यूरिया के वैश्विक दाम में आई तेज गिरावट भारत के लिए राहत लेकर आई है. सरकार अब 2026-27 के खाद सब्सिडी अनुमान की दोबारा समीक्षा करेगी. हालिया आयात टेंडर में कम कीमतों के संकेत मिले हैं, जिससे सब्सिडी पर संभावित बोझ घटने और खरीफ सीजन में आपूर्ति मजबूत रहने की उम्मीद बनी है.
रायगढ़ जिले के पुसौर में खाद की कालाबाजारी और स्टॉक में गड़बड़ी के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है.जांच के दौरान एक खाद दुकान से 9 टन यूरिया जब्त किया गया, जबकि दूसरी दुकान पर 21 दिनों तक उर्वरक बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
खेती में फसलों को बेहतर पोषण देने के लिए खादों का सही मिश्रण बेहद जरूरी है. DAP, SSP, यूरिया, पोटाश और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों को बिना जानकारी के मिलाने से रासायनिक प्रतिक्रिया होकर पोषक तत्व बेअसर हो सकते हैं. कुछ कॉम्बिनेशन जैसे DAP-यूरिया और DAP-पोटाश सुरक्षित हैं, जबकि DAP-जिंक सल्फेट या SSP-यूरिया जैसे मिश्रण फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. सही जानकारी और विशेषज्ञ सलाह से किसान अपनी लागत बचाकर फसल की पैदावार बढ़ा सकते हैं.
हरियाणा में धान की रोपाई का सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन सोनीपत जिले के किसानों का कहना है कि उन्हें खाद नहीं मिल रही है. जिससे उन्हें डर है कि इसका असर कहीं धान की फसल पर ना पड़े.
एनएफएल के यूरिया आयात टेंडर में उम्मीद से काफी कम बोली मिलने के बाद सरकार तय मात्रा से ज्यादा खरीद पर विचार कर सकती है. कम कीमतों ने वैश्विक बाजार में हलचल बढ़ा दी है, जबकि अतिरिक्त मांग और रबी सीजन की जरूरत को देखते हुए आगे की रणनीति पर नजर बनी हुई है.
क्या देश का किसान और कंज्यूमर अनजाने में एक ऐसे जानलेवा चक्रव्यूह में फंस चुका है, जिससे निकलना उसके बस में नहीं है? जिस केमिकल को खरपतवार का काल माना गया, वह आज किसानों की सेहत का दुश्मन बनता जा रहा है. पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ जागरूकता की कमी है, या फिर एग्रो केमिकल कंपनियों के मुनाफे के आगे इंसानी जिंदगी को बौना समझने की सोची-समझी खामोशी?
भारत की सूखी मिर्च के निर्यात पर मेथामिडोफोस नाम के जहरीले कीटनाशक के अवशेषों के कारण संकट खड़ा हो गया है. जानिए यह क्या होता है, कैसे बनता है और इंसानी सेहत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका क्या असर पड़ता है.
खरीफ सीजन 2026 में मध्य प्रदेश सरकार ने खाद वितरण के लिए ई-विकास प्रणाली लागू कर दी है। अब किसानों को उर्वरक प्राप्त करने के लिए पहले ऑनलाइन ई-टोकन बुक करना होगा। फार्मर आईडी अनिवार्य होने से बिना आईडी वाले किसानों को खाद मिलने में परेशानी हो सकती है।
नागपुर में पुलिस ने नकली कपास बीज बेचने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए 798 पैकेट जब्त किए हैं और 2 लोगों को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई वाडी क्षेत्र में की गई. जब्त बीजों की जांच कृषि विभाग कर रहा है. खरीफ सीजन में किसानों को ठगी से बचाने के लिए प्रशासन सख्त कार्रवाई कर रहा है.
पंजाब में खरीफ 2026 सीजन के लिए यूरिया की कोई कमी नहीं है. केंद्र सरकार ने बताया कि राज्य में मांग से अधिक 10.71 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया गया है. पर्याप्त बफर स्टॉक और मजबूत आपूर्ति व्यवस्था के चलते किसानों को खाद की कोई दिक्कत नहीं होगी. सरकार ने निर्बाध सप्लाई का भरोसा दिया है.
बीजापुर जिले को केंद्र सरकार की एफएफएस (Framework for Fertilizer Sale) योजना के तहत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है.नई डिजिटल व्यवस्था में किसान मोबाइल ऐप से यूरिया, डीएपी सहित अन्य उर्वरकों की एडवांस बुकिंग कर सकेंगे और ई-टोकन के जरिए खाद प्राप्त करेंगे. इससे लंबी कतारों, कालाबाजारी और वितरण संबंधी अनियमितताओं पर रोक लगेगी तथा किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो सकेगी.
हरियाणा में धान की रोपाई से पहले यूरिया और डीएपी खाद की कमी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है. खेत और पौध तैयार होने के बावजूद किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल रही. किसानों का कहना है कि समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने से खेती प्रभावित हो सकती है. उन्होंने सरकार से जल्द समाधान की मांग की है.
सरगुजा जिले में किसानों की शिकायत पर कृषि विभाग और जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 640 बोरी यूरिया खाद जब्त की है। जांच में निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक बिक्री और अवैध भंडारण की अनियमितताएं सामने आईं
हरियाणा सरकार ने खरीफ सीजन से पहले खाद उपलब्धता को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं. कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को खाद के लिए इंतजार न करना पड़े. सरकार ने स्टॉक, वितरण और जमाखोरी रोकने पर सख्ती के संकेत दिए हैं.
उत्तर प्रदेश में धान सीजन के बीच खाद की उपलब्धता को लेकर मिली-जुली स्थिति सामने आई है. जहां चंदौली, बांदा, सहारनपुर और देवरिया जैसे जिलों में पर्याप्त खाद उपलब्ध है, वहीं पीलीभीत में जरूरत के अनुसार सप्लाई नहीं मिल रही. फिरोजाबाद और मुजफ्फरनगर में कालाबाजारी की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे किसान परेशान हैं. प्रशासन का दावा है कि राज्य में खाद की कमी नहीं है, लेकिन जमीनी स्तर पर वितरण और नियमों के कारण दिक्कतें बनी हुई हैं.
रायपुर में ICAR-NIBSM द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत 170 से अधिक किसानों को उन्नत धान बीज वितरित किए गए. किसानों को उच्च उत्पादन वाली धान किस्मों के साथ वैज्ञानिक खेती, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, नर्सरी एवं रोपाई तकनीकों की जानकारी भी दी गई.
महाराष्ट्र के अकोला में यूरिया खाद के लिए 8 दिनों से लाइन में खड़े किसानों को ‘आज तक’ की ग्राउंड रिपोर्ट के बाद बड़ी राहत मिली. खबर प्रसारित होते ही प्रशासन हरकत में आया और कूपन सिस्टम लागू किया गया. अब किसानों को व्यवस्थित तरीके से खाद मिल रही है, जिससे उनकी लंबे समय से चली आ रही परेशानी कम हुई है.
Glyphosate Files: भारत में खतरनाक एग्रो केमिकल बिक रहे हैं तो इसके दो बड़े गुनहगार हैं. मल्टीनेशनल एग्रोकेमिकल कंपनियां और आंखें मूंदे बैठे सरकारी नियामक संस्थान और उसके अधिकारी. ये कंपनियां अपनी बोतलों पर चमकीले विज्ञापन छापती हैं, लेकिन कम पढ़े-लिखे किसानों को यह कभी नहीं सिखातीं कि इसका छिड़काव कैसे करना है. जब सरकार कहती है कि ग्लाइफोसेट के इस्तेमाल के लिए ट्रेंड स्प्रेयर लाओ, तो ये अपनी जिम्मेदारी से भागने लगती हैं.
भारत में खादों की खपत का पैटर्न बदल रहा है, जहां पारंपरिक यूरिया के बजाय संतुलित NPK खादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे मिट्टी की सेहत सुधारने और फसल उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल रही है.
महाराष्ट्र के अकोला जिले के अकोट में यूरिया खाद के लिए किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. खरीफ सीजन के बीच किसान रात 3 बजे से कृषि केंद्रों के बाहर लंबी कतारों में खड़े हैं. पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद बढ़ती मांग और कमी की आशंका से किसानों में चिंता और बेचैनी बढ़ गई है.
सक्ती जिले के ग्राम केसला में कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से भंडारित 3.87 टन (86 बोरी) यूरिया उर्वरक जब्त किया है.किसानों को उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए प्रशासन लगातार सख्ती बरत रहा है.
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