
गर्मी के मौसम में हर किसी की जुबान पर कहीं न कहीं आम की बात होती है या फिर आम का स्वाद होता है. रसीले और अपने मीठे गुणों के कारण यह हर किसी का फेवरेट है. तभी तो इसका स्वाद लेने के लिए लोग बिना मौसम भी इसको खाना पसंद करते हैं. आम की अलग-अलग किस्में स्वाद आकार और जगह के हिसाब से बटी हुई है. किसी को दशहरी पसंद है तो किसी तो हापुस तो किसी को चौसा. लेकिन उन्हें ये नहीं पता होतो कि आखिर इन आमों का नाम किस आधार पर रखा गया है और इस आम की खासियत क्या है. इसी कड़ी में आज हम बात करेंगे चौसा आम की. तो आइये जानते हैं क्या है चौसा आम की चोखी कहानी.
दरअसल, 1539 में शेरशाह सूरी ने बिहार के चौसा इलाके में हुए एक युद्ध में हुमायूं को हरा दिया था. युद्ध जीतने की खुशी में उसने सभी को अपना मनपसंद आम खिलाया और तभी से उस आम का नाम चौसा पड़ गया. हालांकि इस आम की उत्पत्ति भारत में उत्तर प्रदेश के हरदोई इलाके में हुई थी.
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चौसा आम जुलाई के महीने में बाजार में आता है. चौसा आम का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है. इस आम के गूदे में इतनी मिठास होती है कि इसे खाने के बाद स्वाद और मन दोनों ही मीठे हो जाते हैं. चौसा आम दिखने में बहुत सुंदर और मनमोहक महक वाला होता है. बाजार में इस आम की आवक तब होती है जब अन्य किस्म के आम बाजार में आना बंद हो जाते हैं. जिससे इस आम की मांग और भी बढ़ जाती है.
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चौसा आम की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने 2020 में ही इसे जीआई टैग दिलाने के प्रयास शुरू कर दिया था. क्योंकि उत्तर प्रदेश के मलीहाबादी दशहरी आम को जीआई टैग मिलने के बाद अब केंद्रीय कृषि मंत्रालय चौसा आम की ओर बढ़ रहा है. ताकि जीआई टैग के जरिए चौसा आम की पहचान ना सिर्फ बल्कि विदेशों में भी बढ़ सके. ऐसे में आम के व्यापारी और इसकी खेती कर रहे किसान भी लगातार जीआई टैग की मांग करते नजर आ रहे हैं.

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चौसा आम स्वाद में मीठा होता है. इसके रंग को देखकर इसकी पहचान की जा सकती है. इसका रंग सुर्ख पीला होता है. यह आम जुलाई के महीने में बाजार में आता है, जब अन्य किस्म के आम कम हो जाते हैं.
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