अपनी खुशबू और स्वाद के लिए मशहूर काला नमक चावल की खेती में किसान अब जैविक तरीकों को तेजी से अपना रहे हैं. कम लागत में बेहतर उत्पादन के लिए जैविक खादें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और फसल को मजबूत बनाने में मदद कर रही हैं. जानिए इन देसी खादों को बनाने का आसान तरीका.
छत्तीसगढ़ के दुर्ग में जिले में किसानों का अनोखा प्रदर्शन देखने को मिला. दरअसल, किसानों ने खाद, बीज और प्रधानमंत्री आवास योजना की मांग को लेकर गांव के तालाब के अंदर जाकर जल सत्याग्रह किया.
मधुमक्खियां हमारी खेती-किसानी की आत्मा हैं और हमारा हर निवाला इन्हीं के अस्तित्व का कर्जदार है. सरसों, सूरजमुखी से लेकर तमाम फलों और सब्जियों की पैदावार इन्हीं नन्हे परागणकों के दम पर सांस लेती है. ये मधुमक्खियां खेतों से लेकर जंगलों तक कुदरत के पूरे फूड चेन को एक धागे में पिरोकर रखती हैं. मगर कितनी शर्मनाक बात है कि आज भारतीय तंत्र में देश की खाद्य सुरक्षा को दांव पर लगाकर, बड़ी कंपनियों के मुनाफे के लिए इन्हें मारने वाले केमिकल बेचे और खेतों में डाले जा रहे हैं.
खरीफ सीजन में उर्वरकों की कालाबाजारी और अवैध बिक्री पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने बिलासपुर जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 12.65 टन यूरिया और सुपर फॉस्फेट उर्वरक की बिक्री पर रोक लगा दी.बिना प्राधिकार पत्र खाद बेचने के मामले में विक्रेता को नोटिस जारी किया गया है और लाइसेंस निलंबन की चेतावनी दी गई है.
यारा इंडिया ने भारतीय खेती में अपने 15 साल पूरे होने पर नई सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट जारी की है। कंपनी ने '5Cs' फ्रेमवर्क के जरिए फैक्ट्रियों के प्रदूषण को कम करने और डिजिटल तकनीक से लाखों किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। इस सफर में उन्होंने "ऑपरेशन मूनशॉट" से लॉजिस्टिक्स का धुआं 52.41% घटाया, रिकॉर्ड पानी की बचत की और 'किरण' योजना से हजारों महिलाओं को आगे बढ़ाया. अब कंपनी का पूरा फोकस जैविक खादों को बढ़ाने और पूरी तरह इको-फ्रेंडली बनने पर है.
मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के हित में ‘सूचनादाता प्रोत्साहन योजना-2026’ लागू की है. इस योजना के तहत नकली खाद, उर्वरकों की कालाबाजारी, अवैध बिक्री और मिलावटी उर्वरकों की सूचना देने वाले व्यक्ति को सफल कार्रवाई होने पर ₹1000 की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. शिकायत सीएम किसान हेल्पलाइन 155253 पर दर्ज कराई जा सकती है.
देश में उर्वरकों के बेहतर उपयोग और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए फिक्की के कार्यक्रम में ‘न्यूट्रिएंट यूज एफिशिएंसी’ बढ़ाने पर जोर दिया गया. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर एस. महेंद्र देव ने ‘न्यूट्रिएंट क्रेडिट सिस्टम’ बनाने का सुझाव दिया, जिसमें किसानों को मिट्टी सुधार और संतुलित पोषण अपनाने पर प्रोत्साहन मिल सके.
खरीफ सीजन की बुवाई के बीच किसानों के लिए राहत की खबर है. पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद यूरिया, डीएपी और सल्फर लेकर 4 रासायनिक खाद जहाज सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं. सरकार के अनुसार देश में खाद का कुल स्टॉक 196.08 लाख टन पहुंच गया है, जिससे आपूर्ति मजबूत रहने की उम्मीद है.
मथुरा जिले में मक्के की फसल को लेकर किसानों की परेशानी बढ़ गई है. किसानों का कहना है कि खेतों में मक्के की फसल ऊपर से पूरी तरह हरी-भरी दिखाई दे रही है, लेकिन जब भुट्टे तैयार हुए तो उनमें दाने ही नहीं आए हैं, जिससे किसान परेशान हैं.
कृषि मंत्री ने जयपुर के विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र (VKI) स्थित उर्वरक इकाई का निरीक्षण किया. छापेमारी में सामने आया कि एक सीलबंद फैक्टरी में कथित तौर पर नमक के कचरे का इस्तेमाल कर म्यूरिएट ऑफ पोटाश (MOP) जैसा उत्पाद तैयार किया जा रहा था और इसे किसानों को पोटाश खाद के नाम पर बेचा जा रहा था.
भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (IIVR), वाराणसी ने किसानों और एफपीओ प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर निर्यातोन्मुख सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने की रणनीति पर चर्चा की. विशेषज्ञों ने मिर्च और अन्य सब्जियों के गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, सुरक्षित खेती और निर्यात मानकों की जानकारी दी.
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने और होर्मुज स्ट्रेट खुलने से भारत को बड़ी राहत मिली है. खाद से लदे 16 जहाज, जो स्ट्रेट में फंसे हुए थे, अब भारत पहुंच सकेंगे. इससे खरीफ सीजन में यूरिया और डीएपी की कमी दूर होगी और किसानों को समय पर उर्वरक मिल पाएगा.
Dimethoate: डाइमेथोएट नाम का कीटनाशक बाजार में धड़ल्ले से बिक रहा है. किसानों के बीच लोकप्रिय है, क्योंकि नए सुरक्षित केमिकल की तुलना में यह बेहद सस्ता है. किसानों में इसकी दीवानगी की सबसे बड़ी वजह इसकी 'टू-इन-वन' मारक क्षमता है, जो पौधे के भीतर समाकर रस चूसने वाले कीड़ों के साथ-साथ सीधे संपर्क में आने वाले कीटों को भी एक ही झटके में साफ कर देती है. लेकिन क्या आपको पता है कि यह जहर डीएनए को भी नुकसान पहुंचा देता है.
राजस्थान के बारां जिले के छबड़ा कस्बे में खाद संकट और किसानों के विरोध के बाद प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू की है. शुक्रवार से खेल मैदान में खाद के टोकन बांटे जा रहे हैं. आज के लिए कुल 2800 बैग खाद उपलब्ध कराई गई है.
खरीफ सीजन के बीच जालना सांसद कल्याण काले ने केंद्र सरकार से ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल’ ऐप को अस्थायी रूप से रोकने की मांग की है. उनका कहना है कि तकनीकी दिक्कतों, किसानों की सीमित डिजिटल जानकारी और पर्याप्त प्रशिक्षण की कमी से उर्वरक बुकिंग और वितरण प्रभावित हो सकता है.
हैदराबाद स्थित भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (IIOR) ने एक नई सीड कोटिंग तकनीक विकसित की है. इस तकनीक से बीजों की क्वालिटी, अंकुरण क्षमता और पौधों की शुरुआती बढ़त को बेहतर किया जा सकता है.
बालोद जिले में खरीफ 2026-27 के लिए हल्दी और अदरक की खेती को बढ़ावा देने हेतु उद्यानिकी विभाग किसानों को 49,800 रुपये तक का अनुदान देगा. योजना का लाभ ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर मिलेगा.
Monocrotophos: विशेषज्ञ कमेटियों का गठन असल में किसी गंभीर मुद्दे को ठंडे बस्ते में डालने और खास लॉबी को 'राहत' देने का एक आजमाया हुआ प्रशासनिक नुस्खा सा लगता है. जब-जब इस जानलेवा जहर पर पूरी तरह बैन करने की बात उठी, तब-तब यह जानते हुए भी कि WHO ने इसे इंसानी सेहत के लिए 'अत्यंत घातक' घोषित किया हुआ है, 'समीक्षा' के नाम पर नया ड्राफ्ट लाकर कंपनियों को इससे कमाई करने के चोर-दरवाजे दे दिए गए.
ICAR द्वारा विकसित नई उन्नत प्याज किस्में किसानों के लिए बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफे का अवसर लेकर आई हैं. इन किस्मों में 324 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज, 6 महीने तक भंडारण क्षमता तथा प्रमुख रोगों और कीटों के प्रति बेहतर सहनशीलता जैसी विशेषताएं हैं, जिससे विभिन्न जलवायु क्षेत्रों के किसानों को लाभ मिलेगा.
Fertilizer Booking by APP: कृषि निदेशक ने बताया कि इस नई डिजिटल व्यवस्था को सुचारू रूप से धरातल पर उतारने के लिए सरकार रिटेल काउंटर्स को भी तेजी से अपडेट कर रही है. दोनों जनपदों में सक्रिय कुल 3,758 उर्वरक खुदरा विक्रेताओं में से 296 रिटेलर्स के पीओएस (POS) उपकरणों को पहले ही दिन नवीनतम 3.77वी संस्करण में सफलतापूर्वक अपग्रेड कर दिया गया है.
वाराणसी में आईसीएआर-भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान में आयोजित बैठक में कृषि विशेषज्ञों, एफपीओ प्रतिनिधियों और किसानों ने खेत बचाओ अभियान, संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती पर चर्चा की. गोपाल भाई सुतारिया ने कहा कि गाय आधारित प्राकृतिक खेती अपनाकर ही कृषि का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है.
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