राजस्थान में पहाड़ी क्षेत्रों से आ रही बर्फीली हवाओं ने ठंड और पाले का असर तेज कर दिया है. शेखावाटी सहित कई इलाकों में रात का तापमान 2.5 डिग्री से नीचे पहुंच गया है. खेतों में ओस जमने से सरसों, चना और सब्जी फसलों पर नुकसान का खतरा बढ़ गया है.
राजस्थान के अलवर जिले में किसानों को प्याज के सही दाम नहीं मिलने से नाराज होकर उन्होंने नदी में प्याज फेंक दी. कटाई और ढुलाई में लागत अधिक होने के बावजूद मंडी में कीमत बेहद कम है. किसानों ने सरकार से 10-12 रुपये किलो दर से खरीद की मांग की है, अन्यथा प्याज फेंकने की चेतावनी दी.
भारत के रेपसीड-मस्टर्ड अनुसंधान निदेशालय (ICAR-DRMR), भरतपुर ने सरसों की उन्नत किस्म BPM-11 विकसित की है. यह किस्म देर से बोई जाने वाली सिंचित भूमि के लिए उपयुक्त है, रोग प्रतिरोधी है और 37.8 फीसद तक तेल की मात्रा देती है.
राजस्थान में रबी सीजन की सरसों की बुवाई ने इस बार जोरदार शुरुआत की है. अब तक 16.84 लाख हेक्टयर में बुवाई हो चुकी है, जो पिछले साल से 84% अधिक है. SEA का कहना है कि अच्छी मिट्टी नमी, बढ़े बाजार भाव और ऊंचे MSP ने किसानों का रुझान बढ़ाया है.
पूर्वी राजस्थान के किसान पारंपरिक तरीके से कर रहे कपास की खेती, तकनीकी जानकारी की कमी से घट रहा उत्पादन, लागत बढ़ने और मंडी में कम दाम से कपास की खेती बन रही अलाभकारी.
Pomegranate disease: बालोतरा और आसपास के क्षेत्रों में टिकड़ी रोग और अन्य फसल रोगों पर ICAR की विशेष वैज्ञानिक टीम करेगी दौरा, किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता.
कोटा के किसानों का गुस्सा, फसलें बर्बाद, मुआवजा नहीं तो 23 सितंबर से भूख हड़ताल. बारिश और प्रशासन की बेरुखी ने किसानों की उम्मीदें तोड़ी, अब भूख हड़ताल की चेतावनी. रामगंजमंडी-चेचट के किसान बोले: ‘मुआवजा दो या 23 सितंबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल.’ किसानों ने सरकार को चेतावनी दी, भूख हड़ताल तय. मुआवजा नहीं मिला तो आंदोलन अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में बदल जाएगा.
राज्य में खरीफ के सीजन में मूंग, उड़द, सोयाबीन, बाजरा, मक्का, तिल और धान प्रमुख फसलें बोई गई थीं. बारिश ने सबसे ज्यादा नुकसान दलहन और तिलहनी फसलों को पहुंचाया है. कई जगह तो मूंग और उड़द गलकर खेतों में ही सड़ गई हैं तो सोयाबीन और बाजरा की स्थिति भी ठीक नहीं है.
Dholpur Flood Situation: धौलपुर जिले में लगातार बारिश से नदी-तालाब और बांध लबालब भर गए हैं. बसेड़ी और सैपऊ उपखंड के 25 से अधिक गांवों में बाढ़ ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, खेतों में पानी भरा हुआ है. किसानों का कहना है कि पिछले साल भी मुआवजा नहीं मिला थ. इस बार भी अब तक गिरदावरी नहीं हुई है.
अलवर और धौलपुर में लगातार बारिश से नदी-नालों में तेज बहाव जारी है. सिलीसेढ़ झील और जयसमंद बांध का जलस्तर बढ़ गया है. 1996 के बाद पहली बार जयसमंद बांध में इतना पानी आया है, जिससे प्याज-बाजरा सहित फसलें डूबकर खराब हो गईं.
Dholpur Crop Loss: धौलपुर जिले में इस मॉनसून सीजन में लगातार बारिश और बाढ़ के कारण खरीफ की करीब 50 प्रतिशत फसल बर्बाद हो गई है. राजाखेड़ा, बाड़ी, बसेड़ी, सरमथुरा और सैपऊ उपखंड में खेत जलमग्न हैं. बाजरा और तिल फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है.
राजस्थान के खैरथल जिले में किसान अमीलाल चावड़ा हाथी घास (नेपियर घास) की खेती से लाखों कमा रहे हैं. एक एकड़ में 20 हजार रुपये की लागत से सालाना 2.5 लाख तक की कमाई हो रही है, साथ ही साल में 6-7 बार कटाई संभव है.
Dholpur Mango: राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित आम उत्कृष्टता केंद्र खेमरी ने आम उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस केंद्र में 44 हेक्टेयर भूमि पर 41 वैरायटी के आमों की खेती की जा रही है, जिनमें से 23 वैरायटी फिलहाल फल दे रही हैं. यहां के आमों की मिठास के चलते इनकी मांग भारत के कोने-कोने से लेकर अमेरिका तक पहुंच गई है.
Sindoor plant: सिंदूर की खेती मुख्य तौर पर दक्षिण के राज्यों जैसे तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक में होती है. इसके अलावा असम और महाराष्ट्र में भी इसकी खेती होती है. लेकिन राजस्थान के कोटा में दो नर्सरियों ने इसके 4 हजार पौधे लगाए हैं और किसानों को दिए जा रहे हैं.
Nagauri Pan Methi: नागौरी पान मेथी को शेड्यूल लिस्ट में शामिल करने की मांग लंबे दिनों से की जा रही थी. सरकार ने इसे अधिसूचित कर दिया है. इसके बाद नागौरी पान मेथी को जीआई टैग मिलने का रास्ता साफ हो गया है.
राजस्थान में किसान एक अप्रैल से चना और सरसों की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं, जबकि इन फसलों की खरीद 10 अप्रैल से शुरू होगी. सहकारिता राज्य मंत्री गौतम कुमार दक ने मंगलवार को यह जानकारी दी. केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार राज्य में 13.89 लाख मीट्रिक टन सरसों और 6.30 लाख मीट्रिक टन चना की खरीद का लक्ष्य रखा गया है.
किसानों ने कृषि उपज मंडी का गेट बंद करके मंडी समिति और मंडी के व्यापारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया. किसानों ने बताया कि 10 दिन बाद कल मंडी में सरसों के भाव 5700 रहे, फिर आज व्यापारी और मंडी समिति कर्मचारियों की मिलीभगत से सरसों के दाम एक साथ 1000 से 1200 रुपये कम कर दिए जिससे किसान नाराज हो गए.
किसान महापंचायत से जुड़े किसानों ने 15 दिनों तक मंडियों में सरसों न बेचने का फैसला किया है. सरसों सत्याग्रह आंदोलन का नेतृत्व रामपाल जाट कर रहे हैं. उन्होंने किसानों को समझाया कि सरसों फसल के लिए 6000 रुपये प्रति क्विंटल की बोली से कम राशि न स्वीकारें, मंडियों में 6000 रुपये से शुरुआती बोली लगे इसके लिए 1 मार्च से 15 मार्च तक वे मंडियों नहीं पहुंचें.
राजस्थान के दौसा जिले में बरखेड़ा गांव के स्कूल में किचन गार्डन बनाया गया है. उसमें सब्जी उगाई जा रही है और स्कूली बच्चों को मिड-डे मील के जरिए उन सब्जियों को परोसा जा रहा है. किचन गार्डन के प्रभारी शिक्षक हेमराज मीणा ने बताया कि स्कूल परिसर में जैविक खेती की जा रही है. स्कूली बच्चों को पढ़ाई के साथ सब्जी भी उगाना और उनकी बारीकियों की जानकारी दी जाती है.
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट के नेतृत्व में 11 फरवरी को राजस्थान के किसानों और किसान प्रतिनिधियों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी कानून बनाने की मांग को लेकर नए आंदोलन का आगाज किया है. सरसों सत्याग्रह के तहत राज्य के किसान 1 मार्च से 15 मार्च तक सरसों मंडियों में उपज लेकर नहीं जाएंगे.
सिंचाई दिक्कतों के चलते राजस्थान के किसानों ने आज चक्का जाम का ऐलान किया है. रबी फसल के लिए इंदिरा गांधी नहर से अतिरिक्त सिंचाई पानी की मांग को लेकर प्रशासन के साथ वार्ता विफल होने के बाद किसान सड़कों पर उतर रहे हैं.
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