राजस्थान के करौली जिले के मंडरायल में यूरिया खाद की किल्लत से नाराज किसानों ने तहसील कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया. किसानों ने आरोप लगाया कि 10 में से 9 खाद दुकानों को दिन में बंद रखकर रात में महंगे दामों पर बाहर बेचा जा रहा है. किसानों का नेतृत्व खुद बीेजेपी नेता ने किया, जबकि राज्य में बीजेपी की ही सरकार है.
राजस्थान के धौलपुर जिले की बसेड़ी पुलिस और कृषि विभाग ने डीएपी खाद की कालाबाजारी का भंडाफोड़ किया. एक गोदाम से 260 बैग जब्त किए गए, जिसमें असली एसएसपी दानेदार खाद को आईपीएल ब्रांड के बैग में भरकर महंगे दाम पर बेचा जा रहा था.
Fertilizer Crisis: राजस्थान के धौलपुर जिले में किसानों को खाद के लिए भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है. अधिकतर किसानों को दिनभर लाइन में लगने के बाद शाम को खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है. वहीं कुछ किसानों ने बताया कि दो कट्टा डीएपी की तय राशि 2700 रुपए ली जा रही है और दो कट्टे के पैसे में एक ही कट्टा दिया जा रहा है.
Bharatpur Fertilizer Issue: रबी सीजन की बुवाई से पहले भरतपुर सहित कई जिलों में खाद की किल्लत से किसान परेशान हैं. हजारों किसान सुबह से लाइनों में खड़े रहते हैं, फिर भी खाली हाथ लौटते हैं.
Alwar DAP Shortage: राजस्थान के अलवर जिले में डीएपी खाद के लिए मारामारी शुरू हो गई है. किसानों को 8 से 10 घंटे लाइन में लगने के बाद भी खाद मिल पाना मुश्किल हो गया है. किसानों ने केंद्र संचालकों और ग्राम सचिव पर खाद की कालाबाजारी का आरोप लगाया है.
Fertilisers Crisis: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों को चालू खरीफ सीजन के लिए सभी जिलों में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ताकि किसानों को किसी भी कठिनाई का सामना न करना पड़े. राजस्थान सीएम ने निर्देश दिए कि किसानों को अपने-अपने जिलों में खाद की उपलब्धता के बारे में नियमित रूप से जानकारी दी जाए.
Fertilizer Adulteration: खरीफ सीजन से पहले राजस्थान में नकली खाद के खिलाफ अभियान तेज हो गया है. कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने ब्यावर में फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया. लेकिन उन्हें वहां मिनरल ग्राइंडिंग यूनिट मिली. मंत्री ने बताया कि मार्बल स्लरी से नकली डीएपी, यूरिया व पोटाश बनाकर किसानों के साथ धोखा किया जा रहा है. इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
Fake Fertilizer: राजस्थान में नकली खाद की फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ हुआ है जहां मिट्टी, मार्बल और बालू से खाद बनाई जाती थी. यह सबकुछ अधिकारियों के संज्ञान में चल रहा था क्योंकि उनकी इसमें पूरी मिलीभगत थी.
करीब 10 साल पहले राजस्थान के हाड़ौती में एक लाख हेक्टेयर में धनिया का उत्पादन होता था. साल 2024-25 में यह घटकर करीब 40 हजार हेक्टेयर रह गया है यानी इसमें करीब 60 फीसदी की गिरावट आई है. साथ ही धनिया में 'छाछिया' और 'लोंगिया' रोग का प्रकोप बढ़ गया है.
आईएमडी ने जीरे की फसल के लिए कहा है कि बीज बनने की अवस्था में किसानों को फसल की सिंचाई जरूर कर देनी चाहिए. अगर जीरे पर किसी तरह के कीट का प्रकोप दिख रहा है तो डाईमेथोएट 30 ईसी @ 1 एमएल प्रति लीटर पानी मिलाकर पौधों पर छिड़काव करें. इसके अलावा किसान चाहें तो एसीफेट 75 एसपी @750 ग्राम दवा पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें. किसान इन दोनों में किसी एक दवा के स्प्रे से कीटों को हमेशा के लिए खत्म कर सकते हैं.
किसानों को डीएपी उर्वरक के विकल्प के तौर पर सिंगल सुपर फॉस्फेट और एनपीके खाद के इस्तेमाल की सलाह दी जा रही है. माह अक्टूबर 2023 की तुलना में अक्टूबर 2024 में सिंगल सुपर फॉस्फेट का 76 फीसदी और एनपीके उर्वरकों का 221 फीसदी अधिक इस्तेमाल किया गया है.
राजस्थान के धौलपुर में किसान डीएपी खाद की किल्लत और कालाबाजारी से परेशान हैं. किसानों ने कहा कि कई जगहों पर खाद एक दिन में ही खत्म हो जा रही है. वहीं, जहां खाद उपलब्ध है, वहां ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है. किसानों का कहना है कि जरूरी खाद के लिए ज्यादा पैसे चुकाने के कारण खेती की लागत बढ़ रही है.
राजस्थान में किसान खाद की कमी से परेशान है. कई जगहों पर रोजाना किसानों की भारी भीड़ लग रही है. हालांकि, सरकार इससे हटके पर्याप्त उपलब्धता की बात कह रही है. इसे लेकर जयपुर, कृषि आयुक्त चिन्मयी गोपाल ने बयान दिया है.
सरसों और गेहूं की फसल की बुवाई करीब-करीब पूरी हो चुकी हैं, जबकि आलू की भी बुवाई किसानों ने शुरू कर दी हैं. ऐसे में जिले में खाद,बीज और कीटनाशक दवा महंगी मिलने लगी है, जिससे यहां के किसान काफी परेशान हैं.
राजस्थान सरकार ने प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में 24 राजीव गांधी बीज विक्रय केन्द्रों की शुरूआत की है. इसके साथ ही पांच बीज विस्तार केन्द्र भी खोले गए हैं.
खेती में बढ़ते कीटनाशकों के उपयोग और उसके दुष्परिणामों को देखते हुए राजस्थान सहित पूरे देश में इन प्रयोगशालाओं की स्थापना की गई है. आईपीएम लैब का मुख्य उद्देश्य किसानों को समन्वित कीट प्रबंधन तकनीकी और विभिन्न प्रकार के जैव कारकों की जानकारी देना होता है. ताकि किसानों के बीच इनके उपयोग और महत्व का प्रचार हो सके.
सोयाबीन की बीज किसान खुद ही तैयार कर सकते हैं. क्योंकि सोयाबीन एक स्वपरागित फसल होती है. इसीलिए इसके बीजों को हर साल बदलने की जरूरत नहीं होती.
राजस्थान सरकार वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए प्रदेश के 20 लाख किसानों को सब्जी के बीज उपलब्ध कराएगी. सरकार 60 करोड़ रुपये इस पर खर्च करेगी. इस साल के बजट में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बारे में घोषणा की थी.
जोबनेर के कालख में जयपुर के लाइसेंसधारी कृषि आदानों (उत्पादों, इनपुट्स) के थोक और खुदरा विक्रेताओं की गुणवत्ता और बेचान के संबंध में ट्रेनिंग रखी गई. इसमें उन्हें नियम, कानून की जानकारी, पीओएस मशीन अपग्रेड करने व राज किसान सुविधा एप के बारे में विस्तार से बताया गया.
राजस्थान में कृषि विभाग ने बीज और उर्वरक बेचान में शिकायतें मिलने पर छह उर्वरक एवं बीज विक्रेता फर्मों के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए हैं. कृषि विभाग के अधिकारियों ने जांच कर 15 दिन के लिए लाइसेंस सस्पेंड करने के साथ-साथ स्पष्टीकरण भी मांगा है.
पेड़ पौधों के पत्ते और तनों के साथ गन्ने की खोई मिलाई जाती है. इसमें पशुओं का गोबर मिलाया जाता है. इसी गोबर को खेत में बनाए गड्ढे में सड़ाया जाता है. इस प्रक्रिया को पूरा करने में ज्यादा समय लगता है. इसलिए कंपोस्ट बनाने की एक नई विधि विकसित की गई है जिसमें केंचुए का प्रयोग किया जाता है. इसे वर्मी कंपोस्ट या केंचुआ खाद कहते हैं.
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