बंद पड़ी शुगर मिल जल्द शुरू होगी (सांकेतिक तस्वीर)मुजफ्फरपुर के गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी सामने आई है. कई वर्षों से वीरान पड़ी जिले की मोतीपुर चीनी मिल के शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है. बहुत जल्द बिहार सरकार मुजफ्फरपुर को चीनी की मिठास के साथ गन्ना उद्योग का एक बड़ा केंद्र बनाने जा रही है. सरकार ने मिल की 266 एकड़ लीज की भूमि को वापस अपने अधिकार में लेने का अहम फैसला किया है. राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इस जमीन पर एक नई चीनी मिल, गन्ना अनुसंधान संस्थान और अन्य औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने का रास्ता साफ हो गया है. पूर्व निवेशक IPL के साथ करार खत्म होने के बाद अब राज्य सरकार कोर्ट के आदेश पर उन्हें ₹63.39 करोड़ का भुगतान कर यह 266 एकड़ जमीन वापस लेगी.
एक समय ऐसा भी था, जब मोतीपुर चीनी मिल चालू थी. तब वह केवल जिले की आर्थिक रीढ़ ही नहीं थी, बल्कि जिले से सटे आसपास के जिलों के हजारों किसानों की आर्थिक रीढ़ की हड्डी थी. वर्ष 1997 में इस चीनी मिल के बंद होने से न केवल हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार छिन गए थे, बल्कि गन्ना किसानों की आमदनी का जरिया भी खत्म हो गया था. मिल पर आश्रित स्थानीय बाजार, छोटे कारोबारी और परिवहन व्यवस्था भी चरमरा गई थी. लेकिन सरकार द्वारा अब 266 एकड़ जमीन को वापस लेने के निर्णय के बाद मोतीपुर सहित मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों के किसानों के चेहरों पर खुशी की लहर देखने को मिल रही है.
बिहार सरकार के गन्ना उद्योग विभाग द्वारा 266 एकड़ जमीन वापस लेने के फैसले के बाद जहां किसानों के बीच खुशी की लहर है, वहीं सरकार इस जमीन पर केवल चीनी मिल ही नहीं शुरू करेगी, बल्कि एक आधुनिक 'गन्ना अनुसंधान संस्थान' भी बनाएगी. साथ ही अन्य औद्योगिक इकाइयां भी स्थापित करेगी. सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. वहीं, नई मिल शुरू होने से मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों के गन्ना किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए एक बड़ा और सुलभ स्थानीय बाजार मिलेगा.
मुजफ्फरपुर के रहने वाले कृष्ण गोपाल कहते हैं कि चीनी मिल शुरू होती है तो यह बहुत अच्छी बात है. इससे एकबार फिर किसानों की समृद्धि का रास्ता खुलेगा. लेकिन, सरकार को इसके लिए गन्ना के खेत से लेकर चीनी मिल तक जमीन स्तर पर काम करना होगा.
सरकार के इस फैसले के बाद यह उम्मीद लगाई जा रही है कि अब मोतीपुर चीनी मिल के फिर से शुरू होने का रास्ता करीब-करीब साफ हो चुका है. बंद पड़ी औद्योगिक संपत्तियों का यह फिर से इस्तेमाल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति देगा.
गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने कहा, "मोतीपुर चीनी मिल का यह पुनरुद्धार केवल एक औद्योगिक फैसला नहीं है, बल्कि यह उत्तर बिहार के किसानों, मजदूरों और युवाओं के विश्वास का आगाज है. वर्षों से वीरान पड़ी इस 266 एकड़ जमीन पर अब गन्ने की मिठास और रोजगार की नई बहार, दोनों लौटेंगी.
उन्होंने आगे कहा कि निवेशकों को उनका बकाया चुकाकर जमीन वापस लेना इस बात का साफ प्रमाण है कि हम राज्य के औद्योगिक विकास और किसानों की खुशहाली के लिए पूरी दृढ़ता से काम कर रहे हैं. मोतीपुर में गूंजने वाला यह नया औद्योगिक शंखनाद पूरे बिहार के नव-निर्माण का जयघोष होगा.
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