
जून महीने में गर्मी का प्रकोप तो देखने को मिल ही रहा है, लेकिन इस मौसम में और भी बदलाव हो सकते हैं. मौसम विज्ञान विभाग से जुड़े एक्सपर्ट की मानें तो इस महीने में अल नीनो का असर देखने को भी मिल सकता है. इसमे होगा ये कि बारिश कम होगी और गर्मी तेज पड़ेगी. लेकिन मौसम में इस तरह का बदलाव तालाब में पलने वालीं मछलियों को बहुत नुकसान पहुंचाएगा. एक तो जून में भी तालाब का पानी चाय की तरह से गर्म हो जाता है, ऊपर से अल नीनो के चलते गर्मी और तेज हुई तो पानी में कई तरह के बदलाव आने लगेंगे.
फिश एक्सपर्ट तेज गर्मी को देखते हुए पहले ही मई-जून में मछलियों के तालाब को लेकर कुछ खास एहतियात बरतने की सलाह देते हैं. मछली पालकों के लिए जरूरी हो जाता है कि अलर्ट हैं. मछलियों की खुराक, तालाब के पानी का तापमान, पानी का लेवल और तालाब की साफ-सफाई का ध्यान रखने की टिप्स दी जाती हैं. फिश एक्सपर्ट बताते हैं कि अगर मछलियों के तालाब के पानी का तापमान 31 डिग्री से ऊपर हो गया है तो ये मछलियों के लिए जानलेवा साबित होता है.
फिश एक्सपर्ट अजय सिरोही बताते हैं कि तालाब में ज्यादातर रोहू, कतला, मृंगाल मछली का पालन किया जाता है. गर्मी के इस मौसम में मछलियों को 26 से 31 डिग्री तापमान वाले पानी की जरूरत होती है. लेकिन अभी तापमान भी बढ़ रहा है. 40 से 42 डिग्री तक तापमान पहुंच रहा है. यह मछलियों के लिए बहुत ही खतरनाक होता है. जब गर्म हवाएं चलती हैं तो हालात और भी खराब हो जाते हैं. होता ये है कि तालाब में फाइटो क्लाइंजम (अल्गी) लगी होती है. पानी के अंदर इसी से झींगा को मुख्य रूप से ऑक्सीजन मिलती है. लेकिन तेज गर्मी और गर्म पानी के चलते यह मुरझा जाती है. अब क्योंकि मछली पालन के लिए बिजली कमर्शियल होने के चलते बहुत महंगी है तो मछली पालक तालाब में पंखे और इरेटर बहुत कम चलाते हैं.
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