भारत की सूखी मिर्च के निर्यात पर मेथामिडोफोस नाम के जहरीले कीटनाशक के अवशेषों के कारण संकट खड़ा हो गया है. जानिए यह क्या होता है, कैसे बनता है और इंसानी सेहत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका क्या असर पड़ता है.
खरीफ सीजन 2026 में मध्य प्रदेश सरकार ने खाद वितरण के लिए ई-विकास प्रणाली लागू कर दी है। अब किसानों को उर्वरक प्राप्त करने के लिए पहले ऑनलाइन ई-टोकन बुक करना होगा। फार्मर आईडी अनिवार्य होने से बिना आईडी वाले किसानों को खाद मिलने में परेशानी हो सकती है।
नागपुर में पुलिस ने नकली कपास बीज बेचने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए 798 पैकेट जब्त किए हैं और 2 लोगों को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई वाडी क्षेत्र में की गई. जब्त बीजों की जांच कृषि विभाग कर रहा है. खरीफ सीजन में किसानों को ठगी से बचाने के लिए प्रशासन सख्त कार्रवाई कर रहा है.
पंजाब में खरीफ 2026 सीजन के लिए यूरिया की कोई कमी नहीं है. केंद्र सरकार ने बताया कि राज्य में मांग से अधिक 10.71 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया गया है. पर्याप्त बफर स्टॉक और मजबूत आपूर्ति व्यवस्था के चलते किसानों को खाद की कोई दिक्कत नहीं होगी. सरकार ने निर्बाध सप्लाई का भरोसा दिया है.
बीजापुर जिले को केंद्र सरकार की एफएफएस (Framework for Fertilizer Sale) योजना के तहत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है.नई डिजिटल व्यवस्था में किसान मोबाइल ऐप से यूरिया, डीएपी सहित अन्य उर्वरकों की एडवांस बुकिंग कर सकेंगे और ई-टोकन के जरिए खाद प्राप्त करेंगे. इससे लंबी कतारों, कालाबाजारी और वितरण संबंधी अनियमितताओं पर रोक लगेगी तथा किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो सकेगी.
हरियाणा में धान की रोपाई से पहले यूरिया और डीएपी खाद की कमी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है. खेत और पौध तैयार होने के बावजूद किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल रही. किसानों का कहना है कि समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने से खेती प्रभावित हो सकती है. उन्होंने सरकार से जल्द समाधान की मांग की है.
सरगुजा जिले में किसानों की शिकायत पर कृषि विभाग और जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 640 बोरी यूरिया खाद जब्त की है। जांच में निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक बिक्री और अवैध भंडारण की अनियमितताएं सामने आईं
हरियाणा सरकार ने खरीफ सीजन से पहले खाद उपलब्धता को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं. कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को खाद के लिए इंतजार न करना पड़े. सरकार ने स्टॉक, वितरण और जमाखोरी रोकने पर सख्ती के संकेत दिए हैं.
उत्तर प्रदेश में धान सीजन के बीच खाद की उपलब्धता को लेकर मिली-जुली स्थिति सामने आई है. जहां चंदौली, बांदा, सहारनपुर और देवरिया जैसे जिलों में पर्याप्त खाद उपलब्ध है, वहीं पीलीभीत में जरूरत के अनुसार सप्लाई नहीं मिल रही. फिरोजाबाद और मुजफ्फरनगर में कालाबाजारी की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे किसान परेशान हैं. प्रशासन का दावा है कि राज्य में खाद की कमी नहीं है, लेकिन जमीनी स्तर पर वितरण और नियमों के कारण दिक्कतें बनी हुई हैं.
रायपुर में ICAR-NIBSM द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत 170 से अधिक किसानों को उन्नत धान बीज वितरित किए गए. किसानों को उच्च उत्पादन वाली धान किस्मों के साथ वैज्ञानिक खेती, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, नर्सरी एवं रोपाई तकनीकों की जानकारी भी दी गई.
महाराष्ट्र के अकोला में यूरिया खाद के लिए 8 दिनों से लाइन में खड़े किसानों को ‘आज तक’ की ग्राउंड रिपोर्ट के बाद बड़ी राहत मिली. खबर प्रसारित होते ही प्रशासन हरकत में आया और कूपन सिस्टम लागू किया गया. अब किसानों को व्यवस्थित तरीके से खाद मिल रही है, जिससे उनकी लंबे समय से चली आ रही परेशानी कम हुई है.
Glyphosate Files: भारत में खतरनाक एग्रो केमिकल बिक रहे हैं तो इसके दो बड़े गुनहगार हैं. मल्टीनेशनल एग्रोकेमिकल कंपनियां और आंखें मूंदे बैठे सरकारी नियामक संस्थान और उसके अधिकारी. ये कंपनियां अपनी बोतलों पर चमकीले विज्ञापन छापती हैं, लेकिन कम पढ़े-लिखे किसानों को यह कभी नहीं सिखातीं कि इसका छिड़काव कैसे करना है. जब सरकार कहती है कि ग्लाइफोसेट के इस्तेमाल के लिए ट्रेंड स्प्रेयर लाओ, तो ये अपनी जिम्मेदारी से भागने लगती हैं.
भारत में खादों की खपत का पैटर्न बदल रहा है, जहां पारंपरिक यूरिया के बजाय संतुलित NPK खादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे मिट्टी की सेहत सुधारने और फसल उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल रही है.
महाराष्ट्र के अकोला जिले के अकोट में यूरिया खाद के लिए किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. खरीफ सीजन के बीच किसान रात 3 बजे से कृषि केंद्रों के बाहर लंबी कतारों में खड़े हैं. पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद बढ़ती मांग और कमी की आशंका से किसानों में चिंता और बेचैनी बढ़ गई है.
सक्ती जिले के ग्राम केसला में कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से भंडारित 3.87 टन (86 बोरी) यूरिया उर्वरक जब्त किया है.किसानों को उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए प्रशासन लगातार सख्ती बरत रहा है.
खरीफ 2026 सीजन में किसानों के बीच ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. अब तक 11.17 लाख टन ऑर्गेनिक खाद खरीदी जा चुकी है, जो पिछले साल की तुलना में करीब 3.5 गुना ज्यादा है.
क्या पैराक्वाट डाइक्लोराइड बनाने-बेचने वाली कंपनियों और नीति-निर्माताओं की नजर में भारत के नागरिकों की सेहत की कोई कीमत नहीं है? जब आस्ट्रिया, यूनाइटेड किंगडम, स्विट्जरलैंड और चीन अपने लोगों को बचाने के लिए इसे बैन कर सकते हैं, तो भारत के खेतों में इसे खुलेआम झोंकने की वकालत किस आधार पर की जा रही है? जानिए इस 'खतरनाक जहर' की पूरी कहानी
देश में करीब 30% पेस्टिसाइड बाजार नकली और घटिया उत्पादों के कब्जे में है. राजस्थान समेत कई राज्यों में ऐसे जहर जैसे केमिकल्स खुलेआम बिक रहे हैं, जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं और किसानों की जान जा रही है. बैन के बावजूद खतरनाक कीटनाशक बाजार में उपलब्ध हैं, जिससे सरकार की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
धान रोपाई का सीजन शुरू होने से पहले किसानों की चिंता बढ़ गई है। डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, खाद की सीमित उपलब्धता और संभावित बिजली संकट के कारण खेती की लागत में इजाफा होने की आशंका है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन परिस्थितियों में धान की खेती पर प्रति हेक्टेयर करीब 1,500 रुपये तक अतिरिक्त खर्च आ सकता है, जिससे किसानों का मुनाफा प्रभावित होगा।
Side Effects of Pesticides: कीटनाशकों से किसानों की मौत की सबसे कड़वी हकीकत यह है कि मल्टीनेशनल कंपनियों ने भारत के ग्रामीण बाजारों में अपने जानलेवा केमिकल को बेचकर अरबों रुपये का मुनाफा तो कमाया, लेकिन कभी भी इसके सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर किसानों को जागरूक करने का देशव्यापारी कार्यक्रम नहीं चलाया. आखिर पैराक्वाट डाइक्लोराइड और ग्लाइफोसेट जैसे खतरनाक केमिकल भी भारत में बैन क्यों नहीं हो रहे? क्या हमारे देश में लोगों की सेहत की कोई कीमत नहीं है?
गुना जिले में खाद संकट के कारण किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं. नानाखेड़ी केंद्र पर दूर-दूर से पैदल आए किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल रही है. एक किसान की भावुक तस्वीर सामने आई, जहां वह अपनी पीड़ा बताते हुए रो पड़ा. प्रशासन ने व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए हैं, लेकिन किसान अभी भी संकट में हैं.
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