भारत में 2025-26 के दौरान इम्पोर्टेड यूरिया पर सरकारी सब्सिडी एक साल में 128.4 प्रतिशत बढ़कर 47,956.24 करोड़ रुपये पहुंच गई. RTI के जरिए मिले आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक बाजार में ऊंची कीमतों, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और आयात पर निर्भरता के कारण सरकार का सब्सिडी बोझ लगातार बढ़ रहा है. हालांकि किसानों के लिए यूरिया की कीमत फिलहाल स्थिर रखी गई है, लेकिन इसकी लागत का बड़ा हिस्सा सरकार उठा रही है.
इफको-एमसी क्रॉप साइंस ने अपने पहले बड़े प्रोडक्ट लॉन्च कार्यक्रम 'स्वर्णारंभ 2026' में धान की प्रमुख बीमारियों के नियंत्रण के लिए पेटेंटेड फफूंदनाशी 'मित्सुकी' और स्प्रे की प्रभावशीलता बढ़ाने वाले सिलिकॉन एडजुवेंट 'नेक्सावेट' को बाजार में उतारा. कंपनी ने इसे किसानों के लिए आधुनिक फसल सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है.
महाराष्ट्र के बीड जिले में 20 से अधिक किसानों ने एक सोलर पावर कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. किसानों का दावा है कि कंपनी द्वारा किए गए खरपतवारनाशी के छिड़काव से कपास, अरहर और पपीते की खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.
खरीफ सीजन के बीच बिहार सरकार ने खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त रुख अपनाया है. कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने उर्वरक बिक्री में अनियमितता मिलने पर रिटेलर, थोक विक्रेता और कंपनियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. राज्य में पर्याप्त खाद भंडार होने का दावा करते हुए सभी जिलों में विशेष निरीक्षण अभियान चलाने को कहा गया है.
सरकार का दावा है कि 'भारत' ब्रांड से देश में नकली खाद, कालाबाजारी और किल्लत की परेशानी खत्म हो चुकी है. संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक, चालू खरीफ सीजन के लिए देश में यूरिया और डीएपी जैसे पर्याप्त उर्वरक का स्टॉक मौजूद है. 'एक देश, एक खाद' योजना से बेवजह ट्रांसपोर्ट का खर्चा बचा है और किसानों को सही कीमत पर अच्छी क्वालिटी मिल रही है. डिजिटल ट्रैकिंग से खाद की सप्लाई पर लगातार नजर रखी जा रही है, इसलिए किसानों को किसी भी अफवाह से बचना चाहिए.
गोंडा में बारिश के बीच खाद लेने के लिए महिलाओं और किसानों की लंबी कतारों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. जिला कृषि अधिकारी ने कहा कि जिले में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है. जिले में 17 हजार मीट्रिक टन से अधिक यूरिया और 6 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा डीएपी उपलब्ध है.
उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी में नकली लिक्विड यूरिया बनाने वाली अवैध फैक्ट्री का खुलासा हुआ है. पुलिस और कॉपीराइट टीम ने छापेमारी कर सब्सिडी वाली यूरिया से तैयार किए जा रहे फर्जी उत्पाद को पकड़ा. मौके से 70 बोरी यूरिया, करीब 100 बाल्टी लिक्विड यूरिया और पैकिंग सामग्री बरामद हुई है. मामले की जांच जारी है.
मई और जून में कमजोर मॉनसून के कारण सुस्त पड़ी खाद की मांग जुलाई में अच्छी बारिश के साथ फिर बढ़ने लगी. खरीफ फसलों की बुवाई तेज होने से किसानों ने सबसे ज्यादा सब्सिडी वाला यूरिया खरीदा. वहीं, कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में भी मांग बढ़ने की उम्मीद है.
नरसिंहपुर में खाद वितरण के लिए नई हाईब्रिड व्यवस्था लागू कर दी गई है. अब किसान टोल-फ्री नंबर या डबल लॉक केंद्रों से टोकन लेकर निर्धारित समय पर उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे.प्रशासन का दावा है कि इससे खाद वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और लंबी कतारों से राहत मिलेगी.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राजनांदगांव में प्रस्तावित करीब 10,500 करोड़ रुपये की गैस आधारित यूरिया परियोजना को जल्द मंजूरी देने का आग्रह किया.
NAFED के निदेशक अशोक ठाकुर ने किसान तक से खास बातचीत में बताया कि संगठन ने दलहन खरीदी क्षमता 1.25 लाख टन से बढ़ाकर 76 लाख टन कर दी है.साथ ही 7 लाख टन प्याज बफर स्टॉक, किसानों के बच्चों की पढ़ाई पर मुनाफे का 1% खर्च करने की योजना और मध्य प्रदेश की प्याज खरीद में आने वाली चुनौतियों पर भी खुलकर बात की.
खरीफ सीजन के चलते अगस्त में यूरिया की मांग बढ़ने की संभावना है. हालांकि सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि यूरिया की कोई कमी नहीं है. अधिकारियों के अनुसार, कई जिलों में जरूरत से अधिक यूरिया का स्टॉक उपलब्ध है.
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में यूरिया खाद खरीदने के लिए किसानों, महिलाओं और बुजुर्गों को करीब 100 फीट ऊंचे पानी के टैंक पर चढ़कर बायोमेट्रिक सत्यापन कराना पड़ा. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं.
UP News: शाही ने किसानों को आश्वस्त किया कि योगी सरकार रबी सीजन में भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने देगी. इसके लिए प्रमाणित बीजों की उपलब्धता और वितरण की तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है. उन्होंने बताया कि बीज वितरण के लिए 10 जुलाई को पोर्टल खोला जा चुका है और सितंबर के पहले सप्ताह में ई-लॉटरी के माध्यम से किसानों का चयन कर समय से बीज उपलब्ध कराया जाएगा.
सरकार देशी बीजों और पारंपरिक फसलों के संरक्षण को बढ़ावा दे रही है. ICAR, NBPGR और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को देशी किस्मों के संरक्षण, बीज उत्पादन, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता दी जा रही है. जानिए कैसे एक लाख से ज्यादा पारंपरिक किस्मों को सुरक्षित रखा गया है और किसानों को मखाना, मिलेट सहित स्थानीय उत्पादों से जोड़ा जा रहा है.
Kharif Season 2026: कृषि मंत्री शाही ने बताया है कि खरीफ सीजन में फसलों की बुवाई के लिए प्रदेश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है, इसलिए अनावश्यक रूप से उर्वरकों का अग्रिम भंडारण न किया जाए. इसलिए हम उन्हें बीज से लेकर बाजार तक हर सुविधा समय पर उपलब्ध कराया जाएगा.
केंद्र सरकार ने आयातित पोटाश पर निर्भरता कम करने के लिए स्वदेशी उत्पादन और वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देने की रणनीति तेज कर दी है. PDM पर खरीफ 2026 के लिए सब्सिडी तय की गई है, जबकि राजस्थान और पंजाब में पोटाश के नए भंडारों की खोज के साथ जैव उर्वरकों के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है.
लोकसभा में केंद्र सरकार ने बताया कि नया कीटनाशक प्रबंधन विधेयक अंतिम चरण में है और इसे व्यापक सुझावों के आधार पर तैयार किया जा रहा है. सरकार ने यह भी कहा कि ई-नाम पर 1.89 करोड़ किसान जुड़ चुके हैं, 10 हजार एफपीओ गठित किए जा चुके हैं.
खरीफ बुवाई के दौरान किसानों तक समय पर उर्वरक पहुंचाने के लिए दक्षिण रेलवे ने अप्रैल-जून 2026-27 में 13.7 लाख टन उर्वरकों की ढुलाई की, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 7 प्रतिशत अधिक है.
UP News: कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि सभी 18 मंडलों में पर्याप्त खाद उपलब्ध है. वहीं, जनपदों में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी होती है तो वे जनपद, मंडल के कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं. उन्होंने कहा, किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है.
Pesticide Toxicity to Bees: कीटनाशकों की वजह से पहले केंचुए मरे, कल मधुमक्खियां होंगी साफ...खेती पर आएगा संकट तो कौन होगा जिम्मेदार? सच तो यह है कि जब तक सरकारी सिस्टम एग्रो-केमिकल कंपनियों के मुनाफे के आगे नतमस्तक रहेगा, तब तक हमारी मिट्टी बेजान होती रहेगी और हमारी थाली में जहर परोसा जाता रहेगा.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today