इथेनॉल पर आरोपों को गडकरी ने बताया बेबुनियादकेंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने केंद्र के इथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम का जोरदार बचाव किया है. उन्होंने उन आरोपों को खारिज कर दिया कि E20 फ्यूल से गाड़ियों के इंजन और माइलेज को नुकसान पहुंचता है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें और इथेनॉल, दोनों को "बदनाम" करने की कोशिशें की जा रही हैं.
E20 फ्यूल को लेकर चल रहे विवाद के बीच 'आज तक' को दिए एक खास इंटरव्यू में गडकरी ने कहा कि उन्होंने हमेशा वैकल्पिक ईंधन—सिर्फ इथेनॉल ही नहीं—की वकालत की है, ताकि भारत की आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो और किसानों की आय बढ़े.
गडकरी ने कहा कि इथेनॉल को बढ़ावा देने की उनकी कोशिश 2004 से चल रही है और यह वैकल्पिक और बायो-फ्यूल को बढ़ावा देने वाले अभियान का हिस्सा है.
उन्होंने कहा, "मैं सिर्फ इथेनॉल की बात नहीं करता. मैं वैकल्पिक ईंधन और बायो-फ्यूल की बात करता हूं. मैंने पहले इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया था, और अब मैं हाइड्रोजन, मेथनॉल और CNG की बात कर रहा हूं."
उन्होंने बताया कि भारत हर साल लगभग 22 लाख करोड़ रुपये का जीवाश्म ईंधन आयात करता है और अपनी ऊर्जा जरूरत का लगभग 87 प्रतिशत आयात से पूरा करता है.
गडकरी ने कहा, "मकसद भारत को आत्मनिर्भर बनाना, आयात कम करना, युवाओं के लिए रोजगार पैदा करना और यह सुनिश्चित करना है कि किसान न केवल अन्नदाता बनें, बल्कि ऊर्जा प्रदाता, ईंधन प्रदाता, एविएशन फ्यूल प्रदाता और विटामिन प्रदाता भी बनें."
उन्होंने साफ किया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग से जुड़े फैसले पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जबकि ऑटोमोबाइल इंजन के मानक और नियम तय करने की जिम्मेदारी उनके मंत्रालय की है.
उन आरोपों का जवाब देते हुए कि उन्हें अपने परिवार के चीनी कारोबार के कारण इथेनॉल नीति से व्यक्तिगत फायदा हुआ है, गडकरी ने कहा कि ये दावे बेबुनियाद हैं. उन्होंने कहा, "मेरी चीनी फैक्टरी इथेनॉल प्रोग्राम शुरू होने से पहले ही लग गई थी. अब मेरे बेटे इसे संभालते हैं."
उन्होंने बताया कि भारत अभी लगभग 550 उत्पादकों से सालाना करीब 1,500 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदता है, जो गन्ने के रस, शीरे (मोलासेस), चावल और मक्के से बनाया जाता है. गडकरी ने आगे कहा, "हमारी हिस्सेदारी सिर्फ 0.07 प्रतिशत है. यह न के बराबर है. इथेनॉल नीति से हमें फायदा होने का कोई सवाल ही नहीं उठता."
E20 फ्यूल से गाड़ियों को नुकसान पहुंचने के दावों को खारिज करते हुए गडकरी ने आलोचकों को सबूत पेश करने की चुनौती दी. उन्होंने इंटरव्यू लेने वाले से पूछा, "मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूं. आप भी पेट्रोल वाली गाड़ी इस्तेमाल करते हैं. उसमें पहले से ही 20 प्रतिशत इथेनॉल होता है. क्या आपको कोई परेशानी हुई है?"
"क्या आप ऐसे दो लोगों के नाम बता सकते हैं जिनकी पेट्रोल वाली गाड़ियां इथेनॉल की वजह से खराब हुई हों?"
गडकरी ने कहा कि मारुति सुजुकी, टोयोटा, टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी कार बनाने वाली कंपनियों को इथेनॉल-मिले ईंधन से इंजन खराब होने की एक भी शिकायत नहीं मिली है. उन्होंने कहा, "मारुति सुजुकी, जिसका मार्केट शेयर लगभग 40 प्रतिशत है, को एक भी शिकायत नहीं मिली है. न तो टोयोटा, न टाटा और न ही महिंद्रा को."
उन्होंने उन लोगों से अपील की जिन्हें लगता है कि इथेनॉल से उनकी गाड़ी खराब हुई है, कि वे डीलर और मंत्रालय, दोनों के पास शिकायत दर्ज कराएं.
उन्होंने कहा, "अगर किसी की पेट्रोल वाली गाड़ी इथेनॉल की वजह से खराब हुई है, तो उन्हें तुरंत डीलर और हमारे मंत्रालय के पास शिकायत दर्ज करानी चाहिए. हम जांच करेंगे और राहत देंगे."
गडकरी ने यह भी बताया कि अमेरिका, ब्राजील, जापान, जर्मनी, थाइलैंड और स्वीडन जैसे देशों में इथेनॉल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. उन्होंने कहा कि भारत का इथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम दुनिया भर में अपनाए जाने वाले तरीकों के अनुसार ही है.
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