महाराष्ट्र सरकार खेती में AI को नई ताकत देने की दिशा में आगे बढ़ रही है. मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि राज्य में AI आधारित सलाह, डेटा सिस्टम और ट्रेसबिलिटी से किसानों की आय और खेती की स्थिरता मजबूत होगी. इसके लिए उन्होंने वैश्विक निवेशकों को साझेदारी का न्योता दिया.
हिमाचल, कश्मीर और उत्तराखंड के सेब बागवानों के लिए 'एप्पल रूट बोरर' सबसे बड़ा दुश्मन रहा है. यह कीट पेड़ों को अंदर से खोखला कर देता है और इसका लार्वा चक्र 3 साल तक चलता है, जिससे करीब 35 लाख पेड़ों पर हमेशा खतरा बना रहता है. पारंपरिक तौर पर किसान इसे मारने के लिए महंगे और जहरीले कीटनाशकों का उपयोग करते थे, जो मिट्टी और पर्यावरण के लिए हानिकारक थे.
ज़हीराबाद स्थित महिंद्रा ट्रैक्टर प्लांट ने बीएआईएफ और अन्य गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से रेनजिंथल प्राथमिक विद्यालय, हाई स्कूल और उर्दू माध्यम स्कूल में व्यापक मरम्मत एवं नवीनीकरण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया है.
लीची की नाजुक प्रकृति के कारण 30-40 फीसदी फसल तुड़ाई के बाद खराब हो जाती थी और किसान रसायनों पर निर्भर थे. लेकिन अब आधुनिक सल्फेट-मुक्त तकनीक से लीची 7-8 दिनों तक ताजा रहती है, जिससे नुकसान कम होता है और उपभोक्ताओं को हेल्दी फल मिलता है. एक स्टार्टअप सुपरप्लम सीधे बगीचों से बेहतर दाम पर खरीद कर बिचौलियों को खत्म कर रहा है. किसानों को गुणवत्ता के आधार पर प्रीमियम दाम, प्री-बुकिंग और पारदर्शी डिजिटल भुगतान की सुविधा मिल रही है.
इस समय आम के बाग में बौर आ रहे हैं. आने वाले दिनों में पेड़ों पर फल बनेंगे, लेकिन अक्सर कीटों, बीमारियों और तेज धूप की वजह से फलों पर दाग-धब्बे पड़ जाते हैं और वे बेरंग दिखने लगते हैं, जिसके कारण बाजार में किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम नहीं मिल पाता. इस समस्या का सबसे आसान समाधान है 'फ्रूट बैगिंग', जो आम को जहरीले कीटनाशकों से बचाकर उसे पूरी तरह सुरक्षित और जहर-मुक्त बनाती है.
तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय को गन्ना खेती की एक अहम मशीन पर 20 साल का पेटेंट मिला है. यह सिंगल बड सेट कटर मशीन रोपाई की लागत और समय दोनों घटाने का दावा करती है. ट्रायल में इसकी क्षमता और बचत के आंकड़े चौंकाने वाले रहे हैं. पढ़ें पूरी खबर...
कृषि में AI आधारित सलाह किसानों के लिए मददगार बन रही है, लेकिन इसकी जवाबदेही सबसे बड़ा सवाल बन गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि बिना नियम और निगरानी के एग्रीटेक कंपनियों की सलाह फसल और किसानों की आय के लिए जोखिम पैदा कर सकती है.
कभी सूखे में पूरी फसल गंवाने वाले एक भारतीय उद्यमी ने हार मानने के बजाय खेती का तरीका बदलने का फैसला किया. अब वही अनुभव AI आधारित हाइड्रोपॉनिक खेती में 214 करोड़ रुपये के बड़े निवेश की वजह बनकर उभरा है. पढ़ें पूरी खबर...
नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने PowerXChange Innovations Private Limited के PowerXchange ऐप का प्रदर्शन देखा. यह ऐप India Energy Stack पहल के तहत किसानों और रूफटॉप सोलर उपभोक्ताओं को अपनी अतिरिक्त बिजली सीधे बेचने और अतिरिक्त आय कमाने का मौका देता है. लॉन्च इवेंट Bharat Mandapam में आयोजित किया गया.
भारत‑VISTAAR भारत सरकार का किसान‑केंद्रित, एआई‑आधारित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है, जो अलग‑अलग सरकारी और वैज्ञानिक स्रोतों को जोड़कर किसानों तक भरोसेमंद जानकारी पहुंचाएगा.
IIT रोपड़ में स्थापित ANNAM.AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान विकसित कर रहा है. यह पहल शिक्षा मंत्रालय की राष्ट्रीय AI रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य मिट्टी की सेहत, सिंचाई, रोग पहचान और सप्लाई चेन जैसी चुनौतियों का समाधान करना है. पहले चरण में पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा पर फोकस किया गया है.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीआईएई की नई कॉटन पिकर मशीन का सजीव प्रदर्शन किया. यह मशीन कपास किसानों के लिए बड़े बदलाव की सौगात है. अब तुड़ाई का काम मिनटों में पूरा होगा, श्रम लागत कम होगी और फसल की गुणवत्ता बनी रहेगी. इससे किसानों की मेहनत आसान और खेती अधिक लाभकारी बनेगी.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत में खेती को स्मार्ट और मॉडर्न बना रहा है. डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन, किसान ई-मित्र, नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम और भारत-विस्तारा जैसी पहल किसानों को समय पर और सही सलाह दे रही हैं. इससे पैदावार बढ़ रही है, नुकसान कम हो रहा है और फसल बीमा ज़्यादा तेज़ और ट्रांसपेरेंट हो रहा है.
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा से कृषि और बागवानी को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसको लेकर सरकार इस जिले में 'केला टिशू कल्चर लैब' की स्थापना करने जा रही है, जिससे जिले के किसानों को उन्नत किस्म के पौधे मिलेंगे.
भोपाल के किसान मदन मोहन पाटीदार ने ICAR-CIAE द्वारा विकसित फ्रूट-कम-वेजिटेबल ग्रेडर से 250 टन प्याज की ग्रेडिंग कर 63% तक लागत बचाई और 7.5 लाख रुपये का अतिरिक्त मुनाफा कमाया. यह मशीन समय, श्रम और खर्च बचाने के साथ बेहतर गुणवत्ता वाली ग्रेडेड उपज से बाजार में ऊंची कीमत दिलाने में मददगार साबित हुई.
महाराष्ट्र के अकोला जिले में प्रगतिशील किसान दिलीप ठाकरे ने सघन कपास बुवाई पद्धति और आधुनिक कॉटन पिकिंग मशीन के जरिए घटती उत्पादकता और बढ़ते मजदूर संकट का प्रभावी समाधान पेश किया है. ‘अकोला पैटर्न’ के तहत प्रति एकड़ 15–18 क्विंटल उत्पादन के साथ यंत्रीकरण से लागत घटाने और गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में यह मॉडल देशभर में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.
मछली पालन में सबसे बड़ी आफत तब आती है जब तालाब में ऑक्सीजन कम हो जाती है, जिससे रात भर में लाखों की मछलियां मर सकती हैं. खासकर सर्दियों में ऑक्सीजन गिरने से मछलियां बढ़ना बंद हो जाती हैं. बाज़ार में मिलने वाले पैडल-व्हील और बिजली वाले एरिएटर इतने महंगे हैं कि छोटा किसान उन्हें खरीदने की सोच भी नहीं पाता, और भारी बिजली बिल का डर अलग से सताता है. इसी लाचारी के कारण किसान हर साल भारी नुकसान झेलते हैं. इस समस्या को लुधियाना के किसान जसवीर सिंह औजला ने अपने 'देसी एरिएटर' से खत्म कर दिया है.
श्वेत क्रांति के लिए पहचानी जाने वाली गुजरात के आणंद की धरती से डेयरी क्षेत्र में एक नई डिजिटल क्रांति का आगाज़ हुआ है. दरअसल, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 'अमूल एआई' का लोकार्पण किया है.
पुणे के सीएनएच प्लांट की बनी मार्डन मशीनें, विशेष रूप से गन्ना हार्वेस्टर और बेलर्स, खेती की दो सबसे बड़ी समस्याओं का समाधान कर रही हैं. पहली, गन्ने की कटाई के लिए मजदूरों पर निर्भरता खत्म हो रही है, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है. दूसरी, फसल कटने के बाद बची पराली को जलाने के बजाय, सीएनएच की बेलर मशीनें उसे उपयोगी गांठों में बदल देती हैं, जिसे बेचकर किसान अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं.
राजस्थान सरकार की कृषि यंत्र अनुदान योजना के तहत SC किसानों को खेती की मशीनों पर 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है. रोटावेटर, सीड ड्रिल और थ्रेशर जैसे मशीनों पर अनुदान मिलेगा. आवेदन की अंतिम तिथि 14 फरवरी है. किसान राज किसान साथी पोर्टल या ई-मित्र केंद्र से आवेदन कर सकते हैं.
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में जहां किसान कपास और बाजरा की खेती में घाटा सह रहे थे, वहीं एक किसान ने रेशम कीट पालन को अपनाकर अपनी कमाई को 12 गुना बढ़ा लिया जो किसान साल भर में मुश्किल से 93 हजार रुपये कमा पाता था, वह आज सालाना 13 लाख रुपये से ज्यादा का टर्नओवर ले रहा है। उन्होंने ' वैज्ञानिक तरीके से रेशम के बीज तैयार किए, जिससे बाजार और मोटा मुनाफा दोनों पक्का हो गया,सदाशिव की इस सफलता ने पूरे इलाके में जोश भर दिया है,आज उनके गांव के 90 फीसदी किसान उन्हीं का 'रेशम मंत्र' अपनाकर लखपति बन चुके हैं.अब यह गांव तंगी के लिए नहीं, बल्कि अपनी खुशहाली और बंपर कमाई के लिए जाना जाता है
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