यूरिया की किल्लत को लेकर लगातार किसानों में गुस्सा देखा जा रहा है.कुछ ऐसी ही स्थिति उदयपुर जिले के मावली क्षेत्र के खेमली कस्बे में देखने को मिली, जहां खाद वितरण को लेकर उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जिसके बाद नाराज किसान ने मोटरसाइकिल जला दी.
उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित ‘बिस्मिल’ नाम की नई अधिक पैदावार देने वाली गन्ना किस्म CoSha 17231 को अब यूपी के अलावा हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान में भी खेती की मंजूरी मिल गई है. रेड रॉट रोग प्रतिरोधी यह किस्म किसानों की आय और चीनी उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी.
सर्दी आते ही किसान सब्जी वाली फसलों की खेती करने लगे हैं. इस दौरान किसान बैंगन की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं. लेकिन खेती के समय किसान कई बार इस सोच में पड़ जाते हैं कि किन किस्मों की खेती से अधिक पैदावार मिल सकती है. ऐसे किसानों के लिए आज हम बैंगन की एक खास किस्म के बारे में बताएंगे.
Sugarcane Seed: इस सम्बन्ध में विभाग द्वारा बताया गया कि अब तक बीज गन्ना उत्पादक के रूप में 2823 कृषक पंजीकृत थे जिनमें से कुल 593 बीज उत्पादकों का पंजीकरण वैध पाया गया है तथा 2230 फर्जी गन्ना बीज उत्पादकों का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है.
भारत सरकार ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 का मसौदा जारी किया है, जो कीटनाशक अधिनियम 1968 की जगह लेगा. विधेयक में ट्रेसबिलिटी, डिजिटल प्रक्रिया, नकली कीटनाशकों पर सख्त सजा और टेस्टिंग लैब की अनिवार्य एक्रेडिशन जैसे किसानों के हित वाले प्रावधान शामिल हैं. आम जनता 4 फरवरी 2026 तक सुझाव दे सकती है.
सरकार Seeds Bill 2025 पर आगे बढ़ रही है. 9,000 सुझावों के बाद फरवरी में बिल संसद में आ सकता है. इससे बीज कंपनियों और विक्रेताओं पर निगरानी बढ़ेगी, जबकि किसानों के अधिकार सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी. पढ़िए कृषि सचिव ने क्या कहा...
यूरिया की बढ़ती मांग के बीच सरकार ने 15 लाख टन आयात का फैसला किया. 425 डॉलर प्रति टन पर मिली सबसे कम कीमत, किसानों को मिलेगा फायदा.
वाराणसी स्थित IIVR ने 8 साल की मेहनत के बाद बासमती खुशबू वाली तोरई विकसित की है. VRSG 7-17 नाम की यह किस्म 55–60 दिनों में तैयार होती है और किसानों को ज्यादा मुनाफा देगी.
UP News: कृषि मंत्री शाही ने बताया कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उर्वरकों के वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में यूरिया, डीएपी और एनपीके की कुल उपलब्धता 140 लाख मीट्रिक टन से अधिक है.
Tomato Cultivation Tips: कृषि निदेशक डॉ पंकज त्रिपाठी के मुताबिक, टमाटर की फसल में सिंचाई नियमित रूप से करें और अनियमितता से बचें. वहीं बोरोन और कैल्शियम नाइट्रेट का छिड़काव करें ताकि पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिल सकें.
बगीचे में अगर सब्जियों की खेती कर रहे हैं तो आपको ऐसा उर्वरक चुनना होगा जिसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम का उच्च स्तर हो. नाइट्रोजन हरी पत्तियों और तनों को बनाने में मदद करता है, फॉस्फोरस जड़ों के विकास में मदद करता है. वहीं पोटेशियम पौधे को गर्मी या ठंड से होने वाले तनाव का सामना करने में मदद करता है.
PAU ने जई की स्वदेशी किस्म OL16 विकसित की है, जो चारे और अनाज दोनों में बेहतर उत्पादन देती है. इसमें उच्च बीटा-ग्लूकान होने से यह किसानों के साथ उपभोक्ताओं के लिए भी खास मानी जा रही है.
अमरेली के मोटा अंकड़िया गांव में पुलिस और कृषि विभाग ने नकली खाद बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया. इस फैक्ट्री में घटिया क्वालिटी की खाद और खाली बैग पाए गए. किसानों को धोखा देने वाले इस गिरोह से सतर्क रहने की अपील की गई है.
रबी फसलों की अच्छी पैदावार के लिए सरकार ने पोषक-तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) की नई दरों को मंजूरी दे दी है.यह नीति 1 अक्टूबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगी.इस बार सरकार डीएपी खाद पर पिछले साल की तुलना में 36 फीसदी ज्यादा सब्सिडी दे रही है. इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के बावजूद किसानों को महंगाई से बचाना है.
यूरिया खाद की किल्लत और कालाबाजारी को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने हाल ही में एक 'चिंतन शिविर' आयोजित किया, जिसमें इस संकट को दूर करने का एक ठोस मास्टर प्लान तैयार किया गया है. इस शिविर में यह रणनीति बनाई गई कि खाद के स्टॉक की डिजिटल निगरानी की जाएगी ताकि हर जिले में आपूर्ति पारदर्शी रहे और अवैध भंडारण पर तुरंत नकेल कसी जा सके.
अप्रैल से नवंबर 2025 तक के आंकड़े बताते हैं कि भारत में खाद की मांग बढ़ी है, लेकिन यूरिया और डीएपी जैसे प्रमुख खादों का उत्पादन घट गया. इसी कमी को पूरा करने के लिए आयात तेजी से बढ़ा. वहीं, एनपी/एनपीके और एसएसपी जैसी खादों ने मजबूत बिक्री दिखाई, जिससे किसानों का संतुलित पोषण और स्वदेशी खाद पर भरोसा साफ नजर आता है.
प्राकृतिक खेती में मल्चिंग सबसे बड़ा फर्टिलाइजर है. मिट्टी को घास, पुआल या दूसरे तरीकों से ढकने से पानी की कमी कम होती है, खरपतवार नहीं उगते, मिट्टी बहुत ज्यादा गर्म या ठंडी नहीं होती और केंचुए जैसे जीव एक्टिव रहते हैं. मल्च धीरे-धीरे गलकर ह्यूमस बनाता है जिससे मिट्टी की फर्टिलिटी बढ़ती है. कवर की वजह से रोशनी की कमी से खरपतवार नहीं उग पाते.
बिहार और झारखंड में किसानों को अपनी मक्के की फसल में फॉल आर्मीवर्म कीट के हमले से परेशानी हो रही है. यह कीट फसल की पत्तियों और दानों को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे पैदावार 80-85% तक कम हो सकती है. कीट की पहचान करके और समय पर रोकथाम के उपाय करके किसान अपनी फसल को बचा सकते हैं. कीट की पहचान कैसे करें और उसे रोकने के आसान तरीके जानें.
मौजूदा समय में किसान नकदी फसलों की खेती बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. ऐसे में कमाई के लिहाज से किसान बड़े स्तर पर मिर्च की खेती करते हैं. वहीं, किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन हरी मिर्च के उन्नत किस्म के बीज बेच रहा है.
हाल में अलग-अलग जिलों से जुटाए गए आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि कई किसान जरूरत से 50 से 100 प्रतिशत तक अधिक यूरिया का प्रयोग कर रहे हैं. किसानों में यह गलत धारणा बनी हुई है कि ज्यादा यूरिया डालने से उत्पादन बढ़ेगा जबकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. अतिरिक्त यूरिया के कारण फसलों में केमिकल अवशेष रह सकते हैं. इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता है. साथ ही इससे मिट्टी प्रदूषित होती है और अनाज की गुणवत्ता भी गिरती है.
तो कहानी यह है कि फर्टिलाइजर मंत्री जेपी नड्डा ने दावा किया है कि मुश्किल हालात के बावजूद, फर्टिलाइजर डिपार्टमेंट ने पूरे देश में खाद बांटने का बहुत अच्छा काम किया है. जो किसान खाद लेने की कोशिश में पुलिस की लाठियां खा चुके हैं और रोए हैं, वे इस दावे पर कैसे विश्वास कर सकते हैं? फिर भी, फर्टिलाइजर मिनिस्ट्री की चिंतन शिविर में क्या हुआ, यह बताना भी ज़रूरी है.
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