यूरिया पर सरकार का डंडा! सरकार का नया प्लान, किसानों को मिलेगी सही मात्रा में खाद

यूरिया पर सरकार का डंडा! सरकार का नया प्लान, किसानों को मिलेगी सही मात्रा में खाद

यूरिया के बढ़ते डायवर्जन को रोकने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. फर्टिलाइजर व्यवस्था पर सरकार ने कहा कि कच्चे माल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के बावजूद ये फैसला किया गया है कि यूरिया की बोरी 266 रुपये और डीएपी की बोरी 1350 रुपये में ही किसानों को मिलेगी.

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यूरिया पर सरकार का डंडा! सरकार का नया प्लान, किसानों को मिलेगी सही मात्रा में खादकिसानों को मिलेगी सही मात्रा में खाद (AI- तस्वीर)

यूरिया के बढ़ते डायवर्जन को रोकने और इसे केवल खेती तक सीमित रखने के लिए सरकार अब खाद वितरण प्रणाली में बड़ा बदलाव करने जा रही है. नई व्यवस्था के तहत किसानों को यूरिया और अन्य खाद अब सिर्फ 'फार्मर आईडी' के आधार पर ही दिए जाएंगे. अब तक देशभर में करीब 9 करोड़ 30 लाख फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं, जबकि सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 13 करोड़ तक पहुंचाने का है. इस नई सिस्टम की टेस्टिंग मध्य प्रदेश और हरियाणा में सफलतापूर्वक की जा चुकी है. सरकार का मानना है कि इस कदम से यूरिया का गलत इस्तेमाल, खासकर औद्योगिक क्षेत्रों में होने वाला डायवर्जन, काफी हद तक रोका जा सकेगा. साथ ही इससे असली किसानों को समय पर और सही मात्रा में खाद मिल पाएगी, जिससे खेती की उत्पादकता में भी सुधार होने की उम्मीद है.

फर्टिलाइजर पर मिलेगी सब्सिडी

फर्टिलाइजर व्यवस्था पर सरकार ने कहा कि कच्चे माल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के बावजूद ये फैसला किया गया है कि यूरिया की बोरी 266 रुपये और डीएपी की बोरी 1350 रुपये में ही किसानों को मिलेगी. इसके लिए हाल ही में कैबिनेट ने 41,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था की है, ताकि बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ सरकार उठाए और किसान पर भार न पड़े. सरकार ने कहा कि सब्सिडी वाला खाद कई बार दूसरे उद्योगों या गैर–कृषि उपयोग में डायवर्ट हो जाता है. इसे रोकने के लिए फार्मर आईडी आधारित मॉडल विकसित किया जा रहा है, जिसके तहत हर किसान की जमीन, फसल और परिवार का डेटा एक एकीकृत आईडी से जुड़ा होगा.

बटाईदार किसान को भी मिलेगा खाद

फार्मर आईडी के आधार पर यह तय होगा कि कितनी जमीन और कौन–सी फसल के लिए कितना खाद पर्याप्त है, ताकि किसान को कमी न हो, इसके अलावा खाद की अतिरिक्त उठाव, जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग पर रोक लगे. सरकार ने बताया कि अब तक 9 करोड़ 29 लाख से अधिक फार्मर आईडी बन चुकी हैं और लक्ष्य है कि इसे लगभग 13 करोड़ किसानों तक विस्तारित किया जाए. जहां बटाई या पट्टे पर खेती की परंपरा है, वहां जमीन मालिक के लिखित प्रमाण के आधार पर बटाईदार किसान को भी खाद उपलब्ध कराने का मॉडल मध्य प्रदेश और हरियाणा में सफल रहा है, जिसे और परिष्कृत कर देशभर में लागू करने पर काम हो रहा है.

प्राकृतिक खेती का हो रहा विस्तार

प्राकृतिक खेती पर सरकार ने कहा कि मंत्रालय ने इस वर्ष 1 करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति संवेदनशील करने और कम से कम 18 लाख किसानों द्वारा प्राकृतिक खेती अपनाने का लक्ष्य रखा था. जिसमें से लगभग 18 लाख किसानों और करीब 8 लाख हेक्टेयर जमीन पर प्रमाणित प्राकृतिक खेती की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है. वहीं, वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि यदि प्राकृतिक खेती की पद्धतियां सही तरीके से अपनाई जाएं, तो उत्पादन घटे बिना लागत में कमी की जा सकती है और इससे फर्टिलाइजर आयात पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिलेगी.

खाद उत्पादन पर नहीं पड़ेगा असर

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत सरकार ने फर्टिलाइजर सेक्टर के लिए राहत भरा कदम उठाया है. सरकार ने उर्वरक उद्योग को मिलने वाली प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ाकर पिछले छह महीनों की औसत खपत के करीब 95 प्रतिशत तक पहुंचा दी है, ताकि आने वाले खरीफ सीजन से पहले खाद उत्पादन पर किसी तरह का दबाव न बने. सरकार ने कहा कि गैस सप्लाई बढ़ने से यूरिया और अन्य उर्वरकों के उत्पादन में कोई बाधा नहीं आएगी. खरीफ सीजन से पहले अप्रैल और मई को खाद उत्पादन के लिए अहम समय माना जाता है, ऐसे में यह फैसला किसानों के लिए भी राहत भरा है. सरकार ने कहा कि मौजूदा वैश्विक संकट के बावजूद देश में ऊर्जा और खाद की सप्लाई को स्थिर रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. रिफाइनरी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और गैस, एलपीजी व अन्य ईंधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है.

जैविक खेती को दिया जा रहा बढ़ावा

सरकार देश में टिकाऊ और सुरक्षित कृषि को बढ़ावा देने के लिए जैविक खेती पर लगातार जोर दे रही है. इसका उद्देश्य रासायनिक खाद और कीटनाशकों के उपयोग को कम करके मिट्टी की सेहत सुधारना, किसानों की लागत घटाना और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराना है. भारत सरकार ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) प्रमुख है. इस योजना के तहत किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और प्रमाणन की सुविधा दी जाती है. इसके अलावा मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्ट (MOVCDNER) के जरिए पूर्वोत्तर राज्यों में ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है.

सरकार किसानों को गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जैविक कीटनाशक और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर रही है. साथ ही ऑर्गेनिक उत्पादों की मार्केटिंग के लिए “जैविक भारत” ब्रांड और ई-मार्केट प्लेटफॉर्म भी विकसित किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर दाम मिल सके. बता दें कि जैविक खेती के कई फायदे हैं. इससे मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है, पानी की क्वालिटी बेहतर होती है और पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचता है. साथ ही ऑर्गेनिक उत्पादों की बाजार में मांग बढ़ने से किसानों की आय में भी इजाफा हो सकता है. 

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