अंडे और चिकन से मिलने वाला प्रोटीन सस्ता होने के साथ ही प्योर भी है. कम पैसों में ज्यादा प्रोटीन भी इन्हीं से मिलता है. इस बात को समझाने के लिए वेट्स इन पोल्ट्री (VIP) ने एक बड़ी पहल शुरू की है. आम लोगों के बीच इस जागरुकता को बढ़ाने के लिए युवाओं की मदद ली जा रही है. वीडियो के माध्यम से युवा इस संदेश को बढ़ा रहे हैं. ऐसे ही कुछ युवाओं को वीआईपी ने नेशनल शॉर्ट वीडियो प्रतियोगिता के तहत सम्मानित भी किया है. वहीं वीआईपी के इस जागरुकता अभियान से जुड़ने वाले युवा पोल्ट्री प्रोडक्ट अंडे-चिकन के बारे में सोशल मीडिया पर फैलाई जाने वाली अफवाहों का सामना भी करेंगे.
अफवाहों को गलत साबित करते हुए सच्चाई भी सामने लाएंगे. ये जानकारी वीआईपी ने बेंग्लूरु में हुए तीसरे नेशनल सिम्पोजियम के दौरान दी है. इस बारे में बात करते हुए पोल्ट्री से जुड़े जोखिमों के बारे में भी बात की गई. इस मौके पर पोल्ट्री सेक्टर से जुड़े एक्सपर्ट, रिसर्चर, पॉलिसी बनाने वाले और खासतौर पर पशु चिकित्सकों ने अपनी-अपनी बात रखी.
क्या बोले पोल्ट्री एक्सपर्ट-रिसर्चर
- इंडियन पोल्ट्री साइंस एसोसिएशन के प्रेसिडेंट, FSSAI साइंटिफिक पैनल-13 के चेयरमैन और भारत सरकार के पूर्व संयुक्त आयुक्त (पोल्ट्री) प्रो. (डॉ.) पी.के. शुक्ला का कहना है, “भारतीय पोल्ट्री का भविष्य वैज्ञानिक प्रबंधन, पॉलिसी सपोर्ट, बायोसिक्योरिटी में बेहतरीन काम और इंडस्ट्री-एकेडेमिया के बीच मजबूत सहयोग पर निर्भर करता है. सस्टेनेबिलिटी और स्केलेबिलिटी को साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए.”
- पोल्ट्री एक्सपर्ट ओपी सिंह का कहना है, “टेक्नोलॉजी अपनाना और ऑपरेशनल क्षमता अब ऑप्शनल नहीं, बल्कि टिकाऊ पोल्ट्री विकास के लिए ज़रूरी है. इंटीग्रेटर्स को इनोवेशन-आधारित प्रोडक्टिविटी पर ध्यान देना चाहिए.”
- भारत में वर्ल्ड पोल्ट्री साइंस एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. जितेंद्र वर्मा का कहना है, “ग्लोबल पोल्ट्री ट्रेंड्स जानवरों के कल्याण, बायोसिक्योरिटी और सस्टेनेबिलिटी पर बढ़ते प्रभाव का संकेत देते हैं. भारत को अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखते हुए ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस के साथ तालमेल बिठाना चाहिए.”
- पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट रणपाल ढांढा का कहना है, “किसानों का पूरा ध्यान इंडस्ट्री के विकास के केंद्र में होना चाहिए. एक मजबूत पोल्ट्री सेक्टर तभी बन सकता है जब किसान ज्ञान, टेक्नोलॉजी और उचित रिटर्न के साथ मजबूत होगा.”
- पोल्ट्री इंडिया के प्रेसिडेंट उदय सिंह बयास का कहना है, “इंडस्ट्री एसोसिएशन की भूमिका सभी संबंधित लोगों को एकजुट करने और आम चुनौतियों का समाधान करने में अहम है. लंबे समय तक सेक्टर की प्रगति के लिए सामूहिक कार्रवाई जरूरी है.”
- क्लेफ्मा के चेयरमैन दिव्या कुमार गुलाटी का कहना है, “चारे की क्वालिटी और इनोवेशन पोल्ट्री परफ़ॉर्मेंस को आकार देते रहेंगे. इंडस्ट्री को क्षमता, सस्टेनेबिलिटी और संसाधनों के इस्तेमाल पर ध्यान देना चाहिए.”
- वालसन परमेश्वरन का कहना है, “भारत में एक बड़े पोल्ट्री निर्यातक के तौर पर उभरने की अपार क्षमता है. क्वालिटी स्टैंडर्ड्स, ट्रेसिबिलिटी और ग्लोबल मार्केट के लिए तैयारी भविष्य की सफलता के मुख्य कारक होंगे.”
वीडियो के लिए ये हुए सम्मानित
VIP के सेक्रेटरी डॉ. संतोष इरे ने पुरस्कारों की घोषणा करते हुए वीआईपी के सफर के बारे में बताया कि एक राष्ट्रीय तकनीकी संस्था के रूप में वीआईपी ज्ञान साझा करने, लगातार शिक्षा, नेटवर्किंग और वैज्ञानिक प्रगति के माध्यम से पोल्ट्री पशु चिकित्सा पेशेवरों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित है.
- कंकटाव सिद्धेश्वर दिनकर को 25 हजार रुपये.
- चिलकुरी मनीष रेड्डी को 20 हजार रुपये.
- कुमारी संजना को 15 हजार रुपये.
- ईशान बारिक को 15 हजार रुपये.
- शिवा होलिकेरी को विशेष सम्मान दिया गया.
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