वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक खोजी है जिससे धान की बेकार पराली अब किसानों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बनेगी. अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में 'किंग ऑयस्टर मशरूम' की सफल खेती की गई है. इस मशरूम की विदेशों और बड़े होटलों में भारी डिमांड है, क्योंकि यह स्वाद और सेहत में लाजवाब होता है. इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह मात्र 30 से 35 दिनों में तैयार हो जाता है. किसान इसे धान के पुआल पर आसानी से उगा सकते हैं, जिससे पराली जलाने की समस्या भी खत्म होगी.
महाराष्ट्र के बीड जिले में ‘दिलासा संस्था’ और ‘एसबीआई फाउंडेशन’ की पहल से किसानों की खेती लागत 10 गुना तक घट गई है. किसान सेवा केंद्रों और ग्राम सक्षम अभियान ने सूखाग्रस्त गांवों में आय बढ़ाने और आत्महत्या संकट से उबरने की नई उम्मीद जगाई है.
गाजर की खेती में सबसे बड़ी मुसीबत फसल की कटाई के बाद शुरू होती है. खेत से निकली गाजर मिट्टी और कीचड़ से पूरी तरह ढकी होती है, इसे हाथों से रगड़-रगड़ कर धोना न केवल थका देने वाला काम है, बल्कि इसमें बहुत समय और दर्जनों मजदूरों की जरूरत पड़ती है. होशियारपुर के किसान गुरचरण सिंह ने इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एक 'ब्रश वॉशिंग मशीन' तैयार की है. यह मशीन 1 घंटे में 1.5 टन गाजर को ऐसे चमका देती है जैसे वे हाथों से चुनी गई हों.
A-1 फार्मिंग सिस्टम गन्ने की खेती की आधुनिक तकनीक है, जिससे किसान कम पानी, कम खाद और ऑर्गेनिक तरीकों से 200 टन प्रति एकड़ तक गन्ने की पैदावार बढ़ा सकते हैं. जानिए वैज्ञानिक बुवाई, सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन का पूरा तरीका.
किसानक्राफ्ट ने देश भर के 26 से ज़्यादा ज़िलों में DDSR (ड्राई डायरेक्ट सीडेड राइस) पर एक जागरूकता अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया. इस अभियान के ज़रिए, हज़ारों किसानों को कम पानी में चावल उगाने की एक नई और आसान तकनीक सिखाई गई, जिससे खेती ज़्यादा किफायती, फायदेमंद और पर्यावरण के लिए टिकाऊ बन गई.
वसंत ऋतु में जब किसान आलू, सरसों या गेहूं की कटाई का इंतजार करते हैं, तो गन्ने की बुवाई में 25 से 40 दिनों की देरी हो जाती है. इस देरी के कारण गन्ने को बढ़ने का पूरा समय नहीं मिलता, जिससे पैदावार काफी घट जाती है. साथ ही, गर्मी बढ़ने के कारण पारंपरिक बुवाई में गन्ने का जमाव भी कम होता है. इस समस्या का सबसे बेस्ट समाधान 'सिंगल बड नर्सरी' तकनीक है.
डेयरी से निकलने वाले गंदे पानी से नेपियर घास की खेती कर दूध उत्पादन बढ़ाएं. ICAR द्वारा प्रमाणित यह तकनीक कम लागत, अधिक मुनाफा और टिकाऊ डेयरी खेती का बेहतरीन समाधान है.
महिंद्रा ट्रैक्टर्स ने इस गणतंत्र दिवस 2026 पर तिरंगे से प्रेरित लिमिटेड-एडिशन Yuvo Tech+ 585 DI 4WD ट्रैक्टर लॉन्च किए हैं. मेटैलिक ऑरेंज, एवरेस्ट व्हाइट और मेटैलिक ग्रीन रंगों में उपलब्ध ये ट्रैक्टर भारतीय किसानों के लिए दमदार परफॉर्मेंस और एडवांस्ड खेती के फीचर्स देते हुए देशभक्ति का जश्न मनाते हैं.
Gorakhpur News: स्नातक स्तर की शिक्षा प्राप्त करने वाले राजू सिंह बताते हैं कि मशीन से शहद सीधे छत्ते से निकलने और हाथ न लगने के कारण 100 प्रतिशत शुद्ध रहता है. जहां पुराने तरीकों में शहद निकालने में घंटों का समय और कई मजदूरों की जरूरत पड़ती थी, लेकिन, इस नई तकनीक से एक किसान मात्र 5 से 10 मिनट में अकेले शहद निकाल सकता है.
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