Wheat Crop Insurance: हिमाचल प्रदेश सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे रबी 2025-26 के लिए गेहूं फसल का बीमा 15 दिसंबर तक अवश्य कराएं. हमीरपुर में हुई बैठक में योजना की प्रगति की समीक्षा की गई. पढ़ें योजना पर क्या चर्चा हुई...
अंतर्राष्ट्रीय लवी मेला किन्नौर के किसानों को बेहतर व्यापारिक मंडी साबित हो रहा है. इस बार किन्नौर मार्केट के सैकड़ों किसान अपने उत्पादों के आशानुरूप दाम मिलने से बहुत खुश हैं. मेले के दौरान किन्नौर मार्किट में ही दो करोड़ से अधिक के सूखे मेवो का व्यापार हुआ है.
हिमाचल प्रदेश में कुल्लू-मनाली के सेब उद्योग पर मौसम का कहर टूटा. संपर्क मार्ग बंद होने और टूटी सड़कों के कारण सेब उत्पादक परेशान. सेब तैयार है, लेकिन खरीदार नहीं, करोड़ों का नुकसान. हिमाचल के कई हिस्सों में किसानों पर टूटी आपदा.
कुल्लू-मनाली के सेब बागवान इस बार बाढ़, भूस्खलन और बंद सड़कों की वजह से भारी संकट में हैं. मंडियों तक रास्ता न होने से लाखों पेटियां गोदामों में सड़ रही हैं. सेब का भाव 40-50 रुपये किलो तक गिर गया है और किसान, व्यापारी व मज़दूर सभी गहरी परेशानी झेल रहे हैं.
सोलन का टमाटर दिल्ली एनसीआर तक आता है. सोलन का टमाटर अगर महंगा हो तो दिल्ली में भी महंगाई दिखती है. इसके साथ ही अगर सोलन में टमाटर खराब हो तो उसका असर दिल्ली तक दिखता है. अभी ऐसा ही देखने को मिल रहा है.
हिमाचल प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गेहूं, हल्दी, मक्का और जौ जैसी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद कर रही है. चालू वित्त वर्ष में 838 किसानों से 2,123 क्विंटल गेहूं की खरीद कर 1.31 करोड़ रुपये का भुगतान DBT के माध्यम से किया गया, जिसमें 4.15 लाख रुपये की परिवहन सब्सिडी शामिल है. राज्य ने अन्य फसलों का भी भुगतान किया है. पढ़ें डिटेल...
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष 2,123 क्विंटल प्राकृतिक रूप से उगाया गया गेहूं खरीदा है. इसके साथ ही चंबा जिले के पांगी मंडल को राज्य का प्राकृतिक कृषि मंडल घोषित किया गया है. इतना ही नहीं सरकार ने 6 जिलों के किसानों से 1,270 क्विंटल प्राकृतिक रूप से उगाई गई कच्ची हल्दी भी खरीदी है.
Himachal Apple Tree Felling Row: हिमाचल में सेब लदे पेड़ों की कटाई को लेकर सीएम सुक्खू ने कहा कि सरकार पेड़ काटने के पक्ष में नहीं है. हाईकोर्ट से आग्रह किया जाएगा कि सेब की फसल की नीलामी के लिए समय दे. जल्द ही कानूनी विकल्पों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई जाएगी.
Apple Farmers Protest: हिमाचल के कोटखाई में अवैध कब्जे पर लगे सेब के पेड़ों की कटाई से किसानों में रोष है. हाईकोर्ट के आदेश के बाद वन विभाग ने कार्रवाई शुरू की, जिस पर किसान 26 जुलाई को सचिवालय घेराव की चेतावनी दे रहे हैं.
हिमाचल सेब उत्पादक संघ ने वन भूमि पर सेब के पेड़ काटने की कार्रवाई का विरोध किया है. संघ ने राज्य सरकार से हस्तक्षेप कर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की मांग की, यह तर्क देते हुए कि सेब की जड़ प्रजाति वनस्पति से जुड़ी है.
Apple Diseases: यह बीमारी तेजी से फैल रही है और इससे बागवानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है. मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार फल उत्पादकों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुलझाएगी. उन्होंने कहा कि सेब उत्पादन राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और सरकार हर संभव मदद देगी.
Cherry Farming: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में इस साल अनियमित मौसम के कारण चेरी उत्पादन में भारी गिरावट आई है. फागू, ठियोग, कंडियाली और नारकंडा जैसे क्षेत्रों के किसानों को उम्मीद के मुकाबले बहुत कम पैदावार मिली है. हालांकि बाजार में चेरी 400 से 600 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है, लेकिन किसानों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो गया है.
Apple Farming: हिमाचल प्रदेश सरकार ने अब सेब पेटियों की अनुमानित संख्या का आंकड़ा जारी न करने का फैसला किया है, जिससे बाजार पर असर न पड़े और किसानों को नुकसान न हो. बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने बैठक में बताया कि अगले साल से वैज्ञानिक तरीके से आंकड़े जुटाए जाएंगे और दो उप समितियां भी बनाई गई हैं.
हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को उपज का तगड़ा दाम दिया जा रहा है. प्राकृतिक रूप से उगे गेहूं पर राज्य सरकार 60 रुपये प्रति किलो और कच्ची हल्दी पर 90 रुपये प्रति किलोग्राम का भाव दे रही है. इसके लिए किसानों को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है. इसके लिए सरकार विशेष अभियान चला रही है.
हिमाचल में आज से प्राकृतिक खेती से उगाए गए गेहूं और हल्दी की खरीद शुरू हो गई है. सरकार ने इसके लिए कुल 32 केंद्र बनाए है और उपज खरीद पर लिमिट लगाई है. एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्राकृतिक गेहूं के लिए 60 रुपये प्रति किलोग्राम और हल्दी के लिए 90 रुपये प्रति किलोग्राम एमएसपी तय किया गया है.
बिलासपुर जिले में आंधी, तूफान और ओलावृष्टि ने फलों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया. 250 हेक्टेयर में फसलों को हुआ नुकसान अधिकारियों ने बताया कि 250 हेक्टेयर में लगी फसलें बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे 112 बागवान प्रभावित हुए हैं. बागवानी विभाग अभी भी नुकसान का आकलन कर रहा है, जबकि बागवानों ने नुकसान का अनुमान 52 लाख रुपये लगाया है.
Woman Farmer Success Story: अनीता अब अपने खेती के मॉडल को और आगे बढ़ाने की योजना बना रही हैं. वे चाहती हैं कि हिमाचल प्रदेश में जैविक खेती एक आंदोलन बने, जिससे किसान अपनी जमीन की उर्वरता बनाए रखते हुए बेहतर आमदनी कमा सकें.
हिमाचल प्रदेश का किन्नौर अपने पारंपरिक उत्पाद सूखे मेवों के लिए जाना जाता है, लेकिन अब किसान सेब की खेती की ओर रूख कर रहे हैं. यही वजह है कि अब सूखे मेवों का उत्पादन गिर गया है और कीमतों में वृद्धि हो गई. इस कारण से लोग इसे खरीदने से बच रहे हैं.
हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ सालों में किसानों ने तेजी से प्राकृतिक खेती में रुचि दिखाई है. यही वजह है कि यहां इस साल 1.94 लाख किसान 34,342 हेक्टेयर जमीन पर प्राकृतिक रूप से खेती कर रहे हैं. राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने इसके लिए राज्य के प्रयासों की सराहना की है.
बारिश के कारण खेतों में तैयार टमाटर फटकर खराब हो रहे हैं. किसान बेबस होकर अपनी मेहनत की फसल बर्बाद होते देखने को विवश हैं. बारिश के कारण टमाटर की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान यही पर हुआ है जिससे किसान सन्न है.
एचपीएफसीएससी, धर्मशाला के क्षेत्र प्रबंधक स्वर्ण सिंह ने कहा कि किसानों को खरीद बिल बनाने के 24 घंटे के भीतर भुगतान मिल रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि मौसम में सुधार के साथ आने वाले दिनों में सभी केंद्रों पर खरीद में तेजी आएगी. इस बीच, एपीएमसी कांगड़ा के सचिव दीक्षित जरयाल ने कहा कि जिले में नामित खरीद केंद्रों पर विक्रेताओं को सर्वोत्तम संभव सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं.
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