आज के दौर में जब गांवों से पलायन बढ़ रहा है और धान की रोपाई के लिए मजदूरों की भारी किल्लत हो गई है, यह देसी तकनीक किसी वरदान से कम नहीं है. पुराने पारंपरिक तरीके में घंटों कीचड़ में झुककर रोपाई करने से मजदूरों को भयंकर पीठ दर्द, शारीरिक थकान और ढेरों तकलीफें झेलनी पड़ती थीं. इस बड़ी मुसीबत का हल पंजाब के एक समझदार किसान ने इस बेजोड़ जुगाड़ से निकाला है. अब न मजदूरों की कमर झुकेगी और न ही बदन थकेगा. इस जादुई ट्रैक्टर-प्लैंकर की मदद से रोपाई का काम खड़े-खड़े बेहद आसान हो जाता है, जिससे मेहनत और खर्च दोनों सीधे आधे हो जाते हैं और पैदावार भी बंपर मिलती है.
UP News: डॉ त्रिपाठी ने आगे बताया कि योगी सरकार की प्राथमिकता केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमि और किसानों के रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना भी है. इसी क्रम में “अंश निर्धारण” का कार्य भी तेजी से चल रहा है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में अंश निर्धारण का कार्य 87.19 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है.
Dairy Business: दूध की गुणवत्ता जांच से लेकर पैसे के भुगतान तक पूरी प्रक्रिया तकनीक आधारित होने से दुग्ध उत्पादकों का भरोसा तेजी से बढ़ा है. ग्रामीण महिलाएं अब केवल पशुपालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डेटा, भुगतान और डिजिटल रिकॉर्ड की निगरानी भी स्वयं कर रहीं हैं.
भारत में खेती अब तेजी से डिजिटल और स्मार्ट बन रही है. AI आधारित “भारत VISTAAR” जैसे प्लेटफॉर्म किसानों को मौसम, फसल, बाजार और सरकारी योजनाओं की जानकारी उनकी अपनी भाषा में दे रहे हैं. इससे किसानों को सही समय पर सही सलाह मिल रही है. तकनीक और AI की मदद से खेती आसान, आधुनिक और ज्यादा फायदे वाली बनने की ओर बढ़ रही है.
सोनालीका ट्रैक्टर्स ने अप्रैल 2026 में 16,223 ट्रैक्टर बेचकर रिकॉर्ड बनाया और 35.6% की शानदार वृद्धि दर्ज की. कंपनी ने उद्योग की ग्रोथ को पीछे छोड़ते हुए किसानों के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. नई तकनीक और बेहतर उत्पादों के जरिए सोनालीका खेती को आसान और लाभदायक बनाने पर लगातार काम कर रही है.
महाराष्ट्र के नासिक जिले में किसान प्याज की खेती के लिए मल्चिंग पेपर तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. यह अनोखा प्रयोग उन इलाकों में काफी कारगर साबित हो रहा है जहां बारिश कम होती है और पानी की समस्या रहती है. मल्चिंग पेपर पर प्याज लगाने से सिंचाई में 70 से 80 प्रतिशत तक पानी की बचत हो रही है. इसके साथ ही फसल में लगने वाली बीमारियों में भी कमी आई है जिससे खेती की लागत घटी है. सह्याद्री बायोटेक के विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और सिंचाई का सटीक प्रबंधन संभव हो पाता है.
इन दिनों लगातार खेती-बाड़ी के क्षेत्र में नए-नए प्रयोग देखने को मिलते हैं. आप भी किसान हैं और खेती को आधुनिक बनाने के साथ ढेरों फायदे चाहते हैं तो इस तकनीक को अपनाएं. इस तकनीक के बारे में ज्यादातर किसानों को अधिक जानकारी नहीं है. ऐसे में आज हम इस खबर में इसके लाभ के बारे में बताएंगे.
महिंद्रा एंड महिंद्रा के फार्म इक्विपमेंट बिजनेस ने अप्रैल 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए घरेलू बाजार में 46,404 ट्रैक्टर बेचे, जो सालाना आधार पर 20% ज्यादा हैं. नवरात्रि न होने के बावजूद मजबूत बिक्री दर्ज की गई. कुल बिक्री 48,411 यूनिट रही, जिससे ग्रामीण मांग और खेती से जुड़े सेक्टर की मजबूती साफ नजर आती है.
“फसल चक्रण” (Crop Rotation) एक ऐसा स्मार्ट तरीका बनकर सामने आया है, जो बिना अधिक खर्च के खेती को ज्यादा फायदेमंद बना सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं उन 8 आसान तरीकों को जिनसे फसल चक्रण किसानों की किस्मत बदल सकता है.
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