छत्तीसगढ़ के सुकमा की सोढ़ी तिरपो ने बिहान योजना और कस्टम हायरिंग सेंटर के प्रशिक्षण से हल-बैल छोड़ आधुनिक पावर टिलर अपनाया.जानिए कैसे आधुनिक खेती ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बना दिया.
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर की अनिता वड्डे ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' के सहयोग से वैज्ञानिक मुर्गीपालन अपनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की. मजदूरी से शुरुआत करने वाली अनिता आज 'लखपति दीदी' बनकर ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण हैं.
छत्तीसगढ़ के मल्हार के प्रगतिशील किसान जदुनंदन वर्मा ने जैविक सब्जियों और एप्पल की खेती से नई पहचान बनाई है. एक एकड़ में जैविक सब्जियों से सालाना करीब 2 लाख रुपये की आय अर्जित करने वाले जदुनंदन पिछले 10 वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं.
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के किसान इशरार खान ने पारंपरिक खेती छोड़ मिर्च सहित उद्यानिकी फसलों की खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है. महज 2 बीघा में वीएनआर-285 किस्म की मिर्च उगाकर उन्होंने 2 से 2.5 लाख रुपये तक की आय अर्जित की.
गुजरात के दाहोद जिले के किसान नरेंद्रभाई हटिला ने रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती को अपनाया है. गाय के गोबर और मूत्र से तैयार जीवामृत और घन जीवामृत के इस्तेमाल से उन्होंने खेती की लागत कम की और मिट्टी की सेहत में सुधार किया है. आईए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी.
कहते हैं कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए बड़ी पूंजी नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और मेहनत की जरूरत होती है. राजस्थान के कोटा के युवा उद्यमी चिनात्मन जैन ने महज 30 हजार रुपये से पीनट बटर का स्टार्टअप शुरू किया और आज उनका कारोबार 2 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है.
जबलपुर के करेली गांव की 90 आदिवासी महिलाओं ने नाबार्ड के सहयोग से कोदो-कुटकी आधारित उत्पादों का सफल ब्रांड खड़ा किया है.पहले बिचौलियों पर निर्भर रहने वाली ये महिलाएं अब मिलेट्स से कुकीज, नूडल्स और अन्य उत्पाद बनाकर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग व मार्केटिंग खुद कर रही हैं, जिससे उनकी आय में कई गुना वृद्धि हुई है.
बिलासपुर के सलखा ग्राम के आदिवासी किसान अमृत सिंह ने धान की पारंपरिक खेती छोड़ केले की उन्नत खेती अपनाकर अपनी आय पांच गुना बढ़ा ली.राष्ट्रीय बागवानी मिशन के सहयोग, ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उन्होंने खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया.
PMFME योजना के तहत 27 लाख रुपए के ऋण और 10 लाख रुपए के अनुदान की मदद से बैतूल के जयप्रकाश चिकाने ने ‘दूध गंगा डेयरी’ की स्थापना की. नौकरी की तलाश से स्वरोजगार तक का यह सफर उन्हें हर महीने 40 हजार रुपए की शुद्ध आय दिला रहा है, साथ ही डेयरी के माध्यम से करीब 20 युवाओं को रोजगार भी मिला है.
KisaanSay कश्मीर के मामरा बादाम से लेकर यूपी का काला नमक चावल अब सीधे किसानों यूनिट से पैक होकर एक लाख से ज्यादा परिवारों की रसाई तक पहुंच रहा है. जिस गाय का दूध पहले चाय बनाने में खप जाता था उस दूध से बना घी आज हजारों रुपये किलो बिक रहा है. किसान से का प्लेटफार्म मिलते ही किसानों का मुनाफा भी बढ़ गया और फसल भी पूरी बिक जा रही है.
इंदौर संभाग के नानाखेड़ा माफी गांव के प्रगतिशील किसान लखन यादव 10 एकड़ में जैविक तरीके से नींबू की खेती कर लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं.बालाजी और कागजी किस्म के नींबू के साथ वे अदरक, हल्दी और पपीते की सहफसली खेती भी करते हैं.
छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के सुरही गांव के रामलाल लकड़ा ने महज 5 बकरियों से शुरुआत कर आज 185 बकरियों का सफल व्यवसाय खड़ा कर लिया है.बकरी पालन को ‘चलता-फिरता ATM’ मानने वाले रामलाल अब वनांचल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और ग्रामीण उद्यमिता की मिसाल बन चुके हैं.
भोपाल के रतुआ रतनपुर गांव के हेमंत और ओम कुशवाह ने 10 हजार पौधों से शुरू हुई नर्सरी को हर माह 15 लाख पौधों के उत्पादन तक पहुंचाया. सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण के सहयोग से आज उनकी "ओम नर्सरी" किसानों के लिए मिसाल बन चुकी है.
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मिली सहायता और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से महासमुंद के किसान क्रांति कुमार चंद्राकर ने ग्राफ्टेड बैंगन की खेती में बड़ी सफलता हासिल की है.प्रति एकड़ 400 क्विंटल उत्पादन और 6.50 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ अर्जित कर उन्होंने कृषि विविधीकरण और तकनीक आधारित खेती की मिसाल पेश की है.
परंपरागत खेती से अलग हटकर सहारनपुर के किसान ने अपने ऑर्गेनिक बाग में दुनिया के सबसे महंगे आमों में शुमार मियाजाकी आम की खेती कर एक नई मिसाल पेश की है. उन्हें इस आम से अच्छी कमाई की उम्मीद है.
कौशांबी के युवा किसान शशिकांत ने लोगों के तानों को नजरअंदाज कर वैज्ञानिक तरीके से सूअर पालन शुरू किया और आज लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं.महज 10 सूअरों और 2 लाख रुपये की पूंजी से शुरू हुआ यह व्यवसाय अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है. जानिए कैसे सही नस्ल, बेहतर प्रबंधन और विशेषज्ञों की सलाह ने उनकी तकदीर बदल दी.
सिवनी के किसान रंजीत बघेल ने पारंपरिक खेती छोड़कर चिया सीड की खेती अपनाई और महज 15-20 हजार रुपये प्रति एकड़ की लागत में करीब 1.20 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया.
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