मेघालय की इस FPC में 75 प्रतिशत महिला किसान, 1 करोड़ के पार पहुंचा रेवेन्‍यू, जानिए कैसे मिली सफलता

मेघालय की इस FPC में 75 प्रतिशत महिला किसान, 1 करोड़ के पार पहुंचा रेवेन्‍यू, जानिए कैसे मिली सफलता

मेघालय की जिरांग ऑर्गेनिक एग्रो फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी का सालाना रेवेन्यू 1.5 लाख रुपये से बढ़कर 2025 तक 1.17 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. FPC के करीब 75 प्रतिशत सदस्य महिलाएं हैं, जो GI टैग वाले अनानास समेत कई कृषि उत्पादों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा रही हैं.

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मेघालय की इस FPC में 75 प्रतिशत महिला किसान, 1 करोड़ के पार पहुंचा रेवेन्‍यू, जानिए कैसे मिली सफलताFPC में काम करते हुए सदस्‍य (फोटो- एएनआई)

मेघालय के री-भोई जिले की महिला किसानों ने खेती और ग्रामीण उद्यमिता के क्षेत्र में सफलता की नई कहानी लिखी है. जिरांग ऑर्गेनिक एग्रो फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी (Jirang Organic Agro Farmers Producer Company) का सालाना रेवेन्यू 2025 तक बढ़कर 1.17 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. वर्ष 2017 से 2021 के दौरान कंपनी का रेवेन्यू महज 1.5 लाख रुपये था. इस किसान उत्पादक कंपनी से जुड़ी महिलाएं अब मेघालय के GI टैग वाले अनानास समेत कई प्रीमियम कृषि उत्पादों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा रही हैं.

18 गांवों के 433 किसानों के साथ शुरू हुई थी कंपनी

री-भोई जिले में स्थित जिरांग ऑर्गेनिक एग्रो फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी की स्थापना 2017 में हुई थी. शुरुआत में इससे 18 गांवों के 433 किसान जुड़े थे. कंपनी के कुल सदस्यों में करीब 75 प्रतिशत महिलाएं हैं. ये महिला किसान मेघालय के ग्रामीण इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के साथ राज्य के प्राकृतिक रूप से उगाए जाने वाले कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं.

200 महिला किसान संभाल रहीं उत्पादन और मार्केटिंग

पुरुष किसानों के साथ करीब 200 महिला किसान कृषि उत्पादों के उत्पादन और मार्केटिंग में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. इनमें इबालाहुन थांगख्यू (Ibalahun Thangkhiew) और डेजी वाहलांग (Daisy Wahlang) जैसी महिलाएं शामिल हैं. किसान अनानास, खासी मंदारिन संतरा, अदरक और काली मिर्च जैसे प्रीमियम उत्पादों का उत्पादन और मार्केटिंग कर रही हैं. इन प्रयासों से मेघालय के कृषि उत्पादों को बाजार में अलग पहचान बनाने में मदद मिली है.

मिठास और कम खटास के लिए मशहूर है मेघालय का अनानास

मेघालय देश के प्रीमियम गुणवत्ता वाले अनानास के प्रमुख उत्पादक राज्यों में शामिल है. यहां के अनानास अपनी अधिक मिठास, खास सुगंध, कम खटास और प्राकृतिक खेती के लिए जाने जाते हैं. राज्य के बारिश आधारित पहाड़ी और घाटी वाले इलाकों में बड़े पैमाने पर अनानास की खेती होती है. री-भोई, गारो हिल्स और खासी एवं जयंतिया हिल्स के कुछ हिस्से अनानास उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र हैं. इसकी खेती हजारों किसान परिवारों की आजीविका से जुड़ी है और राज्य की बागवानी अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देती है.

मेघालय के GI टैग वाले अनानास को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है. वर्ष 2025 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने UAE के राष्ट्रपति को मेघालय का GI टैग वाला अनानास भेंट किया था. इससे राज्य की कृषि विरासत और खास कृषि उत्पाद को वैश्विक मंच पर पहचान मिली.

दुबई और देश के दूसरे बाजारों तक पहुंचे उत्पाद

जिरांग ऑर्गेनिक एग्रो फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी इबालाहुन थांगख्यू (Ibalahun Thangkhiew) ने कहा कि संगठन ने अपने उत्पादों के बाजार का काफी विस्तार किया है. इसके साथ ही महिलाओं के लिए आर्थिक अवसर भी तैयार किए गए हैं. उन्होंने कहा, "हमने अपने उत्पादों का दुबई और भारत के दूसरे हिस्सों में निर्यात किया है. हम महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास के लिए भी काम कर रहे हैं."

सरकारी मदद से मिलीं मशीनें और रोजगार के अवसर

कंपनी की उपाध्यक्ष डेजी वाहलांग (Daisy Wahlang) ने किसान समूह को वैल्यू एडेड प्रोसेसिंग सुविधाएं स्थापित करने और बाजार तक पहुंच बढ़ाने में मिली सरकारी सहायता को महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, "मैं सरकार को उसके सहयोग के लिए धन्यवाद देती हूं. सरकार ने फलों की प्रोसेसिंग और उत्पादों के निर्यात के लिए जरूरी मशीनें उपलब्ध कराने में हमारी मदद की है. इससे हमें आजीविका कमाने के साथ रोजगार के अवसर पैदा करने का मौका भी मिला है."

मेघालय में अनानास की खेती राज्य की सामुदायिक परंपराओं और मातृवंशीय सामाजिक व्यवस्था से गहराई से जुड़ी हुई है. यहां महिलाएं खेती, फसल कटाई के बाद के प्रबंधन और किसान संस्थाओं के संचालन में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं. कई परिवारों के लिए अनानास की खेती केवल कृषि गतिविधि नहीं है, यह आय और महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का प्रमुख जरिया भी है.

लुलु ग्रुप से ब्लिंकिट तक ऑनलाइन बाजार में बनाई पहुंच

जिरांग ऑर्गेनिक एग्रो फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में बड़े खरीदारों के साथ मजबूत कारोबारी संबंध बनाए हैं. इनमें लुलु ग्रुप (Lulu Group), सफल-मदर डेयरी (Safal-Mother Dairy), रिलायंस रिटेल (Reliance Retail) और ब्लिंकिट (Blinkit) शामिल हैं. इन बाजार संपर्कों से किसानों को अपने उत्पादों की बेहतर कीमत हासिल करने और बिचौलियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है.

पहला एसेप्टिक पाइनएप्पल पल्प प्लांट तैयार

कंपनी की यात्रा में सितंबर 2025 एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ. इस दौरान जिरांग में मेघालय की पहली एसेप्टिक पाइनएप्पल पल्प प्रोसेसिंग यूनिट शुरू की गई. 2.46 करोड़ रुपये की लागत वाली इस यूनिट की स्थापना राज्य के कम्युनिटी-पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (Community-Public-Private Partnership) मॉडल के तहत की गई है.

इस परियोजना को इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट (International Fund for Agricultural Development-IFAD) और फोकस कार्यक्रम (FOCUS Programme) का सहयोग मिला है. यूनिट में प्रतिदिन 10 मीट्रिक टन ताजे फलों की प्रोसेसिंग की जा सकती है. इसकी सालाना क्षमता 480 से 600 मीट्रिक टन अनानास को पल्प में बदलने की है.

किसानों को पूरे साल बाजार से जोड़ने में मिली मदद

प्रोसेसिंग यूनिट शुरू होने से किसानों को पूरे साल बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने में मदद मिली है. इससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और कृषि उत्पादों का वैल्यू एडिशन बढ़ाने में भी सहायता मिली है. इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों की आय को मजबूत करना है.

जिरांग FPC की सफलता मेघालय में किसान स्वामित्व वाली एकीकृत वैल्यू चेन विकसित करने की रणनीति को भी दिखाती है. इस मॉडल में सामुदायिक स्वामित्व, सरकारी निवेश और निजी क्षेत्र की भागीदारी को एक साथ जोड़ा गया है.

कई योजनाओं के जरिए वैल्यू चेन पर सरकार का फोकस

मेघालय सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए व्यापक वैल्यू चेन आधारित रणनीति अपनाई है. इसमें किसानों को संगठित करने, प्रोसेसिंग सुविधाएं विकसित करने, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

इसके लिए मेघालय स्टेट ऑर्गेनिक मिशन (Meghalaya State Organic Mission), फोकस (FOCUS), मेघालय लाइवलीहुड्स एंड एक्सेस टू मार्केट्स प्रोग्राम (Meghalaya Livelihoods and Access to Markets Programme-MLAMP) और सीएम फार्म प्लस (CM FARM+) जैसी प्रमुख योजनाएं चलाई जा रही हैं.

ऑर्गेनिक खेती पर 295 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार

मेघालय स्टेट ऑर्गेनिक मिशन 2024-2028 के तहत राज्य सरकार ने 295 करोड़ रुपये के निवेश का प्रावधान किया है. मिशन का लक्ष्य 2028 तक एक लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को प्रमाणित जैविक खेती के दायरे में लाना है.

इस पहल से 90,000 से अधिक किसानों को लाभ पहुंचाने और 600 से अधिक सहकारी समितियों एवं किसान संस्थाओं को मजबूत करने का लक्ष्य है. अनानास इस मिशन की प्राथमिक फसलों में शामिल है. वर्तमान में जैविक प्रमाणन के तहत आने वाले कुल क्षेत्रफल में अनानास की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत है.

आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक खेती को बढ़ावा

राज्य सरकार ने बेहतर रोपण सामग्री, खेती के तरीकों और उत्पादकता में सुधार के लिए वैज्ञानिक हस्तक्षेप भी शुरू किए हैं. प्रदर्शन फार्म, किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम और एक्सपोजर विजिट के जरिए किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इस दौरान मेघालय की पारंपरिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है. (एएनआई)

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