चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने मधुमक्खी पालन के लिए ‘बी हाइव स्ट्रिप हैंगर कम स्पेसर’ विकसित किया है, जिसे भारत सरकार ने पेटेंट प्रदान किया है. यह उपकरण वरोआ माइट की रोकथाम, शहद की क्वालिटी सुधार और मधुमक्खियों के प्राकृतिक काम में सहायता करता है.
बिहार सरकार ने बिहार कृषि ऐप का नया वर्जन लॉन्च किया है, जिसमें किसानों को घर बैठे फार्मर रजिस्ट्री, डिजिटल किसान पहचान पत्र, खाद की उपलब्धता की लाइव जानकारी, मौसम पूर्वानुमान, फसल प्रबंधन, बाजार मूल्य और एआई आधारित कृषि सलाह जैसी सुविधाएं मिलेंगी. इस ऐप से पीएम किसान सहित कई सरकारी योजनाओं में आवेदन और स्टेटस चेक करना भी आसान हो गया है.
रीपर बाइंडर मशीन किसानों के लिए एक बेहतरीन उपकरण है. यह सिर्फ एक घंटे में चार बीघा गेहूं की कटाई कर देती है और पुली भी बनाती है. खर्च केवल 90 रुपये प्रति घंटे है. सरकार 50% तक सब्सिडी भी देती है. इससे समय बचता है, मेहनत कम होती है और किसान अपनी फसल जल्दी बेच सकते हैं.
महिंद्रा ने किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर नई रोटावेटर सीरीज लॉन्च की है. बोल्ड लुक, मज़बूत मास्ट डिज़ाइन और भारी जुताई के लिए तैयार यह रेंज 4 से 9 फुट में उपलब्ध होगी. सीमित संस्करण और इंटेलिजेंट टेक्नोलॉजी ने इसे और खास बना दिया है.
खरीफ प्याज के भंडारण के लिए सबसे ज्यादा किसानों को परेशान होना पड़ता है. ऐसे में बांदा कृषि विश्वविद्यालय ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जिससे किसान घर बैठे ही बहुत कम लागत में अपनी प्याज को सड़ने से बचा सकेंगे.
सोनीपत के निफ्टम संस्थान में नेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ, जिसमें देश-विदेश के वैज्ञानिक शामिल हुए. केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे और सरकार के विकास कार्यों की सराहना की. उन्होंने किसानों के हित, फूड प्रोसेसिंग और विकसित भारत के संकल्प पर जोर देते हुए बताया कि नई तकनीक और शोध से देश आगे बढ़ेगा.
भारत और इज़राइल के बीच कृषि सहयोग से भारतीय किसानों को नई तकनीक और बेहतर सिंचाई के तरीके मिल रहे हैं. इस सहयोग से किसान कम पानी में अधिक फसल उगा पा रहे हैं और फल‑सब्जियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं. प्रधानमंत्री की हाल की इज़राइल यात्रा से यह साझेदारी और मजबूत हुई है.
आज के दौर में किसान सिर्फ दूध बेचकर ही नहीं, बल्कि गोबर के सही बिजनेस से भी लखपति बन सकते हैं. इसका जीता-जागता उदाहरण उत्तर प्रदेश के एक प्रगतिशील किसान हैं, जिन्होंने गोबर के सही मैनेजमेंट से लाखों का बिजनेस खड़ा कर दिया है. हमारे देश में पशुधन की कोई कमी नहीं है, बस जरूरत है इसे कमाई में बदलने की.
खेती-किसानी के लिए आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सम्मेलन की शुरुआत करते हुए सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि किसानों को डिजिटल सेवाओं का आत्मविश्वास के साथ इस्तेमाल करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज एआई आधारित ऐप्स के माध्यम से किसान अपनी भाषा में सवाल पूछ सकते हैं और उन्हें तुरंत समाधान मिल सकता है.
बाढ़ और जलभराव से गन्ने की फसल अक्सर गल जाती है, लेकिन सही तकनीक अपनाकर इस नुकसान से बचा जा सकता है. ट्रेंच विधि, जलभराव सहनशील किस्में और संतुलित पोषण से पैदावार और चीनी रिकवरी दोनों बेहतर हो सकती हैं. जानिए वो उपाय जो किसानों की आमदनी बढ़ा सकते हैं...
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में एक सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि अब एआई की मदद से खेती में किसानों के लिए मौसम का अनुमान लगाना ज्यादा सही हो गया है.
महाराष्ट्र सरकार खेती में AI को नई ताकत देने की दिशा में आगे बढ़ रही है. मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि राज्य में AI आधारित सलाह, डेटा सिस्टम और ट्रेसबिलिटी से किसानों की आय और खेती की स्थिरता मजबूत होगी. इसके लिए उन्होंने वैश्विक निवेशकों को साझेदारी का न्योता दिया.
हिमाचल, कश्मीर और उत्तराखंड के सेब बागवानों के लिए 'एप्पल रूट बोरर' सबसे बड़ा दुश्मन रहा है. यह कीट पेड़ों को अंदर से खोखला कर देता है और इसका लार्वा चक्र 3 साल तक चलता है, जिससे करीब 35 लाख पेड़ों पर हमेशा खतरा बना रहता है. पारंपरिक तौर पर किसान इसे मारने के लिए महंगे और जहरीले कीटनाशकों का उपयोग करते थे, जो मिट्टी और पर्यावरण के लिए हानिकारक थे.
ज़हीराबाद स्थित महिंद्रा ट्रैक्टर प्लांट ने बीएआईएफ और अन्य गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से रेनजिंथल प्राथमिक विद्यालय, हाई स्कूल और उर्दू माध्यम स्कूल में व्यापक मरम्मत एवं नवीनीकरण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया है.
लीची की नाजुक प्रकृति के कारण 30-40 फीसदी फसल तुड़ाई के बाद खराब हो जाती थी और किसान रसायनों पर निर्भर थे. लेकिन अब आधुनिक सल्फेट-मुक्त तकनीक से लीची 7-8 दिनों तक ताजा रहती है, जिससे नुकसान कम होता है और उपभोक्ताओं को हेल्दी फल मिलता है. एक स्टार्टअप सुपरप्लम सीधे बगीचों से बेहतर दाम पर खरीद कर बिचौलियों को खत्म कर रहा है. किसानों को गुणवत्ता के आधार पर प्रीमियम दाम, प्री-बुकिंग और पारदर्शी डिजिटल भुगतान की सुविधा मिल रही है.
इस समय आम के बाग में बौर आ रहे हैं. आने वाले दिनों में पेड़ों पर फल बनेंगे, लेकिन अक्सर कीटों, बीमारियों और तेज धूप की वजह से फलों पर दाग-धब्बे पड़ जाते हैं और वे बेरंग दिखने लगते हैं, जिसके कारण बाजार में किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम नहीं मिल पाता. इस समस्या का सबसे आसान समाधान है 'फ्रूट बैगिंग', जो आम को जहरीले कीटनाशकों से बचाकर उसे पूरी तरह सुरक्षित और जहर-मुक्त बनाती है.
तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय को गन्ना खेती की एक अहम मशीन पर 20 साल का पेटेंट मिला है. यह सिंगल बड सेट कटर मशीन रोपाई की लागत और समय दोनों घटाने का दावा करती है. ट्रायल में इसकी क्षमता और बचत के आंकड़े चौंकाने वाले रहे हैं. पढ़ें पूरी खबर...
कृषि में AI आधारित सलाह किसानों के लिए मददगार बन रही है, लेकिन इसकी जवाबदेही सबसे बड़ा सवाल बन गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि बिना नियम और निगरानी के एग्रीटेक कंपनियों की सलाह फसल और किसानों की आय के लिए जोखिम पैदा कर सकती है.
कभी सूखे में पूरी फसल गंवाने वाले एक भारतीय उद्यमी ने हार मानने के बजाय खेती का तरीका बदलने का फैसला किया. अब वही अनुभव AI आधारित हाइड्रोपॉनिक खेती में 214 करोड़ रुपये के बड़े निवेश की वजह बनकर उभरा है. पढ़ें पूरी खबर...
नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने PowerXChange Innovations Private Limited के PowerXchange ऐप का प्रदर्शन देखा. यह ऐप India Energy Stack पहल के तहत किसानों और रूफटॉप सोलर उपभोक्ताओं को अपनी अतिरिक्त बिजली सीधे बेचने और अतिरिक्त आय कमाने का मौका देता है. लॉन्च इवेंट Bharat Mandapam में आयोजित किया गया.
भारत‑VISTAAR भारत सरकार का किसान‑केंद्रित, एआई‑आधारित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है, जो अलग‑अलग सरकारी और वैज्ञानिक स्रोतों को जोड़कर किसानों तक भरोसेमंद जानकारी पहुंचाएगा.
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