बंजर पहाड़ियों को फिर से हरा-भरा बनाने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की गई है. इस अभियान के तहत ड्रोन तकनीक की मदद से करीब 250 किलोग्राम देसी बीजों की बुवाई की जाएगी, ताकि कम समय में अधिक क्षेत्र में पौधों का विकास हो सके.
बरसात का मौसम पौधों की बढ़वार के लिए बेहद अनुकूल होता है, लेकिन लगातार बारिश और जलभराव के कारण उनकी जड़ों के सड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है. यदि समय रहते सही देखभाल न की जाए तो पौधे कमजोर होकर सूख सकते हैं. ऐसे में मानसून के दौरान पौधों को स्वस्थ और हरा-भरा बनाए रखने के लिए इन 5 आसान उपायों को जरूर अपनाएं.
महाराष्ट्र के जालना जिले में कृषि विभाग की ओर से मुफ्त में वितरित किए गए महाबीज कंपनी के सोयाबीन बीज किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं. बीज अंकुरित नहीं होने से कई किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ रही है और लाखों रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.
अगर आपके पास खेती के लिए बड़ा बगीचा नहीं है, तब भी आप अपने घर की बालकनी, छत या आंगन में ताज़ी और ऑर्गेनिक सब्जियां उगा सकते हैं. सही गमले, उपजाऊ मिट्टी और थोड़ी-सी देखभाल के साथ कम जगह में भी बंपर उत्पादन लिया जा सकता है. आइए जानते हैं ऐसी 5 सब्जियों के बारे में, जिन्हें आप आसानी से गमलों में उगा सकते हैं.
सहारनपुर के किसान बसंत कुमार को लखनऊ आम महोत्सव में दुर्लभ आम की किस्मों के संरक्षण और प्राकृतिक बागवानी के लिए प्रथम पुरस्कार मिला. 100 साल पुराने पुश्तैनी बाग, 20 से अधिक आम की किस्मों और उनकी सफलता की प्रेरक कहानी जानिए इस फोटो गैलरी में.
अगर आप ताजी और केमिकल-फ्री सब्जियां उगाना चाहते हैं, तो मॉनसून का मौसम किचन गार्डनिंग शुरू करने का सबसे अच्छा समय है. इस मौसम में पौधों की बढ़वार तेजी से होती है. ऐसे में आइए जानते हैं कैसे घर बैठे तैयार करें अपना छोटा-सा किचन गार्डन.
महाराष्ट्र के जालना जिले के एक युवा किसान ने पारंपरिक खेती छोड़कर जामुन की बागवानी अपनाई और आज सफलता की नई मिसाल बन गए हैं. करीब 2 एकड़ में लगाए गए 400 जामुन के पेड़ों से उन्हें इस सीजन में 15 से 20 लाख रुपये तक की कमाई की उम्मीद है.
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