Kerala में Monsoon की एंट्री के बाद अब यह देश के अन्य राज्यों की तरफ तेजी से बढ़ रहा है. मौसम विशेषज्ञ Devendra Tripathi के अनुसार, 5 से 10 जून के बीच मानसून मुंबई, Maharashtra के कई हिस्सों और तेलंगाना तक पहुंच जाएगा.
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गोवा, कर्नाटक और तमिलनाडु के कई हिस्सों में आगे बढ़ते हुए रफ्तार पकड़ ली है. मौसम विभाग ने अगले 7 दिनों तक दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. कई इलाकों में तेज हवाएं भी चल सकती हैं.
देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और कई राज्यों में मौसम ने बड़ा रूप ले लिया है. केरल में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, जबकि तटीय कर्नाटक, तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत में लगातार भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है.
6 June को देश का मौसम(Weather) दो अलग तस्वीरें दिखा सकता है. एक तरफ दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर में बारिश (Rains) का प्रभाव बढ़ेगा, वहीं उत्तर और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में तापमान फिर धीरे-धीरे बढ़ने के संकेत हैं. केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम और कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना है.
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने रफ्तार पकड़ ली है. मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट किया है. 6 जून को दक्षिण, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में बारिश बढ़ सकती है, जबकि दिल्ली-एनसीआर में हल्की बारिश और तेज हवाओं से राहत मिलने के संकेत हैं. पढ़ें मौसम का फुल अपडेट...
केरल में लगातार हो रही भारी बारिश और तेज हवाओं ने कई जिलों में जनजीवन प्रभावित कर दिया है. कोच्चि में जलभराव और कोझिकोड में नुकसान की घटनाएं सामने आई हैं. मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए ऑरेंज और वीकेंड के लिए रेड अलर्ट जारी किया है.
यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट (ECMWF) के अनुसार अल नीनो के सक्रिय होने के संकेत मिल चुके हैं, जिससे वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी देखी जा रही है. प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से अधिक हो गया है, जिसका प्रभाव आने वाले महीनों में और स्पष्ट होगा. इसका असर भारत के मॉनसून पर भी पड़ सकता है, जहां इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाया गया है. इससे जलाशयों में पानी का स्तर घटने की भी आशंका है.
आगामी मौसम में कम बारिश के अलर्ट को देखते हुए उपकार (UPCAR) ने किसानों को पारंपरिक खेती छोड़ आधुनिक तकनीकें अपनाने की सलाह दी है. इस सीजन में धान की पारंपरिक रोपाई के बजाय कम पानी वाली सीधी बुआई (DSR) और ड्रम सीडर तकनीक अपनाने पर जोर दिया गया है, जो कम लागत में बंपर मुनाफा दिलाएगी. इसके साथ ही, जहां पानी की किल्लत ज्यादा है, वहां धान की जगह कम पानी में तैयार होने वाली वैकल्पिक फसलें जैसे श्री अन्न, मक्का और अरहर लगाने का सुझाव है ताकि सूखे जैसे हालात में भी किसानों की फसलें सुरक्षित रहें.
केरल में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की आधिकारिक एंट्री हो गई है, जिसके बाद देशभर में मौसम का मिजाज तेजी से बदल गया है. मौसम विभाग (IMD) ने कई राज्यों में भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है.
Uttar Pradesh Farmers News: उपकार के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह ने बताया कि मौसम पूर्वानुमान के तहत किसानों को सलाह दी गई है कि जो किसान वर्षा आधारित खेती करते हैं, वे धान के स्थान पर श्री अन्न, मक्का, उर्द, मूंग और तिल जैसी फसलों की बुआई को प्राथमिकता दें.
देशभर में जिस Monsoon का इंतजार था, उसने आखिरकार केरल में दस्तक दे दी है. इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का सफर अब देश के दूसरे हिस्सों की ओर बढ़ने लगा है. मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले 6 से 7 दिनों तक केरल, तटीय कर्नाटक और तमिलनाडु में अच्छी बारिश का दौर जारी रह सकता है और कई इलाकों में 12 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज होने की संभावना है.
रिपोर्ट का अनुमान है कि अल नीनो के कारण बारिश में आने वाला उतार-चढ़ाव भारत के 2026 के खरीफ सीजन को प्रभावित कर सकता है, लेकिन जलाशयों में पानी का अच्छा भंडार होने से बुवाई और फसल के शुरुआती विकास पर पड़ने वाला असर सीमित रहने की उम्मीद है.
देश में मॉनसून ने केरल से एंट्री कर ली है और इसके साथ कई राज्यों में मौसम तेजी से बदलने वाला है. 5 जून को बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. दिल्ली-एनसीआर में भी राहत की उम्मीद है, जबकि किसानों को मौसम को देखते हुए तैयारी की सलाह दी गई है.
आईएमडी के अनुसार 5 जून को दिल्ली-एनसीआर में बादल, हल्की बारिश, गरज-चमक और 60 किमी/घंटा तक तेज हवाओं का अलर्ट है. लोगों को सतर्क रहने और घर में रहने की सलाह दी गई है.
IMD ने 4 जून के लिए देशभर के कई हिस्सों में मौसम को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है. दक्षिण भारत से लेकर उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत तक गरज-चमक के साथ बारिश, तेज हवाएं और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है.
साल 2026 में अल नीनो के चलते सूखे और कम मॉनसून का बड़ा खतरा है, जिससे निपटने के लिए सरकारी तैयारियों के साथ-साथ किसानों को भी अपने स्तर पर कमर कसनी होगी. किसानों को पुरानी आदतें छोड़कर 'सक्रिय खेती' अपनानी होगी. जैसे कम पानी वाली फसलें चुनना, धान की सीधी बुवाई करना और समझदारी से सिंचाई करना. इन बदलावों और मौसम विभाग के सैटेलाइट अलर्ट और कृषि विज्ञान केंद्रों की सलाह पर पैनी नजर रखकर सूखे की मार से काफी हद तक बचा जा सकता है. मौसम विभाग के मुताबिक इस साल बारिश करीब 10% कम होगी, लेकिन सही वैज्ञानिक तरीकों और सही समय पर बदलाव करके हम अपनी खरीफ फसलों को सुरक्षित रख सकते हैं.
सुपर अल नीनो को लेकर चर्चा तेज है और भारत समेत एशियाई देशों में इसके असर को लेकर नजर बनी हुई है. हालांकि पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि हर मजबूत अल नीनो का मतलब कमजोर मानसून नहीं होता. कई वर्षों में सामान्य या बेहतर बारिश भी दर्ज की गई, इसलिए सिर्फ इस टर्म से घबराने की जरूरत नहीं है.
मौसम विभाग (IMD) ने कई राज्यों में आंधी, बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया. मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण भारत से लेकर उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत तक कई इलाकों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ Rains की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं.
भारत में कमजोर मानसून और बढ़ते तापमान के बीच खरीफ फसलों की तैयारी चिंता का कारण बन रही है. वहीं थाईलैंड, इंडोनेशिया और दूसरे एशियाई देशों में भी सूखे जैसे हालात खेती और उत्पादन पर दबाव बढ़ाने की आशंका पैदा कर रहे हैं.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 4 जून 2026 को केरल में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के पहुंचने की पुष्टि कर दी है. इस बार मॉनसून सामान्य तारीख के मुकाबले कुछ देरी से आया है. पहले अनुमान 26 मई का था, लेकिन कमजोर हवाओं और बदलते मौसमीय हालात के कारण इसकी एंट्री टल गई. अब इसके साथ केरल समेत दक्षिण भारत में भारी बारिश का दौर शुरू होने की उम्मीद है.
देश के कई हिस्सों में मौसम बदलने वाला है. मौसम विभाग ने आंधी, बारिश, बिजली और तेज हवाओं को लेकर अलर्ट जारी किया है. 4 जून को दक्षिण भारत में बारिश और उत्तर, मध्य व पूर्वी राज्यों में बदलते मौसम का असर देखने को मिल सकता है. दिल्ली-एनसीआर में भी तेज हवाओं और हल्की बारिश के आसार हैं.
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