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खेती-बाड़ी तकनीक News

आधुनिक तकनीक से तरबूज की खेती बनी कमाई का जरिया, 2 बीघा से 8 लाख रुपये की हुई आय

आधुनिक तकनीक से तरबूज की खेती बनी कमाई का जरिया, 2 बीघा से 8 लाख रुपये की हुई आय

Jun 09, 2026

आगर-मालवा के महुडिया गांव के शिक्षित युवा किसान राकेश यादव ने आधुनिक तकनीकों के सहारे तरबूज की खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया. उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 2 बीघा भूमि पर पीले और लाल तरबूज की खेती कर उन्होंने करीब 8 लाख रुपये की आय अर्जित की, जिससे वे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं.

अल नीनो संकट में किसानों का 'वॉटर बैंक', सूखे में भी फसलों को रखेगा हरा-भरा!

अल नीनो संकट में किसानों का 'वॉटर बैंक', सूखे में भी फसलों को रखेगा हरा-भरा!

Jun 08, 2026

देश में गहराते जलसंकट और अल नीनो के कारण कम बारिश की आशंका के बीच 'पूसा हाइड्रोजेल' तकनीक किसानों के लिए बड़े काम की है. ग्वार फली से बना यह प्राकृतिक 'वॉटर बैंक' मिट्टी में मिलकर पानी को सोख लेता है और सूखे के समय सीधे पौधों की जड़ों को नमी देता रहता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक एकड़ में महज 1200 रुपये की लागत आती है और यह एक बार डालने पर खेतों में 5 साल तक काम करता है. धान, मक्का, गन्ना और सब्जियों जैसी ज्यादा पानी वाली फसलों में इसके इस्तेमाल से पानी की आधी बचत होती है.

घूंघट से ड्रोन तक: ‘ड्रोन दीदी’ मेघा पाटीदार लिख रहीं आत्मनिर्भरता की नई कहानी

घूंघट से ड्रोन तक: ‘ड्रोन दीदी’ मेघा पाटीदार लिख रहीं आत्मनिर्भरता की नई कहानी

Jun 08, 2026

आगर-मालवा की मेघा पाटीदार ने नमो ड्रोन दीदी योजना का लाभ लेकर अपनी पहचान ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में बनाई है. निःशुल्क ड्रोन और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वे किसानों के खेतों में नैनो यूरिया व कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं.

पराली को बना दिया सोना! राजेश आर्य बना रहे भूसा, लौटा रहे अतिरिक्त गेहूं, संरक्षित कर रहे पर्यावरण

पराली को बना दिया सोना! राजेश आर्य बना रहे भूसा, लौटा रहे अतिरिक्त गेहूं, संरक्षित कर रहे पर्यावरण

Jun 08, 2026

मंदसौर के किसान राजेश आर्य ने 1.50 लाख रुपये के अनुदान से स्ट्रॉ रीपर खरीदकर नरवाई को कमाई का साधन बना दिया है. वे फसल अवशेषों से भूसा तैयार कर किसानों की मदद कर रहे हैं, अतिरिक्त गेहूं लौटाते हैं और नरवाई जलाने की समस्या का पर्यावरण अनुकूल समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं.

‘मशरूम लेडी’ से ‘ड्रोन दीदी’ तक: जागृति साहू की सफलता ने बदली ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर

‘मशरूम लेडी’ से ‘ड्रोन दीदी’ तक: जागृति साहू की सफलता ने बदली ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर

Jun 05, 2026

दुर्ग की जागृति साहू ने ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के जरिए ड्रोन तकनीक अपनाकर किसानों की मदद शुरू की और महिलाओं को रोजगार के नए अवसर दिए. पहले 300 रुपये प्रतिदिन कमाने वाली महिलाएं अब 3000-4000 रुपये तक कमा रही हैं. जागृति की कहानी आत्मनिर्भर भारत और महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण है.

धमतरी बना देश का पहला ड्रोन कृषि जिला, अब कॉपरेटिव से किसानों को मिलेगी स्प्रे की सुविधा

धमतरी बना देश का पहला ड्रोन कृषि जिला, अब कॉपरेटिव से किसानों को मिलेगी स्प्रे की सुविधा

Jun 04, 2026

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले ने देश का पहला जिला बनकर इतिहास रच दिया है. यहां प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) के माध्यम से किसानों को ड्रोन स्प्रेयर सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.

लोगों ने कहा असंभव, किसान ने कर दिखाया संभव: नर्मदा तट पर लहलहा रहे 2 हजार नारियल के पेड़

लोगों ने कहा असंभव, किसान ने कर दिखाया संभव: नर्मदा तट पर लहलहा रहे 2 हजार नारियल के पेड़

Jun 04, 2026

जबलपुर के प्रगतिशील किसान अनिल पचौरी ने नर्मदा किनारे 10 एकड़ में 2 हजार नारियल के पेड़ लगाकर नारियल खेती की नई मिसाल कायम की है। वैज्ञानिक तकनीकों और निरंतर मेहनत के दम पर वे प्रतिदिन 300 से 400 नारियल का उत्पादन कर रहे हैं तथा सालाना 30 से 40 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं।

Drone Didi: फ्री ट्रेनिंग से बनी ड्रोन पायलट, अब हर महीने 15 हजार रुपये कमाती हैं सुदेश कुमारी

Drone Didi: फ्री ट्रेनिंग से बनी ड्रोन पायलट, अब हर महीने 15 हजार रुपये कमाती हैं सुदेश कुमारी

Jun 03, 2026

सोनीपत की सुदेश कुमारी ‘ड्रोन दीदी’ बनकर ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं. सरकारी योजना के तहत ड्रोन प्रशिक्षण और उपकरण मिलने के बाद वह खेतों में स्प्रे कर हर महीने अच्छी कमाई कर रही हैं और अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बना रही हैं.

Tractor Sale: खरीफ सीजन से पहले ट्रैक्टर मांग में बड़ी बढ़ोतरी, बिक्री ने छुआ नया स्तर

Tractor Sale: खरीफ सीजन से पहले ट्रैक्टर मांग में बड़ी बढ़ोतरी, बिक्री ने छुआ नया स्तर

Jun 03, 2026

मई महीने में ट्रैक्टर बिक्री और उत्पादन में बड़ा उछाल देखा गया है. खेती में मशीनों के बढ़ते उपयोग और खरीफ सीजन की तैयारी के चलते मांग तेजी से बढ़ी. उद्योग ने 21% की वृद्धि दर्ज करते हुए नया रिकॉर्ड बनाया. यह बदलाव भारतीय कृषि के आधुनिकीकरण और किसानों की बढ़ती जरूरतों को दर्शाता है.

टसर रेशम से बदल रही नारायणपुर की तस्वीर: 50 दिन की मेहनत से लाखों की कमाई, आदिवासी परिवार बन रहे आत्मनिर्भर

टसर रेशम से बदल रही नारायणपुर की तस्वीर: 50 दिन की मेहनत से लाखों की कमाई, आदिवासी परिवार बन रहे आत्मनिर्भर

Jun 02, 2026

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में टसर रेशम उत्पादन ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के लिए आजीविका का मजबूत साधन बन रहा है। रेशम विभाग के प्रयासों से सैकड़ों परिवारों को गांव में ही रोजगार और बेहतर आय मिल रही है, जिससे पलायन कम हुआ है और आर्थिक समृद्धि का नया रास्ता खुला है।

"घर की छत पर करें बिजली की खेती, एमपी सरकार दे रही सब्सिडी; ‘सोलर चाचा’ बताएंगे आवेदन से लाभ तक का पूरा रास्ता"

"घर की छत पर करें बिजली की खेती, एमपी सरकार दे रही सब्सिडी; ‘सोलर चाचा’ बताएंगे आवेदन से लाभ तक का पूरा रास्ता"

Jun 02, 2026

मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों की छत पर सोलर पैनल लगवाने के लिए आकर्षक सब्सिडी दी जा रही है. उपभोक्ताओं को आवेदन से लेकर योजना का लाभ लेने तक की पूरी जानकारी व्हाट्सऐप चैटबॉट ‘सोलर चाचा’ के माध्यम से आसानी से मिल रही है.

Fish seed production: फिश हैचरी से घर बैठे होगी तगड़ी कमाई, जानें पूरी तकनीक और गांव में रहकर कमाएं लाखों

Fish seed production: फिश हैचरी से घर बैठे होगी तगड़ी कमाई, जानें पूरी तकनीक और गांव में रहकर कमाएं लाखों

Jun 01, 2026

आज के समय में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन चुका है, जहां तालाबों और पोखरों में मछली पालन तेजी से बढ़ रहा है. बाजार में अच्छी नस्ल के मछली बीजों की भारी मांग और कम सप्लाई को देखते हुए, गांव के युवाओं और किसानों के लिए 'मत्स्य हैचरी' तकनीक कमाई का एक बेहतरीन जरिया साबित हो रही है. नदी-तालाबों से मिलने वाले प्राकृतिक बीज में परभक्षी मछलियों की मिलावट का खतरा रहता है, जबकि हैचरी में वैज्ञानिक तरीके से सिर्फ शुद्ध और उन्नत नस्ल का बीज तैयार किया जाता है. यहां रोहू और कतला जैसी मछलियों का बीज तैयार करके साल भर में लाखों रुपये का बिजनेस किया जा सकता है,

IARI की 'वर्षा रोबोट' करेगा खरपतवार का खात्मा और सटीक बुवाई, न डीजल का खर्चा न लेबर की टेंशन!

IARI की 'वर्षा रोबोट' करेगा खरपतवार का खात्मा और सटीक बुवाई, न डीजल का खर्चा न लेबर की टेंशन!

Jun 01, 2026

'वर्षा रोबोट' भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) द्वारा विकसित भारत का पहला ऐसा स्वदेशी कृषि रोबोट है, जो किसानों के लिए काफी फायदेमंद है. यह रोबोट सौर ऊर्जा और लिथियम-आयन बैटरी से चलता है, जिससे डीजल-पेट्रोल का खर्च बिल्कुल खत्म हो जाता है और एक बार चार्ज होने पर यह लगातार 6 घंटे काम करता है. इसमें लगे हाई-टेक कैमरे और रोबोटिक नोजल सिर्फ खरपतवार पर ही सटीक दवा छिड़कते हैं, जिससे 25% रसायनों की बचत होती है. साथ ही, यह खेतों में एकदम सही दूरी और गहराई पर बीजों की बुवाई भी करता है. इसे 1 किलोमीटर दूर से रिमोट द्वारा कंट्रोल किया जा सकता है.

एमपी के ‘बंगला पान’ की विदेशों में बढ़ी धाक, पाकिस्तान-बांग्लादेश तक पहुंची मांग

एमपी के ‘बंगला पान’ की विदेशों में बढ़ी धाक, पाकिस्तान-बांग्लादेश तक पहुंची मांग

Jun 01, 2026

मध्यप्रदेश का प्रसिद्ध ‘बंगला पान’ अब देश की सीमाओं से निकलकर विदेशों में भी अपनी पहचान बना रहा है. पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित कई देशों में इसकी मांग बढ़ी है. पान की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार ने 10 जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की है.

राजकोट में मिर्च की खेती में वैज्ञानिक नर्सरी तकनीक का हो रहा इस्तेमाल, पैदावार और इनकम में हुई बढ़ोतरी

राजकोट में मिर्च की खेती में वैज्ञानिक नर्सरी तकनीक का हो रहा इस्तेमाल, पैदावार और इनकम में हुई बढ़ोतरी

May 29, 2026

गुजरात के राजकोट में मिर्च किसान पारंपरिक बुवाई की जगह वैज्ञानिक नर्सरी तकनीक अपना रहे हैं. नर्सरी विकास, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग पर सरकारी सहायता मिलने से फसल प्रबंधन बेहतर हो रहा है. इससे उत्पादन बढ़ाने और नुकसान कम करने में मदद मिल रही है.

10 बिस्वा में कमाल: जौनपुर के किसान बृजेश पटेल ने सब्जी खेती से कमाए लाखों, बने प्रगतिशील कृषक की मिसाल

10 बिस्वा में कमाल: जौनपुर के किसान बृजेश पटेल ने सब्जी खेती से कमाए लाखों, बने प्रगतिशील कृषक की मिसाल

May 27, 2026

जौनपुर के किसान बृजेश कुमार पटेल ने महज 10 बिस्वा जमीन पर वैज्ञानिक तरीके से सब्जी खेती कर लाखों की आय अर्जित की है. आधुनिक तकनीक और उद्यानिकी खेती अपनाकर उन्होंने यह साबित किया कि छोटी जोत में भी मेहनत और नई सोच से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है.