जैसे मार्च और अप्रैल का महीना आता है, राजस्थान में सूरज आग उगलने लगता है. पारा 45 से 50 डिग्री के बीच पहुंच जाता है और इस भीषण गर्मी में सबसे बड़ी समस्या होती है खाने-पीने की चीजों को खराब होने से बचाना. शहरों में तो लोग महंगे एयर-कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर का सहारा लेते हैं, लेकिन गांवों में बिजली की कटौती और भारी-भरकम बिजली बिल लोगों की कमर तोड़ देते हैं. लेकिन क्या आप यकीन करेंगे कि बारां जिले के एक छोटे से गांव में एक किसान ने ऐसा 'अनोखा देशी फ्रिज' तैयार किया है, जिसमें न तो कोई तार है, न प्लग और न ही यह बिजली से चलता है.
Flower cultivation Story: आज नीरज के पॉलीहाउस में करीब 25 हजार जरबेरा पौधे लगे हुए हैं. यह पौधे रोजाना उत्पादन देते हैं और एक बार लगाए जाने के बाद लगभग छह साल तक लगातार उत्पादन देते हैं. अभी नीरज ने 5 अन्य लोगों को रोजगार दिया है, जिससे आसपास के ग्रामीणों को भी आय का नया स्रोत मिला है.
Poultry Farming Story: मंजू कश्यप बताती हैं कि मछली पालन के साथ अब देसी मुर्गी का एक छोटा सा पोल्ट्री फॉर्म दुहाई गांव में 8 महीने पहले स्थापित किया था. महज 850 देसी चूजों से शुरू हुआ उनका छोटा-सा व्यवसाय आज एक बड़े फार्म की शक्ल ले रहा है, आज वे देसी मुर्गी के अंडे की सप्लाई लोकल मार्केट में कर रही हैं
Success Story: शिवानी ने बताया कि, एक समय था जब वह निजी क्षेत्र में नौकरी करती थीं लेकिन उनका मन अपना व्यवसाय करने का था. इसके बाद उन्होंने अपने सपनों को व्यावसायिक रूप देने का निर्णय लिया और मधुमक्खी के महज 5 बक्सों से अपने सफर की शुरुआत की.
Inspirational Story: वंदना यादन की कहानी यह बताती है कि अगर हिम्मत और मेहनत हो, तो छोटी शुरुआत से भी बड़ा काम खड़ा किया जा सकता है. आज वह खुद भी आत्मनिर्भर हैं और अपने साथ कई महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें भी आगे बढ़ने का मौका दे रही हैं.
प्याज और लहसुन की खेती में सबसे बड़ी चुनौती फसल को खराब होने से बचाना है, क्योंकि उचित भंडारण न होने से नमी और गर्मी के कारण प्याज बहुत जल्दी सड़ने लगता है. इस सड़न के डर से किसानों को अपनी कड़ी मेहनत की फसल मजबूरन बाजार में बहुत कम और औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती है.
Success Story: पूजा ने राजकीय कन्या महाविद्यालय से स्नातक किया. शुरू से उनकी इच्छा व्यवसाय करने की थी. ससुर और पति के प्रोत्साहन से उन्होंने डेयरी प्लांट में निवेश का निर्णय लिया. इतना ही नहीं, उन्होंने गांव-गांव जाकर महिलाओं को उन्नत पशुपालन के लिए प्रेरित भी किया और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी.
Success Story: उसी सीख और लगन के दम पर आज रजनी विभिन्न प्रकार के मूंज उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर बनी हैं. उन्होंने बताया कि उनके पति दिल्ली में एक निजी कंपनी में कैब चलाते हैं और रजनी के काम में पूरा सहयोग देते हैं. उनके दो बच्चे हैं, बेटा लखनऊ में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी सुल्तानपुर के एक विद्यालय में अध्ययनरत है.
जालौन की मंडोरी गांव के रहने वाले अशोक सिंह ने ये साबित कर दिया है कि जैविक विधि से न सिर्फ उत्पादन रासायनिक उर्वरक के मुकाबले ज्यादा होता है बल्कि मिट्टी की सेहत भी अच्छी बनी रहती है.
Success Story: सलमा की कहानी उत्तर प्रदेश सरकार की उस सोच को साकार करती है जिसमें महिलाओं को परिवर्तन का भागीदार बनाया जा रहा है. सलमा को अपने संघर्ष पर नहीं, अपनी सफलता पर गर्व है. उनकी पहचान अब एक बेरोजगार युवती की नहीं, बल्कि एक सशक्त बैंक सखी और आत्मनिर्भर महिला की है.
आज के दौर में किसान सिर्फ दूध बेचकर ही नहीं, बल्कि गोबर के सही बिजनेस से भी लखपति बन सकते हैं. इसका जीता-जागता उदाहरण उत्तर प्रदेश के एक प्रगतिशील किसान हैं, जिन्होंने गोबर के सही मैनेजमेंट से लाखों का बिजनेस खड़ा कर दिया है. हमारे देश में पशुधन की कोई कमी नहीं है, बस जरूरत है इसे कमाई में बदलने की.
औरैया जनपद की बूढ़ादाना ग्राम पंचायत का नाम आज पूरे प्रदेश में विकसित और स्वच्छ पंचायत के रूप में लिया जाता है. गांव के युवा प्रधान मोहित सिंह ने 5 सालों में विकास की नई इबारत लिख डाली है.
हिमाचल, कश्मीर और उत्तराखंड के सेब बागवानों के लिए 'एप्पल रूट बोरर' सबसे बड़ा दुश्मन रहा है. यह कीट पेड़ों को अंदर से खोखला कर देता है और इसका लार्वा चक्र 3 साल तक चलता है, जिससे करीब 35 लाख पेड़ों पर हमेशा खतरा बना रहता है. पारंपरिक तौर पर किसान इसे मारने के लिए महंगे और जहरीले कीटनाशकों का उपयोग करते थे, जो मिट्टी और पर्यावरण के लिए हानिकारक थे.
गन्ने की मिठास सबको पसंद है. वहीं बाजार में बिकने वाले ऑर्गेनिक गुड़ की मांग दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. ऐसे में अब गन्ने की जैविक खेती भी तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों को अच्छा फायदा हो रहा है. पढ़िए एक ऐसे ही एक किसान की कहानी जिसकी कमाई चार गुना बढ़ गई है...
कर्नाटक की अरुणा देवी ने साबित कर दिया कि अगर हुनर को सही तकनीक मिले, तो मिट्टी भी सोना उगलती है. पेशे से वकील रहीं अरुणा ने अपने माता-पिता की सेवा और खेती की विरासत को संभालने के लिए कोर्ट-कचहरी छोड़ दी. उन्होंने 'सिंगल सेल रैम फार्मिंग' (पिंजरा पद्धति) जैसी आधुनिक तकनीक अपनाकर भेड़ पालन को एक मुनाफे वाले बिजनेस में बदल दिया.
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