
मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर मूंग की 100% खरीदी की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा का आंदोलन अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है. किसान पदयात्रा बुधवार को तीसरे दिन में प्रवेश कर गई है. दूसरे दिन राजधानी भोपाल पहुंचे किसानों को पुलिस ने वीर सावरकर सेतु के पास रोक दिया, जिसके बाद देर रात तक सरकार और किसान नेताओं के बीच लंबी वार्ता चली.हालांकि यह बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी.
बैठक में कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना, कृषि सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय (OSD) के साथ संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने मूंग की 100% MSP पर खरीदी, खाद की ई-टोकन व्यवस्था, फसल बीमा योजना, बिजली आपूर्ति और अन्य मांगों पर विस्तार से चर्चा की. सरकार ने किसानों की मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखने और जल्द निर्णय लेने का भरोसा दिया, लेकिन किसान नेताओं ने इसे पर्याप्त नहीं माना.
वार्ता बेनतीजा रहने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया है.किसान नेताओं ने प्रदेशभर के किसानों, उनके परिजनों, छात्रों और किसान परिवारों से जुड़े लोगों से भोपाल पहुंचने की अपील की है.उनका कहना है कि जब तक सरकार लिखित आदेश जारी नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
किसानों ने साफ कर दिया है कि आंदोलन के तीसरे दिन मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा. इसे देखते हुए राजधानी भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. मुख्यमंत्री आवास के आसपास पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती की गई है तथा कई इलाकों में बैरिकेडिंग कर दी गई है.
फिलहाल पुलिस प्रशासन ने किसान पदयात्रा को बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, होशंगाबाद रोड के पास रोक रखा है. इसके बावजूद किसान अपने आंदोलन को जारी रखते हुए मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की रणनीति पर कायम हैं. संयुक्त किसान मोर्चा का दावा है कि आज पहले से कहीं अधिक संख्या में किसान राजधानी पहुंचेंगे.
मूंग की 100% खरीदी MSP पर सुनिश्चित की जाए।
खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था में सुधार किया जाए।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को सरल और पारदर्शी बनाया जाए।
कृषि कार्य के लिए प्रतिदिन 10 घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जाए।
खेत सड़क योजना लागू कर खेतों तक पक्की सड़क बनाई जाए।
किसानों को अनुदान पर पर्याप्त विद्युत ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराए जाएं।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील समाप्त की जाए।
सभी फसलों की MSP पर खरीद की कानूनी गारंटी दी जाए तथा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार C2+50% फार्मूला लागू किया जाए।
राजधानी भोपाल में किसानों के इस बड़े आंदोलन ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार किसानों की मांगों पर क्या फैसला लेती है.यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है.