अल नीनो और जलवायु परिवर्तन के कारण मॉनसून में हो रही देरी को देखते हुए ICAR पटना के वैज्ञानिकों ने किसानों को पारंपरिक रोपाई के बजाय मशीनों से धान की सीधी बुवाई करने की सलाह दी है. किसान 15 जुलाई तक इस विधि से खेती कर सकते हैं.
बिहार में कमजोर मॉनसून और कम बारिश के कारण धान की नर्सरी तैयार करने और रोपाई में देरी हो रही है. मौसम विभाग ने जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश और अधिक तापमान की संभावना जताई है. ऐसे में किसानों को सूखा-सहनशील धान की किस्में अपनाने, वैकल्पिक फसलों की खेती करने, पानी बचाने वाली तकनीकों का उपयोग करने और पशुधन को गर्मी से बचाने की सलाह दी गई है.
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