Fish Disease: एक मछली को हो जाए ये बीमारी तो पूरा तालाब चपेट में आ जाता है

Fish Disease: एक मछली को हो जाए ये बीमारी तो पूरा तालाब चपेट में आ जाता है

Fish Disease मछलियों के तालाब के पानी में जब अमोनिया, नाइट्राइट का लेवल बढ़ जाता हे. ऑक्सीजन की कमी होने लगती है और पानी का pH मान भी ऊपर-नीचे होने लगता है तो मछलियों में बीमारियों से लड़ने की ताकत कम हो जाती है. इसी तरह जब तालाब में जाल चलता है या फिर मछलियों के आपस में टकराने से चोट लगने पर भी अलसर बीमारी हो जाती है. 

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नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jul 31, 2026,
  • Updated Jul 31, 2026, 9:00 AM IST

किसी भी मछली पालक को जब ये पता चलता है कि उसकी मछलियों को अल्सर (लाल धब्बा) बीमारी हो गई है तो उसकी जान सूख जाती है. क्योंकि अल्सर संक्रमण वाली बीमारी है. अगर तालाब में एक मछली को हो गई तो फिर सभी मछलियों को अपनी चपेट में ले लेती है अगर वक्त रहते उपाय नहीं किया जाए. फिशरीज एक्सपर्ट की मानें तो तालाब का पानी प्रदूषि‍त होने और मछलियों को चोट लगने के चलते ये बीमारी हो जाती है. बरसात के दिनों में तालाब का पानी प्रदूषि‍त होना आम बात है. 

अगर अल्सर बीमारी वाली मछली बाजार में बिकने आ जाती है तो ऐसी मछली को खाने वाले भी बीमार हो सकते हैं. इसलिए समय-समय पर तालाब की सफाई बहुत जरूरी है. मछलियों का दाना गुणवत्ता वाला और संतुलित ही खिलाएं. बीमार मछलियों को तालाब से कर दें. तालाब के साइज के हिसाब से ही पानी में मछलियों की संख्याि रखें. तालाब में और दूसरी मछलियों को न पनपने दें. 

अल्सर की पहचान का तरीका

फंगस यानि फफूंद के चलते मछलियों के बीच अल्सर रोग जल्दी होता है. तालाब, टैंक में पाली जाने वाली मछलियों के साथ ही नदी में रहने वाली मछलियों में भी अल्सर रोग होता है. लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि खेत के पास बने तालाब में पलने वाली मछलियों में अल्सर होने की संभावना ज्यादा रहती है. इस बीमारी की पहचान मछलियों के शरीर पर खून जैसे लाल धब्बे हो जाते हैं. कुछ दिन बाद यही धब्बे  घाव बन जाते हैं और मछलियों की मौत हो जाती है. 

मछलियों में ऐसे रुकेगी अल्सर बीमारी

तालाब को किनारे से इतना ऊंचा उठा दे या बांध बना दें कि उसमे आसपास का गंदा पानी न जाए. खासतौर पर बारिश के मौसम में बरसात होने के बाद तालाब के पानी का पीएच लेवल जरूर चेक करते हैं. या फिर बारिश के दौरान तालाब के पानी में 200 किलो के करीब चूना भी मिलाया जा सकता है. 

अल्सर के इलाज का तरीका

अगर तालाब की कुछ मछलियों को अल्सर हो जाए तो उन्हें अलग कर दें. और अगर तालाब की ज्यादातर मछलियों में अल्सर बीमारी फैल गई है तो तालाब में कली का चूना जिसे क्विीक लाइम भी कहते हैं के ठोस टुकड़े डाल दें. एक्स‍पर्ट के मुताबिक प्रति एक हेक्टेयर के तालाब में कम से कम 600 किलो चूना डालें. चूने के साथ ही 10 किलो ब्लीचिंग पाउडर भी प्रति एक हेक्टेयर के हिसाब से डालें. इसके साथ ही लीपोटेशियम परमेगनेट का घोल भी प्रति एक हेक्टेयर के तालाब में एक लीटर तक ही डालें. 

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