गुंजवती पेगड़ ने जब राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” से जुड़कर अपने सपनों को दिशा दी, तो उनकी मेहनत ने उन्हें सीधे “लखपति दीदी” की पहचान तक पहुंचा दिया. उन्होंने हर कदम पर अपने जीवन की कहानी को नया मोड़ दिया है और आज वे पूरे गांव की प्रेरणा बन गई हैं.
Maize Farming Story: 24 साल के युवा किसान ने आगे बताया कि वर्तमान में 550 एकड़ में मक्का की खेती कर रहे है. वहीं हमारी FPO से 500 से अधिक किसान रजिस्टर्ड है, बाकी किसानों के जुड़ने का आंकड़ा प्रतिदिन बढ़ रहा है. यशवर्धन बताते हैं कि जैविक तरीके से मक्की की खेती करने का आइडिया हमको हमारे पिता जी से मिला है.
प्रगतिशील किसान सरदानंद प्रधान आज गुलाब, जरबेरा और लिली जैसे फूलों की खेती करते हैं और उन्हें देशभर के बाजारों में भेजते हैं. सरदानंद प्रधान बताते हैं कि अच्छी क्वालिटी के फूल उगाने में आधुनिक तकनीक की बड़ी भूमिका है.
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और ‘लखपति दीदी’ अभियान ने ग्रामीण इलाकों की महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाना शुरू कर दिया है. ऐसी ही एक मिसाल हैं, सरगुजा जिले के ग्राम सोनतरई की रहने वाली मति बाई, जो कभी मजदूरी करके किसी तरह घर चलाती थीं, लेकिन आज वो मुर्गी पालन के व्यवसाय से हर साल लाखों रुपये की कमाई कर रही हैं.
Success Story: बीएड तक पढ़ाई करने वाली सीता ने आगे बताया कि शुरुआत उन्होंने महज 400 रुपये के बीज से की थी, लेकिन सही देखभाल और बाजार की समझ के चलते उनका उत्पादन बढ़ता गया. इन फसलों की बाजार में अच्छी मांग होने के कारण उन्हें बेहतर कीमत भी मिलने लगी.
जलकुंभी एक जलीय खरपतवार है जिसको आज तक खत्म नहीं किया जा सका, अब इससे समाधान की दिशा में गोरखपुर की महिलाओं ने अलग-अलग तरह के उपयोगी सामान बनाकर एक समाधान प्रस्तुत किया है.
असम के रहने वाले गोपेन राय ने छोटे किसानों की बड़ी समस्या का एक बहुत ही सस्ता और असरदार हल निकाला है. पारंपरिक तरीके से अनाज की सफाई यानि ओसावनी करने में बहुत मेहनत लगती है और किसान को हवा चलने का इंतज़ार करना पड़ता है, जिससे वक्त और सेहत दोनों का नुकसान होता है. गोपेन ने म कम लागत में एक लकड़ी का ओसावनी यंत्र तैयार किया है, जो बिजली के पंखे की मदद से चलता है.
Mushroom Farming Story: खास बात यह है कि पप्पू देवी की यह सफलता सिर्फ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने तक सीमित नहीं है. वे अब अपने गांव की अन्य स्थानीय महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा रहीं हैं. उनका यह मॉडल स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और ग्रामीण महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गया है.
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