खाद बिक्री पर प्रतिबंध से बढ़ी चिंता, किसानों के समर्थन में उतरा फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया

खाद बिक्री पर प्रतिबंध से बढ़ी चिंता, किसानों के समर्थन में उतरा फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया

फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि सरकार का यह निर्देश किसानों को जबरन सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ दूसरे उत्पाद खरीदने से रोकने के लिए लाया गया है, लेकिन इसका असर कुछ जरूरी गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों पर भी पड़ सकता है.

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खाद बिक्री पर प्रतिबंध से बढ़ी चिंता, किसानों के समर्थन में उतरा फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडियाखाद बिक्री पर प्रतिबंध से बढ़ी चिंता

उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री और वितरण पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को लेकर विवाद बढ़ गया है. दरअसल, फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) ने कहा है कि यह फैसला केंद्र सरकार के जैव उर्वरकों को बढ़ावा देने के प्रयासों के विपरीत है और इससे किसानों को नुकसान हो सकता है. एफएआई का कहना है कि खरीफ सीजन से पहले उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. संगठन ने दोनों राज्य सरकारों से अपील की है कि वे अपने आदेश पर पुनर्विचार करें, ताकि किसानों को समय पर जरूरी खाद मिल सके और खेती का काम प्रभावित न हो.

किसानों के हित में उतरा FAI

फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि सरकार का यह निर्देश किसानों को जबरन सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ दूसरे उत्पाद खरीदने से रोकने के लिए लाया गया है, लेकिन इसका असर कुछ जरूरी गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों पर भी पड़ सकता है. इनमें सूक्ष्म पोषक तत्व (माइक्रोन्यूट्रिएंट्स), जैव उर्वरक, जल-घुलनशील उर्वरक और अन्य विशेष खाद शामिल हैं, जो फसलों को संतुलित पोषण देने और अच्छी पैदावार के लिए जरूरी माने जाते हैं. एफएआई ने महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भराणे को भेजी गई एक अपील में कहा है कि इस आदेश से किसानों तक इन जरूरी उत्पादों की पहुंच प्रभावित हो सकती है, इसलिए राज्य सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए, ताकि किसानों को सभी जरूरी खाद आसानी से मिल सके.

संतुलित पोषण प्रबंधन पर असर का खतरा

FAI ने महाराष्ट्र सरकार से अपील करते हुए कहा है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करें और यह तय करें कि राज्य में सभी प्रकार के उर्वरकों, खासकर गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री और आपूर्ति पर कोई रोक न हो. संगठन का कहना है कि यह कदम किसानों के हितों की रक्षा करने और खाद उद्योग में स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी है. एफएआई के मुताबिक, उर्वरक उद्योग पहले से ही आपूर्ति से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे में इस तरह के प्रतिबंध स्थिति को और मुश्किल बना सकते हैं.

एफएआई ने यह भी कहा कि उर्वरकों से जुड़े नियम और व्यवस्था उर्वरक (नियंत्रण) आदेश (FCO) के तहत तय होते हैं, इसलिए किसी राज्य द्वारा इस तरह का फैसला लेना मनमाना कदम माना जा सकता है, जिस पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए.

यूपी-महाराष्ट्र के आदेश पर बवाल

उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने करीब तीन महीने पहले ऐसा निर्देश जारी किया था और अब महाराष्ट्र सरकार ने भी 20 मई को इसी तरह का आदेश लागू किया है. सब्सिडी वाले उर्वरकों में मुख्य रूप से यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीके उर्वरक शामिल हैं, जबकि गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, जैव उर्वरक और अन्य विशेष पोषक तत्व आते हैं, जो फसलों को संतुलित पोषण देने और बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी माने जाते हैं.

उद्योग का कहना है कि गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों का कारोबार आज करीब 1 अरब डॉलर का हो चुका है और देश की लगभग सभी बड़ी खाद कंपनियां इस क्षेत्र में काम कर रही हैं. इन कंपनियों ने वर्षों से इसके लिए बड़ा निवेश भी किया है. ऐसे में उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि केंद्र सरकार लंबे समय से किसानों को सिर्फ यूरिया पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर रही है. ऐसे में कुछ राज्यों द्वारा गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री पर रोक लगाने जैसे कदम सरकार के इसी उद्देश्य के खिलाफ जाते हैं.

FAI ने सरकारों को लिखा पत्र

एफएआई ने महाराष्ट्र सरकार को लिखे पत्र में कहा है कि इस तरह के फैसले संतुलित पोषण प्रबंधन (इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट) और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने की सरकार की नीति को कमजोर कर सकते हैं. उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि उर्वरकों की जबरन बिक्री (टैगिंग) एक गंभीर समस्या है, लेकिन इसका समाधान ऐसा होना चाहिए जिससे किसानों और बाजार दोनों को नुकसान न हो. उनका सुझाव है कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना न करना पड़े, इसलिए फिलहाल इस आदेश को कुछ समय के लिए टाल दिया जाए. साथ ही, कृषि विभाग, फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई), उर्वरक कंपनियों, डीलर संगठनों और किसान प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक संयुक्त समिति बनाई जाए, जो इस मुद्दे का व्यावहारिक और संतुलित समाधान निकाल सके.

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