
मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 100% मूंग खरीदी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी है. संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में हजारों किसान राजधानी भोपाल पहुंच चुके हैं और मुख्यमंत्री आवास के घेराव की मांग पर अड़े हुए हैं. आंदोलन के चलते भोपाल और नर्मदापुरम के बीच कई मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ है, जबकि राजधानी में भारी पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
आंदोलन की सबसे अलग तस्वीर यह है कि किसानों ने सड़क को ही अपना अस्थायी ठिकाना बना लिया है.कहीं तंबू लगाए गए हैं तो कहीं खुले आसमान के नीचे चूल्हे जल रहे हैं। किसान सड़क किनारे ही बाटी-चोखा बनाकर सामूहिक रूप से भोजन कर रहे हैं. उनका कहना है कि आंदोलन चाहे जितने दिन चले, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं. किसानों के अनुसार उनके पास राशन और अन्य जरूरी संसाधनों की कोई कमी नहीं है और वे लंबे संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
किसानों ने समर्थन मूल्य (MSP) पर 100% मूंग खरीदी की मांग को लेकर सड़क पर ही यज्ञ किया.आहुति देते समय किसानों ने मंत्रोच्चार नहीं किया, बल्कि भगवान से प्रार्थना की कि सरकार की बुद्धि शुद्ध हो, ताकि किसानों को सड़कों पर न बैठना पड़े और उनके हक की बात सुनी जाए.
आज गुरु पूर्णिमा के अवसर पर किसानों ने सड़क पर ही गुरु पूर्णिमा का पर्व भी मनाया.साथ ही किसानों की अलग-अलग टोलियां देसी अंदाज में गीत गाकर आंदोलन कर रहे किसानों का हौसला बढ़ा रही हैं.
किसानों की सबसे बड़ी मांग है कि सरकार एमएसपी पर 100 प्रतिशत मूंग खरीदी की घोषणा करे. किसान नेताओं का कहना है कि सरकार ने पहले बातचीत के दौरान सकारात्मक संकेत दिए थे, लेकिन अब तक कोई लिखित आदेश या ठोस फैसला सामने नहीं आया. उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट सरकारी आदेश चाहिए.
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि किसानों को बार-बार भरोसा दिया गया, लेकिन मांगों को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. किसानों का कहना है कि अब वे केवल घोषणा या आश्वासन पर भरोसा नहीं करेंगे, बल्कि आधिकारिक आदेश जारी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे.
आंदोलन के दौरान एक भावुक तस्वीर भी सामने आई है.एक ओर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे किसान हैं, तो दूसरी ओर सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे पुलिस के जवान.किसान नेताओं का कहना है कि पुलिस में तैनात कई जवान भी किसान परिवारों से आते हैं. ऐसे में आज हालात ऐसे बन गए हैं कि किसान और किसान का बेटा एक-दूसरे के सामने खड़े हैं.उनका कहना है कि यह स्थिति किसी के लिए भी सुखद नहीं है.
किसान नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के अन्न भंडार भरने वाला किसान आज अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर है. उनका कहना है कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के लिए उसे आंदोलन करना पड़ रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अपने हक की मांग करना कोई अपराध है?
आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि यह संघर्ष केवल मूंग की फसल का नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों किसानों के सम्मान और आर्थिक भविष्य का सवाल है. उनका कहना है कि यदि सरकार आज उनकी मांगों को नहीं मानती है, तो आने वाले समय में अन्य फसलों के किसानों को भी इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
अब सभी की नजर सरकार और किसान नेताओं के बीच होने वाली अगली वार्ता पर टिकी है.यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बातचीत के जरिए समाधान निकलता है या फिर भोपाल में जारी यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेता है. फिलहाल किसानों का साफ संदेश है कि "100% मूंग खरीदी का फैसला होने तक आंदोलन जारी रहेगा."