खाद ट्रांसपोर्ट में दक्षिण रेलवे ने दिखाई तेजी (AI Image)Fertilizer Transportation: खरीफ बुवाई के दौरान किसानों तक समय पर खाद पहुंचाने के लिए दक्षिण रेलवे ने माल ढुलाई को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देते हुए चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच 13.7 लाख टन खाद ट्रांसपोर्ट की. यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 7 प्रतिशत ज्यादा है. दक्षिण रेलवे की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, पहली तिमाही में उर्वरकों की रिकॉर्ड ढुलाई से यह स्पष्ट हुआ है कि खरीफ सीजन की मांग के अनुरूप रेलवे ने आपूर्ति श्रृंखला को लगातार मजबूत बनाए रखा. बढ़ी हुई लोडिंग का उद्देश्य किसानों तक खाद की उपलब्धता समय पर सुनिश्चित करना है.
दक्षिण रेलवे ने साफ किया कि उसके अधिकार क्षेत्र में उर्वरक परिवहन के लिए रेलवे रैक की किसी प्रकार की कमी नहीं रही है. न्यू मैंगलोर पोर्ट, चेन्नई पोर्ट और वी. ओ. चिदंबरनार पोर्ट (तूतीकोरिन) सहित सभी प्रमुख बंदरगाहों पर मांग के अनुसार समय पर रैक उपलब्ध कराए गए हैं. पोर्ट अथॉरिटीज और उर्वरक कंपनियों की ओर से जैसे ही मांग हासिल हुई, उसी के अनुरूप रैक उपलब्ध कराए गए.
दक्षिण रेलवे ने कहा कि खाद ढुलाई के लिए भेजे गए हर इंडेंट का समय पर निस्तारण किया गया है. वर्तमान में रैक की अनुपलब्धता के कारण कोई भी इंडेंट अटका नहीं है. इसके लिए दक्षिण रेलवे, पोर्ट अथॉरिटीज और खाद कंपनियों के बीच लगातार समन्वय बनाकर आगे की योजना तैयार की गई, ताकि जहाजों के पहुंचने से पहले ही जरूरी रैक की व्यवस्था की जा सके.
दक्षिण रेलवे ने बताया कि खरीफ सीजन के दौरान मंडल और मुख्यालय स्तर पर खाद ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े इंडेंट की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है. इसके साथ ही उर्वरक रैक को प्राथमिकता के आधार पर लगाया जा रहा है. पोर्ट साइडिंग और माल टर्मिनलों पर लोडिंग और अनलोडिंग कार्यों की भी लगातार निगरानी की जा रही है, जिससे वैगनों का तेजी से इस्तेमाल सुनिश्चित हो सके.
दक्षिण रेलवे ने कहा कि उर्वरकों के परिवहन के लिए आवश्यक सभी रैक उपलब्ध कराए जाते रहेंगे. पोर्ट अथॉरिटीज, उर्वरक कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों को आश्वस्त किया गया है कि खरीफ सीजन के दौरान ही नहीं, बल्कि आगे भी उनकी जरूरत के अनुसार पर्याप्त रेलवे रैक उपलब्ध कराए जाएंगे. (एएनआई)
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