
Turmeric Farmingखेती में लगातार हो रहे बदलाव और मौसम की मार को देखते हुए कृषि क्षेत्र में कई नए काम किए जा रहे हैं. ऐसे में अब कृषि वैज्ञानिक भी खेती में अधिक उपज के लिए फसलों की नई किस्मों को तैयार कर रहे हैं, जो कम पानी, गर्मी पाला या अन्य चुनौतियों में भी अच्छा उत्पादन दे सकें. इसी दिशा में ICAR-भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान, कोझीकोड ने हल्दी की एक नई और उन्नत किस्म को विकसित किया है. इस किस्म का नाम 'प्रगति' है. ये किस्म न सिर्फ उच्च उपज देने वाली है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को झेलने में भी सक्षम है. ऐसे में आइए जानते हैं इसकी खासियत क्या-क्या है.
ICAR द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 'प्रगति' हल्दी की एक खास वैरायटी है. यह किस्म किसानों के लिए कई मायनों में फायदेमंद मानी जा रही है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि फसल सिर्फ 180 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को जल्दी कटाई और कम समय में मुनाफा मिल सकता है. यह किस्म नेमाटोड जैसे हानिकारक कीटों के प्रति भी काफी हद तक प्रतिरोधी है, जिससे फसल को कम नुकसान होता है और पौधे ज्यादा स्वस्थ रहते हैं. इसके अलावा इसमें करक्यूमिन की मात्रा करीब 5.55 प्रतिशत है, जो हल्दी की क्वालिटी और बाजार कीमत को बढ़ाती है. वहीं, इसमें 13 प्रतिशत तक ओलियोरेसिन पाया जाता है, जिससे यह प्रोसेसिंग और निर्यात के लिए भी बेहद उपयुक्त मानी जा रही है. साथ ही ये किस्म केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में खेती के लिए बेस्ट मानी जाती है.

हल्दी की बुवाई के लिए सबसे पहले खेत की जुताई करके उसे तैयार कर लें. साथ ही हल्दी के लिए खेत की तैयारी के समय 75 क्विंटल नाडेप खाद या 200-250 क्विंटल सड़ी हुई गोबर की खाद के साथ 120 किलो नाइट्रोजन, 80 किलो फास्फोरस और 80 किलो पोटाश बुवाई से पहले अंतिम जुताई के समय प्रति हेक्टेयर की दर से मिट्टी में मिला लें. अब बात करें पौधों से पौधों की दूरी कि तो हल्दी की बुआई 40×20 सें.मी. की दूरी पर करनी चाहिए. इसके अलावा ये ध्यान रखें कि प्रकंद को 4 सेंमी. की गहराई में ही बुवाई करें. साथ ही बुवाई से पहले हल्दी के 20-25 ग्राम के टुकड़ों को कॉपर ऑक्सीक्लोराइड के 0.3 प्रतिशत के घोल में उपचारित करने के बाद ही बुवाई करनी चाहिए.
हल्दी एक सुपरफूड है, जिसमें मौजूद करक्यूमिन नामक सक्रिय तत्व के कारण इसमें जबरदस्त सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं. यह इम्यूनिटी बढ़ाने, जोड़ों के दर्द से राहत, पाचन में सुधार, त्वचा में निखार और खांसी-जुकाम में बेहद फायदेमंद है. इसे गर्म दूध या पानी के साथ लेना सबसे असरदार माना जाता है. हल्दी से कई तरह की औषधियां भी तैयार की जाती हैं. वही आजकल हल्दी का इस्तेमाल कई ब्यूटी प्रोडक्ट में भी किया जा रहा है.
खेत के अलावा आप बगीचे में भी हल्दी की खेती कर सकते हैं. इसके लिए आपको मेड़ बनाकर हल्दी की बुवाई करनी चाहिए. मेड़ तैयार होने के बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए. इसके बाद बीज या पौधे को थोड़ी दूरी पर लगाना चाहिए. वहीं, सीतापुर किस्म की हल्दी की खेती को छायादार जगह पर करना चाहिए. इसके लिए आप आम या अमरूद के बागानों में इंटर क्रॉप के तौर पर हल्दी की खेती कर सकते हैं. वहीं, किसान हल्दी की खेती करके अच्छी कमाई भी कर सकते हैं.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today