मई-जून का महीना मिट्टी की जांच के लिए सबसे बेहतरीन है क्योंकि रबी और खरीफ की फसलों के बाद जमीन को दोबारा पोषण की जरूरत होती है. जिस तरह खून की जांच से इंसान की सेहत का पता चलता है, ठीक उसी तरह सॉइल टेस्ट से मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी या अधिकता की असलियत सामने आती है. बिना जानकारी के अंधाधुंध केमिकल उर्वरकों का इस्तेमाल न केवल आपकी लागत बढ़ाता है, बल्कि खेत को भी बंजर बनाता है.
होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित होने से वैश्विक खाद कीमतों में उछाल आया है, जिससे भारत का खाद सब्सिडी बिल 2026 में 20% तक बढ़ सकता है. सरकार किसानों को राहत देते हुए MRP स्थिर रखेगी और बढ़ी लागत खुद वहन करेगी.
भारत और रूस मिलकर रूस में एक बड़ा यूरिया प्लांट बना रहे हैं, जो दो साल में तैयार हो सकता है. इस प्रोजेक्ट से हर साल 20 लाख टन यूरिया उत्पादन होगा और पूरा भारत लाया जाएगा. इससे किसानों को सस्ता और समय पर खाद मिलेगी और देश की आयात पर निर्भरता भी कम होगी.
Kharif Season 2026: मुख्य सचिव एसपी गोयल ने जमाखोरी और कालाबाजारी के विरुद्ध अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए. साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि सब्सिडी युक्त उर्वरकों का शत-प्रतिशत वितरण केवल पीओएस मशीनों के माध्यम से ही किया जाए.
वैश्विक कीमतें बढ़ने के बावजूद खरीफ सीजन में उर्वरकों की कमी नहीं होगी. भारत 64 लाख टन यूरिया आयात करेगा, कीमतें जस की तस रहेंगी.
देश के किसान मौजूदा समय में धान-गेहूं के अलावा सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन बैंगन के बीज बेच रहा है.
'संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान' बड़ी सफलता के साथ आगे बढ़ रहा है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की ओर से 24 अप्रैल 2026 को साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस अभियान के जरिए लाखों किसानों तक सही तरीके से खाद के उपयोग करने का संदेश पहुंचाया गया है.
लगातार गेहूं-धान उगाने और केमिकल खाद के इस्तेमाल से हमारी मिट्टी बीमार हो रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है और मुनाफा घट रहा है. इसका सबसे सस्ता और सटीक समाधान 'ढैंचा' यानी हरी खाद है. ढैंचा कम पानी और खराब जमीन में भी आसानी से उग जाता है और मिट्टी को नाइट्रोजन व जरूरी पोषक तत्व देता है. इसे फूल आने से पहले खेत में जोतने से जमीन को 'ह्यूमस' मिलता है और मिट्टी फिर से उपजाऊ बन जाती है. कुल मिलाकर, ढैंचा अपनाकर किसान महंगी खाद का खर्चा बचा सकते हैं और अपनी जमीन की सेहत सुधार सकते हैं.
मौजूदा वित्त वर्ष में भी खाद की सप्लाई मजबूत बनी हुई है. 1 अप्रैल 2026 से 23 अप्रैल 2026 तक खाद की उपलब्धता किसानों की जरूरत से काफी ज्यादा रही. इससे साफ है कि आने वाले खरीफ सीजन के लिए सरकार ने अच्छी तैयारी कर ली है.
छत्तीसगढ़ में खरीफ 2026 के लिए धान, दलहन और तिलहन फसलों के बीजों के नए रेट तय कर दिए गए हैं. अलग-अलग फसलों और किस्मों के अनुसार कीमतों में बदलाव किया गया है, जिससे किसानों को इस सीजन में बीज खरीद की पूरी जानकारी मिल सकेगी.
लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्र कृषि सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि खाद, बीज और कीटनाशक से जुड़े नए कानून लगभग तैयार हैं और सरकार उन्हें अगले सत्र में पास कराने की तैयारी में है. सम्मेलन में राज्यों की भूमिका और कृषि सुधारों पर जोर दिया गया.
गार्डनिंग और सब्जियों की खेती की बढ़ती हुई डिमांड को देखते हुए राष्ट्रीय बीज निगम किसानों की सुविधा के लिए ऑनलाइन 'कैलिफोर्निया वंडर' शिमला मिर्च के बीज बेच रहा है. इस बीच को आप ओएनडीसी के ऑनलाइन स्टोर से खरीद सकते हैं.
मेरठ में आयोजित बासमती बीज वितरण मेले में देश के छह राज्यों से 800 से अधिक किसानों ने भाग लिया, जहां पहले दिन ही करीब 650 क्विंटल बीज वितरित किया गया जिसकी कीमत लगभग 60 लाख रुपये रही और उन्नत किस्मों को किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया.
महाराष्ट्र में खाद-बीज को लेकर सख्त निगरानी के बीच एग्री-इनपुट सेक्टर में बड़ा विरोध सामने आया है. डीलर संगठनों ने अनिश्चितकालीन बंद का ऐलान किया है, जिससे किसानों को सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है.
खरीफ सीजन से पहले सरकार ने राहत दी है कि यूरिया (45 किग्रा) 266.50 रुपये और डीएपी (50 किग्रा) 1350 रुपये की तय कीमत पर ही मिलेंगे. वैश्विक तनाव के बावजूद खाद की सप्लाई में कोई कमी नहीं होगी.
भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए यह खबर अहम मानी जा रही है, क्योंकि यहां खेती के लिए यूरिया और अन्य उर्वरकों की मांग लगातार बनी रहती है. ऐसे में अगर इस देश से खाद का निर्यात होता है तो आने वाले खरीफ सीजन में खाद की कमी नहीं होगी.
खरीफ सीजन से पहले देश में यूरिया की कमी और कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी चिंता बढ़ा रही है. घटते स्टॉक को देखते हुए सरकार ने 25 लाख टन यूरिया आयात करने का फैसला लिया है. इसका मकसद किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना और फसल उत्पादन को सुरक्षित रखना है, ताकि किसी तरह का नुकसान न हो.
मेरठ के मोदीपुरम में 23 अप्रैल को बासमती बीज मेला लगेगा, जहां किसानों को उन्नत और DNA प्रमाणित किस्में तय दर पर मिलेंगी. मेले में कई राज्यों से किसानों के पहुंचने की संभावना है और बीज पहले आओ-पहले पाओ आधार पर वितरित होंगे.
मुंबई के न्हावा शेवा पोर्ट पर DRI ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 132 कंटेनरों में छिपाकर लाई गई करीब 139 करोड़ रुपये की खेप जब्त की. जांच में तरबूज के बीज और हरी मटर को अरहर दाल बताकर आयात करने का मामला सामने आया. इस मामले में आयातक फर्म का संचालक गिरफ्तार हुआ है.
किसान अब तेजी से नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. इसके लिए कृषि मंत्रालय भी किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन खीरे की बेस्ट क्वालिटी का बीज बेच रहा है.
किसान नकदी फसलों की खेती बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. कमाई के लिहाज से किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती करते हैं. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन हरी मिर्च के हाइब्रिड किस्म अर्का मेघना के बीज बेच रहा है.
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