
पोल्ट्री एक्सपर्ट की मानें तो बीते एक-डेढ़ साल से अंडों के रेट में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. हालांकि पोल्ट्री मार्केट में ऐसा लगातार होता रहता है, लेकिन बीते कुछ वक्त से अंडे के रेट स्थिर नहीं हैं. जिसके चलते पोल्ट्री फार्मर को अंडों पर नाम मात्र के लिए ही मुनाफा होता है. बात अगर नेशनल ऐग कोआर्डिनेशन कमेटी (NECC) की करें तो फार्मर को उसका भी कोई फायदा नहीं मिल रहा है. NECC अंडे के रेट कुछ और तय करती है जबकि बाजारों में अंडे की खरीद-फरोख्त किसी दूसरे ही रेट पर होती है.
पोल्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह पोल्ट्री फीड है. मुर्गियों को खिलाए जाने वाले फीड (दाना) की सरकार ने एमएसपी तय कर दी है, लेकिन अंडे के रेट तय नहीं हैं. एनईसीसी के रेट भी मददगार साबित नहीं हो रहे हैं. रेट के मामले में राज्य सरकार भी कुछ मदद नहीं कर रही हैं.
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पोल्ट्री फार्मर राहुल सिंह ने किसान तक को बताया कि अगर एक साल पहले की बात करें तो मुर्गियों का फीड 23 रुपये किलो तक बड़े ही आराम से मिल जाता था. बड़ी मात्रा में खरीदने पर और थोड़ा सा फायदा हो जाता है. लेकिन बीते एक साल में देखते ही देखते फीड के दाम 23 से 28 रुपये किलो पर आ गए हैं. उसमे भी बाजार के हिसाब से रेट एक-दो रुपये बढ़ ही जाते हैं. ऐसे में मुर्गियों को खिलाए जाने वाले बाजरा, सोयाबीन और मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय है. मतलब ये कि इससे कम पर मुर्गियों के लिए ये तीनों अनाज नहीं मिलेंगे. उल्टे अगर बाजार में तेजी है तो ये तीनों अनाज एमएसपी के रेट से भी ऊपर ही मिलते हैं. इतना ही नहीं मुर्गियों की दवाईयां भी महंगी हो गई हैं.
पोल्ट्री एक्सपर्ट नवाब अकबर अली का कहना है कि गर्मी हो या सर्दी पोल्ट्री फार्म में बिजली की खपत बहुत होती है. सर्दियों में ब्रूडर से हीट देने के लिए खपत बहुत होती है. वहीं गर्मियों में बड़े-बड़े कूलर चलाए जाते हैं. क्योंकि मुर्गियों के लिए 23 से 24 डिग्री तापमान बनाए रखना होता है. अगर राज्य सरकार पोल्ट्री को बिजली देने में एग्रीकल्चर वाले नियम अपनाए तो बड़ी राहत मिलेगी.
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