बिहार में पहली बार मखाना की फसल पर फॉल आर्मी वर्म का हमला, वैज्ञानिकों ने जारी की चेतावनी

बिहार में पहली बार मखाना की फसल पर फॉल आर्मी वर्म का हमला, वैज्ञानिकों ने जारी की चेतावनी

बिहार में पहली बार मखाना की फसल पर फॉल आर्मी वर्म (Spodoptera frugiperda) के प्रकोप की पुष्टि हुई है. मधुबनी और दरभंगा जिलों में इस कीट के कारण मखाना की खेती को गंभीर खतरा पैदा हो गया है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के वैज्ञानिकों ने किसानों को सतर्क रहते हुए खरपतवार नियंत्रण, सीमा क्षेत्रों की निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर अनुशंसित कीटनाशकों के उपयोग की सलाह दी है. समय रहते नियंत्रण न किया गया तो मखाना उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है.

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बिहार में पहली बार मखाना की फसल पर फॉल आर्मी वर्म का हमला, वैज्ञानिकों ने जारी की चेतावनीमखाना पर कीटों का हमला, खतरे में फसल (AI जनरेटेड इमेज)

मखाना, जो अपने औषधीय और खनिज गुणों के कारण विश्व स्तर पर सुपर फूड के तौर पर अपनी पहचान रखता है, इसकी खेती अन्य फसलों की तुलना में काफी कठिन मानी जाती है. यह माना जाता रहा है कि मखाना में रोगों का खतरा कम रहता है, लेकिन पहली बार ऐसा देखने को मिला है कि मखाना की फसल पर भी कीटों और बीमारियों का खतरा बढ़ा है. पहली बार मखाना की फसल पर फॉल आर्मी वर्म (Spodoptera frugiperda) के प्रकोप की सूचना मिली है. वहीं, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा समस्तीपुर के वैज्ञानिकों द्वारा मखाना की फसल पर लगने वाले इस रोग को लेकर किसानों को सुझाव दिए गए हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि अभी तक यह रोग धान, मक्का सहित अन्य फसलों पर देखने को मिलता था, लेकिन पहली बार मखाना पर भी इसका प्रकोप देखने को मिला है. 

8 साल पहले दिखा था फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा समस्तीपुर के वैज्ञानिकों ने बताया कि बिहार में पहली बार मखाना फसल पर फॉल आर्मी वर्म (Spodoptera frugiperda) के प्रकोप की सूचना मिली है. वैसे भारत में इस कीट की मौजूदगी सन 2018 में मक्का की फसल में दर्ज की गई थी. उसके बाद इसका प्रकोप धान और अन्य फसलों पर भी नजर आया. वहीं, अब यह कीट बिहार में मखाना की फसल को भी तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है.

इन जिलों में फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप

मखाना की फसल में फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप हाल के समय में मधुबनी जिले के अंकुशी वार्ड, लखनौर ईस्ट ब्लॉक, ओक्सी ग्राम में दर्ज किया गया. गौरतलब हो कि मधुबनी जिले में करीब 80 एकड़ से अधिक क्षेत्र में किसान मखाना की खेती कर रहे हैं. वहीं, दरभंगा जिले के पोखराम गांव में भी मखाना की फसल पर फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप देखने को मिल रहा है. कृषि वैज्ञानिकों ने इस रोग को गंभीर खतरा बताते हुए किसानों को तत्काल सतर्क रहने की सलाह दी है.

कितना खतरनाक है फॉल आर्मी वर्म

केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा समस्तीपुर के सहायक प्राध्यापक डॉ. ध्रुव सिंह कहते हैं कि यह कीट शुरू में खेत या तालाब के किनारे के पौधों से हमला शुरू करता है और धीरे-धीरे पूरी फसल में तेजी से फैल जाता है. इस कीट की दूसरी और तीसरी अवस्था की इल्ली पत्तियों को तेजी से नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. पत्तियों में छेद और खुरचन इसके प्रमुख लक्षण हैं. 

उन्होंने आगे बताया कि किसानों को तालाब और खेत के आसपास उगी खरपतवार की नियमित सफाई करने और सीमा क्षेत्र (बॉर्डर प्लांट्स) की विशेष निगरानी रखने की जरूरत है. वहीं, प्रबंधन के लिए खेत की मेड़ों/सीमाओं के चारों ओर प्लास्टिक शीट लगाना लाभकारी और कीट प्रकोप रोकने में कारगर होगा. वहीं, 10–20 प्रतिशत पौधों पर प्रकोप दिखाई देने पर फसल सुरक्षा के लिए तुरंत नियंत्रण उपाय अपनाना आवश्यक है.

किसान इन दवाओं का करें उपयोग

डॉ. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय की प्राध्यापक डॉ. पुष्पा सिंह ने किसानों को कीट के रासायनिक नियंत्रण के लिए अत्यंत आवश्यकता होने पर स्पिनेटोराम 11.7% SC या थायमेथोक्साम 12.6% + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 9.5% @ 0.5 मि.ली. प्रति लीटर पानी या क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल 18.5% SC @ 0.3 मि.ली. प्रति लीटर पानी में छिड़काव की सलाह दी है. 

यह कीट तेजी से फैलने की क्षमता रखता है, इसलिए समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो व्यापक नुकसान हो सकता है. आगे उन्होंने कहा कि मखाना फसल से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या या कीट प्रकोप की स्थिति में किसान भाई निकटतम कृषि वैज्ञानिकों/कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें.

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