केंद्र सरकार प्रस्तावित नए सीड बिल को अंतिम रूप देने से पहले देशभर के किसान संगठनों से सुझाव ले रही है. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौजूदा 1966 का कानून समय के साथ पुराना हो गया है और करीब 70 फीसदी बीज इसके दायरे से बाहर हैं.
खरीफ 2026 सीजन के दौरान किसानों के लिए राहत की खबर है. सरकार के अनुसार देश में यूरिया, डीएपी, एमओपी, एनपीके और एसएसपी समेत सभी प्रमुख उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है. 28 अगस्त 2026 तक कुल 426.21 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध रही, जबकि किसानों की जरूरत 383.92 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है. सरकार ने कहा है कि किसानों को खाद की कमी को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है.
छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन 2026 की बोनी लगभग पूरी हो चुकी है. अब तक 98% लक्ष्य हासिल किया जा चुका है.सरकार ने लक्ष्य से ज्यादा खाद का भंडारण किया है और किसानों को अब तक 12.71 लाख मीट्रिक टन खाद बांटी जा चुकी है.जानें पूरी रिपोर्ट में बोनी, खाद-बीज वितरण, बारिश और कृषि ऋण से जुड़ी पूरी जानकारी.
बलराम कृषि महोत्सव में CM मोहन यादव ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और कृषि यंत्रों के इस्तेमाल पर जोर दिया. उन्होंने कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने और 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाए जाने की जानकारी दी.
इफको-एमसी क्रॉप साइंस प्राइवेट लिमिटेड ने अपना 12वां स्थापना दिवस मनाया. कंपनी ने पिछले 11 वर्षों में भारतीय कृषि को मजबूत बनाने, गुणवत्तापूर्ण फसल सुरक्षा उत्पाद उपलब्ध कराने और किसान कल्याण को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. इस अवसर पर इफको और मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन के वरिष्ठ अधिकारियों ने किसानों के लिए इनोवेशन और टिकाऊ कृषि समाधानों पर जोर दिया.
किसानों को नकली और घटिया बीज से बचाने के लिए केंद्र सरकार नया और सख्त सीड एक्ट लाने की तैयारी कर रही है. कानून को अंतिम रूप देने से पहले कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान 10 सितंबर को किसान संगठनों के साथ बैठक कर उनकी राय और सुझाव लेंगे.
हिमाचल प्रदेश में जंगलों की वनस्पति नष्ट करने के लिए ग्लाइफोसेट के इस्तेमाल पर 44 सामाजिक और पर्यावरण संगठनों ने चिंता जताई है. संगठनों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र भेजकर ग्लाइफोसेट की बिक्री, भंडारण और छिड़काव पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है.
पाकिस्तान में बढ़ती कृषि लागत ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. DAP की कीमत करीब 17,500 पाकिस्तानी रुपये और यूरिया करीब 4,600 रुपये पहुंचने से खेती करना महंगा हो गया है.
मुरैना के किसानों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई बड़े ऐलान किए हैं.कैलारस शुगर फैक्ट्री को फिर शुरू कराने, दिन में 10 घंटे बिजली देने के प्रयास, 30 लाख सोलर पंप की योजना और दुग्ध समितियों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया गया.
नई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि दुनिया के करीब 46% किसान और खेतिहर मजदूर हर साल अनजाने में कीटनाशक के जहर का शिकार होते हैं. स्टडी के मुताबिक हर साल 4.33 करोड़ गंभीर मामले सामने आते हैं, जबकि करीब 11 हजार लोगों की मौत हो जाती है.
कश्मीर में विकसित धान की नई किस्में शालीमार-4 और शालीमार-5 किसानों के लिए बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई हैं. इन किस्मों से करीब 7.2 टन प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन मिला है, जो राष्ट्रीय औसत से लगभग 2.5 गुना अधिक है.
बिहार में खाद की बिक्री व्यवस्था अब डिजिटल होने जा रही है. 1 सितंबर से 19 जिलों में QR Code आधारित उर्वरक बिक्री सिस्टम लागू होगा. सरकार का लक्ष्य खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक कीमत वसूलने जैसी समस्याओं पर रोक लगाना है.
बिहार के सहरसा जिले की 21 ग्राम पंचायतों ने कचरा प्रबंधन की अनोखी मिसाल पेश की है. यहां जैविक कचरे से वर्मी कंपोस्ट तैयार कर नर्सरी विकसित की जा रही है और पौधों की बिक्री से पंचायतों को सालाना 30 से 40 हजार रुपये तक की आय हो रही है.
Side Effects Of Pesticides: देश में खाने-पीने की चीजों में कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल ने खाद्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पिछले तीन साल में जांचे गए हजारों खाद्य सैंपलों में 2,223 मामलों में कीटनाशकों की मात्रा तय सुरक्षित सीमा से ज्यादा पाई गई. सवाल है कि आखिर सरकारी तंत्र क्या कर रहा है?
केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने नई दिल्ली में ई-बिल सिस्टम का उद्घाटन किया. नई डिजिटल व्यवस्था से उर्वरक सब्सिडी बिलों की प्रोसेसिंग आसान होगी और भौतिक बिलों की आवाजाही खत्म होने के साथ पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने की उम्मीद है.
धान की रोपाई के बाद किसानों के बीच उर्वरकों की मांग बढ़ गई है. इसी बीच खाद की कालाबाजारी और मनमानी कीमतों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है. किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है.
सिहोरा में किसानों ने फसल विविधीकरण अभियान के तहत तिल की खेती को अपनाकर नई उम्मीद जगाई है.कृषि विभाग के अधिकारियों ने खेतों का अवलोकन कर किसानों को तिल की खेती के फायदे और संभावनाओं की जानकारी दी.
केंद्र सरकार ने कार्बोसल्फान कीटनाशक पर बैन लगाने का प्रस्ताव रखा है. विशेषज्ञ समिति ने इसे इंसानी सेहत, पशुओं और पर्यावरण के लिए खतरनाक बताते हुए इसके निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध की सिफारिश की है.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात में कहा कि रूस भारत को खाद की सप्लाई बढ़ा रहा है और आगे भी जारी रखेगा. उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि रूस वैश्विक बाजार में 60 मिलियन टन अनाज उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है, जिससे दुनिया में अनाज की कमी नहीं होने दी जाएगी.
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और आंध्र प्रदेश के सीएम एन चंद्रबाबू नायडू ने एलुरु में नॉन-जीएमओ पॉपकॉर्न मक्का के हाइब्रिड बीज लॉन्च किए. राधाकृष्णन ने कहा कि भारत खाद्य जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर नहीं रह सकता और कृषि को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी.
कर्नाटक के गन्ना किसानों के लिए Paradeep Phosphates Limited ने Jai Kisaan Navratna Cropfit खाद लॉन्च की है. यह खास खाद गन्ने की शुरुआती बढ़वार के लिए तैयार की गई है. इसमें NPK 14:14:13 के साथ सल्फर, जिंक, बोरॉन और आयरन शामिल हैं. कंपनी के अनुसार, संतुलित पोषण से फसल की बढ़वार, पोषक तत्वों के बेहतर इस्तेमाल और उत्पादन में मदद मिल सकती है.
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने खरीफ और आगामी रबी सीजन के लिए उर्वरक विभाग की तैयारियों की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि देश में खाद की स्थिति आरामदायक है. किसानों को समय पर पर्याप्त खाद मिले और सप्लाई में कोई रुकावट न आए, सरकार की प्राथमिकता है.
भारत में किसान अब केवल अधिक उत्पादन पर नहीं, बल्कि मिट्टी की सेहत, उत्पादन लागत और टिकाऊ खेती पर भी ध्यान दे रहे हैं. पिछले 30 वर्षों में जैव और नीम आधारित कीटनाशकों का उपयोग 62 गुना बढ़ा है. जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और सूक्ष्मजीव आधारित कृषि आदानों की बढ़ती मांग यह बता रही है कि भारतीय कृषि धीरे-धीरे वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल खेती की ओर बढ़ रही है.
किसानों के लिए खाद खरीदना अब आसान होगा. ई-विकास 2.0 के तहत जबरन कॉम्बो की बाध्यता खत्म, टोकन की सीमा हटाई गई और जल्द WhatsApp से खाद का टोकन व स्टॉक की जानकारी मिलेगी. जानिए नई व्यवस्था में किसानों को क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी.
कश्मीर में पॉपलर और विलो पेड़ों पर नए कीट Drosicha turkistanica के हमले से किसानों की चिंता बढ़ गई है. यह कीट पेड़ों का रस चूसकर उन्हें कमजोर करता है और ज्यादा संक्रमण में पेड़ सूख सकते हैं. विशेषज्ञों ने बाहर से आने वाली पौध सामग्री की सही क्वारंटीन, जांच और निगरानी मजबूत करने की जरूरत बताई है.
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