भारत में किसान अब केवल अधिक उत्पादन पर नहीं, बल्कि मिट्टी की सेहत, उत्पादन लागत और टिकाऊ खेती पर भी ध्यान दे रहे हैं. पिछले 30 वर्षों में जैव और नीम आधारित कीटनाशकों का उपयोग 62 गुना बढ़ा है. जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और सूक्ष्मजीव आधारित कृषि आदानों की बढ़ती मांग यह बता रही है कि भारतीय कृषि धीरे-धीरे वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल खेती की ओर बढ़ रही है.
कश्मीर में पॉपलर और विलो पेड़ों पर नए कीट Drosicha turkistanica के हमले से किसानों की चिंता बढ़ गई है. यह कीट पेड़ों का रस चूसकर उन्हें कमजोर करता है और ज्यादा संक्रमण में पेड़ सूख सकते हैं. विशेषज्ञों ने बाहर से आने वाली पौध सामग्री की सही क्वारंटीन, जांच और निगरानी मजबूत करने की जरूरत बताई है.
Varanasi News:बैठक के दौरान दिलीप स्वामी ने कहा कि महाराष्ट्र के किसान बड़ी मात्रा में टमाटर, मिर्च, बैंगन, प्याज और पत्तेदार सब्जियों की खेती करते हैं और निर्यात से अच्छा लाभ कमा रहे हैं, परंतु वर्तमान में कीटनाशकों व रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी, पानी, किसान के स्वास्थ्य और सब्जी की गुणवत्ता पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ रहा है.
किसानों के लिए खाद खरीदना अब आसान होगा. ई-विकास 2.0 के तहत जबरन कॉम्बो की बाध्यता खत्म, टोकन की सीमा हटाई गई और जल्द WhatsApp से खाद का टोकन व स्टॉक की जानकारी मिलेगी. जानिए नई व्यवस्था में किसानों को क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी.
UP News: उप्र कृषि विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, 20 अगस्त, 2026 तक प्रदेश में कुल 26.35 लाख मेट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है. इसमें 11.97 लाख मेट्रिक टन यूरिया, 4.77 लाख मेट्रिक टन डीएपी, 4.98 लाख मेट्रिक टन एनपीके, 3.53 लाख मेट्रिक टन एसएसपी तथा 1.10 लाखमेट्रिक टन एमओपी शामिल है.
हरियाणा में आगामी रबी सीजन को लेकर कृषि विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं. कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने अधिकारियों को किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण गेहूं, चना और मसूर के बीज के साथ यूरिया, डीएपी और एनपीके की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. राज्य में गेहूं बीज और उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.
खेतों में केमिकल के अंधाधुंध इस्तेमाल से हमारी मिट्टी, पानी, वतावरण और थाली जहरीली हो रही है और ग्लोबल स्तर पर भी हमारे कृषि उत्पादों की साख गिर रही है. बार बार पीएम मोदी, कृषि मंत्री शिवराज सिंह सहित राज्य सरकारें बार-बार सुरक्षित खेती की अपील कर रही हैं, इसके बावजूद भी यह बर्बादी क्यों जारी है? आखिर मुनाफे के लिए इंसानी सेहत, वतावरण और देश की साख से खिलवाड़ रोकने में हमारा सिस्टम इतना नाकाम और मूकदर्शक क्यों बना है?
उर्वरक की कालाबाजारी और किसानों को खाद के साथ दूसरे उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करने के मामलों पर कृषि मंत्री ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने व्यवस्था सुधारने के लिए 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है. साथ ही चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों और दुकानदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
Fertilizer Distribution: प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सीडीओ को प्रतिदिन तथा जिलाधिकारी को साप्ताहिक स्तर पर उर्वरक उपलब्धता एवं वितरण की समीक्षा करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि उर्वरक की ओवररेटिंग अथवा अनधिकृत टैगिंग से संबंधित शिकायत किसी भी स्थिति में प्राप्त नहीं होनी चाहिए.
शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री के 'सप्तधारा' विजन का ज़िक्र करते हुए बताया कि सरकार फूड प्रोसेसिंग के काम को तेज़ करेगी,जिससे किसानों की जेब में सीधा और ज्यादा मुनाफा आए। उन्होंने साफ कहा कि आज पूरी दुनिया को अच्छी क्वालिटी का शुद्ध खाना चाहिए. इस ग्लोबल डिमांड को पूरा करने के लिए हम किसानों को केमिकल-फ्री खेती करने के लिए पूरी तरह से सपोर्ट करेंगे.
राजस्थान में खाद की कमी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने दावा किया कि सरकारी गोदामों में 3 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा खाद मौजूद है, फिर भी किसान घंटों लाइन में लगने के बाद खाली हाथ लौट रहे हैं. गहलोत ने खाद की कालाबाजारी और महंगे दामों पर बिक्री का आरोप लगाते हुए सरकार से किसानों तक खाद पहुंचाने की मांग की.
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक धान किस्मों को आधुनिक विज्ञान से नई पहचान मिली है. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के सहयोग से लंबी धान किस्मों को बौना बनाया गया है. बौनी सफरी, जावा फूल और दुबराज जैसी किस्मों से फसल गिरने की समस्या कम हुई है और किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ अधिक आमदनी का लाभ मिल रहा है.
पाटन के ग्राम केमोरी में कृषि अधिकारियों ने उड़द की नई किस्म IPU-13-01 का खेत निरीक्षण किया. इस दौरान किसानों को किस्म की विशेषताओं के साथ फसल प्रबंधन, कीट-रोग नियंत्रण और बेहतर उत्पादन के लिए आवश्यक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई.
मध्य प्रदेश में रबी सीजन के लिए किसानों को खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ‘हर किसान हर घर, हर खेत खाद’ अभियान 20 अगस्त से शुरू होगा. सरकार की योजना किसानों को रबी फसलों के लिए जरूरी उर्वरक पहले से उपलब्ध कराने की है. पढ़ें डिटेल...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर 'शक्ति की सप्तधारा' का विजन सामने रखा। इसमें कृषि और फूड प्रोसेसिंग को अहम ताकत बताते हुए किसानों को खेत से ग्लोबल मार्केट तक जोड़ने, मिलेट्स, मसाले और चावल को ग्लोबल ब्रांड बनाने पर जोर दिया। साथ ही 1 करोड़ युवाओं को AI ट्रेनिंग और 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य घोषित किया गया।
आज देश की कृषि व्यवस्था दोहरे संकट में है. एक तरफ अंधाधुंध घातक केमिकल के इस्तेमाल से हमारी थाली परोसा हुआ जहर बन रही है, जिससे गंभीर बीमारियां फैल रही हैं. दूसरी तरफ विदेशों में भारतीय आम, चावल और मसालों के कंसाइनमेंट रिजेक्ट होने से वैश्विक बाजार में देश की साख धूल में मिल रही है. इस राष्ट्रीय आपदा के लिए कोई और नहीं, बल्कि हमारा लचर कृषि सिस्टम, सप्लाई चेन और एक्सपोर्ट से जुड़े विभाग सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं.
केंद्र सरकार धान, कपास, सब्जियों और बागवानी फसलों में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक कार्बोसल्फान पर पाबंदियां लगाने पर विचार कर रही है. CIB&RC की सिफारिश के बाद सरकार इसी महीने अंतिम फैसला ले सकती है. इससे किसानों के कीटनाशक इस्तेमाल और कृषि उत्पादों के निर्यात पर असर पड़ सकता है. वहीं, पैराक्वाट पर भी प्रतिबंध का प्रस्ताव पहले से जारी है.
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में खाद की किल्लत के बीच किसानों की बेबसी सामने आई है. खाद लेने के लिए किसान आधार कार्ड और पट्टे की फोटो कॉपी जमीन पर बिछाकर अपनी बारी सुरक्षित कर रहे हैं. पर्याप्त खाद, अव्यवस्थित वितरण और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर किसानों में भारी नाराजगी है.
तेलंगाना के मेदक जिले में यूरिया की किल्लत और ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था के बीच एक बुजुर्ग किसान का वीडियो वायरल हो गया. स्मार्टफोन और डिजिटल जानकारी के अभाव में किसान ने PACS कर्मचारी के पैर छूकर यूरिया के दो बैग देने की गुहार लगाई. घटना के बाद किसानों ने ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम खत्म करने और पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मांग की.
छत्तीसगढ़ में कृषि विकास को नई रफ्तार मिली है। कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक 25.52 लाख किसानों को ₹35,892.90 करोड़ की सहायता दी गई.कृषि यंत्रीकरण, ड्रिप-स्प्रिंकलर सिंचाई, प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है. 21 मंडियां e-NAM से जुड़ी हैं और कृषि अवसंरचना निधि में ₹3,026 करोड़ की उपलब्धि दर्ज की गई है.
भारत के लिए यूरिया को लेकर राहत की खबर सामने आई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में नरमी के संकेत मिले हैं. भारत को जून के मुकाबले करीब 12 फीसदी कम कीमत पर यूरिया खरीदने के ऑफर मिले हैं.
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