पोल्ट्री एक्सपर्ट का आरोप, नए चूजे बेचने को गिराया अंडा बाजार 

पोल्ट्री एक्सपर्ट का आरोप, नए चूजे बेचने को गिराया अंडा बाजार 

अंडा देने वाली लेअर बर्ड का एक दिन का बच्चा 42 से 46 रुपये का आता है. 19 से 20 महीने तक की मुर्गी 80 से 90 फीसद अंडा देती है. इसके बाद 20 दिन की मोल्टिंग पर लगाकर मुर्गी से फिर 80 से 90 फीसद तक अंडा लिया जाता है. 

लेयर बर्ड का प्रतीकात्मक फोटो. लेयर बर्ड का प्रतीकात्मक फोटो.
नासि‍र हुसैन
  • Noida ,
  • Jan 30, 2023,
  • Updated Jan 30, 2023, 5:11 PM IST

यह कहना गलत नहीं होगा कि बीते 10 से 12 दिन में अंडा बाजार आसमान से जमीन पर आ गिरा है. 18 जनवरी से पहले तक 600 से 639 रुपये सैंकड़ा तक अंडे बिक रहे थे. आज हाल यह है कि अंडे के दाम 405 रुपये तक आ गए हैं. पोल्ट्री एक्सपर्ट इसके पीछे बड़ी-बड़ी हैचरी कंपनियों की साजिश बता रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि नए चूजे बेचने के लिए कंपनियां अंडे के भाव गिरा रही हैं. नेशनल ऐग कोआर्डिनेशन कमेटी के ओपन रेट और मंडियों के सेलिंग प्राइज का फर्क भी इसी ओर इशारा कर रहा है. 

120-130 दिन के बाद से मुर्गी अंडा देना शुरू करती है. मुर्गी का शुरुआती अंडा छोटा यानि 25 ग्राम वजन का होता है. उसके बाद अंडे का वजन 35 ग्राम फिर 40 ग्राम पर आ जाता है. फिर अंडे का वजन 48 ग्राम का हो जाता है. 150 दिन की होने के बाद मुर्गी सामान्य वजन यानि 53 से 56 ग्राम के बीच अंडा देना शुरू कर देती है. बाजार में 53 से 56 ग्राम का अंडा ही पसंद किया जाता है. 

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अंडे के दाम अच्छे मिल रहे थे तो नहीं बदलीं पुरानी मुर्गियां 

यूपी के पोल्ट्री संचालक मनीष शर्मा ने किसान तक को बताया कि पूरा दिसम्बर और 18 जनवरी तक अंडा बाजार बहुत अच्छा गया है. यह पहला मौका था जब पोल्ट्री फार्मर को ठीक-ठाक मुनाफा हो रहा था. जनवरी में भी लगातार बाजार अच्छा चल रहा था. इसलिए लोग अभी पुरानी मुर्गियों को बदलने के बारे में फिलहाल तो नहीं सोच रहे थे. यही वजह है कि जब आधी जनवरी बीतने के बाद भी हैचिंग कंपनियों में नए चूजों के ऑर्डर नहीं पहुंचे तो वहां खलबली मच गई. जिसके बाद 17-18 जनवरी से बाजार गिरना शुरू हो गया. 

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नए चूजों से ऐसी बदली जाती हैं पुरानी मुर्गियां 

यूपी पोल्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष नवाब अली ने बताया कि जून-जुलाई में पाले गए चूजे चार से पांच महीने बाद यानि दिसम्बर में अंडा देना शुरू कर देते हैं. जिसे पहला सीजन माना जाता है. हालांकि मुर्गी अंडा तो 12 महीने देती हैं, लेकिन गिनती सीजन के हिसाब से की जाती है. इसी तरह से अगले साल फिर अक्टूबर से फरवरी तक के सीजन में अंडा लिया जाता है. इसके साथ ही ही पुरानी मुर्गी को बदलने के लिए नए चूजों का ऑर्डर लगा दिया जाता है. जो इस बार ना के बराबर है.  

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