खरीफ सीजन की बुआई के समय बाजार में खाद-बीज की भारी मांग का फायदा उठाकर कुछ लालची दुकानदार किसानों को नकली, पुराना या मिलावटी सामान बेच देते हैं. इस ठगी से किसानों की मेहनत और पैसा दोनों बर्बाद हो जाते हैं. इससे बचने के लिए हमेशा असली बीज पहचानने के लिए पैकेट पर लगे सरकारी टैग का रंग जरूर देखें. ठगी से बचने और फसलों को सुरक्षित रखने के लिए खरीदारी के समय कुछ बेहद जरूरी सावधानियां रखनी चाहिए, जिनकी पूरी जानकारी इस खबर में बताई गई है.
CCPA ने Amazon, Flipkart, Meesho और JioMart को कथित तौर पर बिना पंजीकरण वाले “Cyclosinone Herbicide” की ऑनलाइन बिक्री को लेकर नोटिस जारी किया है. जांच में उत्पाद की जरूरी जानकारी और लाइसेंस विवरण गायब पाए गए. सरकार ने इसे किसानों और उपभोक्ताओं की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है.
उत्तर प्रदेश सरकार और India Today Group के संयुक्त प्रयास से आयोजित “किसान तक का किसान कारवां” किसानों के लिए जागरूकता और आधुनिक खेती का बड़ा मंच बनकर उभरा. 29 दिसंबर 2025 को अमरोहा से शुरू हुआ यह कारवां 4 मई 2026 को गौतम बुद्ध नगर पहुंचा. अब तक यह 68 जिलों में 4000 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा कर 55 हजार से अधिक किसानों तक पहुंच चुका है. कहानी कारवां की’ सीरीज में आज पढ़िए वेस्टर्न प्लेन जोन की खेती, किसानों के अनुभव और सरकारी योजनाओं के असर की कहानी.
कृषि विभाग की फ्लाइंग स्क्वॉड टीम ने नवीन मोंढा इलाके में एक गोदाम पर छापा मारकर करीब 18 लाख रुपये से ज्यादा कीमत का खाद जब्त किया. इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है.
महाराष्ट्र में आज यानी 16 मई से खरीफ सीजन के लिए बीज और खाद की बिक्री की औपचारिक शुरुआत हो गई है. इस अवसर पर अकोला की जिलाधिकारी वर्षा मीणा ने शहर के एक कृषि केंद्र का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया.
उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के संयुक्त प्रयास से आयोजित ‘किसान तक का किसान कारवां’ 75 जिलों तक पहुंचकर किसानों के लिए जानकारी और बदलाव का बड़ा मंच बना.29 दिसंबर 2025 को अमरोहा से शुरू हुई यह यात्रा 4 मई 2026 को गौतमबुद्ध नगर में संपन्न हुई.‘कहानी कारवां की’ सीरीज में आज पढ़िए विंध्याचल जोन की खेती, किसानों के अनुभव और सरकारी योजनाओं के असर की कहानी.
ICAR-DMAPR को अनाज और बीजों को कीटों से बचाने वाली हर्बल बीज कोटिंग तकनीक का पेटेंट मिला है. प्राकृतिक तेलों और बायो-पॉलीमर से तैयार यह तकनीक बिना गुणवत्ता प्रभावित किए भंडारित अनाज की सुरक्षा में मदद करेगी.
आज भारतीय खेती केमिकल फर्टिलाइजर के एक ऐसे 'विदेशी मकड़जाल' में फंस गई है, जिसने मिट्टी को नशेड़ी बना दिया है. केवल केमिकल फर्टिलाइजर पर सब्सिडी मिलने से पंजाब, यूपी और बिहार जैसे राज्यों में यूरिया का इस्तेमाल तय मानकों से 5 गुना ज्यादा हो रहा है. जहां वैज्ञानिक अनुपात 4:2:1 होना चाहिए, वहां हम 20:5:1 तक पहुंच गए हैं. हैरानी की बात यह है कि इन खादों का कच्चा माल हमारे पास नहीं है; हम पूरी तरह विदेशी आयात और पश्चिम एशिया के रास्तों पर निर्भर हैं.
ईरान–इजरायल संघर्ष का असर अब सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर दुनिया भर की उर्वरक सप्लाई चेन पर दिखने लगा है. यूपी सरकार ने फैसला किया है कि प्रदेश की करीब 7,500 गौशालाओं को अब सिर्फ पशु संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि जैविक खेती के बड़े केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा.
हरियाणा का ये जिला अब खेती में एक नई मिसाल बनकर उभर रहा है. यहां किसानों ने सिर्फ फसल उत्पादन पर ही नहीं, बल्कि समझदारी से उर्वरकों के इस्तेमाल पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया है. दिलचस्प बात यह है कि कम यूरिया इस्तेमाल करने के बावजूद किसान संतुलित खेती की ओर बढ़े हैं.
महासमुंद में खाद वितरण में गड़बड़ी पर प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है. यूरिया बिक्री में नियम तोड़ने के आरोप में चार उर्वरक फर्मों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं. इससे पहले 26 विक्रेताओं के लाइसेंस भी निलंबित किए जा चुके हैं.
देशभर में संतुलित उर्वरक उपयोग को लेकर केंद्र सरकार बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ICAR को जिम्मेदारी सौंपी है, जबकि 1600 टीमें गांवों में जाकर किसानों को जागरूक करेंगी.
मध्य प्रदेश की डिंडोरी जिले की लहरी बाई का नाम मिलेट क्वीन के तौर पर लिया जाता है .उन्होंने अब तक 150 से ज्यादा देसी किस्म के विलुप्त हो रहे मिलेट के बीज का संरक्षण किया है. उन्होंने पूरा जीवन संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया.
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के जिल्दा धान खरीदी केंद्र में पांच ट्रक खाद गायब होने के आरोप से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. ग्रामीणों ने समिति प्रबंधक पर किसानों की खाद बेचने का आरोप लगाया है. शिकायत के बाद प्रशासन ने गोदाम सील कर जांच शुरू कर दी है.
उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप के संयुक्त प्रयास से आयोजित ‘किसान तक का किसान कारवां’ 75 जिलों तक पहुंचकर किसानों के लिए जानकारी और बदलाव का बड़ा मंच बना. 29 दिसंबर 2025 को अमरोहा से शुरू हुई यह यात्रा 4 मई 2026 को गौतमबुद्ध नगर में संपन्न हुई. अब ‘कहानी कारवां की’ सीरीज में जानिए यूपी के 9 एग्रोक्लाइमेटिक जोन्स की खेती, किसानों के अनुभव और सरकारी योजनाओं का असर. आज की कड़ी में पूर्वांचल के ईस्टर्न प्लेन जोन की कहानी।
UP News: कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और एजेंसियों के माध्यम से इसकी टेस्टिंग व खरीद की जाएगी. इससे ग्रामीण क्षेत्र में युवाओं, पशुपालकों और स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे. वहीं, गोबर से खाद तैयार करने के लिए बाकायदा ट्रेनिंग देकर प्रशिक्षक तैयार किए जाएंगे.
अंधाधुंध रासायनिक खादों के इस्तेमाल से हमारी मिट्टी बीमार हो रही है और इनके आयात पर हर साल देश की तिजोरी से करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं. इसीलिए पीएम मोदी ने केमिकल खादों की खपत 50% तक आधी करने की बड़ी अपील की है. आम किसानों में यह डर है कि खाद घटाने से फसल बर्बाद हो जाएगी, लेकिन इसका सबसे सटीक इलाज है 'समेकित पोषण प्रबंधन' (INM). इस वैज्ञानिक तरीके में जैविक खाद, बायो-फर्टिलाइजर जीवाणु खाद और रासायनिक खाद का 1:2:2 के संतुलित अनुपात में इस्तेमाल किया जाता है, जिससे मिट्टी में मददगार सूक्ष्म जीव जिंदा होते हैं, खेती की लागत आधी हो जाती है, बिना किसी नुकसान के पैदावार पूरी मिलती है और हमारे खेत के साथ-साथ देश का कीमती खजाना भी पूरी तरह सुरक्षित रहेगा.
FOM ब्लेंडिंग के जरिए रासायनिक खाद में 10% जैविक खाद मिलाने की योजना से भारत में खेती सस्ती, मिट्टी उपजाऊ और खाद आयात में कमी लाने की तैयारी की जा रही है.
NPK Ratio in India: जरूरत से ज्यादा यूरिया और डीएपी को खेतों में झोंकना बंद करें किसान; बस एक बदलाव और बदल जाएगी खेती की तस्वीर. रासायनिक खादों नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P) और पोटाश (P) का अनुपात 4:2:1 से बिगड़कर 9.3:3.5:1 पर पहुंच गया है. ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल में 50 फीसदी कटौती की अपील को लाचारी मत समझिए.
ईरान संकट और वैश्विक सप्लाई की चिंता के बीच भारत ने रिकॉर्ड 13.5 लाख टन DAP खाद आयात करने का फैसला लिया है. सरकार किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए पहले से तैयारी कर रही है. इस बड़ी खरीद से दुनिया में खाद की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है.
उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे के संयुक्त प्रयास से आयोजित ‘किसान तक का किसान कारवां’ प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचा। 29 दिसंबर 2025 को अमरोहा से शुरू हुई यह यात्रा 4 मई 2026 को गौतमबुद्ध नगर में संपन्न हुई। अब ‘कहानी कारवां की’ सीरीज में हम आपको प्रदेश के 9 एग्रोक्लाइमेटिक जोन्स की खेती, किसानों के अनुभव, वैज्ञानिकों की सलाह और सरकारी योजनाओं की खास जानकारी देंगे। आज जानिए सेंट्रल प्लेन जोन में किसान कारवां की कहानी।
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