हरी खाद के रूप में ढैंचा की खेती अपनाकर किसान मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च भी कम कर सकते हैं.ढैंचा के उपयोग से भूमि में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, जिससे प्रति हेक्टेयर 2 से 3 बोरी यूरिया की बचत होती है.
भारत में कोल गैसिफिकेशन की तकनीक पहले भी 1990 के दशक में अपनाई गई थी, लेकिन अधिक लागत, तकनीकी समस्याएं और कम फायदे के कारण कई प्लांट बंद हो गए. वर्तमान में वैश्विक सप्लाई चेन संकट और ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों के चलते सरकार ने इसे आधुनिक तकनीक के साथ फिर से शुरू करने पर जोर दिया है, ताकि देश खाद उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सके.
बिहार सरकार ने फसलों में कीट प्रबंधन और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए ड्रोन छिड़काव की जमीनी जांच के निर्देश दिए हैं. कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि अब गांव स्तर पर सत्यापन, किसानों से फीडबैक और वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा ताकि योजनाओं का असर खेतों में दिखे.
किसान नकदी फसलों की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है. इसलिए किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती कर रहे हैं. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन तिल की RT-372 किस्म का बीज बेच रहा है.
Yogi Cabinet Meeting: इसके साथ ही भूमि और बोए गए रकबे का सत्यापन भूलेख पोर्टल से ऑनलाइन कराया जाएगा. योगी सरकार ने किसानों को त्वरित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था की है कि क्रय एजेंसियों द्वारा खरीदे गए मक्का का मूल्य पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से किसानों के आधार लिंक एवं एनपीसीआई मैप्ड बैंक खातों में यथासंभव 48 घंटे के भीतर हस्तांतरित किया जाएगा.
बिहार के गया जिले में 'खेत बचाओ अभियान' के तहत किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने और संतुलित उर्वरक उपयोग की ट्रेनिंग दी गई. वैज्ञानिकों ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्राकृतिक खेती और मिट्टी परीक्षण के महत्व पर जानकारी दी. कार्यक्रम में 110 किसानों ने भाग लिया.
खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच बैतूल में खाद चोरी का बड़ा मामला सामने आया है. वेयरहाउस से करीब 700 बोरी उर्वरक गायब होने के बाद किसानों और प्रशासन में चिंता बढ़ गई है. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के प्रगतिशील किसान शैलेंद्र कुमार कन्नौजे ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग कर खेती में नई मिसाल पेश की है. नैनो उर्वरकों के इस्तेमाल से उनकी खेती की लागत घटी है, जबकि फसल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.
कृषि मंत्रालय और आईसीएआर का 'खेत बचाओ अभियान' देश की खेती-किसानी की सूरत बदलने का एक बड़ा और चौतरफा एक्शन प्लान है. इस मुहिम में सरकार मुख्य रूप से चार मोर्चों पर काम कर रही है—मिट्टी की सेहत सुधारना, पानी की सही बचत, ड्रिप सिंचाई, नकली खाद-दवाइयों पर कड़ा एक्शन और किसानों को सीधे KCC जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ देना. विशेषज्ञों का मानना है कि इस चौतरफा रणनीति से न सिर्फ बंजर होती जमीन बचेगी और फसलों की पैदावार बढ़ेगी, बल्कि किसानों की लागत कम होने से उनकी अच्छी कमाई भी होगी. जब मिट्टी सेहतमंद होगी, तभी देश का हर नागरिक भी पूरी तरह स्वस्थ रहेगा.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर अनिश्चितता के बीच भारत खाद सप्लाई के लिए वैकल्पिक समुद्री रास्तों पर काम कर रहा है. सऊदी के यनबू पोर्ट को लेकर चर्चा तेज है. पढ़ें रिपोर्ट...
‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत के बीच खरीफ सीजन में रासायनिक खादों की मांग में गिरावट दर्ज की गई है, जिसे सरकार के लिए राहत की खबर माना जा रहा है. कम बारिश के अनुमान और देर से धान रोपाई के चलते फिलहाल खाद की खपत घट रही है. हालांकि, आने वाले समय में मांग बढ़ने और वैश्विक हालात के कारण खाद सब्सिडी 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि राज्य में खरीफ सीजन के लिए खाद और बीज की कोई कमी नहीं है. डीएपी की उपलब्धता पर अंतरराष्ट्रीय हालात का असर जरूर पड़ा है, लेकिन सरकार ने एनपीके, एसएसपी और नैनो उर्वरकों जैसे विकल्प उपलब्ध कराए हैं. सरकार रोजाना स्थिति की समीक्षा कर रही है.
गाय, गोरू और गोबर का नारा देने वाला भारत आज केमिकल खादों के लोचे में फंसा है. इन खादों के इस्तेमाल से मिट्टी जहर हो गई है, इसके बावजूद खाद कंपनियां और किसान समझने को तैयार नहीं हैं. आखिर सरकार के नारे के बावजूद बायोफर्टिलाइजर का प्रयोग और बाजार क्यों नहीं बढ़ पा रहा है?
बिहार में इन दिनों एलपीजी सिलेंडर लेने के लिए गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. लेकिन राज्य के भागलपुर जिले के गोराडीह प्रखंड अंतर्गत आने वाली विशनपुर ग्राम पंचायत के लोग घरेलू यानी एलपीजी सिलेंडरों के लिए लाइन में नहीं लग रहे हैं.
शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा कि सरकार किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध करा रही है, लेकिन इसका मतलब जरूरत से ज्यादा उपयोग नहीं है. सही मात्रा में खाद का उपयोग ही टिकाऊ खेती की कुंजी है.
Moong Farming: वैसे तो किसान मूंग की ज्यादातर खेती जायद सीजन में करते हैं. लेकिन कुछ किस्में ऐसी भी हैं जिनकी खेती खरीफ सीजन में आसानी से की जा सकती है. ऐसे में अगर आप भी खरीफ सीजन में मूंग की बेहतर उपज लेना चाहते हैं तो इस किस्म की खेती कर सकते हैं.
धान की खेती के मौसम में यूरिया की कमी से किसान परेशान हैं. ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों ने गोबर की खाद, बायो-कल्चर और एनपीके खाद जैसे प्रभावी विकल्प सुझाए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इन तरीकों को अपनाकर किसान कम लागत में फसल को पूरा पोषण दे सकते हैं और यूरिया की कमी के बावजूद अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं.
नरसिंहपुर जिले के किसानों के लिए अच्छी खबर! खरीफ फसलों की बोनी से पहले कृषि विभाग ने आश्वासन दिया है कि जिले में यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी सहित सभी प्रमुख उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है.
1 जून से मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से "खेत बचाओ अभियान" की शुरुआत होगी. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद इसकी शुरुआत करेंगे. देशभर में एक महीने तक चलने वाले "खेत बचाओ अभियान" के लिए 1600 से अधिक टीमें बनाई गई हैं.
खरीफ सीजन से पहले कृषि विभाग ने उर्वरकों की कालाबाजारी और अनियमितताओं पर बड़ी कार्रवाई की है. कोरबा और जांजगीर-चांपा में निरीक्षण के दौरान हजारों बोरी खाद जब्त की गईं. कई दुकानों को नोटिस जारी किए गए, जबकि एक प्रतिष्ठान को सीलबंद कर दिया गया.
Khet Bachao Abhiyan: एक जून से शुरू हो रहे 'खेत बचाओ अभियान' का लक्ष्य यूरिया के अंधाधुंध इस्तेमाल को रोकना है, क्योंकि देश में N:P:K का जो आदर्श अनुपात 4:2:1 होना चाहिए, वह 9.3:3.5:1 हो चुका है. अत्यधिक यूरिया से कैंसरकारी 'नाइट्रेट' और खतरनाक 'नाइट्रस ऑक्साइड' गैस पर्यावरण व सेहत को बर्बाद कर रही है. सवाल यह है कि क्या मुनाफा कमाने वाली खाद कंपनियों की चुप्पी के बीच, वैज्ञानिक और किसान मिलकर हमारी धरती को बंजर होने से बचा पाएंगे?
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