आज देश की कृषि व्यवस्था दोहरे संकट में है. एक तरफ अंधाधुंध घातक केमिकल के इस्तेमाल से हमारी थाली परोसा हुआ जहर बन रही है, जिससे गंभीर बीमारियां फैल रही हैं. दूसरी तरफ विदेशों में भारतीय आम, चावल और मसालों के कंसाइनमेंट रिजेक्ट होने से वैश्विक बाजार में देश की साख धूल में मिल रही है. इस राष्ट्रीय आपदा के लिए कोई और नहीं, बल्कि हमारा लचर कृषि सिस्टम, सप्लाई चेन और एक्सपोर्ट से जुड़े विभाग सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं.
केंद्र सरकार धान, कपास, सब्जियों और बागवानी फसलों में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक कार्बोसल्फान पर पाबंदियां लगाने पर विचार कर रही है. CIB&RC की सिफारिश के बाद सरकार इसी महीने अंतिम फैसला ले सकती है. इससे किसानों के कीटनाशक इस्तेमाल और कृषि उत्पादों के निर्यात पर असर पड़ सकता है. वहीं, पैराक्वाट पर भी प्रतिबंध का प्रस्ताव पहले से जारी है.
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में खाद की किल्लत के बीच किसानों की बेबसी सामने आई है. खाद लेने के लिए किसान आधार कार्ड और पट्टे की फोटो कॉपी जमीन पर बिछाकर अपनी बारी सुरक्षित कर रहे हैं. पर्याप्त खाद, अव्यवस्थित वितरण और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर किसानों में भारी नाराजगी है.
तेलंगाना के मेदक जिले में यूरिया की किल्लत और ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था के बीच एक बुजुर्ग किसान का वीडियो वायरल हो गया. स्मार्टफोन और डिजिटल जानकारी के अभाव में किसान ने PACS कर्मचारी के पैर छूकर यूरिया के दो बैग देने की गुहार लगाई. घटना के बाद किसानों ने ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम खत्म करने और पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मांग की.
छत्तीसगढ़ में कृषि विकास को नई रफ्तार मिली है। कृषक उन्नति योजना के तहत खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक 25.52 लाख किसानों को ₹35,892.90 करोड़ की सहायता दी गई.कृषि यंत्रीकरण, ड्रिप-स्प्रिंकलर सिंचाई, प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य पालन में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है. 21 मंडियां e-NAM से जुड़ी हैं और कृषि अवसंरचना निधि में ₹3,026 करोड़ की उपलब्धि दर्ज की गई है.
भारत के लिए यूरिया को लेकर राहत की खबर सामने आई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में नरमी के संकेत मिले हैं. भारत को जून के मुकाबले करीब 12 फीसदी कम कीमत पर यूरिया खरीदने के ऑफर मिले हैं.
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) और ICAR-इंडियन शुगरकेन रिसर्च इंस्टीट्यूट (ICAR-ISRI) के बीच हुए समझौते के तहत लखनऊ में गन्ने के हाई क्वालिटी बीज के लिए एक एडवांस्ड सेंटर लगाया जाएगा. इसका मकसद किसानों तक बीमारी-मुक्त और अधिक उपज देने वाले गन्ना बीज पहुंचाना, उत्पादन बढ़ाना, चीनी रिकवरी में सुधार करना और इथेनॉल उद्योग को मजबूत करना है. इससे उत्तर प्रदेश समेत उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लाखों गन्ना किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है.
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में 15 अगस्त से किसानों के लिए ऑनलाइन खाद वितरण सिस्टम शुरू होगा. ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल’ के जरिए किसान मोबाइल से खाद का रियल टाइम स्टॉक देख सकेंगे और नजदीकी पंजीकृत विक्रेता के यहां ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे.
छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की बोनी ने रफ्तार पकड़ ली है.11 अगस्त तक प्रदेश में 45.62 लाख हेक्टेयर में बोनी पूरी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 94% है. किसानों को अब तक 11.23 लाख मीट्रिक टन खाद और 4.55 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित किया गया है. वहीं, किसानों को 7,487.46 करोड़ रुपये का अल्पकालीन कृषि ऋण भी दिया जा चुका है.
Side Effects of Pesticides: भारत में विदेशी कंपनियों के कीटनाशकों का कारोबार खूब फल फूल रहा है. इस बीच, चीन के स्वामित्व वाली कंपनी सिंजेंटा को भारत सरकार ने बड़ा झटका दिया है. यहां उसके कैंसर के खतरे वाले हर्बिसाइड को मंजूरी देने से मना कर दिया गया है. कीटनाशकों का रजिस्ट्रेशन करने वाली कृषि मंत्रालय की कमेटी ने इसके पीछे दो बड़ी वजह बताई है. किसान तक की सीरीज 'जहर के खिलाफ जंग' के 20वें पार्ट में पढ़ें पूरा मामला...
कैलिफोर्निया ने खेतों में खरपतवार नियंत्रण के लिए इस्तेमाल होने वाले पैराक्वाट को धीरे-धीरे बंद करने की प्रक्रिया शुरू की है. इस रसायन को लेकर मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर संभावित खतरों की चिंता जताई गई है. आखिर पैराक्वाट क्या है, इसका इस्तेमाल क्यों होता है, किसानों पर क्या असर पड़ेगा और दुनिया में इसे लेकर बहस क्यों बढ़ रही है? जानिए पूरी कहानी.
सरकार के मुताबिक 2023-26 के दौरान 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से फल-सब्जियों के 70,652 सैंपल जांचे गए. इनमें 2,223 सैंपल यानी 3.1 फीसदी में कीटनाशक अवशेष FSSAI की तय MRL सीमा से ज्यादा मिले. आखिर MRL क्या है, यह आंकड़ा कितना चिंताजनक है और फल-सब्जियों को लेकर उपभोक्ताओं को क्या समझना चाहिए? जानिए आसान भाषा में पूरी कहानी.
Glyphosate Files: सेहत के लिए बेहद खतरनाक माने जाने वाले हर्बिसाइड 'ग्लाईफोसेट' को पूरी तरह से बैन करने की बजाय भारत सरकार इसके 'सुरक्षित उपयोग' का एक ऐसा 'कानूनी कवच' पहनाने की तैयारी में है, जिससे एग्रो केमिकल कंपनियों का धंधा भी मजे से चलता रहे और जनता की नजर में कृषि मंत्रालय के अधिकारी महान भी बन जाएं. आईए, पूरे खेल को समझने की कोशिश करते हैं.
देश में खरीफ सीजन के लिए यूरिया का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, लेकिन NP और NPKS जैसे कॉम्पलेक्स खादों पर संकट गहराता दिख रहा है. पश्चिम एशिया संकट और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से उत्पादन लागत बढ़ गई है. खाद कंपनियां सरकार से न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) बढ़ाने की मांग कर रही हैं ताकि उत्पादन और सप्लाई प्रभावित न हो.
IIVR वाराणसी ने किसानों तक उन्नत सब्जी बीज पहुंचाने के लिए 9 किस्मों का लाइसेंस दो निजी बीज कंपनियों को दिया है.इनमें काशी उदय मटर, काशी सुहावनी चौलाई, काशी बारामासी पालक, काशी हरित कद्दू, काशी गंगा लौकी, काशी ज्योति तोरई, काशी प्रतिष्ठा करेला, काशी संपदा बाकला और काशी आर्द्रा मूली शामिल हैं.
खरीफ सीजन में खाद की संभावित कमी और बढ़ती मांग को देखते हुए ओडिशा सरकार ने कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्ती शुरू कर दी है. सरकार ने जिला कलेक्टरों को खाद के स्टॉक और बिक्री पर नजर रखने और गड़बड़ी करने वाले व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
किसानों को सस्ती दर पर यूरिया उपलब्ध कराने के लिए सरकार को अब पहले से कहीं ज्यादा सब्सिडी खर्च करनी पड़ रही है. RTI से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में विदेशी यूरिया पर सब्सिडी 128.4% बढ़कर 47,956 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई.
भारत में 2025-26 के दौरान इम्पोर्टेड यूरिया पर सरकारी सब्सिडी एक साल में 128.4 प्रतिशत बढ़कर 47,956.24 करोड़ रुपये पहुंच गई. RTI के जरिए मिले आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक बाजार में ऊंची कीमतों, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और आयात पर निर्भरता के कारण सरकार का सब्सिडी बोझ लगातार बढ़ रहा है. हालांकि किसानों के लिए यूरिया की कीमत फिलहाल स्थिर रखी गई है, लेकिन इसकी लागत का बड़ा हिस्सा सरकार उठा रही है.
इफको-एमसी क्रॉप साइंस ने अपने पहले बड़े प्रोडक्ट लॉन्च कार्यक्रम 'स्वर्णारंभ 2026' में धान की प्रमुख बीमारियों के नियंत्रण के लिए पेटेंटेड फफूंदनाशी 'मित्सुकी' और स्प्रे की प्रभावशीलता बढ़ाने वाले सिलिकॉन एडजुवेंट 'नेक्सावेट' को बाजार में उतारा. कंपनी ने इसे किसानों के लिए आधुनिक फसल सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है.
महाराष्ट्र के बीड जिले में 20 से अधिक किसानों ने एक सोलर पावर कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. किसानों का दावा है कि कंपनी द्वारा किए गए खरपतवारनाशी के छिड़काव से कपास, अरहर और पपीते की खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.
खरीफ सीजन के बीच बिहार सरकार ने खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त रुख अपनाया है. कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने उर्वरक बिक्री में अनियमितता मिलने पर रिटेलर, थोक विक्रेता और कंपनियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. राज्य में पर्याप्त खाद भंडार होने का दावा करते हुए सभी जिलों में विशेष निरीक्षण अभियान चलाने को कहा गया है.
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