किसानों का कहना है कि दिनभर इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ता है और अगले दिन फिर लाइन लगानी पड़ती है. किसानों ने कहा कि वो लोग गेहूं की फसल के लिए जिस महीन खाद की मांग कर रहे हैं.
यूरिया की कालाबाजारी और अवैध भंडारण के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है. उपजिला मजिस्ट्रेट फतेहाबाद स्वाति शर्मा के नेतृत्व में कृषि विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने फतेहाबाद क्षेत्र में छापेमारी कर इतने पैकेट यूरिया अवैध रूप से भंडारित पाए जाने पर सीज किया गया है.
Rajgarh Urea Crisis: राजगढ़ में यूरिया खाद को लेकर किसानों की परेशानी बढ़ गई है. कागज, टोकन और बार-बार बदलते नियमों से किसान नाराज हैं. किसानों का आरोप है कि खाद ब्लैक में बेची जा रही है.
बहराइच जिले के संचालित बहुउद्देशीय ग्रामीण सहकारी समिति रायबोझा के उपकेंद्र शंकरपुर थाना रुपईडीहा का है, जहां किसानों को बिक्री की जाने वाली यूरिया खाद लेने गए बस्ती गांव निवासी किसान रंजीत वर्मा ने जब केंद्र संचालक पंकज मिश्रा से दो बोरी यूरिया खाद मांगी तो उन्होंने खाद देने से इनकार कर दिया और गाली दी.
लखनऊ से बहराइच तक खाद केंद्रों पर अफरा-तफरी, घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिल रही यूरिया, इंडो-नेपाल बॉर्डर इलाकों में हालात सबसे बदतर.
अगर किसान सच में बंपर उपज चाहते हैं, तो उन्हें सिर्फ NPK तक सीमित नहीं रहना चाहिए. मिट्टी जांच के आधार पर S, Zn और B का सही इस्तेमाल करके कम लागत में ज्यादा उत्पादन हासिल किया जा सकता है. यही तीन पोषक तत्व आज की खेती में बंपर पैदावार का असली फॉर्मूला बन चुके हैं. सल्फर, जिंक और बोरॉन तीनों मिलकर पौधे के संपूर्ण विकास में मदद करते हैं.
किसान वर्तमान समय में धान-गेहूं के अलावा सब्जी की खेती बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है. इसलिए किसान बड़े स्तर पर इसकी खेती कर रहे हैं. ऐसे में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम ऑनलाइन पेठा कद्दू का बीज बेच रहा है.
UP News: पिछले दो वर्षों में प्रदेश भर में 5,000 से ज्यादा खाद दुकानों का निरीक्षण किया गया. इस दौरान अनियमितता पाए जाने पर सैकड़ों दुकानों के लाइसेंस निलंबित और रद्द किए गए. कई मामलों में भारी जुर्माना भी लगाया गया है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यूरिया, डीएपी और एनपीके की कुल उपलब्धता 130 लाख मीट्रिक टन से अधिक है.
UP News: कृषि वैज्ञानिक डॉ आदित्य कुमार सिंह ने बताया कि किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र में आमंत्रित कर उन्हें बीज, पौधे और उर्वरक प्रदान किए गए हैं. इन किसानों को पैदावार बढ़ाने के तौर-तरीके प्रदान करने के साथ ही निरंतर मार्गदर्शन भी प्रदान किया जा रहा है.
सूरजमुखी की खेती तिलहन फसल के अंतर्गत की जाती है. देश में सूरजमुखी को नकदी फसल के रूप में जाना जाता है. किसान सूरजमुखी की खेती रबी, जायद और खरीफ तीनों सीजन में कर सकते हैं. दिसंबर का महीना सूरजमुखी की खेती के लिए उपयुक्त समय माना जाता है.
खाद के मुद्दे पर आयोजित त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम में शामिल होने एचबीटीयू पहुंचे कृषि मंत्री से किसानों ने सीधा सवाल किया और उन्हें घेर लिया. कार्यक्रम के दौरान किसानों ने कृषि मंत्री से कहा कि उन्हें खाद सरकारी दर से कहीं अधिक कीमत पर खरीदनी पड़ रही है.
प्याज के छिलकों में पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और सल्फर जैसे जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं. इनमें मौजूद क्वेरसेटिन जैसे एंटीऑक्सिडेंट पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं. यही वजह है कि प्याज के छिलकों से बना फर्टिलाइजर न सिर्फ ग्रोथ को बेहतर करता है, बल्कि कीट और फंगल रोगों से भी पौधों को बचाता है.
Seeds Bill 2025 का मसौदा केंद्र सरकार ने सार्वजनिक किया है. इसमें किसानों और पारंपरिक किस्मों को दायरे से बाहर रखा गया है. किसानों को बीज बचाने, बोने, बेचने और अदला-बदली का पूरा अधिकार मिलेगा, जबकि बाजार में बिकने वाले बीजों की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी होगी.
उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए जो 'Co 0238' किस्म कभी वरदान थी, वह अब 'लाल सड़न रोग' Red Rot के कारण मुसीबत बन गई थी, जिससे खड़ी फसलें खेतों में ही बर्बाद हो रही थी. किसानों की इसी परेशानी को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक नई और दमदार किस्म 'कोलख 16202' (COLK 16202) विकसित की है. यह नई वैरायटी न सिर्फ लाल सड़न जैसी खतरनाक बीमारी से लड़ने में पूरी तरह सक्षम है, बल्कि इसकी पैदावार भी पुरानी किस्म के मुकाबले कहीं ज्यादा है.
UP News: सीएम योगी ने यह भी कहा कि फील्ड में तैनात अधिकारियों की गतिविधियों की निरंतर निगरानी की जाएगी. यदि किसी स्तर पर मिलीभगत या लापरवाही सामने आती है तो खुली विजिलेंस जांच कराई जाएगी. उनका स्पष्ट संदेश था कि खाद संकट पैदा करने या कृत्रिम अभाव दिखाने की कोशिश करने वालों के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं है.
रबी फसल के मौसम में किसानों को खाद की कोई कमी नहीं होगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद को बताया कि सरकार ने यूरिया का स्टॉक 20 लाख टन से ज़्यादा बढ़ा दिया है. अच्छी बारिश के कारण बढ़ी हुई मांग को देखते हुए, सभी राज्यों में खाद की सप्लाई पर नज़र रखी जा रही है ताकि किसानों को समय पर खाद मिल सके.
कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने सिवान जिले की खाद दुकानों का औचक निरीक्षण किया. उन्होंने किसानों के साथ किसी भी तरह के शोषण को रोकने की कड़ी चेतावनी दी. वहीं, कैमूर के कई दुकानदार खाद उठाव बंद करने का निर्णय कर विरोध कर रहे हैं. जानें पूरी खबर इस फोटो गैलरी में.
कोकोपीट में पोषक तत्व बहुत कम होते हैं. यह पौधों को सहारा और नमी देता है, लेकिन पोषण नहीं. इसलिए इसके साथ जैविक खाद का इस्तेमाल जरूरी होता है. इसके अलावा इस्तेमाल से पहले कोकोपीट को अच्छी तरह धोना या भिगोना चाहिए, ताकि इसमें मौजूद अतिरिक्त नमक निकल जाए. ज्यादा नमक पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है.
Agriculture News: उत्तर प्रदेश में अब कई किसान एकल फसल की बजाय विविध फसलों के चक्र पर आधारित खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं. केला, टमाटर, आलू, मेंथा, तरबूज, खरबूजा और गेहूं जैसी फसलों का संतुलित चक्र अपनाने से उत्पादन बढ़ा है और भूमि की उर्वरता भी बनी हुई है.
सर्दी का महीना आते ही किसान शकरकंद की खेती करने लगे हैं. ऐसे में अगर आप भी इस महीने शकरकंद की खेती करना चाहते हैं तो ये किस्म बेस्ट है. आइए जानते हैं कौन सी है वैरायटी और क्या है इसकी खासियत.
पिछले दिनों उर्वरकों की जबरन बिक्री से जुड़ा मामले पर सवाल पूछे गए. शिवसेना (UBT) के अहमदनगर से सांसद भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे ने सरकार से पूछा था कि क्या उर्वरक कंपनियां यूरिया और डीएपी के साथ बाकी उत्पाद भी जबरन डीलर्स को देती हैं, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है? इसपर राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि उर्वरकों को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत आवश्यक वस्तु घोषित किया गया है.
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