प्रगतिशील किसान सरदानंद प्रधान आज गुलाब, जरबेरा और लिली जैसे फूलों की खेती करते हैं और उन्हें देशभर के बाजारों में भेजते हैं. सरदानंद प्रधान बताते हैं कि अच्छी क्वालिटी के फूल उगाने में आधुनिक तकनीक की बड़ी भूमिका है.
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और ‘लखपति दीदी’ अभियान ने ग्रामीण इलाकों की महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाना शुरू कर दिया है. ऐसी ही एक मिसाल हैं, सरगुजा जिले के ग्राम सोनतरई की रहने वाली मति बाई, जो कभी मजदूरी करके किसी तरह घर चलाती थीं, लेकिन आज वो मुर्गी पालन के व्यवसाय से हर साल लाखों रुपये की कमाई कर रही हैं.
Success Story: बीएड तक पढ़ाई करने वाली सीता ने आगे बताया कि शुरुआत उन्होंने महज 400 रुपये के बीज से की थी, लेकिन सही देखभाल और बाजार की समझ के चलते उनका उत्पादन बढ़ता गया. इन फसलों की बाजार में अच्छी मांग होने के कारण उन्हें बेहतर कीमत भी मिलने लगी.
जलकुंभी एक जलीय खरपतवार है जिसको आज तक खत्म नहीं किया जा सका, अब इससे समाधान की दिशा में गोरखपुर की महिलाओं ने अलग-अलग तरह के उपयोगी सामान बनाकर एक समाधान प्रस्तुत किया है.
असम के रहने वाले गोपेन राय ने छोटे किसानों की बड़ी समस्या का एक बहुत ही सस्ता और असरदार हल निकाला है. पारंपरिक तरीके से अनाज की सफाई यानि ओसावनी करने में बहुत मेहनत लगती है और किसान को हवा चलने का इंतज़ार करना पड़ता है, जिससे वक्त और सेहत दोनों का नुकसान होता है. गोपेन ने म कम लागत में एक लकड़ी का ओसावनी यंत्र तैयार किया है, जो बिजली के पंखे की मदद से चलता है.
Mushroom Farming Story: खास बात यह है कि पप्पू देवी की यह सफलता सिर्फ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरने तक सीमित नहीं है. वे अब अपने गांव की अन्य स्थानीय महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा रहीं हैं. उनका यह मॉडल स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और ग्रामीण महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गया है.
पंजाब के तरनतारन के हरप्रीत सिंह ने अपनी मेहनत और आधुनिक तकनीक के मेल से डेयरी फार्मिंग की दुनिया में एक नई 'इबारत' लिखी है. जहां लोग खेती को मुश्किल समझते थे, वहां उन्होंने AI के जरिए पशुओं की ऐसी देखभाल की कि बीमारियां पास भी नहीं फटकतीं. आज उनके फार्म पर साफ-सफाई और अनुशासन का वो आलम है कि दूध की शुद्धता देख बड़ी कंपनियां भी मुरीद हो गई हैं. चारे के लिए उन्होंने खुद का 'पौष्टिक खजाना' तैयार किया है, जिससे पशु साल भर तंदुरुस्त रहते हैं. कमाल की बात यह है कि इतनी बड़ी तादाद में मवेशियों को वे चंद मजदूरों के साथ 'स्मार्ट मैनेजमेंट' के जरिए बखूबी संभाल रहे हैं. हरप्रीत की यह कामयाबी देखकर अगर किसान नई सोच अपनाएं, तो डेयरी का पेशा वाकई तरक्की और खुशहाली का रास्ता बन सकता है.
UP News: घर की आर्थिक जिम्मेदारी उठाते हुए बुंदेलखंड की महिलाएं अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रहीं हैं, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बना रहीं हैं और सामाजिक रूप से भी सशक्त हो रहीं हैं. जो महिला पहले घर की दहलीज तक सीमित थीं, आज वे ग्राम स्तरीय बैठकों में निर्णय ले रहीं हैं.
स्नातक तक पढ़ीं विनीता 14 सदस्यीय संयुक्त परिवार की जिम्मेदारी निभा रही थीं. पति अविनाश के साथ मिलकर वे 10-12 पशुओं के जरिए कार्य करती थीं, लेकिन निजी डेयरियों पर निर्भरता के कारण उन्हें समय पर और उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। इससे आय सीमित थी.
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