मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा. विशेषज्ञों के मुताबिक इससे यूरिया और अमोनिया जैसी खाद की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर खेती और खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है.
FACT के अनुसार भारत में फिलहाल खाद का पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन अगर खाड़ी देशों में संघर्ष लंबे समय तक चला तो सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है. कंपनी ने खरीफ सीजन के लिए तैयारियां होने और किसानों को खाद उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है.
किसान नकदी फसलों की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है. इसलिए किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती कर रहे हैं. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए ये संस्थान तिल की बेस्ट किस्म का बीज बेच रहा है.
Fertilizer Stock: खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव के बीच किसानों के मन में खाद की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ सकती थी, लेकिन सरकार ने खरीफ से पहले बड़ी तैयारी कर ली है. देश में उर्वरकों का भंडार पिछले साल से काफी ज्यादा बताया जा रहा है, जिससे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है. पढ़ें पूरी खबर...
पारादीप में इफको के सल्फ्यूरिक एसिड प्लांट का उद्घाटन करते हुए अमित शाह ने ने कहा कि उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में यह प्लांट सहायक होगा. साथ ही उन्होंने गुजरात के अमूल मॉडल की तरह ओडिशा के गांव-गांव में भी डेयरी सहकारिता का मजबूत नेटवर्क विकसित करने की बात कही.
मौजूदा समय में किसान धान-गेहूं के अलावा सब्जी की खेती बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है. इसलिए किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती कर रहे हैं. किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन खरबूजे की बीज बेच रहा है.
ओडिशा दौरे पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह कई बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत करने जा रहे हैं. पारादीप में इफको का सल्फ्यूरिक एसिड प्लांट राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा, जबकि भुवनेश्वर में सहकारिता, डेयरी और डिजिटल पहल से जुड़े कई अहम कार्यक्रम होंगे.
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल और LNG की कीमतों में उछाल आया है, जिससे भारत में यूरिया और DAP खाद के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. आयात पर निर्भरता, होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और सब्सिडी कटौती के बीच किसानों की लागत बढ़ने की आशंका है.
गुजरात सरकार ने किसानों की लगातार शिकायतों के बाद यूरिया की बोरी के साथ नैनो लिक्विड यूरिया की जबरदस्ती बिक्री पर रोक लगा दी है. एक साल में 41 शिकायतें मिलने के बाद सरकार ने 23 नोटिस जारी किए और 12 डीलरों के लाइसेंस रद्द कर दिए. नए सर्कुलर में साफ निर्देश दिया गया है कि डीलर पारंपरिक यूरिया के साथ नैनो यूरिया अनिवार्य रूप से न बेचें. नैनो यूरिया को आधुनिक और टिकाऊ विकल्प के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है, लेकिन किसानों का आरोप है कि मजबूरन बिक्री से उनकी लागत बढ़ रही थी.
Worl War Fertilizer Revolution History: दुनिया में फर्टिलाइजर क्रांति की शुरुआत उन अमेरिकी मिलिट्री प्लांट्स से हुई जहां पहले और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बम बनाए जाते थे. युद्ध के बाद अमोनियम नाइट्रेट और अमोनिया प्लांट्स को खाद उत्पादन में बदला गया. IFDC के डॉ. यशपाल सहरावत ने ‘किसान तक’ के पॉडकास्ट अन्नगाथा में बताया कि कैसे विस्फोटक बनाने वाली यह तकनीक आगे चलकर आधुनिक कृषि का आधार बनी.
मौजूदा समय में किसान धान-गेहूं के अलावा कुछ खास चीजों की खेती भी बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. इसके लिए सरकार भी किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है.
उर्वरक सब्सिडी को सीधे किसानों के खाते में देने की केंद्र की योजना पर पंजाब में चिंता गहरा रही है. किसानों को डर है कि 270 रुपये की यूरिया बोरी के लिए पहले 2,400 रुपये चुकाने पड़ सकते हैं. यह बदलाव खेती की लागत और कर्ज दोनों बढ़ा सकता है.
खाद को लेकर यूपी के बागपत में एक अनोखी तस्वीर सामने आई, जहां यूरिया की किल्लत ने ऐसा बवाल खड़ा किया कि सहकारी समिति का परिसर ही जंग का मैदान बन गया. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
मौजूदा समय में किसान धान-गेहूं के अलावा सब्जी वाली फसलों की खेती भी बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. इसके लिए सरकार भी किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है. इसलिए किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती कर रहे हैं.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संकेत दिए हैं कि खाद सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने की दिशा में सरकार जल्द बड़ा कदम उठा सकती है. IARI किसान मेले में उन्होंने बताया कि वर्तमान में 1.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी कंपनियों को दी जाती है, जिसे किसानों को डायरेक्ट बेनिफिट के रूप में देने की संभावना पर काम चल रहा है. मंत्री ने अधिकारियों को इस बदलाव के लिए सिस्टम तैयार करने के निर्देश भी दिए.
आज के दौर में किसान सिर्फ दूध बेचकर ही नहीं, बल्कि गोबर के सही बिजनेस से भी लखपति बन सकते हैं. इसका जीता-जागता उदाहरण उत्तर प्रदेश के एक प्रगतिशील किसान हैं, जिन्होंने गोबर के सही मैनेजमेंट से लाखों का बिजनेस खड़ा कर दिया है. हमारे देश में पशुधन की कोई कमी नहीं है, बस जरूरत है इसे कमाई में बदलने की.
किसान मौजूदा समय में धान-गेहूं के अलावा दलहनी फसलों की खेती भी बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. इसके लिए सरकार भी किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है. इसलिए किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती कर रहे हैं.
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