महाराष्ट्र के अमरावती जिले में मूसलाधार बारिश से 39 राजस्व मंडलों में अतिवृष्टि दर्ज की गई. 38 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि क्षेत्र जलमग्न हो गया, जिससे सोयाबीन समेत खरीफ की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. बाढ़ से जुड़े हादसों में दो लोगों की मौत हुई है, जबकि कई गांवों का संपर्क टूट गया और राहत-बचाव अभियान जारी है.
मराठवाड़ा में खरीफ सीजन की बुवाई बुरी तरह प्रभावित. मॉनसून की बेरुखी और कीटों के प्रकोप से 41% खेत खाली. पिछले साल की तुलना में बुवाई में भारी गिरावट.
महाराष्ट्र के अमरावती संभाग में सोयाबीन बीजों की खराब उगवण (अंकुरण) से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. 7 जुलाई तक कृषि विभाग को 907 शिकायतें मिल चुकी हैं. किसानों का आरोप है कि महंगे दामों पर खरीदे गए बीजों का अंकुरण नहीं हुआ, जिससे उन्हें दोबारा बुवाई करनी पड़ रही है. कृषि विभाग ने जांच के लिए विशेष समितियां गठित की हैं, जबकि किसान मुआवजे और दोषी बीज कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
ICAR द्वारा विकसित नई उन्नत प्याज किस्में किसानों के लिए बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफे का अवसर लेकर आई हैं. इन किस्मों में 324 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज, 6 महीने तक भंडारण क्षमता तथा प्रमुख रोगों और कीटों के प्रति बेहतर सहनशीलता जैसी विशेषताएं हैं, जिससे विभिन्न जलवायु क्षेत्रों के किसानों को लाभ मिलेगा.
महाराष्ट्र सरकार ने प्याज की गिरती कीमतों से निपटने और किसानों को राहत देने के लिए विशेषज्ञ उपसमिति बनाई है. समिति कीमत गिरने के कारणों, निर्यात नीति के असर और प्याज वैल्यू चेन की समीक्षा करेगी. रिपोर्ट 15 दिन में सरकार को सौंपी जाएगी.
महाराष्ट्र के प्याज किसानों ने नाफेड और एनसीसीएफ की खरीद प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता की मांग उठाई है. किसान संगठन ने खरीद का दैनिक ब्योरा सार्वजनिक करने, कम दाम पर प्याज बेच चुके किसानों को राहत देने और स्थायी मूल्य सुरक्षा तंत्र बनाने की मांग की है.
महाराष्ट्र में ₹1235 प्रति क्विंटल प्याज खरीद रेट को लेकर किसान संगठन भड़क गया है. भारत दिघोले ने इसे किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताया है. संगठन ने सरकार से कम से कम ₹3000 प्रति क्विंटल रेट और कम दाम पर फसल बेच चुके किसानों को मुआवजा देने की मांग की है.
महाराष्ट्र के प्याज किसानों को बड़ी राहत मिली है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने NAFED के जरिए 12.35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज खरीदी शुरू करने का ऐलान किया. वहीं गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए भी केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर रास्ता निकालने का भरोसा दिया.
महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पहले चरण में 813.93 करोड़ रुपये का मुआवजा मंजूर हुआ है, जो राज्य में सबसे अधिक है. बेमौसम बारिश से हुए नुकसान के बीच यह राहत लाखों किसानों के लिए अहम मानी जा रही है.
महाराष्ट्र सरकार ने बदलते जलवायु हालात और बढ़ती महंगाई के बीच फसलों की असल लागत जानने के लिए बड़ा कदम उठाया है. चार कृषि विश्वविद्यालयों को फसल पैटर्न और लागत पर विस्तृत अध्ययन का निर्देश दिया गया है, जिससे किसानों के लिए सही मूल्य तय किया जा सके.
प्याज की कीमतों में गिरावट से किसान गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए हैं. लागत से कम दाम मिलने पर संगठन ने महायुति और MVA दोनों को जिम्मेदार ठहराते हुए सरकार से तुरंत हस्तक्षेप और राहत उपायों की मांग की है.
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