भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इस बार बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है, जो LPA के 94% से भी नीचे हो सकती है. जून में 39% बारिश की कमी के बाद देश में जल संकट का खतरा बढ़ गया है. कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से अधिक रहने, उमस बढ़ने और मॉनसून के देरी से पहुंचने की बात कही गई है. दिल्ली-NCR में अगले 2-3 दिनों में मॉनसून पहुंच सकता है, जबकि तेलंगाना समेत कई राज्यों में बारिश का पैटर्न असमान रहने की संभावना है.
सूरत में मॉनसून की पहली जोरदार बारिश से किसानों को बड़ी राहत मिली है. गन्ना, धान और सब्जियों की फसलों को पानी मिलने से किसानों में खुशी है. वहीं, शहर के कई इलाकों, रेलवे अंडरपास, अस्पताल और मंदिरों में जलभराव होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा और प्री-मॉनसून तैयारियों पर सवाल उठे.
इस साल जून में कम बारिश के कारण खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ गई है केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक,देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में कम है,हालांकि यह 10 साल के औसत से थोड़ा बेहतर है.सेंट्रल और नॉर्दर्न रीजन में स्थिति संतोषजनक है, लेकिन ईस्टर्न और साउदर्न राज्यों में पानी की भारी किल्लत है. अब किसानों की निगाहें जुलाई में होने वाली अच्छी बारिश पर टिकी हैं.
जून के कम बारिश का असर देश के खेतों में साफ दिखने लगा है. सुस्त मॉनसून और अलनीनों की वजह से इस साल खरीफ फसलों की कुल बुवाई में करीब 23 फीसदी की भारी गिरावट आई है. पानी की कमी से सबसे बड़ा झटका धान, दलहन और तिलहन को लगा है. धान का रकबा 25% पिछड़ गया है, जबकि दालों की बुवाई में 30.5% की कमी आई है. तिलहन का हाल सबसे बुरा है, जिसमें मुख्य रूप से सोयाबीन की खेती 65.3% तक घट गई है.इसके अलावा, नगदी फसल कपास की बुवाई में भी 34.6% की बड़ी गिरावट दर्ज हुई है. अब खेती की सारी उम्मीदें जुलाई की बारिश पर टिकी हैं.
Rain Alert In UP: मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश में मॉनसून आगमन से पूर्व बढ़ी मौसमी सक्रियता के परिणामस्वरूप तापमान में गिरावट आना आरम्भ होने से आज लू की गतिविधियां प्रदेश के खीरी लखीमपुर एवं प्रयागराज तक सीमित हो गईं. उन्होंने बताया कि प्रदेश में आगामी 24-48 घण्टों के दौर किसी भी समय मॉनसून के एक्टिव होने के बाद कहीं-कहीं भारी वर्षा की संभावना है.
Agriculture News: उन्नत सिंचाई प्रबंधन के तहत केवल सायंकाल या रात में ही नाली अथवा बेसिन विधि से सिंचाई करने और पानी बचाकर केवल फसलों की क्रांतिक अवस्था पर ही सिंचाई करने को कहा गया है. वहीं ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई विधियों को अपनाने और मिश्रित खेती के तहत मक्का के साथ अरहर या मूंग उगाने पर जोर दिया गया है.
देश के अधिकांश हिस्सों में मॉनसून कमजोर बना हुआ है और सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की जा रही है. स्काईमेट के अनुसार इंडियन ओशन डायपोल (IOD) फिलहाल न्यूट्रल से थोड़ा पॉजिटिव रहने के बावजूद अल नीनो के प्रभाव को कम करने में सक्षम नहीं है. जब तक IOD 1.5 डिग्री से ऊपर नहीं जाता, तब तक इसका असर सीमित रहेगा. हालांकि 1 जुलाई से देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश की उम्मीद जताई गई है, जिससे मॉनसून में सुधार की संभावना बन रही है.
25 दिनों के लंबे इंतजार के बाद अकोला में मानसून की पहली अच्छी बारिश हुई, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो गई है. किसान और महिलाएं खेतों में पूरे उत्साह से बीज बो रहे हैं. कृषि विभाग ने सही समय और उचित तरीके से बुवाई करने की सलाह दी है. किसानों को इस साल अच्छी पैदावार और बेहतर फसल की उम्मीद है.
देश में मौसम ने फिर करवट ली है. उत्तर-पूर्व भारत में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश और आसपास के इलाकों में भीषण लू की चेतावनी दी गई है. कई राज्यों में तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना है. मौसम विभाग ने सतर्क रहने की सलाह दी है.
UP Weather Today: IMD के अनुसार, मॉनसून के सक्रिय होने के साथ ही प्रदेश भर में अधिकतम तापमान में 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है. इससे प्रदेश में पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी और उमस से लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. वहीं आगरा, मेरठ, हापुड़, जालौन, झांसी, हमीरपुर, जालौन और महोबा में हीट वेव को लेकर अलर्ट जारी किया गया है.
अकोला में हुई भारी बारिश के बाद नेशनल हाईवे-53 के शिवनी फ्लाईओवर पर जलभराव हो गया, जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. 1 से 2 फीट पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ और हादसे का खतरा बढ़ गया. ड्रेनेज व्यवस्था की खराबी से स्थिति और गंभीर हो गई.
अल नीनो और कमजोर मॉनसून का खरीफ फसलों पर क्या असर पड़ सकता है? CropLife India ने बताया कि अनिश्चित बारिश, कीटों और फसल रोगों का खतरा किसानों की चिंता बढ़ा सकता है. जानिए 119 लाख हेक्टेयर में हुई खरीफ बुवाई, IMD के मॉनसून अनुमान और विशेषज्ञों की सलाह से जुड़ी पूरी जानकारी.
भारतीय मौसम विभाग ने देश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों के लिए भारी बारिश और हीटवेव का अलर्ट जारी किया है. पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में अत्यंत भारी बारिश की संभावना है, जबकि उत्तर भारत में तेज गर्मी पड़ेगी. कई राज्यों में गरज-चमक, तेज हवाएं और जलभराव जैसी स्थिति बन सकती है. लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
इस साल मानसून की सुस्त रफ्तार और अल नीनो के खतरे ने देश के बड़े हिस्से में संकट खड़ा कर दिया है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और केंद्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान (CRIDA) के अनुसार, जून के महीने में देश भर के कई प्रमुख कृषि प्रधान राज्यों में उम्मीद से काफी कम बारिश हुई है, जिससे पानी की भारी किल्लत देखी जा रही है. केवल इक्का-दुक्का राज्यों को छोड़कर बाकी अधिकांश हिस्सों में सूखे जैसे हालात हैं। इस गंभीर स्थिति और आने वाले मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बेहद मुस्तैद रहने और अपनी फसलों को बचाने के लिए खास रणनीतियां अपनाने की पुरजोर हिदायत दी है.
IMD के अनुसार, 25 जून से 1 जुलाई के दौरान दक्षिण प्रायद्वीप और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है. वहीं, देश के बाकी हिस्सों में सामान्य से कम बारिश रहने का अनुमान है.
देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने रफ्तार पकड़ ली है और अगले कुछ दिनों में इसके कई नए इलाकों में आगे बढ़ने की संभावना है. मौसम विभाग ने 27 से 29 जून तक पूर्वोत्तर भारत और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल-सिक्किम में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में लू का असर भी बना रहेगा.
दक्षिण-पश्चिम Monsoon लगातार आगे बढ़ रहा है और अब इसके उत्तर भारत की ओर तेजी से बढ़ने की संभावना है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार अगले 3 से 4 दिनों में मॉनसून गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार के शेष हिस्सों के साथ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ इलाकों में भी दस्तक दे सकता है.
बिहार में मॉनसून आने के बावजूद कम बारिश और लगातार बढ़ते तापमान ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कई जिलों में पारा 45 डिग्री तक पहुंचने से धान की नर्सरी बचाना बड़ी चुनौती बन गया है, जबकि किसानों को लगातार सिंचाई करनी पड़ रही है. मौसम विभाग ने जून में सामान्य से 40% कम बारिश का अनुमान जताया है, जिससे धान उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है.
केरल में इस बार मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है. IMD के अनुसार, राज्य में अब तक सामान्य से 33 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. वहीं, कमजोर मॉनसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है और खेती-किसानी पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है.
UP Farmers News: उपकार के उप महानिदेशक डॉ. राजर्षि कुमार गौड़ ने बताया कि किसानों को अपने खाली खेतों की मिट्टी पलट हल से गहरी जुताई करने का सुझाव दिया गया है ताकि खरपतवार के बीज और कीट गर्मी से नष्ट हो जाएं. जिन किसानों ने हरी खाद के लिए सनई व ढैंचे की बुवाई की है, उन्हें 40 से 42 दिन की पौध होने पर उसकी पलटाई करने को कहा गया है.
देशभर में मौसम का मिजाज बदल रहा है. IMD ने पश्चिमी तट, पूर्वोत्तर भारत और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल-सिक्किम में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. वहीं पूर्वी यूपी, बिहार और झारखंड में हीटवेव का असर बना रह सकता है. मॉनसून अगले 3-4 दिनों में उत्तर और मध्य भारत के और हिस्सों में आगे बढ़ सकता है.
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