उत्तर प्रदेश में गन्ने की चार नई किस्मों को खेती के लिए मंजूरी मिली है. इनमें को.शा.23232, को.शा.19235, को.शा.18232 और को.लख.21201 शामिल हैं. नई किस्मों में बेहतर पैदावार और चीनी परता के आंकड़े सामने आए हैं, जबकि कई पुरानी गन्ना किस्मों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का भी फैसला लिया गया है.
UP News: मौर्य ने कहा कि वैश्विक बाजार में उत्तर प्रदेश के खाद्य उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना होगा. यूरोप, अमेरिका सहित दुनिया के प्रमुख बाजारों में खाद्य उत्पादों के लिए निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन आवश्यक है. उद्यमियों को उत्पाद की गुणवत्ता के साथ आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी ध्यान देना चाहिए.
UP Farmers News: सिद्धार्थ गौतम ने किसानों को उपज का बेहतर मूल्य हासिल करने और उत्पादन लागत कम करने के उपाय बताए. उन्होंने कहा कि बीज, खाद, कीटनाशक और कृषि यंत्रों की सामूहिक खरीद तथा उपज की सामूहिक बिक्री किसानों की बाजार क्षमता को मजबूत कर सकती है.
अयोध्या के तारुन ब्लॉक के करनाईपुर गांव में आंधी-बारिश से किसान राज बहादुर वर्मा की धान, गन्ना और केले की फसल को भारी नुकसान हुआ है. धान के खेत में करीब छह इंच पानी भर गया है, जबकि तेज हवा से गन्ना और केले के पौधे जमीन पर गिर गए हैं.
अयोध्या में लगातार बारिश और तेज हवाओं ने धान और गन्ना किसानों की चिंता बढ़ा दी है. कई जगह पककर तैयार धान की फसल खेतों में गिर गई है, जबकि लंबे गन्ने भी तेज हवा से जमीन पर लेट गए हैं. खेतों में जलभराव के कारण फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है.
तोरिया एक कम अवधि वाली तिलहनी फसल है जो लगभग 90 दिनों में तैयार हो जाती है. कम लागत, कम सिंचाई और बेहतर मुनाफे के कारण यह किसानों के लिए लाभकारी विकल्प मानी जाती है. खरीफ और रबी सीजन के बीच इसकी खेती कर किसान अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं. तोरिया के दानों में 41 से 43 प्रतिशत तक तेल पाया जाता है और फसल चक्र में शामिल करने से मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है. उत्तर प्रदेश कृषि विभाग किसानों को तोरिया की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है.
नेपाल में आई बाढ़ के बाद जंगली हाथियों का झुंड पीलीभीत के गांवों तक पहुंच गया है. हाथी रात में खेतों में घुसकर धान और गन्ने की फसलें रौंद रहे हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है. वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है और नुकसान के सर्वे के बाद किसानों को मुआवजा दिलाने की बात कही है.
फर्रुखाबाद में गंगा नदी एक बार फिर उफान पर है और जलस्तर खतरे के निशान 137.10 मीटर तक पहुंच गया है. करीब पांच दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं और खेतों में पानी भरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है.
Sugarcane Farming: कृषि उत्पाद का विदेश पहुंचना केवल किसान और निर्यातक के बीच का कारोबार नहीं है. इसके पीछे प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन और लॉजिस्टिक्स की पूरी श्रृंखला काम करती है। निर्यात बढ़ने के साथ इन क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना रहती है.
grafted Brinjal Farming: डॉ. बहादुर ने किसानों को ग्राफ्टेड पौधों के चयन, रोपण, सिंचाई, पोषण प्रबंधन और नियमित निगरानी के बारे में विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने विशेष रूप से बताया कि पौध रोपण के समय ग्राफ्ट यूनियन (जोड़) मिट्टी के संपर्क में नहीं आना चाहिए, ताकि पौधों की रोग सहनशीलता का पूरा लाभ मिल सके.
Potato Farmers: सिंह ने आलू किसानों को बेहतर बाजार एवं अधिकतम लाभ उपलब्ध कराने के लिए अन्य राज्यों में आलू के विपणन बढ़ाने की कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया. इसके साथ ही उन्होंने अन्य प्रदेशों के आलू व्यापारियों के साथ यथाशीघ्र सम्मेलन आयोजित कराने के निर्देश दिए.
Sugarcane Farmers: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत और सहारा साबित हुई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किसानों को समयबद्ध और नियमित गन्ना मूल्य भुगतान किया जा रहा है.पेराई सत्र 2025-26 में अब तक गन्ना किसानों को 30,831.81 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है.
बांदा के बबेरू क्षेत्र के घोसड़ और आसपास के गांवों में करीब तीन महीने से बिजली संकट से किसान परेशान हैं. बिजली नहीं मिलने से खेतों की सिंचाई और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. नाराज किसान परिवार और ट्रैक्टर लेकर बिजली घर पहुंचे और अधिकारियों से जल्द आपूर्ति बहाल करने की मांग की.
Lucknow News: इसके साथ ही आगामी आलू सीजन में 1.75 रुपये प्रति किलोग्राम तक परिवहन सहायता/सब्सिडी दिए जाने की दिशा में भी सरकार की ओर से तैयारी किए जाने की जानकारी बैठक में सामने आई. किसान संगठन ने मांग रखी कि किसानों को इसका लाभ बिना किसी रुकावट और सरल प्रक्रिया के माध्यम से मिलना चाहिए.
उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और बाढ़ से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई है. प्रदेश में अब तक 17,428 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जिसमें कृषि भूमि और बोया गया क्षेत्र भी शामिल है. बाढ़ से प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए सरकार ने 200 करोड़ रुपये का अनुदान जारी किया है.
आगरा में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र की एक अहम बैठक हुई. इसका मकसद इसे पूरे दक्षिण एशिया के लिए आलू और शकरकंद रिसर्च का मुख्य हब बनाना है. बैठक में तय हुआ कि नई तकनीकें अब सिर्फ लैब तक नहीं, बल्कि सीधे किसानों के खेतों में पहुंचेंगी। इससे पैदावार और किसानों की आमदनी तेजी से बढ़ेगी। साथ ही, पड़ोसी देशो के साथ मिलकर एक मजबूत नेटवर्क बनाने पर जोर दिया गया, ताकि खराब मौसम में भी फसलें महफूज रहें और किसानों को मेहनत का पूरा मुनाफा मिल सके.
Varanasi News:बैठक के दौरान दिलीप स्वामी ने कहा कि महाराष्ट्र के किसान बड़ी मात्रा में टमाटर, मिर्च, बैंगन, प्याज और पत्तेदार सब्जियों की खेती करते हैं और निर्यात से अच्छा लाभ कमा रहे हैं, परंतु वर्तमान में कीटनाशकों व रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी, पानी, किसान के स्वास्थ्य और सब्जी की गुणवत्ता पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ रहा है.
Potato Farmers News: किसानों को नवीन एवं उच्च गुणवत्ता वाली प्रजातियों के आलू बीज उपलब्ध कराने के लिए 5 करोड़ रुपये की बीज विक्रय दर में छूट योजना लागू की गई है. इसके तहत विभागीय आधारीय आलू बीज के क्रय पर अधिकतम 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की छूट दी जाएगी, जिससे प्रति हेक्टेयर उत्पादन लागत में कमी आएगी. इससे 15 हजार से अधिक किसानों को फायदा पहुंचेगा.
Potato Farmers News: उत्तर प्रदेश सरकार ने आलू किसानों को राहत देने के लिए भंडारण शुल्क में ₹1 प्रति किलोग्राम की छूट का प्रावधान किया है. यह राशि डीबीटी के जरिए किसानों के खातों में भेजी जाएगी. इसके लिए ₹1,000 करोड़ का बजट रखा गया है. वहीं, भावांतर भुगतान के तहत भी किसानों को आर्थिक मदद मिलेगी.
Organic Farming Story: विनोद आगे बताते हैं कि मिलावटी और महंगाई के इस जमाने में शुद्ध फलों को खाएंगे और मोहल्ले के लोगों को भी खिलाएंगे. उन्होंने बताया कि उनके पास इतनी बड़ी तादाद में आम, अनार, जामुन, चीकू, करौंदा, टमाटर, बैंगन, लौकी, हरी मिर्च, नींबू, भिंडी, करेला और तमाम दूसरी सब्जियों हो जाती हैं.
Wheat Procurement: एमएसपी खरीद व्यवस्था केवल फसल खरीद तक सीमित नहीं रही, बल्कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा का मजबूत माध्यम बन गई है. डिजिटल तकनीक के उपयोग से खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है और भुगतान सीधे बैंक खातों में होने से बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हुई है.
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