आगर-मालवा के महुडिया गांव के शिक्षित युवा किसान राकेश यादव ने आधुनिक तकनीकों के सहारे तरबूज की खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया. उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 2 बीघा भूमि पर पीले और लाल तरबूज की खेती कर उन्होंने करीब 8 लाख रुपये की आय अर्जित की, जिससे वे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं.
देश में गहराते जलसंकट और अल नीनो के कारण कम बारिश की आशंका के बीच 'पूसा हाइड्रोजेल' तकनीक किसानों के लिए बड़े काम की है. ग्वार फली से बना यह प्राकृतिक 'वॉटर बैंक' मिट्टी में मिलकर पानी को सोख लेता है और सूखे के समय सीधे पौधों की जड़ों को नमी देता रहता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक एकड़ में महज 1200 रुपये की लागत आती है और यह एक बार डालने पर खेतों में 5 साल तक काम करता है. धान, मक्का, गन्ना और सब्जियों जैसी ज्यादा पानी वाली फसलों में इसके इस्तेमाल से पानी की आधी बचत होती है.
आगर-मालवा की मेघा पाटीदार ने नमो ड्रोन दीदी योजना का लाभ लेकर अपनी पहचान ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में बनाई है. निःशुल्क ड्रोन और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वे किसानों के खेतों में नैनो यूरिया व कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं.
मंदसौर के किसान राजेश आर्य ने 1.50 लाख रुपये के अनुदान से स्ट्रॉ रीपर खरीदकर नरवाई को कमाई का साधन बना दिया है. वे फसल अवशेषों से भूसा तैयार कर किसानों की मदद कर रहे हैं, अतिरिक्त गेहूं लौटाते हैं और नरवाई जलाने की समस्या का पर्यावरण अनुकूल समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं.
दुर्ग की जागृति साहू ने ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के जरिए ड्रोन तकनीक अपनाकर किसानों की मदद शुरू की और महिलाओं को रोजगार के नए अवसर दिए. पहले 300 रुपये प्रतिदिन कमाने वाली महिलाएं अब 3000-4000 रुपये तक कमा रही हैं. जागृति की कहानी आत्मनिर्भर भारत और महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण है.
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले ने देश का पहला जिला बनकर इतिहास रच दिया है. यहां प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) के माध्यम से किसानों को ड्रोन स्प्रेयर सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.
जबलपुर के प्रगतिशील किसान अनिल पचौरी ने नर्मदा किनारे 10 एकड़ में 2 हजार नारियल के पेड़ लगाकर नारियल खेती की नई मिसाल कायम की है। वैज्ञानिक तकनीकों और निरंतर मेहनत के दम पर वे प्रतिदिन 300 से 400 नारियल का उत्पादन कर रहे हैं तथा सालाना 30 से 40 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं।
सोनीपत की सुदेश कुमारी ‘ड्रोन दीदी’ बनकर ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं. सरकारी योजना के तहत ड्रोन प्रशिक्षण और उपकरण मिलने के बाद वह खेतों में स्प्रे कर हर महीने अच्छी कमाई कर रही हैं और अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बना रही हैं.
मई महीने में ट्रैक्टर बिक्री और उत्पादन में बड़ा उछाल देखा गया है. खेती में मशीनों के बढ़ते उपयोग और खरीफ सीजन की तैयारी के चलते मांग तेजी से बढ़ी. उद्योग ने 21% की वृद्धि दर्ज करते हुए नया रिकॉर्ड बनाया. यह बदलाव भारतीय कृषि के आधुनिकीकरण और किसानों की बढ़ती जरूरतों को दर्शाता है.
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में टसर रेशम उत्पादन ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के लिए आजीविका का मजबूत साधन बन रहा है। रेशम विभाग के प्रयासों से सैकड़ों परिवारों को गांव में ही रोजगार और बेहतर आय मिल रही है, जिससे पलायन कम हुआ है और आर्थिक समृद्धि का नया रास्ता खुला है।
मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों की छत पर सोलर पैनल लगवाने के लिए आकर्षक सब्सिडी दी जा रही है. उपभोक्ताओं को आवेदन से लेकर योजना का लाभ लेने तक की पूरी जानकारी व्हाट्सऐप चैटबॉट ‘सोलर चाचा’ के माध्यम से आसानी से मिल रही है.
आज के समय में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन चुका है, जहां तालाबों और पोखरों में मछली पालन तेजी से बढ़ रहा है. बाजार में अच्छी नस्ल के मछली बीजों की भारी मांग और कम सप्लाई को देखते हुए, गांव के युवाओं और किसानों के लिए 'मत्स्य हैचरी' तकनीक कमाई का एक बेहतरीन जरिया साबित हो रही है. नदी-तालाबों से मिलने वाले प्राकृतिक बीज में परभक्षी मछलियों की मिलावट का खतरा रहता है, जबकि हैचरी में वैज्ञानिक तरीके से सिर्फ शुद्ध और उन्नत नस्ल का बीज तैयार किया जाता है. यहां रोहू और कतला जैसी मछलियों का बीज तैयार करके साल भर में लाखों रुपये का बिजनेस किया जा सकता है,
'वर्षा रोबोट' भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) द्वारा विकसित भारत का पहला ऐसा स्वदेशी कृषि रोबोट है, जो किसानों के लिए काफी फायदेमंद है. यह रोबोट सौर ऊर्जा और लिथियम-आयन बैटरी से चलता है, जिससे डीजल-पेट्रोल का खर्च बिल्कुल खत्म हो जाता है और एक बार चार्ज होने पर यह लगातार 6 घंटे काम करता है. इसमें लगे हाई-टेक कैमरे और रोबोटिक नोजल सिर्फ खरपतवार पर ही सटीक दवा छिड़कते हैं, जिससे 25% रसायनों की बचत होती है. साथ ही, यह खेतों में एकदम सही दूरी और गहराई पर बीजों की बुवाई भी करता है. इसे 1 किलोमीटर दूर से रिमोट द्वारा कंट्रोल किया जा सकता है.
मध्यप्रदेश का प्रसिद्ध ‘बंगला पान’ अब देश की सीमाओं से निकलकर विदेशों में भी अपनी पहचान बना रहा है. पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित कई देशों में इसकी मांग बढ़ी है. पान की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार ने 10 जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की है.
गुजरात के राजकोट में मिर्च किसान पारंपरिक बुवाई की जगह वैज्ञानिक नर्सरी तकनीक अपना रहे हैं. नर्सरी विकास, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग पर सरकारी सहायता मिलने से फसल प्रबंधन बेहतर हो रहा है. इससे उत्पादन बढ़ाने और नुकसान कम करने में मदद मिल रही है.
जौनपुर के किसान बृजेश कुमार पटेल ने महज 10 बिस्वा जमीन पर वैज्ञानिक तरीके से सब्जी खेती कर लाखों की आय अर्जित की है. आधुनिक तकनीक और उद्यानिकी खेती अपनाकर उन्होंने यह साबित किया कि छोटी जोत में भी मेहनत और नई सोच से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है.
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