लखीमपुर खीरी के जंगलवाली पहाड़ियापुर गांव में किसान तक के किसान कारवां के दौरान किसानों को आधुनिक खेती, गन्ना और पुदीना जैसी फसलों से आय बढ़ाने के तरीके बताए गए. कार्यक्रम में डॉ. दिनेश कुमार सचान, विवेक चौधरी, रवि त्रिवेदी, अनुज सिंह तोमर और एजी चेतराम ने योजनाओं व तकनीकों की जानकारी दी.
कार्यक्रम के दौरान किसानों के मनोरंजन के लिए सलमान जादूगर ने अपने जादू के माध्यम से खेती और पशुपालन से जुड़ी जानकारियां रोचक ढंग से प्रस्तुत कीं. इसके अलावा 12 किसानों को लकी ड्रॉ के माध्यम से नकद राशि भी वितरित की गई.
अप्रैल शुरू होते ही गर्मी तेज होने लगती है. जैसे-जैसे दिन चढ़ता है, धूप और भी तीखी हो जाती है. घर के अंदर भी गर्मी महसूस होने लगती है, जिससे लोग राहत पाने के लिए एसी, कूलर और पंखों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन इनसे बिजली का बिल भी तेजी से बढ़ जाता है.
पशुपालकों के लिए पशु की सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है. ऐसे में अगर आपके भी पशु में कोई संकेत दिख रहा है तो इन उपायों को अपनाकर पशुओं को बचा सकते हैं. आइए जानते हैं कैसे.
यह कार्यक्रम जिला मुख्यालय से करीब 63 किलोमीटर दूर घोरावल ब्लॉक के परसौना गांव में आयोजित किया गया, जहां ग्रामीणों की भारी संख्या देखने को मिली. इस दौरान जिले के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग और पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने किसानों को खेती और पशुपालन से संबंधित सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी.
धौलपुर में तेज बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. गेहूं की खड़ी और कटी फसल को भारी नुकसान पहुंचा है और कई खेतों में फसल भीगकर बिछ गई है. सब्जी फसलें भी प्रभावित हुई हैं, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ने की आशंका है.
मिर्जापुर के दुबरा पहाड़ी गांव में ‘किसान तक’ किसान कारवां के दौरान किसानों को पशुपालन, बीज उपचार, आधुनिक खेती और सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई. कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने आय बढ़ाने के उपायों पर जोर दिया.
महाराष्ट्र के जालना में एक युवा किसान ने मेक्सिको की ‘चिया’ फसल की खेती कर कम लागत में अच्छा मुनाफा कमाया है. बढ़ती बाजार मांग, कम खर्च और बेहतर उत्पादन के चलते चिया खेती किसानों के लिए लाभदायक विकल्प बनती जा रही है.
कार्यक्रम के दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को केंद्र व राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी. किसानों को बताया गया कि इन योजनाओं का लाभ उठाकर वे अपनी आय बढ़ा सकते हैं और खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं.
इजरायल अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर भारत पर भी लगातार दिखाई दे रहा है और युद्ध के शुरुआती दिनों के बाद से ही एलपीजी का जो संकट पैदा हुआ था. लेकिन उत्तर प्रदेश का एक ऐसा गांव है, जहां के लोगों को इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा है.
उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों में चल रही इस श्रृंखला के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती, नई तकनीक, सरकारी योजनाओं और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ना रहा.
जालना जिले में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने फल बागान किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है. गाढेसावरगांव के किसान भागवत डोंगरे को इस आपदा का सबसे बड़ा झटका लगा है, जहां उनकी केले, तरबूज और मौसंबी की फसल को भारी नुकसान हुआ है.
कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन और उद्यान विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी. किसानों को बताया गया कि योजनाओं का लाभ लेकर वे अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं. साथ ही किसानों को योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया.
सरायकेला-खरसावां जिला अंतर्गत सेलाईडीह गांव में सदियों से पारंपरिक तरीके से 6.1 फीसदी करक्यूमिन युक्त ऑर्गेनिक हल्दी की खेती की जा रही है. स्थानीय किसानों के अनुसार, समस्या उत्पादन या क्वालिटी में नहीं बल्कि ब्रांडिंग, मार्केटिंग और संगठित खरीद सिस्टम की कमी में है.
जालना जिले में एक बार फिर मौसम की मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है. जामवाड़ी के किसान विजय वाडेकर ने अपने खेत में करीब 1800 आम के पेड़ लगाए थे. इस साल उन्हें करीब 10 से 12 टन आम उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन असमय बारिश और तेज हवाओं के कारण बड़ी मात्रा में आम के फल जमीन पर गिर गए.
प्रयागराज के बिंदव गांव में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा, जहां किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर आधुनिक खेती, सरकारी योजनाओं और नई तकनीकों की जानकारी ली. विशेषज्ञों ने वैल्यू एडिशन, जलवायु बदलाव और मिट्टी सुधार पर भी जरूरी सुझाव दिए.
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कहा कि पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाना समय की मांग है. उन्नत बीज, संतुलित खाद, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन और कीट नियंत्रण के जरिए उत्पादन बढ़ाने के व्यावहारिक तरीके किसानों को समझाए गए.
जालना जिले में आग की लगातार हो रही घटनाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. जिले में हुई तीन अलग-अलग घटनाओं में कुल मिलाकर 20 से अधिक एकड़ में खड़ी फसल जलकर खाक हो गई है, जिसमें किसानों को भारी नुकसान हुआ है.
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