मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायक दल ने किसानों के मुद्दों पर जोरदार प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने खाद संकट, MSP, खरीदी में अनियमितता और मुआवजे को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
बरसात का मौसम सहजन (मोरिंगा) लगाने का सबसे अच्छा समय माना जाता है. अगर आप कम लागत में लंबे समय तक अच्छी कमाई देने वाला पौधा लगाना चाहते हैं, तो सहजन की उन्नत किस्म बेहतरीन विकल्प हो सकती है.
प्रदेश में किसानों को नकली बीज, खाद और कीटनाशकों से बचाने के लिए कृषि विभाग ने गुणवत्ता नियंत्रण अभियान तेज कर दिया है। लगातार निरीक्षण, सैंपल जांच और सख्त कार्रवाई के जरिए किसानों तक प्रमाणित कृषि आदान पहुंचाने तथा कृषि उत्पादकता और आय बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 'भारत NPK' नाम से बिक रहे अमोनियम सल्फेट उर्वरक को लेकर विवाद गहरा गया है. भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, संदिग्ध खाद की बिक्री पर रोक और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. दूसरी ओर अमोनियम सल्फेट उर्वरक के बैग पर एनपीके (NPK) अंकित होने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL) ने स्पष्टीकरण जारी किया है.
Side Effects of Pesticides: पैराक्वाट डायक्लोराइड को बैन करने का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी हो गया है, लेकिम ग्लाइफोसेट का क्या होगा? क्या सरकार इसे भी बैन करने की हिम्मत दिखाएगी? ग्लाइफोसेट संभावित कैंसरकारी और हार्मोन बिगाड़ने वाला विलेन बताया गया है. यह महिलाओं के हार्मोनल सिस्टम को बुरी तरह डैमेज करता है. इस केमिकल के खिलाफ दुनिया भर की अदालतों में कैंसर के हजारों मामले चल रहे हैं, फिर भी भारत में इसे क्यों बेचा जा रहा है?
लद्दाख प्रशासन ने खेती को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए रासायनिक और सिंथेटिक खाद के इस्तेमाल, बिक्री और खरीद पर तत्काल रोक लगा दी है. नियम तोड़ने वालों पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. प्रशासन का उद्देश्य लद्दाख को जैविक खेती वाला क्षेत्र बनाना, मिट्टी और जल संसाधनों की रक्षा करना है.
महाराष्ट्र सरकार ने बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की गुणवत्ता से जुड़ी किसानों की शिकायतों के निपटारे के लिए नई व्यवस्था लागू की है. अब हर शिकायत की जांच सात दिनों के भीतर होगी. तालुका स्तर की समितियों का फिर से गठन किया गया है.
मॉनसून की धीमी शुरुआत के बावजूद खरीफ 2026 सीजन के लिए देश में खाद का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है. 10 जुलाई 2026 तक भारत में 319.66 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध रही, जबकि जुलाई की जरूरत केवल 73.93 लाख मीट्रिक टन थी. यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी और एमओपी समेत सभी प्रमुख खादों का भंडार मजबूत स्थिति में है. सरकार ने एडवांस खरीद और बेहतर वितरण व्यवस्था के जरिए किसानों के लिए खाद आपूर्ति सुनिश्चित की है, जिससे बुवाई तेज होने पर भी किसी तरह की कमी की आशंका नहीं है.
अगर आप इस मॉनसून में पपीते की खेती शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो ये किस्म आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. यह उन्नत किस्म कम देखभाल में भी एक पौधे से 80 से 100 किलो तक फल देने की क्षमता रखती है. जानिए इसकी खासियत और बीज की कीमत
महाराष्ट्र के अकोला में खराब सोयाबीन बीजों के मामले पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा. किसान कृषि अधीक्षक कार्यालय 'रिश्वत का पेड़' लेकर पहुंचे. यहां उन्होंने कृषि विभाग और बीज कंपनियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए विरोध किया.
दिल्ली में गोबर अब बेकार नहीं जाएगा. MCD और NDDB ने तीन कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) प्लांट लगाने के लिए समझौता किया है. इससे यमुना में गोबर जाने से रोका जाएगा, स्वच्छ ऊर्जा बनेगी और पशुपालकों को गोबर बेचने पर आय भी होगी.
वैश्विक सप्लाई चेन में अनिश्चितताओं के बीच केंद्र सरकार उर्वरक सुरक्षा को मजबूत करने में जुटी है. RTI के जवाब में सरकार ने संकेत दिया है कि खाद, कच्चे माल और इंटरमीडिएट उत्पादों की निर्बाध उपलब्धता के लिए कई स्तरों पर रणनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं.
केंद्र सरकार ने कहा है कि किसानों को नकली बीज, खाद और कीटनाशकों से बचाने के लिए सख्त कानून लागू हैं. राज्यों में क्वालिटी जांच के लिए निरीक्षक नियुक्त किए गए हैं, जो खराब या नकली कृषि उत्पाद मिलने पर लाइसेंस रद्द करने, माल जब्त करने और कोर्ट में मुकदमा चलाने जैसी कार्रवाई कर सकते हैं. फसल नुकसान की स्थिति में किसान शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर से राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव का शुभारंभ किया. किसान कल्याण वर्ष के तहत 16 विभागों के समन्वय से किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्यव्यापी अभियान शुरू किया गया. इस दौरान डेयरी पर 10 लाख रुपये तक अनुदान, दिन में कृषि बिजली, फूड प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार समेत कई बड़ी घोषणाएं की गईं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया-2026 को मंजूरी दी है. इस नीति का उद्देश्य देश में यूरिया उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता घटाना और उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना है.
महाराष्ट्र के अकोला में खराब सोयाबीन बीजों के मामले पर भाजपा विधायक हरीश पिंपले ने बीज कंपनियों और कृषि विभाग पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि समय पर जांच होती तो किसानों को दोबारा बुवाई नहीं करनी पड़ती.
छत्तीसगढ़ विधानसभा में खरीफ सीजन के दौरान खाद और बीज की कमी को लेकर जोरदार हंगामा हुआ. कांग्रेस ने DAP, पोटाश और धान के बीज की कमी का आरोप लगाते हुए सरकार को किसान विरोधी बताया.
Paraquat Dichloride Ban: पैराक्वाट डाइक्लोराइड को चिकित्सा जगत में 'काल' माना जाता है, क्योंकि इसके संपर्क में आने पर जान बचाना लगभग नामुमकिन होता है. इसके कोई एंटीडोट न होने और इलाज के दौरान फेफड़ों के तेजी से गलने के कारण यह अत्यधिक जानलेवा है यह लिवर, किडनी को डैमेज करने के साथ ही त्वचा और आंखों के लिए भी गंभीर खतरा है.
धान की फसल में अंधाधुंध यूरिया डालने से किसानों की लागत बढ़ रही है और जमीन की सेहत खराब हो रही है. इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए वैज्ञानिक '4R' तकनीक अपनाने की सलाह दे रहे हैं. यह फॉर्मूला फसलों को यूरिया की सही खुराक, सही समय और सही तरीके से देने पर जोर देता है. इससे यूरिया की भारी बचत होती है और खेती का खर्च घटता है. कम खाद में भी धान की बंपर पैदावार हासिल की जा सकती है.
सूरजमुखी की खेती किसानों के लिए एक लाभदायक नकदी फसल का विकल्प बनती जा रही है. ऐसे में अगर आप इस खरीफ सीजन सूरजमुखी की खेती करने की योजना बना रहे हैं तो ये खास वैरायटी अपना सकते हैं.
खरीफ सीजन के बीच किसानों के लिए उर्वरकों की बढ़ती कीमतें नई चिंता बन गई हैं. सॉल्यूबल फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SFAI) के अनुसार, अगर इस बार कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश होती है तो पानी में घुलनशील उर्वरकों की मांग बढ़ सकती है.
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