ICAR द्वारा विकसित नई उन्नत प्याज किस्में किसानों के लिए बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफे का अवसर लेकर आई हैं. इन किस्मों में 324 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज, 6 महीने तक भंडारण क्षमता तथा प्रमुख रोगों और कीटों के प्रति बेहतर सहनशीलता जैसी विशेषताएं हैं, जिससे विभिन्न जलवायु क्षेत्रों के किसानों को लाभ मिलेगा.
महाराष्ट्र सरकार ने प्याज की गिरती कीमतों से निपटने और किसानों को राहत देने के लिए विशेषज्ञ उपसमिति बनाई है. समिति कीमत गिरने के कारणों, निर्यात नीति के असर और प्याज वैल्यू चेन की समीक्षा करेगी. रिपोर्ट 15 दिन में सरकार को सौंपी जाएगी.
महाराष्ट्र के प्याज किसानों ने नाफेड और एनसीसीएफ की खरीद प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता की मांग उठाई है. किसान संगठन ने खरीद का दैनिक ब्योरा सार्वजनिक करने, कम दाम पर प्याज बेच चुके किसानों को राहत देने और स्थायी मूल्य सुरक्षा तंत्र बनाने की मांग की है.
महाराष्ट्र में ₹1235 प्रति क्विंटल प्याज खरीद रेट को लेकर किसान संगठन भड़क गया है. भारत दिघोले ने इसे किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताया है. संगठन ने सरकार से कम से कम ₹3000 प्रति क्विंटल रेट और कम दाम पर फसल बेच चुके किसानों को मुआवजा देने की मांग की है.
महाराष्ट्र के प्याज किसानों को बड़ी राहत मिली है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने NAFED के जरिए 12.35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज खरीदी शुरू करने का ऐलान किया. वहीं गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए भी केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर रास्ता निकालने का भरोसा दिया.
महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पहले चरण में 813.93 करोड़ रुपये का मुआवजा मंजूर हुआ है, जो राज्य में सबसे अधिक है. बेमौसम बारिश से हुए नुकसान के बीच यह राहत लाखों किसानों के लिए अहम मानी जा रही है.
महाराष्ट्र सरकार ने बदलते जलवायु हालात और बढ़ती महंगाई के बीच फसलों की असल लागत जानने के लिए बड़ा कदम उठाया है. चार कृषि विश्वविद्यालयों को फसल पैटर्न और लागत पर विस्तृत अध्ययन का निर्देश दिया गया है, जिससे किसानों के लिए सही मूल्य तय किया जा सके.
प्याज की कीमतों में गिरावट से किसान गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए हैं. लागत से कम दाम मिलने पर संगठन ने महायुति और MVA दोनों को जिम्मेदार ठहराते हुए सरकार से तुरंत हस्तक्षेप और राहत उपायों की मांग की है.
Pune में पिछले कुछ दिनों से हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने तरबूज की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है. जैविक खेती करने वाले किसानों की फसल लगभग पूरी तरह नष्ट हो गई है, जिससे उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है.
जालना जिले में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने फल बागान किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है. गाढेसावरगांव के किसान भागवत डोंगरे की केले, तरबूज और मौसंबी की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है. उत्पादन घटने और दाम गिरने से लाखों रुपये के नुकसान का अंदेशा है.
मराठवाड़ा में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हालात बिगड़ गए हैं, जहां 533 गांवों में बड़े पैमाने पर फसल नुकसान दर्ज किया गया है. 11,572 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है और हजारों किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं.
लातूर में तेज हवाओं और ओलावृष्टि ने रबी फसलों को नुकसान पहुंचाया है, खासकर गेहूं, चना और ज्वार की कटाई के बीच यह झटका किसानों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है. प्रशासन ने प्रारंभिक तौर पर कई हेक्टेयर में नुकसान की बात कही है.
Banana Farming: महाराष्ट्र के केला उत्पादक जिलों में पनामा (TR4) फंगल बीमारी की आशंका के बाद सरकार अलर्ट हो गई है. जलगांव में मिले संकेतों के बाद विशेषज्ञों की संयुक्त समिति बनाई गई है जो वैज्ञानिक उपाय, किसान गाइडलाइन और जागरूकता अभियान की रणनीति तैयार करेगी.
महाराष्ट्र में ई-क्रॉप बुवाई पंजीकरण के दौरान नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे किसानों को बड़ी राहत मिलने वाली है. सरकार ने अब ऐसी सुविधा शुरू की है जिससे किसान बिना इंटरनेट के भी अपनी खड़ी फसल की फोटो लेकर रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे.
महाराष्ट्र सरकार बांस की खेती और उससे जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना बना रही है. अटल बांस समृद्धि योजना के तहत किसानों को आर्थिक मदद दी जा रही है और बांस उत्पादों के लिए बाजार समर्थन की तैयारी भी है. इससे ग्रामीण रोजगार और पारंपरिक कारीगरों को नई ताकत मिलने की उम्मीद है.
महाराष्ट्र में बड़ी मात्रा में कपास अब भी किसानों के पास है और खरीद बंद होने का खतरा बढ़ रहा है. इसी बीच मुख्यमंत्री ने केंद्र से CCI खरीद अवधि बढ़ाने की मांग कर किसानों को राहत देने का प्रयास किया है.
महाराष्ट्र में अंगूर के बागों के रजिस्ट्रेशन में 28 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे इस साल भारत से अंगूर के एक्सपोर्ट और लोकल सप्लाई दोनों घटने की आशंका है. एक्सपर्ट्स मई-जून की भारी बारिश को इसकी बड़ी वजह बता रहे हैं, जबकि नासिक जैसे प्रमुख अंगूर हब में उत्पादन और एक्सपोर्ट पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है.
महाराष्ट्र के प्याज किसानों के लिए खुशखबरी है. दरअसल, सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी से अक्टूबर 2025 के बीच मौसम की मार से लाखों हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई है. इस संकट से निपटने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने प्रभावित किसानों को मुआवजे के तौर पर 809 करोड़ रुपये की मदद जारी की है.
खरीफ मार्केटिंग सीजन 2025-26 के तहत धान, मक्का, ज्वार और रागी की सरकारी खरीद के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की समय सीमा बढ़ाने का फैसला.
Fruit Crop Insurance: महाराष्ट्र सरकार ने मौसम आधारित फल फसल बीमा योजना की पंजीकरण तिथि 15 दिसंबर तक बढ़ा दी है. विस्तारित अवधि में भी केंद्र की प्रीमियम हिस्सेदारी लागू रहेगी और सभी किसानों को इसमें शामिल होने का मौका मिलेगा. जानिए किन फसलों पर बीमा का लाभ मिलेगा...
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