महाराष्ट्र के प्याज किसानों के लिए खुशखबरी है. दरअसल, सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी से अक्टूबर 2025 के बीच मौसम की मार से लाखों हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई है. इस संकट से निपटने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने प्रभावित किसानों को मुआवजे के तौर पर 809 करोड़ रुपये की मदद जारी की है.
खरीफ मार्केटिंग सीजन 2025-26 के तहत धान, मक्का, ज्वार और रागी की सरकारी खरीद के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की समय सीमा बढ़ाने का फैसला.
Fruit Crop Insurance: महाराष्ट्र सरकार ने मौसम आधारित फल फसल बीमा योजना की पंजीकरण तिथि 15 दिसंबर तक बढ़ा दी है. विस्तारित अवधि में भी केंद्र की प्रीमियम हिस्सेदारी लागू रहेगी और सभी किसानों को इसमें शामिल होने का मौका मिलेगा. जानिए किन फसलों पर बीमा का लाभ मिलेगा...
महाराष्ट्र में सोयाबीन के गिरते दामों ने किसानों की कमर तोड़ दी है. एमएसपी 5328 रुपये होने के बावजूद बाजार में 4000–4400 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव मिलने से किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे. खरीद केंद्रों की कमी, बारिश से नुकसान और व्यापारियों की मनमानी के चलते किसान भारी आर्थिक संकट झेल रहे हैं और कई खेती छोड़ने की बात कह रहे हैं.
महाराष्ट्र में मई–जून की रिकॉर्ड बारिश ने 60–70 हजार अंगूर किसानों की कमर तोड़ी. 2026 तक फल न आने की आशंका, 2027 की फसल भी अनिश्चित.
एक कपास विशेषज्ञ ने बताया कि महाराष्ट्र में कपास की खेती पिछले चार वर्षों में लगभग 4.59 लाख हेक्टेयर कम हो गई है, क्योंकि अधिक मजबूरी लागत और मशीनीकरण की कमी के कारण किसान सोयाबीन की खेती की ओर रुख कर रहे हैं.
महाराष्ट्र के जालना जिले में किसान भगवान गावंडे ने 9 साल की मेहनत से लगाए 1400 सीताफल के पेड़ों को जेसीबी से नष्ट कर दिया. गावंडे ने अपनी सीताफल की बाग को बचाने की बहुत कोशिश की लेकिन कुछ कारणों से परेशान किसान ने यह कदम उठाया.
जालना जिले के किसान बालासाहेब सखाराम बोबडे की लगभग 3 एकड़ गन्ने की फसल, जबकि दहिगव्हाण के किसान अण्णासाहेब तुलसीराम नाईकवाडे की करीब साढ़े 7 एकड़ फसल आग में पूरी तरह नष्ट हो गई.
खराब मौसम, एक्सपोर्ट पॉलिसी में बदलाव और कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव से प्याज की खेती संकट में है. महाराष्ट्र के किसान संगठनों ने सरकार से प्याज को भी एमएसपी फ्रेमवर्क में शामिल करने की मांग की है ताकि उन्हें स्थिर दाम और सुरक्षा मिल सके.
महाराष्ट्र के वाशिम जिले की उपज मंडियों में किसान बारिश से बची हुई सोयाबीन बेचने पहुंचे. 3 से 4 हजार रुपये प्रति क्विंटल के भाव से फसल बिक रही है, लेकिन लागत भी नहीं निकल पा रही. किसानों ने सरकार से कहा — "अगर सही दाम मिल जाए तो कर्ज माफी की जरूरत ही नहीं पड़े."
महाराष्ट्र के जालना जिले में किसान शंकर गाडेकर ने सात साल की मेहनत से लगाए 400 सीताफल के पेड़ों को जेसीबी से नष्ट कर दिया. लगातार घाटे, कीट प्रकोप और बाजार में गिरती कीमतों से परेशान किसान ने यह कदम उठाया.
बेमौसम बारिश से फसल चौपट, किसानों में निराशा. एक ओर बच्चू कडू का आंदोलन, दूसरी ओर खेतों में जल रही मेहनत. विदर्भ के हालात दिखा रहे हैं कि मौसम, बाजार और मुआवजे के बीच किसान कैसे पिस रहा है.
नासिक, धुले, अहमदनगर समेत छह जिलों में प्याज की नर्सरियां बरबाद. किसान संघ ने सरकार से राहत पैकेज, मुफ़्त बीज और ‘भावांतर योजना’ लागू करने की मांग की.
जालना के पिंपलगांव रेणुकाई गांव के किसान रावसाहेब खोमणे ने 23 साल पुराने चीकू के बाग को प्राकृतिक आपदाओं और घटते दामों से परेशान होकर काट डाला. लाखों का नुकसान झेल रहे किसान ने कहा कि लगातार संकटों और बढ़ते खर्च ने उनकी खेती पूरी तरह चौपट कर दी.
बिजली तारों में शॉर्ट सर्किट के कारण भड़की आग ने लाखों रुपये की फसल राख कर दी. किसानों ने विद्युत तारों के रखरखाव की मांग की. इस हादसे में किसी के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन किसानों में भारी हताशा है.
Hingoli farmer protest: महाराष्ट्र सरकार द्वारा घोषित 31,628 करोड़ के राहत पैकेज को बताया नाकाफी, किसानों ने कहा— “जख्मों पर नमक छिड़क रही है सरकार.”
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा कि पीएम मोदी मुंबई दौरे के दौरान बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए राहत पैकेज घोषित करें. राउत ने कहा कि किसानों के लिए दिल्ली से ही मदद का ऐलान हो जाना चाहिए था.
महाराष्ट्र सरकार ने खरीफ सीजन फसल सर्वेक्षण की समयसीमा 31 अक्टूबर तक बढ़ाई है. भारी बारिश और आपदाओं के कारण पहले इसे 30 सितंबर तक बढ़ाया गया था. राजस्व मंत्री ने कलेक्टरों को प्रतिदिन निगरानी व 100% सर्वे पूरा करने के निर्देश दिए है.
महाराष्ट्र सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि हाल ही में हुई भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित किसानों और नागरिकों के बैंक खातों में अगले तीन से चार दिनों में वित्तीय सहायता हस्तांतरित कर दी जाए. एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है. इससे पहले मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि प्रारंभिक अनुमान के अनुसार बारिश और बाढ़ से राज्य में 60 लाख हेक्टेयर भूमि को नुकसान पहुंचा है.
मराठवाड़ा में अतिवृष्टि से फसलें चौपट होने पर किसानों ने संभाजीनगर में जोरदार मोर्चा निकाला. CPI और किसान संगठनों ने कर्ज माफी और प्रति एकड़ 50 हजार रुपये मुआवजा मांगते हुए सरकार पर दबाव बनाया. प्रदर्शनकारियों और पुलिस में धक्का-मुक्की भी हुई.
महाराष्ट्र में भारी बारिश और बाढ़ से हिंगोली, बीड, लातूर, जालना व संभाजीनगर के किसानों की कपास, सोयाबीन, गन्ना व मक्का जैसी फसलें चौपट हो गईं. गोदावरी नदी उफान पर है और जायकवाड़ी डैम से पानी छोड़ने से हालात बिगड़े. किसान अब सरकार से राहत की उम्मीद कर रहे हैं.
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