Success Story of Pratapgarh: शिवम ने शुरुआत से ही अपनी डेयरी में बेहतर तकनीक का उपयोग किया है, जिससे अच्छी नस्ल की बछियाओं का जन्म हो रहा है और स्वदेशी नस्ल की गाय के संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा मिल रहा है. अब उनका लक्ष्य शुद्ध A2 दूध से घी और अन्य मूल्यवर्धित दुग्ध उत्पाद तैयार कर बाजार में अपनी अलग पहचान बनाना है.
बिहार के औरंगाबाद जिले के किसान ने आधुनिक तकनीक अपनाकर केले के कारोबार में नई मिसाल पेश की है. उन्होंने राइपनिंग चैंबर की मदद से केले को वैज्ञानिक तरीके से पकाने की शुरुआत की, जिससे आज वे हर साल करीब 8 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं.
रायगढ़ के प्रगतिशील किसान मनोज यादव ने बंजर जमीन पर नाशपाती का बाग विकसित कर खेती को एग्री-टूरिज्म से जोड़ दिया. उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने ओलावृष्टि के बावजूद 1.5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया और अब पर्यटक खुद पेड़ों से ताजी नाशपाती तोड़कर खरीदने पहुंच रहे हैं.
पारंपरिक खेती से सीमित आमदनी मिलने पर बिहार के एक किसान ने आधुनिक तकनीक के साथ मशरूम की खेती शुरू की और आज सफलता की नई मिसाल बन गए हैं. वातानुकूलित यूनिट में रोजाना करीब 7 क्विंटल मशरूम का उत्पादन कर वे हर साल लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं.
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले की आदिवासी महिला दिलमती ने सुअर पालन के जरिए अपनी जिंदगी पूरी तरह बदल दी है. कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाला उनका परिवार आज खेती और सुअर पालन से सालाना 7 से 8 लाख रुपये की कमाई कर रहा है.
बिहार के गया जिले की महिला किसान कविता कुमारी ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग अपनाकर खेती की तस्वीर बदल दी है. पहले जहां पारंपरिक खेती से सीमित आमदनी होती थी, वहीं अब एक ही खेत में सब्जियां, फल, और दूसरी फसलों की खेती कर उन्हें पूरे साल अच्छी कमाई हो रही है. आइए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी.
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की किसान परिवार की बेटी अंजलि ने असफलता को अपनी ताकत बनाकर यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर (SI) बनने का सपना पूरा कर लिया. 2024 की कांस्टेबल भर्ती में दौड़ में सिर्फ 10 सेकेंड से चूकने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत के दम पर SI भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की.
Success Story: सुजीत चौधरी जैसे उद्यमियों की ऐसी पहल दर्शाती है कि सही नीतिगत सहयोग, तकनीकी ज्ञान और उद्यमशीलता के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर आर्थिक गतिविधियां विकसित की जा सकती हैं. यह मॉडल न केवल स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने में सहायक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर रहा है.
Success Story: बिजनौर में 35 आउटलेट और कैफे में इसका प्रयोग किया जा रहा है. इसके अलावा मुरादाबाद में भी महिलाओं द्वारा दो विदुर हर्बल टी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं. हाल ही में मुरादाबाद के सिविल लाइन स्थित कचहरी गेट के पास नया विदुर हर्बल टी सेंटर शुरू किया गया है.
झारखंड की अनीता बेक ने भोपाल में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की सहायता से 2.5 करोड़ रुपये की लागत से 129 टन क्षमता का आधुनिक मशरूम प्लांट स्थापित किया है.यहां रोजाना 300–400 किलो बटन मशरूम का उत्पादन हो रहा है। बिग बॉस्केट, ब्लिंकिट और रिलायंस फ्रेश तक पहुंच रही उपज के साथ वह गांव की एक दर्जन से अधिक महिलाओं को रोजगार भी दे रही हैं.
मध्य प्रदेश के मंडला जिले में आरकेवीवाई-रफ्तार योजना की मदद से एक युवा उद्यमी ने मछली पालन को सफल स्टार्टअप में बदल दिया है.यहां फिश चिप्स, फिश टेंगल, लेमन मसाला फिश और फिश अचार जैसे हेल्दी वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी मांग मध्य प्रदेश के साथ-साथ बिहार सहित अन्य राज्यों में भी बढ़ रही है.
छत्तीसगढ़ की कृषक उन्नति योजना के तहत किसान अब पारंपरिक धान की खेती छोड़कर अदरक जैसी लाभकारी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं.सरगुजा के किसान अमित कुमार सिंह ने आधुनिक तकनीक से एक एकड़ में अदरक की खेती कर करीब 5 लाख रुपये की आय अर्जित की. सरकार प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता देकर फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रही है.
Sonbhadra News: सोनभद्र की मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को केवल आर्थिक गतिविधियों से नहीं जोड़ा जा रहा, बल्कि उन्हें स्वरोजगार, कौशल विकास और समूह आधारित उद्यम के लिए भी तैयार किया जा रहा है.
यूके से बिजनेस की पढ़ाई करने वाले भोपाल के युवा किसान हर्षित गोधा ने इजरायल की तकनीक अपनाकर 8.5 एकड़ में सफलतापूर्वक एवोकाडो की खेती शुरू की है. उन्होंने 5,000 पौधों की हाईटेक नर्सरी भी तैयार की है और अब देशभर के किसानों को पौधे व डिजिटल प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहे हैं.
छत्तीसगढ़ के सुकमा की सोढ़ी तिरपो ने बिहान योजना और कस्टम हायरिंग सेंटर के प्रशिक्षण से हल-बैल छोड़ आधुनिक पावर टिलर अपनाया.जानिए कैसे आधुनिक खेती ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बना दिया.
छत्तीसगढ़ के नारायणपुर की अनिता वड्डे ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' के सहयोग से वैज्ञानिक मुर्गीपालन अपनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की. मजदूरी से शुरुआत करने वाली अनिता आज 'लखपति दीदी' बनकर ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण हैं.
छत्तीसगढ़ के मल्हार के प्रगतिशील किसान जदुनंदन वर्मा ने जैविक सब्जियों और एप्पल की खेती से नई पहचान बनाई है. एक एकड़ में जैविक सब्जियों से सालाना करीब 2 लाख रुपये की आय अर्जित करने वाले जदुनंदन पिछले 10 वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं.
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के किसान इशरार खान ने पारंपरिक खेती छोड़ मिर्च सहित उद्यानिकी फसलों की खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है. महज 2 बीघा में वीएनआर-285 किस्म की मिर्च उगाकर उन्होंने 2 से 2.5 लाख रुपये तक की आय अर्जित की.
गुजरात के दाहोद जिले के किसान नरेंद्रभाई हटिला ने रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती को अपनाया है. गाय के गोबर और मूत्र से तैयार जीवामृत और घन जीवामृत के इस्तेमाल से उन्होंने खेती की लागत कम की और मिट्टी की सेहत में सुधार किया है. आईए जानते हैं उनकी सफलता की कहानी.
कहते हैं कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए बड़ी पूंजी नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और मेहनत की जरूरत होती है. राजस्थान के कोटा के युवा उद्यमी चिनात्मन जैन ने महज 30 हजार रुपये से पीनट बटर का स्टार्टअप शुरू किया और आज उनका कारोबार 2 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है.
जबलपुर के करेली गांव की 90 आदिवासी महिलाओं ने नाबार्ड के सहयोग से कोदो-कुटकी आधारित उत्पादों का सफल ब्रांड खड़ा किया है.पहले बिचौलियों पर निर्भर रहने वाली ये महिलाएं अब मिलेट्स से कुकीज, नूडल्स और अन्य उत्पाद बनाकर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग व मार्केटिंग खुद कर रही हैं, जिससे उनकी आय में कई गुना वृद्धि हुई है.
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