कृषि मंत्रालय और आईसीएआर का 'खेत बचाओ अभियान' देश की खेती-किसानी की सूरत बदलने का एक बड़ा और चौतरफा एक्शन प्लान है. इस मुहिम में सरकार मुख्य रूप से चार मोर्चों पर काम कर रही है—मिट्टी की सेहत सुधारना, पानी की सही बचत, ड्रिप सिंचाई, नकली खाद-दवाइयों पर कड़ा एक्शन और किसानों को सीधे KCC जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ देना. विशेषज्ञों का मानना है कि इस चौतरफा रणनीति से न सिर्फ बंजर होती जमीन बचेगी और फसलों की पैदावार बढ़ेगी, बल्कि किसानों की लागत कम होने से उनकी अच्छी कमाई भी होगी. जब मिट्टी सेहतमंद होगी, तभी देश का हर नागरिक भी पूरी तरह स्वस्थ रहेगा.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर अनिश्चितता के बीच भारत खाद सप्लाई के लिए वैकल्पिक समुद्री रास्तों पर काम कर रहा है. सऊदी के यनबू पोर्ट को लेकर चर्चा तेज है. पढ़ें रिपोर्ट...
‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत के बीच खरीफ सीजन में रासायनिक खादों की मांग में गिरावट दर्ज की गई है, जिसे सरकार के लिए राहत की खबर माना जा रहा है. कम बारिश के अनुमान और देर से धान रोपाई के चलते फिलहाल खाद की खपत घट रही है. हालांकि, आने वाले समय में मांग बढ़ने और वैश्विक हालात के कारण खाद सब्सिडी 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि राज्य में खरीफ सीजन के लिए खाद और बीज की कोई कमी नहीं है. डीएपी की उपलब्धता पर अंतरराष्ट्रीय हालात का असर जरूर पड़ा है, लेकिन सरकार ने एनपीके, एसएसपी और नैनो उर्वरकों जैसे विकल्प उपलब्ध कराए हैं. सरकार रोजाना स्थिति की समीक्षा कर रही है.
गाय, गोरू और गोबर का नारा देने वाला भारत आज केमिकल खादों के लोचे में फंसा है. इन खादों के इस्तेमाल से मिट्टी जहर हो गई है, इसके बावजूद खाद कंपनियां और किसान समझने को तैयार नहीं हैं. आखिर सरकार के नारे के बावजूद बायोफर्टिलाइजर का प्रयोग और बाजार क्यों नहीं बढ़ पा रहा है?
बिहार में इन दिनों एलपीजी सिलेंडर लेने के लिए गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. लेकिन राज्य के भागलपुर जिले के गोराडीह प्रखंड अंतर्गत आने वाली विशनपुर ग्राम पंचायत के लोग घरेलू यानी एलपीजी सिलेंडरों के लिए लाइन में नहीं लग रहे हैं.
शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि सरकार किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध करा रही है, लेकिन इसका मतलब जरूरत से ज्यादा उपयोग नहीं है. सही मात्रा में खाद का उपयोग ही टिकाऊ खेती की कुंजी है.
Moong Farming: वैसे तो किसान मूंग की ज्यादातर खेती जायद सीजन में करते हैं. लेकिन कुछ किस्में ऐसी भी हैं जिनकी खेती खरीफ सीजन में आसानी से की जा सकती है. ऐसे में अगर आप भी खरीफ सीजन में मूंग की बेहतर उपज लेना चाहते हैं तो इस किस्म की खेती कर सकते हैं.
धान की खेती के मौसम में यूरिया की कमी से किसान परेशान हैं. ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों ने गोबर की खाद, बायो-कल्चर और एनपीके खाद जैसे प्रभावी विकल्प सुझाए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इन तरीकों को अपनाकर किसान कम लागत में फसल को पूरा पोषण दे सकते हैं और यूरिया की कमी के बावजूद अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं.
नरसिंहपुर जिले के किसानों के लिए अच्छी खबर! खरीफ फसलों की बोनी से पहले कृषि विभाग ने आश्वासन दिया है कि जिले में यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी सहित सभी प्रमुख उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है.
1 जून से मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से "खेत बचाओ अभियान" की शुरुआत होगी. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद इसकी शुरुआत करेंगे. देशभर में एक महीने तक चलने वाले "खेत बचाओ अभियान" के लिए 1600 से अधिक टीमें बनाई गई हैं.
खरीफ सीजन से पहले कृषि विभाग ने उर्वरकों की कालाबाजारी और अनियमितताओं पर बड़ी कार्रवाई की है. कोरबा और जांजगीर-चांपा में निरीक्षण के दौरान हजारों बोरी खाद जब्त की गईं. कई दुकानों को नोटिस जारी किए गए, जबकि एक प्रतिष्ठान को सीलबंद कर दिया गया.
Khet Bachao Abhiyan: एक जून से शुरू हो रहे 'खेत बचाओ अभियान' का लक्ष्य यूरिया के अंधाधुंध इस्तेमाल को रोकना है, क्योंकि देश में N:P:K का जो आदर्श अनुपात 4:2:1 होना चाहिए, वह 9.3:3.5:1 हो चुका है. अत्यधिक यूरिया से कैंसरकारी 'नाइट्रेट' और खतरनाक 'नाइट्रस ऑक्साइड' गैस पर्यावरण व सेहत को बर्बाद कर रही है. सवाल यह है कि क्या मुनाफा कमाने वाली खाद कंपनियों की चुप्पी के बीच, वैज्ञानिक और किसान मिलकर हमारी धरती को बंजर होने से बचा पाएंगे?
देश में खरीफ सीजन की शुरुआत से ठीक पहले 'खेत बचाओ अभियान' के तहत एक बड़ा फैसला लिया गया है. इसका सबसे पहला और मुख्य टारगेट देश के वो 100 जिले हैं, जहां यूरिया और डीएपी जैसी केमिकल खादों का सबसे ज्यादा 'ओवरडोज़'इस्तेमाल हो रहा है. रसायनों के इस अंधाधुंध इस्तेमाल से खेतों की मिट्टी बीमार होकर बंजर होने की कगार पर पहुंच गई है.
अरुणाचल प्रदेश ने केंद्र से कृषि और बागवानी क्षेत्र के लिए अधिक सहायता की मांग की है. राज्य के कृषि मंत्री गैब्रियल डी. वांगसू ने गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, समय पर फंड जारी करने और पूर्वोत्तर के अनुकूल प्रमाणित बीज किस्मों के विकास पर जोर दिया.
जशपुर जिले में कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डीएपी खाद के नाम पर बेचे जा रहे 17.1 टन संदिग्ध उर्वरक को जब्त किया है.फरसाबहार के खारीबहार गांव में छापेमारी के दौरान 342 बोरी “भूमि शक्ति” उर्वरक बरामद कर सील किया गया। प्रशासन ने किसानों से केवल अधिकृत विक्रेताओं से खाद खरीदने और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत विभाग को देने की अपील की है.
धान की बुवाई से पहले पंजाब और हरियाणा में खाद की भारी कमी हो गई है. DAP, यूरिया, पोटाश और जिंक की उपलब्धता घटने से किसान परेशान हैं और डीलरों पर महंगी व गैर-जरूरी चीजें खरीदने का दबाव बनाने का आरोप लगा रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय सप्लाई बाधाओं के चलते यह संकट और गहरा गया है.
पंजाब में खेती के सीजन के बीच खाद और कृषि दवाइयों की कमी और महंगाई से किसान परेशान हैं. यूरिया और डीएपी की सप्लाई प्रभावित है, जबकि कीमतें बढ़ती जा रही हैं. किसानों ने सरकार से सप्लाई सुधारने और दाम नियंत्रण की मांग की है.
बिहार सरकार ने ई‑कॉमर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नकली और बिना रजिस्ट्रेशन वाले कीटनाशकों की बिक्री के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. कृषि विभाग ने कंपनियों को चेतावनी देते हुए किसानों से केवल रजिस्टर्ड प्रोडक्ट खरीदने की अपील की है.
मॉनसून सीजन से पहले भारत ने 17 लाख टन यूरिया खरीदने के लिए वैश्विक टेंडर जारी किया है. पश्चिम एशिया तनाव और गैस सप्लाई संकट के बीच सरकार खरीफ फसलों के लिए उर्वरक उपलब्धता सुनिश्चित करने में जुटी है.
खरीफ सीजन से पहले करनाल में कृषि विभाग और CM फ्लाइंग स्क्वाड ने खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की. हांसी रोड स्थित एक गोदाम में छापे के दौरान बिना लाइसेंस खाद का बड़ा स्टॉक मिला. प्रशासन ने FIR दर्ज कर कार्रवाई तेज कर दी है और किसानों से सही बिल के साथ ही खरीदारी करने की अपील की है.
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