महाराष्ट्र के ठाणे जिले में 15 अगस्त से किसानों के लिए ऑनलाइन खाद वितरण सिस्टम शुरू होगा. ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल’ के जरिए किसान मोबाइल से खाद का रियल टाइम स्टॉक देख सकेंगे और नजदीकी पंजीकृत विक्रेता के यहां ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे.
महाराष्ट्र सरकार ने बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की गुणवत्ता से जुड़ी किसानों की शिकायतों के निपटारे के लिए नई व्यवस्था लागू की है. अब हर शिकायत की जांच सात दिनों के भीतर होगी. तालुका स्तर की समितियों का फिर से गठन किया गया है.
महाराष्ट्र के अकोला में खराब सोयाबीन बीजों के मामले पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा. किसान कृषि अधीक्षक कार्यालय 'रिश्वत का पेड़' लेकर पहुंचे. यहां उन्होंने कृषि विभाग और बीज कंपनियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए विरोध किया.
महाराष्ट्र के अकोला में खराब सोयाबीन बीजों के मामले पर भाजपा विधायक हरीश पिंपले ने बीज कंपनियों और कृषि विभाग पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि समय पर जांच होती तो किसानों को दोबारा बुवाई नहीं करनी पड़ती.
महाराष्ट्र के अकोला में सोयाबीन बीजों की खराब अंकुरण क्षमता को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया. पूर्व विधायक अमोल मिटकरी किसानों के साथ जिला कृषि अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और कथित तौर पर दफ्तर के मुख्य द्वार पर ताला लगाकर धरने पर बैठ गए.
ICAR द्वारा विकसित नई उन्नत प्याज किस्में किसानों के लिए बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफे का अवसर लेकर आई हैं. इन किस्मों में 324 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज, 6 महीने तक भंडारण क्षमता तथा प्रमुख रोगों और कीटों के प्रति बेहतर सहनशीलता जैसी विशेषताएं हैं, जिससे विभिन्न जलवायु क्षेत्रों के किसानों को लाभ मिलेगा.
महाराष्ट्र में खरीफ की तैयारी के बीच सरकार ने सोयाबीन, मूंग, उड़द, मूंगफली, बाजरा और कपास समेत प्रमुख फसलों के प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने का फैसला किया है. बीज वितरण पहले आओ पहले पाओ आधार पर होगा और किसानों को समय रहते आवेदन करने की सलाह दी गई है.
Fertilizer Crisis: महाराष्ट्र की ठाणे ग्रामीण पुलिस ने एक छापेमारी में 78 लाख रुपये मूल्य का यूरिया स्टॉक जब्त किया है. इसके साथ ही उर्वरक के कथित अवैध उपयोग के संबंध में 11 लोगों को भी धर दबोचा है. पुलिस अधिकारी ने बताया कि यूरिया बैगों से लदे दो ट्रक भी पकड़े गए हैं.
Soybean Seed Issue: महाराष्ट्र के अमरावती जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत में किसानों को बड़ा झटका लगा है. तिवसा तहसील के शिरजगांव, मोझरी और अनकवाडी गांवों में 60 हेक्टेयर क्षेत्र में बोए गए बापना कंपनी के सोयाबीन बीज अंकुरित नहीं हुए. बीज खराब और बोगस पाए गए, जिससे किसानों की मेहनत और लागत बर्बाद हो गई.
किसान राहुल कव्हर के मुताबिक, चिया सीड्स की बुवाई के लिए अक्टूबर और नवंबर महीने का मौसम सबसे अच्छा मना जाता है. चिया की खेती किसी भी प्रकार की मिट्टी में कर सकते हैं. मगर अच्छे उत्पादन के लिए बढ़िया जलनिकास वाली हल्की भुरभुरी और रेतीली मिट्टी उपयुक्त होती है. चिया कि बुवाई करने के बाद फसल पर किसी भी प्रकार के खाद या दवाइयों की ज्यादा जरूरत नहीं होती है. इसके कारण इस फसल के लिए ज्यादा लागत भी नहीं लगती है.
अकोला जिले के तिलक रोड पर किसानों ने सड़क जाम कर अपना गुस्सा जाहिर किया. क्योंकि उन्हें अधिक उपज देने वाले और पसंदीदा कपास के बीज के लिए लंबी लाइन लगाने के बावजूद निराशा हाथ लगी है. पिछले चार दिनों से किसान बीज खरीदने के लिए सुबह से ही कृषि केंद्र पर लाइन लगा रहे हैं. लेकिन बीज के लिए मारामारी है.
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