गुजरात सरकार बायो-CNG प्लांट्स के जरिए डेयरी सेक्टर को स्वच्छ ऊर्जा और किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा माध्यम बना रही है. गोबर से CNG, जैविक खाद और रोजगार सृजन के जरिए यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है.
पंजाब में खेती को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है, जहां एआई और डेटा आधारित फैसलों पर जोर दिया जा रहा है. 100 स्मार्ट वेदर स्टेशनों और बड़े स्किलिंग प्रोग्राम के जरिए किसानों को सटीक जानकारी और तकनीकी सहायता देने की तैयारी है.
ICAR‑IIMR द्वारा विकसित गन्ना–मक्का सहफसली खेती मॉडल किसानों के लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है. इससे गन्ने की उपज 28% और मक्का उत्पादन 3.5–5 टन/हेक्टेयर बढ़ा है, जबकि मक्का की लागत 75% तक घट गई. यह तकनीक इथेनॉल प्लांट्स को सालभर कच्चा माल उपलब्ध कराते हुए किसानों की कमाई में 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक अतिरिक्त बढ़ोतरी करती है.
IIT रोपड़ का ANNAM.AI सेंटर भारत में खेती में नई AI क्रांति ला रहा है. 100 मुफ्त स्मार्ट मौसम स्टेशन किसानों को सही मौसम जानकारी देंगे, ताकि फसल और अधिक सुरक्षित और उपजाऊ हो. साथ ही, 10,000 छात्रों और ग्रामीण युवाओं को AI ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे खेती में तकनीक का सही उपयोग और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.
बुधनी में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसान मेला और राष्ट्रीय कृषि मशीनरी प्रदर्शनी में कहा कि बुधनी अब आधुनिक खेती और मशीनीकरण का आदर्श केंद्र बनेगा. किसानों को इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर, ड्रोन, रोबोट और नई तकनीक के माध्यम से अधिक आय और लाभकारी खेती का अवसर मिलेगा. ‘उदय एक्सपो’ से हर साल किसानों को प्रशिक्षण और जानकारी मिलेगी.
पटना के अनुभवी किसान अमरजीत कुमार सिन्हा ने आम और अमरूद जैसे रसीले फलों को 'फल मक्खी' के जानलेवा हमले से बचाने के लिए एक बेहद सस्ता और 'असरदार' देसी जुगाड़ निकाला है. अक्सर ये मक्खियां फलों को अंदर से सड़ा देती हैं, जिससे बागवानों को 90 फीसदी तक का भारी नुकसान उठाना पड़ता है. इस समस्या के 'मुकम्मल' समाधान के लिए उन्होंने पके हुए केलों और बेकार प्लास्टिक की बोतलों से एक 'कीट जाल' तैयार किया है जिससे फल मक्खी खिंची चली आती हैं और जाल में फंसकर मर जाती हैं.
मोतीपुर गांव ने आत्मनिर्भरता की अनोखी मिसाल पेश की है, जहां 120 परिवार पिछले 4 साल से बायोगैस प्लांट के जरिए बिना LPG गैस के जीवनयापन कर रहे हैं. गोबर से गैस और जैविक खाद बनाकर ग्रामीण न केवल खाना पका रहे हैं बल्कि अतिरिक्त आय भी कमा रहे हैं, जिससे यह मॉडल अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन गया है.
खेती में पानी की बचत बहुत जरूरी है. इस लेख में जानें 5 आसान देसी तकनीकें जैसे खेत में मेड़ बनाना, मल्चिंग करना और बारिश का पानी रोकना. इन उपायों से मिट्टी में नमी बनी रहती है, फसल सुरक्षित रहती है और पानी की बचत होती है. किसान इन तरीकों से खेत की उपज बढ़ा सकते हैं.
बरेली के ICAR-IVRI संस्थान ने भारतीय पशुपालन के क्षेत्र में एक बड़ी मिसाल पेश की है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने आधुनिक 'ओपीयू-आईवीएफ' तकनीक का इस्तेमाल करके साहिवाल गाय के पाँच तंदुरुस्त बछड़ों को जन्म दिलाने में सफलता हासिल की है। यह तकनीक इसलिए खास है क्योंकि इसमें बिना किसी भारी इंजेक्शन या नुकसान के, ज्यादा दूध देने वाली गायों के औसा्इट को लैब में फर्टिलाइज किया जाता है.इस कामयाबी का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब हमारे किसानों को साहिवाल और थारपारकर जैसी शुद्ध देसी नस्लें मिलेंगी, जो न केवल सेहतमंद होंगी बल्कि दूध भी बंपर देंगी यह भारत को डेयरी सेक्टर में नये बदलाव से पशुपालको की खुशहाली के लिए उम्मीद की एक नई किरण लेकर आई है.
22 मार्च को हर साल विश्व जल दिवस के रूप में मनाया जाता है. जिसमें मीठे पानी के संरक्षण का संदेश दिया जाता है. अब जैसे-जैसे नई तकनीकें विकसित हो रही है, इसका फायदा बढ़ता जा रहा है. इसी क्रम में खेती में पानी बचाने की नई तकनीकों पर भी दुनिया का जोर बढ़ा है. सेंसर और AI आधारित सिंचाई सिस्टम अब मिट्टी की नमी और मौसम के डेटा के आधार पर तय करते हैं कि कब और कितना पानी देना है, जिससे पानी की बचत और बेहतर उत्पादन संभव हो रहा है.
आजकल गर्मी के मौसम में जब पारा 45 डिग्री के पार पहुंच जाता है, तो इंसान का बाहर निकलना दूभर हो जाता है. उन किसानों की हालत की कल्पना कीजिए जिनकी कमाई पान की कोमल बेलों पर टिकी है. पान का पत्ता इतना नाजुक होता है कि लू की एक ही लहर उसे पूरी तरह जलाकर राख कर देती है. बिहार के श्याम सुंदर ने एक खास तकनीक से एक देसी ढांचा खड़ा किया, जिससे न झुलसेंगे पत्ते, न होगी बीमारी और पान की पैदावार चार गुना बढ़ जाएगी.
CRISIL की नई रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में भारत की ट्रैक्टर बिक्री में 0–2% तक गिरावट संभव है. अल नीनो पैटर्न, TREM‑V एमिशन नॉर्म्स और स्थिर दाम बाजार को प्रभावित करेंगे, जबकि जीएसटी कटौती और पहली बार खरीदारों की बढ़त बाजार को सहारा दे सकती है.
जैसे मार्च और अप्रैल का महीना आता है, राजस्थान में सूरज आग उगलने लगता है. पारा 45 से 50 डिग्री के बीच पहुंच जाता है और इस भीषण गर्मी में सबसे बड़ी समस्या होती है खाने-पीने की चीजों को खराब होने से बचाना. शहरों में तो लोग महंगे एयर-कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर का सहारा लेते हैं, लेकिन गांवों में बिजली की कटौती और भारी-भरकम बिजली बिल लोगों की कमर तोड़ देते हैं. लेकिन क्या आप यकीन करेंगे कि बारां जिले के एक छोटे से गांव में एक किसान ने ऐसा 'अनोखा देशी फ्रिज' तैयार किया है, जिसमें न तो कोई तार है, न प्लग और न ही यह बिजली से चलता है.
राजस्थान के किसान संतोष कुमार ने बांस से कम लागत वाला देसी कोल्ड स्टोरेज तैयार किया है, जिसमें 25 मीट्रिक टन फसल 4 महीने तक सुरक्षित रहती है, बिना बिजली खर्च के.
गोंडा पुलिस ने अंतर-जिले ट्रैक्टर चोरों के गैंग का खुलासा किया और सरगना कुलदीप सिंह समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया. पुलिस ने 5 ट्रैक्टर बरामद किए. गैंग किसानों को फाइनेंस कर ट्रैक्टर खरीदवाता, 25 हजार रुपए महीने किराए पर लेता और फिर दूसरे जिलों में बेच देता था. नवाबगंज थाना क्षेत्र में हुई कार्रवाई से किसानों में राहत.
संसदीय समिति ने किसानों के लिए इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर (EV Tractor) पर सब्सिडी देने की सिफारिश की है, ताकि छोटे और सीमांत किसान इसे आसानी से खरीद सकें. साथ ही किसानों के बच्चों की शिक्षा में सहायता, गांवों में EV चार्जिंग सुविधा बढ़ाने और खेती में नई तकनीक अपनाने पर भी जोर दिया गया है, जिससे किसानों की आय बढ़ सके.
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