Success Story: सबसे खास बात हैं कि प्रवेश केवल उद्यमी नहीं, बल्कि एक कुशल मैनेजर भी हैं. वे कच्चे माल की खरीद से लेकर वित्तीय खातों, उत्पादन योजना और गुणवत्ता नियंत्रण तक की जिम्मेदारी खुद संभालती हैं. उनकी इस सक्रिय शैली और वित्तीय अनुशासन के कारण उनके 'गोमाता कैटल फीड' को पुरस्कृत और सम्मानित किया जा चुका है.
अक्सर बाजार में मिलने वाली दूध निकालने वाली मशीनें विदेशी नस्ल की गायों के हिसाब से बनी होती हैं, जिनके कप देसी और छोटी गायों के थनों पर फिट नहीं बैठते. इससे न केवल दूध गिरता है बल्कि गायों को काफी दर्द भी होता है. इसी मजबूरी को खत्म करने के लिए असम के किसान मिलन ज्योति दास ने पशुपालकों की इस जमीनी समस्या को गहराई से समझा और इस बड़ी समस्या का समाधान कर दिया है. दास ने सस्ता और देसी जुगाड़ मशीन बना दी है. इससे दूध की बर्बादी रुक गई है, मजदूरों का खर्चा बचा है और सबसे बड़ी बात, अब देसी गायों को मिल्किंग के दौरान कोई तकलीफ नहीं होती है.
धारबंदोरा के डबाल गांव के युवा किसान को गोवा का एग्रीकल्चर ब्रांड एंबेसडर चुना गया है. सरकार ने ऐसा इसलिए किया है क्योंकि स्वयंपूर्ण गोवा मिशन के तहत सब्जी की खेती में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा सके. आइए जानते हैं किसान की कहानी.
राजस्थान के डूंगरपुर जिले के किसान अब्बासी चिखली ने मुर्गी पालन के क्षेत्र में एक कमाल का देसी और सस्ता इलाज खोजा है. उन्होंने रसोई में मिलने वाली चीजों जैसे — हल्दी, अदरक, लहसुन, अजवाइन, काली मिर्च और गुड़ का इस्तेमाल करके एक खास हर्बल काढ़ा तैयार किया है. यह काढ़ा मुर्गियों के लिए 'सुरक्षा कवच' का काम करता है और उन्हें रानीखेत व ई-कोलाई जैसी कई खतरनाक बीमारियों से बचाता है. सबसे बड़ी बात यह है कि 100 मुर्गियों की एक हफ्ते की खुराक का खर्च मात्र 45 रुपये आता है.
पश्चिम बंगाल के एक अनुभवी किसान, कर्णदेब रॉय ने पशुपालकों के लिए एक बहुत ही उपयोगी और सस्ती मशीन बनाई है, जिसे यूरिया मिनरल मोलासेस ब्लॉक मेकर कहा जाता है. बहुत कम कीमत वाली यह मजबूत मशीन एक घंटे में 20 से 25 पोषक ब्लॉक तैयार कर सकती है. इन ब्लॉक्स के उपयोग से गायों के दूध उत्पादन में 23% और बकरियों के शारीरिक वजन में 21% तक की शानदार बढ़ोतरी देखी गई है. लगभग 65 किलो वजन वाली इस मशीन को किसान अपनी सुविधा के अनुसार आसानी से कहीं भी ले जा सकते हैं.
Milk Production in UP: राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी की स्थापना वर्ष 2019 में जनपद झांसी में की गई थी. कम्पनी का मुख्य उद्देश्य महिला दुग्ध उत्पादकों के हितों की रक्षा करना, पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से दुग्ध संग्रहण, समयबद्ध भुगतान, क्षमता निर्माण एवं पशुधन सहायता सेवाएं उपलब्ध कराना है.
Jaunpur News: बचपन से ही पूजा ने अभाव को काफी निकट से देखा. इन परिस्थितियों ने उन्हें कमजोर नहीं बनाया वरन उनकी इच्छा शक्ति को और प्रबल बनाने का काम किया. उन्होंने तय कर लिया था कि शिक्षा के माध्यम से वह न केवल अपना भविष्य संवारने का काम करेंगी, बल्कि अपने परिवार और गांव का नाम भी रोशन करेंगी.
कर्नाटक की प्रगतिशील महिला किसान श्रीमती पद्मिनी गौड़ा ने खेती की दुनिया में अपनी अनोखी सोच से क्रांति ला दी है. उन्होंने जमीन के 13.5 फीट नीचे एक विशेष 'सनकन चैंबर' तैयार किया है, जो बिना किसी महंगी मशीन के मशरूम के लिए जरूरी नमी और तापमान को प्राकृतिक रूप से बनाए रखता है .
किसान राणाप्रताप का यह सस्ता 'खाद यंत्र' खेती की दुनिया में क्रांति ला रहा है, जिससे खेती में खाद का खर्च 50 फीसदी तक कम हो सकता है. यह देसी मशीन खाद को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाती है, जिससे न तो खाद बर्बाद होती है और न ही ज्यादा मजदूरों की जरूरत पड़ती है. कम लागत में बना यह स्मार्ट जुगाड़ न केवल समय बचाता है बल्कि छोटे किसानों की मेहनत को भी बहुत आसान बना देता हैं. अपनी इसी खासियत की वजह से यह यंत्र आजकल किसानों के बीच खूब धूम मचा रहा है और कमाई बढ़ाने का बेहतरीन जरिया बन गया है.
Success Story: शिखा सिंह चौहान दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट और नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी गांधीनगर, गुजरात से फूड टेक्नोलॉजी में पोस्ट-ग्रेजुएट हैं. वहीं, सोम्या सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय से फूड टेक्नोलॉजी में बीटेक हैं.
उत्तराखंड की केदारी राणा कभी आत्मविश्वास की कमी के कारण चुप रहा करती थीं, लेकिन 'स्वयं सहायता समूह' से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई. उन्होंने समूह लोन लेकर अपने खेत में 1,200 सेब के पेड़ लगाए. आज उनकी मेहनत का नतीजा यह है कि उनके बागान से सालाना 300 पेटी सेब की पैदावार होती है, जिससे वे साल में लाखों रुपये तक कमा रही हैं. वे न केवल खुद एक 'लखपति दीदी' बनीं, बल्कि उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं को संगठित कर नए समूह भी बनवाए और तरक्की का रास्ता दिखा रही है.
राजस्थान के प्रगतिशील किसान रावल चंद जी ने यह साबित कर दिया है कि असली शोध लैब में नहीं, बल्कि सीधे खेत की मिट्टी में होता है. उन्होंने अपने अनुभव से शकरकंद की तीन खास किस्में विकसित की हैं जो मिठास और सेहत से भरपूर हैं. वहीं कम शुगर के कारण शुगर मरीजों के लिए वरदान हैं. ये किस्में न केवल कम पानी में उगती हैं, बल्कि इनमें बीमारियां भी कम लगती हैं.
मध्य प्रदेश के सीधी जिले की मनीषा कुशवाहा आज नारी शक्ति की एक जीती-जागती मिसाल बन चुकी हैं. कभी घर के चूल्हे-चौके तक सीमित रहने वाली मनीषा ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी किस्मत बदल दी. उन्होंने न केवल जैविक खेती को अपनाकर फसलों को रसायन मुक्त बनाया, बल्कि 150 अन्य किसानों को भी इस नेक काम से जोड़ा. उनकी असल पहचान तब बनी जब वे 'नमो ड्रोन योजना' के तहत 'ड्रोन सखी' बनीं.
इंजीनियर मोहम्मद कमर तौहीद ने इंजीनियरिंग का असली जादू दिखाते हुए कबाड़ से जुगाड़ कर एक ऐसी 'सुपर मशीन' तैयार की है, जिससे अब खेती में क्रांतिकारी बदलाव आएगा. इस मशीन से किसानों के हजारों रुपये बचेंगे, क्योंकि अब बीज बोने का खर्च आधा हो जाएगा. इस देसी अवतार वाली मशीन की खासियत यह है बहुत कम डीजल में खेत की जुताई होगी, जिससे पुरानी मशीनों की छुट्टी तय है.
Women Success Story: यह पूरा प्रोजेक्ट एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के अंतर्गत संचालित किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से चल रहा है. एफपीओ ने प्राइमरी प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित की हैं, जहां मोरिंगा की पत्तियों, बीजों और छाल से वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं.
Success Story: रजनी बाला आज कई ग्रामीण महिलाओं को बिजनेस करने के लिए प्रेरित कर रही हैं. वे अपनी मूंज क्राफ्ट में लोगों को रोजगार भी दे रही हैं. और अच्छी कमाई भी कर रही हैं. रजनी ने अपने मेहनत और लगन सफलता का मुकाम हासिल किया है.
सेब की खेती करने वाले किसानों के लिए अब बरसों का इंतज़ार बीते ज़माने की बात हो गई है. एक नए और क्रांतिकारी शॉर्टकट आइडिया ने खेती का अंदाज़ ही बदल दिया है. जहां पहले सेब के बाग तैयार होने और भरपूर फसल देने में 10 साल लग जाते थे, वहीं अब इनोवेटिव आइडिया की मदद से एक किसान मात्र 1 साल में ही 3 गुना ज़्यादा पैदावार ले रहा हैं. यह 'फार्मर सीक्रेट' न केवल समय बचा रहा है, बल्कि लागत कम करके मुनाफे को आसमान पर पहुंचा रहा है.
बिहार के नवादा की रहने वाली डॉली कुमारी ने खेती को सस्ता और आसान बनाने का एक बेहतरीन रास्ता खोजा है. उन्होंने मात्र ₹15 प्रति लीटर की लागत में एक ऐसा जैविक 'प्लांट ग्रोथ प्रमोटर' तैयार किया है, जो पूरी तरह से केमिकल-मुक्त है और खेती की लागत को भारी मात्रा में कम करता है. इससे गोभी, टमाटर और बैंगन जैसी फसलों में लगने वाले 'सड़न रोग' और 'मिट्टी जनित रोगों' का खतरा लगभग खत्म हो जाता है.
Women Success Story: मलवा विकास खंड के डगरइया गांव की रहने वाली रीता देवी बताती है कि उनके पति एक सीमांत किसान हैं. कच्चा मकान था, किसी तरह बड़ी मुश्किल से गुजर बसर होता था. एक दिन स्थानीय महिलाओं से ग्रामीण आजिविका मिशन की जानकारी हुई.
धमतरी के प्रगतिशील किसान नीलेश मीनपाल ने बेकार पड़े जलमग्न क्षेत्रों और खाली तालाबों को 'कमल की खेती' के जरिए मुनाफे की खान बना दिया है. जहां लोग दलदली जमीन को अनुपयोगी मानते थे, वहां नीलेश ने कमल के फूल, बीज और औषधीय जड़ों (कमल ककड़ी) का उत्पादन कर प्रति हेक्टेयर लाखों की कमाई कर मिसाल पेश की है.
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के किसान महावीर कुमावत ने खेती में होने वाले भारी खर्चे को कम करने के लिए देसी कमाल और जुगाड़ के जरिये कबाड़ और पुराने लोहे से एक पावर वीडर बना डाला है. यह मशीन कई फसलों में खरपतवार निकालने के लिए बहुत कारगर है. सबसे खास बात है कि यह मशीन 10 गुना से कम पैसे में काम कर देती है.
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