Lakhimpur Kheri Story: प्रिन्सी ने बताया कि व्यवसाय शुरू होने के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है. वर्तमान में वह अपने स्नैक्स निर्माण व्यवसाय से हर महीने लगभग 40 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं. यह आय उनके परिवार के लिए एक मजबूत सहारा बनी है और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिला है.
नरसिंहपुर के गाडरवारा में युवा उद्यमी सोहिल मंसूरी ने पराली को समस्या नहीं, बल्कि कमाई और स्वच्छ ऊर्जा का जरिया बना दिया.ग्रीन इंडियो बायोफ्यूल्स के जरिए कृषि अवशेषों से बायोमास पेलेट तैयार किए जा रहे है. इस पहल से किसानों को अतिरिक्त आय, युवाओं को रोजगार और पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने की दिशा में नई राह मिली है.
सागर के बीना विकासखंड के ग्राम बेलई में किसान विवेक दुबे ने डेढ़ एकड़ में वर्मी कम्पोस्ट और जैविक खाद निर्माण इकाई शुरू की है. 40-50 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना में 100 से अधिक बेड तैयार किए गए हैं और रोजाना 1 टन जैविक खाद उत्पादन का लक्ष्य है.
जबलपुर के युवा हृदेश राय ने कोरोना काल में करीब 12 लाख रुपये सालाना कमाई वाली आईटी नौकरी छोड़कर वर्मी कंपोस्ट का कारोबार शुरू किया। छोटे स्तर से शुरू हुआ यह काम आज करीब 1.5 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर तक पहुंच चुका है। हृदेश ने अकेले कारोबार बढ़ाने के बजाय 26-27 किसानों को अपने साथ जोड़ा और उनकी तैयार वर्मी कंपोस्ट को बाजार उपलब्ध कराया। आज किसानों के नेटवर्क से सालाना 6 हजार टन से ज्यादा वर्मी कंपोस्ट का कारोबार होता है, जिसकी सप्लाई देश के कई राज्यों तक की जा रही है।
ग्राफ्टेड बैंगन की आधुनिक खेती ने किसान सुरेंद्र की कमाई बढ़ाने का नया रास्ता खोला.144 क्विंटल बैंगन उत्पादन से उन्हें ₹2.39 लाख का शुद्ध लाभ हुआ। कम लागत में बेहतर उत्पादन और अच्छी आमदनी के लिए ग्राफ्टेड तकनीक किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है.
Success Story: राजन प्रजापति की सफलता प्रदेश के युवाओं के लिए भी प्रेरणा है. उनकी कार्यशाला प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित हो चुकी है, जहां युवाओं को टेराकोटा शिल्प की बारीकियां सिखाई जाती हैं. यह पहल न केवल पारंपरिक कला को संरक्षित कर रही है, बल्कि युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता की ओर भी प्रेरित कर रही है.
UP News: आजीविका मिशन के जरिए ग्रामीण कारोबार को बिचौलियों से मुक्त कर महिलाओं को सीधे बाजार से जोड़ने का अभियान चलाया गया है. गांवों में तैयार हुआ यह नेटवर्क महिलाओं को दूध की सही कीमत दिलाने के साथ कारोबार का पूरा हिसाब भी उनके हाथ में दे रहा है.
राजस्थान के जोधपुर की 10 महिलाओं ने बाजरे को कमाई का जरिया बनाकर मिसाल कायम की है. गंगा राजीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने प्रशिक्षण लेकर कई प्रोडक्ट्स तैयार किए. मेहनत और सही बाजार मिलने से समूह का सालाना कारोबार लाखों रुपये तक पहुंच गया है.
शरद पवार के घर सजी वीआईपी महफिल में एक शख्स पीएम मोदी को फोन में कुछ दिखाने लगा. सब हैरान थे कि दिग्गजों के बीच यह आम इंसान कौन है? ये कोई नेता नहीं, बल्कि किसान मिथिलेश हैं. लेकिन असली सस्पेंस यह है कि आखिर क्यों इन्होंने जर्मनी की नौकरी और यूपीएससी का ख्वाब ठुकरा दिया? ऐसा क्या कमाल किया कि आज ये 95 लाख रुपये कमा रहे हैं?
बिहार का मशहूर 'मिथिला मखाना'अब समंदर के रास्ते पहली बार ऑस्ट्रेलिया पहुंच गया है.यह हमारे किसानों के लिए बहुत खुशी की बात है। पहली बार 18 मीट्रिक टन मखाना सीधे विदेश भेजा गया है.इससे सबसे बड़ा फायदा किसानों को हुआ है। बिचौलियों के हटने से उन्हें करीब 18 प्रतिशत ज्यादा मुनाफा मिला है.दुनिया भर में मखाने की मांग काफी बढ़ रही है.देश का 80-90% मखाना अकेले बिहार से आता हैजिससे लगभग 10 लाख परिवारों का घर चलता है.
UP News: उन्होंने बताया कि पति, दो बच्चों और सास-ससुर के साथ रहकर पहले घर और खेत से जुड़े कामों को संभालती थीं, बता दें कि श्वेता के पति तहसील में नौकरी कर रहे हैं, लेकिन परिवार के बढ़ते खर्च के बीच श्वेता भी आर्थिक जिम्मेदारियों में हाथ बंटाना चाहती थीं. इसी दौरान ग्राम पंचायत की समूह सखी से उन्हें पशु सखी कार्यक्रम की जानकारी मिली.
कुशीनगर के किसानों की हल्दी की कहानी बहुत शानदार है.यह कहानी सिर्फ बैंक के पैसों की नहीं हैयह कहानी उस टूटती उम्मीद के वापस लौटने की है, उस सच्ची मुस्कुराहट की है जो किसान के चेहरे पर तब आती है जब उसकी दिन-रात की मेहनत रंग लाती है. इस जिले पहले वे पुराने बीजों से खेती करते थे, जिससे मुनाफा बहुत कम होता था.
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के किसान संतोष कुमार सिंह ने धान के साथ अदरक की खेती कर महज पौन एकड़ जमीन से करीब 4.5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया.उनकी सफलता से प्रेरित होकर अब उन्होंने अदरक की खेती का रकबा बढ़ाकर एक एकड़ कर दिया है.
जबलपुर के किसान कृष्ण कुमार सिंह लोधी ने पारंपरिक खेती छोड़ ईरानी अकरकरा जैसी औषधीय फसल अपनाकर नई मिसाल पेश की है.कम पानी, कम लागत और 6-8 महीने में तैयार होने वाली इस फसल से उन्हें बेहतर मुनाफे की उम्मीद है और अब दूसरे किसान भी इससे प्रेरित हो रहे हैं.
Success Story: असीम रावत ने बताया कि यहां देशी गायों के दूध से 150 से अधिक प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं. इनमें A2 बिलौना घी, ब्राह्मी घृत, पंचगव्य घृत, देसी गाय का दूध, कुकीज, लड्डू, शतधौत घृत, हेल्दी मिठाइयां, स्नैक्स, हर्बल चाय, पेय पदार्थ तथा स्किन और हेयर केयर उत्पाद शामिल हैं.
रायगढ़ के लैलूंगा स्थित पाकरगांव का पारंपरिक जवांफूल चावल 175–180 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है.10 एकड़ में सामूहिक खेती करने वाले किसानों का यह सुगंधित चावल रायपुर, दिल्ली और मुख्यमंत्री निवास तक पहुंच रहा है.
बिहार के किशनगंज जिले के किसान हंसराज नखत ने ड्रैगन फ्रूट की खेती में ड्रिप सिंचाई और प्राकृतिक मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर सफलता की नई मिसाल पेश की है. इन तकनीकों की मदद से उन्होंने न केवल उत्पादन 12 टन से बढ़ाकर 16 टन प्रति हेक्टेयर किया, बल्कि शुद्ध आय भी हासिल की.
अरुणाचल प्रदेश के एक किसान ने बंजर जमीन को कमाई का जरिया बनाकर मिसाल पेश की है. आईसीएआर (ICAR) के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में अपनी बंजर जमीन पर जैविक असम नींबू का बाग तैयार किया. आज यही बाग उन्हें अच्छी पैदावार और मुनाफा दे रहा है.
सरगुजा की महिला किसान एरिन भगत ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में जीवामृत और वर्मी कम्पोस्ट अपनाकर रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम की है. जैविक खेती से उनकी लागत घटी है, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ी है और वे अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गई हैं.
मध्य प्रदेश जैविक खेती में देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है. खरगौन के किसान अनिल वर्मा ने सफेद मूसली की खेती से बेटे को अमेरिका में AI की पढ़ाई के लिए भेजा, जबकि किसान अविनाश दांगी 54 एकड़ में जैविक खेती कर 13 राज्यों में अपने उत्पाद बेच रहे हैं.
बिहार के भागलपुर की महिला किसान राजलक्ष्मी कुमारी ने मशरूम की वैज्ञानिक खेती से सफलता की नई मिसाल कायम की है. उन्होंने 25 महिलाओं का समूह बनाकर उन्हें प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ा.
राजस्थान के कोटा के एक युवा किसान ने नौकरी छोड़कर खेती को अपना करियर बनाया और सिर्फ 10 हजार रुपये से मशरूम का कारोबार शुरू किया. आज उनका मशरूम स्टार्टअप सालाना करीब 20 लाख रुपये का टर्नओवर कर रहा है. उनकी यह सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कम निवेश में खेती के जरिए अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं.
Sonbhadra News: महिलाएं अब बकरी के दूध के साथ नीम, एलोवेरा, हल्दी, चंदन और मोरिंगा जैसे प्राकृतिक अवयवों से हर्बल साबुन तैयार कर रही हैं, जो स्थानीय बाजार से निकलकर दूर-दराज के ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं. उत्तर प्रदेश का यह मॉडल 'जंगल से बाजार' की अवधारणा को जमीन पर उतार रहा है.
Success Story of Pratapgarh: शिवम ने शुरुआत से ही अपनी डेयरी में बेहतर तकनीक का उपयोग किया है, जिससे अच्छी नस्ल की बछियाओं का जन्म हो रहा है और स्वदेशी नस्ल की गाय के संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा मिल रहा है. अब उनका लक्ष्य शुद्ध A2 दूध से घी और अन्य मूल्यवर्धित दुग्ध उत्पाद तैयार कर बाजार में अपनी अलग पहचान बनाना है.
बिहार के औरंगाबाद जिले के किसान ने आधुनिक तकनीक अपनाकर केले के कारोबार में नई मिसाल पेश की है. उन्होंने राइपनिंग चैंबर की मदद से केले को वैज्ञानिक तरीके से पकाने की शुरुआत की, जिससे आज वे हर साल करीब 8 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं.
रायगढ़ के प्रगतिशील किसान मनोज यादव ने बंजर जमीन पर नाशपाती का बाग विकसित कर खेती को एग्री-टूरिज्म से जोड़ दिया. उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने ओलावृष्टि के बावजूद 1.5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया और अब पर्यटक खुद पेड़ों से ताजी नाशपाती तोड़कर खरीदने पहुंच रहे हैं.
पारंपरिक खेती से सीमित आमदनी मिलने पर बिहार के एक किसान ने आधुनिक तकनीक के साथ मशरूम की खेती शुरू की और आज सफलता की नई मिसाल बन गए हैं. वातानुकूलित यूनिट में रोजाना करीब 7 क्विंटल मशरूम का उत्पादन कर वे हर साल लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं.
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले की आदिवासी महिला दिलमती ने सुअर पालन के जरिए अपनी जिंदगी पूरी तरह बदल दी है. कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाला उनका परिवार आज खेती और सुअर पालन से सालाना 7 से 8 लाख रुपये की कमाई कर रहा है.
बिहार के गया जिले की महिला किसान कविता कुमारी ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग अपनाकर खेती की तस्वीर बदल दी है. पहले जहां पारंपरिक खेती से सीमित आमदनी होती थी, वहीं अब एक ही खेत में सब्जियां, फल, और दूसरी फसलों की खेती कर उन्हें पूरे साल अच्छी कमाई हो रही है. आइए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी.
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की किसान परिवार की बेटी अंजलि ने असफलता को अपनी ताकत बनाकर यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर (SI) बनने का सपना पूरा कर लिया. 2024 की कांस्टेबल भर्ती में दौड़ में सिर्फ 10 सेकेंड से चूकने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत के दम पर SI भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की.
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