कीड़े मारने वाली रसायनिक दवाओं का इस्तेमाल सबसे पहले नहीं, बल्कि सबसे आखिर में करना चाहिए. सबसे पहले हमें 'देसी तरीके आजमाने चाहिए, जैसे फसल चक्र बदलना या ऐसी किस्में बोना जिनमें बीमारी कम लगती हो. इसके बाद लाइट ट्रेप या चिपचिपे कार्ड्स का इस्तेमाल करना चाहिए. अगर इनसे भी बात न बने, तो 'बायो-पेस्टीसाइड्स' यानी नीम के तेल या फायदेमंद कीड़ों का सहारा लेना चाहिए.
एक तरफ जहां सरकार खरीफ 2026 सीजन के लिए पूरी तरह तैयार है, वहीं पिछले सालों के आंकड़े सरकार के वादों पर सवाल खड़े करते नजर आ रहे हैं. सरकार सीजन शुरू होने से पहले किसानों को आश्वासन तो देती है, लेकिन जब असल समय आता है, तो किसानों को न सिर्फ़ खाद के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है, बल्कि उन्हें प्रशासन की लाठियां भी खानी पड़ती हैं. इसे देखते हुए यह सवाल उठता है कि अगर सच में देश में खाद की कोई कमी नहीं है, तो फिर सीज़न आने पर किसानों को अपनी फ़सलों के लिए ज़रूरी खाद क्यों नहीं मिल पाती?
किसान पारंपरिक फसलों को छोड़कर सब्जियों वाली फसलों की खेती कर रहे हैं. कमाई के लिहाज से भी किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती करते हैं. ऐसे में राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन सेम की 'अर्का सुप्रिया' किस्म के बीज बेच रहा है.
किसान वर्तमान समय में धान-गेहूं के अलावा सब्जी की खेती बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है. इसलिए किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती कर रहे हैं. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन कद्दू के बीज बेच रहा है.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि मार्च-अप्रैल 2026 के दौरान यूरिया उत्पादन में कोई कमी नहीं आई है और पश्चिम एशिया में तनाव का सप्लाई पर असर नहीं पड़ा है. खरीफ सीजन से पहले पर्याप्त स्टॉक और आयात की व्यवस्था कर ली गई है, जिससे किसानों को खाद की उपलब्धता और कीमतों को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है.
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने नैनो फर्टिलाइजर की जबरन बिक्री पर रोक लगा दी है. अब सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ नैनो उत्पादों को बंडल बनाकर बेचना गैरकानूनी होगा. सरकार के इस फैसले से किसानों को अनावश्यक खर्च से राहत मिलने की उम्मीद है, साथ ही कंपनियों के लिए पारदर्शिता और सही जानकारी देना भी अनिवार्य कर दिया गया है.
आर्थिक संस्था कैपिटल इकोनॉमिक्स का कहना है कि अब तक दुनिया की नजरें ऊर्जा की कीमतों पर टिकी थीं, लेकिन असली खतरा अब खेती में इस्तेमाल होने वाले यूरिया पर पड़ने लगा है.
Natural Farming: गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता का कहना है कि बुंदेलखंड में शुरू हुआ यह मॉडल अब पूरे प्रदेश के लिए उदाहरण बन रहा है. किसानों को कम खर्च में बेहतर उत्पादन मिल रहा है और बाजार में प्राकृतिक उत्पादों की मांग उन्हें अतिरिक्त लाभ दे रही है.
महाराष्ट्र सरकार किसानों को बीजों के मामले में कानूनी अधिकार देने के लिए अलग कानून लाने की तैयारी कर रही है. नए प्रस्तावित कानून में किसानों को बीज सुरक्षित रखने, इस्तेमाल करने, बदलने और बेचने का अधिकार मिलेगा. खराब या नकली बीज मिलने पर तुरंत मुआवजे का प्रावधान होगा. बीज कंपनियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी, क्यूआर कोड और ट्रेसबिलिटी सिस्टम लागू होगा. खरीफ 2026 से बीज उत्पादन और बिक्री Saathi पोर्टल के जरिए होगी.
यूपी में गन्ना खेती को बढ़ावा देने के लिए टिशू कल्चर तकनीक से उन्नत बीज तैयार करने और ड्रिप इरिगेशन को बढ़ाने पर जोर दिया गया है. इससे उत्पादन बढ़ने और लागत घटने की बात सामने आई है.
मई-जून का महीना मिट्टी की जांच के लिए सबसे बेहतरीन है क्योंकि रबी और खरीफ की फसलों के बाद जमीन को दोबारा पोषण की जरूरत होती है. जिस तरह खून की जांच से इंसान की सेहत का पता चलता है, ठीक उसी तरह सॉइल टेस्ट से मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी या अधिकता की असलियत सामने आती है. बिना जानकारी के अंधाधुंध केमिकल उर्वरकों का इस्तेमाल न केवल आपकी लागत बढ़ाता है, बल्कि खेत को भी बंजर बनाता है.
होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित होने से वैश्विक खाद कीमतों में उछाल आया है, जिससे भारत का खाद सब्सिडी बिल 2026 में 20% तक बढ़ सकता है. सरकार किसानों को राहत देते हुए MRP स्थिर रखेगी और बढ़ी लागत खुद वहन करेगी.
भारत और रूस मिलकर रूस में एक बड़ा यूरिया प्लांट बना रहे हैं, जो दो साल में तैयार हो सकता है. इस प्रोजेक्ट से हर साल 20 लाख टन यूरिया उत्पादन होगा और पूरा भारत लाया जाएगा. इससे किसानों को सस्ता और समय पर खाद मिलेगी और देश की आयात पर निर्भरता भी कम होगी.
Kharif Season 2026: मुख्य सचिव एसपी गोयल ने जमाखोरी और कालाबाजारी के विरुद्ध अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए. साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि सब्सिडी युक्त उर्वरकों का शत-प्रतिशत वितरण केवल पीओएस मशीनों के माध्यम से ही किया जाए.
वैश्विक कीमतें बढ़ने के बावजूद खरीफ सीजन में उर्वरकों की कमी नहीं होगी. भारत 64 लाख टन यूरिया आयात करेगा, कीमतें जस की तस रहेंगी.
देश के किसान मौजूदा समय में धान-गेहूं के अलावा सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन बैंगन के बीज बेच रहा है.
'संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान' बड़ी सफलता के साथ आगे बढ़ रहा है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की ओर से 24 अप्रैल 2026 को साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस अभियान के जरिए लाखों किसानों तक सही तरीके से खाद के उपयोग करने का संदेश पहुंचाया गया है.
लगातार गेहूं-धान उगाने और केमिकल खाद के इस्तेमाल से हमारी मिट्टी बीमार हो रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है और मुनाफा घट रहा है. इसका सबसे सस्ता और सटीक समाधान 'ढैंचा' यानी हरी खाद है. ढैंचा कम पानी और खराब जमीन में भी आसानी से उग जाता है और मिट्टी को नाइट्रोजन व जरूरी पोषक तत्व देता है. इसे फूल आने से पहले खेत में जोतने से जमीन को 'ह्यूमस' मिलता है और मिट्टी फिर से उपजाऊ बन जाती है. कुल मिलाकर, ढैंचा अपनाकर किसान महंगी खाद का खर्चा बचा सकते हैं और अपनी जमीन की सेहत सुधार सकते हैं.
मौजूदा वित्त वर्ष में भी खाद की सप्लाई मजबूत बनी हुई है. 1 अप्रैल 2026 से 23 अप्रैल 2026 तक खाद की उपलब्धता किसानों की जरूरत से काफी ज्यादा रही. इससे साफ है कि आने वाले खरीफ सीजन के लिए सरकार ने अच्छी तैयारी कर ली है.
छत्तीसगढ़ में खरीफ 2026 के लिए धान, दलहन और तिलहन फसलों के बीजों के नए रेट तय कर दिए गए हैं. अलग-अलग फसलों और किस्मों के अनुसार कीमतों में बदलाव किया गया है, जिससे किसानों को इस सीजन में बीज खरीद की पूरी जानकारी मिल सकेगी.
लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्र कृषि सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि खाद, बीज और कीटनाशक से जुड़े नए कानून लगभग तैयार हैं और सरकार उन्हें अगले सत्र में पास कराने की तैयारी में है. सम्मेलन में राज्यों की भूमिका और कृषि सुधारों पर जोर दिया गया.
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