Paddy-farming : नर्सरी का झंझट खत्म, आधी लागत में बंपर मुनाफा, ड्रम सीडर से धान की खेती होगी सुपरहिट!

Paddy-farming : नर्सरी का झंझट खत्म, आधी लागत में बंपर मुनाफा, ड्रम सीडर से धान की खेती होगी सुपरहिट!

आजकल बदलते मौसम, अलनीनो के खतरे और कम बारिश की वजह से धान की पारंपरिक खेती बहुत घाटे का सौदा साबित हो रही है। ऐसे में कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, 'ड्रम सीडर तकनीक' किसानों के लिए एक वरदान है. इस स्मार्ट तकनीक से धान की खेती करने पर न तो आपको महंगी नर्सरी तैयार करने की टेंशन होगी और न ही कड़कती धूप में भारी पानी और मजदूरों के साथ रोपाई का भारी खर्च उठाना पड़ेगा. कम पानी और आधी लागत में सीधे अंकुरित बीजों की बुआई करके किसान भाई न सिर्फ अपना वक्त और पैसा बचा सकते हैं, बल्कि छिटकवां विधि के मुकाबले 15% ज्यादा बंपर पैदावार और मुनाफा भी कमा सकते हैं.

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Paddy-farming : नर्सरी का झंझट खत्म, आधी लागत में बंपर मुनाफा, ड्रम सीडर से धान की खेती होगी सुपरहिट!ड्रम सीडर से धान की सीधी बुआई

आज के दौर में मौसम का मिजाज पल-पल बदल रहा है. कभी अलनीनो का खतरा तो कभी कम बारिश की आशंका किसानों की चिंता बढ़ा देती है. ऐसे में धान की पारंपरिक नर्सरी तैयार करना और फिर भारी पानी में उसकी रोपाई  करना एक जुआ खेलने जैसा हो गया है. नर्सरी के लिए न केवल पानी का भारी खर्च उठाना पड़ता है, बल्कि आसमान की तरफ टकटकी लगाकर बारिश का इंतजार भी करना पड़ता है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलते मौसम और पानी की किल्लत से निपटने के लिए ड्रम सीडर से धान की सीधी बुआई सबसे बेहतरीन और कामयाब ऑप्शन है. इससे पानी के इंतजार और फिजूल खर्च दोनों से निजात मिल जाती है.

धान की खेती का नया 'शॉर्टकट 

धान की खेती हमेशा से किसानों के लिए कड़ी मेहनत और भारी लागत  का काम रही है. पहले नर्सरी उगाओ और फिर कड़कती धूप में एक-एक पौधे की रोपाई करो. आज के समय में सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि ऐन मौके पर मजदूर  नहीं मिलते, और जो मिलते हैं उनकी मजदूरी इतनी महंगी होती है कि खेती का बजट बिगड़ जाता है. कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि परंपरागत रोपाई में वक्त और पैसा दोनों पानी की तरह बहते हैं. लेकिन मानव चलित यंत्र 'ड्रम सीडर' इस पूरी झंझट को खत्म कर देता है. इसके जरिए बिना नर्सरी के सीधे खेत में अंकुरित बीज बोए जाते हैं, जिससे किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ बहुत कम हो जाता है.

नर्सरी का झंझट खत्म, धान की खेती का नया ट्रेंड!

अक्सर मजदूर न मिलने पर किसान 'छिटकवां विधि' से धान बो देते हैं, लेकिन कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक इससे फसल एक समान नहीं उगती और पैदावार भी कमजोर रह जाती है. इसके विपरीत, ड्रम सीडर तकनीक से हर एक बीज बराबर दूरी पर और एक समान गहराई में अंकुरित  होता है. अगर इस मशीन की बनावट की बात करें, तो यह बेहद हल्की और मजबूत है. प्लास्टिक के 6 डिब्बों से बनी इस मशीन का कुल वजन बिना बीज के सिर्फ 6 किलोग्राम है. इसके हर डिब्बे में 1.5 से 2 किलो तक बीज आ जाता है. इसमें पास और दूर के हिसाब से छेद बने होते हैं, जिससे यह मशीन एक बार में 6 से लेकर 12 कतारों में बिल्कुल सटीक बुआई करती है.

न मानसून का इंतजार, ना पानी का भारी खर्च 

कृषि वैज्ञानिको सलाह है कि ड्रम सीडर से बुआई का सबसे सही वक्त जून की शुरुआत से लेकर इस महीने के आखिर तक होता है. ध्यान रहे कि मानसून आने से पहले ही बुआई का काम निपटा लें, क्योंकि ज्यादा जलभराव होने से बीज का विकास रुक जाता है. इसकी तैयारी बेहद आसान है—बीज को पहले 12 घंटे पानी में भिगोएं, फिर जूट के बोरे से ढंककर 24 घंटे के लिए अंकुरित होने दें. ध्यान रखें कि अंकुर  बहुत ज्यादा बड़े न हों. मशीन में डालने से आधा घंटा पहले इन्हें छांव में सुखा लें. सबसे मजेदार बात यह है कि महज दो आदमी इस मशीन की मदद से 8 घंटे में पूरे एक हेक्टेयर खेत की बुआई बड़े आराम से कर सकते हैं.

खर्चा आधा, धान की पैदावार 15% ज्यादा 

ड्रम सीडर तकनीक को अपनाने के फायदे बेमिसाल हैं. इस विधि से खेती करने पर नर्सरी तैयार करने का झंझट खत्म होता है, जिससे पानी की भारी बचत होती है. कतार में बुआई होने की वजह से फसल की बढ़वार बहुत शानदार होती है और हवा-धूप पौधों को अच्छी तरह मिलती है. विशेषज्ञों के अनुसार, छिटकवां विधि के मुकाबले इससे 15 फीसदी ज्यादा पैदावार मिलती है. इतना ही नहीं, ड्रम सीडर से बोई गई धान की फसल रोपाई वाली फसल के मुकाबले 10 दिन पहले पककर तैयार हो जाती है. हालांकि, इस्तेमाल के वक्त यह सावधानी जरूर रखें कि डिब्बों को दो-तिहाई  से ज्यादा न भरें और मशीन को हमेशा आगे की तरफ ही खींचें. कीट और बीमारियों का नियंत्रण आम धान की तरह ही होता है, लेकिन कम खर्च में यह मुनाफा दोगुना कर देती है.

 

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