मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 18 से 21 जुलाई के बीच उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश का ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया गया है. पश्चिमी विक्षोभ और अरब सागर से आ रही हवाओं के कारण 20 से 25 जुलाई के बीच पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी.
जम्मू-कश्मीर के राजौरी में लगातार हो रही भारी बारिश ने पूरे जिले में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं. मूसलाधार बारिश की वजह से नदी-नाले पूरी तरह उफान पर आ गए हैं, जिससे कई निचले इलाकों में पानी भर गया है और लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. देखें ये ग्राउंड रिपोर्ट
भारत में अल नीनो और प्रशांत महासागर में उठे तूफान के कारण मानसून कमजोर पड़ गया है, जिससे देश भर में बारिश में 24 फीसदी की कमी दर्ज की गई है. पिछले एक सप्ताह से देश के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से में मौसम शुष्क और गर्म बना हुआ है.
जम्मू-कश्मीर में अगले पांच दिनों तक मौसम बेहद खराब रहने की संभावना है. IMD ने 19 से 23 जुलाई के बीच कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश, बाढ़ और लैंडस्लाइड की चेतावनी जारी की है. प्रशासन ने किसानों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों से सतर्क रहने की अपील की है.
देशभर में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सक्रिय है. IMD ने 19 जुलाई को उत्तराखंड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पूर्वोत्तर राज्यों और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल-सिक्किम में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. 20-21 जुलाई को जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी भी दी गई है.
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून फिर सक्रिय हो गया है. IMD ने बिहार, यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल, ओडिशा, झारखंड समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. जानिए 18 जुलाई का पूरा मौसम अपडेट और किसानों के लिए जरूरी सलाह.
मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिम बंगाल के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण पूर्वी भारत में बारिश का दौर जारी है. ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है. इसके साथ ही केरल और तटीय कर्नाटक में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है.
मौसम विभाग के अनुसार पश्चिम बंगाल के आसपास बना लो प्रेशर एरिया कमजोर पड़ गया है, लेकिन इसके असर से कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहेगा. 18 जुलाई को बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, झारखंड और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल-सिक्किम समेत कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है.
INCOIS के पूर्वानुमान के अनुसार भारत में अल नीनो का प्रभाव जुलाई 2026 से मार्च 2027 तक बना रह सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक अल नीनो के कारण दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कमजोर पड़ने, बारिश में कमी आने और खेती पर असर पड़ने की आशंका है. महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ी है. विशेषज्ञों का मानना है कि 2015-16 जैसी स्थिति बनने पर फसल उत्पादन, खाद्य कीमतों और वैश्विक कृषि बाजारों पर भी भारी प्रभाव पड़ सकता है.
देश के कई राज्यों में अगले एक सप्ताह तक भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, बिहार, ओडिशा, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत में तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की आशंका है. मौसम विभाग ने किसानों को जलभराव से बचाव और खेती के काम फिलहाल टालने की सलाह दी है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 17 जुलाई के लिए कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. ओडिशा, बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत में तेज बारिश की संभावना है. दिल्ली में आंशिक बादल, उमस और शाम के समय गरज-चमक के साथ हल्की बारिश के आसार हैं, जबकि तापमान 38-40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है.
बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव (लो प्रेशर) के क्षेत्र ने देशभर में मानसून की गतिविधियों को फिर से रफ्तार दे दी है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह सिस्टम अगले दो दिनों में और मजबूत होकर उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ेगा, जिसके असर से पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का दौर तेज बना रहेगा.
UP Weather Today: मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि प्रदेश में मॉनसून की रफ्तार कम होने से उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है. वहीं, लखनऊ में गुरुवार को बादल छाए रहेंगे और शाम तक राजधानी में बारिश हो सकती है. राजधानी लखनऊ में आज अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है.
बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर सिस्टम से मॉनसून फिर सक्रिय हो गया है. मौसम विभाग ने 16-17 जुलाई को ओडिशा, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है.
जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश के बाद अचानक मॉनसून की रफ्तार थम गई है, जिससे किसानों और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है. मौसम विभाग के अनुसार यह मॉनसून का सामान्य "ब्रेक फेज" है, जब मानसूनी ट्रफ पहाड़ी क्षेत्रों की ओर खिसक जाती है और मैदानी इलाकों में बारिश कम हो जाती है. हालांकि अगले कुछ दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत में फिर से बारिश की संभावना जताई गई है.
मॉनसून में मौसम विभाग की ओर से जारी ग्रीन, येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट सिर्फ रंग नहीं, बल्कि खतरे की अलग-अलग चेतावनी होते हैं. हर अलर्ट बारिश की तीव्रता और संभावित नुकसान का संकेत देता है. अगर इनका मतलब पहले से समझ लिया जाए तो किसान से लेकर आम लोग समय रहते जरूरी तैयारी कर सकते हैं और बड़े नुकसान से बच सकते हैं.
महाराष्ट्र के सतारा जिले के पूर्वी हिस्से में मॉनसून के दौरान भी सूखे जैसे हालात बने हुए हैं. बारिश की कमी से अनार, गन्ना, बाजरा और मक्का की फसलें सूख रही हैं. कई गांवों में पानी का संकट गहरा गया है और लोग टैंकरों पर निर्भर हैं. किसानों ने सरकार से मदद और मुआवजे की मांग की है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार उत्तर बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र के कारण 15 जुलाई को पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश तेज होगी. ओडिशा में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय में भी भारी बारिश की संभावना है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने ओडिशा में रेड अलर्ट जारी किया. पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अनुमान, जबकि उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में उमस और गर्मी का असर जारी रहेगा. किसानों और मछुआरों के लिए विशेष परामर्श.
उत्तराखंड के चकराता में मॉनसून की बारिश ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पुल नहीं बनने से छजाड खेड़ा नखारी गांव के लोगों ने उफनती नदी पर पेड़ डालकर अस्थायी पुल बना लिया. जान जोखिम में डालकर नदी पार करते ग्रामीणों का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसने पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी की पोल खोल दी है.
UP News: मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आगामी कुछ दिनों तक प्रदेश के कुछ हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है, जबकि 17-18 जुलाई के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश से मॉनसून के पुनः सक्रिय होने के संकेत हैं. कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि मौसम संबंधी प्रत्येक अपडेट तत्काल कृषि विभाग एवं जिला प्रशासन को उपलब्ध कराया जाए.
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