EL-Nino: कम बारिश और तेज गर्मी से नहीं होगा नुकसान, मछलियों के तालाब में करें ये काम 

EL-Nino: कम बारिश और तेज गर्मी से नहीं होगा नुकसान, मछलियों के तालाब में करें ये काम 

EL-Nino मई-जून में तापमान 31 डिग्री से ऊपर चला जाता है. बढ़ते तापमान के चलते मछलियों के तालाब का पानी तेज गर्म होने लगता है. पानी गर्म होते ही उसमे ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है. ऐसे में खासतौर से यूपी, मध्य‍ प्रदेश, बिहार, झारखंड, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के मछली पालकों को खासा नुकसान उठाना पड़ता है. 

तालाब में तैरती दिखीं हजारों मरी मछलियां.(Photo: Siddhartha Gupta/ITG)तालाब में तैरती दिखीं हजारों मरी मछलियां.(Photo: Siddhartha Gupta/ITG)
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jun 16, 2026,
  • Updated Jun 16, 2026, 9:15 AM IST

जून महीने में गर्मी का प्रकोप तो देखने को मिल ही रहा है, लेकिन इस मौसम में और भी बदलाव हो सकते हैं. मौसम विज्ञान विभाग से जुड़े एक्सपर्ट की मानें तो इस महीने में अल नीनो का असर देखने को भी मिल सकता है. इसमे होगा ये कि बारिश कम होगी और गर्मी तेज पड़ेगी. लेकिन मौसम में इस तरह का बदलाव तालाब में पलने वालीं मछलियों को बहुत नुकसान पहुंचाएगा. एक तो जून में भी तालाब का पानी चाय की तरह से गर्म हो जाता है, ऊपर से अल नीनो के चलते गर्मी और तेज हुई तो पानी में कई तरह के बदलाव आने लगेंगे. 

फिश एक्सपर्ट तेज गर्मी को देखते हुए पहले ही मई-जून में मछलियों के तालाब को लेकर कुछ खास एहतियात बरतने की सलाह देते हैं. मछली पालकों के लिए जरूरी हो जाता है कि अलर्ट हैं. मछलियों की खुराक, तालाब के पानी का तापमान, पानी का लेवल और तालाब की साफ-सफाई का ध्यान रखने की टिप्स दी जाती हैं. फिश एक्सपर्ट बताते हैं कि अगर मछलियों के तालाब के पानी का तापमान 31 डिग्री से ऊपर हो गया है तो ये मछलियों के लिए जानलेवा साबित होता है. 

ये तालाब के पानी के लिए टिप्स 

फिश एक्सपर्ट अजय सिरोही बताते हैं कि तालाब में ज्यादातर रोहू, कतला, मृंगाल मछली का पालन किया जाता है. गर्मी के इस मौसम में मछलियों को 26 से 31 डिग्री तापमान वाले पानी की जरूरत होती है. लेकिन अभी तापमान भी बढ़ रहा है. 40 से 42 डिग्री तक तापमान पहुंच रहा है. यह मछलियों के लिए बहुत ही खतरनाक होता है. जब गर्म हवाएं चलती हैं तो हालात और भी खराब हो जाते हैं. होता ये है कि तालाब में फाइटो क्लाइंजम (अल्गी) लगी होती है. पानी के अंदर इसी से झींगा को मुख्य रूप से ऑक्सीजन मिलती है. लेकिन तेज गर्मी और गर्म पानी के चलते यह मुरझा जाती है. अब क्योंकि मछली पालन के लिए बिजली कमर्शियल होने के चलते बहुत महंगी है तो मछली पालक तालाब में पंखे और इरेटर बहुत कम चलाते हैं. 

तालाब में करें ये बदलाव, हेल्दी रहेंगी मछलियां 

  • दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक तालाब में पंखे और इरेटर चलाएं. 
  • गर्मियों में मछलियों को सूखा खाने को न दें. 
  • एक लीटर मीठे फ्रेश पानी में 100 ग्राम गुड़ घोलकर दें.
  • पानी में दो से तीन ग्राम विटामिन सी घोलकर दें. 
  • ग्लूकोज पाउडर भी घोलकर पिलाया जा सकता है. 
  • मछलियों को दी जाने वाली दोपहर की खुराक कम कर दें. 
  • सुबह-शाम और रात 30-30 फीसद तक खाने को दें. 
  • तालाब के पानी की हाईट बढ़ा दें. 
  • तालाब में 3.5 फुट पानी है तो उसे पांच से 5.5 फुट कर दें. 
  • ऊपर का पानी गर्म भी हो जाएगा तो 3.5 फुट पानी की सतह सामान्य बनी रहेगी.  

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