जा रही है. इस बीच, महाराष्ट्र के जालना जिले के हसनाबाद इलाके में डीजल की भारी किल्लत देखने को मिल रही है.
महाराष्ट्र के जालना जिले में टमाटर किसानों को बाजार में बेहद कम दाम मिलने से आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है. किसानों ने विरोध स्वरूप अपनी फसल सड़क पर फेंक दी. प्रति किलो सिर्फ 4-5 रुपये मिलने से मेहनत और लागत भी नहीं निकल पा रही है. किसान सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य और सीधे बाजार की सुविधा की मांग कर रहे हैं.
गार्डनिंग करना आजकल ज्यादातर लोगों की पसंदीदा हॉबी बनती जा रही है. ज्यादातर लोग अपने घर में छोटा-सा गार्डन या खूबसूरत बालकनी में अपना किचन गार्डन बना रहे है और आर्गेनिक तरीके से घर पर ही साग-सब्जी उगाना पसंद कर रहे है. आइए जानते हैं क्या है ऑर्गेनिक गार्डनिंग और क्या है उसके फायदे.
उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्त पहल के तहत प्रदेश के 75 जिलों में चल रहे इस विशेष अभियान में महिला और पुरुष किसानों ने भाग लिया और कृषि संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं. राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदियों की गोद में बसे सिद्धार्थनगर की भूमि कृषि के लिए अत्यंत उपजाऊ मानी जाती है.
इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के विशेषज्ञों ने बदलते जलवायु परिवर्तन के दौर में खेती के नए तरीकों, फसल प्रबंधन और केवीके की उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी. कार्यक्रम के अंत में लकी ड्रॉ के माध्यम से 12 किसानों को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जिससे किसानों में खासा उत्साह देखने को मिला.
दरभंगा जिले में पिछले दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश और तेज आंधी-तूफान ने जहां मौसम को सुहाना बना दिया है, वहीं किसानों के लिए यह बारिश आफत बनकर आई है.
उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्त पहल के तहत प्रदेश के 75 जिलों में चल रहे इस विशेष अभियान में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसानों ने भाग लिया और खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं.
खेतों में नजर आने वाला यह छोटा लाल कीड़ा चुपचाप बड़ा काम करता है. फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट जहां बढ़ते हैं, वहीं यह उन्हें तेजी से खत्म कर संतुलन बना देता है. एक पौधे से दूसरे तक पहुंचकर यह लगातार हानिकारक कीटों को कम करता है, जिससे बिना ज्यादा दवाओं के भी फसल को सहारा मिलता है.
श्रावस्ती के ककंधू में ‘किसान कारवां’ का 45वां पड़ाव आयोजित हुआ, जहां उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की पहल पर बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया. कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन, जैविक खेती, सरकारी योजनाओं और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई, जिससे किसानों को आय बढ़ाने के उपाय समझाए गए.
ईरान-इजरायल युद्ध के चलते राजस्थान के बूंदी का चावल उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है. निर्यात रुकने से करोड़ों का माल गोदामों में फंसा है और व्यापारी संकट में हैं.
बलरामपुर में किसान कारवां के 44वें पड़ाव पर बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया. कार्यक्रम में आधुनिक खेती, पशुपालन, मखाना उत्पादन, नैनो उर्वरक और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई. विशेषज्ञों ने आय बढ़ाने के व्यावहारिक तरीकों पर जोर दिया.
कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को खेती से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी और उनसे कृषि और पशुपालन से जुड़ी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की. वहीं, पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने भी पशुपालन से जुड़ी सरकार की बहु उपयोगी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया.
खाड़ी देशों में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण जालना के तरबूज किसानों पर संकट गहरा गया है. निर्यात रुकने से बाजार में तरबूज का भाव 20–30 हजार रुपये प्रति टन से गिरकर करीब 7 हजार रुपये प्रति टन रह गया है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का खतरा है.
मार्च में पड़ने वाली गर्मी का असर बगीचों और पौधों पर भी दिखाई देने लगा है. बढ़ते तापमान की वजह से पौधों की मिट्टी जल्दी सूखने लगी है और पौधे मुरझाने भी लगे हैं. आइए जानते हैं मार्च में बढ़ती गर्मी में अपने गार्डन और पौधों की देखभाल कैसे करें.
Fact Of The Day: पौधों के पास न आंखें होती हैं और न घड़ी, फिर भी उन्हें कैसे पता चल जाता है कि दिन लंबा है या छोटा. वैज्ञानिक कहते हैं कि इसके पीछे पौधों की एक अद्भुत प्राकृतिक प्रणाली काम करती है. यही रहस्यमय तंत्र तय करता है कि पौधे कब तेजी से बढ़ेंगे और कब उनमें फूल आने लगेंगे. डिटेल में पढ़ें पूरी जानकारी...
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में चल रहे इस विशेष अभियान की कवरेज में यह 42वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की. कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को खेती से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी और उनसे इन योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की.
बलिया के मलप गांव में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा, जहां किसानों को आधुनिक खेती, उन्नत बीज, पशुपालन तकनीक और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई. विशेषज्ञों ने मृदा परीक्षण, नैनो यूरिया, लिक्विड डीएपी और सेक्स सॉर्टेड सीमेन जैसी तकनीकों के फायदे बताए. कार्यक्रम के अंत में किसानों के लिए लकी ड्रॉ भी आयोजित किया गया.
खेत में गोबर की बॉल घुमाता एक छोटा सा कीड़ा देखने में भले साधारण लगे, लेकिन खेती की दुनिया में इसकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है. यह कीड़ा गोबर को मिट्टी में मिलाकर जमीन की सेहत सुधारने में मदद करता है. दिलचस्प बात यह है कि इसकी कुछ प्रजातियां अपने वजन से कई गुना ज्यादा भार खींच सकती हैं...
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today