उर्वकर मंत्री ने खाद के स्टॉक पर दी जानकारीखरीफ 2026 सीजन के दौरान किसानों को यूरिया की उपलब्धता को लेकर राहत मिलने वाली है. केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि इस बार देश में जरूरत के मुकाबले काफी ज्यादा यूरिया उपलब्ध है. पर्याप्त भंडार, बढ़ी हुई घरेलू उत्पादन क्षमता और नई नीतियों की वजह से खाद की आपूर्ति को लेकर किसी बड़ी परेशानी की आशंका नहीं है. लोकसभा में लिखित जवाब देते हुए केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बताया कि खरीफ 2026 के लिए देश में यूरिया की कुल उपलब्धता 163.78 लाख मीट्रिक टन है. जबकि इस मौसम में अनुमानित जरूरत 109.40 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है. इस तरह करीब 54.38 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त यूरिया उपलब्ध है, जो जरूरत से लगभग 47.9 फीसदी अधिक है.
उर्वरक मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014-15 में देश की पुनर्मूल्यांकित यूरिया उत्पादन क्षमता 207.54 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष थी, जो अब 2026-27 में बढ़कर 269.42 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष हो गई है. सरकार ने नई निवेश नीति के तहत छह नए यूरिया प्लांट लगाए हैं, जिनसे कुल 76.2 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जुड़ी है. इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और देश में खाद का उत्पादन बढ़ाना है.
केंद्र सरकार ने बताया कि हाल के वर्षों में घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वर्ष 2023-24 में देश में 314.07 लाख मीट्रिक टन यूरिया का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था. वहीं 2025-26 में उत्पादन 293.30 लाख मीट्रिक टन रहा. इसकी तुलना में 2004-05 से 2013-14 के बीच औसत वार्षिक उत्पादन 210.72 लाख मीट्रिक टन था. इससे स्पष्ट है कि पिछले वर्षों में उत्पादन क्षमता और वास्तविक उत्पादन दोनों में वृद्धि हुई है.
केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि यूरिया उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल है. चूंकि घरेलू गैस उत्पादन पूरी जरूरत पूरी नहीं कर पाता, इसलिए घरेलू गैस के साथ आयातित आरएलएनजी का भी इस्तेमाल किया जाता है. गैस आधारित यूरिया संयंत्रों के लिए समान लागत सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार गैस पूलिंग व्यवस्था भी लागू कर चुकी है.
केंद्र सरकार ने बताया कि 15 जुलाई 2026 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 को मंजूरी दी है. इस नीति का उद्देश्य यूरिया क्षेत्र में नए निवेश आकर्षित करना, उत्पादन क्षमता बढ़ाना और भविष्य की मांग को घरेलू स्तर पर पूरा करने की दिशा में तेजी लाना है.
सरकार ने कहा कि उर्वरकों का वितरण आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत नियंत्रित किया जाता है. खाद की कालाबाजारी और गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए राज्यों की प्रवर्तन एजेंसियों ने 1 अप्रैल से 17 जुलाई 2026 के बीच 1,58,886 छापेमारी की.
इस दौरान 8,262 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 2,692 लाइसेंस सस्पेंड या कैंसिल किए गए और 247 एफआईआर दर्ज की गईं. सरकार का कहना है कि किसानों तक उर्वरकों की पारदर्शी और समयबद्ध सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी.
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