
खेती के साथ पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने का सबसे भरोसेमंद माध्यम बनता जा रहा है. जहां अधिकांश किसान गाय, भैंस, बकरी और मुर्गी पालन को प्राथमिकता देते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के एक युवा किसान ने सूअर पालन (Pig Farming) को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल दी.चायल तहसील के शेखपुरा गांव निवासी शशिकांत आज उन किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं, जो कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने का सपना देखते हैं.
साल 2019 में जब शशिकांत ने सूअर पालन का व्यवसाय शुरू करने का फैसला लिया, तो गांव और आसपास के लोगों ने उनका मजाक उड़ाया. सामाजिक सोच और पूर्वाग्रहों के कारण कई लोगों ने उन्हें इस काम से दूर रहने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने नकारात्मक बातों पर ध्यान देने के बजाय अपने लक्ष्य पर फोकस रखा.
शशिकांत ने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से प्रशिक्षण प्राप्त किया और पशुपालन विशेषज्ञों से सलाह लेकर वैज्ञानिक तरीके से सूअर पालन शुरू किया. उन्होंने करीब 2 लाख रुपये की पूंजी लगाकर 10 सूअरों के साथ अपना सफर शुरू किया.
शशिकांत की सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण उन्नत नस्ल का चयन माना जा रहा है.कृषि विज्ञान केंद्र के पशु वैज्ञानिक डा. आशीष श्रीवास्तव की सलाह पर उन्होंने लार्ज व्हाइट (Large White) नस्ल के सूअरों का पालन शुरू किया. विशेषज्ञों के अनुसार यह नस्ल व्यावसायिक सूअर पालन के लिए काफी उपयुक्त मानी जाती है.
शशिकांत बताते हैं कि यदि पशुओं को संतुलित आहार, साफ-सफाई और समय पर टीकाकरण उपलब्ध कराया जाए तो वे तेजी से विकसित होते हैं.अच्छी देखभाल के कारण उनके सूअर 6 से 8 महीने में बिक्री योग्य हो जाते हैं, जिससे किसानों को जल्दी आय प्राप्त होती है.
वर्तमान में बाजार में सूअर के मांस की मांग लगातार बढ़ रही है.कई राज्यों में इसका भाव 200 से 225 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिल जाता है, जिससे किसानों को बेहतर लाभ प्राप्त होता है.
शशिकांत के अनुसार एक सूअर को एक क्विंटल वजन तक तैयार करने में लगभग 25 से 30 हजार रुपये का खर्च आता है.वहीं बाजार में उसकी बिक्री से 1 लाख से 1.25 लाख रुपये तक की आय प्राप्त हो सकती है.
यदि कोई किसान बड़े स्तर पर 100 सूअरों के साथ व्यवसाय शुरू करता है, तो प्रारंभिक लागत लगभग 4 से 5 लाख रुपये तक आती है.एक वर्ष के भीतर यही पशु तैयार होकर 20 से 22 लाख रुपये तक की बिक्री दे सकते हैं. खर्च निकालने के बाद किसान को 15 से 17 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा मिलने की संभावना रहती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय में सूअर पालन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का एक प्रभावी माध्यम बन रहा है.इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अपेक्षाकृत कम जगह और सीमित पूंजी में भी इसे शुरू किया जा सकता है.
साथ ही, सूअरों की प्रजनन क्षमता अधिक होने के कारण पशुओं की संख्या तेजी से बढ़ती है, जिससे व्यवसाय का विस्तार करना आसान हो जाता है.
आज शशिकांत की पहचान एक सफल प्रगतिशील किसान के रूप में हो चुकी है. जिस व्यवसाय को लेकर कभी लोग उनका मजाक उड़ाते थे, वही आज उनकी सफलता की वजह बना है.उनकी कहानी यह संदेश देती है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सलाह और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ किसी भी व्यवसाय को अपनाएं, तो कम संसाधनों में भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है.
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