बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने दिसंबर महीने के लिए रबी फसलों की एडवाइजरी जारी की है. गेहूं की पछेती बुआई, राई और मक्का की देखभाल, टमाटर में फल छेदक कीट और सब्जियों की खेती को लेकर किसानों के लिए अहम सलाह जानें.
रबी सीजन में गेहूं के अलावा किसान दलहनी और मसाला फसलों की भी खेती कर सकते हैं. वहीं कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, यह समय लहसुन और धनिया की बुवाई से लेकर मक्का, चना, मटर, राजमा, मेथी सहित अन्य फसलों की खेती के लिए उपयुक्त है, जिसे लेकर कृषि वैज्ञानिक मुख्य रूप से किसानों को सलाह दे रहे हैं.
लतीदार, भिंडी सहित आगात सब्जियों के फलों में लगने वाले कीटों की करें निगरानी. फल मक्खी कीट से सब्जियों की कैसे करें निगरानी. डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर के वैज्ञानिकों ने अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट में बचाव के दिए सुझाव.
आलान विधि से खेती करने वाले किसानों को सरकार अनुदान देगी. बिहार सरकार इस विधि को अपनाने वाले किसानों को 50 प्रतिशत तक का अनुदान दे रही है. इस वित्तीय वर्ष के लिए सरकार ने इसके लिए 4 करोड़ 50 लाख रुपये जारी किए हैं.
लीची के पौधों में फल आने शुरू हो गए हैं. वहीं, किसान बैंगिंग और बाग में नमी बनाकर फलों को फटने से रोक सकते हैं. राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र मुजफ्फरपुर के वैज्ञानिकों के अनुसार शाही लीची के लिए बैंगिंग का सही समय 20 अप्रैल से लेकर 30 अप्रैल सही समय हैं.
बिहार में गेहूं की कटाई शुरू हो गई है. इस दौरान फसलों में आग लगने से बचाव को लेकर कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवायजरी जारी की है. वहीं आपदा प्रबंधन विभाग फसलों में आग लगने पर क्षतिपूर्ति देगी. इससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी.
बिहार के किसान गन्ना बोने के लिए भूमि की तैयारी करें. गन्ने की स्वस्थ पैदावार के लिए, भूमि की तैयारी के दौरान 15-20 टन एफवाईएम डालें. अरहर की फसल में फली छेदक कीटों के संक्रमण की निगरानी करें, जो फूल या फलियां बनने की अवस्था में हो. यदि संक्रमण दिखाई दे, तो कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड @ 1.5 मिली/लीटर पानी का छिड़काव करें.
आम का सीजन आ रहा है. इस बीच अधिकतम और न्यूनतम तापमान में अधिक का अंतर देखा जा रहा है. साथ ही मौसम में नमी भी देखी जा रही है. ऐसे में आम से पेड़ों प्रमुख तौर पर मधुआ कीट (मैंगो हॉपर), दहिया कीट (मिलीबग) और एंथ्रेक्नोज जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है.
आईसीएआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संतोष कुमार कहते हैं कि अगर किसान पछेती किस्मों की बुवाई कर रहे हैं तो उन्हें उच्च तापमान रोधी किस्मो का चयन करना चाहिए. इन किस्मों में सही समय पर खाद और पानी दिया जाए तो ये फसलें बढ़िया उत्पादन देती हैं. इन किस्मों की खासियत है कि तीन सिंचाई में ही फसल तैयार हो जाती है.
सरकार इसके लिए 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी दे रही है. सौ मीट्रिक टन के गोदाम बनाने पर 14 लाख रुपये का खर्च होना है जबकि 200 मीट्रिक टन वाले गोदाम की लागत 20 लाख रुपये रखी गई है. 200 मीट्रिक टन के गोदाम बनाने पर सामान्य वर्ग को 8 लाख रुपये तो एससी-एसटी वर्ग के किसानों को 10 लाख रुपये तक सब्सिडी दी जा रही है.
बिहार में किसान सब्जी की खेती में काफी रुचि लेने लगे हैं. ऐसे में सरकार ने इन किसानों के लिए तना और फल छेदक, सफेद मक्खी, फल सड़न और उखड़ा जैसे रोगों की पहचान इनसे निपटने के तरीकों की जानकारी दी है, ताकि किसानों को नुकसान न हो.
क्या आप अपनी पसंदीदा जींस को फेंकने का साहस नहीं कर पा रहे हैं जो खराब हो गई है? तो आठवीं कक्षा के छात्र अभिनव पी.एस. के नक्शेकदम पर चलें, जिन्होंने अपनी पुरानी जींस को सब्जियां उगाने के लिए गमले में बदल दिया. अपने प्रयोग के अच्छे नतीजे मिलने से अब केरल के अभिनव को हर किसी से तारीफ मिल रही है. उत्तरी परवूर के करुमल्लूर गांव के मनक्कापडी में उसके घर पर कई मेहमान उसके प्रयोग को लेकर काफी उत्सुक रहते हैं.
इन कीटों और रोग से बचाने के लिए किसानों को आम के मंजर में तीन छिड़काव करने की सलाह दी जाती है. किसानों से कहा जाता है कि तीनों छिड़काव सही समय पर होने चाहिए, इससे मंजर को नुकसान नहीं होता है और आम की अच्छी पैदावार हासिल होती है. आम के पेड़ में पहला छिड़काव पेड़ों में मंजर आने से पहले किया जाता है.
आपको ताज्जुब होगा सुनकर कि जिस वक्त धान की रोपाई होती है, ठीक उसी वक्त बिहार में एक किसान धान की कटनी कर रहे हैं. जी हां, ये खबर जमुई से है जहां के किसान गुरुदेव मंडल गरमा धान की कटनी कर रहे हैं. वह भी ऐसे वक्त में जब लोग धान की रोपाई करने के बारे में सोच रहे हैं.
Rose Farming: गुलाब का पौधा छोटी सी बालकनी और आंगन से लेकर बड़े-बड़े बागानों की खूबसूरती बढ़ता है. साथ ही इसकी खेती (Gulab Ki Kheti) से भी किसान बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं. सिर्फ किसान ही नहीं नर्सरी का बिजनेस (Nursery Business) कर रहे लोगों को भी गुलाब का पौधा अच्छी कमाई करवा रहा है. प
Bihar Flower Farming: बिहार की राजधानी पटना में धीरज कुमार सिंह करीब दस एकड़ में रजनीगंधा फूल की खेती (Rajnigandha Ki Kheti) करते है. और महीने का पच्चीस हजार से अधिक की कमाई करते है. किसान तक से बातचीत मे उन्होंने कहा कि रजनीगंधा की खेती से किसान अच्छी कमाई कर सकते है.
एक्सपर्ट के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन किसानों के लिए अनुकूल नहीं है, लेकिन किसानों को मौसम के अनुकूल बनना होगा. किसानों को देखना होगा कि बिगड़े हालात में भी कौन सी फसल अच्छी उपज देगी, उसी फसल की खेती करनी चाहिए. जैसे सब्जी की खेती हो या मक्के की खेती, इसमें फायदा मिल सकता है.
मोती की खेती से किसान कम खर्च में अधिक कमाई कर सकता है. इसकी खेती करने वाले किसान लाखों की कमाई कर रहे हैं. साधारण मोती से लेकर डिजाइनर मोती की मांग को देखते हुए, किसान इसकी खेती बड़े पैमाने पर कर रहे हैं.
ताइवानी तरबूज व खरबूजे की खेती किसानों के लिए काफी फायदे का सौदा बन रही है. बिहार के कई किसान जनवरी के महीने में क्रॉप कवर विधि से इसकी खेती कर रहे हैं. जिसमें दोगुने से अधिक का लाभ मिल रहा है.
आज बदलते समय के साथ लोग मुर्गी पालन की जगह बटेर पालन का व्यवसाय कर रहे हैं.बटेर पालन मुर्गी पालन से मिलता जुलता व्यवसाय है.वहीं इसके पालन में खर्च कम और मुनाफा ज्यादा है.यह अपने स्वादिष्ट मांस और पौष्टिकता के लिए जानी जाती है.और मांसाहारी लोगों की पहली पसंद है.वहीं अब कैमूर जिले के कुछ युवक पोल्ट्री फार्म से नाता तोड़ बटेर पालन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं.
अगर आप लेयर पोल्ट्री फार्म (Layer Poultry Farming) शुरू करने की सोच रहे हैं तो पहले ये वीडियो देख लीजिए. इस वीडियो में आपको इससे जुड़ी सारी जानकारियां मिल जाएंगी. बता दें कि बिहार (Bihar) के सूरजपुर गांव (Surajpur Village) के रहने वाले उदय प्रताप सिंह (Udai Pratap Singh) ने राइस मिल का बिजनेस (Rice Mill Business) बंद होने के बाद लेयर पोल्ट्री फार्म शुरू किया था. मजबूरी में शुरू हुए इस पोल्ट्री फार्म से अब उनको अच्छी कमाई हो ही है. किसान तक से बातचीत में उन्होंने लेयर पॉल्ट्री फार्मिंग को लेकर कई टिप्स बताएं हैं. देखें ये रिपोर्ट
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