धान पर निर्भर किसान ने बदली खेती की रणनीति, आधुनिक तकनीक अपनाकर खगपति ने दोगुनी कर ली आय

धान पर निर्भर किसान ने बदली खेती की रणनीति, आधुनिक तकनीक अपनाकर खगपति ने दोगुनी कर ली आय

बस्तर के किसान खगपति ने वर्षा आधारित पारंपरिक धान की खेती छोड़ आधुनिक कृषि तकनीक, सोलर पंप और कृषि विभाग के प्रशिक्षण की मदद से अपनी सालाना आय 80 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये से अधिक कर ली.जानिए उनकी सफलता की पूरी कहानी.

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धान पर निर्भर किसान ने बदली खेती की रणनीति, आधुनिक तकनीक अपनाकर खगपति ने दोगुनी कर ली आय

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा विकासखंड के ग्राम साडरा निवासी 47 वर्षीय किसान खगपति आज आधुनिक खेती की बदौलत सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं. कभी केवल वर्षा आधारित धान की खेती पर निर्भर रहने वाले खगपति ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी खेती की तस्वीर पूरी तरह बदल दी. आज उनकी सालाना आय लगभग दोगुनी हो चुकी है और वे आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं.

बारिश पर निर्भर खेती से होती थी सीमित कमाई

खगपति के पास करीब ढाई हेक्टेयर कृषि भूमि है.पहले उनके खेत में सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं थी और पूरी खेती बारिश के भरोसे होती थी.वे पारंपरिक तरीके से केवल धान की खेती करते थे, जिससे उत्पादन कम और लागत अधिक रहती थी.

इसी कारण उनकी सालाना आय मुश्किल से 80,250 रुपये तक ही पहुंच पाती थी, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी करना भी आसान नहीं था.

सरकारी योजनाओं ने बदली खेती की दिशा

खगपति की जिंदगी में बदलाव तब आया जब कृषि विभाग ने उन्हें आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया.सरकारी योजनाओं के तहत उनके खेत में नलकूप (बोरवेल) और सोलर पंप की स्थापना की गई, जिससे सिंचाई की समस्या खत्म हो गई.इसके बाद उन्होंने एक्सटेंशन रिफॉर्म्स (आत्मा) योजना के तहत आयोजित प्रशिक्षण, किसान भ्रमण और संगोष्ठियों में भाग लिया.

इन कार्यक्रमों में उन्होंने फसल विविधीकरण, वैज्ञानिक खेती, आधुनिक कृषि प्रबंधन और नई तकनीकों की जानकारी हासिल की, जिसे उन्होंने अपने खेत में सफलतापूर्वक लागू किया.

तीन साल में दोगुनी हुई सालाना आय

पिछले तीन वर्षों से आधुनिक तकनीकों के साथ खेती कर रहे खगपति को इसका सीधा लाभ मिला. बेहतर सिंचाई, वैज्ञानिक खेती और नई फसल प्रबंधन तकनीकों के कारण उनकी उत्पादकता बढ़ी और खेती की लागत भी कम हुई.अब उनकी सालाना आय 1.5 लाख रुपये से अधिक हो गई है, जो पहले की तुलना में लगभग दोगुनी है.

दूसरे किसानों को भी कर रहे प्रेरित

अपनी सफलता के बाद खगपति अब गांव के अन्य किसानों को भी केवल धान पर निर्भर रहने के बजाय वैकल्पिक फसलों और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

उनका कहना है कि बदलते मौसम और बढ़ती लागत के दौर में खेती में बदलाव ही किसानों की आर्थिक मजबूती का सबसे बड़ा रास्ता है.

कृषक उन्नति योजना का उठाएं लाभ

कृषि विभाग के उप संचालक ने किसानों से कृषक उन्नति योजना का लाभ लेने की अपील की है. योजना के तहत यदि कोई किसान पिछले वर्ष धान वाले खसरे में इस बार वैकल्पिक फसल लगाता है, तो उसे 15 हजार रुपये प्रति एकड़ अतिरिक्त सहायता दी जाएगी.

इच्छुक किसान अपने क्षेत्र के मैदानी कृषि अधिकारी या स्थानीय सहकारी समिति (लैम्प्स) में जाकर पंजीयन करा सकते हैं.

उन्नत तकनीक से खेती बनी मुनाफे का व्यवसाय

खगपति का कहना है कि यदि किसान सही समय पर सही तकनीक अपनाएं और सरकारी योजनाओं का लाभ लें, तो खेती को भी मुनाफे का व्यवसाय बनाया जा सकता है. उनकी सफलता यह साबित करती है कि आधुनिक कृषि तकनीक और सरकारी सहयोग किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

 

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