
मध्य प्रदेश समेत देशभर के किसानों से दलहन, तिलहन और प्याज जैसी फसलों की खरीद करने वाली राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (NAFED) ने पिछले एक दशक में अपनी खरीद क्षमता और कारोबार में बड़ा विस्तार किया है. किसान तक से विशेष बातचीत में NAFED के निदेशक अशोक ठाकुर ने बताया कि वर्ष 2014 से पहले जहां NAFED केवल 1.25 लाख मीट्रिक टन दलहन की खरीद करता था, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 76 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है. इससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी उपज बेचने के अधिक अवसर मिल रहे हैं.
अशोक ठाकुर ने बताया कि पहले NAFED के पास प्याज के भंडारण की क्षमता सीमित थी, लेकिन अब संगठन ने अपनी बफर स्टॉक क्षमता बढ़ाकर 7 लाख टन कर ली है. सरकार की यह व्यवस्था बाजार में प्याज की कीमतों को नियंत्रित रखने और जरूरत पड़ने पर उपभोक्ताओं को राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
NAFED के निदेशक ने बताया कि मध्य प्रदेश के किसान बड़ी मात्रा में प्याज का उत्पादन करते हैं, लेकिन यहां की प्याज लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रखी जा सकती.उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की प्याज लगभग 30 दिन तक ही स्टोर की जा सकती है, जबकि नासिक (महाराष्ट्र) की प्याज लगभग चार महीने तक सुरक्षित रहती है. वहीं राजस्थान की प्याज की स्टोरेज अवधि लगभग एक सप्ताह होती है.
उन्होंने कहा कि प्याज की भंडारण क्षमता उसके उत्पादन क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और पर्यावरणीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है.यही कारण है कि NAFED चाहकर भी मध्य प्रदेश से बड़े पैमाने पर प्याज की खरीद नहीं कर पाता, क्योंकि लंबे समय तक सुरक्षित भंडारण संभव नहीं हो पाता.
अशोक ठाकुर ने बताया कि NAFED अब केवल सरकारी खरीद एजेंसी नहीं रह गया है, बल्कि रिटेल कारोबार में भी तेजी से विस्तार कर रहा है. NAFED के उत्पाद अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध हैं और भारतीय रेलवे के माध्यम से भी उपभोक्ताओं तक पहुंच रहे हैं.
उन्होंने बताया कि NAFED ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी मौजूदगी मजबूत की है. संगठन के उत्पाद अब अमेरिका और दुबई जैसे विदेशी बाजारों तक पहुंच चुके हैं. वर्तमान में NAFED का कारोबार करीब 30,000 करोड़ रुपये का है, जिसे आने वाले समय में 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.
NAFED ने सामाजिक जिम्मेदारी की दिशा में भी एक नई पहल करने का फैसला किया है. अशोक ठाकुर ने बताया कि संगठन अपनी कुल कमाई का 1 प्रतिशत हिस्सा किसानों के बच्चों की शिक्षा पर खर्च करेगा, ताकि किसान परिवारों के बच्चे बेहतर शिक्षा प्राप्त कर आगे बढ़ सकें.उनका कहना है कि यह पहल किसानों के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी.