विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति विकसित हो चुकी है और जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान इसके मजबूत होने की संभावना है. इससे दुनिया के कई क्षेत्रों में भीषण गर्मी, सूखा, बहुत अधिक बारिश, समुद्री हीटवेव और अन्य चरम मौसमी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है. WMO के अनुसार अधिकांश क्षेत्रों में तापमान सामान्य से अधिक रहेगा, जबकि भारत समेत कई इलाकों में बारिश के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है. संगठन ने संभावित जोखिमों को देखते हुए वैश्विक स्तर पर चेतावनी और तैयारी अभियान शुरू किया है।
कर्नाटक में संभावित सूखे की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार अलर्ट हो गई है. सीएम डी.के. शिवकुमार ने किसानों से अपील की है कि वे बारिश और जलाशयों में उपलब्ध पानी को ध्यान में रखकर ही फसल की बुवाई करें, ताकि भविष्य में सिंचाई की समस्या से बचा जा सके.
मध्य प्रदेश में मॉनसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है. मौसम विभाग ने कई जिलों में रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी करते हुए अगले 2–3 दिनों तक भारी से अति भारी बारिश, तेज हवाओं और बिजली गिरने की चेतावनी दी है.
दक्षिण-पश्चिम Monsoon ने देश के बड़े हिस्से में रफ्तार पकड़ ली है. इस बीच मौसम विभाग (IMD) ने कई राज्यों के लिए भारी से भारी बारिश का अलर्ट (Heavy Rain Alert) जारी किया है.
देशभर में मॉनसून ने रफ्तार पकड़ ली है. मौसम विभाग ने पश्चिम मध्य प्रदेश, ओडिशा, दक्षिण गुजरात, कोंकण, सौराष्ट्र-कच्छ और मध्य महाराष्ट्र में 3 से 5 जुलाई के दौरान अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. दिल्ली-एनसीआर में 3 जुलाई को हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ तापमान में राहत मिलने की संभावना है.
UP Weather Today: वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि लखनऊ में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. वहीं, यह मॉनसूनी बारिश का दौर थमने वाला नहीं है, बल्कि आने वाले आगामी 5 दिनों तक पूरे प्रदेश में मूसलाधार बारिश का यह सिलसिला लगातार जारी रहेगा.
कमजोर मॉनसून और जून में सामान्य से करीब एक-तिहाई कम बारिश के कारण देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण घट गया है. 25 जून तक इनमें कुल क्षमता का केवल 26.4% पानी बचा था. 14 राज्यों में जलस्तर 10 वर्षीय औसत से नीचे है और देश का करीब 37% हिस्सा किसी न किसी स्तर के सूखे की चपेट में है.
देश में मॉनसून सक्रिय हो गया है और कई राज्यों में भारी बारिश हो रही है, लेकिन जून में हुई बारिश की कमी को लेकर चिंता बरकरार है. मुंबई में बाढ़ जैसे हालात, जम्मू-कश्मीर में बादल फटना, उत्तराखंड और हिमाचल में बढ़ते खतरे के बीच सवाल उठ रहा है कि क्या जुलाई से सितंबर की बारिश जून के घाटे की भरपाई कर पाएगी.
भारत सरकार खाद्य तेलों में 'आत्मनिर्भरता' बढ़ाना चाहती है, लेकिन जून 2026 में सूखे के कारण खरीफ की मुख्य तिलहनी फसलो सोयाबीन और मूंगफलीको तगड़ा झटका लगा है.मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में सामान्य से 33% से 82% तक कम बारिश हुई है.इस मानसूनी बेरुखी की वजह से सोयाबीन की बुवाई का रकबा और मूंगफली का रकबा बहुत अधिक पिछड़ गया है. अगर 15 जुलाई तक अच्छी बारिश नहीं हुई, तो घरेलू उत्पादन घटने से खाने के तेलों का आयात बढ़ाना पड़ सकता है, जिससे बाजार में कीमतें बढ़ेंगी.
दिल्ली में 2025 में मॉनसून 29 जून को पहुंचा. पिछले 25 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार 2008 में सबसे जल्दी 15 जून और 2021 में सबसे देर से 13 जुलाई को मॉनसून ने राजधानी में दस्तक दी थी. जानिए 2001 से 2025 तक दिल्ली में मॉनसून आगमन की पूरी टाइमलाइन.
चंबा के पांगी क्षेत्र के घिसल धार में बादल फटने से घिसल और हिलौर नालों में अचानक बाढ़ आ गई. भारी बारिश के कारण साच–सैचू संपर्क मार्ग कई जगह बंद हो गया और किसानों की मटर की फसल को बड़ा नुकसान पहुंचा. प्रशासन ने राहत और बहाली कार्य शुरू कर दिया है, हालात पर नजर बनी हुई है.
Rain Alert in UP: आईएमडी के अनुसार, गुरुवार को राजधानी लखनऊ में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है. इसके साथ ही लखनऊ में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है.
देशभर में मॉनसून ने रफ्तार पकड़ ली है. IMD ने गुजरात, मध्य प्रदेश, कोंकण, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. 3 जुलाई के आसपास बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से बारिश और तेज होगी. वहीं, दिल्ली-एनसीआर में 2 जुलाई को बारिश, तेज हवाएं और तापमान में गिरावट के आसार हैं.
कश्मीर घाटी में भीषण गर्मी और लंबे सूखे ने किसानों, बागवानों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. कई इलाकों में तापमान 34-35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. मौसम विभाग ने 2 से 4 जुलाई के बीच हल्की से मध्यम बारिश, कुछ स्थानों पर भारी बारिश और फ्लैश फ्लड की आशंका जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है.
इस साल जून के महीने में मॉनसून ने भारी दगाबाज़ी की है, जिससे पूरे देश में पिछले एक दशक का सबसे सूखा जून दर्ज किया गया और यह सन 1901 के बाद से इतिहास का पांचवां सबसे कम बारिश वाला महीना बन गया है. इस बार बारिश की इस भारी किल्लत के कारण देश के 68% हिस्सों में धान, मक्का, कपास और सोयाबीन जैसी मुख्य खरीफ फसलों की बुवाई बेहद सुस्त पड़ गई है, जबकि उत्तर भारत में तापमान 42°C के पार जाने से लू का प्रकोप लंबा खिंच गया है. अब जून की मायूसी के बाद सबकी आस जुलाई के मॉनसून पर टिकी है, लेकिन मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशांत महासागर में अल-नीनो मजबूत हो रहा है, जिसकी वजह से जुलाई में भी देश भर में औसत से कम बारिश होने का अनुमान है, जो सामान्य से 94% से भी नीचे रह सकती है.
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में मॉनसून ने जोरदार दस्तक दी है, जिससे मूसलाधार बारिश हो रही है. बारिश से तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहावना हो गया है. यह बारिश किसानों के लिए लाभदायक साबित हो रही है, खासकर मक्की और खरीफ फसलों के लिए. मौसम विभाग ने आगे भी बारिश जारी रहने की संभावना जताई है.
UP Weather Today: वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार को प्रदेश में मॉनसूनी गतिविधियां तेज होंगी. उन्होंने बताया कि जुलाई के पहले हफ्ते में यूपी में अच्छी बारिश की संभावना है. मौसम वैज्ञानिक का कहना है कि अब लू का असर पूरी तरह खत्म हो जाएगा और लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी.
देशभर में मॉनसून ने रफ्तार पकड़ ली है. IMD के अनुसार 1 जुलाई को उत्तर, मध्य, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश, आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट है. 3 जुलाई के आसपास बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से मध्य भारत में मॉनसून और सक्रिय होगा.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इस बार बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है, जो LPA के 94% से भी नीचे हो सकती है. जून में 39% बारिश की कमी के बाद देश में जल संकट का खतरा बढ़ गया है. कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से अधिक रहने, उमस बढ़ने और मॉनसून के देरी से पहुंचने की बात कही गई है. दिल्ली-NCR में अगले 2-3 दिनों में मॉनसून पहुंच सकता है, जबकि तेलंगाना समेत कई राज्यों में बारिश का पैटर्न असमान रहने की संभावना है.
सूरत में मॉनसून की पहली जोरदार बारिश से किसानों को बड़ी राहत मिली है. गन्ना, धान और सब्जियों की फसलों को पानी मिलने से किसानों में खुशी है. वहीं, शहर के कई इलाकों, रेलवे अंडरपास, अस्पताल और मंदिरों में जलभराव होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा और प्री-मॉनसून तैयारियों पर सवाल उठे.
इस साल जून में कम बारिश के कारण खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ गई है केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक,देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में कम है,हालांकि यह 10 साल के औसत से थोड़ा बेहतर है.सेंट्रल और नॉर्दर्न रीजन में स्थिति संतोषजनक है, लेकिन ईस्टर्न और साउदर्न राज्यों में पानी की भारी किल्लत है. अब किसानों की निगाहें जुलाई में होने वाली अच्छी बारिश पर टिकी हैं.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today