
मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 100 प्रतिशत मूंग खरीदी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है.होशंगाबाद (नर्मदापुरम) से पैदल मार्च करते हुए निकले 3,000 से अधिक किसान लगातार तीसरे दिन भोपाल में मुख्यमंत्री आवास के पास डटे हुए हैं. संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में किसान तब तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, जब तक सरकार उनकी 100 प्रतिशत मूंग खरीदी की मांग स्वीकार नहीं कर लेती.
इधर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से गठित चार सदस्यीय मंत्रियों की समिति ने किसान प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की, लेकिन बातचीत बेनतीजा रही. इसके बाद आंदोलन और तेज हो गया.
आंदोलन के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयान ने पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया.उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार मध्य प्रदेश के लिए मूंग खरीदी का कोटा और नहीं बढ़ा सकती, क्योंकि राज्य को पहले ही देश में सबसे अधिक स्वीकृति दी जा चुकी है.
शिवराज सिंह चौहान ने कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना के पत्र के जवाब में कहा कि ग्रीष्मकालीन मौसम 2025-26 के लिए मध्य प्रदेश को 4,54,580 मीट्रिक टन मूंग खरीदने की स्वीकृति पहले ही दी जा चुकी है. यह पूरे देश में पीएम-आशा योजना के तहत स्वीकृत 5,23,243 मीट्रिक टन मूंग खरीद का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा है, जो किसी भी राज्य को दी गई सबसे बड़ी स्वीकृति है.
केंद्रीय मंत्री ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार राज्यों को किसी प्रकार का "खरीदी लक्ष्य" तय करके नहीं देती. उन्होंने कहा कि PM-AASHA (पीएम-आशा) योजना के तहत मूल्य समर्थन योजना (PSS) में अधिकतम 25 प्रतिशत उत्पादन तक खरीद की व्यवस्था है और उसी के अनुरूप राज्यों को स्वीकृति दी जाती है.
पत्र में बताया गया कि इस वर्ष देशभर में कुल 5,23,243 मीट्रिक टन मूंग खरीद की स्वीकृति दी गई है, जिसमें—
यानी कुल स्वीकृत खरीद में सबसे बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश को ही मिला है.
शिवराज सिंह चौहान ने अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि पीएम-आशा योजना के तहत निर्धारित सीमा से अधिक खरीदी की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की होती है.यदि राज्य चाहे तो अपने बजट से किसानों की अतिरिक्त मूंग खरीद सकता है.
इसी बिंदु को लेकर अब राजनीतिक और किसान संगठनों के बीच बहस तेज हो गई है.किसानों का कहना है कि पिछले वर्ष मध्य प्रदेश सरकार ने अपने संसाधनों से अतिरिक्त मूंग खरीदी थी, इसलिए इस बार भी सरकार ऐसा कर सकती है.
केंद्रीय मंत्री के बयान के बाद आंदोलनकारी किसानों में नाराजगी और बढ़ गई है. मुख्यमंत्री आवास के बाहर किसान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं.
किसानों का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रही हैं, जबकि नुकसान किसानों का हो रहा है. उनका कहना है कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार है, तब भी किसान अपनी फसल बेचने के लिए सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर है.
मध्य प्रदेश में MSP पर 100% मूंग खरीदी की मांग को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता के बाद बड़ा फैसला लिया गया है. सरकार ने तत्काल प्रभाव से ई-टोकन व्यवस्था स्थगित करने के साथ प्रति एकड़ 3 क्विंटल मूंग खरीदी का निर्णय लिया है। साथ ही, उच्च स्तरीय समिति की सिफारिश के बाद आगे की नीति तय की जाएगी.