राजस्‍थान में किसानों का 'सरसों सत्‍याग्रह' शुरू, 15 मार्च तक मंडी नहीं ले जाएंगे उपज, रामपाल जाट ने की ये मांग

राजस्‍थान में किसानों का 'सरसों सत्‍याग्रह' शुरू, 15 मार्च तक मंडी नहीं ले जाएंगे उपज, रामपाल जाट ने की ये मांग

किसान महापंचायत से जुड़े किसानों ने 15 दि‍नों तक मंडियों में सरसों न बेचने का फैसला किया है. सरसों सत्‍याग्रह आंदोलन का नेतृत्‍व रामपाल जाट कर रहे हैं. उन्‍होंने किसानों को समझाया कि सरसों फसल के लिए 6000 रुपये प्रति क्विंटल की बोली से कम राशि न स्‍वीकारें, मंडियों में 6000 रुपये से शुरुआती बोली लगे इसके लिए 1 मार्च से 15 मार्च तक वे मंडियों नहीं पहुंचें.

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राजस्‍थान में किसानों का 'सरसों सत्‍याग्रह' शुरू, 15 मार्च तक मंडी नहीं ले जाएंगे उपज, रामपाल जाट ने की ये मांग15 मार्च तक मंडियों में सरसों नहीं बेचेंगे किसान. (सांकेतिक फोटो)

राजस्‍थान सरसों उत्‍पादन वाले प्रमुख राज्‍यों में शामिल है, लेकिन इस साल यहां के किसान सरसों की कीमतों को लेकर सरकार से नाराज चल रहे हैं और न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. इस बीच, किसान महापंचायत से जुड़े किसानों ने 15 दि‍नों तक मंडियों में सरसों न बेचने का फैसला किया है. सरसों सत्‍याग्रह आंदोलन का नेतृत्‍व रामपाल जाट कर रहे हैं. किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने टोंक जिले के किसानों के साथ बा‍तचीत की.

उन्‍होंने किसानों को समझाया कि सरसों फसल के लिए 6000 रुपये प्रति क्विंटल की बोली से कम राशि न स्‍वीकारें, मंडियों में 6000 रुपये से शुरुआती बोली लगे इसके लिए 1 मार्च से 15 मार्च तक वे मंडियों में नहीं पहुंचें. बता दें कि राजस्‍थान में सबसे ज्‍यादा सरसों उत्पादन में टोंक जिला सबसे आगे है. यहां 551157 मीट्रिक टन सरसों उत्‍पादन होता है, जो राज्‍य के कुल उत्‍पादन का 9.91 प्रतिशत हैं.

व्‍यापारी ज्‍यादा तेल अंश पर लगाते हैं बोली

किसान महापंचायत का कहना है कि 36 प्रतिशत तेल अंश वाली सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5950 रुपये प्रति क्विंटल है. उक्‍त तेल अंश में 0.25 प्रतिशत बढ़ोतरी होने पर किसानों को 15 रुपये और ज्‍यादा मिलेंगे. लेकिन व्यापारी 42 प्रतिशत तेल अंश के आधार पर नीलामी बोली लगाते हैं. जब उन्‍हें 42 तेल अंश वाली सरसों नहीं मिलती तो  वे मनमाफ़िक पैसा काट कर उपज खरीदते हैं. 1 प्रतिशत तेल अंश कम होने पर 150 रुपये तक काट लिए जाते हैं. 

उपज में कटौती का लगाया आरोप

किसान महापंचायत ने आरोप लगाया कि मंडियों में नियम विरुद्ध जाकर व्यापारी 400-600 ग्राम प्रति क्विंटल सरसों एक्‍स्ट्रा लिया जा रहा है, जिससे किसानों के घरों में पहुंचने वाले पैसे व्यापारियों की जेब में जा रहे हैं. इस पैसे का इस्‍तेमाल कर व्‍यापारी मंडी अधिकारियों को अपने पक्ष में करने के लिए इस्‍तेमाल करते हैं. किसान महापंचायत ने मांग की अभी कि प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत एमएसपी पर 25 प्रतिशत सरसों की खरीद का प्रावधान है. राजस्थान सरकार एक किसान से 40 क्विंटल खरीद की व्यवस्था करे.

पाम तेल पर आयात शुल्‍क बढ़ाने की मांग

रामपाल जाट ने आयातित पाम ऑयल पर 85% तक आयातित शुल्क लगाने की मांग की. कहा कि किसानों ने तो जंतर-मंतर पर सरसों सत्याग्रह करके पाम तेल के आयात पर 300 तक शुल्क लगाने की मांग की थी. कोराना काल के समय 2021 की सरसों में पाम ऑयल मिलावट पर पाबंदी लगाई गई, उसके बाद भी सरसों में पाम ऑयल की मिलावट हो रही है.खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरों पर पाबंदी लगाने वाली टीम भी सुस्त पड़ी हैं. अगर मिलावटखोरों पर पाबन्दी लगाई जाए तो सरसों के दाम खुद-ब-खुद बढ़ेंगे.

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