इस साल सपोर्टिव पॉलिसी उपायों की वजह से शानदार ग्रोथ देखने को मिली है, जिसमें ट्रैक्टर पर GST में कमी शामिल है. मुख्य बाजारों में राज्य-स्तरीय सब्सिडी सपोर्ट ने अफोर्डेबिलिटी में सुधार किया है और खरीदारी के फैसले तेजी से लेने के लिए प्रोत्साहित किया है, जिससे साल भर डिमांड को और बढ़ावा मिला है.
इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर बाजार का आकार 2025 तक करीब 10 अरब डॉलर तक पहुंचने गया है. जबकि साल 2034 तक 9.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. जबकि 2034 तक बाजार में 29.3 फीसदी तक की वृद्धि होने का अनुमान है. रिसर्च रिपोर्ट की मानें तो इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खेती से जुड़ा वह व्हीकल है जो पारंपरिक डीजल इंजन के बजाय बिजली का प्रयोग करता है.
एक गन्ना किसान ने नए तरीके को अपनाकर अपनी पैदावार दोगुनी कर दी है. उनके इस नए तरीके के लिए, इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) ने पिछले महीने उन्हें "इनोवेटिव फार्मर" सर्टिफिकेट से सम्मानित किया है. आइए जानते हैं कौन सा है ये तरीका और क्या हैं इसके फायदे.
नागालैंड के फेक जिले के किसान सबयुविजो जुडो ने देसी जुगाड़ से सोलर ड्रायर बनाकर खेती की बड़ी समस्या का समाधान निकाला है. महज 5–8 हजार रुपये की लागत वाला यह ड्रायर सब्जी, फल और मसालों को सुरक्षित तरीके से सुखाकर किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रहा है.
डिजिटल ग्रीन और सिस्को इंडिया ने किसानों के लिए AI आधारित FarmerChat ऐप लॉन्च किया है. यह ऐप फसल प्रबंधन, कीट पहचान और मौसम के अनुसार खेती की आसान सलाह देता है, जिससे किसानों की पैदावार और आमदनी बढ़ेगी.
एग्री-वोल्टिक सिस्टम से किसान एक ही खेत में फसल उगाकर और सोलर पावर से बिजली बनाकर दोहरी कमाई कर सकते हैं. जानिए कैसे यह तकनीक प्रति हेक्टेयर 8 लाख रुपये तक आमदनी दे सकती है.
वाराणसी स्थित IIVR ने 8 साल की मेहनत के बाद बासमती खुशबू वाली तोरई विकसित की है. VRSG 7-17 नाम की यह किस्म 55–60 दिनों में तैयार होती है और किसानों को ज्यादा मुनाफा देगी.
पश्चिम बंगाल के एक अनुभवी किसान, कर्णदेब रॉय ने पशुपालकों के लिए एक बहुत ही उपयोगी और सस्ती मशीन बनाई है, जिसे यूरिया मिनरल मोलासेस ब्लॉक मेकर कहा जाता है. बहुत कम कीमत वाली यह मजबूत मशीन एक घंटे में 20 से 25 पोषक ब्लॉक तैयार कर सकती है. इन ब्लॉक्स के उपयोग से गायों के दूध उत्पादन में 23% और बकरियों के शारीरिक वजन में 21% तक की शानदार बढ़ोतरी देखी गई है. लगभग 65 किलो वजन वाली इस मशीन को किसान अपनी सुविधा के अनुसार आसानी से कहीं भी ले जा सकते हैं.
डिजिटल कृषि मिशन 2.0 भारत की खेती में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आया है, जहां अब हल के साथ-साथ मोबाइल और तकनीक खेतों की कमान संभालेंगे. नीति आयोग के अनुसार, इस मिशन का असली मकसद किसानों को 'स्मार्ट' बनाना है ताकि वे सटीक जानकारी के साथ बेहतर पैदावार ले सकें. जब तकनीक और मिट्टी का मेल होगा, तो खेती में लागत कम होगी और किसान की कमाई और समृद्धि बढ़ेगी. यह बदलाव न केवल किसानों की जिंदगी को आसान बनाएगा, बल्कि उनके बढ़ते कदमों से भारत दुनिया की एक बड़ी कृषि महाशक्ति बनकर उभरेगा.
Sonalika Tractors Sale December 2025: सोनालीका ट्रैक्टर्स ने दिसंबर 2025 में अब तक की सबसे बड़ी मासिक बिक्री दर्ज कर नया रिकॉर्ड बना लिया है. कंपनी का कहना है कि रबी सीजन में बढ़ी बुआई और किसानों के सकारात्मक रुख से ट्रैक्टरों की मांग को मजबूती मिली है.
बिहार के किशनगंज के एक किसान ने ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए एक शानदार और सस्ता 'देसी जुगाड़' खोज निकाला है, जिसे 'टायर मॉडल' कहा जा रहा है. आमतौर पर ड्रैगन फ्रूट के पौधों को सहारा देने के लिए महंगे सीमेंट के पोल और ढांचे की जरूरत होती है, जिसमें काफी पैसा खर्च होता है.
UP News: राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन निदेशक दीपा रंजन ने बताया कि कृषि आजीविका सखियां खेत-खलिहान में बदलाव की असली ताकत बन चुकी हैं. ये महिलाएं किसानों को तकनीकी जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने का भी काम कर रही हैं.
सोलर पैनल किसानों के लिए लंबे समय का निवेश है. सफाई में की गई छोटी-सी लापरवाही बड़ा नुकसान करा सकती है. अगर सही तरीके और सावधानी से सफाई की जाए तो सोलर पैनल सालों तक बेहतर प्रदर्शन देते हैं और किसानों को मुफ्त बिजली का पूरा लाभ मिलता है. धूल, मिट्टी, पक्षियों की बीट और परागकण पैनल की सतह पर जम जाते हैं. इससे बिजली उत्पादन 20 से 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है.
कर्नाटक की प्रगतिशील महिला किसान श्रीमती पद्मिनी गौड़ा ने खेती की दुनिया में अपनी अनोखी सोच से क्रांति ला दी है. उन्होंने जमीन के 13.5 फीट नीचे एक विशेष 'सनकन चैंबर' तैयार किया है, जो बिना किसी महंगी मशीन के मशरूम के लिए जरूरी नमी और तापमान को प्राकृतिक रूप से बनाए रखता है .
किसान राणाप्रताप का यह सस्ता 'खाद यंत्र' खेती की दुनिया में क्रांति ला रहा है, जिससे खेती में खाद का खर्च 50 फीसदी तक कम हो सकता है. यह देसी मशीन खाद को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाती है, जिससे न तो खाद बर्बाद होती है और न ही ज्यादा मजदूरों की जरूरत पड़ती है. कम लागत में बना यह स्मार्ट जुगाड़ न केवल समय बचाता है बल्कि छोटे किसानों की मेहनत को भी बहुत आसान बना देता हैं. अपनी इसी खासियत की वजह से यह यंत्र आजकल किसानों के बीच खूब धूम मचा रहा है और कमाई बढ़ाने का बेहतरीन जरिया बन गया है.
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