किसान मौजूदा समय में धान-गेहूं के अलावा दलहनी फसलों की खेती भी बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. इसके लिए सरकार भी किसानों को प्रोत्साहित कर रही है और दहलन मिसन चला रही है. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है.
CRISIL रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण सप्लाई चेन बाधित होने से भारत में यूरिया और कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर का उत्पादन 10-15% तक घट सकता है. कच्चे माल की कमी और बढ़ती कीमतों से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ेगा, वहीं सरकार का सब्सिडी बिल भी 20,000-25,000 करोड़ रुपये तक बढ़ने की आशंका है.
पश्चिम एशिया में तनाव और शिपिंग बाधाओं से खाद बाजार पर दबाव बढ़ा है, जिससे लागत और सप्लाई प्रभावित हो रही है. FAI ने कहा है कि सरकार और उद्योग के समन्वय से स्थिति को संभालने की कोशिश जारी है.
खरीफ सीजन से पहले खाद कंपनियां DAP, MOP और कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर के अनुबंधों में फ्लोर और सीलिंग प्राइस लागू करने पर विचार कर रही हैं. वैश्विक कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बीच यह कदम लागत जोखिम कम करने की रणनीति माना जा रहा है.
होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के कारण तेल की कीमतों में उछाल के साथ वैश्विक स्तर पर खाद की कमी का खतरा बढ़ गया है. मध्य पूर्व के प्रमुख सप्लायर्स प्रभावित होने से यूरिया और अन्य उर्वरकों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे भारत, ब्राजील और चीन जैसे बड़े कृषि देशों में फसल उत्पादन और वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वैश्विक संकट के बीच किसानों की सुरक्षा और कृषि व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उच्च स्तरीय बैठक की. बैठक में खाद, बीज और एग्रो-केमिकल्स की उपलब्धता, ‘फार्मर आईडी’ में तेजी, कालाबाजारी पर रोक और खरीफ सीजन की तैयारी पर विशेष जोर दिया गया. सरकार ने किसानों को हर संभव सहायता देने का भरोसा दिलाया.
ग्रामीण क्षेत्रों और शहरों में घर की छतों पर सब्जियों को उगाने का ट्रेंड और इसकी खेती की बढ़ती हुई डिमांड को देखते हुए राष्ट्रीय बीज निगम NSC किसानों की सुविधा के लिए ऑनलाइन बरसात के दिनों में उगाई जाने वाली हरी सब्जियों के बीज का किट बेच रहा है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते भारत में यूरिया उत्पादन आधा हो गया है. गैस की कमी से कारखानों की क्षमता प्रभावित हुई है और ऊर्जा खर्च बढ़ा है. इससे किसानों को खाद की आपूर्ति में परेशानी आ सकती है, खासकर आने वाले खरीफ सीजन में. सरकार और कंपनियां इस संकट को हल करने की कोशिश कर रही हैं.
मीडिया को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमारे पास खाद का पर्याप्त भंडार है. हम खरीफ सीजन 2026 के लिए निश्चिंत हैं. उर्वरक विभाग ने एक बयान में कहा है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने और समझदारी से विदेशों से खरीद करने की रणनीति अपनाकर किसानों को वैश्विक संकट के असर से बचाने की कोशिश की जा रही है.
इफको ने Nano NPK Liquid (8-8-10) और Nano NPK Granular (20-10-10) लॉन्च किए हैं, जिन्हें FCO के तहत मंजूरी मिल गई है. ये नैनो उर्वरक फसल को पत्तियों और जड़ों दोनों के जरिए संतुलित पोषण देने के लिए तैयार किए गए हैं, जिससे पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग और लागत में कमी संभव है.
यूरिया में आत्मनिर्भर बनने का 2025 का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका. गैस और कच्चे माल के आयात पर निर्भरता के चलते भारत में यूरिया संकट बना हुआ है, जबकि आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है.
CropLife India ने आसान भाषा का इस्तेमाल करके कीटनाशकों से जुड़ी आम गलतफहमियों को दूर किया है. यह स्पष्टीकरण मिथकों और तथ्यों के बीच का अंतर बताता है, जिससे किसान सुरक्षित तरीके से अपनी फसलों की सुरक्षा कर पाते हैं. कीटनाशकों के सही इस्तेमाल, सुरक्षा उपायों, पर्यावरण पर उनके असर और भोजन में बचे अवशेषों के बारे में पूरी जानकारी हासिल करें.
ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट में शिपमेंट बाधित होने से वैश्विक उर्वरक आपूर्ति प्रभावित हो रही है. सल्फर, यूरिया और फॉस्फेट जैसे प्रमुख रसायनों की कमी से भारत के कृषि क्षेत्र, उत्पादन लागत और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है.
उत्तर प्रदेश सरकार ने ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर रैटोल पेस्ट और येलो/व्हाइट फॉस्फोरस युक्त खतरनाक कीटनाशक की बिक्री पर तुरंत रोक लगा दी है. सरकार ने सभी प्लेटफॉर्म्स को इन उत्पादों को हटाने और केवल वैध लाइसेंसधारी विक्रेताओं को ही कीटनाशक बेचने की अनुमति देने के सख्त निर्देश दिए हैं. यह कदम जनस्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए उठाया गया है.
अमरोहा के ललित कुमार सिंह ने पत्रकारिता छोड़कर UP23 Organics and Agro Farm की स्थापना की, जहां 120 बेड पर हर तीन महीने में करीब 120 टन वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन किया जा रहा है. यह पहल जैविक खेती, मिट्टी की सेहत और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा दे रही है.
हरियाणा में पायलट प्रोजेक्ट के तहत उर्वरक बिक्री को डिजिटल और फसल-आधारित प्रणाली से जोड़ा गया. इससे यूरिया और डीएपी की खपत कम हुई, छोटे किसानों को अधिक लाभ मिला और बड़े खरीदारों की जरूरत से ज्यादा खरीद रोकी गई. केंद्र ने कहा कि अन्य राज्यों में रोलआउट में समय लगेगा.
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