उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के संयुक्त प्रयास से आयोजित ‘किसान तक का किसान कारवां’ 75 जिलों तक पहुंचकर किसानों के लिए जानकारी और बदलाव का बड़ा मंच बना. 29 दिसंबर 2025 को अमरोहा से शुरू हुई यह यात्रा 4 मई 2026 को गौतमबुद्ध नगर में संपन्न हुई. अब ‘कहानी कारवां की’ सीरीज में जानिए यूपी के 9 एग्रोक्लाइमेटिक जोन्स की खेती, किसानों के अनुभव और सरकारी योजनाओं का असर. आज की कड़ी में पूर्वांचल के ईस्टर्न प्लेन जोन की कहानी।
UP News: कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और एजेंसियों के माध्यम से इसकी टेस्टिंग व खरीद की जाएगी. इससे ग्रामीण क्षेत्र में युवाओं, पशुपालकों और स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे. वहीं, गोबर से खाद तैयार करने के लिए बाकायदा ट्रेनिंग देकर प्रशिक्षक तैयार किए जाएंगे.
अंधाधुंध रासायनिक खादों के इस्तेमाल से हमारी मिट्टी बीमार हो रही है और इनके आयात पर हर साल देश की तिजोरी से करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं. इसीलिए पीएम मोदी ने केमिकल खादों की खपत 50% तक आधी करने की बड़ी अपील की है. आम किसानों में यह डर है कि खाद घटाने से फसल बर्बाद हो जाएगी, लेकिन इसका सबसे सटीक इलाज है 'समेकित पोषण प्रबंधन' (INM). इस वैज्ञानिक तरीके में जैविक खाद, बायो-फर्टिलाइजर जीवाणु खाद और रासायनिक खाद का 1:2:2 के संतुलित अनुपात में इस्तेमाल किया जाता है, जिससे मिट्टी में मददगार सूक्ष्म जीव जिंदा होते हैं, खेती की लागत आधी हो जाती है, बिना किसी नुकसान के पैदावार पूरी मिलती है और हमारे खेत के साथ-साथ देश का कीमती खजाना भी पूरी तरह सुरक्षित रहेगा.
FOM ब्लेंडिंग के जरिए रासायनिक खाद में 10% जैविक खाद मिलाने की योजना से भारत में खेती सस्ती, मिट्टी उपजाऊ और खाद आयात में कमी लाने की तैयारी की जा रही है.
NPK Ratio in India: जरूरत से ज्यादा यूरिया और डीएपी को खेतों में झोंकना बंद करें किसान; बस एक बदलाव और बदल जाएगी खेती की तस्वीर. रासायनिक खादों नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P) और पोटाश (P) का अनुपात 4:2:1 से बिगड़कर 9.3:3.5:1 पर पहुंच गया है. ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल में 50 फीसदी कटौती की अपील को लाचारी मत समझिए.
ईरान संकट और वैश्विक सप्लाई की चिंता के बीच भारत ने रिकॉर्ड 13.5 लाख टन DAP खाद आयात करने का फैसला लिया है. सरकार किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए पहले से तैयारी कर रही है. इस बड़ी खरीद से दुनिया में खाद की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है.
उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे के संयुक्त प्रयास से आयोजित ‘किसान तक का किसान कारवां’ प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचा। 29 दिसंबर 2025 को अमरोहा से शुरू हुई यह यात्रा 4 मई 2026 को गौतमबुद्ध नगर में संपन्न हुई। अब ‘कहानी कारवां की’ सीरीज में हम आपको प्रदेश के 9 एग्रोक्लाइमेटिक जोन्स की खेती, किसानों के अनुभव, वैज्ञानिकों की सलाह और सरकारी योजनाओं की खास जानकारी देंगे। आज जानिए सेंट्रल प्लेन जोन में किसान कारवां की कहानी।
Agriculture News: शाही ने बताया कि वर्ष 2024-25 में सर्वाधिक 28,804 पम्पों का लक्ष्य पूर्ण किया गया. किसानों को 2 एचपी से 10 एचपी तक के पंपों पर 60 प्रतिशत अनुदान (30 प्रतिशत केंद्र तथा 30 प्रतिशत राज्य) प्रदान किया जा रहा है, जिससे कृषि लागत में कमी आ रही है.
Agriculture News: शाही ने आगे बताया कि इस वर्ष राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत 49,129 क्विंटल दलहन बीज (उर्द, मूंग और अरहर) तथा मूंगफली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 57,446 क्विंटल बीज अनुदान पर दिए जाएंगे. वहीं, मूंग के लिए 3,946 क्विंटल, उर्द के लिए 23,958 क्विंटल तथा अरहर के लिए 21,225 क्विंटल का वितरण लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
देश में खाद की संभावित कमी की खबरों के बीच सरकार ने साफ किया है कि देश में खाद की किल्लत नहीं और खरीफ को देखते हुए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. सरकार ने अपील की है कि लोग कमी की आशंका में घबराकर खाद की खरीदारी न करें.
Bulandshahr News: जानकारी के मुताबिक, जिला कृषि अधिकारी आरके यादव की टीम को सूचना मिली थी कि सरकारी गोदाम से खाद की कालाबाजारी की जा रही है. टीम ने पीछा कर अनूपशहर के गंगा पुल पर तीन ट्रकों को रोका, जिनमें 1575 बैग यूरिया लदा था.
भारतीय किसान देश में बड़े स्तर पर धान की खेती करते हैं. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए ये सरकारी संस्था किसानों की सुविधा के लिए ऑनलाइन धान की उन्नत किस्म का बीच बेच रहा है.
भारत में बढ़ता खाद संकट अब खेती और किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. विदेशों पर अधिक निर्भरता, महंगी खाद और सप्लाई में रुकावट ने स्थिति को गंभीर बना दिया है. ऐसे में “मेक इन इंडिया” के जरिए देश में खाद उत्पादन बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों को राहत मिल सके.
CSSRI लखनऊ के वैज्ञानिकों ने पराली जलाने की बड़ी मुसीबत का एक बेहद आसान और सस्ता इलाज ढूंढ निकाला है, उन्होंने 'हेलो केयर' (Halo Care) नाम का एक कमाल का जैविक लिक्विड तैयार किया है, जो सिर्फ 150 रुपये में एक एकड़ खेत की पराली और गन्ने के कचरे को महज एक से तीन हफ्ते में बेहतरीन खाद में बदल देता है.
सूत्रों के मुताबिक, डॉक्टरों और कृषि वैज्ञानिकों की एक समिति ने पैराक्वाट डाइक्लोराइड के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले खतरनाक असर का अध्ययन किया. इसके बाद समिति ने एकमत से इस रसायन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है.
चंडीगढ़ से पहुंची विभाग की टीम ने देर शाम कार्रवाई करते हुए मौके से कई संदिग्ध सामग्री और तैयार उत्पाद जब्त किए. शुरुआती जांच में सामने आया है कि लंबे समय से यह धंधा गुपचुप तरीके से चल रहा था और नकली कृषि उत्पादों की सप्लाई अलग-अलग इलाकों में की जा रही थी.
कीड़े मारने वाली रसायनिक दवाओं का इस्तेमाल सबसे पहले नहीं, बल्कि सबसे आखिर में करना चाहिए. सबसे पहले हमें 'देसी तरीके आजमाने चाहिए, जैसे फसल चक्र बदलना या ऐसी किस्में बोना जिनमें बीमारी कम लगती हो. इसके बाद लाइट ट्रेप या चिपचिपे कार्ड्स का इस्तेमाल करना चाहिए. अगर इनसे भी बात न बने, तो 'बायो-पेस्टीसाइड्स' यानी नीम के तेल या फायदेमंद कीड़ों का सहारा लेना चाहिए.
एक तरफ जहां सरकार खरीफ 2026 सीजन के लिए पूरी तरह तैयार है, वहीं पिछले सालों के आंकड़े सरकार के वादों पर सवाल खड़े करते नजर आ रहे हैं. सरकार सीजन शुरू होने से पहले किसानों को आश्वासन तो देती है, लेकिन जब असल समय आता है, तो किसानों को न सिर्फ़ खाद के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है, बल्कि उन्हें प्रशासन की लाठियां भी खानी पड़ती हैं. इसे देखते हुए यह सवाल उठता है कि अगर सच में देश में खाद की कोई कमी नहीं है, तो फिर सीज़न आने पर किसानों को अपनी फ़सलों के लिए ज़रूरी खाद क्यों नहीं मिल पाती?
किसान पारंपरिक फसलों को छोड़कर सब्जियों वाली फसलों की खेती कर रहे हैं. कमाई के लिहाज से भी किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती करते हैं. ऐसे में राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन सेम की 'अर्का सुप्रिया' किस्म के बीज बेच रहा है.
किसान वर्तमान समय में धान-गेहूं के अलावा सब्जी की खेती बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है. इसलिए किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती कर रहे हैं. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन कद्दू के बीज बेच रहा है.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मार्च-अप्रैल 2026 के दौरान यूरिया उत्पादन में कोई कमी नहीं आई है और पश्चिम एशिया में तनाव का सप्लाई पर असर नहीं पड़ा है. खरीफ सीजन से पहले पर्याप्त स्टॉक और आयात की व्यवस्था कर ली गई है, जिससे किसानों को खाद की उपलब्धता और कीमतों को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है.
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