भारत के ट्रैक्टर उद्योग ने इस साल शानदार प्रदर्शन किया है. इस दौरान ट्रैक्टर की बिक्री पहली बार रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर गई है. इसकी मुख्य वजह गांवों में बढ़ती मांग, जीएसटी में कमी और अच्छी कृषि पैदावार मानी जा रही है.
महिंद्रा ग्रुप की कंपनी Swaraj Tractors ने 21 अप्रैल 2026 से ट्रैक्टर की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है. इनपुट लागत बढ़ने के चलते अलग-अलग मॉडलों और क्षेत्रों के अनुसार दाम बढ़ेंगे.
किसान e-मित्र AI चैटबॉट किसानों के लिए सरकारी योजनाओं की जानकारी आसान बना रहा है. अब किसान बिना दफ्तर जाए PM-Kisan, फसल बीमा और अन्य योजनाओं की जानकारी, भुगतान स्थिति और शिकायत समाधान अपनी भाषा में तुरंत पा सकते हैं. यह तकनीक समय बचाकर किसानों को सशक्त और आत्मनिर्भर बना रही है.
बिहार सरकार ने किसानों के लिए कृषि ऐप लॉन्च किया है, जिससे वे घर बैठे खाद की उपलब्धता, नजदीकी दुकानों और स्टॉक की जानकारी ले सकते हैं. यह ऐप कालाबाजारी रोकने के साथ किसानों को डिजिटल सुविधाएं और खेती से जुड़ी अहम जानकारी भी प्रदान करेगा.
ICAR का बनाया हुआ सोलर पावर्ड यूनिवर्सल इंसेक्ट ट्रैप किसानों के लिए बिना केमिकल कीट नियंत्रण का नया समाधान है. यह तकनीक 24x7 काम करती है और फसलों के साथ अनाज भंडारण को भी सुरक्षित बनाती है.
ट्रैक्टर एक्सपोर्ट में नंबर 1 ब्रांड सोनालीका ट्रैक्टर्स ने वर्ष 2026 में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. यह सफलता दिखाती है कि कंपनी ने हमेशा अनुशासन बनाए रखा, किसानों को प्राथमिकता दी और बेहतर तकनीक वाले मजबूत ट्रैक्टर उपलब्ध कराए.
मलिहाबाद में “कवच मैंगो फ्रूट प्रोटेक्शन बैग” तकनीक किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है. यह बैग आम को कीटों, धूल और धूप से बचाकर उसकी गुणवत्ता बढ़ाता है. साथ ही “स्वीट सैफरन” प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को प्रीमियम बाजार से जोड़कर बेहतर दाम दिलाने में मदद कर रहा है.
गुजरात के वलसाड जिले के एक किसान ने ग्राफ्टिंग तकनीक से सिर्फ 12 फीट ऊंचे एक पेड़ पर 80 किस्मों के आम उगाकर अनोखी मिसाल पेश की है. करीब 5 साल की मेहनत से हासिल इस उपलब्धि में फिलहाल 60 से ज्यादा किस्में सुरक्षित हैं, जिनमें कई पर फल भी आ चुके हैं. किसान का लक्ष्य एक ही पेड़ पर 100 किस्मों के आम उगाना है, जिससे यह प्रयोग देशभर में चर्चा का विषय बन गया है.
पराली से बायो-बिटुमेन बनाने की नई तकनीक किसानों की आय बढ़ाने, प्रदूषण कम करने और आयात घटाने में मदद करेगी. यह पहल आत्मनिर्भर भारत और वेस्ट-टू-वेल्थ की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.
मुजफ्फरपुर की शाही लीची के लिए नई “नॉन-वॉवेन बैग” तकनीक से फल की क्वालिटी, मिठास और उत्पादन बढ़ेगा. इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने और आय में वृद्धि की उम्मीद है.
गुजरात सरकार बायो-CNG प्लांट्स के जरिए डेयरी सेक्टर को स्वच्छ ऊर्जा और किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा माध्यम बना रही है. गोबर से CNG, जैविक खाद और रोजगार सृजन के जरिए यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है.
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