
नुकसान की जानकारी देते हुए किसानमहाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों को बुरी तरह प्रभावित किया है. 16 मार्च से शुरू हुए इस खराब मौसम के चलते जहां जनहानि की खबरें सामने आई हैं, वहीं हजारों हेक्टेयर में खड़ी और तैयार फसलें पूरी तरह चौपट हो गई हैं. हालात इतने गंभीर हैं कि कई इलाकों में किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है. डिविजनल कमिश्नर कार्यालय के प्राथमिक सर्वे के मुताबिक, छत्रपति संभाजीनगर, जालना, नांदेड़, बीड, लातूर और धाराशिव जिलों के 533 गांव इस आपदा से प्रभावित हुए हैं. इस दौरान आकाशीय बिजली गिरने से हिंगोली के गुलाब मरकड़ (33) और नांदेड़ की दीपिका राठोड़ (16) की मौत हो गई. इसके अलावा 41 पशुओं की भी जान गई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 20,896 किसानों की करीब 11,572 हेक्टेयर जमीन पर खड़ी फसलें इस बेमौसम बारिश से प्रभावित हुई हैं. सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं, मोसंबी, अनार और अन्य रबी फसलों को हुआ है. तेज हवाओं और बारिश के कारण खेतों में खड़ी गेहूं की फसल पूरी तरह जमीन पर बिछ गई है, जिससे कटाई करना अब बेहद मुश्किल हो गया है.

छत्रपति संभाजीनगर जिले के साजखेड़ा और आसपास के गांवों में हालात और भी खराब हैं. किसान कृष्णा गवली बताते हैं कि उनके ढाई एकड़ खेत में करीब 50 क्विंटल गेहूं का नुकसान हुआ है और अब फसल बेचने पर भी उचित दाम मिलने की उम्मीद नहीं है. वहीं, किसान प्रवीण जाधव ने कहा कि उनके मोसंबी के बाग में लगे छोटे-छोटे फल तेज बारिश और ओलावृष्टि से टूटकर गिर गए, जिससे पूरी फसल बर्बाद हो गई है.
किसान श्रीराम चवली ने कहा कि अगर फसल खड़ी रहती तो हार्वेस्टर से कटाई हो जाती, लेकिन अब फसल गिर जाने के कारण मजदूरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जो इस समय उपलब्ध नहीं हैं. इसी तरह बाबा साहब सरजीराव घड़के, जिनकी तीन एकड़ में मौसंबी की खेती थी, उन्हें उम्मीद थी कि इस सीजन में 3 से 4 लाख रुपये की आमदनी होगी, लेकिन बेमौसम बारिश ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.
किसानों ने सरकार से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का जल्द सर्वे कर नुकसान का पंचनामा तैयार किया जाए और प्रति हेक्टेयर कम से कम 1 लाख रुपये की राहत राशि दी जाए. उन्होंने कहा कि अगर समय रहते मदद नहीं मिली तो आर्थिक संकट और गहरा सकता है. फिलहाल, प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन जारी है, लेकिन किसानों की नजरें अब राहत और मुआवजे पर टिकी हैं. (इसरारुद्दीन चिश्ती की रिपोर्ट एजेंसी इनपुट के साथ)
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