पंजाब के तरनतारन के हरप्रीत सिंह ने अपनी मेहनत और आधुनिक तकनीक के मेल से डेयरी फार्मिंग की दुनिया में एक नई 'इबारत' लिखी है. जहां लोग खेती को मुश्किल समझते थे, वहां उन्होंने AI के जरिए पशुओं की ऐसी देखभाल की कि बीमारियां पास भी नहीं फटकतीं. आज उनके फार्म पर साफ-सफाई और अनुशासन का वो आलम है कि दूध की शुद्धता देख बड़ी कंपनियां भी मुरीद हो गई हैं. चारे के लिए उन्होंने खुद का 'पौष्टिक खजाना' तैयार किया है, जिससे पशु साल भर तंदुरुस्त रहते हैं. कमाल की बात यह है कि इतनी बड़ी तादाद में मवेशियों को वे चंद मजदूरों के साथ 'स्मार्ट मैनेजमेंट' के जरिए बखूबी संभाल रहे हैं. हरप्रीत की यह कामयाबी देखकर अगर किसान नई सोच अपनाएं, तो डेयरी का पेशा वाकई तरक्की और खुशहाली का रास्ता बन सकता है.
UP News: घर की आर्थिक जिम्मेदारी उठाते हुए बुंदेलखंड की महिलाएं अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रहीं हैं, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बना रहीं हैं और सामाजिक रूप से भी सशक्त हो रहीं हैं. जो महिला पहले घर की दहलीज तक सीमित थीं, आज वे ग्राम स्तरीय बैठकों में निर्णय ले रहीं हैं.
स्नातक तक पढ़ीं विनीता 14 सदस्यीय संयुक्त परिवार की जिम्मेदारी निभा रही थीं. पति अविनाश के साथ मिलकर वे 10-12 पशुओं के जरिए कार्य करती थीं, लेकिन निजी डेयरियों पर निर्भरता के कारण उन्हें समय पर और उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। इससे आय सीमित थी.
बुलंदशहर की रहने वाली कृष्णा यादव की कहानी एक मिसाल है कि कैसे लगन और हौसले से किस्मत बदली जा सकती है. एक वक्त था जब घर की माली हालत इतनी खराब थी कि उन्हें अपना मकान तक बेचना पड़ा. मजबूरी में वे दिल्ली आईं और दूसरों के खेतों में मजदूरी करने लगीं. लेकिन उनके दिल में कुछ बड़ा करने का जज्बा था. महज 500 रुपये से शुरू हुआ उनका सफर आज कई करोड़ों के टर्नओवर तक पहुंच चुका है.
UP News: इसके लिए 6 एकड़ में खुद गन्ने की खेती करतीं हैं और अन्य किसानों से भी गन्ना खरीदतीं हैं. उनका उत्पाद उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी सप्लाई हो रहा है. यह न केवल उनके व्यवसाय की सफलता को दर्शाता है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर बने उत्पादों की बढ़ती मांग को भी साबित करता है.
पटना के अनुभवी किसान अमरजीत कुमार सिन्हा ने आम और अमरूद जैसे रसीले फलों को 'फल मक्खी' के जानलेवा हमले से बचाने के लिए एक बेहद सस्ता और 'असरदार' देसी जुगाड़ निकाला है. अक्सर ये मक्खियां फलों को अंदर से सड़ा देती हैं, जिससे बागवानों को 90 फीसदी तक का भारी नुकसान उठाना पड़ता है. इस समस्या के 'मुकम्मल' समाधान के लिए उन्होंने पके हुए केलों और बेकार प्लास्टिक की बोतलों से एक 'कीट जाल' तैयार किया है जिससे फल मक्खी खिंची चली आती हैं और जाल में फंसकर मर जाती हैं.
कानपुर देहात के रामशरण वर्मा की किस्मत सुकर पालन से बदल चुकी हैं. कम लागत में बड़ा मुनाफा देने वाला यह बिजनेस अब तेजी से किसानों की आय को दोगुना करने का साधन बन रहा है. आइए जानते हैं इनकी सफलता की कहानी.
Milk Production in UP: इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है और महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. वहीं 6 हजार से अधिक गांवों की महिलाएं इस अभियान से जुड़कर अभूतपूर्व प्रगति कर रही हैं. जबकि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित होकर ये महिलाएं दुग्ध संग्रहण, प्रोसेसिंग और विपणन तक की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं.
आजकल गर्मी के मौसम में जब पारा 45 डिग्री के पार पहुंच जाता है, तो इंसान का बाहर निकलना दूभर हो जाता है. उन किसानों की हालत की कल्पना कीजिए जिनकी कमाई पान की कोमल बेलों पर टिकी है. पान का पत्ता इतना नाजुक होता है कि लू की एक ही लहर उसे पूरी तरह जलाकर राख कर देती है. बिहार के श्याम सुंदर ने एक खास तकनीक से एक देसी ढांचा खड़ा किया, जिससे न झुलसेंगे पत्ते, न होगी बीमारी और पान की पैदावार चार गुना बढ़ जाएगी.
Success Story: चेतन वीर सिंह ने बताया कि 2022 में गुड़ कोल्हू लगाकर अपने उद्यम की शुरुआत की थी. उनको प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) योजना के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद उन्होंने पीएमईजीपी योजना के तहत 10 लाख रुपए के ऋण के लिए अप्लाई किया.
Dairy Milk Production: बलिया के बहुआरा गांव की रहने वाली दुर्गेश तिवारी एक साधारण परिवार से हैं. शादी के बाद उनका जीवन पति, दो बेटियों और सास के साथ सीमित दायरे में था. परिवार की आय का मुख्य स्रोत खेती और 3-4 पशु थे, लेकिन दूध बेचने पर न तो उचित कीमत मिलती थी और न ही समय पर भुगतान.
जैसे मार्च और अप्रैल का महीना आता है, राजस्थान में सूरज आग उगलने लगता है. पारा 45 से 50 डिग्री के बीच पहुंच जाता है और इस भीषण गर्मी में सबसे बड़ी समस्या होती है खाने-पीने की चीजों को खराब होने से बचाना. शहरों में तो लोग महंगे एयर-कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर का सहारा लेते हैं, लेकिन गांवों में बिजली की कटौती और भारी-भरकम बिजली बिल लोगों की कमर तोड़ देते हैं. लेकिन क्या आप यकीन करेंगे कि बारां जिले के एक छोटे से गांव में एक किसान ने ऐसा 'अनोखा देशी फ्रिज' तैयार किया है, जिसमें न तो कोई तार है, न प्लग और न ही यह बिजली से चलता है.
Flower cultivation Story: आज नीरज के पॉलीहाउस में करीब 25 हजार जरबेरा पौधे लगे हुए हैं. यह पौधे रोजाना उत्पादन देते हैं और एक बार लगाए जाने के बाद लगभग छह साल तक लगातार उत्पादन देते हैं. अभी नीरज ने 5 अन्य लोगों को रोजगार दिया है, जिससे आसपास के ग्रामीणों को भी आय का नया स्रोत मिला है.
Poultry Farming Story: मंजू कश्यप बताती हैं कि मछली पालन के साथ अब देसी मुर्गी का एक छोटा सा पोल्ट्री फॉर्म दुहाई गांव में 8 महीने पहले स्थापित किया था. महज 850 देसी चूजों से शुरू हुआ उनका छोटा-सा व्यवसाय आज एक बड़े फार्म की शक्ल ले रहा है, आज वे देसी मुर्गी के अंडे की सप्लाई लोकल मार्केट में कर रही हैं
Success Story: शिवानी ने बताया कि, एक समय था जब वह निजी क्षेत्र में नौकरी करती थीं लेकिन उनका मन अपना व्यवसाय करने का था. इसके बाद उन्होंने अपने सपनों को व्यावसायिक रूप देने का निर्णय लिया और मधुमक्खी के महज 5 बक्सों से अपने सफर की शुरुआत की.
Inspirational Story: वंदना यादन की कहानी यह बताती है कि अगर हिम्मत और मेहनत हो, तो छोटी शुरुआत से भी बड़ा काम खड़ा किया जा सकता है. आज वह खुद भी आत्मनिर्भर हैं और अपने साथ कई महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें भी आगे बढ़ने का मौका दे रही हैं.
प्याज और लहसुन की खेती में सबसे बड़ी चुनौती फसल को खराब होने से बचाना है, क्योंकि उचित भंडारण न होने से नमी और गर्मी के कारण प्याज बहुत जल्दी सड़ने लगता है. इस सड़न के डर से किसानों को अपनी कड़ी मेहनत की फसल मजबूरन बाजार में बहुत कम और औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती है.
Success Story: पूजा ने राजकीय कन्या महाविद्यालय से स्नातक किया. शुरू से उनकी इच्छा व्यवसाय करने की थी. ससुर और पति के प्रोत्साहन से उन्होंने डेयरी प्लांट में निवेश का निर्णय लिया. इतना ही नहीं, उन्होंने गांव-गांव जाकर महिलाओं को उन्नत पशुपालन के लिए प्रेरित भी किया और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी.
Success Story: उसी सीख और लगन के दम पर आज रजनी विभिन्न प्रकार के मूंज उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर बनी हैं. उन्होंने बताया कि उनके पति दिल्ली में एक निजी कंपनी में कैब चलाते हैं और रजनी के काम में पूरा सहयोग देते हैं. उनके दो बच्चे हैं, बेटा लखनऊ में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी सुल्तानपुर के एक विद्यालय में अध्ययनरत है.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today