कई मसाले में हैं, जिनको सर्दी यानी जनवरी के महीने में बालकनी या छत पर गमले में उगा सकते हैं. इसमें तेज पत्ता, धनिया, काली मिर्च, इलायची,लौंग, सौंफ और जीरा शामिल हैं. इनको उगाने के लिए कुछ टिप्स बताते हैं, जिसे फॉलो करके आप इन मसालों को आसानी से उगा सकते हैं.
75 जिलों की इस कवरेज में यह चौथा जिला रहा, जहां सैकड़ों किसानों ने यूपी सरकार की योजनाओं की जानकारी हासिल की. इस दौरान कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों ने सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी.
इटावा की रहने वाली एक ग्रामीण महिला, मंत्रवती शाक्य ने खेती के आधुनिक तरीके अपनाकर एक मिसाल कायम की है. वह स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट और बाजरा उगाकर सालाना लगभग तीन लाख रुपये कमाती हैं. सेल्फ-हेल्प ग्रुप और सरकारी योजनाओं के सहयोग से उन्होंने न सिर्फ अपनी ज़िंदगी बदली है, बल्कि अपने गांव की दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया है.
किसान कारवां तीसरे दिन बदायूं के लखनपुर गांव पहुंचा. इस दौरान गांव के किसानों के साथ केवीके से डॉ रौशन, कृषि विशेषज्ञ मनोज कुमार, पशुपालन से डॉ. अब्दुल, एफपीओ से अमन राठौड़ के साथ प्रगतिशील किसान राधेश्याम और निखिल शर्मा मौजूद रहे.
तिलहन की खेती को बढ़ावा प्रधानमंत्री का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसके तहत देश तमाम गांव में 100 फीसदी सब्सिडी पर तिलहन की खेती के लिए बीज दिया गया है. इससे किसान काफी खुश हैं कि देश को आत्मनिर्भर बनाने में प्रधानमंत्री खुद लगे हुए हैं इसलिए उन्हें भी प्रधानमंत्री के सपनों को पूरा करना है.
पुष्प प्रदर्शनी में फूलों की आकर्षण न सिर्फ शहरवासियों को बल्कि दूसरे ज़िले के लोगों को भी अपनी ओर स्वतः खिंच लाती है यही वजह है की यहां लोगों की भीड़ भी काफी जयादा होती है और पुष्प प्रदर्शनी का समय भी वर्ष के अंतिम दिन यानी 31 दिसंबर से लेकर नए वर्ष के आगमन यानी एक जनवरी तक आम लोगों के लिए खोल दिया जाता है.
उत्तर प्रदेश में किसान तक किसान कारवां के दूसरे पड़ाव पर संबल के बनियाखेड़ा में सैकड़ों किसान जुटे. इस अवसर पर प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और कृषि विशेषज्ञों ने नई तकनीक, उपकरण और खेती के लाभकारी तरीके बताए. कार्यक्रम में पुरुष और महिला किसानों ने सक्रिय भागीदारी की और अपने सवाल व सुझाव साझा किए.
साल 2025 खेती-किसानी के लिए ऐतिहासिक रहा. एक ओर जहां Farmer ID से किसानों की डिजिटल पहचान बनी तो वहीं PMDDKY के तहत 100 जिलों पर फोकस किया जा रहा है. GST रेट कट से कृषि मशीनें सस्ती हुईं और गन्ना FRP में बढ़ोतरी की गई और दलहन मिशन से जैसी किसानों को तमाम सौगातें मिलीं. पढ़ें डिटेल...
चित्तौड़गढ़-भुसावल हाईवे पर सैकड़ों किसानों ने ट्रैक्टर और बैलगाड़ी रोककर चक्काजाम किया. किसानों का गुस्सा कपास खरीदी कम होने पर फूटा. मंडी गेट बंद करने और हाईवे जाम करने के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे. किसान मांग कर रहे हैं कि एक एकड़ में 12 क्विंटल कपास खरीदी जाए.
राजस्थान के शुष्क और कम पानी वाले इलाकों में पश्चिमी राजस्थान के किसान रावल चंद जी ने शकरकंद की तीन उन्नत किस्में विकसित कर खेती की नई मिसाल पेश की है. थार मधु, सफेद शकरकंद और मरु गुलाबी किस्में कम पानी में अधिक पैदावार देती हैं और किसानों की आमदनी बढ़ा रही हैं.
मुजफ्फरपुर के 23 वर्षीय आरव ने बैंक की नौकरी छोड़कर बतख पालन से सफलता हासिल की. मात्र 60 हजार रुपये में शुरू किए गए उनके फार्म से रोजाना 1,300 अंडे का उत्पादन होता है. उनकी मेहनत और आधुनिक सोच ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया और यह कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.
किसान तक का किसान कारवां आज से शुरू हो चुका है. किसान कारवां पहले दिन अमरोहा के गजरौला के जलालपुर गांव में पहुंचा. किसान कारवां में विशेषज्ञों की भागीदारी भी रही.
इस पेड़ को बचाने के लिए एक बुलडोजर की मदद से पेड़ के जड़ के पास बड़ा गड्डा किया गया, और किरान की मदद से पेड़ में जंजीर बांध कर फिर से उसे खड़ा कर दिया गया. बाद में इसी बुलडोजर की मदद से पेड़ की जड़ो में मिटटी भी दाल दी गई, ताकि पेड़ को नया जीवन मिल सके.
यदि आपने भी अपने होम गार्डन में सर्दी के मौसम में उगने वाले फल, फूल या सब्जी के पौधे लगा रखे हैं और उनमें खाद डालने की जानकारी चाहते हैं, तो आज हम आपको बताने वाले हैं कि सर्दी के दौरान पौधों के लिए कौन सी खाद बेस्ट खाद हैं और पौधों में खाद कब और कैसे डालें.
भारत में हर साल बड़ी मात्रा में अनाज खेत से थाली तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाता है. सरकारी अध्ययन के मुताबिक, कटाई के बाद भंडारण, ढुलाई और सप्लाई चेन की कमजोरियों से पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान करीब 92,651 करोड़ रुपये तक आंका गया है. अनाज, दाल और तिलहन का हिस्सा सबसे ज्यादा है. सरकार मानती है कि हाल के वर्षों में कुछ सुधार हुआ है, इसलिए नई स्टडी के लिए टेंडर भी निकाले गए हैं.
सर्दियों का मौसम पौधों के लिए सबसे नाजुक समय माना जाता है. ठंड बढ़ते ही मिट्टी देर से सूखती है और पौधों की जड़ें सुस्त हो जाती हैं. ऐसे में पानी और खाद की जरूरत कम हो जाती है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही भी पौधों को मुरझाने पर मजबूर कर सकती है.
भारत दुनिया के शीर्ष 3 फल और सब्जी उत्पादक देशों में शामिल है. चीन के बाद भारत का स्थान वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत माना जाता है. केला, आम, पपीता, नींबू और भिंडी जैसी फसलों में भारत दुनिया में पहले नंबर पर है. जलवायु विविधता और किसानों की मेहनत इसकी बड़ी वजह है.
खेती में जरूरत से ज्यादा रासायनिक खाद मिट्टी को बीमार बना देती है. जानिए कैसे इससे मिट्टी के पानी पकड़ने की क्षमता पर असर पड़ता है और पौधों-फसलों की जड़ें कमजोर होती हैं...
अब बाज़ार से महंगी लेटस खरीदने की ज़रूरत नहीं है. आप अपनी छत या बालकनी पर खुद लेटस उगा सकते हैं और सिर्फ़ 35-40 दिनों में ताज़ा सलाद पा सकते हैं. इसे उगाना आसान है, इसे कम धूप की ज़रूरत होती है, और यह आपकी सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद है. इसे सलाद, सैंडविच या जूस में डालकर हेल्दी और ताज़ा खाना खाएं.
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-किसान) योजना के तहत किसानों को सालाना ₹6,000 मिलते हैं. जैसे-जैसे बजट 2026 नज़दीक आ रहा है, ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार यह रकम बढ़ाकर ₹10,000 या ₹12,000 कर सकती है. किसानों को इस बढ़ोतरी की उम्मीद है. जानें कि नई किस्त कब और कैसे दी जाएगी और कौन से दूसरे राहत उपायों की घोषणा की जा सकती है.
सर्दियों का हल्का कोहरा फसलों के लिए नुकसान नहीं, बल्कि फायदा पहुंचाता है. जानिए आखिर कोहरा कैसे खेत में लगी फसलों की कैसे रक्षा करता है. खासकर गेहूं और अन्य रबी फसलों की बढ़वार में यह कैसे मदद करता है.
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