एग्रीवोल्टाइक तकनीक से किसान एक ही खेत में फसल उगाने के साथ सौर बिजली भी बना सकेंगे. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छोटे और सीमांत किसानों के हित में इस तकनीक को बढ़ावा देने पर जोर दिया. सरकार पीएम कुसुम योजना के अगले चरण में बड़ा अभियान शुरू करने की तैयारी कर रही है, जिससे किसानों की आय और ग्रामीण रोजगार बढ़ने की उम्मीद है.
सोनालीका ट्रैक्टर्स ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में 34,000 वर्ग फीट खेत में हिंदी शब्द ‘दम’ का विशाल स्वरूप बनाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया है. 125 फीट ऊंची और 272 फीट चौड़ी इस आकृति को दो गोल्ड सीरीज ट्रैक्टरों की मदद से तैयार किया गया. वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया ने इस उपलब्धि को मान्यता दी है.
Mango Production: अवध आम उत्पादक बागवानी समिति के महासचिव उपेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि, इस अधुनिक मशीन से प्रदेश के लाखों किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा. जहां एक तरफ पैदावार बढ़ेगी, वहीं किसानों की आमदनी भी डबल होगी. उन्होंने बताया कि इस खास मशीन के प्रयोग से आम के पेड़ सुरक्षित रहेंगे, वहीं, आम में ना तो कीड़े लगेंगे. ना ही उनके साइज छोटे होंगे.
भारतीय स्टार्टअप Agrograde ने सुपारी की छंटाई के लिए देश की पहली AI आधारित मशीन पेश की है. मंगलुरु में लगी यह मशीन एक घंटे में करीब एक टन सुपारी छांट सकती है. इसकी मदद से खराब सुपारी की पहचान, गुणवत्ता की जांच और छंटाई आसान होगी. जानिए यह तकनीक कैसे काम करती है और सुपारी कारोबारियों को इससे क्या फायदा मिलेगा.
उत्तर प्रदेश में आकाशीय बिजली से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए योगी सरकार ने नई पहल की है. IITM पुणे के सहयोग से राज्य के पांच जिलों में बिजली का पता लगाने वाले सेंसर लगाए जा रहे हैं. इनकी मदद से समय रहते चेतावनी जारी करने और लोगों को सतर्क करने में मदद मिलेगी.
वाराणसी के भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR) में जीनोम एडिटिंग प्रयोगशाला, BSL-3 लैब और स्पीड ब्रीडिंग सुविधा से जुड़े बड़े कदम उठाए गए हैं. ICAR महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट के दौरे के दौरान इन सुविधाओं का शुभारंभ किया गया.
कोंडागांव के सुरेश देवांगन ने गांव-गांव कृषि उपकरण किराये पर देने से शुरुआत की और आज ‘किसान मितान एग्रो’ के जरिए करीब 7 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार खड़ा कर लिया है. PMEGP के तहत 50 लाख रुपये का ऋण और 12.50 लाख रुपये की सब्सिडी मिली. आज उनकी इकाई में 25 लोगों को रोजगार मिल रहा है.
हैदराबाद स्थित आईआईटी में FlySakhi कार्यक्रम के पहले बैच की 25 ग्रामीण महिलाओं ने ड्रोन ट्रेनिंग पूरी की. WCOOPEF, CNRI, TiHAN-IIT हैदराबाद की इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को कृषि ड्रोन तकनीक में प्रशिक्षित कर ड्रोन सेवा उद्यमी बनाना है.
कृषि और खाद्य क्षेत्र की कंपनी Nutrifresh ने वित्त वर्ष 2025-26 में 219.3 करोड़ रुपये का कारोबार किया, जो पिछले साल से 51 फीसदी अधिक है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 में 400 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य रखा है. जानिए आधुनिक खेती, 90 करोड़ रुपये के निवेश, नए खेतों और 25 हजार किसानों को जोड़ने की योजना के बारे में.
MP में 12.40 करोड़ रुपये की लागत से सहकारी क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला तैयार हो गई है. यहां दूध और दुग्ध उत्पादों की 100 से अधिक मानकों पर जांच होगी. पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटिक्स, हेवी मेटल्स, यूरिया और अन्य मिलावटों का भी पता लगाया जा सकेगा.
महिंद्रा ने नई MaxSeeder जीरो-टिल सीडिंग मशीन का उत्पादन शुरू कर दिया है. इस मशीन से किसान धान की पराली हटाए बिना गेहूं समेत कई फसलों की बुवाई कर सकेंगे. इससे बीज और खाद की बचत होगी. 35 एचपी या उससे अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर से चलने वाली यह मशीन समय, डीजल और मजदूरी का खर्च घटाने में मदद कर सकती है.
KhetiBuddy के CEO विनय नायर ने बताया कि कैसे AI और आधुनिक तकनीक किसानों की मदद कर सकती है. KhetiBuddy खेतों की जानकारी, मौसम, मिट्टी और फसल की गुणवत्ता के आधार पर किसानों को बेहतर सलाह देने का काम करती है. इससे कृषि कारोबार को फसल की सही कीमत तय करने और किसानों को उनकी मेहनत का उचित दाम दिलाने में मदद मिल सकती है.
UP News: डिजिटल केसीसी के मामले में उत्तर प्रदेश ने देश के दूसरे राज्यों को काफी पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है. करीब 95 हजार आवेदन के साथ कर्नाटक दूसरे और लगभग 42 हजार के साथ हरियाणा तीसरे स्थान पर है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते फरवरी में नाबार्ड द्वारा संचालित डिजिटल केसीसी सुविधा का शुभारंभ किया, जिसके बाद प्रदेश में इस पहल ने रफ्तार पकड़ी.
पुणे स्थित आघारकर रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने गेहूं की चार नई किस्में MACS महाबल, MACS शिवनेरी, MACS विंध्य और MACS ताम्हिनी विकसित की हैं. इन किस्मों का लक्ष्य देर से बुवाई और बदलते तापमान जैसी परिस्थितियों में भी गेहूं की बेहतर पैदावार बनाए रखना है.
फरीदकोट में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं. जिले में किसानों को 3500 से ज्यादा क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट मशीनें बांटी गई हैं और 171 नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है. पिछले साल पराली जलाने की घटनाओं में 76 फीसदी की कमी दर्ज हुई थी.
नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत मुंगेली की गोदावरी साहू किसानों के खेतों में ड्रोन से नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं। ड्रोन से एक दिन में 20-25 एकड़ तक छिड़काव हो रहा है, जिससे किसानों का समय और लागत बच रही है.
अयोध्या के किसान राज बहादुर ने गन्ने की खेती को सस्ता और आसान बनाने के लिए मात्र 6,000 रुपये में बिजली से चलने वाला 'शुगरकेन सीड कटर' बनाया है. पहले हाथ वाली मशीन से गन्ने की 'आंख' य़ानि बड निकालने में महिलाओं के हाथो में भारी दर्द होता था और खर्च भी ज़्यादा था,नई मशीन से 13,000 बड निकालने का खर्च 1500 रुपये से घटकर सिर्फ 650 रुपये रह गया है.
सोनालीका ट्रैक्टर्स ने बिक्री के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है. कंपनी ने अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच सिर्फ 6 महीनों में 1 लाख ट्रैक्टर बेचने का आंकड़ा पार कर लिया. त्योहारी सीजन से पहले कंपनी ने होशियारपुर प्लांट में 19 हजार ट्रैक्टरों का रिकॉर्ड मासिक उत्पादन किया है. बढ़ती मांग को देखते हुए डीलर नेटवर्क भी मजबूत किया गया है.
भारत और नीदरलैंड कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं. दोनों देश किसानों के लिए AI आधारित समाधान, नई बीज तकनीक और जलवायु अनुकूल खेती पर मिलकर काम करेंगे. डच राज्य सचिव सिल्वियो एर्केंस ने कहा कि तकनीकी सहयोग से किसानों की आय बढ़ाने और खेती को जलवायु बदलाव व वैश्विक चुनौतियों के लिए मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है.
बड़वानी की प्रमिला पाटीदार ने ₹3.5 करोड़ के निवेश से गंगा कावेरी इंडस्ट्रीज शुरू की.एमएसएमई प्रोत्साहन योजना के तहत 48% तक अनुदान मिला. कॉर्न फ्लेक्स उत्पादन से 20–25 लोगों को रोजगार और स्थानीय मक्का किसानों को बाजार मिला.
रेवापुर की कविता चौहान ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ₹10 हजार के ऋण से ऑनलाइन और बैंक बीसी दुकान शुरू की. इसके बाद ‘नमो ड्रोन’ प्रशिक्षण लेकर 2 हजार एकड़ से अधिक खेतों में ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव किया और ₹5.81 लाख से ज्यादा की आय अर्जित कर ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में पहचान बनाई.
शोधकर्ताओं ने SICKLE नाम का नया मल्टी-सैटेलाइट डेटासेट विकसित किया है, जिसकी मदद से AI मॉडल फसलों की पहचान, बुवाई-कटाई की अवधि और पैदावार का अनुमान लगाने में सक्षम हो सकते हैं. इसमें करीब 2.09 लाख सैटेलाइट इमेज और 388 कृषि प्लॉट से जुटाई गई जानकारी शामिल है.
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