भारत सरकार खाद्य तेलों में 'आत्मनिर्भरता' बढ़ाना चाहती है, लेकिन जून 2026 में सूखे के कारण खरीफ की मुख्य तिलहनी फसलो सोयाबीन और मूंगफलीको तगड़ा झटका लगा है.मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में सामान्य से 33% से 82% तक कम बारिश हुई है.इस मानसूनी बेरुखी की वजह से सोयाबीन की बुवाई का रकबा और मूंगफली का रकबा बहुत अधिक पिछड़ गया है. अगर 15 जुलाई तक अच्छी बारिश नहीं हुई, तो घरेलू उत्पादन घटने से खाने के तेलों का आयात बढ़ाना पड़ सकता है, जिससे बाजार में कीमतें बढ़ेंगी.
दिल्ली में 2025 में मॉनसून 29 जून को पहुंचा. पिछले 25 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार 2008 में सबसे जल्दी 15 जून और 2021 में सबसे देर से 13 जुलाई को मॉनसून ने राजधानी में दस्तक दी थी. जानिए 2001 से 2025 तक दिल्ली में मॉनसून आगमन की पूरी टाइमलाइन.
चंबा के पांगी क्षेत्र के घिसल धार में बादल फटने से घिसल और हिलौर नालों में अचानक बाढ़ आ गई. भारी बारिश के कारण साच–सैचू संपर्क मार्ग कई जगह बंद हो गया और किसानों की मटर की फसल को बड़ा नुकसान पहुंचा. प्रशासन ने राहत और बहाली कार्य शुरू कर दिया है, हालात पर नजर बनी हुई है.
Rain Alert in UP: आईएमडी के अनुसार, गुरुवार को राजधानी लखनऊ में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है. इसके साथ ही लखनऊ में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है.
देशभर में मॉनसून ने रफ्तार पकड़ ली है. IMD ने गुजरात, मध्य प्रदेश, कोंकण, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. 3 जुलाई के आसपास बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से बारिश और तेज होगी. वहीं, दिल्ली-एनसीआर में 2 जुलाई को बारिश, तेज हवाएं और तापमान में गिरावट के आसार हैं.
कश्मीर घाटी में भीषण गर्मी और लंबे सूखे ने किसानों, बागवानों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. कई इलाकों में तापमान 34-35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. मौसम विभाग ने 2 से 4 जुलाई के बीच हल्की से मध्यम बारिश, कुछ स्थानों पर भारी बारिश और फ्लैश फ्लड की आशंका जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है.
इस साल जून के महीने में मॉनसून ने भारी दगाबाज़ी की है, जिससे पूरे देश में पिछले एक दशक का सबसे सूखा जून दर्ज किया गया और यह सन 1901 के बाद से इतिहास का पांचवां सबसे कम बारिश वाला महीना बन गया है. इस बार बारिश की इस भारी किल्लत के कारण देश के 68% हिस्सों में धान, मक्का, कपास और सोयाबीन जैसी मुख्य खरीफ फसलों की बुवाई बेहद सुस्त पड़ गई है, जबकि उत्तर भारत में तापमान 42°C के पार जाने से लू का प्रकोप लंबा खिंच गया है. अब जून की मायूसी के बाद सबकी आस जुलाई के मॉनसून पर टिकी है, लेकिन मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशांत महासागर में अल-नीनो मजबूत हो रहा है, जिसकी वजह से जुलाई में भी देश भर में औसत से कम बारिश होने का अनुमान है, जो सामान्य से 94% से भी नीचे रह सकती है.
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में मॉनसून ने जोरदार दस्तक दी है, जिससे मूसलाधार बारिश हो रही है. बारिश से तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहावना हो गया है. यह बारिश किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही है, खासकर मक्की और खरीफ फसलों के लिए. मौसम विभाग ने आगे भी बारिश जारी रहने की संभावना जताई है.
UP Weather Today: वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार को प्रदेश में मॉनसूनी गतिविधियां तेज होंगी. उन्होंने बताया कि जुलाई के पहले हफ्ते में यूपी में अच्छी बारिश की संभावना है. मौसम वैज्ञानिक का कहना है कि अब लू का असर पूरी तरह खत्म हो जाएगा और लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी.
देशभर में मॉनसून ने रफ्तार पकड़ ली है. IMD के अनुसार 1 जुलाई को उत्तर, मध्य, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश, आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट है. 3 जुलाई के आसपास बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से मध्य भारत में मॉनसून और सक्रिय होगा.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इस बार बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है, जो LPA के 94% से भी नीचे हो सकती है. जून में 39% बारिश की कमी के बाद देश में जल संकट का खतरा बढ़ गया है. कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से अधिक रहने, उमस बढ़ने और मॉनसून के देरी से पहुंचने की बात कही गई है. दिल्ली-NCR में अगले 2-3 दिनों में मॉनसून पहुंच सकता है, जबकि तेलंगाना समेत कई राज्यों में बारिश का पैटर्न असमान रहने की संभावना है.
सूरत में मॉनसून की पहली जोरदार बारिश से किसानों को बड़ी राहत मिली है. गन्ना, धान और सब्जियों की फसलों को पानी मिलने से किसानों में खुशी है. वहीं, शहर के कई इलाकों, रेलवे अंडरपास, अस्पताल और मंदिरों में जलभराव होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा और प्री-मॉनसून तैयारियों पर सवाल उठे.
इस साल जून में कम बारिश के कारण खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ गई है केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक,देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में कम है,हालांकि यह 10 साल के औसत से थोड़ा बेहतर है.सेंट्रल और नॉर्दर्न रीजन में स्थिति संतोषजनक है, लेकिन ईस्टर्न और साउदर्न राज्यों में पानी की भारी किल्लत है. अब किसानों की निगाहें जुलाई में होने वाली अच्छी बारिश पर टिकी हैं.
जून के कम बारिश का असर देश के खेतों में साफ दिखने लगा है. सुस्त मॉनसून और अलनीनों की वजह से इस साल खरीफ फसलों की कुल बुवाई में करीब 23 फीसदी की भारी गिरावट आई है. पानी की कमी से सबसे बड़ा झटका धान, दलहन और तिलहन को लगा है. धान का रकबा 25% पिछड़ गया है, जबकि दालों की बुवाई में 30.5% की कमी आई है. तिलहन का हाल सबसे बुरा है, जिसमें मुख्य रूप से सोयाबीन की खेती 65.3% तक घट गई है.इसके अलावा, नगदी फसल कपास की बुवाई में भी 34.6% की बड़ी गिरावट दर्ज हुई है. अब खेती की सारी उम्मीदें जुलाई की बारिश पर टिकी हैं.
Rain Alert In UP: मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश में मॉनसून आगमन से पूर्व बढ़ी मौसमी सक्रियता के परिणामस्वरूप तापमान में गिरावट आना आरम्भ होने से आज लू की गतिविधियां प्रदेश के खीरी लखीमपुर एवं प्रयागराज तक सीमित हो गईं. उन्होंने बताया कि प्रदेश में आगामी 24-48 घण्टों के दौर किसी भी समय मॉनसून के एक्टिव होने के बाद कहीं-कहीं भारी वर्षा की संभावना है.
Agriculture News: उन्नत सिंचाई प्रबंधन के तहत केवल सायंकाल या रात में ही नाली अथवा बेसिन विधि से सिंचाई करने और पानी बचाकर केवल फसलों की क्रांतिक अवस्था पर ही सिंचाई करने को कहा गया है. वहीं ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई विधियों को अपनाने और मिश्रित खेती के तहत मक्का के साथ अरहर या मूंग उगाने पर जोर दिया गया है.
देश के अधिकांश हिस्सों में मॉनसून कमजोर बना हुआ है और सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की जा रही है. स्काईमेट के अनुसार इंडियन ओशन डायपोल (IOD) फिलहाल न्यूट्रल से थोड़ा पॉजिटिव रहने के बावजूद अल नीनो के प्रभाव को कम करने में सक्षम नहीं है. जब तक IOD 1.5 डिग्री से ऊपर नहीं जाता, तब तक इसका असर सीमित रहेगा. हालांकि 1 जुलाई से देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश की उम्मीद जताई गई है, जिससे मॉनसून में सुधार की संभावना बन रही है.
25 दिनों के लंबे इंतजार के बाद अकोला में मानसून की पहली अच्छी बारिश हुई, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई शुरू हो गई है. किसान और महिलाएं खेतों में पूरे उत्साह से बीज बो रहे हैं. कृषि विभाग ने सही समय और उचित तरीके से बुवाई करने की सलाह दी है. किसानों को इस साल अच्छी पैदावार और बेहतर फसल की उम्मीद है.
देश में मौसम ने फिर करवट ली है. उत्तर-पूर्व भारत में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश और आसपास के इलाकों में भीषण लू की चेतावनी दी गई है. कई राज्यों में तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना है. मौसम विभाग ने सतर्क रहने की सलाह दी है.
UP Weather Today: IMD के अनुसार, मॉनसून के सक्रिय होने के साथ ही प्रदेश भर में अधिकतम तापमान में 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है. इससे प्रदेश में पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी और उमस से लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. वहीं आगरा, मेरठ, हापुड़, जालौन, झांसी, हमीरपुर, जालौन और महोबा में हीट वेव को लेकर अलर्ट जारी किया गया है.
अकोला में हुई भारी बारिश के बाद नेशनल हाईवे-53 के शिवनी फ्लाईओवर पर जलभराव हो गया, जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. 1 से 2 फीट पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ और हादसे का खतरा बढ़ गया. ड्रेनेज व्यवस्था की खराबी से स्थिति और गंभीर हो गई.
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