El Nino अलर्ट! तेलंगाना सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, ड्रिप सिंचाई पर भारी सब्सिडी देने की तैयारी

El Nino अलर्ट! तेलंगाना सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, ड्रिप सिंचाई पर भारी सब्सिडी देने की तैयारी

तेलंगाना में कम बारिश और अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है. एक्सपर्ट कमेटी ने किसानों को राहत देने के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पर 75 से 90 प्रतिशत सब्सिडी, सूखा-रोधी फसलों को बढ़ावा देने की सिफारिश की है.

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El Nino अलर्ट! तेलंगाना सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, ड्रिप सिंचाई पर भारी सब्सिडी देने की तैयारीअल नीनो का खतरा बढ़ा

तेलंगाना में इस साल कम बारिश और अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार की ओर से गठित एक्सपर्ट कमेटी ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. रिपोर्ट में किसानों को राहत देने, खेती बचाने और पानी की कमी से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं. इनमें ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पर 75 से 90 प्रतिशत तक सब्सिडी, सूखा सहन करने वाली फसलों को बढ़ावा, फसल लोन में राहत, बीजों पर सब्सिडी और पशुपालकों के लिए चारा बैंक बनाने जैसी सिफारिशें शामिल हैं.

अल नीनो क्या है और क्यों बढ़ी चिंता?

अल नीनो एक मौसम संबंधी घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाता है. इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है. भारत में अल नीनो के दौरान अक्सर मॉनसून कमजोर पड़ जाता है, जिससे बारिश कम होती है और खेती प्रभावित होती है. इसी खतरे को देखते हुए तेलंगाना सरकार ने स्टेट प्लानिंग बोर्ड के उपाध्यक्ष जी. चिन्ना रेड्डी की अध्यक्षता में एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी. कमेटी का काम अल नीनो के संभावित प्रभाव का अध्ययन करना और किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए राहत उपाय सुझाना था.

ड्रिप और स्प्रिंकलर पर 90% तक सब्सिडी

कमेटी ने पानी की बचत और फसलों को सुरक्षित रखने के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने की सिफारिश की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि किसानों को इन सिंचाई तकनीकों पर 75 से 90 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जानी चाहिए.  इसके लिए करीब 452.80 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रो इरिगेशन अपनाने से कम पानी में भी खेती की जा सकती है और सूखे की स्थिति में फसलों को बचाया जा सकता है.

राज्य में 30 प्रतिशत कम हुई बारिश

रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान सामान्य वर्षा 740.60 मिमी होती है. लेकिन 27 जुलाई तक राज्य में सामान्य 333.90 मिमी के मुकाबले केवल 234.80 मिमी बारिश दर्ज की गई. यानी इस अवधि में करीब 30 प्रतिशत कम बारिश हुई है. जिससे राज्य के 33 जिलों में से 26 जिले कम बारिश से प्रभावित हैं. इसका सीधा असर खेती पर पड़ा है. इस साल अब तक लगभग 74.56 लाख एकड़ क्षेत्र में बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक यह आंकड़ा 79.49 लाख एकड़ था.

धान की खेती सबसे ज्यादा प्रभावित

कम बारिश और सिंचाई के लिए पानी की कमी का सबसे ज्यादा असर धान की खेती पर पड़ा है. रिपोर्ट के अनुसार, इस बार धान की रोपाई सामान्य क्षेत्र के केवल 22.60 प्रतिशत तक ही हो सकी है. वहीं, राज्य में कपास की खेती लगभग 45 लाख एकड़ क्षेत्र में हुई है, जो सामान्य क्षेत्र का 94.91 प्रतिशत है. सोयाबीन की बुवाई 3.62 लाख एकड़ में हुई है, जो सामान्य क्षेत्र का 87.01 प्रतिशत है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों पर और अधिक असर पड़ सकता है.

सूखा सहन करने वाली फसलों को बढ़ावा

एक्सपर्ट कमेटी ने लगभग 32 लाख एकड़ क्षेत्र में सूखा सहन करने वाली फसलों की खेती को बढ़ावा देने की सिफारिश की है. इनमें दालें, तिलहन, मोटे अनाज, सब्जियां और चारा फसलें शामिल हैं. किसानों को इन फसलों के बेहतर बीज 75 प्रतिशत सब्सिडी पर उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया है. इसके लिए 330 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. कमेटी का मानना है कि कम पानी वाली फसलें अपनाने से किसानों का जोखिम कम होगा और उत्पादन भी बेहतर रहेगा.

किसानों को मिलेगा लोन और बीमा में राहत

एक्सपर्ट कमेटी ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए कई आर्थिक राहत उपाय भी सुझाए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन किसानों ने पहले से फसल लोन लिया है, उनके लोन का पुनर्निर्धारण (री-शेड्यूलिंग) किया जाए. वहीं जो किसान वैकल्पिक या आपातकालीन फसलें बोना चाहते हैं, उन्हें नए फसल लोन आसानी से उपलब्ध कराए जाएं. इसके अलावा फसल बीमा को बढ़ावा देने और बीमा प्रीमियम का 75 प्रतिशत हिस्सा सरकार की ओर से देने की भी सिफारिश की गई है.

पशुपालकों के लिए भी राहत की तैयारी

कमेटी ने केवल किसानों ही नहीं बल्कि पशुपालकों के लिए भी कई सुझाव दिए हैं. रिपोर्ट में चारा बैंक स्थापित करने, सब्सिडी पर चारे के बीज उपलब्ध कराने, चारा उत्पादन बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर पशु शिविर लगाने की सिफारिश की गई है. इसके अलावा भेड़ पालन करने वाले किसानों के लिए पर्याप्त चरागाह वाले क्षेत्रों तक पहुंच बनाने और चारे की व्यवस्था करने का भी सुझाव दिया गया है.

802.92 करोड़ रुपये की जरूरत

एक्सपर्ट कमेटी ने अपनी सभी सिफारिशों को लागू करने के लिए लगभग 802.92 करोड़ रुपये के विशेष बजट का प्रस्ताव दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन उपायों को समय पर लागू करने के लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय और पर्याप्त वित्तीय सहायता जरूरी होगी. साथ ही कमेटी ने हर गांव में निगरानी समिति बनाने का भी सुझाव दिया है. यह टीम फसलों की स्थिति, पीने के पानी की उपलब्धता, पशुओं के चारे, और राहत कार्यों की नियमित निगरानी करेगी.

इसके अलावा हैदराबाद के आसपास डेयरी यूनिट स्थापित करने के लिए ग्रामीण युवाओं को आर्थिक सहायता देने और सब्जियों और फूलों की खेती को बढ़ावा देने की भी सिफारिश की गई है. एक्सपर्ट का मानना है कि अगर सरकार समय रहते इन सुझावों को लागू करती है, तो अल नीनो और कम बारिश के बावजूद किसानों का नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता है. (PTI)

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