
देश में प्याज उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में सुधार करने और भंडारण के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान प्रणाली द्वारा कई उन्नत प्याज किस्मों की सिफारिश की गई है. इन नई किस्मों में लाल और सफेद दोनों प्रकार के प्याज शामिल हैं, जो अलग-अलग कृषि जलवायु क्षेत्रों और मौसमों के लिए उपयुक्त हैं. इन किस्मों की विशेषता अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता, लंबी भंडारण क्षमता तथा प्रमुख कीट एवं रोगों के प्रति सहनशीलता है.
'DOGR-W-361' सफेद रंग की एक उन्नत प्याज किस्म है, जिसे जोन-V (जूनागढ़, नासिक, राहुरी और पुणे) के लिए अनुशंसित किया गया है.इसके कंद गोलाकार और आकर्षक सफेद रंग के होते हैं. यह रबी मौसम की खेती के लिए उपयुक्त है और 115 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है.
इस किस्म की औसत विपणन योग्य उपज 324 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक दर्ज की गई है. विशेष बात यह है कि यह थ्रिप्स कीट और पत्तियों से संबंधित रोगों के प्रति सहनशील है. इसके कंदों को लगभग 4 महीने तक सुरक्षित भंडारित किया जा सकता है.
'DOGR-1550-Agg' मल्टीप्लायर प्याज की एक उन्नत किस्म है, जिसे जोन-V के लिए अनुशंसित किया गया है. इसके कंद मध्यम लाल रंग के और अंडाकार आकार के होते हैं. प्रत्येक कंद से 5 से 6 नए कंद विकसित होते हैं, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है.
यह किस्म रबी मौसम के लिए उपयुक्त है और इसकी औसत उपज 192 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. इसका कुल घुलनशील ठोस पदार्थ (TSS) 14-15 °ब्रिक्स तक होता है. यह 90 से 95 दिनों में तैयार हो जाती है तथा 5 से 6 महीने तक सुरक्षित भंडारित की जा सकती है.
DOGR-1546-Agg' किस्म जोन-V और जोन-VI दोनों क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है. इसके कंद गुलाबी रंग के, अंडाकार आकार के और ऊपर की ओर पतले होते जाते हैं. यह रबी मौसम में अच्छी उपज देती है.
इसका TSS स्तर 13-14 °ब्रिक्स तक रहता है और औसत विपणन योग्य उपज 178 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है.यह मात्र 85 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है तथा 5 से 6 महीने तक भंडारण योग्य रहती है.
'DOGR-RGP-3' खरीफ मौसम की खेती के लिए विकसित की गई एक उन्नत किस्म है, जिसे जोन-IV (जबलपुर, रायपुर, चिप्लिमा, अकोला और झालावाड़) के लिए अनुशंसित किया गया है.
इसके कंद आकर्षक गहरे लाल रंग के और गोलाकार होते हैं. औसत उपज 207 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त होती है.यह 100 से 105 दिनों में तैयार हो जाती है और इसमें डबल बल्ब तथा बोल्टिंग जैसी समस्याएं नहीं पाई जातीं. इसके कंद 2 से 3 महीने तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं.
DOGR-1625' भी जोन-IV के लिए अनुशंसित एक खरीफ किस्म है. इसके कंद गहरे लाल रंग के और चपटे-गोलाकार होते हैं. इसमें डबल बल्ब और बोल्टर की समस्या लगभग नहीं के बराबर होती है.
यह किस्म 105 से 110 दिनों में परिपक्व हो जाती है तथा औसत विपणन योग्य उपज 217 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक देती है. बेहतर गुणवत्ता और समान आकार के कंद इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं.
DOGR-1203-DR' रबी मौसम की एक अगेती किस्म है, जिसे विशेष रूप से जल्दी तैयार होने के लिए विकसित किया गया है. यह जोन-V के लिए अनुशंसित है.
इसके कंद गहरे लाल रंग के और अंडाकार आकार के होते हैं. इसमें डबल बल्ब और बोल्टिंग की समस्या नहीं होती.इसकी औसत उपज 278 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक दर्ज की गई है.
इस किस्म को जल्दी परिपक्व होने और रबी मौसम में एक समान गर्दन गिरने (Neck Fall) की विशेषता के कारण विशिष्ट आनुवंशिक स्टॉक के रूप में पंजीकृत किया गया है. इसके कंदों को 5 से 6 महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है.
DOGR-HT-3' और 'DOGR-HT-4' किस्में जोन-V और जोन-VI के लिए अनुशंसित हैं.इनके कंद सफेद रंग के और चपटे-गोलाकार आकार के होते हैं.
इन किस्मों की सबसे बड़ी विशेषता इनमें पाया जाने वाला उच्च TSS स्तर है, जो 16 °ब्रिक्स से अधिक होता है.यही कारण है कि ये प्रोसेसिंग उद्योग के लिए काफी उपयोगी मानी जाती हैं.इनकी औसत विपणन योग्य उपज लगभग 253 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त होती है.
नई प्याज किस्मों में अधिक उत्पादन क्षमता, बेहतर भंडारण, उच्च गुणवत्ता और रोगों के प्रति सहनशीलता जैसी विशेषताएं शामिल हैं.इससे किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलने के साथ-साथ भंडारण के दौरान नुकसान भी कम होगा.खरीफ और रबी दोनों मौसमों के लिए उपलब्ध इन उन्नत किस्मों से देश में प्याज उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है.
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