अगस्त में मूंगफली की फसल को थोड़ी अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है. इस समय खेत में खरपतवार तेजी से बढ़ते हैं, जो फसल के पोषक तत्व और नमी कम कर सकते हैं. ऐसे में बिहार कृषि विभाग ने भी किसानों को इस समय इन जरूरी कृषि कार्यों पर ध्यान देने की सलाह दी है.
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पटना के गांधी मैदान में बिहार की डिजिटल कृषि की तस्वीर झांकी के जरिए दिखाई गई. ‘स्मार्ट तकनीक, उन्नत किसान’ संदेश वाली इस झांकी में Farmer ID, बिहार कृषि ऐप, GPS, सैटेलाइट और डिजिटल क्रॉप सर्वे जैसी तकनीकों को दिखाया गया.
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में खाद के लिए परेशान किसानों का गुस्सा सामने आया. सोमवारिया स्थित वेयर हाउस के बाहर सुबह से लंबी कतार लगी रही. अपनी बारी तय करने के लिए किसानों ने जमीन पर आधार कार्ड और पट्टे की फोटो कॉपी रख दी.
छत्तीसगढ़ के भिलाई में राज्य का पहला अन्नपूर्ति ग्रेन ATM शुरू किया गया है. अब लाभार्थी कार्ड नंबर और फिंगरप्रिंट के जरिए 24 घंटे मशीन से अपना निर्धारित चावल ले सकेंगे. इस व्यवस्था से लंबी कतार और कम तौल जैसी समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है.
तेजपत्ता रसोई में इस्तेमाल होने वाला ऐसा मसाला है, जिसे आप घर की बालकनी, छत या छोटे गार्डन में भी आसानी से उगा सकते हैं. सही गमला, मिट्टी, धूप और पानी का ध्यान रखें तो पौधा लंबे समय तक हरा-भरा रह सकता है और जरूरत के हिसाब से ताजे पत्ते भी मिलते रहेंगे.
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लगातार हो रही बारिश से मौसम सुहाना हो गया है, लेकिन कई जगह जलभराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. प्रयागराज, जौनपुर, फिरोजाबाद और भदोही समेत कई जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं. वहीं चंदौली और भदोही में बारिश से धान की खेती को बड़ा फायदा मिला है और किसानों के चेहरे खिल उठे हैं.
उत्तर प्रदेश का सहारनपुर अपनी बेहतरीन लकड़ी की नक्काशी और हस्तशिल्प के लिए देश ही नहीं, दुनिया भर में मशहूर है. ODOP योजना के जरिए यहां के कारीगरों को नई तकनीक, आधुनिक मशीनें, बेहतर प्रशिक्षण और बड़े बाजार तक पहुंच मिली है. इसका नतीजा यह है कि सहारनपुर का लकड़ी उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है.
असम में बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है. इन तस्वीरों में पानी में डूबे गांव, संघर्ष करते लोग, मवेशियों को बचाने की कोशिश और बाढ़ से प्रभावित वन्यजीवों की दर्दनाक स्थिति दिखाई गई है. गैंडे की मौत से लेकर राहत सामग्री वितरण तक, ये तस्वीरें असम की बाढ़ की भयावह सच्चाई और लोगों की जद्दोजहद को बयां करती हैं.
प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ने से संगम का मैदानी क्षेत्र जलमग्न होने लगा है. बाढ़ का पानी पक्के घाट की सीढ़ियों, पंडों के तख्त और आसपास की दुकानों तक पहुंच गया है.
बरसात का मौसम पौधों की बढ़वार के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, लेकिन ज्यादा नमी और जलभराव के कारण कई पौधे मुरझाने लगते हैं. ऐसे में सही खाद और थोड़ी-सी देखभाल से मुरझाए पौधों में फिर से नई जान डाली जा सकती है. आइए जानते हैं कैसे.
मॉनसून का मौसम पौधों की तेजी से बढ़वार का समय होता है, लेकिन लगातार बारिश के कारण मिट्टी से कई जरूरी पोषक तत्व भी बह जाते हैं. ऐसे में अगर समय पर सही खाद न दी जाए, तो पौधों की बढ़वार रुक सकती है और वे कमजोर पड़ सकते हैं. आइए जानते हैं बारिश के मौसम में पौधों के लिए कौन-सी खाद सबसे फायदेमंद होती है.
कर्नाटक में कमजोर मॉनसून ने सूखे का खतरा बढ़ा दिया है. राज्य के 21 जिलों में बारिश की भारी कमी से खेती, जलाशय और किसानों की चिंता बढ़ गई है. कोलार समेत कई इलाकों में बुआई प्रभावित हुई है. सरकार ने सूखा राहत की तैयारी शुरू कर दी है और किसानों के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.
मध्य प्रदेश में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ विरोध तेज हो गया है. बेहतर मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर महिलाएं गले तक पानी में खड़ी होकर प्रदर्शन कर रही हैं, जबकि गांधीवादी कार्यकर्ता अमित भटनागर चिता पर बैठकर आमरण अनशन कर रहे हैं. आंदोलन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं और पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं.
बारिश का मौसम पौधे लगाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी होने से पौधे तेजी से बढ़ते हैं और आसानी से जड़ पकड़ लेते हैं. अगर आप भी अपने घर, बालकनी या किचन गार्डन को हरियाली से भरना चाहते हैं, तो मॉनसून में ये पौधे लगाना बेहतरीन विकल्प हो सकता है.
महाराष्ट्र के जालना जिले के एक युवा किसान ने खेती में देसी जुगाड़ का शानदार उदाहरण पेश किया है. बैलों और मजदूरों की कमी के बीच उन्होंने पावर टिलर में विशेष उपकरण लगाकर सोयाबीन, उड़द और मूंग की फसलों की निराई-गुड़ाई का काम कम समय और कम लागत में पूरा किया.
महाराष्ट्र के धाराशिव जिले के भूम में दूध मिलावट मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. एफडीए ने 1,525 किलो व्हे पाउडर जब्त किया है और सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. जानिए व्हे पाउडर क्या है, दूध में मिलावट का संदेह क्यों है, जांच कहां तक पहुंची और आरोपियों पर क्या कार्रवाई हो सकती है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today