कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन और उद्यान विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी. किसानों को बताया गया कि योजनाओं का लाभ लेकर वे अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं. साथ ही किसानों को योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया.
सरायकेला-खरसावां जिला अंतर्गत सेलाईडीह गांव में सदियों से पारंपरिक तरीके से 6.1 फीसदी करक्यूमिन युक्त ऑर्गेनिक हल्दी की खेती की जा रही है. स्थानीय किसानों के अनुसार, समस्या उत्पादन या क्वालिटी में नहीं बल्कि ब्रांडिंग, मार्केटिंग और संगठित खरीद सिस्टम की कमी में है.
जालना जिले में एक बार फिर मौसम की मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है. जामवाड़ी के किसान विजय वाडेकर ने अपने खेत में करीब 1800 आम के पेड़ लगाए थे. इस साल उन्हें करीब 10 से 12 टन आम उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन असमय बारिश और तेज हवाओं के कारण बड़ी मात्रा में आम के फल जमीन पर गिर गए.
प्रयागराज के बिंदव गांव में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा, जहां किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर आधुनिक खेती, सरकारी योजनाओं और नई तकनीकों की जानकारी ली. विशेषज्ञों ने वैल्यू एडिशन, जलवायु बदलाव और मिट्टी सुधार पर भी जरूरी सुझाव दिए.
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कहा कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाना समय की मांग है. उन्नत बीज, संतुलित खाद, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन और कीट नियंत्रण के जरिए उत्पादन बढ़ाने के व्यावहारिक तरीके किसानों को समझाए गए.
जालना जिले में आग की लगातार हो रही घटनाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. जिले में हुई तीन अलग-अलग घटनाओं में कुल मिलाकर 20 से अधिक एकड़ में खड़ी फसल जलकर खाक हो गई है, जिसमें किसानों को भारी नुकसान हुआ है.
उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों में चल रहे इस विशेष अभियान के तहत यह कारवां का 51वां पड़ाव रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर विशेषज्ञों से सीधे संवाद किया और अपनी समस्याओं का समाधान पाया.
कार्यक्रम के दौरान कृषि अधिकारियों ने किसानों को सरकार की अलग-अलग योजनाओं की जानकारी दी और उनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया. वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने आधुनिक खेती की तकनीकों से किसानों को अवगत कराया, जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन संभव हो सके.
इस समय किसानों के लिए जरूरी हो गया है कि वे ऐसी फसलों का चयन करें, जो कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सके. कई ऐसी फसलें हैं जो सूखे और कम सिंचाई वाले क्षेत्रों में आसानी से उगाई जा सकती हैं और बेहतर मुनाफा भी देती हैं.
कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न योजनाओं से अवगत कराया, वहीं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने उन्नत खेती, बेहतर बीज और फसल प्रबंधन के आधुनिक तरीकों पर मार्गदर्शन दिया. किसानों ने भी सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने सवालों के समाधान पाए.
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े युद्ध का असर अब पूरी दुनिया पर पड़ने लगा है. युद्ध की वजह से दुनिया भर में तेल की किल्लत बढ़ती जा रही है. इस बीच, महाराष्ट्र के जालना जिले के हसनाबाद इलाके में डीजल की भारी किल्लत देखने को मिल रही है.
महाराष्ट्र के जालना जिले में टमाटर किसानों को बाजार में बेहद कम दाम मिलने से आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है. किसानों ने विरोध स्वरूप अपनी फसल सड़क पर फेंक दी. प्रति किलो सिर्फ 4-5 रुपये मिलने से मेहनत और लागत भी नहीं निकल पा रही है. किसान सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य और सीधे बाजार की सुविधा की मांग कर रहे हैं.
गार्डनिंग करना आजकल ज्यादातर लोगों की पसंदीदा हॉबी बनती जा रही है. ज्यादातर लोग अपने घर में छोटा-सा गार्डन या खूबसूरत बालकनी में अपना किचन गार्डन बना रहे है और आर्गेनिक तरीके से घर पर ही साग-सब्जी उगाना पसंद कर रहे है. आइए जानते हैं क्या है ऑर्गेनिक गार्डनिंग और क्या है उसके फायदे.
उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्त पहल के तहत प्रदेश के 75 जिलों में चल रहे इस विशेष अभियान में महिला और पुरुष किसानों ने भाग लिया और कृषि संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं. राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदियों की गोद में बसे सिद्धार्थनगर की भूमि कृषि के लिए अत्यंत उपजाऊ मानी जाती है.
इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के विशेषज्ञों ने बदलते जलवायु परिवर्तन के दौर में खेती के नए तरीकों, फसल प्रबंधन और केवीके की उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी. कार्यक्रम के अंत में लकी ड्रॉ के माध्यम से 12 किसानों को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जिससे किसानों में खासा उत्साह देखने को मिला.
दरभंगा जिले में पिछले दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश और तेज आंधी-तूफान ने जहां मौसम को सुहाना बना दिया है, वहीं किसानों के लिए यह बारिश आफत बनकर आई है.
उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्त पहल के तहत प्रदेश के 75 जिलों में चल रहे इस विशेष अभियान में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष किसानों ने भाग लिया और खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं.
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