बिहार सरकार ने किसानों के लिए कृषि ऐप लॉन्च किया है, जिससे वे घर बैठे खाद की उपलब्धता, नजदीकी दुकानों और स्टॉक की जानकारी ले सकते हैं. यह ऐप कालाबाजारी रोकने के साथ किसानों को डिजिटल सुविधाएं और खेती से जुड़ी अहम जानकारी भी प्रदान करेगा.
ICAR का बनाया हुआ सोलर पावर्ड यूनिवर्सल इंसेक्ट ट्रैप किसानों के लिए बिना केमिकल कीट नियंत्रण का नया समाधान है. यह तकनीक 24x7 काम करती है और फसलों के साथ अनाज भंडारण को भी सुरक्षित बनाती है.
ट्रैक्टर एक्सपोर्ट में नंबर 1 ब्रांड सोनालीका ट्रैक्टर्स ने वर्ष 2026 में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. यह सफलता दिखाती है कि कंपनी ने हमेशा अनुशासन बनाए रखा, किसानों को प्राथमिकता दी और बेहतर तकनीक वाले मजबूत ट्रैक्टर उपलब्ध कराए.
मलिहाबाद में “कवच मैंगो फ्रूट प्रोटेक्शन बैग” तकनीक किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है. यह बैग आम को कीटों, धूल और धूप से बचाकर उसकी गुणवत्ता बढ़ाता है. साथ ही “स्वीट सैफरन” प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को प्रीमियम बाजार से जोड़कर बेहतर दाम दिलाने में मदद कर रहा है.
गुजरात के वलसाड जिले के एक किसान ने ग्राफ्टिंग तकनीक से सिर्फ 12 फीट ऊंचे एक पेड़ पर 80 किस्मों के आम उगाकर अनोखी मिसाल पेश की है. करीब 5 साल की मेहनत से हासिल इस उपलब्धि में फिलहाल 60 से ज्यादा किस्में सुरक्षित हैं, जिनमें कई पर फल भी आ चुके हैं. किसान का लक्ष्य एक ही पेड़ पर 100 किस्मों के आम उगाना है, जिससे यह प्रयोग देशभर में चर्चा का विषय बन गया है.
पराली से बायो-बिटुमेन बनाने की नई तकनीक किसानों की आय बढ़ाने, प्रदूषण कम करने और आयात घटाने में मदद करेगी. यह पहल आत्मनिर्भर भारत और वेस्ट-टू-वेल्थ की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.
मुजफ्फरपुर की शाही लीची के लिए नई “नॉन-वॉवेन बैग” तकनीक से फल की क्वालिटी, मिठास और उत्पादन बढ़ेगा. इससे किसानों को बेहतर दाम मिलने और आय में वृद्धि की उम्मीद है.
गुजरात सरकार बायो-CNG प्लांट्स के जरिए डेयरी सेक्टर को स्वच्छ ऊर्जा और किसानों की आय बढ़ाने का बड़ा माध्यम बना रही है. गोबर से CNG, जैविक खाद और रोजगार सृजन के जरिए यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है.
पंजाब में खेती को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है, जहां एआई और डेटा आधारित फैसलों पर जोर दिया जा रहा है. 100 स्मार्ट वेदर स्टेशनों और बड़े स्किलिंग प्रोग्राम के जरिए किसानों को सटीक जानकारी और तकनीकी सहायता देने की तैयारी है.
ICAR‑IIMR द्वारा विकसित गन्ना–मक्का सहफसली खेती मॉडल किसानों के लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है. इससे गन्ने की उपज 28% और मक्का उत्पादन 3.5–5 टन/हेक्टेयर बढ़ा है, जबकि मक्का की लागत 75% तक घट गई. यह तकनीक इथेनॉल प्लांट्स को सालभर कच्चा माल उपलब्ध कराते हुए किसानों की कमाई में 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक अतिरिक्त बढ़ोतरी करती है.
IIT रोपड़ का ANNAM.AI सेंटर भारत में खेती में नई AI क्रांति ला रहा है. 100 मुफ्त स्मार्ट मौसम स्टेशन किसानों को सही मौसम जानकारी देंगे, ताकि फसल और अधिक सुरक्षित और उपजाऊ हो. साथ ही, 10,000 छात्रों और ग्रामीण युवाओं को AI ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे खेती में तकनीक का सही उपयोग और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.
बुधनी में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसान मेला और राष्ट्रीय कृषि मशीनरी प्रदर्शनी में कहा कि बुधनी अब आधुनिक खेती और मशीनीकरण का आदर्श केंद्र बनेगा. किसानों को इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर, ड्रोन, रोबोट और नई तकनीक के माध्यम से अधिक आय और लाभकारी खेती का अवसर मिलेगा. ‘उदय एक्सपो’ से हर साल किसानों को प्रशिक्षण और जानकारी मिलेगी.
पटना के अनुभवी किसान अमरजीत कुमार सिन्हा ने आम और अमरूद जैसे रसीले फलों को 'फल मक्खी' के जानलेवा हमले से बचाने के लिए एक बेहद सस्ता और 'असरदार' देसी जुगाड़ निकाला है. अक्सर ये मक्खियां फलों को अंदर से सड़ा देती हैं, जिससे बागवानों को 90 फीसदी तक का भारी नुकसान उठाना पड़ता है. इस समस्या के 'मुकम्मल' समाधान के लिए उन्होंने पके हुए केलों और बेकार प्लास्टिक की बोतलों से एक 'कीट जाल' तैयार किया है जिससे फल मक्खी खिंची चली आती हैं और जाल में फंसकर मर जाती हैं.
मोतीपुर गांव ने आत्मनिर्भरता की अनोखी मिसाल पेश की है, जहां 120 परिवार पिछले 4 साल से बायोगैस प्लांट के जरिए बिना LPG गैस के जीवनयापन कर रहे हैं. गोबर से गैस और जैविक खाद बनाकर ग्रामीण न केवल खाना पका रहे हैं बल्कि अतिरिक्त आय भी कमा रहे हैं, जिससे यह मॉडल अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन गया है.
खेती में पानी की बचत बहुत जरूरी है. इस लेख में जानें 5 आसान देसी तकनीकें जैसे खेत में मेड़ बनाना, मल्चिंग करना और बारिश का पानी रोकना. इन उपायों से मिट्टी में नमी बनी रहती है, फसल सुरक्षित रहती है और पानी की बचत होती है. किसान इन तरीकों से खेत की उपज बढ़ा सकते हैं.
बरेली के ICAR-IVRI संस्थान ने भारतीय पशुपालन के क्षेत्र में एक बड़ी मिसाल पेश की है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने आधुनिक 'ओपीयू-आईवीएफ' तकनीक का इस्तेमाल करके साहिवाल गाय के पाँच तंदुरुस्त बछड़ों को जन्म दिलाने में सफलता हासिल की है। यह तकनीक इसलिए खास है क्योंकि इसमें बिना किसी भारी इंजेक्शन या नुकसान के, ज्यादा दूध देने वाली गायों के औसा्इट को लैब में फर्टिलाइज किया जाता है.इस कामयाबी का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब हमारे किसानों को साहिवाल और थारपारकर जैसी शुद्ध देसी नस्लें मिलेंगी, जो न केवल सेहतमंद होंगी बल्कि दूध भी बंपर देंगी यह भारत को डेयरी सेक्टर में नये बदलाव से पशुपालको की खुशहाली के लिए उम्मीद की एक नई किरण लेकर आई है.
22 मार्च को हर साल विश्व जल दिवस के रूप में मनाया जाता है. जिसमें मीठे पानी के संरक्षण का संदेश दिया जाता है. अब जैसे-जैसे नई तकनीकें विकसित हो रही है, इसका फायदा बढ़ता जा रहा है. इसी क्रम में खेती में पानी बचाने की नई तकनीकों पर भी दुनिया का जोर बढ़ा है. सेंसर और AI आधारित सिंचाई सिस्टम अब मिट्टी की नमी और मौसम के डेटा के आधार पर तय करते हैं कि कब और कितना पानी देना है, जिससे पानी की बचत और बेहतर उत्पादन संभव हो रहा है.
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