सरकार देशी बीजों और पारंपरिक फसलों के संरक्षण को बढ़ावा दे रही है. ICAR, NBPGR और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को देशी किस्मों के संरक्षण, बीज उत्पादन, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता दी जा रही है. जानिए कैसे एक लाख से ज्यादा पारंपरिक किस्मों को सुरक्षित रखा गया है और किसानों को मखाना, मिलेट सहित स्थानीय उत्पादों से जोड़ा जा रहा है.
Kharif Season 2026: कृषि मंत्री शाही ने बताया है कि खरीफ सीजन में फसलों की बुवाई के लिए प्रदेश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है, इसलिए अनावश्यक रूप से उर्वरकों का अग्रिम भंडारण न किया जाए. इसलिए हम उन्हें बीज से लेकर बाजार तक हर सुविधा समय पर उपलब्ध कराया जाएगा.
केंद्र सरकार ने आयातित पोटाश पर निर्भरता कम करने के लिए स्वदेशी उत्पादन और वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने की रणनीति तेज कर दी है. PDM पर खरीफ 2026 के लिए सब्सिडी तय की गई है, जबकि राजस्थान और पंजाब में पोटाश के नए भंडारों की खोज के साथ जैव उर्वरकों के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है.
लोकसभा में केंद्र सरकार ने बताया कि नया कीटनाशक प्रबंधन विधेयक अंतिम चरण में है और इसे व्यापक सुझावों के आधार पर तैयार किया जा रहा है. सरकार ने यह भी कहा कि ई-नाम पर 1.89 करोड़ किसान जुड़ चुके हैं, 10 हजार एफपीओ गठित किए जा चुके हैं.
खरीफ बुवाई के दौरान किसानों तक समय पर उर्वरक पहुंचाने के लिए दक्षिण रेलवे ने अप्रैल-जून 2026-27 में 13.7 लाख टन उर्वरकों की ढुलाई की, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 7 प्रतिशत अधिक है.
UP News: कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि सभी 18 मंडलों में पर्याप्त खाद उपलब्ध है. वहीं, जनपदों में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी होती है तो वे जनपद, मंडल के कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं. उन्होंने कहा, किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है.
Pesticide Toxicity to Bees: कीटनाशकों की वजह से पहले केंचुए मरे, कल मधुमक्खियां होंगी साफ...खेती पर आएगा संकट तो कौन होगा जिम्मेदार? सच तो यह है कि जब तक सरकारी सिस्टम एग्रो-केमिकल कंपनियों के मुनाफे के आगे नतमस्तक रहेगा, तब तक हमारी मिट्टी बेजान होती रहेगी और हमारी थाली में जहर परोसा जाता रहेगा.
संसदीय समिति ने फर्टिलाइज़र PSU में हिस्सेदारी बिक्री (डिसइन्वेस्टमेंट) को लेकर सरकार की आलोचना की है. समिति का कहना है कि खाद्य सुरक्षा, पुराने प्लांट के आधुनिकीकरण और सरकारी फर्टिलाइजर कंपनियों के भविष्य जैसे अहम मुद्दों पर सरकार ने ठीक से जवाब नहीं दिया.
किसानों को यूरिया की कमी से राहत दिलाने और देश की बढ़ती खाद जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने फसलों में एनहाइड्रस अमोनिया के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है. अमोनिया में यूरिया की तुलना में अधिक नाइट्रोजन होने के कारण इसे खाद क्षेत्र में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. यदि प्रयोग सफल रहते हैं तो भारत अमोनिया आधारित नाइट्रोजन खाद का उपयोग करने वाले दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा.
24 जुलाई को रिलीज हुई फिल्म 'द इंडिया स्टोरी' ने खेती में बढ़ते कीटनाशकों, मिलावटी दूध और कैंसर जैसे गंभीर मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है.फिल्म रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव, खाद्य सुरक्षा और किसानों की चुनौतियों को सामने लाते हुए सुरक्षित खेती की आवश्यकता पर सवाल उठाती है.
ऑस्ट्रेलिया में एग्रोकेमिकल कंपनी सिंजेंटा ने नए नियामकीय प्रतिबंधों और बढ़ती लागत का हवाला देते हुए पैराक्वाट खरपतवारनाशी की बिक्री बंद करने का फैसला किया है. हालांकि, जेनेरिक पैराक्वाट उत्पाद किसानों के लिए बाजार में उपलब्ध रहेंगे. यह रसायन 70 से अधिक देशों में पहले से प्रतिबंधित है.
खरीफ 2026 सीजन में किसानों को यूरिया की कमी नहीं होगी. केंद्र सरकार के अनुसार, देश में 163.78 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है, जबकि जरूरत 109.40 लाख मीट्रिक टन है. यानी मांग से करीब 48 फीसदी ज्यादा स्टॉक मौजूद है.
केंद्र सरकार ने सब्सिडी वाली खाद की बिक्री को जमीन और फसल के आधार पर करने के लिए 20 राज्यों के 40 जिलों में पायलट परियोजना शुरू की है. सरकार का कहना है कि इससे जरूरत के अनुसार खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी होगी.
हिमाचल प्रदेश के सेब बागानों में अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट, मार्सोनिना लीफ ब्लॉच और अन्य रोगों के बढ़ते खतरे को देखते हुए नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है. विशेषज्ञों ने रोग पहचान, संतुलित पोषण प्रबंधन, मिट्टी-पत्ती जांच, जल निकासी व्यवस्था और फफूंदनाशकों के सही उपयोग पर जोर देते हुए सेब उत्पादकों को समय रहते बचाव उपाय अपनाने की सलाह दी है.
केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसानों के बैंक खातों में सीधे खाद सब्सिडी भेजने की कोई योजना नहीं है. मौजूदा DBT प्रणाली के तहत आधार प्रमाणीकरण के बाद उर्वरक कंपनियों को ही सब्सिडी का भुगतान जारी रहेगा.
क्या हमारी थाली में परोसा जाने वाला खाना ही बीमारी की वजह बन सकता है? 'द इंडिया स्टोरी' इसी गंभीर सवाल को कोर्टरूम ड्रामा के जरिए उठाती है. श्रेयस तलपड़े और काजल अग्रवाल की यह फिल्म खाने में मिलावट, कीटनाशकों और बढ़ते कैंसर जैसे मुद्दों पर चर्चा करती है.
Glyphosate Files: जो केमिकल अमेरिका या यूरोप की जनता की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है वो भारत के लोगों के लिए अच्छा कैसे हो सकता है? यही वो बुनियादी सवाल है जिससे एग्रो केमिकल लॉबी को बहुत डर लगता है. इसीलिए अब केंद्र सरकार के निशाने पर ग्लाइफोसेट जैसा विवादित खरपतवारनाशक है. कृषि विशेषज्ञों का साफ कहना है कि इंसानी सेहत और पर्यावरण को दांव पर लगाकर मुनाफे की खेती नहीं की जा सकती.
जहरीले पेस्टिसाइड और सुरक्षित भोजन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है. आज सिनेमाघरों में रिलीज हो रही फिल्म 'द इंडिया स्टोरी' खेती में रासायनिक कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल और उसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों पर सवाल उठाती है.
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने देश में उर्वरकों के असंतुलित उपयोग पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि NPK अनुपात 9.8:3.7:1 तक पहुंच गया है, जबकि 4:2:1 आदर्श माना जाता है. यूरिया के अधिक इस्तेमाल से मिट्टी की सेहत और फसलों की उत्पादकता प्रभावित हो रही है.
ओडिशा में खरीफ सीजन के दौरान खाद की उपलब्धता को लेकर सियासी विवाद बढ़ गया है. BJD ने भाजपा सरकार पर यूरिया और डीएपी की कमी, कालाबाजारी और किसानों को समय पर खाद नहीं मिलने का आरोप लगाया है.
बरसात का मौसम धनिया उगाने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. अगर आप घर की बालकनी, छत या किचन गार्डन में ताजा और खुशबूदार धनिया उगाना चाहते हैं, तो ये किस्म आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है. जानिए इस उन्नत किस्म के बीज ऑनलाइन कहां मिलेंगे.
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