भारत में फिलहाल उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है, लेकिन खाड़ी देशों में युद्ध और बढ़ती खरीफ मांग के चलते जुलाई-अगस्त 2026 में फर्टिलाइजर सप्लाई संकट की आशंका बढ़ सकती है. जानें सरकार की रणनीति और स्टॉक की स्थिति.
केंद्र सरकार ने फर्टिलाइज़र और केमिकल इंडस्ट्री को बड़ी राहत दी है. अमोनियम नाइट्रेट और करीब 40 पेट्रोकेमिकल्स पर कस्टम ड्यूटी हटाई गई है. यह कदम 2 अप्रैल से 30 जून 2026 तक लागू रहेगा. इससे उद्योगों को कच्चा माल सस्ता मिलेगा और किसानों को खाद सस्ती, आसानी से और समय पर उपलब्ध होगी.
केंद्र सरकार ने फार्मर आईडी को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए राज्यों को 100 फीसदी किसान और भूमि कवरेज का लक्ष्य दिया है. बैठक में स्पष्ट किया गया कि इसी आईडी के जरिए योजनाओं, एमएसपी और उर्वरक वितरण को पारदर्शी और लक्षित बनाया जाएगा, साथ ही कालाबाजारी रोकने पर जोर रहेगा.
खाद संकट के बीच आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के किसानों ने धान की खेती में बिना यूरिया के देसी तकनीक अपनाई है. दलहन फसलों के जरिए मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन बढ़ाकर खेती की लागत शून्य कर दी गई है. यह तरीका न केवल किसानों का खर्च बचा रहा है बल्कि मिट्टी की सेहत और पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है.
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत तक पहुंच गया है. होर्मुज स्ट्रेट में बाधा से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे खाद और कीटनाशकों की कीमतें बढ़ रही हैं और किसानों को खरीफ सीजन से पहले मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. बढ़ती लागत और कमी से फसल उत्पादन और किसानों की आय पर संकट गहराने की आशंका है.
होरमुज जलडमरूमध्य संकट के कारण वैश्विक खाद सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे एशिया में बुवाई पर खतरा मंडरा रहा है. इस बीच रूस ने ग्लोबल साउथ देशों को खाद और कृषि उत्पाद उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है. बढ़ती कीमतों और सप्लाई संकट के बीच यह कदम कई देशों के लिए राहत बन सकता है.
तेलंगाना सरकार ने पैराक्वाट हर्बीसाइड पर बैन की मांग की है. यह जहरीला केमिकल किसानों और कृषि मजदूरों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है, जिससे सांस और स्किन की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. सरकार ने केंद्र से इसके इस्तेमाल पर रोक लगाने और सुरक्षित विकल्प अपनाने की अपील की है.
ग्रीन अमोनिया को लेकर पांच कंपनियों के बीच हुआ बड़ा समझौता खाद उद्योग के लिए अहम साबित होने वाला है. इस डील के तहत विभिन्न उर्वरक कंपनियों को हर साल लाखों टन सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी, जिससे आयात निर्भरता घटाने की दिशा में ठोस कदम माना जा रहा है.
खरीफ 2026 के लिए देश में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर सरकार ने भरोसा जताया है. मौजूदा स्टॉक, बढ़ते उत्पादन और आयात के सहारे 39 मिलियन टन मांग पूरी करने की तैयारी बताई गई है.
पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत में खाद की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है. IFFCO और सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि उत्पादन, स्टॉक और सप्लाई सामान्य हैं और खरीफ सीजन में कोई कमी नहीं होगी.
खरीफ सीजन से पहले उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है. सरकार ने भंडार पर्याप्त बताया है, लेकिन विशेषज्ञों ने वैश्विक कीमतों, गैस आपूर्ति और ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से किसानों की लागत और आय पर असर पड़ने की आशंका जताई है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और LNG सप्लाई में कमी के चलते IFFCO के आंवला और कलोल प्लांट बंद होने से यूरिया उत्पादन प्रभावित हुआ है. खरीफ सीजन में बढ़ती मांग के बीच सप्लाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है, जिससे किसानों को खाद मिलने में दिक्कत हो सकती है.
किसान मौजूदा समय में धान-गेहूं के अलावा दलहनी फसलों की खेती भी बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. इसके लिए सरकार भी किसानों को प्रोत्साहित कर रही है और दहलन मिसन चला रही है. इससे किसानों की बंपर कमाई भी हो रही है.
CRISIL रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण सप्लाई चेन बाधित होने से भारत में यूरिया और कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर का उत्पादन 10-15% तक घट सकता है. कच्चे माल की कमी और बढ़ती कीमतों से कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ेगा, वहीं सरकार का सब्सिडी बिल भी 20,000-25,000 करोड़ रुपये तक बढ़ने की आशंका है.
पश्चिम एशिया में तनाव और शिपिंग बाधाओं से खाद बाजार पर दबाव बढ़ा है, जिससे लागत और सप्लाई प्रभावित हो रही है. FAI ने कहा है कि सरकार और उद्योग के समन्वय से स्थिति को संभालने की कोशिश जारी है.
खरीफ सीजन से पहले खाद कंपनियां DAP, MOP और कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर के अनुबंधों में फ्लोर और सीलिंग प्राइस लागू करने पर विचार कर रही हैं. वैश्विक कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बीच यह कदम लागत जोखिम कम करने की रणनीति माना जा रहा है.
होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के कारण तेल की कीमतों में उछाल के साथ वैश्विक स्तर पर खाद की कमी का खतरा बढ़ गया है. मध्य पूर्व के प्रमुख सप्लायर्स प्रभावित होने से यूरिया और अन्य उर्वरकों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे भारत, ब्राजील और चीन जैसे बड़े कृषि देशों में फसल उत्पादन और वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वैश्विक संकट के बीच किसानों की सुरक्षा और कृषि व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उच्च स्तरीय बैठक की. बैठक में खाद, बीज और एग्रो-केमिकल्स की उपलब्धता, ‘फार्मर आईडी’ में तेजी, कालाबाजारी पर रोक और खरीफ सीजन की तैयारी पर विशेष जोर दिया गया. सरकार ने किसानों को हर संभव सहायता देने का भरोसा दिलाया.
ग्रामीण क्षेत्रों और शहरों में घर की छतों पर सब्जियों को उगाने का ट्रेंड और इसकी खेती की बढ़ती हुई डिमांड को देखते हुए राष्ट्रीय बीज निगम NSC किसानों की सुविधा के लिए ऑनलाइन बरसात के दिनों में उगाई जाने वाली हरी सब्जियों के बीज का किट बेच रहा है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते भारत में यूरिया उत्पादन आधा हो गया है. गैस की कमी से कारखानों की क्षमता प्रभावित हुई है और ऊर्जा खर्च बढ़ा है. इससे किसानों को खाद की आपूर्ति में परेशानी आ सकती है, खासकर आने वाले खरीफ सीजन में. सरकार और कंपनियां इस संकट को हल करने की कोशिश कर रही हैं.
मीडिया को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमारे पास खाद का पर्याप्त भंडार है. हम खरीफ सीजन 2026 के लिए निश्चिंत हैं. उर्वरक विभाग ने एक बयान में कहा है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने और समझदारी से विदेशों से खरीद करने की रणनीति अपनाकर किसानों को वैश्विक संकट के असर से बचाने की कोशिश की जा रही है.
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