Gorakhpur News: स्नातक स्तर की शिक्षा प्राप्त करने वाले राजू सिंह बताते हैं कि मशीन से शहद सीधे छत्ते से निकलने और हाथ न लगने के कारण 100 प्रतिशत शुद्ध रहता है. जहां पुराने तरीकों में शहद निकालने में घंटों का समय और कई मजदूरों की जरूरत पड़ती थी, लेकिन, इस नई तकनीक से एक किसान मात्र 5 से 10 मिनट में अकेले शहद निकाल सकता है.
भारत के गांवों और शहरों में अधिकतर पशु खुले में चरते हैं. इस दौरान सबसे बड़ी समस्या यह आती है कि वे अनजाने में घास के साथ लोहे की कीलें, तार या नुकीली चीजें निगल लेते हैं, जिससे उनके पेट में जख्म हो जाते हैं और उनकी मौत तक हो जाती है. साथ ही, खुले मैदानों में जहरीले सांपों का डर और पशुओं के खो जाने की चिंता हमेशा बनी रहती है. इन गंभीर समस्याओं को देखते हुए तमिलनाडु के एक किसान ने मात्र 78 रुपये में 'मैग्नेटिक बेल कॉलर' बनाया है.
UP News: सरकार की ओर से इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक की सौ प्रतिशत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे अत्याधुनिक लैब और परीक्षण सुविधाएं विकसित की जा सकें. बता दें कि वर्ष 2070 तक देश को नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करना है.
साल 2026 में भारतीय खेती में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं. कम खर्च, आसान संचालन, सरकारी मदद और साफ पर्यावरण के कारण किसान डीज़ल ट्रैक्टर छोड़कर इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर अपना रहे हैं.
RM ड्रिप एंड स्प्रिंकलर्स सिस्टम्स ने महाराष्ट्र के नासिक में 12,000 टन प्रति वर्ष क्षमता वाली नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को मंजूरी दी है. इस विस्तार से कंपनी की कुल प्रोडक्शन क्षमता में लगभग 50% की बढ़ोतरी होगी और सिंचाई, इंफ्रास्ट्रक्चर व इंडस्ट्रियल सेगमेंट में ग्रोथ को मजबूती मिलेगी.
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब माइक्रोसॉफ्ट समेत बड़ी कंपनियां कार्बन हटाने पर खर्च बढ़ा रही हैं. दरअसल ये प्रोजेक्ट हवा से कार्बन डाइऑक्साइड को हटाने के लिए बनाए गए हैं. रेडमंड की सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी साल 2030 तक कार्बन-नेगेटिव बनने के अपने लक्ष्य की तरफ काम कर रही है. यह प्रोजेक्ट कपास की फसल के कचरे को बायोचार में बदल देगा.
सर्दियों में ट्रैक्टर की देखभाल करना बहुत जरूरी है. जानें कैसे सही इंजन ऑयल, बैटरी, फ्यूल, टायर और कूलेंट की जांच करके आप अपने ट्रैक्टर को फिट रख सकते हैं. ये आसान टिप्स किसानों के लिए सर्दियों में ट्रैक्टर को लंबे समय तक बेहतर चलाने में मदद करेंगे.
UP News: यूपी सिंचाई विभाग प्रदेश में माइक्रो इरिगेशन के जरिये जल उपयोग दक्षता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एमसीएडी के तहत क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण अपना रहा है. जिसके तहत गोरखपुर और संतकबीर नगर में 4 क्लस्टरों में पीपीआईएन तकनीकी के माध्यम से पायलट प्रोजेक्ट निर्मित हो रहे हैं.
ICAR ने CRISPR-Cas तकनीक से भारत की पहली जीनोम-एडिटेड चावल की किस्में DRR राइस 100 (कमला) और पूसा DST राइस 1 विकसित की हैं. ये किस्में ज्यादा उपज, कम पानी की जरूरत और जलवायु परिवर्तन के प्रति बेहतर सहन करने की क्षमता देती हैं.
सोनालिका ट्रैक्टर 30 साल पूरे कर रहा है, छोटे शहर होशियारपुर से शुरू होकर आज विश्व स्तर पर किसानों का भरोसेमंद साथी बन चुका है. ‘जीतने का दम’ के विश्वास के साथ, सोनालिका ने मजबूत, भरोसेमंद और किसानों के लिए विशेष ट्रैक्टर बनाए. यह भारत का नंबर 1 एक्सपोर्ट ब्रांड और विश्व में मान्यता प्राप्त ट्रैक्टर निर्माता है.
इस साल सपोर्टिव पॉलिसी उपायों की वजह से शानदार ग्रोथ देखने को मिली है, जिसमें ट्रैक्टर पर GST में कमी शामिल है. मुख्य बाजारों में राज्य-स्तरीय सब्सिडी सपोर्ट ने अफोर्डेबिलिटी में सुधार किया है और खरीदारी के फैसले तेजी से लेने के लिए प्रोत्साहित किया है, जिससे साल भर डिमांड को और बढ़ावा मिला है.
इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर बाजार का आकार 2025 तक करीब 10 अरब डॉलर तक पहुंचने गया है. जबकि साल 2034 तक 9.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. जबकि 2034 तक बाजार में 29.3 फीसदी तक की वृद्धि होने का अनुमान है. रिसर्च रिपोर्ट की मानें तो इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खेती से जुड़ा वह व्हीकल है जो पारंपरिक डीजल इंजन के बजाय बिजली का प्रयोग करता है.
एक गन्ना किसान ने नए तरीके को अपनाकर अपनी पैदावार दोगुनी कर दी है. उनके इस नए तरीके के लिए, इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) ने पिछले महीने उन्हें "इनोवेटिव फार्मर" सर्टिफिकेट से सम्मानित किया है. आइए जानते हैं कौन सा है ये तरीका और क्या हैं इसके फायदे.
नागालैंड के फेक जिले के किसान सबयुविजो जुडो ने देसी जुगाड़ से सोलर ड्रायर बनाकर खेती की बड़ी समस्या का समाधान निकाला है. महज 5–8 हजार रुपये की लागत वाला यह ड्रायर सब्जी, फल और मसालों को सुरक्षित तरीके से सुखाकर किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रहा है.
डिजिटल ग्रीन और सिस्को इंडिया ने किसानों के लिए AI आधारित FarmerChat ऐप लॉन्च किया है. यह ऐप फसल प्रबंधन, कीट पहचान और मौसम के अनुसार खेती की आसान सलाह देता है, जिससे किसानों की पैदावार और आमदनी बढ़ेगी.
एग्री-वोल्टिक सिस्टम से किसान एक ही खेत में फसल उगाकर और सोलर पावर से बिजली बनाकर दोहरी कमाई कर सकते हैं. जानिए कैसे यह तकनीक प्रति हेक्टेयर 8 लाख रुपये तक आमदनी दे सकती है.
वाराणसी स्थित IIVR ने 8 साल की मेहनत के बाद बासमती खुशबू वाली तोरई विकसित की है. VRSG 7-17 नाम की यह किस्म 55–60 दिनों में तैयार होती है और किसानों को ज्यादा मुनाफा देगी.
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