ओडिशा के नुआपाडा जिले में एक किसान की मौत के बाद विवाद खड़ा हो गया है. परिवार का आरोप है कि मंडी में धान न बेच पाने की परेशानी के कारण किसान ने आत्महत्या की, जबकि जिला प्रशासन ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि मामला घरेलू विवाद से जुड़ा हुआ है. किसान को धान बेचने के लिए टोकन जारी किया गया था, जो अब भी वैध था. घटना के बाद ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया और विपक्षी दल BJD ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में कर्जमाफी की मांग को लेकर राजुरा तहसील के गोयेगाव निवासी किसान दिवाकर हिरामन पहनपाटे बैल पर सवार होकर तहसील कार्यालय पहुंच गए. किसान ने नारेबाजी कर प्रशासन का ध्यान खींचा. इस अनोखे आंदोलन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और किसानों की आर्थिक परेशानी व कर्जमाफी का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है.
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने 23 जून 2026 को अपनी रफ्तार बढ़ाते हुए महाराष्ट्र के कई और इलाकों, जिसमें मुंबई भी शामिल है, के साथ तेलंगाना और ओडिशा के शेष हिस्सों तथा छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के कुछ नए क्षेत्रों में दस्तक दे दी है. मौसम विभाग के अनुसार अगले 2 से 3 दिनों में गुजरात के कुछ हिस्सों, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त इलाकों तथा मध्य प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में मॉनसून आगे बढ़ सकता है.
UP News: संभावित अल्पवृष्टि अथवा सूखे की स्थिति के दृष्टिगत तैयारियों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि कृषि विभाग द्वारा विभिन्न परिस्थितियों के लिए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की गई है. आवश्यकता पड़ने पर उर्द, मूंग, ज्वार, बाजरा, तिल तथा अन्य कम अवधि वाली फसलों के आच्छादन को बढ़ाया जाएगा.
UP News: कृषि निदेशक डॉ पंकज कुमार त्रिपाठी ने बताया कि योगी सरकार सांवा, कोदो, मडुवा, संकर ज्वार और संकर बाजरा जैसे पौष्टिक श्रीअन्न फसलों के उत्पादन और विपणन को प्रोत्साहित कर रही है. जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अगले कुछ दिनों में अपनी रफ्तार बढ़ा सकता है और 23 जून 2026 के आसपास तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के अतिरिक्त हिस्सों के साथ छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों तक पहुंचने की संभावना है. दूसरी तरफ पूर्वोत्तर भारत, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में पूरे सप्ताह कहीं-कहीं तेज बारिश देखने को मिल सकती है, जिससे मौसम में बदलाव के संकेत हैं.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि इस समझौते से किसानों, पशुपालकों, डेयरी और पोल्ट्री सेक्टर पर असर पड़ सकता है. चढ़ूनी ने सरकार से किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने की मांग की है.
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अगले कुछ दिनों में अपनी रफ्तार बढ़ा सकता है और 23 जून 2026 के आसपास तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के अतिरिक्त हिस्सों के साथ छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों तक पहुंचने की संभावना है. दूसरी तरफ पूर्वोत्तर भारत, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में पूरे सप्ताह कहीं-कहीं तेज बारिश देखने को मिल सकती है, जिससे मौसम में बदलाव के संकेत हैं.
तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में रविवार को एक झींगा प्रोसेसिंग फैक्टरी में अमोनिया गैस लीक होने से बड़ा हादसा हो गया. इस हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि 65 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने रासायनिक उर्वरकों के अधिक इस्तेमाल को कम करने पर जोर दिया. उन्होंने किसानों से ‘खेत बचाओ अभियान’ से जुड़ने और प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि पशुपालन और मछली पालन जैसी गतिविधियां किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अगले कुछ दिनों में अपनी रफ्तार बढ़ा सकता है और 23 जून 2026 के आसपास तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के अतिरिक्त हिस्सों के साथ छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों तक पहुंचने की संभावना है. दूसरी तरफ पूर्वोत्तर भारत, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में पूरे सप्ताह कहीं-कहीं तेज बारिश देखने को मिल सकती है, जिससे मौसम में बदलाव के संकेत हैं.
महाराष्ट्र के जालना में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया. भोकरदन क्षेत्र में किसानों ने कुएं में खाट डालकर बैठते हुए सरकार का ध्यान कर्जमाफी और अन्य समस्याओं की ओर खींचा.
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अगले कुछ दिनों में अपनी रफ्तार बढ़ा सकता है और 23 जून 2026 के आसपास तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के अतिरिक्त हिस्सों के साथ छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों तक पहुंचने की संभावना है. दूसरी तरफ पूर्वोत्तर भारत, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में पूरे सप्ताह कहीं-कहीं तेज बारिश देखने को मिल सकती है, जिससे मौसम में बदलाव के संकेत हैं.
बागपत में नकली पनीर माफिया पर प्रशासन का बड़ा प्रहार हुआ है. खाद्य विभाग और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में करीब 580 किलो से ज्यादा नकली पनीर और नकली क्रीम बरामद की गई. गाजियाबाद से बागपत लाई जा रही इस खेप को बाजार तक पहुंचने से पहले ही पकड़ लिया गया.
गुजरात में किसानों द्वारा खेती की जमीन पर बिजली के खंभे लगाने के खिलाफ विरोध तेज हो गया है. मोरबी के जेतपर गांव में किसान आमरण अनशन पर बैठ गए हैं और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं. किसानों का आरोप है कि बिना सहमति के जमीन का नुकसान किया जा रहा है और जंत्री दर के बजाय बाजार मूल्य पर भुगतान होना चाहिए. बढ़ते विरोध के बीच राज्य सरकार नई मुआवजा नीति लाने की तैयारी कर रही है, जिससे किसानों के हितों की बेहतर सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके.
तमिलनाडु में किसानों ने फसल कर्जमाफी और धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. तमिलनाडु ऑल फार्मर्स एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर 30 जून को राज्यव्यापी भूख हड़ताल करने का ऐलान किया है.
गंगापुर सिटी के खंडीप गांव में नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर किसानों की महापंचायत गुरुवार को 14वें दिन भी जारी रही. किसानों के अनुसार, करीब 200 ट्रैक्टर, कई जेसीबी मशीनें, दर्जनों जुगाड़ वाहन और डीजे के साथ निकली विशाल रैली ने पूरे इलाके में आंदोलन की ताकत का प्रदर्शन किया.
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अगले कुछ दिनों में अपनी रफ्तार बढ़ा सकता है और 23 जून 2026 के आसपास तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के अतिरिक्त हिस्सों के साथ छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों तक पहुंचने की संभावना है. दूसरी तरफ पूर्वोत्तर भारत, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में पूरे सप्ताह कहीं-कहीं तेज बारिश देखने को मिल सकती है, जिससे मौसम में बदलाव के संकेत हैं.
बिहार कृषि विभाग के बामेती परिसर में आम महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. हर साल की भांति इस वर्ष भी उद्यान निदेशालय की ओर से आयोजित तीन दिवसीय आम महोत्सव-2026 का आयोजन 19 से 21 जून तक किया जाएगा.
अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है. संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि अगर इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए तो देशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा.
पांचवा बांध विवाद की जड़ें वर्ष 2006 में हुए गुर्जर आंदोलन से जुड़ी हैं. बांध निर्माण के दौरान जिन गांवों की जमीनें डूब क्षेत्र में चली गईं, वहां के किसानों का कहना है कि पानी पर पहला अधिकार उनका है. इसी मांग को लेकर उन्होंने नहरों में पानी छोड़े जाने का विरोध शुरू कर दिया.
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