उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार), लखनऊ के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार), लखनऊ के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह ने बताया कि 8 से 10 अप्रैल 2026 तक आयोजित कांग्रेस में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के सुधार के लिए कई रणनीतिक निर्णय लिए गए हैं, जो प्रदेश की कृषि को आधुनिक और लाभप्रद बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे. इस विज्ञान कांग्रेस में लगभग 700 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 350 वैज्ञानिक और 350 छात्र शामिल थे, जो उपकार की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है.
महानिदेशक डॉ. संजय सिंह ने जानकारी दी कि भविष्य की कार्ययोजना के तहत जलवायु परिवर्तन, रोग नियंत्रण और उत्पादकता बढ़ाने के लिए एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और ड्रोन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जाएगा. कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए काला नमक चावल की नई किस्मों और मक्के की हाइब्रिड प्रजातियों के विकास जैसी उपलब्धियों को और आगे बढ़ाया जाएगा.
इसके साथ ही बागवानी के क्षेत्र में शर्बती अमरूद की नई किस्मों के माध्यम से किसानों की आय में हो रही लाखों की वृद्धि को देखते हुए अन्य फसलों पर भी शोध जारी है. गन्ने के साथ सह-फसली खेती और धान की सीधी बुवाई के लिए मशीनीकरण को बढ़ावा देना विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है.
डॉ. सिंह ने बताया कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए उन्हें सीधे बड़े बाजारों से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है. कृषि समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु मंडलीय स्तर पर प्रयोगशालाओं और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा. इसके अतिरिक्त, वैज्ञानिकों की दक्षता बढ़ाने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों और केवीके (KVK) के विशेषज्ञों को अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए भेजा जा रहा है.उन्होंने बताया कि इक्रिसैट (ICRISAT), हैदराबाद के सहयोग से स्टार्टअप और मूल्यवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और उत्तर प्रदेश में मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए इक्रिसैट का एक क्षेत्रीय केंद्र खोलने का प्रस्ताव भी प्रक्रियाधीन है.
उपकार के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह के मुताबिक, पशुपालन क्षेत्र में एआई के माध्यम से पशुओं के स्वास्थ्य, आहार प्रबंधन और दूध उत्पादन बढ़ाने पर अनुसंधान किया जा रहा है. प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ ही इसकी प्रमाणीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया है.
उन्होंने बताया कि किसानों की वर्तमान आर्थिक स्थिति के सटीक आकलन के लिए एक विस्तृत आर्थिक सर्वेक्षण कराया जा रहा है. वहीं, आईएआरआई (IARI), दिल्ली के मॉडल पर आधारित विविधीकरण और संरक्षित खेती की एक बड़ी परियोजना पर कार्य शुरू हो चुका है, जिससे प्रदेश के कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है.
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