कर्नाटक की प्रगतिशील महिला किसान श्रीमती पद्मिनी गौड़ा ने खेती की दुनिया में अपनी अनोखी सोच से क्रांति ला दी है. उन्होंने जमीन के 13.5 फीट नीचे एक विशेष 'सनकन चैंबर' तैयार किया है, जो बिना किसी महंगी मशीन के मशरूम के लिए जरूरी नमी और तापमान को प्राकृतिक रूप से बनाए रखता है .
किसान राणाप्रताप का यह सस्ता 'खाद यंत्र' खेती की दुनिया में क्रांति ला रहा है, जिससे खेती में खाद का खर्च 50 फीसदी तक कम हो सकता है. यह देसी मशीन खाद को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाती है, जिससे न तो खाद बर्बाद होती है और न ही ज्यादा मजदूरों की जरूरत पड़ती है. कम लागत में बना यह स्मार्ट जुगाड़ न केवल समय बचाता है बल्कि छोटे किसानों की मेहनत को भी बहुत आसान बना देता हैं. अपनी इसी खासियत की वजह से यह यंत्र आजकल किसानों के बीच खूब धूम मचा रहा है और कमाई बढ़ाने का बेहतरीन जरिया बन गया है.
Success Story: शिखा सिंह चौहान दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट और नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी गांधीनगर, गुजरात से फूड टेक्नोलॉजी में पोस्ट-ग्रेजुएट हैं. वहीं, सोम्या सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय से फूड टेक्नोलॉजी में बीटेक हैं.
उत्तराखंड की केदारी राणा कभी आत्मविश्वास की कमी के कारण चुप रहा करती थीं, लेकिन 'स्वयं सहायता समूह' से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई. उन्होंने समूह लोन लेकर अपने खेत में 1,200 सेब के पेड़ लगाए. आज उनकी मेहनत का नतीजा यह है कि उनके बागान से सालाना 300 पेटी सेब की पैदावार होती है, जिससे वे साल में लाखों रुपये तक कमा रही हैं. वे न केवल खुद एक 'लखपति दीदी' बनीं, बल्कि उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं को संगठित कर नए समूह भी बनवाए और तरक्की का रास्ता दिखा रही है.
राजस्थान के प्रगतिशील किसान रावल चंद जी ने यह साबित कर दिया है कि असली शोध लैब में नहीं, बल्कि सीधे खेत की मिट्टी में होता है. उन्होंने अपने अनुभव से शकरकंद की तीन खास किस्में विकसित की हैं जो मिठास और सेहत से भरपूर हैं. वहीं कम शुगर के कारण शुगर मरीजों के लिए वरदान हैं. ये किस्में न केवल कम पानी में उगती हैं, बल्कि इनमें बीमारियां भी कम लगती हैं.
मध्य प्रदेश के सीधी जिले की मनीषा कुशवाहा आज नारी शक्ति की एक जीती-जागती मिसाल बन चुकी हैं. कभी घर के चूल्हे-चौके तक सीमित रहने वाली मनीषा ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी किस्मत बदल दी. उन्होंने न केवल जैविक खेती को अपनाकर फसलों को रसायन मुक्त बनाया, बल्कि 150 अन्य किसानों को भी इस नेक काम से जोड़ा. उनकी असल पहचान तब बनी जब वे 'नमो ड्रोन योजना' के तहत 'ड्रोन सखी' बनीं.
इंजीनियर मोहम्मद कमर तौहीद ने इंजीनियरिंग का असली जादू दिखाते हुए कबाड़ से जुगाड़ कर एक ऐसी 'सुपर मशीन' तैयार की है, जिससे अब खेती में क्रांतिकारी बदलाव आएगा. इस मशीन से किसानों के हजारों रुपये बचेंगे, क्योंकि अब बीज बोने का खर्च आधा हो जाएगा. इस देसी अवतार वाली मशीन की खासियत यह है बहुत कम डीजल में खेत की जुताई होगी, जिससे पुरानी मशीनों की छुट्टी तय है.
Women Success Story: यह पूरा प्रोजेक्ट एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के अंतर्गत संचालित किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से चल रहा है. एफपीओ ने प्राइमरी प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित की हैं, जहां मोरिंगा की पत्तियों, बीजों और छाल से वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं.
Success Story: रजनी बाला आज कई ग्रामीण महिलाओं को बिजनेस करने के लिए प्रेरित कर रही हैं. वे अपनी मूंज क्राफ्ट में लोगों को रोजगार भी दे रही हैं. और अच्छी कमाई भी कर रही हैं. रजनी ने अपने मेहनत और लगन सफलता का मुकाम हासिल किया है.
सेब की खेती करने वाले किसानों के लिए अब बरसों का इंतज़ार बीते ज़माने की बात हो गई है. एक नए और क्रांतिकारी शॉर्टकट आइडिया ने खेती का अंदाज़ ही बदल दिया है. जहां पहले सेब के बाग तैयार होने और भरपूर फसल देने में 10 साल लग जाते थे, वहीं अब इनोवेटिव आइडिया की मदद से एक किसान मात्र 1 साल में ही 3 गुना ज़्यादा पैदावार ले रहा हैं. यह 'फार्मर सीक्रेट' न केवल समय बचा रहा है, बल्कि लागत कम करके मुनाफे को आसमान पर पहुंचा रहा है.
बिहार के नवादा की रहने वाली डॉली कुमारी ने खेती को सस्ता और आसान बनाने का एक बेहतरीन रास्ता खोजा है. उन्होंने मात्र ₹15 प्रति लीटर की लागत में एक ऐसा जैविक 'प्लांट ग्रोथ प्रमोटर' तैयार किया है, जो पूरी तरह से केमिकल-मुक्त है और खेती की लागत को भारी मात्रा में कम करता है. इससे गोभी, टमाटर और बैंगन जैसी फसलों में लगने वाले 'सड़न रोग' और 'मिट्टी जनित रोगों' का खतरा लगभग खत्म हो जाता है.
Women Success Story: मलवा विकास खंड के डगरइया गांव की रहने वाली रीता देवी बताती है कि उनके पति एक सीमांत किसान हैं. कच्चा मकान था, किसी तरह बड़ी मुश्किल से गुजर बसर होता था. एक दिन स्थानीय महिलाओं से ग्रामीण आजिविका मिशन की जानकारी हुई.
धमतरी के प्रगतिशील किसान नीलेश मीनपाल ने बेकार पड़े जलमग्न क्षेत्रों और खाली तालाबों को 'कमल की खेती' के जरिए मुनाफे की खान बना दिया है. जहां लोग दलदली जमीन को अनुपयोगी मानते थे, वहां नीलेश ने कमल के फूल, बीज और औषधीय जड़ों (कमल ककड़ी) का उत्पादन कर प्रति हेक्टेयर लाखों की कमाई कर मिसाल पेश की है.
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के किसान महावीर कुमावत ने खेती में होने वाले भारी खर्चे को कम करने के लिए देसी कमाल और जुगाड़ के जरिये कबाड़ और पुराने लोहे से एक पावर वीडर बना डाला है. यह मशीन कई फसलों में खरपतवार निकालने के लिए बहुत कारगर है. सबसे खास बात है कि यह मशीन 10 गुना से कम पैसे में काम कर देती है.
Murgi Palan Story: मंजू बताती हैं कि देसी मुर्गे की बढ़ती लोकप्रियता और बेहतर स्वाद के कारण उनके फार्म की सप्लाई लगातार बढ़ रही है. उन्होंने बताया कि गांव हो या शहर, हर जगह मुर्गी पालन का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. महिलाएं भी इस काम को केवल शौक के लिए नहीं, बल्कि अच्छे मुनाफे के लिए भी कर रहे हैं.
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक किसान ने लौकी की खेती में 'मचान' और 'प्लास्टिक मल्चिंग' के देसी जुगाड़ से कमाल कर दिखाया है. पारंपरिक खेती में लौकी जमीन पर फैलने के कारण अक्सर सड़ जाती थी. किसान के देसी जुगाड़ से अब लौकी हवा में लटकती है और मिट्टी के संपर्क में नहीं आती, जिससे उसका सड़ना-गलना पूरी तरह बंद हो गया है.
Success story of UP: ई लॉटरी से वित्तीय वर्ष 2023-24 में नंदिनी कृषक समृद्धि योजना की लाभार्थी बनीं इंदु ने 25 साहीवाल गोवंश क्रय कर डेयरी खोली. इस परियोजना पर 62.55 लाख रुपये की लागत आई. उन्हें योजना व्यय पर सरकार 50 प्रतिशत सब्सिडी (31.25 लाख रुपये) दे रही है.
आंध्र प्रदेश विशाखापत्तनम के किसान वी. गणेश ने धान की खेती को आसान और सस्ता बनाने के लिए एक शानदार 'जुगाड़' किया है. इससे धान में नर्सरी तैयार करने और रोपाई का झंझट पूरी तरह खत्म हो गया है. नतीजा यह है कि किसान को प्रति एकड़ कई हजार रुपये की बचत हो रही है और मजदूरों के पीछे भागने की भी जरूरत नहीं.
कर्नाटक के गदग जिले के अनुभवी किसान सुरेश मल्लप्पा ने कबाड़ और स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके एक अद्भुत 'सुपर मशीन' बनाई है, जो छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है. यह तीन पहियों वाली डीजल चालित मशीन खेती के तीन सबसे मुख्य काम, जुताई, निराई और कीटनाशक छिड़काव, बेहद आसानी से कर देती है.
Success Story: न्यूज़ीलैंड की प्राइमरी इंडस्ट्री और कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) की ओर से आए प्रतिनिधि दल ने मधुमक्खीवाला की फार्म का गहन निरीक्षण किया एवं उनके द्वारा अपनाई जा रही आधुनिक पद्धतियों, जैसे- बिना गर्मी, मिलावट और रसायन प्रयोग के बिना प्राकृतिक शहद के उत्पादन की खुलकर सराहना की.
जम्मू-कश्मीर एक किसान, ने अपनी सूझबूझ और 'देसी जुगाड़' से खेती को आसान बना दिया है. उन्होंने देखा कि पहाड़ी और ऊबड़-खाबड़ खेतों में बड़े ट्रैक्टर चलाना मुश्किल और महंगा है. इसलिए, उन्होंने अपने 18 साल के अनुभव का इस्तेमाल करते हुए डीजल के इंजन और बनावट में कुछ खास बदलाव किए. उनका यह मॉडिफाइड हल न केवल संकरे और छोटे खेतों में आसानी से घूमता है, बल्कि डीजल भी बचाता है.
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