मियाजाकी आमउत्तर प्रदेश के सहारनपुर की ग्राम पंचायत थरौली का एक किसान आज आत्मनिर्भरता की मिसाल की नई कहानी लिख रहा है. परंपरागत खेती से अलग हटकर किसान संदीप चौधरी ने अपने ऑर्गेनिक बाग में दुनिया के सबसे महंगे आमों में शुमार मियाजाकी आम की खेती कर एक नई मिसाल पेश की है. साल 2021 में उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने और खेती को नई दिशा देने के उद्देश्य से इस अनोखे प्रयोग की शुरुआत की थी. शुरुआत में केवल दो पौधे लगाए गए थे, लेकिन आज उनके बाग में करीब 40 मियाजाकी के पेड़ तैयार हो चुके हैं. अब इन पेड़ों पर फल भी आने लगे हैं, जिससे किसान को अच्छे उत्पादन और बेहतर आमदनी की उम्मीद है.
मियाजाकी आम अपनी खूबसूरत लाल-बैंगनी रंग, दुर्लभता और ऊंची कीमत के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. संदीप चौधरी ने बताया कि जब उन्होंने इंटरनेट पर सबसे महंगे आम की किस्म के बारे में जानकारी जुटाई तो उन्हें मियाजाकी आम के बारे में पता चला. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 2.80 लाख रुपये से 3.30 लाख रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है. उन्होंने दो पौधों से शुरुआत की और बाद में उन्हीं से नए पौधे तैयार कर लिए. इस समय उनके 10 से 12 पेड़ों पर फल लगा हुआ है और उन्हें उम्मीद है कि इस सीजन में करीब 14 से 15 किलो उत्पादन मिलेगा. किसान का कहना है कि वह इस आम को 3 लाख रुपये प्रति किलो से कम कीमत पर नहीं बेचेंगे.
संदीप चौधरी का दावा है कि उनके मियाजाकी आम को लेकर दुबई की एक कंपनी से बातचीत चल रही है और जल्द ही इस संबंध में सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं. यदि यह डील पूरी हो जाती है तो सहारनपुर के थरौली गांव से मियाजाकी आम सीधे विदेशों तक पहुंचेगा. किसान का मानना है कि जापान में विकसित इस किस्म का सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र भविष्य में भारत बन सकता है. यही सोच उन्हें लगातार इस खेती को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रही है. उनका कहना है कि अगर किसान नई तकनीक और उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाएं तो खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है.
संदीप चौधरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की सोच से प्रेरित होने की बात कहते हैं. उनका कहना है कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और नवाचार के जरिए अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं. उनकी इच्छा है कि इस बार मियाजाकी आम प्रधानमंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट किया जाए. आम की सुरक्षा को देखते हुए पूरे बाग की तारबंदी कराई गई है और सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. छह से सात फीट ऊंचे इन पेड़ों पर लदे चमकदार फल आज यह संदेश दे रहे हैं कि नई सोच, आधुनिक खेती और दृढ़ संकल्प के बल पर किसान न केवल आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि दुनिया के बाजारों तक अपनी पहचान भी बना सकता है.
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