भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) गन्ना किसानों के लिए आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दे रही है. सेट ट्रीटमेंट डिवाइस, टिश्यू कल्चर माइक्रोप्रोपेगेशन, सिंगल बड चिप तकनीक और मल्टीटास्कर शुगरकेन कटर प्लांटर जैसी इनोवेटिव तकनीकों से गन्ने की खेती अधिक लाभकारी बन रही है. इन तकनीकों से बीज की बचत, श्रम लागत में कमी, रोग नियंत्रण और उत्पादन में अच्छी वृद्धि हो रही है. वहीं AI और सैटेलाइट आधारित निगरानी से फसल प्रबंधन और कटाई की योजना भी अधिक प्रभावी हो रही है.
पुराने और बड़े आम के बागों में कैनोपी घनी होने से सूरज की रोशनी और हवा अंदर तक नहीं पहुंच पाती, जिससे पैदावार घटती है और बीमारियाँ बढ़ती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए फल तुड़ाई के तुरंत बाद 'विंडो ओपनिंग'तकनीक अपनानी चाहिए। इसमें आपस में उलझी टहनियों की सही छंटाई करके पेड़ों के बीच खुला रास्ता बनाया जाता है,जिससे धूप और हवा अंदर तक पहुंचती है। इससे कीट नियंत्रण आसान होता है और आम की बंपर पैदावार मिलती है,ऐसा सुझाव भा (CISH), लखनऊ के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एच. एस. सिंह ने दिया
मध्य प्रदेश के सागर जिले में अल्ट्रा लो-कॉस्ट शेडनेट हाउस योजना को किसानों का शानदार समर्थन मिल रहा है.60 के लक्ष्य के मुकाबले 62 आवेदन प्राप्त हुए हैं. कम लागत में संरक्षित खेती के इस मॉडल से किसान बेहतर गुणवत्ता का उत्पादन, अधिक पैदावार और बढ़ी हुई आय हासिल कर रहे हैं.
मध्य प्रदेश सरकार ने कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत बड़ा फैसला लिया है. अब हर विधानसभा में कृषि यंत्र किराये की दुकान खोली जाएगी.वर्तमान में 5,260 केंद्र संचालित हैं और हर साल 1,060 नए केंद्र खुलेंगे, जिससे छोटे किसानों को कम खर्च में आधुनिक कृषि मशीनों का लाभ मिलेगा.
छत्तीसगढ़ में खेती को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है.अब किसानों को सहकारी समितियों के जरिए ड्रोन स्प्रेयर की सुविधा मिलेगी. बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की 5 समितियों में 11 ड्रोन तैनात किए गए हैं और इस खरीफ सीजन में 50 हजार एकड़ में ड्रोन से खाद और कीटनाशकों के छिड़काव का लक्ष्य रखा गया है.
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के प्रगतिशील किसान उपदेश शर्मा ने रेज्ड बेड प्लांटर तकनीक से सोयाबीन की खेती कर बड़ा बदलाव किया है. इस आधुनिक पद्धति से उत्पादन 3 क्विंटल प्रति बीघा से बढ़कर 8 क्विंटल तक पहुंच गया और मात्र 3 बीघा में करीब 1 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ. अब वे 13 बीघा में इसी तकनीक से खेती करेंगे.
फल मक्खी अमरूद, आम, किन्नू, नाशपाती, आड़ू, आलूबुखारा तथा घीया, तोरी, खीरा, करेला, तरबूज और अन्य कद्दूवर्गीय फसलों में 70 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा सकती है। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) के कीट विज्ञान विभाग ने इसके नियंत्रण के लिए ‘फ्रूट फ्लाई ट्रैप’ विकसित किया है, जो नर फल मक्खियों को आकर्षित कर उनकी संख्या कम करता है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रति एकड़ 12 से 14 ट्रैप लगाने और संक्रमित फलों को नष्ट करने से इस कीट का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। ट्रैप की कीमत 130 रुपये है और इसका प्रभाव लगभग 30 दिनों तक रहता है।
झारखंड के 18 वर्षीय युवा अवि मोहन कुमार शुक्ला ने किसानों की फसलों को हाथियों से बचाने के लिए एक कम लागत वाला AI आधारित सोलर डिवाइस तैयार किया है. यह स्मार्ट डिवाइस हाथियों की पहचान कर समय रहते अलर्ट देता है और उन्हें खेतों से दूर भगाने में मदद करता है.
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के किसान नारायण सिंह पटेल ने गन्ने की खेती में पारंपरिक कम दूरी वाली बुवाई की जगह 4.5 फीट की दूरी अपनाकर उत्पादन में बड़ा बदलाव किया है. इस संशोधित स्पेसिंग तकनीक से गन्ने की पैदावार 72% तक बढ़कर 950 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पहुंच गई, जबकि बीज और उत्पादन लागत में 25-30% की कमी आई. उनकी यह तकनीक अब जिले के करीब 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अपनाई जा रही है.
NITI Aayog Bioeconomy Roadmap 2035: नीति आयोग ने 2035 तक भारत की बायोइकोनॉमी को 691 अरब डॉलर तक पहुंचाने का रोडमैप जारी किया है. इसमें कृषि क्षेत्र के लिए AgriBio 2.0 मिशन का प्रस्ताव दिया गया है.
KisanKraft ने भारत में दो नए इलेक्ट्रिक कृषि उपकरण E-Inter-cultivator और E-Self Propelled Reaper लॉन्च किए हैं. कंपनी का दावा है कि इन मशीनों से खेती का खर्च ₹170 से घटकर सिर्फ ₹10 प्रति घंटे रह जाएगा. जानिए इन मशीनों के फीचर्स, बैटरी, कीमत से जुड़ी जानकारी और छोटे किसानों के लिए इनके क्या फायदे हैं.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर से राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव का शुभारंभ किया. किसान कल्याण वर्ष के तहत 16 विभागों के समन्वय से किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्यव्यापी अभियान शुरू किया गया. इस दौरान डेयरी पर 10 लाख रुपये तक अनुदान, दिन में कृषि बिजली, फूड प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार समेत कई बड़ी घोषणाएं की गईं.
हैदराबाद के VNRVJIET संस्थान को एआई-आधारित 'लीफ डिजीज प्रोटेक्शन' तकनीक के लिए पेटेंट मिला है. किसान की बेटी डॉ. विजया सरस्वती के नेतृत्व में बनी यह तकनीक फसलों की बीमारियों को शुरुआत में ही पहचानकर किसानों का नुकसान रोकेगी.
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन में पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपाई किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है. इससे रोपाई की लागत लगभग आधी हो रही है, मजदूरों पर निर्भरता कम हो रही है और उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है. कृषि विभाग ने किसानों से आधुनिक कृषि यंत्र अपनाने की अपील की है.
धान की फसल में अंधाधुंध यूरिया डालने से किसानों की लागत बढ़ रही है और जमीन की सेहत खराब हो रही है. इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए वैज्ञानिक '4R' तकनीक अपनाने की सलाह दे रहे हैं. यह फॉर्मूला फसलों को यूरिया की सही खुराक, सही समय और सही तरीके से देने पर जोर देता है. इससे यूरिया की भारी बचत होती है और खेती का खर्च घटता है. कम खाद में भी धान की बंपर पैदावार हासिल की जा सकती है.
यूके से बिजनेस की पढ़ाई करने वाले भोपाल के युवा किसान हर्षित गोधा ने इजरायल की तकनीक अपनाकर 8.5 एकड़ में सफलतापूर्वक एवोकाडो की खेती शुरू की है. उन्होंने 5,000 पौधों की हाईटेक नर्सरी भी तैयार की है और अब देशभर के किसानों को पौधे व डिजिटल प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहे हैं.
देश के पहाड़ी इलाकों में याक पालन करने वाले पशुपालकों के लिए बड़ी खुशखबरी है. ICAR के नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन याक ने एक IoT आधारित स्मार्ट हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया है, जो याक की सेहत, तनाव और लोकेशन पर 24 घंटे रियल-टाइम नजर रखेगा.
सोनालीका ट्रैक्टर्स ने पंजाब के होशियारपुर स्थित दुनिया के सबसे बड़े इंटीग्रेटेड ट्रैक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में 20 लाखवां ट्रैक्टर बनाकर नया रिकॉर्ड बनाया है. 30 साल के सफर में कंपनी ने किसानों के भरोसे और आधुनिक तकनीक के दम पर भारत से लेकर 150 से ज्यादा देशों तक अपनी पहचान बनाई है. यह उपलब्धि भारतीय इंजीनियरिंग की बड़ी सफलता है.
छत्तीसगढ़ के सुकमा की सोढ़ी तिरपो ने बिहान योजना और कस्टम हायरिंग सेंटर के प्रशिक्षण से हल-बैल छोड़ आधुनिक पावर टिलर अपनाया.जानिए कैसे आधुनिक खेती ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बना दिया.
बस्तर के किसान खगपति ने वर्षा आधारित पारंपरिक धान की खेती छोड़ आधुनिक कृषि तकनीक, सोलर पंप और कृषि विभाग के प्रशिक्षण की मदद से अपनी सालाना आय 80 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये से अधिक कर ली.जानिए उनकी सफलता की पूरी कहानी.
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