प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ने से संगम का मैदानी क्षेत्र जलमग्न होने लगा है. बाढ़ का पानी पक्के घाट की सीढ़ियों, पंडों के तख्त और आसपास की दुकानों तक पहुंच गया है.
बरसात का मौसम पौधों की बढ़वार के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, लेकिन ज्यादा नमी और जलभराव के कारण कई पौधे मुरझाने लगते हैं. ऐसे में सही खाद और थोड़ी-सी देखभाल से मुरझाए पौधों में फिर से नई जान डाली जा सकती है. आइए जानते हैं कैसे.
मॉनसून का मौसम पौधों की तेजी से बढ़वार का समय होता है, लेकिन लगातार बारिश के कारण मिट्टी से कई जरूरी पोषक तत्व भी बह जाते हैं. ऐसे में अगर समय पर सही खाद न दी जाए, तो पौधों की बढ़वार रुक सकती है और वे कमजोर पड़ सकते हैं. आइए जानते हैं बारिश के मौसम में पौधों के लिए कौन-सी खाद सबसे फायदेमंद होती है.
कर्नाटक में कमजोर मॉनसून ने सूखे का खतरा बढ़ा दिया है. राज्य के 21 जिलों में बारिश की भारी कमी से खेती, जलाशय और किसानों की चिंता बढ़ गई है. कोलार समेत कई इलाकों में बुआई प्रभावित हुई है. सरकार ने सूखा राहत की तैयारी शुरू कर दी है और किसानों के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.
मध्य प्रदेश में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ विरोध तेज हो गया है. बेहतर मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर महिलाएं गले तक पानी में खड़ी होकर प्रदर्शन कर रही हैं, जबकि गांधीवादी कार्यकर्ता अमित भटनागर चिता पर बैठकर आमरण अनशन कर रहे हैं. आंदोलन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं और पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं.
बारिश का मौसम पौधे लगाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी होने से पौधे तेजी से बढ़ते हैं और आसानी से जड़ पकड़ लेते हैं. अगर आप भी अपने घर, बालकनी या किचन गार्डन को हरियाली से भरना चाहते हैं, तो मॉनसून में ये पौधे लगाना बेहतरीन विकल्प हो सकता है.
महाराष्ट्र के जालना जिले के एक युवा किसान ने खेती में देसी जुगाड़ का शानदार उदाहरण पेश किया है. बैलों और मजदूरों की कमी के बीच उन्होंने पावर टिलर में विशेष उपकरण लगाकर सोयाबीन, उड़द और मूंग की फसलों की निराई-गुड़ाई का काम कम समय और कम लागत में पूरा किया.
महाराष्ट्र के धाराशिव जिले के भूम में दूध मिलावट मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. एफडीए ने 1,525 किलो व्हे पाउडर जब्त किया है और सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. जानिए व्हे पाउडर क्या है, दूध में मिलावट का संदेह क्यों है, जांच कहां तक पहुंची और आरोपियों पर क्या कार्रवाई हो सकती है.
बंजर पहाड़ियों को फिर से हरा-भरा बनाने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की गई है. इस अभियान के तहत ड्रोन तकनीक की मदद से करीब 250 किलोग्राम देसी बीजों की बुवाई की जाएगी, ताकि कम समय में अधिक क्षेत्र में पौधों का विकास हो सके.
बरसात का मौसम पौधों की बढ़वार के लिए बेहद अनुकूल होता है, लेकिन लगातार बारिश और जलभराव के कारण उनकी जड़ों के सड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है. यदि समय रहते सही देखभाल न की जाए तो पौधे कमजोर होकर सूख सकते हैं. ऐसे में मानसून के दौरान पौधों को स्वस्थ और हरा-भरा बनाए रखने के लिए इन 5 आसान उपायों को जरूर अपनाएं.
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