किसान कारवां कार्यक्रम के दौरान केवल कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि अधिकारियों सहित पशुपालन से जुड़े अधिकारियों की सहभागिता ही नहीं रही, बल्कि उर्वरक के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखने वाले इफको, इफको एमसी, धानुका और चंबल फर्टिलाइजर के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे.
उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र, दिल्ली, झारखंड और केरल तक सूरज मानो आग बरसा रहा हो. कई शहरों में पारा 45 डिग्री के करीब या उससे ऊपर पहुंच गया है, जिससे आम जनजीवन बेहाल नजर आ रहा है. सड़कों पर दोपहर में सन्नाटा पसरा है, स्कूलों के समय बदलने पड़े हैं और किसान फसलों को लेकर चिंता में हैं.
इंडिया टुडे ग्रुप और उत्तर प्रदेश सरकार की संयुक्त पहल से शुरू हुआ किसान कारवां प्रदेश के 75 जिलों की यात्रा में 66वें जनपद के तौर पर बिजनौर पहुंचा. बढ़ती गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच जनपद के नगीना गांव में महिला और पुरुष किसानों ने कारवां कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लिया.
जालना जिले में शॉर्ट सर्किट और बिजली के तारों में स्पार्किंग के कारण खेतों में आग लगने की दो बड़ी घटनाएं सामने आई हैं. इन हादसों में किसानों की फसल जलकर राख हो गई, जिसके बाद किसानों ने प्रशासन से पंचनामा कर आर्थिक मदद की मांग की है.
दुनिया के लगभग हर देश में अंडे खाए जाते हैं और इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में किस देश के लोग सबसे ज्यादा अंडे खाते हैं? आइए जानते हैं रोचक आंकड़े.
इंडिया टुडे ग्रुप और उत्तर प्रदेश सरकार की पहल ‘किसान कारवां’ का 65वां पड़ाव मुरादाबाद के बिलारी ब्लॉक के विजयपुर गांव में आयोजित हुआ, जहां बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया. कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन और उर्वरक प्रबंधन से जुड़ी जानकारी दी गई और विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में किसानों को जागरूक किया गया.
पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त जुलाई 2026 में आने की उम्मीद है. किसानों को समय पर पैसा पाने के लिए e-KYC पूरा करना जरूरी है. इस योजना के तहत हर साल ₹6,000 की सहायता मिलती है. यहां जानें पात्रता, स्टेटस चेक करने और आवेदन की पूरी आसान प्रक्रिया.
उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टूडे ग्रुप की संयुक्त पहल से शुरू किए गए ‘किसान तक’ किसान कारवां कार्यक्रम में पशुपालन एवं कृषि से जुड़े अधिकारियों की उपस्थिति रही. इसके साथ ही खेती और कृषि मशीनों से जुड़ी मशहूर कंपनियों- इफको, इफको एमसी और स्थिल के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे.
अक्सर लोग घर की छत या बालकनी में सब्जियां उगाने का शौक रखते हैं, लेकिन कई बार पौधों में फूल तो आते हैं पर वे फल बनने से पहले ही झड़ जाते हैं. अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो आप इस फ्री का घोल डालकर देखें.
पीलीभीत जिले की करीब 90 फीसदी आबादी के जीवन का आधार कृषि है, जिसमें नकदी फसल गन्ना के अलावा धान, गेहूं और दालों का व्यापक उत्पादन किसानों की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है. किसान तक के किसान कारवां कार्यक्रम में जहां पशुपालन और कृषि से जुड़े अधिकारियों की उपस्थिति रही, वहीं केवीके के वैज्ञानिकों की भी उपस्थिति देखने को मिली.
बरेली जिला में आयोजित किसान कारवां कार्यक्रम में केवीके के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अलावा इस बार बरेली IVRI के भी वैज्ञानिक उपस्थित रहे. इसके साथ ही उर्वरक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखने वाले इफको, इफको एमसी और धानुका के प्रतिनिधियों ने भी किसानों को उर्वरकों के सही उपयोग के साथ अपने विभिन्न उत्पादों की जानकारी दी.
इस आग में खेत में खड़ी पूरी मक्का की फसल जलकर पूरी तरह नष्ट हो गई.इसके साथ ही किसानों को एक और बड़ा नुकसान हुआ है. खेत में लगी लाखों रुपये की ड्रिप सिंचाई प्रणाली और स्प्रिंकलर पाइपलाइन भी इस आग में पूरी तरह जलकर खाक हो गई.
बुंदेलखंड में केन–बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ किसानों का आंदोलन तेज हो गया है. मुआवजे में असमानता, पुनर्वास और विस्थापन के मुद्दों को लेकर पन्ना और छतरपुर के किसान पिछले कई दिनों से धरने पर डटे हैं. प्रशासन के साथ बैठक के बावजूद ठोस समाधान न निकलने से किसानों में नाराजगी बनी हुई है और वे मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं.
शाहजहांपुर के पुवायां में किसान कारवां का 61वां पड़ाव लगा, जहां बड़ी संख्या में किसान जुटे. कृषि, पशुपालन और उर्वरक विशेषज्ञों ने आधुनिक खेती, नैनो उर्वरक, ढैंचा, रेशम और ड्रिप तकनीक से आय बढ़ाने के तरीके बताए. साथ ही फार्मर आईडी, सब्सिडी योजनाओं और संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर दिया गया.
मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित किसान मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर पिछले 10 दिनों से अनशन और विभिन्न सत्याग्रह कर रहे हैं. किसानों का आरोप है कि उन्हें वादे के मुताबिक मुआवजा नहीं मिला और वे बेघर हो गए हैं, जिसके चलते उनका विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है.
क्या El-Nino फिर बिगाड़ेगा बारिश का खेल? 2026 के मॉनसून को लेकर ऐसे संकेत मिल रहे हैं, जो चिंता बढ़ा सकते हैं. अनुमान है कि जून से सितंबर के बीच बारिश उम्मीद से कम रह सकती है, हालांकि कुछ फैक्टर थोड़ी राहत भी दे सकते हैं.
लखीमपुर खीरी के जंगलवाली पहाड़ियापुर गांव में किसान तक के किसान कारवां के दौरान किसानों को आधुनिक खेती, गन्ना और पुदीना जैसी फसलों से आय बढ़ाने के तरीके बताए गए. कार्यक्रम में डॉ. दिनेश कुमार सचान, विवेक चौधरी, रवि त्रिवेदी, अनुज सिंह तोमर और एजी चेतराम ने योजनाओं व तकनीकों की जानकारी दी.
कार्यक्रम के दौरान किसानों के मनोरंजन के लिए सलमान जादूगर ने अपने जादू के माध्यम से खेती और पशुपालन से जुड़ी जानकारियां रोचक ढंग से प्रस्तुत कीं. इसके अलावा 12 किसानों को लकी ड्रॉ के माध्यम से नकद राशि भी वितरित की गई.
अप्रैल शुरू होते ही गर्मी तेज होने लगती है. जैसे-जैसे दिन चढ़ता है, धूप और भी तीखी हो जाती है. घर के अंदर भी गर्मी महसूस होने लगती है, जिससे लोग राहत पाने के लिए एसी, कूलर और पंखों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन इनसे बिजली का बिल भी तेजी से बढ़ जाता है.
पशुपालकों के लिए पशु की सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है. ऐसे में अगर आपके भी पशु में कोई संकेत दिख रहा है तो इन उपायों को अपनाकर पशुओं को बचा सकते हैं. आइए जानते हैं कैसे.
यह कार्यक्रम जिला मुख्यालय से करीब 63 किलोमीटर दूर घोरावल ब्लॉक के परसौना गांव में आयोजित किया गया, जहां ग्रामीणों की भारी संख्या देखने को मिली. इस दौरान जिले के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग और पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने किसानों को खेती और पशुपालन से संबंधित सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी.
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