Mango Cultivation: इस मौके पर वैज्ञानिकों और किसानों को संबोधित करते हुए मनोज कुमार सिंह ने बागवानी क्षेत्र के योगदान पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश की कुल कृषि उत्पाद में 30 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है, और राज्य में उपलब्ध अलग-अलग प्रकार की मिट्टी और जलवायु परिस्थितियों के कारण यहां से फलों के निर्यात की अपार संभावनाएं मौजूद हैं.
गाजर घास किसानों की फसल का दुश्मन है. जहां इंसानों की भी पहुंच नहीं है वहां तक इसकी पहुंच हो चुकी है. अब इसके खात्मे में के लिए जबलपुर स्थित खरपतवार अनुसंधान निदेशालय ने एक कीट की खोज की है जिससे इसका नियंत्रण आसानी से होगा.
सीएम फडणवीस ने कहा कि NDDB ने दूध में यूरिया समेत दूसरी मिलावट पकड़ने के लिए टेस्ट स्ट्रिप्स बनाई हैं, लेकिन निगरानी और रोकथाम को और मजबूत करने के लिए अब ज्यादा आधुनिक सिस्टम की जरूरत है.
जयपुर में 23 से 25 मई तक ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट-2026 आयोजित होगा, जिसमें किसानों, निवेशकों और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया जाएगा. कार्यक्रम का फोकस कृषि तकनीक, निवेश और प्रसंस्करण के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर रहेगा.
Mahindra EPC Irrigation Ltd. ने FY26 में शानदार प्रदर्शन किया. कंपनी की आय 14.5% बढ़कर ₹315.79 करोड़ पहुंची, जबकि मुनाफा 76% बढ़ा. मुश्किल हालात के बावजूद बेहतर रणनीति और लागत नियंत्रण से कंपनी ने मजबूत ग्रोथ हासिल की और भविष्य के लिए अच्छी संभावनाएं बनाई हैं.
असम के रहने वाले गोपेन राय ने छोटे किसानों की बड़ी समस्या का एक बहुत ही सस्ता और असरदार हल निकाला है. पारंपरिक तरीके से अनाज की सफाई यानि ओसावनी करने में बहुत मेहनत लगती है और किसान को हवा चलने का इंतज़ार करना पड़ता है, जिससे वक्त और सेहत दोनों का नुकसान होता है. गोपेन ने म कम लागत में एक लकड़ी का ओसावनी यंत्र तैयार किया है, जो बिजली के पंखे की मदद से चलता है.
गन्ने की खेती में उत्तर प्रदेश का देश में बड़ा योगदान है, इसलिए विभाग किसानों को बेहतर सुविधा देने के लिए लगातार काम कर रहा है. इस नए मोबाइल ऐप से किसानों को अच्छी क्वालिटी वाले बीज समय पर मिल सकेंगे.
मध्य प्रदेश के रायसेन में आयोजित किसान मेले में ‘किसान मित्र छड़ी’ लॉन्च की गई है, जो किसानों को रात के अंधेरे में भी सांप और जहरीले जीवों से सतर्क करेगी. यह IoT और वाइब्रेशन तकनीक पर आधारित डिवाइस 100 मीटर तक के दायरे में खतरे का संकेत देती है. सेंसर और इंफ्रारेड तकनीक से लैस यह छड़ी कंपन के जरिए अलर्ट देती है, जिससे खेतों में काम करने वाले किसानों की सुरक्षा बढ़ेगी.
अब बिना बिजली के भी फलों को सुखाया जा सकेगा, जिससे उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ेगी. जियोथर्मल तकनीक की मदद से फल लंबे समय तक सुरक्षित रहेंगे और खराब नहीं होंगे. इससे किसानों को नुकसान कम होगा और उन्हें बेहतर दाम मिलेगा. यह नई तकनीक खेती को आसान और टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा कदम है.
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